सामग्री पर जाएँ

विक्षनरी:भारतीय भाषा कोश ०४

विक्षनरी से

<--भारतीय भाषा कोश

क्रमांकहिन्दीव्याकरणव्याकरण१व्याकरण२व्याकरण३व्याकरण४हिन्दी-अर्थहिन्दी-अर्थ२हिन्दी-अर्थ३हिन्दी-अर्थ४हिन्दी-अर्थ५पंजाबीपंजाबी१पंजाबी२पंजाबी३पंजाबी४उर्दूउर्दू१उर्दू२उर्दू३उर्दू४कश्मीरीकश्मीरी१कश्मीरी२कश्मीरी३कश्मीरी४सिन्धीसिन्धी१सिन्धी२सिन्धी३सिन्धी४मराठीमराठी१मराठी२मराठी३मराठी४गुजरातीगुजराती१गुजराती२गुजराती३गुजराती४बांग्लाबांग्ला१बांग्ला२बांग्ला३बांग्ला४असमियाअसमिया१असमिया२असमिया३असमिया४उड़ियाउड़िया१उड़िया२उड़िया३उड़िया४तेलुगुतेलुगु१तेलुगु२तेलुगु३तेलुगु४तमिलतमिल१तमिल२तमिल३तमिल४मलयालममलयालम१मलयालम२मलयालम३मलयालम४कन्नडकन्नड१कन्नड२कन्नड३कन्नड४
901गोतापुंलिंग----शरीर को जल में इस प्रकार डुबाना जिससे शरीर का कोई अंग बाहर न रह जाए, डुबकी।----गोता----ग़ोता----गॊतु॑----ग़ोतो----बुडी----डुबकी----डुब----बुर, बुरण, डुब----डुबिबा, शिरोमज्जन----मुनक----मुऴुक्कु----मुड्.डिक्कुळि----गोत, डुबकि----
902गोदस्त्रीलिंग----बैठे हुए व्यक्ति का सामाने कमर और घुटनों के बीच का भाग जिसमें बच्चों आदि को लिया जाता है, अंक।----गोद----गोद----कॅछ----गोदि, हंज----मांडी----खोळो----क्रोड़, कोल, अड्.क----कोला, अंक----कोळ----ओडि, अंकमु----मडि----मटि----तॊडॆ, मडिलु----
903गोदामपुंलिंग----वह बड़ा स्थान जहां तिजारती माल जमा करके रखा जाता है।----गुदाम----गोदाम----गुदाम----गुदामु----कोठार वखार, गोदाम----गोदाम, गोडाउन, वखार----गुदाम----गुदाम, भँराल----गोदाम----गोडउनु----किडंगु----गुदां----भंडार, उग्राण----
904गोधूलिस्त्रीलिंग----सायंकाल का वह समय जब जंगल से चरकर लौटती हुई गौओं के खुरों से धूल उड़ती है और शुभ कार्यों के लिए अच्छा मुहूर्त्त माना जाता है।----संझ, वग्गबेल----सरे-मग्रिब----संद्यावख----सांझी, संझा----गोरजवेळ----गोधूलि----गोधूलि----गोधूलि, गधूलि----गोधुळि----संजवेळ गोधूळि----माडुगऴ मेयन्दु विट्टु तुशियै किळप्पिक्कॊण्डु वीडु तिरुंबुम् (मालं) नेरम्----गोधूळिवेळ, सायं संध्यावेळ----गोधूलि----
905गोपनीयविशेषण----छिपाने लायक, जिसे दूसरों पर प्रकट नहीं करना चाहिए।----गुपत, गोपनी----ख़ुफीया (बसीग़ए राज़)----राज़, सिर----गुझो, गुप्त, मुख्फी----गोपनीय----गोपनीय----गोपनीय----गोपनीय----गोपनीय----गोप्यमु, दाचवलसिन----रगसियमान----गोप्यं----गुट्टाद, गोप्यवाद----
906गोबरपुंलिंग----गाय का मल जो लीपने और पोतने के काम आता है तथा जिसे सुखा कर जलाने के काम में लाते है, भैंस का मल।----गोहा----गोबर----गुह----छेणो----शेण----गोबर----गोबर----गोबर----गोबर----पेड----शाणम्----चाणकं----सगणि----
907गोराविशेषण----श्वेत वर्ण वाला (व्यक्ति), गौर।----गोरा----गोरा----प्रॊन----गोरो, अछो, सुहिणो----गोरा----गोरुं, गौर----गौर, फरसा----गौर वर्णर, गोरा----गोरा----तेल्लवाडु----सिवप्पु निर॒मान----वॆळुत्त (आळ्) वॆळ्ळक्कारन्----बिळिय----
908गोलविशेषणपुंलिंग---मण्डलाकार या वृताकार।फुटबाल आदि खेलों का गोल।---गोलगोल---गोल, मुदव्वर----गोलगोल---गोलुगोलु (रांदि में)---गोलफुटबाल वगैरे खेळतला गोल---गोल----गोल----गोल, घूरणीयाबल (खेलर)---गोल----गुंण्ड्रनिगोलु---वट्टवडिवमानकाल्पन्दु विळैयाट्टिळ् 'गोल्'---उरुण्टगोळ्---गुंडगिरुव, वृत्ताकारगोलु---
909गोलीस्त्रीलिंग----शीशा, लोहा या अन्य किसी पदार्थ का छोटा गोलाकार पिंड।----गोली----गोली----गूल्य----गोली----गोळी----गोली----गुलि----गुली, बाटलु, गटि----गोली----गुण्डु, गोळी----गोलि, तुप्पाक्कि रवै----उण्ट----गोलि----
910गोष्ठीस्त्रीलिंग----कुछ व्यक्तियों का इकट्ठे होकर किसी विषय पर चर्चा करना।----गोशटी----मुज़ाकरा----सेमिनार----गडि॒जाणी, मेडु, सेमीनारु----सभा, बैठक----गोष्ठि----गोष्ठी----गोष्ठी, संघ----गोष्ठी----गोष्ठि, सभ----करुत्तरंगु----चर्च्चायोगं----सभॆ----
911गौनापुंलिंग----विवाह के बाद की एक रस्म जिसमें वर वधू को पहले-पहल अपने साथ अपने घर ले जाता है।----मुकलावा----रुख़सती----सतुरा॑थ----शादी खां पोइ जी हिक रसम जंहिं में घोटु पहिर्यो दफ़ो कुंआरि खे पाण सां गडु पंहिजे धरि वठी ईंदो अहि----द्विरागमन----कन्याने वळाववी ते----द्विरागमन----बिचार पिचत पोन प्रथम बार बरर सैते कइनार पतिगृहा ग़मन अनुष्ठान----पुआणि (पुआणि)----मनुगडुपु शोभनमु----मणमगलै मणमगन् मुद्ल् मुदलाग तन् वीट्टुक्कु अऴैत्तुवरुम् मंगळ शडंगु----कुटिवटपुं----शोभन, प्रस्त----
912गौरवपुंलिंगपुंलिंग---आदर, प्रतिष्ठा, मान-मर्यादा;बड़प्पन, महत्व।---वडिआई, गौरव----ताज़ीमअज्मत---यॆज़थ, बजर----गौरवु, अभिनानुमहतु---गौरव, आदरमोठेपण, महत्त्व---गौरवबडाई, महत्व---गौरव, आदर----मान-मर्यादा, प्रतिष्ठागौरव, महत्त्व---गौरब----गौरवमुप्रामुरव्यमु---गौरवम्पॆरुन्तन्मै---मान्यत्वंवलिप्पं, महत्वं---आदर, मर्यादॆदॊड्डतन, महत्व---
913ग्रंथपुंलिंगपुंलिंग---किताब, पुस्तक;धार्मिक या साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कोई बड़ी पुस्तक।---ग्रंथग्रंथ---किताबकिताब (सहीफ़ा)---बड़॑ किताब, ग्रंथग्रंथ---ग्रंथु, किताबुग्रंथु---ग्रंथ, पुस्तकग्रंथ---ग्रंथग्रन्थ---ग्रंथ, बइपुस्तक---कितापग्रंथ, धर्मपुथि---ग्रंथ----ग्रन्थमुग्रंथमु---नूल्नूल् (पुत्तगम्)---ग्रंथंप्रमाण ग्रंथम---पुस्तकग्रंथ---
914ग्रस्तविशेषणविशेषण---ग्रसा हुआ, पकड़ा हुआ;पीड़ित।---ग्रस्सिआ, पीड़त----मुब्तला (गिरिफ़्तार)----हॆनु॑ आमुत----ग्रहणु लग॒लु, जकिड़यलुसतायलु---ग्रसतपीडित---ग्रस्तपीडित---ग्रस्त, ग्रासग्रस्त, ग्रास---ग्रस्त, ग्रास करापीड़ित---ग्रास-ग्रस्तपीडित---ग्रस्तमयिनपीडिंपबडिन---वलुवागप्पिडिक्कप्पट्टतुन्बत्तिल् शिक्किय---ग्रसिच्चपीडितमाय---ग्रस्तपीडित---
915ग्रहपुंलिंगपुंलिंग---आकाशस्थ पिंड जो सौर जगत का अंग हो और सूर्य की परिक्रमा करता हो;पकड़ने या वश में करने की क्रिया या भाव।---ग्रहि----सय्यारागिरिफ़्त---ग्रह, ग्रुहुद----ग्रहुपकड़---ग्रहपकड़---ग्रह----ग्रहग्रहण, धरा---ग्रहग्रहण---ग्रह----ग्रहमुग्रहिंचुट---गिरहम्पिडित्तुक्कोळ्ळल्---ग्रहंपिटिक्कल्---ग्रहहिडित---
916ग्रामपुंलिंग----छोटी बस्ती, गांव।----पिंड----गांव----गाम----गो॒ठु----ग्राम, गाव----ग्राम----ग्राम, पाड़ागाँ----गाँओ----ग्राम----पल्लेटूरु, ग्राममु----गिरामम्, पट्टित्तोट्टि----ग्रामं----हळ्ळि----
917ग्रामीणविशेषणविशेषण---ग्राम-संबंधी;गांव का।---पेंडूपेंडू---दीहीदीहाती---गामुकगामुक---गो॒ठ सां वास्तेदारु, गो॒ठाणोगो॒ठाणो---खेडुत, ग्रामीणगावाचा----गामडियो---ग्रामीण----ग्रामीण, गँवारगँलीया---ग्रामीण----पल्लेटूरि, वाडुपल्लेटूरि---गिरामत्तान्नाट्टुप्पुरत्तिय---ग्रामीणन्मन्तिलॆ---हळ्ळियवहळ्ळियवुदु---
918ग्वालापुंलिंग----अहीर, गोप।----गुआला----गवाला----गूर----गुवालो, खीर वारो----गवळी----गोवाल----गायला, गोप----गुवाल, गरवीया----गउड़----गोल्लवाडु----माट्टिडैयन्----गोपालन्, इटयन्----गोंव, गोवळिग----
919घंटापुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--दिन-रात का चौबीसवां भाग जो 60 मिनट का होता है;पूजा में या समय की सूचना देने वाला घड़ियाल;कोई काम करने की निश्चित अवधि (पीरियड)।--घंटाघंटाघंटा--घंटा----गंटु॑गंटाकांह मखसूस वक्त--कलाकुघिंडुपीरडु--तासघंटातास--कलाक----घण्टा----घण्टा (समचर परिमाण घटा)घण्डा (बाद्य)घण्टा, निर्धारित समय--घंटाघंटीअबधि (पीरिअड़)--गंटगंटगंट--60 निमिडम् कॊण्ड ऒरुमणि नेरम्मणि (अडिक्कुम्)काल वरैयरै॒--मणिक्कूर॒पूजामणिपीरियड्--घंटघंटेघंटे, अवधि--
920घंटीस्त्रीलिंग----छोटा उपकरण जिससे ध्वनि उत्पन्न की जा सकती हो, जैसे साइकिल या मेज पर की घंटी।----घंटी----घंटी----गंटी----घिंडिणी, घंटी, घिंटी (स्त्री.)----घंटा, घंटडी---------घण्टी----घण्टि----घंटी----गंट----सिरि॒य मणि----मणि----चिक्क घंटे, बेल्----
921घटनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया--घटित होना;ऐसी बातें या काम आदि जो हो चुका हो;कम होना।--घटणाघटनाघटणा--बुकूअ़ (वाक़े होना)वाक़िआ, वुक़ूआ़घटना (कम होना)--हा॑रिसु॑-कम गछुन--घटित थियणु, थियणुथी गुज़िरणुघटिजणु--घडणेंघटनाकमी होणे--घटवुं, बनवुंओछु करवुं---घटना घटित हओयाघटनाकम हओया--घट, ट्टघटघटि ह, कम, कम ह--घटना, घटण----संघटनज़्रिगिनदितग्गुट--निगऴनिगऴच्चिकुरै॒य--संभविक्कुकसंभवंकुर॒युक--संभविसुवुदु, घटिसुवुदुघटनेंकम्भि आगुवुदु--
922घटानासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया--कम करना;शेष निकालना;गणित में किसी एक राशि में से कोई दूसरी राशि निकालना।--घटाउणा----घटानाबक़ाया निकालनामन्फ़ी करना--तफरीक करुन, गटावुन----घटाइणुबाकी कढणुघटाइणु, कट करणु--कमीकरणेवजा करणे, बाकी काढणेवजाबाकी--ओछुं करवुं----कम करावियोग करा---कमा, घाटि करशेष करबियोग कर, बाद दि--कमाइ देबाशेष निकालिबाफेड़िबा, वियोगकरिबा--तग्गिंचुटमिगिलिंचुटतीसिवेयुट--कुरै॒क्ककऴिक्ककऴिक्क--कुर॒क्कुककुर॒क्कुककुर॒क्कुक--कम्मि माडुवुदु कळॆकळॆयुवुदुवजामाडु, कळॆयुवुदु--
923घटियाविशेषण----जो गुण, कर्म आदि की दृष्टि से औरों की तुलना में हीन हो।----घटीआ----घटिया----व॑सिथ दरजि----घटि किस्म जो; हलके दर्जे जो----सामान्य, हलक्या दर्जाचा----हलकुं----निकृष्ट----सस्तीया, बेया----निम्नगुण बिशिष्ट----तक्कुब रकमयिन----मट्ट रगमान----कुरञ्ञ, ताळ्न्न तरं----तुच्छ, नीच----
924घड़ापुंलिंग----धातु, मिट्टी आदि का बना एक गोलाकार पात्र जो प्राय: पानी भरने के काम आता है, गागर, मटका।----घड़ा----घड़ा----नॊट, मठ----दिलो, घड़ो----मोठी घागर माठ----धडो----घड़ा, घट, कलसी----कलह----घड़ा----कुण्ड----पानै----कुटं----कॊड----
925घनघोरविशेषणविशेषण---बहुत अधिक, घना;भीषण, विकट।---संघणा, घनघोर----घनघोर----गंगोर----घाटोभयानकु, घन्घोर---अधिक, दाटघंनघोर---धनघोर----घोर, खूब बेशी, झमाझमभीषण विकट---डाठ, घनभीषण, भयानक, विकट---घमाघोट, भीषण, बिकट----दट्टमयिनघोरमु---अडर्न्दबयंकरमान---घोरमाय, अत्यधिकंभीषणमाय---दट्टवाद, अत्यधिकभीषणावाद, अकराळविकराळ---
926घनाविशेषणविशेषणविशेषण--जिसके अव्यव या अंश आसपास सटे हों;गहरा;बहुत अधिक, अतिशय।--संघणा, घणासंघणा, घणासंघणा, घणा--घनागहरानिहायत--गॊनग॑हरु॑---ग्रुत्यलुघाटोघणो, घणो वधीक--दाटगंभीरअतिशय, पुस्कळ--घन----घन----डाठ, घनगाढ़बहुत, अतिबेधि--घन, गहन----दट्टमयिनगाढमयिनमिक्किलि--नॆरुक्कमानअडर्त्तियान्आळमान, मिग अदिग--इटतिङ्ङियआऴमायवळरॆयरॆ--दट्टवादनिबिडवादअत्यधिक, अतिशय--
927घनिष्ठविशेषण----जिसके साथ बहुत अधिक मित्रता या संबंध हो।----गूढ़ा----गहरा----अज़ीज, टा॑ठ----घाटो, गहिरो, वेझो----घनिष्ठ----घनिष्ठ----घनिष्ठ, अन्तरंग----घनिष्ठ----घनिष्ठ----घनिष्ठमयिन----नॆरुंगिय----अटुत्त, उटट----गाढवाद----
928घबरानाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया--व्याकुल होना;हिचकना;सकपकाना (आश्चर्य आदि से)।--घाबरना, घबराउणाघाबरना, घबराउणा---घबराना----गाबरुनगाबरुन---घबि॒राइणु----घाबिरणे, व्याकुळ होणेगडबडणे---गभरावुं----घाबड़ानो, व्याकुल हओयाइतस्तत: कराथतमत खाओया--व्याकुल हइतस्तत: करआश्यचर्यान्वित ह--घाबरेइबा, व्याकुळ हेबापछेइबाअबाक हेबा--कलतचेंदुटअधैर्यपडुटबेदरुट--कलक्कमडैयतडुमारकलवरप्पड--परिभ्रमिक्कुकमटिक्कुकअंपरक्कुक--व्याकुल गॊळ्ळुवुदुहितॆगॆयुवुदु, बॅदरुवुदुकक्काबिक्कियावुदु--
929घमंडीविशेषण----जिसे घमंड हो, अभिमानी।----घमंडी----घमंडी----गमड़ी----घमंडी, हठीलो----घमेंड खोर----घमंडी----अहंकारी----अभिमानी, अहंकारी----गार्बी----पोगरुबोतु----वीडु, इल्लम्----गर्विष्ठन्, अहंकारि----अहंकारि----
930घरपुंलिंग----मकान, गृह।----घर----घर----गरु॑----घरु----घर----घर----घर, बाड़ी----घर----घर, गृह----इल्लु----इल्लु----बीडु, इल्लम्----गृहं, वीटु----
931घरेलूविशेषणविशेषण---घर-संबंधी;पालतू।---घरोगीघरेलू---घरेलूपालतू---गरेलू----घरू, घरेलूघरू, पालतू---घरगुतीपाळीव---धरसबंधेपाळेवुं---घरोयाघरपोषा---घरुवापोहनीया---घर संबंधीपाळित---इन्टिपेंपुडु---वीट्टुवळर्क्कप्पट्ट---वीट्टिलॆवळर्त्तुन्न---मनॆयपळगिद, साकिद---
932घसियारापुंलिंग----घास छील कर बेचने वाला।----घाही, घसिआरा----घस्यिरा----गा॑स----गाही----गवत कापून विकणारा----धसियो----धेसेड़ा----घाँह बेचोंता----धानिया----गड्डिनम्मुवाडु----पुलवॆट्टुबवन्----पुल्लुकारन्----हल्लुमारुवव----
933घसीटनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया--किसी वस्तु को इस प्रकार खींचना कि वह जमीन से रगड़ खाती हुई आए;जल्दी-जल्दी तथा अस्पष्ट लिखना;किसी को किसी काम में जबरदस्ती शामिल करना।--घसीटणा, घड़ीसणा----घसीटना----लिथविथ न्युन, खखु॑र दिन्य----गिहिलणुरहिड़णु, तकिड़ो ऐं अणचिटो लिखणु;गिहिलणु--फरफटणेंघईतजबरदस्तीने सम्मिलित करणें--घासरडवुं, ठसरडवुंघसेडवुंघसडवुं---अस्पस्ट लेख----खरखरकै लिखभितरवा करिल, दानि आन-------ईड्चुटगीकिवेयुटलागुट, ईड्चुट---किरु॒क्कक्लुक्कट्टायमडुत्ति शेतुक्कॊळ्ळ---कुत्तिवरक्कुकवलिच्चिटुक--दरदस ऎळॆयुवुदुगीचुवुदुऎळॆयुवुदु--
934घाटपुंलिंग----नदी, झील आदि के तट पर वह स्थान जहाँ लोग नहाते-धोते और नावों पर चढ़ते-उतरते हैं।----घाट----घाट----गाठ----घाटु----घाट----घाट----घाट, पाड़----घाट, पार घाट----घाट----रेवु----पडित्तुरै॒----कटवु----घट्ट----
935घाटापुंलिंग----नुकसान, हानि, क्षति।----घाटा----घाटा----गाटु॑----घाटो, नुकसानु----नुकसान तोटा----घट----लोकसान, क्षति----घाटि, हानि, लोकयान----हानि----नष्टमु----नष्टम्----नष्टं----हानि, नष्ट----
936घाटीस्त्रीलिंग----पर्वतीय प्रदेशों के बीच का मैदान या संकरा मार्ग।----घाटी----घाटी, वादी----पथु॑ल----घाटी, माथिरी----दरी, खिंड----खीण----घाटि, उपत्यका----उपसका, गिरिपथ----घाटी----कनुम, लोय----पळ्ळत्ताक्कु----ताळवर मलयिटुक्कु----कणिवॆ----
937घातकविशेषणविशेषण---मार देने वाला;हानिकार।---मारू, घातक----मुह़लिकमुज़िर (मुज़िर्र)---मारन वोलनॅकसान देह---घातू, खूनी हचारो;मौतमारु, घातक।---घातक घात करणारानुकसान कारक---घातक----घातक, हत्याकारीक्षतिकर---घातक, बध्ताहाऩिकर---घातक----घातकमु, चंपिवेयुनदिहानिकारकमु---कॊलैयाळिकॆडुदल शॆय्गिर---मारकमायहानिकरं---कॊलॆगारहानिकर---
938घायलविशेषण----जख्मी, आहत।----फट्टड़, घाइल----घायल, ज़ख़्मी----जख्मी----घायलु----जख्मी घायाळ----घायल----आहत, घायेल----घाइल, आहत----घाइला----गायपडिन----कायमडैन्द----मुरि॒वेट॒ट॒----ग़ायगॊण्ड----
939घासस्त्रीलिंग----छोटी हरी वनस्पति जिसे चौपाए खाते हैं (ग्रास)।----घाह----घास----गासु॑----गाहु----गवत----घास----घास, तृण----घाँह----घास----गड्डि----पुल्----पुल्लु----हुल्लु----
940घिसनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया--किसी वस्तु को किसी वस्तु पर इस प्रकार रगड़ना कि वह छीजने लगे;किसी बरतन आदि पर जमी हुई मैल छुड़ाने के लिए उस पर कोई चीज़ रगड़ना, मांजना।रगड़ से कटना या छीजना।--रगड़नारगड़नारगड़ना--घिसना----गु॑हुनमांजुनगसु॑युन--गहणु, गसाइणु-गसणु--रगडणेंघासणेंकापणे, झिजणे--घसवुंमांजवुं---घषामाजा---छॅह, माजमाज, छॅह---घषिबा----अरगद्रीयुटतोमुटअरूगुट--तेय्क्कविळक्कतेय--उरयुकतेरकुक, मोरूकतेयुक--तिक्कुवुदुउज्जुवुदुसवॆयुवुदु--
941घुंघरालाविशेषण----जिसमें छल्ले की तरह कई बल पड़े हों (कर्ली)।----घुंघराला, छल्लेदार----घुंघरियाला (घुंघराला)----काँक॑नि दार----घुंडीदारु----कुरळे----वांकडियां----कोंकड़ानो----केंकोरा-केंकुरि----कुंचकुंचिआ (बाळ)----उंगरमुलुतिरिगिन----सुरुट्टैयान----चुरुण्ड----सुरुळाद, गुंगरु----
942घुंघरूपुंलिंग----चांदी, पीतल आदि का गोल पोला दाना जिसके अंदर कंकड़ी रहती है और जिसके हिलने से ध्वनि होती है। प्राय: नृत्य के समय इन्हें पैरों में पहना जाता है।----घुंघरू----घुंघरू----पांज़ेबु----घिंघिरू, घुंघरू----घुंगुरू, पैजण----घूघरो----घुँडु.र, नुपुर----जुनुका, घुगुरा----घुंगुर----गज्जेलु----सलंगै----कॊलुसु----गॆज्जॆ----
943घुटनस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---दम घुटने की सी अवस्था या भाव;ऐसी अवस्था जिसमें कर्त्तव्य न सूझने पर मन में बहुत घबराहट होती है।---घुटणघुटण---घुटन----दम----घुट, बूसाट----श्वास गुदमरणेमन गुदमरणे---घूंट, (जीवनुं)गभरामण---दमबन्ध होओयार अंवस्था----श्वास रोधहताशा---निश्वास रोधश्वास रोध---ऊपिरि आडकपोवुटवुक्किरि बिक्किरि---मूच्चुत्तिणरल्मनम् कुऴंबुदल---श्वासं मुट्टल्विषमं---उसिरू कट्टुवुदुपेचाट:---
944घुसनाअकारात्मक क्रिया----बलपूर्वक धंसना, प्रवेश करना या आगे बढ़ना।----वड़णा----घुसना----अच्रुन----घिड़णु, घुसणु----शिरणें, घुसणे----घसवुं----ढोका, प्रवेश करा----जोर करि सोमा----पशिबा----दूरूट----नुऴैय----तळ्ळिक्केरुक----नुग्गुवुदु----
945घुसपैठस्त्रीलिंग----प्रयत्न करके या बलपूर्वक कहीं पहुँचकर अपने लिए स्थान बनाने की क्रिया या भाव (इन्फिल्ट्रेशन)----घुसपैठ----दरंदाज़ी----दरंदाज़ी----रे मोकल दाखिला, घुसपैठ----शिरकाव----घूसण----क्रमे क्रमे ओ अलक्षिते बलपूर्वक अनुप्रवेश----अनुप्रबेश----बळपूर्वक पशिबा----चोर बडुट----बलात्कारत्तुडन् उऴळै नुळैन्दुविडंळ्----कयट॒ट॒म् नुऴञ्ञु----क्रमेण आक्रमिसुवुदु----
946घूंघटपुंलिंग----स्त्रियों की चुंदरी, धोती, साड़ी आदि का वह भाग जिसे वे सिर से कुछ नीचे कर अपना अपना मुंह ढंकती हैं।----घुंड----घूंघट----चोंड, नॊर----घूंघटु (कपिड़े जो पलउ जंहिं सां मुंहुं ढकिजे)।----बुरखा, घुंगट----घुंघट----घोमटा----ओरणि----ओढ़णा----मुसुगु----मुट्टाक्कु----मूटुपटं----बुरूकि, मुसुकु----
947घूंटपुंलिंग----तरल पदार्थ की उतनी मात्रा जितनी एक बार मुंह में भर कर गले के नीचे उतारी जाती है।----घुट----घूंट----गॊल----ढुकु----घोट----घूंट, घूंटडो----ढोंक----ढोक, ढोका----ढ़ोक----गुक्क----ऒरु वायिळ् कुडिक्कक्कूडिय दिरव पदार्थम्----कविल्, इर॒क्कु----गुटुकु----
948घूंसापुंलिंग----बंधी हुई मुट्ठी का वह रूप जिसमें किसी पर प्रहार किया जाता है, मुक्का।----मुक्का----घूंसा----मुकु॑----घूसो, ठौंशो, मुक----ठोसा----घुस्सो, मुक्को, ढिकको----घुँषि----घोंचा----मुट्ठिरे मरिबा मुथ----गुद्दु----मुष्टियाल कुत्तुवदु----इति मुष्टि----मुष्टि प्रहार----
949घूमनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया--चक्कर लगाना;सैर करना;किसी ओर मुड़ना।--घुंमणा----घूमना----फेरु॑न----घुमुणुघुमणुमुड़णु--फिरणें, भटकणेंसहल करणें, प्रवास करणेंवळणें--घूमवुंसेरकरवीवळवुं--घोराबेड़ानकोनको दिनके घोरो--घूरफुर, घूरिफुटघूर, ओलट--बुलिबा----तिरूगुटवाह्याळि, शिकारू पोवुटतिरुगुट--शुट्ट्उलावतिरूंब--चुट॒टुकसवरि चॆय्युकतिरियुक--सुत्तुवुदुतिरुगाडुवुदुतिरुगुवुदु--
950घूरनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---आंखे गड़ाकर देखना;काम या क्रोध से एकटक देखना।---घूरणा----घूरना----मुदय गंडु॑न्यमुदय गंडु॑न्य---घूरणु----ङोळे बटारून पाहाणें, टक लावून पाहाणेंरागाने रोखून पाहोण---ताकी, ताकीते जोवुंगुस्साथी जोई रहेवुं---एक दृष्टे देखा----चकु पकाइ चा, बेया चकुरे चासतृष्ण नयने चा, चाइयाक---एक दृष्टि रे चाहिबा----गुड्लप्पगिंचिचूचटतेरिपार, चूचुट---उट॒टुप्पार्क्कमुरॆ॒त्तुप्पार्क्क---तुरि॒च्चु नोक्कुकइमवॆट्टातॆ नोक्कुक---दिट्टिसि नोडुवुदुदुरगुट्टि नोडुवुदु---
951घूसस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---रिश्वत;चूहे के वर्ग का एक बड़ा जन्तु जो पृथ्वी के अंदर बिल खोद कर रहता है।---वड्ढी, रिशवतघूस---रिश्वतघूस---रशवतगूंस---रिश्वतवडो॒ कूओ, घुस---लांचघूस---रिश्वत, लांचउंदर, कोळ---घुष, उत्कोच----भेटि, उतकोचए बिध एन्दुर---घुस, रिसवत, लांच----लंच़मुपंदिकोक्कु---लंजम्पॆरूच्चळि---कैक्कूलि, कोळतुरप्पन्---लंचहॆग्गण---
952घूसखोरीस्त्रीलिंग----रिश्वत लेने की क्रिया या भाव।----वड्ढी खेरी, रिशवतखोरी----रिश्वतख़ोरी----रशवत खूरी----रिश्वतखोरी----लांच-लुचतप----लांच खोरी, रिश्वतखोरी----घुष खाओया, लओया----भेटि खावा----लांचुआपण----लंच़गोडितनमु----लंजम् वांगुदल्----कोऴ वाड्.ड.ळ्----लंचगारिकॆ----
953घेरनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---चारों ओर से रोकना, अवरोध करना;कोई जगह इस प्रकार भरना कि औरों के लिए स्थान न रह जाय;---घेरनाघेरना---घेरना----गेरु॑ करुन----घेरणु----घेरणेंजागा संपूर्ण अडविणे---घेरवुंजग्या पचावी पाडवी---घेरा, वेष्टन करा----घेर, अवरोधकर----घेरिबा----च़ुट्टुमुट्टुटआक्रमिंचुकोनुट---वळैत्तुक्कॊळ्ळइडत्तै अडैत्तुक्कॊळ्ळ---वळयुक, तटयुककैयेरूक---सुत्तुगट्टुवुदुआवरिसुवुदु---
954घेरापुंलिंगपुंलिंग---लंबाई-चौडाई आदि का सारा विस्तार या फैलाव;इस प्रकार घेर कर खड़े होने की स्थिति जिससे उस स्थान से कोई बाहर न निकल सके।---घेरा----घेरा (हलक़ा)----गेरु॑----घेरो----घेरा, विस्तारवेढा---घेरोघेरो---परिधि, घेर, मापघेराव,---घेरा, बिस्तारअवरोध, आटक---घेरा, परिधिघेराउ---वैशाल्युमचुट्टुमुट्टुट---सुट॒ट॒ळवु, विस्तारम्मुट॒टुगै---विस्तारं, चट्टळवुघेराव, वळयुक---सुत्तु, विस्तारमुत्तिगॆ---
955घोंसलापुंलिंग----वृक्ष आदि पर तिनके, पत्ते आदि का बना हुआ स्थान जिसमें पक्षी रहते तथा अंडे देते हैं (नेस्ट)।----आल्हणा----घोंसला----ओल----आखेरो----घरटे----माळो, पंखीनुं घर----बासा, नीड़----चराइर बाह----चडेइ बंसा----गूडु----परवैगळिन् कूडु----(पक्षिककूटु) कूटु----गूडु----
