राजनीति

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हिन्दी

संज्ञा

स्त्री.

अनुवाद

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

राजनीति संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] वह नीति जिसका अवलंबन कर राजा अपने राज्य की रक्षा और शासन दृढ़ करता है । विशोष— इसके प्रधान दो भेद हैं— एक तंत्र और दूसरा आवाय । वह नीति जिसके द्वार अपने राज्य में सुप्रबंध और शांति स्थापित की जाय, तंत्र नीति कहलाती है; और जिसके द्वारा । परराष्टों से संबंध दृढ़ किया जाय, वह आवाय कहलाती है । स्वराज्य में प्रजा का समाचार और उनको गति का पता देने के लिये राजा को चर से काम लेना पड़ता है; और परराष्ट्रों में स्वराष्ट्रों के स्वत्व, वाणिज्य व्यापारादि की रक्षा तथा उनकी गतियों का पता देने के लिये दूत रहते हैं । इन दूतों और चरों से राजा स्वराष्ट्र और पर- राष्ट्र की गति, चेष्टा आदि का पता लगाकर अपनी शत्कि और स्वत्व की समुचित रक्षा करता है । प्राचीन ग्रंथों में आवाय के छह मुख्य भेद किए गए हैं; जिनको पड़्गुण भी कहते हैं । उनके नाम ये हैं— संधि, विग्रह, यान आसन, द्वैधीकरण और संश्रय । ये षड़्नीति के नाम से भी प्रसिद्ध हैं । राजनीति के चार और अंग कहे गए हैं— साम, दान, दंड और भेद ।

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