वर्णन

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

वर्णन संज्ञा पुं॰ [सं॰] [वि॰ वर्णनीय, वर्ण्य, वर्णित]

१. चित्रण । रँगना ।

२. किसी बात को सविस्तार कहना । कथन । बयान । उ॰—सो चौबीस रूप निज कहियत वर्णन करत विचार ।— सूर (शब्द॰) ।

३. स्तवन । प्रशंसा । गुणकथन । तारीफ ।

४. लिखना । लेखन (को॰) । क्रि॰ प्र॰—करना ।—होना ।

वर्णन संबंधी । उ॰—ऐसी अलंकृत भाषा में जो भिन्न भिन्न भागों में भिन्न भिन्न रीतियों से चमत्कृत हो—वर्णनात्मक रीति से नहीं वरन् कार्यात्मक रीति से । —पा॰ सा॰ सि॰ पृ॰ ३ ।