956घोंटना (घोटना)सकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---गले को इस तरह दबाना कि सांस रुक जाए;मुंहजबानी याद रखना, रटना।---घुट्टणारटना, घोटणा---घोंटनाघोटना, रटना---हॊट चीरुन----घुटणु, गलो दबा॒इणुरटणु---दाबणेघोटणें, तोंडपाठ करणें---गळुं रूधवुंगोखवुं---गला टेपामुखस्थ करा---डिडि. चेपि धर, डिडि. मुचरमुखस्थ कर आबृत्ति कर---गळा चिपिबामुखस्थ करिबा---कुत्तुकपिसुकुटबट्टीपट्टुट---मूच्चूतिणर॒च्चॆय्यउरू अडिक्क---कळुंन्तु ञॆक्कुककाणाप्पाठं पठिक्कुक---हिसुकुवुदुबयिपाठ माडुवुदु---
957घोलपुंलिंग----किसी तरल पदार्थ में कोई दूसरी (घुलनशील) वस्तु मिलाकर तैयार किया हुआ मिश्रण।----घोल----मह्लूल----तहलील----गा॒रो----द्रावण----मिश्रण----गोल----घोल----घोल----द्रावकमु----करैप्पु----लायनि----मिश्रण----
958घोलनासकारात्मक क्रिया----किसी तरल पदार्थ में कोई अन्य घुलनशील वस्तु मिलाना।----घोलणा----घोलना----मिलु॑नावुन----गा॒रणु, कंहिं पाण्यठ में का शई मिलाए जज़्बु करणु----मिसळणें----घोळवुं----गोल----घोल----घोळ----कलपुट----करैप्पु----मिश्रणं----करगिसुवुदु----
959घोषणास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---जन-साधारण को सुनाकर जोर से कही जाने वाली बात;सार्वजनिक रूप से निकाली गई राजाज्ञा।---ऐलान----ए़लान, मुनादी----येलान----ऐलानु, पढ़ो, ढंढोरोपधिराई, घोषणा---घोषणासार्वजनिक रूपांत निधाले ली राजाज्ञा---घोषणा, जाहेरातढंढेरो---घोषणाधोषणा---घोषणाप्रशसनीय घोषणा---घोषणाघोषणा-पत्र---च़ार्टिपुप्रकटन---पॊदु अरि॒विप्पुअरसु-अरि॒क्कै---विळंबरंपॊतुविज्ञापनं---घोशणॆसूचनॆ, सूचनॆ प्रकटणॆ---
960चंगुलपुंलिंगपुंलिंग---पशु-पक्षियों का ढेढ़ा पंजा जिससे वे किसी पर प्रहार करते अथवा कोई चीज पकड़ते हैं;किसी व्यक्ति के प्रभाव या वश में होने की वह स्थिति जिसमें से निकलना सहज न हो।---चंगुलचंगुल---चगुल----पंजि----चंबोकब्ज़ो, चंबो---पंजापंज्यात, तावडीत---पंजोपंजो, कबजो---पाञ्जामुठोर मध्ये---हातोराकबल---कब्जा, पंझा----पंजा, पट्टुपंजा---परवैगळिन् वळैन्द नहंगळ्बलुवान पिडिप्पु---पिटिपिटियिल्, पॆटल्---पंजाहिडित---
961चंचलविशेषणविशेषणविशेषण--अस्थिर;नटखट, शरारती;जो शांत न हो, विकल, उद्विग्न।--चंचल----चंचल----च़ंच़ल----चंचलुखेचिलोअशांतु--चंचल, अस्थिरखोडकर, खटयाळ्अशांत--चचल (ळ)चालाकअधीरूं--चञ्चल, अस्थिर, छटपटेचञ्चल, उत्पाती, उपद्रवीचञ्चल, अशान्त, उद्विग्न--चंचल, अस्थिरदृष्ट, उत्पतीयाअशान्त--चंचल, अस्थिरबदमासिउदबिग्न--चंचल, मयिनअल्लरिकलवरमु--निलैयिल्लादकुरुं॒बुत्तनमानअमैदियट्ट--चंचलंविकृतिअशान्तन्--अस्थिर, चंचलतुंटअशान्त, उद्विग्न--
962चंदनपुंलिंगपुंलिंग---एक प्रसिद्ध पेड़ जिसकी लकड़ी बहुत सुगंधित होती है;उक्त लकड़ी को जल में घिस या रगंड़ कर बनाया हुआ गाढ़े घोल या लेप जिसका टीका आदि लगाया जाता है।---चन्दनचन्दन---संदलचंदन---च़ंदुन----चंदनुचंदन जो लेपु---चंदनचंदन---चंदनतिलक---चन्दनचन्दन---चन्दनघँहा चन्दन---चंदनचन्दनरस---चंदनमुचंदनमु---चंदनमरम्चन्दनम्---चन्दनंचंदनं---गंघद्मरगंध, चंदन---
963चंदापुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--चंद्रमा;किसी परोपकारी अथवा सार्वजनिक कार्य के लिए दी या ली जाने वाली व्यक्तिगत आर्थिक सहायता;किसी संस्था, पत्रिका आदि को उसके सदस्य, ग्राहक आदि बने रहने के लिए दिया जाने वाला धन।--चन्न, चंदाचंदाचंदा--चांद, चंदा----च़ंदर॑मुच़ंदु॑---चंडुचंदोचंदो--चंद्रमावर्गणीवर्गणी--चंदा, चंद्र, चंद्रमाफाळोलवाजम--चाँदा, चन्द्रमा----जोन, चन्द्रचान्दा, बरड.णिचान्दा, बरड.णि--चन्द्रमाचान्दा---चन्दुडुचंदाचंदा--चन्दिरन्पंण उदविचन्दाप्पणम्--चंद्रन्संभावनवरिसंख्य--चंद्रचंदावंतिगॆ--
964चंद्रमापुंलिंग----पृथ्वी का एक प्रसिद्ध उपग्रह, चांद।----चंदरमा----चांद----च़ंदर॑मु----चंडु, चंद्रमा----चंद्र----चंद्रमा, चांदो----चन्द्रमा, चाँद----चन्द्र, जोन----चन्द्रमा----चन्दुडु----चन्दिरन्----चंद्रन्----चंद्र----
965चकबंदीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---बहुत बड़े भूमि खंड को छोटे-छोटे चकों या भागों में बांटने की क्रिया या भाव;छोटे-छोटे खेतों को एक में मिलाकर उनके बड़े-बड़े चक या विभाग बनाने की क्रिया या भाव।---चकबंदीचकबंदी---चकबंदी----चकबंदी----चकबंदी----मोठया जमिनीचे लहान लहान तुकडे करणेलहन-लहन शेताना एकत्र जोडून त्यांचे मोठे तुकडे किंवा विभाग करण्याची क्रिया, वा भाव---जमीन ना भागपटा नक्की करवां तेनानां नानां खेतरो ने जोडीने तेना मोटा भाग करवानी प्रक्रिया---चकबन्दिचकबन्दि---चकबन्दि----चकबंदी----नलुवैपुल ऎल्ललु निर्णायिंचि विभागमु चेयुटएकीकरणमु---वयलगळिन्सिरियवल्गलै सॆर्त्तु पॆरिय वयलॊक्कुदल्---(भूमि) अळन्नुतिरिक्कलवरम्पिटल्---स्थळदसुत्तलिन मैरॆयन्नुगुरुतिसुवुदचक्कुबंदि---
966चकरानाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया--चकित होना;सिर घूमना।किसी को चक्कर या फेर में डालना, चकित करना।--चकराउणाचकराउणाचकराउणा--चकराणा----चकु॑रुन----चकिराइणु-कंहिं खे चकर मे विझणु; हैरानु करणु।--चकित होणे,-बुचकळ्यांत पाडणे--आश्चर्य चकित थवुं-कोई ने आंटा खरावला--चकित हओयामाथा घोरा---विभोरन पर, आचरित हमूर धूरा आचरित करआचरित कर--चकित हेबाचकित करिबामुंड-बुलाइबा--चकितुडगुटदिगभ्रान्ति चेन्दुटभ्रांति गोलपुट--वियप्पड़ैयतलै शुट॒ट॒वियप्पूट्ट--विषमिक्कुकतल चुट॒टुकचुट॒टि॒क्कुक परिभ्रमिप्पिक्कुक--चकितनागुवुदुतलॆतिरुगुवुदुभ्रांति उंटु माडुवुदु--
967चकितविशेषण----आश्चर्य में आया या पड़ा हुआ।----हैरान----मुतहय्यिर, हैरान----हा॑रान----हैरानु----चकित----चकित----चकित----चकित----चकित----चकितुडयिन----आच्चारियमडैन्द, वियप्पूट्ट----आश्चर्य प्पॆट्ट----ब॑रॅगाद, विस्मय गॊण्ड, चकित----
968चक्कीस्त्रीलिंग----आटा पीसने, दाल दलने आदि का प्रसिद्ध यंत्र या मशीन, जाँता।----चक्की----चक्की----ग्रटु॑----चकी----चक्की जाते----चक्की, घंटी----चाकि, जोता----जाँत----चकि, पेषणा----तिरुगलि पिंडिमर----मावु अरैक्कुम् इयन्दिरम्----तिरिकल्लु----बीसुवकल्लु----
969चक्रपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--गाड़ी आदि का पहिया;पहिए के आकार का एक अस्त्र;देश भक्ति या वीरता आदि के लिए सरकार की ओर से दिया जाने वाला पदक या तमगा।--चक्काचक्करचक्कर--पहिया (चक्कर)चक्र (चक्कर)तमग़ा (चक्र)--च़खु॑र----चकिरो, फीथोचक्रुचक्रु--चाक गाडीचे चाकगोल चाकाच्या आकाराचे शस्त्रचक्र (पदक)--चक्र, पैडु, चकरडुंसुदर्शन चक्रचन्द्रक, चांद--चाका, चक्रचक्र---चका(अस्त्र) चक्रचक्र--चक्र, पहिचक्रार अ---चक्रमुचक्रमुचक्रमु--चक्करम्चक्रायुदमवीरत्तुक्कान वॆगुमदि--चक्रं (वण्डि)चक्रायुधंचक्रं--गालिचक्रपदक, चक्र--
970चखनासकारात्मक क्रिया----किसी खाद्य-वस्तु का स्वाद जानने के लिए उसका थोड़ा अंश मुंह में रखना या खाना।----चक्खणा----चखना----मज़ुवु॑छुन----चखणु----चाखणें----चाखवुं----चाखा----चाकि, चोवा----चाखिबा----रुचि च़ूचुट च़वि च़ूच़ुट----रुशि पार्क्क----रूचिच्चु नोक्कुक---------
971चटपटाविशेषण----मिर्च-मसालेदार, तीक्ष्ण स्वाद का।----चटपटा----चटपटा----त्रॊश----मसालेदारु, तिखे सवादवारो।----मसालेदार----तीखुं, मसालेदार----झाल-मसलायुक्त स्वाद, मुखरोचक----चोका, जला----मरिच मसलाजुत्क स्वाद----घाटयिन----कार-सारमान----ऎरिवुं पुळियुं उळ्ळ----कारवाद, रुचियाद----
972चटाईस्त्रीलिंग----फूस, सींक, पतली फटियों आदि का बिछावन।----चटाई----चटाई----वगुव----तडो॒, तौरी, चटाई----चटई----चटाई, सादडी----मादुर, चाटाइ----कठ, ढारि, ढरा----चटाई, सप (मसिणांप्रभुति)----च़ाप----पाय्----पाय----चापॆ----
973चट्टानस्त्रीलिंग----पत्थर का बहुत बड़ा और विशाल खंड।----चटान----चटान----कनि पल----टकरु, छिप----खडक----चट्टान, मोटी पहोळी शिला, खडक----प्रस्तर खण्ड, शिला----डाउण्र शिलाखण्ड----चटाण----बंड----पारै॒----पार॒----बण्डॆ, शिलॆ----
974चढ़नाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया-ऊपर की ओर बढ़ना;सवार होना;उन्नति करना;बही खाते आदि में नामों, रकमों आदि का अंकित होना।-चढ़णा----चढ़ना----खसुन----चढ़णु----चढणेसवार होणेंउन्नति करणे;नावें मांडण़े-चड (ढ) वुं वुंसवार थवुंउन्नति करवीखाते लखवुं-चड़ा, ओपरे ओठाचड़ा, चापाउन्नति कराखाताय नाम ओठा-ओपरलै उठउठ, बगाउन्नति करअन्तमुक्त ह-चढिबासवार हेबाउन्नति करिबापुस्तक रे लेखि देबा-ऎक्कुटएक्कुटउन्नति पोंदुट, एक्कुटएक्कुट-एर्सवारि शॆय्यमुन्नेर॒कणक्किल् ऍळुदप्पड-कयरु॒ककयरु॒कउयर्च्च प्रापिक्कुककणक्किल् कयरु॒क-हत्तुवुदुसवारि माडुवुदुउन्नतिहॊदुवुदुलॆक्कद पुस्तकदल्लि हॆसरु, मॊबलगु मुंतादवत्तु बरॆसुवुदु-
975चढ़ाईस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---ऊंचाई की ओर जाने वाली भूमि;आक्रमण।---चढ़ाई----चढ़ाई----चडा॑य----चढ़ाई----चढणआक्रमण---चडावचडा (ढ) ई, आक्रमण---चड़ाइचड़ाओ, आक्रमण---उजनी, उपरैलै उठा भागआक्रमण---चढ़ाई, क्रमोन्नत भूमिआक्रमण---ऎक्कुडुदाडि---एट॒ट॒म्पडैयॆडुप्पु---कयट॒ट॒म्आक्रमणं---एरु, दिण्णॆदंडयात्रॆ, आक्रमण---
976चतुरविशेषणविशेषण---कार्य और व्यवहार में कुशल, प्रखर;चालाक, धूर्त।---चतर, चातर----होशियार----चालाक----चतुरु, होशियार;चतुरु, चालाकु---चतुरधूर्त हुशार, चलाख---चतुर----चतुर, पटुचालाक, चतुर, धूर्त---चतुर, कुशलचालाक, धूर्त्त---चतुर कुशळधूर्त्त---चतुरुडु, चुरुकयिंनवाडु, नेर्परिमोसकारि---तिरमैयुळ्ळतन्दिरशालि---मिटुक्कन्कौशलक्कारन्---चतुर, गट्टिगव्यवहार कुशल, धूर्त---
977चपरासीपुंलिंगपुंलिंग---कार्यालय के कागज-पत्र आदि लाने या ले जाने वाला कर्मचारी;अरदली।---चपड़ासी----चपरासी----चपरास्य----चपरासी, पटेवालोअरदली---चपरासी, पट्टेवाळाअर्दली---चपरासीपटावाळो---चापरासीचापरासी, आरदली---पियन, चाप्राचीपियन---चपरासी, पिअनंअर्दली---नौकरु, बंट्रोतुबंट्रोतु---सेवगर् (अलुवलगत्तिन्)नेर्मुगसेवगर्---शिपायिआर्डरलि---जवानतैनाति---
978चपलविशेषण----स्थिर न रहने वाला।----चंचल----चंचल----च़ंच़ल----चंचुल;----चप़ळ----चपळ----चपल, चञ्चल----चपल, चंचल, अस्थिर----चपळ अस्थिर----चपलुडु----निलैयिल्लाद----स्थिरमल्लात्त----चंचल----
979चबानासकारात्मक क्रिया----दांतों से कुचलना।----चब्बणा----चबाना----च़ापुन----चबा॒इणु----चावणें, चाववुं---------चिबान----चोबा, कामुरि खा----चोबाइबा----नमलुट----पर्कळाल् चवैत्तल्----चवय्क्कुक----अगियुवुदु----
