रूमाल

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

रूमाल संज्ञा पुं॰ [फ़ा॰]

१. कपड़े का वह चौकोर टुकड़ा जो हाथ, मुँह पोछने के काम में आता है । उ॰—पोंछि रूमालन सों श्रम सीकर भौंर की भीर निवारत ही रहे ।—हरिश्चंद्र (शब्द॰) । मुहा॰—रूमाल पर रूमाल भिगोना = बहुत रोना । आँसुओं की धारा बहाना ।

२. चौकोना शाल या चिकन का टुकड़ा जिसके चारों ओर बेल और बीच में काम बना रहता है और जो तिकोना दोहर कर ओढ़ने के काम में लाया जाता है । मुसलमानी समय में इसे कमर में भी बाँधते थे ।

३. पायजामे की काट में वह चौकोर कपड़ा जो दोनों मोहरियों की संधि में लगाया जाता है । मियानी ।

४. ठगों का रूमाल जिसके एक कोने में चाँदी का एक टुकड़ा बँधा रहता है । विशेष—ठग आदि इसे आदमियों के गले में लपेटकर चाँदी के टुकड़े को उसके गले पर घाँटी के पास अँगूठे से इस प्रकार दबाते थे कि वह मर जाता था । क्रि॰ प्र॰—लगाना ।