लोक

विक्षनरी से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

लोक सृष्टि सिरजति यह माया । तुम तें दूरि मलमई काया । नंद॰ ग्रं॰, पृ॰ ३१५ ।