980चबूतरापुंलिंग----मकान के अगले भाग में बैठने के लिए बनाई गई खुली चौकोर और चौरस जगह।----चबूतरा, थड़ा----चबूतरा----चबूतरु॑----चबूतिड़ो, थल्हो।----चबुतरा----चबूतरो, चोतरो----चबुतर, चत्रर चाताल----घटट समुखर, बारान्दा----चउतरा----अरुगु----मेडै, तिण्णै----तिण्ण, वरान्त, पूमुखं----जगलिकट्टॆ----
981चमकस्त्रीलिंग----प्रकाश, कांति।----चमक----चमक----चमख----चमक, चिम्को,----चमक प्रकाश----चमक----चमक, प्रकाश, कांति----जिलिकनि, कान्ति----चमक, प्रकाश, कांति----प्रकाशमु, वेलुतुरु----ऒळि----प्रकाशं, तिळक्कं----प्रकाश, हॊळपु----
982चमकनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया--प्रकाश या ज्योति से युक्त होना;कांति या आभा से युक्त होना;उन्नति करना।--चमकणा----चमकना----चमुकु॑न----चिम्कणु----चमकणेंकांति किंवा आभा युक्त होणेंउन्नति करणें--चमकवुंकांतिमान होवुंउन्नति करवी चोंकवुं--चमकानोचमकानोउन्नति करा--तिरविश, पोहरपोहरउन्नति कर, विख्यात--ज्योतियुक्त हेबाकान्तिजुक्त हेबाउन्नति करिबा--प्रकाशिंचुटमेरयुटउन्नति पोंदुट--पिरकाशिक्कऒळि वीशमुन्नेर तॆळियुक--मिन्नुकप्रकाशिक्कुक, तिळङङुकउयरुक--प्रकाशिसुवुदु, हॊलॆयुवुदुकांतिगूडुवुदु, मिरुगुवुदउन्नति हॊटुवुदु--
983चमड़ापुंलिंगपुंलिंग---पशुओं की खाल का औद्योगिक कार्यों के लिए तैयार किया हुआ रूप (लैदर);त्वचा।---चमड़ा----चमड़ा----दालु॑, चमरु॑मु॑सलु॑---चमिड़ो;खल।---चामडे, कातडेत्वचा---चामडुंत्वचा---चामड़ाचामड़ा, त्वचा---चामराछाल---चमड़ा, लेदरत्वचा---तोलु, चर्ममुचर्ममु, तोलु---पदनिट्ट तोल्तोल्---तोल्तॊलि---चर्मचर्म---
984चमत्कारपुंलिंगपुंलिंग---अलौकिक-सा जान पड़ने वाला काम या बात, करामात;आश्चर्य, विस्मय।---चमतकार----करिश्मा, करामात, मोज़िज़ा----च़मत्कार----चमत्कार, करामत----चमत्कारविस्मय, आश्चर्य----आश्चर्य---चमत्कारआश्चर्य, विस्मय---आचरित कार्यआश्चर्य विस्मय---चमत्कारआश्चर्ज्य विस्मय---चमत्कारमुआश्चर्यमु---अदिसयमान वेलैवियप्पु---चमत्कारंआश्चर्यं---अद्भुत कार्यआश्चर्य, विस्मय---
985चरणपुंलिंगपुंलिंग---किसी पूज्यव्यक्ति के पांव के लिए आदर-सूचक शब्द;किसी छंद, श्लोक आदि की पूरी पंक्ति अथवा चौथाई भाग।---चरन----क़दममिस्ऱा---खॅर----चरणु, पेरुचरणु, छंद जी पूरी सिट।---पायचरण---चरण, पगचरण---चरणचरण---चरण, पार-प्मचरण---चरण, पाद----चरणमु (लु.)चरणमु---पादम्, अडिशॆय्युळिल् ऒरु अडि---चरणं पादंचरणं पादं---चरणपाद, चरण---
986चरनासकारात्मक क्रिया----पशुओं का खेतों आदि में उगी हुई घास, पौधे आदि खाना।----चरना----चरना----गासु॑ ख्यॊन----चरणु----चरणें----चरवुं----चरा----चर, घाँह खा----चरिबा----मेयुट----मेय----मेयुक----मेयुवुदु----
987चरबी (चर्बी)स्त्रीलिंग----प्राणियों के शरीर में होने वाला सफेद या हल्के पीले रंग का गाढ़ा, चिकना तथा लसीला पदार्थ (फैट)।----चरबी----चर्बी----चरबी, अमास----चर्बी॒----चरबी----चरबी मद----चर्बि----मेद, तेल----चर्बी----क्रोव्वु----कॊऴुप्पु----कॊऴुप्पु----कॊब्बु----
988चरवाहापुंलिंग----वह व्यक्ति जो दूसरों के पशुओं को चराकर अपनी जीविका चलाता हो।---------चरवाहा----पॊहॊल----धनारु----गुराखी----चरवैयो----राखाल----गरखीया----चराळी, चराइबा लोक, गोपाळ----गोर्लकापरि----आडुमाडु मेय्प्पवन्----कन्नुकालि मयक्कुन्नवन----दन मेयिसुवव----
989चरसस्त्रीलिंग----गांजे के पौधों के डंठलों पर से उतारा हुआ एक प्रकार का हरा या हल्का पीला गोंद या चेप जिसे लोग गांजे या तंमाकू की तरह पीते हैं।----चरस----चरस----चरु॑स----चर्सु----चरस----चडस----चरस----भाङर दरे एबिध निचालगा बस्तु----गंगाइगछर अठापरि रस गंजाइ----गंजाइ----बोदै कॊडुक्कुम ऒरु मूलिगै----चरस----गांज----
990चरागाहपुंलिंग----पशुओं के चरने का स्थान, जहां प्राय: घास आदि उगी रहती है।----चरांद, रक्ख----चरागाह----चरागाह, गासु॑ मा॑दान----चरागाहु----गायरान----गोचर, गौचर----चारणभूमि----चरणीया पयार----गोचर भूमि----पच्चिक बयलु----मेय्च्चल निलम्----मेच्चिल् स्थलं----हुल्लुगावतु----
991चरित्रपुंलिंगपुंलिंग---वे सब बातें जो आचरण या व्यवहार आदि के रूप में की जायें, आचरण;कहानी, नाटक आदि का कोई पात्र।---चरित्तरचरित्तर---अख़लाक़ (किर्दार)किर्दार---चालु॑ चलन----चरित्रु, इख्लाकु;पात्रु (कहाणी, नाटक वगेरह जो)---चरित्रपात्र---चरित्र----चरित्रचरित्र, पात्र---आचरणचरित्र, पात्र---चरित्र, आचरणनाटक आदिर पात्र---शीलमु, नडवडिपात्र---नडत्तै, गुणादिशयंगळ्कदै अल्लंदु नाडग पत्तिरम्---स्वभावंकथा पात्रं---आचरणॆपात्र---
992चर्चास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---बातचीत, वार्तालाप;अफवाह।---चरचा----गुफ्तगू, बातचीत, चरचाअफ़वाह---कथ बाथ----ज़िक्रु, ग॒लिह-बोलिह;अफवाह---वार्तालाप, चर्चाअफवा---चर्चाअफवा---चर्चा, वार्तालापगुजब---चर्चा, आलोचनागुजब, उरा बातरि---चर्चा, बार्ताळापअपबाद---चर्चपुकारु---उरैयाडल्वदन्ति---चर्च्चकिंवदन्ति---मातुकलॆ, संभाषणॆजनश्रुति---
993चलचित्रपुंलिंग----सिनेमा (फिल्म, मूवी)----सिनेमा, चलचित्तर----सिनेमा, फ़िल्म----सॆनिमा----फिल्म, पिक्चर----चल चित्र सिनेमा----चलचित्र----चलचित्र, सिनेमा----चिनेमा----चळचित्र----सिनिमा----तिरैप्पडम् सिनिमा----चलच्चित्रं सिनिम----सिनॆमा----
994चलनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया-पैरो, पहियों आदि की सहायता से अथवा किसी प्रकार की गति से युक्त होकर आगे बढ़ना;किसी चीज का ठीक तरह से उपयोग या व्यवहार में आते रहना;बराबर काम देते रहना;प्रहार के उद्देश्य से अस्त्र-शस्त्र आदि का प्रयोग या व्यवहार होना।-चलणाचलणाचलणाचलणा-चलना----पकुनचलुन---हलणु----चालणेंयोग्य वावापर होणेंचालू राहणेंहत्यार चालाविणें-चालवुंयोग्य उपयोग के वपराशचालूरहेवुंहथियार धारण करवा-चलाचलाचलाचालान-या, चलचलचलि याकचल-चालिबा (चलिबा)चळन---नडुचुटनडुचुटनडुचुटप्रयोगिंचुट-नडक्कउबयोगप्पडपयनपडपिरयोगिक्क-नटक्कुकनटप्पिलिरिक्कुककप्रयोजनप्पटुक(आयुध) प्रयोगिक्प्पॆटुक-नडॆयुवुदुचलावणॆयल्लिरुवुदुजारियल्लिरुवुदुप्रयोगिसुवुदु-
995चलनी (छलनी)स्त्रीलिंग----आटा, चाय आदि छानने का उपकरण।----छानणी----छलनी (चलनी)----परयुन----छाणी----चाळणी गाळणी----चारणी----चालुनि, चालानि----चालनी----चालुणी----ज़ल्लेड----शल्लडै----अरिप्प----जरडि----
996चश्मापुंलिंगपुंलिंग---ऐनक;जल-स्रोत, सोता।---ऎ़नक, चश्मा----चश्मा----आ॑नख----चश्मो----चाळिशी, चश्माझरा---चश्मुंचश्मो, पाणीनो झरो---चशमाजलस्रोत, झरना---चछमा, बित्चकुपानीर सोंत, सुँति---चशमाजळ स्रोत---कळ्ळज़ोडुनीटिधार---मूक्कुक्कण्णाडिनीर् ऊट॒टु शुनै---मूक्कुकण्णटअरुवि---कन्नडकबुग्गँ---
997चसकापुंलिंग----किसी वस्तु या कार्य से होने वाली तृप्ति को बार-बार पाने की लालसापूर्ण प्रवृत्ति, चाट, लत।----चसका----चसका----च॑शकु॑, मजु----चस्को----चटक----चसको----लालसा पूर्ण प्रवृति----आसाक्ति, लालसा----लाळसा----व्यसनमु----कॆट्ट विषयगळिल् नाट्टम्----कॊति, आर्त्ति----गीळु, चट----
998चहकनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---पक्षियों का आनंदित होकर कूजना, चहचहाना;उमंग या प्रसन्नता से बढ़ चढ़ कर बोलना।---कूक्णा, चहकणा----चहकना----बोल-बोश करुन----चह चह करणु, तंवारणुखुशीअ में भर्जी बो॒लणु---चिंवचिंवणेकिलाबेल करणें---कलरव करवोकिलकिलाट करवों---चुँ चुँ शब्द करा; कूजनाआनन्द उत्साहे---चिंचिंया, कल्कलाबरकै कथा क---आनंदरे कूजन----पक्षुलकलरवमुअतिगा माट्लाडुट---परवैहळ् ऒलि शॆय्यउरचाहमाह---चिलक्कुक(उत्साहं कोण्डुवळरें कूडतल् संसारिक्कुक---चिलिपिल गुट्टुवुदु कलरव माडुवुदुउत्साह दिंद माताडुवुदु---
999चांटापुंलिंग----हथेली तथा हाथ की उंगलियों से किसी के गाल पर किया जाने वाला प्रहार, थप्पड़, तमाचा, झापड़।----चपेड़, चांटा----चांटा----चपाथ----चमाट, थफ----चपराक थप्पड----चापट----चड़, थाप्पड़----चट----चापुड़ा, थापड़----चॆपदेब्ब----अरै (अ़डि)----चॆकिट्टत्तटि, प्रहरं----कॆन्न एटु----
1000चांदनीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---चांद का प्रकाश;छत पर या ऊपर की ओर तानने का कपड़ा;---चांनणीचांनणी---चांदनी----ज़ूनु॑ गाश----चांडोंकीचंदो---चांदणेछतावर किवा छपरावर ताणलेला कपडा---चांदनीचंदरलो---चाँदनि, ज्योत्स्नाचाँदोया, मण्डप---जोनाकचन्द्रनाथ, चन्दोवा---चंद्रर ज्योतिचादुंआ---वेन्नेलदुप्पटि---निलापंदलिन् उट्पुरम कट्टुम तुणि वितानम्---चंद्रिक, निलावुमेल्क्कट्टि---बॆळुदिंगळुवितान, मेल्कट्टु---
1001चांदीस्त्रीलिंग----सफेद रंग की एक नरम चमकीली धातु जो गहने, सिक्के आदि गढ़ने के काम आती है।----चांदी----चांदी----रॅफ----चांदी----चांदी----चांदी----रूपा; रूपो; चौकि----रूप (धातु)----चांदि, रूप----वेंडि----वॆळ्ळि----वॆळ्ळि----वॆळ्ळि----
1002चाकूपुंलिंग----फल-तरकारी आदि काटने या कलम बनाने का छोटा औजार, छुरी।----चाकू, चक्कू----चांकू----श्राकु॑पुच----चाकू, कपु----चाकू----चाकु, चाकू, चप्पुं----चाकु, छुरि----कटारी----चाकु, छुरी----चाकु, कत्ति----कत्ति----पिच्चात्ति पेनाक्कत्ति----चाकु, चूरि----
1003चाटनासकारात्मक क्रिया----जीभ लगाकर या जीभ से पोंछ कर खाना।----चट्टणा----चाटना----ल़्यवुन----चटणु----चाटणें----चाटवुं----चाटा----चेलेक, जुति चा----चाटिबा (चाटिबा)----नाकुट----नक्क----नक्कुक----नॆक्कुवुदु----
1004चापलूसविशेषण----खुशामदी, चाटुकार।----चापलूस----चापलूस----खॅशामदी----चापिलूसु----खुशामत करणारा, चाटुकार----खुशामतखोर----तोषामुदे, चाटुकार----तोषामोदकारी----खुषमतिआ, चाटुकार----मुखस्तुति-चेयुवाडु----मुगस्तुति सॆयबवन्----मुखस्तुतिक्कारन्, सेवक्कारन्----मुखस्तुति माडुवव हॊगळुभट्ट----
1005चाबीस्त्रीलिंग----ताली, कुंजी----चाबी----चाबी----कुंज़----चाबी॒, कुंजी----चावी किल्ली----चाबी----चाबि----चाबि----चाबी, कंचि----ताळपुचेवि----सावि----ताक्कोल, चावि----बीगदकै----
1006चाबुकपुंलिंग----कोड़ा।----चाबक----चाबुक----कमुचि----चहिबुकु, चाबुकु----चाबुक, हंटर----चाबुक----चाबुक, कोड़ा, कशा----एचारि, चाबुक----चाबुक----कोरडा----शाट्टै, शवुक्कु----चाट्ट----चावटि, बारुकोलु----
1007चारपाईस्त्रीलिंग----खाट, छोटा पलंग।----मंजी, चारपाई----चारपाई----चारपाय----खट, मंजी----बान, खाट----चरपाई, खाटलो----खाट, खाटिया----चारपाइ, खाट, खाटिया----खट----मंच़मु----कट्टिल----कट्टिल----मंच, हॊरसु, हग्गद मंच----
