वायु

विक्षनरी से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हवा

अनुवाद[सम्पादन]

हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

वायु संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] हवा । वात । विशेष—वैशेषिक दर्शन वायु को द्रव्यों में मानता है और उसे रूपरहित, स्पर्शवान् तथा नित्य कहता है । न्याय दर्शन में वायु पंचभूतों में है और इसका गुण स्पर्श कहा गया है । वायु से ही स्पर्शेंद्रिय की उत्पत्ति मानी गई है । वैशेषिक दर्शन स्पर्श के अतिरिक्त संख्या, परिमाण, पृथक्त्व, संयोग, विभाग, परत्व, अपरत्व और वेग भी वायु के गुण मानता है । सांख्य में वायु की उत्पत्ति स्पर्श तन्मात्रा से मानी गई है । उपनिषदों के अनुसार वेदांती भी वायु की उत्पत्ति आकाश मे मानते हैं ।

२. वायु देवता । पवन देवता (को॰) ।

३. प्राणवायु । जीवनवायु भो पाँच प्रकार कहा का है—प्राण, अपान, समान, व्यान, उदान ।

४. साँस । श्वास (को॰) ।

५. 'य' अक्षर (को॰) ।

६. एक वसु (को॰) ।

८. एक दैत्य का नाम, (को॰) ।

९. गंधर्वों के एक राजा का नाम (को॰) ।