वंगेश्वर

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

वंगेश्वर संज्ञा पुं॰ [सं॰ वङ्गेश्वर] एक प्रसिद्ध रस । विशेष—पारे का भस्म ८ तोला, वंग का भस्म ८ तोला, ताँबे का भस्म ३२ तोला और गंधक ३२ तोला लेकर मदार के दूध में मलकर फिर पिंडी बनाकर 'भूधर यंत्र' द्वारा फूँकते हैं । जब भस्म हो जाता है, तब उसे वंगेश्वर कहते हैं । इसकी मात्रा २ रत्ती है । इसे गुल्मोदर रोग में घी के साथ देते हैं; और ऊपर से पुनर्नवा का रस और गोमूत्र या हल्दी का रस पिलाते हैं ।