लेटना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

लेटना क्रि॰ अ॰ [सं॰ लुण्ठन, हिं॰ लोटना]

१. हाथ पैर और सारा शरीर जमीन या और किसी सतह पर टिकाकर पड़ रहना । पीठ जमीन या बिस्तरे आदि से लगाकर बदन की सारी लंबाई उसपर ठहराना । खड़ा या बैठा न रहना । पौढ़ना । जैसे,—जाकर चारपाई पर लेट रहो । संयो॰ क्रि॰—जाना ।—रहना ।

२. किसी चीज का बगल की ओर झुककर जमीन पर गिर जाना । मुहा॰—खेती लेट जाना = (१) फसल का अधिक पानी या हवा के कारण सीधा खड़ा न रहना, झुककर जमीन पर पड़ जाना । (२) नत होना । विनीत हो जाना । प्रभुत्व मान लेना । गुड़ लेट जाना = ताव बिगड़ने के कारण गुड़ का गीला और चिप- चिपा हो जाना ।

३. मर जाना ।