1008चारापुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--पशुओं के खाने की घास, पत्ती, डंठल आदि;चिड़ियों, मछलियों आदि को फंसाने अथवा जीवित रखने के लिए खिलाई जाने वाली वस्तु;उपाय, इलाज, युक्ति।--चाराचाराचारा--चारा----चारु॑----चारो----चारा, गवतचाराउपाय, इलाज, युक्ति, अधिकार--चारोचारोइलाज, उपाय--चाराचारचारा, उपाय, युक्ति--घाँह-बन, दानाटोप, आहारउपाय, प्रतिकार--चारामाछअदिकु आकृष्ट करिबा पांइ खाद्य वस्तुउचाय, जुकृ, प्रतिकार--मेतऎरउपायमु, मार्गान्तरमु--काल् नडैत्तीवनम्परवें/मीन्//पिडिक्क उपयोग़िक्कुम इरैउपायम्, वऴि--तीट॒ट॒, कालित्तीट॒ट॒तीट॒ट॒वऴि, मार्गं--मेवुआहारउपाय, युक्ति--
1009चालस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग-चलने की क्रिया या भाव;गति;धूर्तता;शतरंज, ताश आदि के खेल में अपनी बारी आने पर गोटी, पत्ता आदि आगे बढ़ाने या सामने लाने की क्रिया।-चालचालचाल--चाल----चाल----चालि----चालगति, पद्धतयुक्ति, कावाखेळांतली चाल-चालगतिप्रबंधशेतरंज वगेरे रमतमां चाल-चालचाल, गतिचाल, फान्दि, धूर्तताचाल,-गति, खोजगति, बेगचाल, धूर्त्तालि--चालुगतिधूर्त्ताताचळाइबा क्रिया-नडकनडकऎत्तुवंतु-नडैपोक्कुतन्दिरम्शदुंरग विळैयाट्टिल कायै नगर्त्तुदल्-नटक्कल्गतिवंचनकरु नीक्कं-नडॆवेगतंत्र, मोसनडसुविकॆ-
1010चालकविशेषण----चलाने वाला (ड्राइवर।)----चालक----ड्राइवर----चलावन वोल----हलाईदंडु, ड्राईवरु----चालक ड्रायव्हर----चालक----चालक----चालक, चलाँओता----चाळक----नडिपेवाडु, ड्राइबरु----ओट्टुबवर्----ड्राइवर॒----ड्राइवर्----
1011चालाकविशेषणविशेषण---होशियार, व्यवहार-कुशल;धूर्त।---चलाक----चालाक----चालाख, हुशार----चलाकु----चतुर, व्यवहारकुशलधूर्त, लबाड, चलाख---चालाकचालाख, लबाड---चालाक, वयवहार-कुशलचालाक, धूर्त।---निपुण, कुशलधूर्त---चालाकधूर्त---नेर्परिमोसकारि, धूर्तुडु---तन्दिर शालियानपोक्किरि---समर्थन्वंचकन्---बुद्धिवन्त, जाणधूर्त---
1012चालान (चलान)पुंलिंगपुंलिंग---रवन्ना।अभियोगारंभ---चलान----चालानचालान---चाला॑नु॑----चालानु----चलानकोर्टातन्यायाधीशासमोर उभेकरणें---रवन्नाफोजदारी---चालानचालान---चालानअभियोगर आरम्भ---चालाणअभिजोगारम्भ---चलानचलान---वऴक्कु तॊडरल्वऴक्कु तॊडरल्---चॆल्लान्कुट॒ट॒पत्रं का टुक्कल्---रवानगी चीटिचलानु---
1013चाहनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---इच्छा करनाप्रेम करना।---चाहुणा----चाहना----यछुन----चाहिणु----इच्छाकरणेंआवडणें, प्रेमकरणें---चाहवुंगमवुं---चाओया, इच्छा कराप्रेम करा, भालबासा---इच्छाकर, हेपाहकरुभाल या, मरमकर---चाहिबाप्रेम करिबा---कोरुटप्रेमिंचुट---विरुम्बकोर---आग्रहिक्कुप्रेमक्कु---बयसुवुदुप्रीतिसुवुदु---
1014चिंघाड़नाअकारात्मक क्रिया----हाथी का बोलना या जोर से चिल्लाना।----चिंघाड़ना----चिंघाड़ना----ग्रजुन----चिंघणु----हत्तीचा चीत्कार----हाथीए चीस पाडवी----वृड्हण, हातिर डाक----(हातीये) चिजर----हस्तीर गर्जना (हाथी-गर्जना)----घींकरिंचुट----(यानै) पिळिर----चिन्नं विळिक्कु----धींकरिसुवुदु----
1015चिंतनपुंलिंग----कोई बात समझने या सोचने के लिए मन में बार-बार किया जाने वाला उसका ध्यान या विचार, मनन।----चिंतन----तफ़्क्कुर (ग़ोरोफ़िक्र)----खयाल, च़्यथ----चिंतनु----चिंतन----चिंतन----चिन्तन, मनन----चिन्ता, भावना----चिंतन----आलोचिंयुट----चिन्तनै, चिंदित्तल----चिंतनं, मननं----चिंतनॆ----
1016चिंतास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---सोच, फिक्रपरवाह।---चिंता----फ़िक्रपरवाह---फिकिर----चिंता, फिक्ऱु----चिंता (स्त्री.)लक्ष, पर्वा---चिंता----चिन्ताचिन्ता, परोया---चिन्तपरोवा, केरेप---चिंता----आलोचना, चिंत, विचारमुपरवा---कवलैपरवाय---चिन्त, विचांरवकवयपु---योचनॆचिंतॆ---
1017चिकनाविशेषणविशेषणविशेषण--जो छूने में खुरदरा न हो;जिस पर पैर आदि फिसलें;जिसमें तेल आदि कोई चिकना पदार्थ लगा हो।--चीकणा----चिकना----पिशुल----लसोतिर्किणोसणिभो--तुळतुळीतगुळगुळीतचिकट, तेलकट, निसरडे--चीकणुं-चीकटवाळुं--मसृणचिक्कण, चिकनतेला, तैलाक्त--मिट्टि, चकचकीयापिछलतेलीया, तेलचीया--चिक्कण, स्निगधपिच्छलतेलिआ तैळाक्त--नुनुपैन, नुन्ननुनुपैन, नुन्ननिनुनुपन, नुन्ननि--पळवळप्पानशरुक्कुगिरऎण्णैप्पशैयुळ्ळ--मिनुसमायवळुक्कुन्नमेंळुकुळ्ळ--नुणुपादजारुवजिड्डाद--
1018चिकित्सास्त्रीलिंग----रोग-निवारण का उपाय, इलाज।----इलाज, चिकितसा----इ़लाज----यलाज----इलाजु----चिकित्सा औषधोपचार---------चिकित्सा----चिकित्सा----चिकित्सा----चिकित्स----चिकिच्चै----चिकित्स----चिकित्सॆ----
1019चिट्ठीस्त्रीलिंग----पत्र, ख़त।----चिट्ठी----चिट्ठी (ख़त)----चिठ्य, खतु----चिट्ठी पत्र----चिट्ठी, नानोकागळ, कागळ---------चिठि, पत्र----चिठि, पत्र----चिठि----उत्तरमु, जाबु, लेख----कडिदम्, मरुत्तुवम्----एळुन्तु----पत्र----
1020चिड़ियाघरपुंलिंग----वह स्थान जहाँ अनेक प्रकार के पशु-पक्षी आदि जन-साधारण को प्रदर्शित करने के लिये एकत्र करके रखे जाते हैं।----चिड़ीआघर----चिड़ियाघर----चॆडियागर----जानिवारनि जो बागु, चिड़ियाघरु----प्राणि संग्राहलालय----प्राणीघर----चिड़िया खाना----चिरियाखाना----चिड़िआ-खाना----जन्तु प्रदर्शन शाल----मिरुगक्काट्चि शालै----मृगशाल----मृगालय----
1021चिढ़ानासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---नाराज करना;नकल उतारना।---चिड़ाउणा----चिढ़ाना----फोति तुलुन, लागुन----चेड़ाइणुबेचारा डि॒यणु---चिडविणे नाराज करणेवेडावणे, खिजविणें---चीडववुंचीडाववुं---रागान, चटान, क्रुद्ध कराभेङचान---खं तोल, विरक्तकर, जोकामुख भेङुचिया---चिड़ाइबा, रगाइबा बिरकृकरिबामकल करिबा---कोपमु तेप्पिंचुटवेक्किरिंचुट---ऎरिच्चळ् मूट्टपरिगसिक्क---पिणक्कुकअनुकरिच्चु---रेगिसुबुदुअणकिसुवुदु---
1022चितकबराविशेषण----सफेद रंग पर काले, लाल या पीले दागों वाला।----उबखड्ब्बा----चितकबरा, अब्लक़----टॆचिर्होर----चिटकमिरो----ठिपकेदार----काबर चीतरूं----नाना रंड्गेर----फुटुका फुटुकी----चित्रविचित्र----पलुवन्नेल----वॆळ्ळै निर॒त्तिळ् करुप्पु/शिवप्पु----चित्रवर्णमुळ्ळ----चुक्कॆ युळ्ळ----
1023चितास्त्रीलिंग----चुनकर रखी हुई लकड़ियों का ढेर जिस पर मुर्दा जलाया जाता है, चिति।----चिखा, चिता----चिता----च़्यंता----चिता----चिता----चिता----चिता----चिता----चिता----चिति----शिदै पुळ्ळि उळ्ळ----चित----चितॆ----
1024चित्तपुंलिंग----मन की एक अवस्था, अन्त: करण।----चित्त----जी, ज़मीर, दिल----च़्यथ----चितु----चित्त----चित्त----चित्त, अन्त: करण----चिन्त, अंत:करण---------चित्तमु----मनदै आरायुम् शक्ति----चित्तं---------
1025चित्रपुंलिंगपुंलिंग---तस्वीर (फोटो);पेंटिंग।---चित्तर----तस्वीर----तस्वीर, फोटू----चित्रु, फोटोपेटिंग, चित्र---चित्र, फोटो----चित्र----छबि, फोटो, चित्रछवि, पेंन्टिग, चित्र---छबि, चित्रचित्र---चित्त(पेंटिंग) चित्र---चित्रमु, बोम्भचित्रमु---पडम्ओवियम्---चित्रंपेंटिंग, पॆयिन्टिंग---चित्र, फोटो, पट्वर्णचित्र---
1026चित्रकारपुंलिंग----चित्र बनाने वाला।----चित्तरकार----मुसव्विर----तस्वीर बनावन वोल----चित्रकारु----चित्रकार----चित्रकार----चित्रकर, चित्रकार----चित्रकार----चित्रकार----चित्रकारुडु----ओवियर्----चित्रकारन्----चित्रकार----
1027चिनगारीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---आग का छोटा कण;कोई ऐसी छोटी बात जिसका आगे चल कर बहुत उग्र या भीषण प्रभाव हो सकता है (लाक्षणिक)।---चिंगिआड़ीचिंगिआड़ी---चिंगारी----त्यंबु॑र----चिणिंग----ठिणगीक्षुलक गोष्ट, ठिणगी (लाक्षणिक)---चिनगारीनजवी बात--------फिरिङतिफिरिङति---अग्रिकणछोटा कथा, (निआँ-खुँटा)---निप्पुरव्वनिप्पुरव्व---नॆरुप्पु पॊरि----तीप्पॊरि॒----किडिकिडि---
1028चिपकनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---किसी लसीली वस्तु के कारण दो वस्तुओं का परस्पर जुड़ना;व्यक्तियों या वस्तुओं का पास-पास सटना।---चंमड़नाचंमड़ना---चिपकना----ल॑गिथ गंछ़ून----चंबुड़णु----चिकटणेंपरस्पर जवळ येणें---चोंटवुंएकबीजाने नजीक आववुं---ओटिया याओया, जुडिया याओयाघेंषाघेंषि थाका वा राखा---लागि धरलागि धर---जोड़ि हेबाजोड़ि हेबा---अतुक्कोनुटअतुक्कोनुट---ऒट्टिक्कॊळ्ळनॆरूंगि इरूक्क---ऒट्टिपिटिक्कुकबळरॆ अटुत्तु चेर्न्निरिक्कुक---होंदिकाळळुवुद होंदिक्कोळ्ळुवुदुसॊरिसुवुदु---
1029चिमनीस्त्रीलिंग----मकान या कारखाने आदि का धुआं बाहर निकालने वाली विशेष नली, लैंप या लालटेन की शीशे की नली।----चिमनी----चिमनी (दूदकश)----चिमु॑न्य----चिमनी----धुराडे, चिमणी----चीमनी----चिमनि----धोंवा नली, चिम्नि----चिमिनी----पोगगोट॒टमु----पुरौपोक्कि विळक्किन कण्णाडि चिमिनि----चिम्मिनि----चिमणि----
1030चिल्लानाअकारात्मक क्रिया----जोर से बोलना, शोर करना, हल्ला करना।----चीक्णा----चिल्लाना----शोर करुन----चिलाइणु, रड्यूं करणू, डा॒ढयां गा॒ल्हाइणु----ओरडणें----चीस पाडवी----चेंचानो, चीत्कार करा----चिञ्र, आताह पार----चिलाइबा, पाहिकरिबा----अरुचुट----उरक्क कत्त क्च्च लिड----निलविळिक्कुक, उर॒क्कॆ संसारिक्कुक----गलाटॆ माडुवुदु चीरुवुदु----
1031चिह्नपुंलिंगपुंलिंग---वह शब्द, बात या छाप जिससे किसी चीज की पहचान हो;दाग़ धब्बा, निशानी।---चिह्न----निशानीनिशान, दाग़---निशानु॑----निशानुदागु, चिटो---चिन्ह खूणडाग, खूण---चिह्ननिशानी, डाघ, घब्बो---चिलचिल, दाग, लक्षण---चिन, लक्षणदाग, चिनं---चित्र, लख्यणचिन्ह---चिह्ममुगुरुतु, मरक---अडैयाळम्करि॒---चिन्हंपाटु---चिह्नॆ, गुरुतुकळॆ---
1032चीखनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---भय अथवा पीड़ा के कारण जोर से चिल्लाना;बहुत जोर से बोलना या कर्णकटु शब्द निकालना।---चीक्णाचीक्णा---चीखना----चिख दिन्य----चीखणु, दांहं करणुडा॒ढ्यां गा॒ल्हाइणु---किंचाळणेंओरडणें---चीस पाडवीबूमबराडा पाडला---चेंचानो, चीत्कार करागलाबजि करा, कर्कश स्वरे चेंचानो---चिञ्रटानकै क---चित्कार करिबा----अरूचुटकेकलुवेयुट---वीरि॒ट्टुक्कत्तकीच्चुक्कत्तल्---निलविळिक्कुकमुर॒विळि कूट्टुक---चीरूवुदुबॊब्बॆ हाकुवुदु---
1033चीरनासकारात्मक क्रिया----किसी चीज को धारदार उपकरण द्वारा काट या फाड़ कर अलग या टुकड़े करना।----चीरना----चीरना----चीरुन----चीरणु----फाडणें, चिरणें----चीरवुं----चेरा----फाल, छिट----चिरिबॉ----चील्च़ुट----नरु॒क्क----कीरू॒क----सीळुवुदु----
1034चुंगीस्त्रीलिंग----स्थानीय शासन द्वारा बाहर से आने वाले माल पर वसूल किया जाने वाला कर।----चुंगी----चुंगी----चुंगी, गुज़र----चुंगी, अकटु, नाको----जकात----दाण----चुँग्गी----आमदानि कर----पण्य कर----सुंकमु----सुंग वरि----चुंगम़----सुंक----
1035चुंबकपुंलिंग----एक प्रकार का पत्थर या धातु जिसमें लोहे को अपनी ओर आकर्षित करने की शक्ति होती है।----चुंबक----मक़्नातीस----म्यकनातीस----चक्मकु----लोह-चुंबक----लोह चुंबक----चुंबक----चुम्बक----चुंबक----सूदंटुराइ----कान्दक्कल, कान्द इरूंबु----कान्तं----सूजिगल्लु----
