रसायन

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

रसायन संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. तक्र । मठा ।

२. कटि । कमर ।

३. विष । जहर ।

४. वैद्यक के अनुसार वह औषध जो जरा और व्याधि का नाश करनेवाली हो । वह दवा जिसके खाने से आदमी बुड़ढ़ा या बीमार न हो । विशेष— ऐसी औषधों से शरीर का बल, आँखों की ज्योति और वीर्य आदि बढ़ता है । इनके खाने का विधान युवावस्था के आरंभ और अंत में है । कुछ प्रसिद्ध सरायनों के नाम इस प्रकार है ।— विड़ग रसायन, ब्राह्मी रसायन, हरीतकी रसायन, नागवला रसायन, आमलक रसायन आदि । प्रत्येक रसायन में काई एक मुख्य ओषधि होता है; और उसके साथ दूसरी अनेक ओषधियाँ मिली हुई होती हैं ।

५. गरुड़ ।

६. बायबिड़िग ।

७. विड़ंग पदार्थों के तत्वों का ज्ञान । विशेष दे॰ 'रसायन शास्त्र' ।

८. वह कल्पित योग जिसके द्बारा ताँवे से सोना बनना माना जाता है ।

९. धातु विद्या, जिसमें धातुओं के भस्म करने या एक धातु की दूसरी धातु में बदल देने आदि की क्रीया का वर्णन रहता है ।

रसायन शास्त्र संज्ञा पुं॰ [सं॰] वह शास्त्र जिसमें इस बात का विवेचन हो कि पादर्थों में कौन कौन से तत्व होते है और उन तत्वों के परमाणुओं में परिवर्तन होने पर पदार्थौं में किस प्रकार का परिवर्तन होता है । विशेष— इस शास्त्र का मुख्य सिद्धांत यह है कि संसार के सव पदार्थ कुछ भूल द्रव्यों के परमाणुओं से बने हैं । वैज्ञानिकों ने ९४ मूल द्रव्य या मूलभूत माने है, जिनमें से धातुएँ (जैसे,— सोना, चाँदी, ताँबा, लोहा, सीसा, राँगा, पारा आदि) है; कुछ दूसरे खनिज (जैसे—गंधक संखिया, सुरमा आदि) है और कुछ वायव्य द्रव्य (जैसे— आक्सिजन, हाडड्रीजन, नाइट्रोजन आदि) है । इस शास्त्र के अनुसार यही ९४ मूल द्रव्य सब पदार्थो के मूल उपादान है, जिनके परमाणुओं के योग से संसार के सब पदार्थ बने हैँ । प्रत्येक मूल द्रव्य मे एक ही प्रकार के परमाणु होते है; और जब किसी एक प्रकार के परमाणुओं के साथ किसी दुसरे प्रकार के परमाणु मिल जाते है, तब उनसे एक नया और तीसरा ही द्रव्य तैयार हो जाता है । जो शास्त्र हमें यह बतलाता है कि कौन चीज किन तत्वों से बनी है और उन तत्वों में परिवर्तन होने का क्या परिणाम होता है, वही रसायन शास्त्र कहलाता है ।