रूम

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

रूम ^१ संज्ञा पुं॰ [फ़ा॰] टर्को या तुर्की देश का एक नाम । उ॰— चारि दिसा महिं दंड रचो है रूम साम बिच दिल्ली । ता ऊपर कुछ अजब तमाशा मारे है यम किल्ली ।—कबीर (शब्द॰) । विशेष—ईसा के जन्म से पहले पाँचवीं शताब्दी से रोमक जातियों की शक्ति बढ़ने लगी थी और यूनान का पतन होने पर वह एक प्रभावशाली जाति हो गई थी । इस जाति की राजधानी रोम नगर थी । यह जाति इतनी शक्तिशाली हो गई थी कि स्पेन से लेकर अरब, मिस्त्र आदि तक के देशों पर इसका अधिकार हो गया था । तीसरी शताब्दी के अंत में यह बृहत् साम्राज्य शासकों में विभक्त होने लगा और सन् ३३० में कैसर कानिस्तंताइन ने कुस्तुंतुनिया नगर में अपनी राजधानी बनाई । ३९५ में रोम राज्य, पूर्वीय और पश्चिमीय राज्य, जिसकी राजधानी रोम थी, धीरे धीरे निर्बल होता गया और उसे गाथ, फ्रेंच आदि जातियों ने ध्वंस कर दिया; और पूर्वोय राज्य ही सन् ४७६ से रोम राज्य कहलाने लगा । यूरोप के दक्षिणपूर्व का भाग, एशिया का पश्चिमी भाग तथा उत्तरी अफ्रीका और अनेक टापू इस साम्राज्य के अंतर्भूत थे । तब से तुर्को को, जिसका प्रधान नगर कुस्तुंतुनिया है, रूम कहने लगे, और अब तक उसे रूम ही कहते हैं ।

रूम पु ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ रोम] दे॰ 'रोम' । उ॰—रूम रूम में ठाकुर रम रहए कोइ बरले जन चिना ।—रामानंद॰, पृ॰ १६ ।