1036चुगनासकारात्मक क्रिया----पक्षियों आदि का अपनी चोंच से अनाज के कण, कीड़े-मकोड़े आदि उठा-उठा कर खाना।----चुगणा----चुगना----तुलुन, ख्यॊन----चुग॒णु----टिपणें----चुणवुं, वीणीने खावुं----पाखीर ठोंट दिया खुँटिया खाओया----खुटि खा----खुंटिबा----मुक्कुतो गिंजलनेरितिनुट----अलहाल कॊत्ति तिन्न----कॊत्तुक, कोरि॒क्कु----हॆक्कुवुदु----
1037चुगलखोरविशेषण----किसी की हानि करने के उद्देश्य से पीठ पीछे उसकी बुराई करने वाला।----चुगलखोर----चुग़लख़ोर----चॊगुलखॅर----चुग़लुखोरु----चहाडखोर, चुगलखोर----चुगलखोर, चुगलीखोर----चुकलिखोर----टुटकीया----चुगलिखोर----च़ाडीलुचेप्पुवाडु----कोळ् शॊळ्ळि----एषणिक्कारन्----चाडिगार----
1038चुटकुलापुंलिंग----चमत्कारपूर्ण और विलक्षण करवुं उक्ति अथवा बात जिसको सुन कर हंसी आए।----लतीफा, चुटकला----चुटकुला----चुटकलु॑----चर्चो, टोटिको, लतीफ़ो----चुटका----मजेदार बात----हास्य, कौतुक----हाँहि उठा कथा----हास्य----चेणुकुलु, जोकु----तुणुक्कु विनोद,----हास्यशकलं, फलितम्----चुटक----
1039चुननासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---बहुत में से कुछ को पंसद करके लेना;छोटी वस्तुओं को हाथ, चोंच आदि से एक-एक करके उठाना।---चुनणाचुनणा, चुगणा---चुननाचुगना---च॑रुन----चूंडणु----निवडणेंटिपणे, उचळणे---चुंटी काढवुंवीणवुं---बाछाखुंटिया तोला---बाछबोटल---बाछिबाबाछिबा---एरुटएरुट---पॊरुक्कि यॆडुक्कपॊरुक्क, परि॒क्क---तिरञ्ञॆटुक्कुकपॆरु॒क्कुक---आरिसुवुदुआरिसुवुदु---
1040चुनरीस्त्रीलिंग----वह रंगीन विशेषत: लाल कपड़ा जिसके बीच-बीच में बुंदकियां होती हैं।----चुन्नी----चुनरी----साड॑य----चुनी----चुनडी----चुंदड़ी----चुनुरी----फुल तोला कोपोर----बुंदि पीड़थिबा रंगीन ओढणी (ओढनी)----कलंकारी चीर----चुंगडिप्पुडवै----पुळ्ळि सारि----चुक्कॆगळुळ्ळ, बट्टु चुनरि----
1041चुनावपुंलिंगपुंलिंग---चुनने की क्रिया या भाव;निर्वाचन।---चोण----इंतिख़ाब----चुनावचुनाव---चूंड----निवडणूकनिर्वाचन---चूंटणी----बाछानिर्वाचन---बाछनिनिर्बाचन---निर्बाचन----ऎन्निकएन्निक---तेर्दल्तेर्दल---तिरियल्तॆरञ्ञॆटुप्पु---आय्कॆचुनावणॆ---
1042चुनौतीस्त्रीलिंग----अपनी बात मनवाने के लिए किसी को उत्तेजित करते हुए सामना करने के लिए कहना, ललकार।----वंगार----दावते-मुक़ाबला, चेलेंज----चेलेंज----ललकार----आव्हान----ललकार, आह्वान----प्रतिद्वन्दिताय आवाहन करा----प्रत्याह्वान आवावन----उत्तेजित करि आबान करिबा----पंदेमु, पंतमु सवालु----शूळुरै----वॆल्लुविळि----आवाहन, सवालु----
1043चुपविशेषण----मौन, खामोश।----चुप----चुप----छॅपु॑----चुपि----गप्प----चुप----चुप, मौन----मौन, निमात, चुप----चुप----निश्शब्दमु, मौनमु----पेशाद, मौनमान----मौनमाय----मौन, नि:शब्द----
1044चुपड़नासकारात्मक क्रिया----किसी गीली या चिपचिपी वस्तु का लेप करना।----चोपड़ना----चुपड़ना----चुपडुन----मखणु, थफणु, लेपणु----चोपडणें----चोपडवुं----माखानो----घँह, मालिच कर----लेपिबा----नेयिराचुट----तडव, पूश----पुरट्टुक----हच्चुवुदु----
1045चुभनस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---किसी नुकीली वस्तु का दबाव पाकर किसी नरम वस्तु में धंसने की क्रिया या भाव;उक्त क्रिया के कारण होने वाली टीस या पीड़ा।---चोभ----चुभन----त्रुसदग---चुभ, टुंबचुभण जो दर्द---बोचपीडा, वेदना---भोंकावुंपीड़ा बेदना---फोटो, बिद्ध हओयाफोटार यन्त्रणा वेदना---बिन्ध, बिन्धनबिन्धर बिह---फोड़ि होइजिबाफोड़िबा कष्ट---ग्रुच्चुकोनुटनोप्पि---कुत्तुदलकुत्तुवलि---कुत्तुक, तर॒य्क्कुककुत्तल वेदन,---चुच्चुनोवु---
1046चुभानासकारात्मक क्रिया----कोई नुकीली चीज गड़ाना या धंसाना।----चोभणा----चुभाना----त्रुस द्युन----चुभाइणु, टुंबणु----किंवा घुसविणें----घोंचवुं, भोंकवुं----फोटानो----बिन्ध----फोड़िबा----ग्रुच्चुट----कुत्त----कुत्तियिर॒क्कुक----चुच्चुवुदु----
1047चुरानासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---छल-पूर्वक पराई वस्तु हरण करना;भय, संकोच आदि के कारण कोई चीज या बात दबा रखना या दूसरों के सम्मुख न लाना।---चुराउणाचुराउणा---चुराना----च़ूरि न्युन----चोराइणुलिकु लिकाउ करणु---चोरणेदडपून ठेवणें---चोरवुंसंताडी राखवुं---चुरि करालुकानो---चर कर, हरण करलुकुवा, गोपन कर---चोराइबालुचाइबा---दोगिलिंचुटदाचुट---तिरुडबयत्तिनाल् मनदिल मरै॒त्तु वेक्क---मोष्टिक्कुकअमर्न्ति वॆक्कुक---कदियुवुदुमुच्चिडुवुदु---
1048चुस्तविशेषणविशेषण---फुर्तीला;खूब कसा हुआ।---चुसत----चुस्त----चुस----चुस्तु----तरतरीत, चलाखघट्ट, मजबूत---फूर्तिलुंघट्ट, मजबूत---चटपटेओंटसार---फुर्त्तियाल, रङियालबरटान, आटिल---फुर्त्ति बाजखुब हणि होइथिबा---चुरुकयिनविगिसिन---शुरु॒ शुरु॒प्पानइरु॒क्कमान---चॆटियुयळमुरुकिय---चुरुकादबिगियाद---
1049चूकनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---भूल करना;सुअवसर खो देना।---भुलणा, चुकणा----चूकना----मोकु॑ रादुरुन----चुक करणुमोको विञाइणु---चूक करणेंयोग्य संधि धालविणें---चूकवुंतक गूमाववी---भुल करासुयोग हारानो---भुल करसुयोग हरुवा---भुल करिबासुअवसर छाड़ि देबा---पोरबडुटजारविडचुट---पिऴै सॆय्यनल् वाय्प्पै इऴक्क---मर॒क्कुकअवसरं नष्टप्पॆटुत्तुक---तप्पु माडुवुदुअवसर कळॆदुकॊळ्ळुवुदु---
1050चूड़ीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---सोने, चाँदी, काँच, हाथीदांत आदि का स्त्रियों का हाथ में पहनने का एक वृत्ताकार गहना;किसी पेंच के वृताकार खांचे (थ्रेड्स)।---चूड़ीचूड़ी---चूड़ी----बुंगु॑रबुंगु॑र---चूड़ी, कंगिणीचूड़ी---बांगड़ीएखाद्यास्क्रूचे वृत्ताकार खाँचे (थ्रेड्स)---चूडीस्कुवगेरेना आंटा---चूडिस्क्रकूर पेंचाल अंश---खारुपेंच---चूडीकौणासि पेचर वृत्ताकार खोप---गाजुदारमु---वळैयल्तिरूगाणियिन् (स्क्रू) मरै---वळपिरि---बळॆतिरुपिन दार, सुत्तु---
1051चूनापुंलिंगअकारात्मक क्रिया---कुछ विशिष्ट प्रकार के कंकड़-पत्थरों, शंख, सीप आदि को फूंक कर बनाया जाने वाला एक प्रसिद्ध तीक्ष्ण और वाहक क्षार जिसका उपयोग दीवारों पर सफेदी करने और पान आदि के साथ खाने के लिए किया जाता है।किसी तरल पदार्थ का किसी छेद या संधि में से टपकना या बाहर निकलना।---चुनाचोणा---चूना (गच)चूना, टपकना---चूनु॑----चूनो, सेढ़ीसिमणु, टिमणु---चुनाझिरपणें, गळणें---चूनोचूवुं---चुनचुया---चूणनिजर, टोप टोप कै पर---चून----सुन्नमुकारुट---सुण्णांबुऒळुग---चुण्णापु, कुम्मायंइट॒टु वीऴुक,---सुण्णसॊरुवुदु---
1052चूमनासकारात्मक क्रिया----होठों से होंठ, हाथ, गाल, मस्तक आदि अंगों का अथवा किसी पदार्थ का स्पर्श करना।----चुंमणा----चूमना----चूमुन, माहकरुन----चुमणु----मुकाघिणें, चुंबणें----चुमवुं, चुंबवुं, बच्ची करवी----चुमा खा ओया, चुम्बन नेओया----चुमा खा----चुम्बिबा---मुद्दुपॆट्टुकोनुट---मुत्तम् इड----चुंबिक्कुक----मुत्तिडुवुदु----
1053चूरन (चूर्ण)पुंलिंग----खूब महीन पीसी हुई बुकनी (पाउडर।)----चूरन----चूरन----चूरन----चूरणु----चूण----चूरण----चूर्ण, गुँड़ा----चूर्ण, गुरि, पाउडर----चूर्ण----चूर्णमु----पॊडि, तूळ् चूरणम्----चूर्ण, मिनुसप्पोटि----पुडि----
1054चूल्हापुंलिंग----मिट्टी, लोह आदि का वह उपकरण जिसमें चीजें पकाने या गरम करने के लिए कोयले, लकड़ियां आदि जलाई जाती हैं।----चुल्लहा----चूल्हा----दान----चुल्हि, चुल्हो----चूल----चूलो----चुलो, चुला, उनुन----चौका, आखा----चूलि----कुंपटि, पोय्यि----अडुप्पु----अडुप्पु----ऒलॆ----
1055चूसनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया--जीभ और होंठ के संयोग से किसी वस्तु (विशेषत: फल) का रस अंदर खींचना;किसी गीली वस्तु की आर्द्रता सोख लेना;किसी का सत्व या सर्वस्व बल-पूर्वक या अनुचित रूप से हड़प लेना।--चुंघणा, चूसणाचुंघणा, चूसणाचुंघणा, चूसणा--चूसना----च़ु॑ह द्युनच़ु॑ह द्युनच़ु॑हु द्युन--चूसणु, चूपणु;चूहाइणु;चूसणु--चोखणेंशोषून घेणेंळुबाडणें--चूसवुंशोषवुंनि:सत्व करवुं--चोषाशोषाशुषे नेओया, शोषण करा--शोह, रस टानशुहिल, शोहशोषण कर, अन्याय भावे दखलकर--चूषिबाशोषि नेबा (शोषि-नबा)अन्याय रे आत्मसात् करिबा--पील्चुटपील्चुटपील्चुट--उरिंजईरतै उरिंजपिरर् सॊतैं अबगरित्तल--उरुंचुकउणक्कुकचूषणं चॆय्युक--हीरुवुदुहीरुवुदुदक्किसिकॊ-ळ्ळुवुदु, नुंगुवुदु--
1056चेहरापुंलिंगपुंलिंग---गरदन के ऊपर का अगला भाग जिसमें मुंह, आंख, नाक, कान, मस्तक आदि होते हैं, मुखड़ा;मुखौटा।---चिहरा----चेहरा----बुथ----चहिरो, मुंहुंचुखोटो, मुंह टोपु, निकाबु---चेहरा तोंडमुखवटा---चहेरोमहोरूं---चेहासमुखोश---मुखमंडल, चेहरामुखा---चेहेरामुखा---मुखमुमुखमु---मुहम्, मुन् पुरममुगत्तोट॒ट॒म्---मुखंमुखंमूटि---मुखमुखवाड---
1057चोंचस्त्रीलिंग----पक्षियों के मुंह का नुकीला और आगे की ओर निकला हुआ भाग।----चुंझ----चोंच----तोंथ----चुहिंब----चोंच----चांच----पारवीर चच्चु, चोंच, ठोंट----ठोंट----चंचू----मुक्कु (पक्षि)----अलहु----कॊक्कु, चुण्टु (पक्षि यूटे)----कॊक्कु----
1058चोटस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---किसी वस्तु के आधात से शरीर पर होने वाला घाव;वार।---सट्ट, चोट----चोट----चोट----चोट, धकु----जखभवार---चोटबार---चोटचोट---घा, आधातमार, कोव---चोटबार---देब्बदेब्ब---कायम्अडि---मुरि॒वुवॆट्टु---गायप्राहार---
1059चोटीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--सबसे ऊपर का भाग;स्त्रियों के गुंथे हुए सिर के बाल, वेणी;हिन्दू पुरुषों के सिर के पिछले भाग के मध्य के थोड़े से लंबे बाल जिन्हें कटवाया नहीं जाता।--सिखर, चोटीगुत्तबोदी--चोटी----तंतॊललठुरछ़ोग--चोटी----शिखर-शेंडी--शिखर;चोटलोचोटली, शिखा--चूड़ाबिनुनी, वेणीटिकि, चुटकी--एकेबारे ओपटर भागबेणीटिकनि--चुटि, बाळबेणी(चैतन्य) चुंटि--शिखरमुज़ुट्टु मुडि, जडपिलक--उच्चिकॊंड, पिन्नल्शिगै, कुडुमि--शिखंरपिन्नियमुटिकुटुम--तुदि, शिखरजडॆजुट्टु--
1060चोर-बाज़ारपुंलिंग----व्यापार का वह क्षेत्र जहाँ चीजें चोरी से और, या अधिक ऊंचे दाम पर खरीदी या बेची जाती हैं (ब्लैक मार्केट)।----चोर बजार----चोर बाज़ार----च़ूरु॑ बाज़र----चोर बाजारि----चोर-बाजार----चोर बजार----चोर-बाजार----चोरां-बजार----धोरा बजार----चीकटि वीथि दोंग व्यापारमु----कळ्ळ मार्कट्टु----ब्लैकु मार्केट्, कळ्ळक्वंपोंळं----काळ संतॆ----
1061चोरीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---चुराने की क्रिया या भाव;दूसरों से कोई बात छिपाने की क्रिया या भाव।---चोरी----चोरी----च़ूर----चोरी----चोरीगोष्ट लपविणें---चोरी----चुरिलुकान---चुरिशोपन करा कार्य बा भाव---चोरिचोरि---दोंगतनमुदापरिकमु---तिरुट्टुतिरुट्टुत्तनम्---मोषणंकार्य ओंळिक्कल---कळवुमुच्चिडुवुदु---
1062चौंकनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---एकाएक किसी प्रकार की आहट, ध्वनि या शब्द सुनकर कुछ उत्तेजित अथवा विकल हो उठना;चकित होना।---त्रभकणात्रभकणा---चौंकना----वॊठ कडु॑न्य----छिर्कणु, छिर्कु भरणुहैरानु थियणु---दचकणेंचकित होणें---चोंकवुंचकित थवुं---चमकानोचकित हओया---उचप खा, चमकि उठचकखा, चकितह---चमकिबाचकित होना---उलिक्किपडुटचकितुडगुट---दिडुक्किडवियप्पडैय---ञॆट्टुकपरिभ्रमिक्कुक---बॆच्चि बीळुवुदुचकितनागुवुदु---
1063चौकपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--आंगन, सहन;चबूतरा;चौराहा।--विहड़ाथड़ाचौक--चौक----च्रुवा त----चौकचबूतिड़ोचौकु, चौराहो--आंगण, चौकओटाचौक--चोकओटलोचोक--प्रांगण, उठानचालाल, चत्वर, चबुतरचौरास्ता, चौमाथा--चोताल, खोलाडाङर बेदी वा मंचउचारि आलि चौक--अगणाचउतराछक--मुंगिलि, कूडलिअरुगुचौरास्ता--मुट॒ट॒ममेडैश़दुक्कम्--मुट॒ट॒मतिण्ण, पूमुखंनाल्क्कवल--अंगळजगुलिचौक--
1064चौकड़ीस्त्रीलिंग----हिरन की वह दौड़ जिसमें वह चारों पैर एक साथ उठा कर छलांग मारता हुआ आगे बढ़ता है।----चौकड़ी----चौकड़ी----च़ंपंजल----छालु, ठैंगु----हरणाची धाव----हरणनी फलंग-फाळ--------------हरिणर ड़िआ मारिबा----गंतु----नाळुकाल् पाय्च्चल----ओट्टं मानिन्ट----नागालोट----
1065चौकसविशेषणविशेषण---जो अपनी अथवा किसी की रक्षा के लिए पूर्णत: सचेत हो;ठीक, दुरुस्त, संपूर्ण।---चौकस----चौकस----हुशार, खबरदार----सुचेतु, खबर्दारु;दुरुस्त, ठीकु---सावध, जागरूकठीक, बरोबर---चोक्कसठीक, बरोबर---चौकसचौकस, ठिक---साणुं, सावधान, सष्टमउत्तम, सम्पूर्ण, पूरा।---चौकस, सावधानदोरस्त, संपूर्ण---जाग्रत्तगपूर्ति---ऎच्चरिक्कैयागनल्लनिलैयिल् उळ्ळ---जाग्रतयायशरियाय, संपूर्णमाय---जागरूकसरियाद, संपूर्ण---
1066चौकीदारपुंलिंग----किसी स्थान पर पहरे का काम करने वाला कर्मचारी।----चौकीदार----चौकीदार----चूक्यदर----चौकीदारु----पहारेकरी (पुं)----रखेवाळ, चोकीदार----चौकीदार----चौकीदार, चकीदार----चौकिदार----पहरावाडु कावलिवाडु----कावल् कारन् पाराक्कारन्----चौकीदार, पारा॒वुकारन्----कावलुगार----
1067चौखटापुंलिंग----चौखट के आकार का ढांचा जिस में शीशा या तस्वीर आदि को मढ़ा जाता है।----चौखटा----चौखटा----चोकाठ----फ्रेमु----चौकट----फ्रेम----आयना/छबिर, फ्रेम----चौकठि, फ्रेम----चौकाठ आकार ढांचा----च़ट्मु----कण्णाडि/पडम् पॊरुत्तुवदर्कान नार्पुर मरच्चट्टम्----चट्टक्कूटु, फ्रॆयिम्----चौकट्टु----
1068चौड़ाविशेषण----जिसके दोनों पार्श्वें के बीच में अधिक विस्तार हो, जो संकरा न हो।----चौड़ा----चौड़ा----खोल----वेकिरो, मोकिरो----रूंद----पहोळुं----चओड़ा, प्रशस्त----बहल, बिस्तृत----चौड़ा----वेडल्पगु----अगलमान----विस्तृतं, वीतियुळ्ळ----अगलवाद----
1069चौराहापुंलिंग----वह स्थान जहाँ चारों दिशाओं से आने वाले मार्ग मिलते हों, चौरस्ता।----चुराहा----चौराहा----चुवॊ त----चौक----चार-रस्ता, चोक---------चौरास्ता, चौमाथा----चारि आलि, चौपथ----छक, चड़क (चौक)----कूडलि, चौरस्ता----नार्चन्दि----नाल्क्कवल, जंक्शन्----चौक----
1070छंटनीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---छांटने की क्रिया;आवश्यकता से अधिक कर्मचारियों को सेवा से हटाने का काम (रिट्रेंचमेंट)।---छांटी----छंटावतख़फ़ीफ़---चारुन, छ़टुन----छांट----कपातकमीकरण्याची क्रिया---छटणीवधाराना माणसो ने छटाकरवानी प्रक्रिया---छाँटाछाँटाइ---बाछनिछाटाइ---छटेइ करिबा----एरुटवेर्पाटु---पॊरुक्कि तनियाक्कुदलपणियाळर् कुरै॒प्पु---तिरियल्पिरिच्चुविटल्---आयुविकेतॆगॆदुहाकु---
1071छड़ीस्त्रीलिंग----बांस, बेंत, लकड़ी आदि की पतली लाठी।----सोटी----छड़ी----लूर----छड़ी, लकिड़ी----छडी----लाकडी----छड़ि----लाखुटि, लाठी----छड़ी----बेत्तमु----कुच्चि, पिरंबु----वटि----कोलु----
1072छतस्त्रीलिंग----कमरा ढंकने वाली वास्तु-रचना का ऊपरी या निचला तल।----छत्त----छत----छत, तालव, पश----छिति----छत, चांदवा----छत----छाद----पका, घरर चाल; चिलिं, चिलिङि----छात (छात)----कप्पु----वीट्टिन् मेल् तळम्----तट्टु----माळिगॆ----
1073छतरीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग-लोहे की तीलियों पर कपड़ा चढ़ा-कर धूप, वर्षा आदि से बचाव के लिए बनाया हुआ आच्छादन, छाता;चारों ओर से खुले हुए स्थान के ऊपर का मंडप;किसी की समाधि के स्थान पर बना हुआ मंडप;पैराशूट।-छतरी----छतरी-छतरीछतरी-छॆतु॑र्य----छटीसाइबानु, छटी;कंहिं जी समाधीअ ते ठह्यलु मंडपु;विमाणी छटी।-छत्रीमांडवा या मंडपसमाधिवर बांधलेली छत्रीपॅराशूट, हवाईछत्री-छत्रीमांडवो, मंडपसमाधि पर बांधेली छत्रीपेरेशूट, हवाई छत्री-छाताछाता, मण्डपसमाधि-मण्डपअवतरणछत्र-छातिखोला मंडपचन्दोवापेराछुट-छाताचांदुआसमाधि-मंडपपाराचूट-गोडुगुमंडपमु, पंदिरिमंडपमुपैराशुटु-कुडैतिर॒न्द मण्डपम्समादियिन्मेल् मंडपम्पर॒क्कुम विमानत्तिलिरुन्द इरं॒गुवदकनि कुडै-कुटचरियमंडपंपारच्चूट्टु-कॊडॆमंटपमंटपप्याराशूट-
1074छलपुंलिंग----कपट, धोखेबाजी----छल----छल----छ़ल----छलु----कपट, फसवाफसवी----छळ----छल, प्रतारणा----छल, कपट----छळ----कपटमु----मोशम्, वंचनै----वंचन, चति----मोस, कपट----
1075छलकानासकारात्मक क्रिया----बरतन में भरे हुए जल आदि को हिलाकर गिराना।----छलकाउणा----छलकाना----ग्राय दिन्य----छलिकाइणु----हिंदकाळणें----छलकाववुं----उच्छलित करा, छलकानो----ओफनदाइ बागरि परिव लगाकर---------तोणिकिंचुट----तळुंबच्चॆय्य----तुळुंपिक्कुक----तुळुकिसुवुदु----
1076छलनासकारात्मक क्रियास्त्रीलिंग---धोखा देना, ठगना, भुलावे में डालना।धोखा, वंचना।---छलणा----छलनाछल---छ़ल करुन----छलु करणु, ठग॒णु।दोखो, कपटु---ठगणें, फसविणेंवंचना---छळवुंछलना---छला, धोंका देओयाठकानो----ठगन---छलिबा (छळिबा)धोका वंचना---मोसमुचेयुटमोसमु, वंचन---एमाट्ट, बंचिक्कमोशम्, वंचनै---चतिक्कुकचति, वंचन---वंचिसुवुदुमोस---
1077छल्लापुंलिंगपुंलिंग---सोने चाँदी आदि के तार को मोड़ कर बनाई हुई अंगूठी;उक्त प्रकार की कोई गोलाकार आकृति।---छल्ला----छल्ला----वा॑ज----छलो----वेढें, वलयगोलाकार आकृति---छल्लोगोलाकार आकृति---आउ.टि----आङुठिआङुठि, घेर----मुदि---उंगरमुउंगरमु---वेळळि/तंग/कंबिगळाल्मोदिरं---कंपि मोतिरंवळयं---अंगुरवलय---
1078छांटनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---अनावश्यक अंश अलग करना;चुनना।---छांटणाछांटणा---छांटना----चारुन----छांटणुचूंडणु---निवडणेंनिवडणें---कापीने जुदुंकरवुं, अलग करवुंवीणवुं, जुदुं पाडवुं---छाँटा, छॉटाईछाँटाई, बाछा---बाछबाछ---छाटिबा----एरुटएन्तिक चेयुट---वेण्डाद पहुदियै नीक्कपोरुक्कि ऎडुक्क---वेण्डात्ततु नीक्कुकतिरयुक---बेर्पडिसुवुदुआरिसुवुदु---
1079छाजपुंलिंगपुंलिंग---सरकंडों, सींकों आदि का बना हुआ वह उपकरण जिससे अनाज फटका जाता है, सूप;छप्पर।---छज्ज----छाजछप्पर---शुप----छजुछपरु---सूपछप्पर---सूपडुंछापरूं---कुलाचाल, छाप्परा---डला, कुलाचलि---कुलाछपर---चेटकप्पु---मुर॒म्कूरै---मुर॒म्मेलक्कूर---मॊरचप्पर---
1080छात्रपुंलिंग----विद्यार्थी।----विदिआरथी----तालिबे इ़ल्म----च़ाठ, परन शुर्य----शागिर्दु, विद्यार्थी----छात्र विद्यार्थी----छात्र विद्यार्थी----छात्र----छात्र विद्यार्थी----छात्र----शिष्युडु, विद्यार्थी----माणवन्----विद्यार्थि----विद्यार्थी----
1081छात्रवृतिस्त्रीलिंग----विद्यार्थी को विद्याभ्यास के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता।----वज़ीफा----वज़ीफ़ा----वज़ीफु॑----स्कालरशिप, वज़ीफो----छात्रवृति----छात्र वृत्ति शिष्यवृत्ति----छात्रवृति----बृत्ति, जलपानी----छात्रबृत्ति----विद्यार्थिवितनमु उपकार वेतनमु----माणवर्गळुक्कळि----विद्यार्थिवेतनं----विद्यार्थि वेतन----
1082छात्रावासपुंलिंग----किसी स्कूल, कॉलेज के अंर्तगत वह स्थान जहां विद्यार्थी रहते हैं।----होस्टल----दारुलइक़ामा----होस्टु॑ल----हास्टल, छात्रावासु----छात्रावास----छात्रालय----छात्रावास----छात्राबास----छात्राबास----हास्टलु, विद्यार्थिवसति गृहमु----माणवर् विडुदि----होस्टल----विद्यार्थि निलय----
1083छाननासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---आटे आदि को या तरल पदार्थ को चलनी या कपड़े से इस प्रकार निकालना जिसमें मोटा अंश रह जाए और महीन अंश नीचे गिर जाए;खोज, जांचना।---छानणाछानणा---छानना----छ़ानुन----छाणणु;गो॒लणु, गोल्हणु---गाळणें, चालणेंशोषणें, पडतालून पाहाणें,---चाळवुंछणवुं, चलासवुं---छाँका, चालाखोंच करा, याचाइ करा---चाल, छेकबिचार, परीक्षा कर---छणिबाजांच करिबा---वडपोयुटवेदकुट, विचार्रिचुट---वडि कट्टतेड, सोदिक्क---अरिक्कुकअन्वेषिक्कुक, परिशोधिक्कुक---सोसुवुदु, जरडॆ आडुवुदुहुडुकुवुदु, शोधिसुवुदु---
1084छान-बीनस्त्रीलिंग----जांच-पड़ताल, खोजबीन।----छाणबीण----छान-बीन----छानबीन----जांच-पड़ताल----तपास, चौक़शी----शोधखोळ, तपास----याचाइ, अनुसन्धान----अनुसंधान, बिंचार-खोचार----जांच करिबा----परीक्षिंचुट----आराय्च्चि----अन्वेषणं, परिशोधन----तनिखॆ----
1085छापस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---वह ठप्पा या सांचा जिससे कोई चीज छापी जाए, ठप्पा;प्रभाव, असर।---छापछाप---छाप----छॉपअसर---छापो, ठपोछाप, असरु---छापप्रभाव, परिणाम---छापप्रभाव, परिणाम---छाप, मोहरछाप, चिन्ह, प्रभाव---छाप, साँच, मोहरप्रभाव---छांचप्रभाव---मुद्रप्रभावमु---मुटिरै, अच्चुविळैवु---मुद्रस्वाधीनं---अच्चुप्रभाव---
1086छापनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---यंत्रों, ठप्पों आदि की सहायता से अक्षर, चित्र आदि की छपाई करना;पुस्तक, लेख, समाचार पत्र आदि प्रकाशित करना।---छापणाछापा---छापना----छापुन----छापणु, छपणु----छापणेंप्रकाशित करणें---छापवुंप्रकाशिन करवुं---छापा, छापाइ कराछापा---छपा, छापा कराछपाइ उलिया प्रकाश कर---छापिबा----मुद्रिंच़ुटप्रचुरिंचुट अच्चुवेयुट---अच्चिडपदिप्पिक्क---अच्चटिक्कुकप्रसाधनं चॆय्युक---अच्चु हाकुवुदुप्रकाशिसुवुदु---
1087छापा (मारना)पुंलिंगक्रिया---ठप्पा।कुछ विशिष्ट वस्तुएं पकड़ने के लिए पुलिस का अचानक या अप्रत्यशित रूप से कहीं पहुंच कर तलाशी लेने के लिए सब चीजों को देखना-भालना (रेड)।---छापाछापा---छापाछापा (मारना)---ठप्पु॑----छापो, ठपोपुलिस जी ओचिती चढ़ाई, छापो।---ठसाछापा घालूणें---छापो----छाप, मोहर----छाप, छाब----छापारेड---अच्चुदाडि---मुद्दिरैदिडीर ताक्कुदल---मुद्रमिन्नल परिशोधन---अच्चुदाळि---
1088छायास्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--प्रकाश के अवरोध में उत्पन्न हलका अंधेरा;परछाई, प्रतिबिम्ब;सादृश्य, प्रतिकृति।--छां, साइआपरछावांछां--सायाअक्सचरबा--छ़ाय----छाया, छांव;पाछो, अक्सु;हिकजहिड़ाई।--छाया सावलीपडछाया, प्रतिबिंबसादृश्य, प्रतिकृति--छायापडछाया; प्रतिबिंबप्रतिकृति--छाया,छाया, प्रतिबिंबछाया, सादृश्य, प्रतिक्रिया--छाँ, छायाप्रतिबिम्बप्रतिक्रिया--छायाप्रतिबिंबसादृश्य--नीड, छायनीड, प्रति बिंबमुप्रतिकृति--निऴल्पिरतिबिंबम्उरुवम्--निऴ्लप्रतिबिंबं, निळल्सादृश्यं--नॆरळुप्रतिबिंबसादृश्य--
1089छालस्त्रीलिंग----वृक्षों आदि के तने पर का कड़ा, खुरदरा और मोटा छिलका।----छिल्ल----छाल----घलुर----छोडो॒, छिलु----साल----छाल----छात्र----छाल, बाकलि----छेलि, बकळ----चर्ममु, चेट॒टुपट्ट----मरप्पट्टै----मुरवुरि, मरप्पट्ट----तॊगलु----
1090छालापुंलिंग----शरीर के किसी अंग पर गरम पानी आदि पड़ने अथवा लगातार रगड़ के कारण होनेवाला मांस का कोमल और नरम उभार, फफोला।----छाला----आबला----बसतु॑----लिफ, फोफींडो----फोड----छालुं, फोल्लो----फोसका, फोस्का----जोला----फोटका----बोब्ब----कॊप्पुळम----पॊह्ळळ्----हॊप्पळॆ----
1091छावनीस्त्रीलिंग----वह स्थान जहां सेना रहती हो, सैनिकों की बस्ती (केंटोंमेंट)----छाउणी----छावनी (लश्करगाह)----छावु॑न्य----छांविणी----छावणी----छावणी----छाउनि, सेना निवास----छाउनि----छाउणी----केंटोनमेंटु, शिबिरमु----राणुवदळम----पाळयं----दंडु----
1092छिड़कनासकारात्मक क्रिया----जल या कोई तरल पदार्थ इस प्रकार फेंकना कि उसके छींट बिखर कर चारों ओर पड़ें।----छिड़कना----छिड़कना----छिरकावुन----छटणु, छिपकाइणु----शिपडणें----छांटवुं----छिटानो----छटिया----छिटिकिबा----च़ल्लुट---तॆळिक्क----तर्कक्कुक----चिमुकिसुवुदु, सिंपडिसुवुदु----
1093छिड़कावपुंलिंग----छिड़कने की क्रिया या भाव।----छिड़काअ----छिड़काव----छिरकाव----छिण्कार, छट----शिडकाव----छांटणी, छाँटणुं----सेंचन----छटिया----सिंचिबा----चल्लिक----तॊळित्तल----तळिक्कल----चिमुसुविकॆ----
1094छिपानासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---किसी प्राणी या वस्तु को ऐसी जगह या स्थिति में रखना जहां कोई देख न सके, आवरण या ओट में रखना, ढांकना;किसी को किसी बात की जानकारी न कराना या न होने देना।---लुकाउणा, छिपाउणा----छुपाना (छिपाना)----च़ूरि थावुन, खटुनच़ूरिथावुन---लिकाइणु, छिपाइणु----लपविणें, छपविणेंलपविणें---छुपाववुं, गुप्त, राखवुंछुपाववुं---लुकानोगोपन करा---लुकुवालुकुवा---लुचाइबा, छपाइबाप्रकाशित न करिबा---दाच़ुटदाच़ुट---ऒळिक्कमरै॒क्क---ऒळिक्कुकअरि॒यिक्कातिरिक्कुक---मुच्चिडुवुदु, मरेमाडुवुदुगुट्टागिडुवुदु---
1095छींकनाअकारात्मक क्रिया----नाक और मुंह से इस प्रकार सहसा जोर से सांस फेंकना कि जोर का शब्द हो, छींक लेना, छींक आना।----निच्छणा----छींकना----पँदुंन----छिको----शिकणें (शिंकयेणें)----छींकवुं---------हॉचि मार----छिकिबा----तुम्मुट----तुम्म----तुम्मुक----सीनुवुदु----
1096छीननासकारात्मक क्रिया----किसी से कोई वस्तु आदि जबर्दस्ती ले लेना।----खोहणा----छीनना----थपिन्युन----फुरणु, खसणु----हिसकावून घेणें----छीनववुं, आंचकी लेवुं----छिनानो, काड़ा----काढ़----छिनिबा (छड़ाइनबा)----लागुकोनुट----पिडुंगिक् कॊळ्ळ----तट्टिप्परि॒क्कुक----कित्तुकॊळ्ळुवुदु----
1097छीलनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---किसी चीज के ऊपर जमे या सटे हुए आवरण, तह अथवा परत को खींच कर उससे अलग करना;उगी या जमी हुई चीज को काटकर या खुरचकर अलग करना।---छिल्लणा----छीलना----जुलुन----छिलणुखुरिड़णु---सोलणें, तासणेंखरवडून काढणें---छोलवुंवीणवुं---छोलाछोला, चोंचा---बखलिया, चेलाबखलिया---छेलिबा----चेक्कुतीयुट वलुचुटदोकुट---तोल् उरिक्कवळर्न्द/उरै॒न्द वस्तुबै वॆट्टि/शरंडि, ऎडुक्क---चीन्तुक, पॊळिक्कुककीरि माट॒टुक---सुलियुवुदुकॆत्तुवुदु, कॆरॆयुवुदु---
1098छुट्टीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--काम बंद रहने का दिन;जाने की अनुमति;छुटकारा।--छुट्टी----छुट्टी (तातील)रुख़्सतरिहाई--छुटीछुटीछुटी--मोकलमोकल, इजाज़तछोटिकारो--सुटका, सुट्टीपरवानगीसुटका--छुट्टीपरवानगीछुटकारो--छुटिछुटिर मञ्जुरि, छाड़छुटि, मुक्ति, निष्कृति--छुटी, बंदबिदायअवकाश--छुटि दिनअनुमति---सेलवुसेलवुमुक्ति--विडुमुरै॒पोह अनुमदिविडुदलै--ऒळिवुपोकानुळ्ळ अनुवादंमोचनं--रजअनुमतिबिडुगडॆ--
1099छुरापुंलिंग----लंबे फलवाला बड़ा चाकू।----छुरा----छुरा----श्राख, छुर्य----छुरो, खंजरु----सुरा----छरो----छोरा----कटारि, छुरि----छुरा----कत्ति----पॆरिय कत्ति----बलिय कत्ति----बाकु----
1100छूटस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--बंधन आदि से मुक्ति, छुटकारा;रियायत, सुविधा;कुछ करने की आजादी।--छोटछोटखुल्ह--छुटकारा (रिहाई)रिआ़यतछूट--मॅकु॑जारमॅकु॑जारमॅकु॑जार--छोटिकारोलाथि, छूटिछूटि--सुटका, सोडवणुकसोय, सूटसूट--छूटमोकळाशस्वतंत्रता--छाड़, मुक्तिछाड, विशेष सुविधाछाड़, छूट--मुक्तिसुबिधा, रेहाइसुबिधा--मुक्तिरिहाति सुविधास्वतंत्रता--मुक्तिसौकर्यमुस्वातन्त्र्यमु--विडुदलैविलक्कु, विट्टुक्कोडुत्तल्शॆद्य उरिमै--इळवु, मोचनंसौजन्यंप्रवर्तन स्वातंत्र्यं--बिडुगडॆरियायतिस्वांतत्र्य--
1101छूतस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---गंदी, अशुचि या रोग संवाहक वस्तु का स्पर्श या संसर्ग;अपवित्र वस्तु को छूने से होने वाला दोष।---छूतमिट्ट---आलूदगीनजासत---लागलाग---छूतिछूति---विटाळविटाळ---छूतअपवित्र वस्तुने स्पर्शवाथी लागतो दोष---छुत, छोंयाचछुत---चुवा अशुचिचुवा होवा कार्य---छुआअपबित्रवस्तु स्पर्श जनित दोष---अंटुअंटु---(तॊडक्कूडाद पॊरुळै) तीण्डुदळ्तीण्डल्---तॊटलतीण्डल्---स्पर्शअशौच, मैलिगॆ---
1102छूनासकारात्मक क्रिया----किसी वस्तु का शरीर के किसी अंग अथवा पहने हुए वस्त्र से लगना या स्पर्श होना।----छोहण----छूना----अथु॑लागुन----छुहणु----स्पर्श करणे----अडवुं----छोंया, छोंयानो----चो----छुइंबा----ताकुट----तॊड----तोंटुक----मुट्टुवुदु----
1103छेड़नासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---किसी को उत्तेजित करने के लिए कुछ कहना या करना, चिढ़ाना;किसी वस्तु को इस प्रकार छूना या स्पर्श करना कि उसके फलस्वरूप कोई क्रिया या व्यापार घटित हो।---छेड़ना----छेड़ना----त्रुस द्युन----छेड़णु, चेड़ाइणुछेड़णु---खोडी काढणें, चिडविणेंसुरूवात करणें, हाती घेणें---छेडवुं, अटकचळु करयुंटकोरवुं---चाटानों, रागानोज्वालातन करा---जोकाचो---चिड़ेइ उत्तेजित करबि (चिढ़ाइब)जेडं छुंइबा द्वारा कौणसि क्रिया घटे---रेकेत्तिंच़ुटरेकेत्तिंच़ुट---वंबुसॆय्यचीण्ड---इळक्कुक, शुंठि पिटिप्पिक्कुकतॊट्टुणर्त्तुक---रेगिसुवुदु, कॆणकुवुदुमुट्टुवुदु---
1104छेदनासकारात्मक क्रिया----छेद अथवा सुराख करना।----छेक पाउणा----छेदना----ज़ॊद करुन----टुंगु करणु, सलणु----भोक पाडणें----छेदवुं, कांपवुं, छिद्र काणुं पाडवुं----छेदा करा----बिंध----छेदिबा, कणा करिबा----चिल्लिपोडुचुट, रंध्रमुचेयुट----तुळै पोड----ओट्टयुण्डाक्कुक, तुळय्कुक----तूतु माडुवुदु----
1105छोटाविशेषणविशेषणविशेषण--मान, विस्तार आदि में अपेक्षाकृत या थोड़ा।उम्र में कम।तुच्छ, हीन।--छोटा----छोटाख़ुर्दअद्ना--लॅकुट, छ़ॊटलॅकुट, छॊटलॅकुट्, छ़ॊट--नंढोनंढोनंढो, खसीसु--लहानवयाने लहानतुच्छ, हीन--नानुंउमरमां नानुंहलकुं--छोटोछोटोछोटो--सरुसरुतुच्छ, हीन--छोटबयसरे कमतुछ, हीन--चिन्नचिन्नचिन्न--सिरि॒यइळैयअर्पमान--चॆरि॒यइळयतुच्छमाय--चिक्क, सण्णकिरियतुच्छ, तीर, अल्प--
1106छोड़नासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियाबंधन से मुक्त करना, स्वतन्त्र करना;माफ करना;त्याण देना;चलाना, फेंकना।किसी कार्य या उसके अंग को न करना या भूल से छोड़ देना।छड्डणा----छोड़ना----त्रावुनमाफ करुनत्रावुनदॊरिथ द्युनमॆशिथ ग़छुनछड्णु--हलाइणु, उछिलाइणुछडणुसोडणें, स्वतन्त्र करणेंमाफ करणेंत्यागणेंचलविणें, फेंकणेंअपुरे सोडणेंछोडवुं, मुक्त करवुंमाफ करवुं, दर गुजर करवुंतजवुंफेंकवुंअधूरूं छोडवुंछाड़ाछाड़ा, क्षमा कराछाड़ाचालानो, छोंडाछाड़ाएरि दे, मुक्त करक्षमा कर, एरि देत्याग करपेलाआधरुवा करछाड़िबामाफ करिबा, (ख्यमा-करिब्य)त्याग करिबाफोपड़ि देबा, करिबा निक्खेप-करिबाछाड़ि देबाविडुदलचेयुटक्षमिंचुटत्यजिंच़ुट, वदलुटविसरुटमरचुटविट्टु विड, विडुदलै शॆय्ममन्निक्कविट्टुविडसॆलुत्त, ऎय्यवेलैयिन् ऒरु पगुदियै विडविटुक, स्वतंत्रराक्कुकक्षमिक्कुकउपेक्षिक्कुकविटुक, ऎरि॒युकविट्टुकळयुकबिडुगडॆमाडुवुदु बिट्टुबिडुवुदुमन्निसुवुदुत्यजिसुवुदुऎसयुवुदु, बिडुवुदुविडुवुदु
1107छोरपुंलिंग----अंतिम सिरा, किनारा।----सिरा----किनारा (कनारा)----किनारु॑----छेड़ो, सिरो----टोक, शेवट सीमा, कांठ----छेडो----खुटे, प्रांत, किनारा----पारि, किनार, मूर----किनारा----अंच़ु----ओरम्, करै----तीरं, अट॒टं॒----तुदि, दड----
1108जंगपुंलिंगपुंलिंग---युद्ध;वायु और नमी के प्रभाव से उत्पन्न होकर लोहे पर जमने वाला मैला या विकृत अंश।---जंगजंगाल, जंग---जंगज़ंग---जंगजंगारु॑, ज़ंग---जंगिकटु, जंग---युद्ध, लढाईगंज---युद्धकाट---युद्धमारिचा, मरचे---युद्धमामर---जुद्धजंक---युद्धमु, पोराटमुतुम्पु---युद्दम्, पोर्तुरु---युद्धंतुरूंपु---युद्धतुक्कु---
1109जंगलपुंलिंगपुंलिंग---वन;निर्जन स्थान।---जंगल----जंगल----जंगल, वन----झंगलु----अरण्य वन, जंगलनिर्जन स्थान---जंगलनिर्जन स्थान---जंगल, वननिर्जन स्थान---हाबि, जंघलनिजान ठाइ---जंगल, बननिर्जन स्थान, एकान्त-स्थळ---अडविनिर्जन स्थानमु---काडुजननडमाट्ट मट॒ट॒ इडम्---काटुविजन स्थलं---काडुनिर्जन स्थान---
1110जंगलापुंलिंग----बरामदे, छज्जे आदि के किनारे-किनारे की गई रचना जिसमें लोहे या लकड़ी की छड़ें या जाली लगी हो।----जंगला----जंगला----काठकर, जंगलु॑----झंगिलो, कटहिड़ो----कठडा----जाळी----जानाला----खिरिकि----घेरे-लगाकिबा तार जालि अथवा काठ-जालि जालठा।----कटकटालु----किरादि----जनल्-अळि----कटकटॆ----
1111जंजीरस्त्रीलिंग----धातु की बहुत-सी कड़ियों को एक दूसरे में पहनाकर बनाई जाने वाली लड़ी, सांकल, श्रृंखला।----जंजीर----जंजीर----ज़ंजीर, हाँकल----ज़ंजीर----साखळी, शृंखला----जंजीर, सांकळ----शिकल, श्रृंखला----शिकलि----जंजीर, शिकुळि----बेडीलु, संकेळ्हु गोलुसु----संगिलि----चड्.ड.ल----सरपणि----
1112जंतुपुंलिंग----प्राणी, जीव।----जंत----जानदार----जानदार, ज़ीव (हि.)----जंतू, जीवु----जंतु----जंतु, नानु जीवडुं----जंतु, प्राणी, जीव----जंतु----जंतु----जंतुवु, प्राणि----पिराणि----जीवि----जंतु----
1113जकड़नासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---कोई चीज इस प्रकार कसकर पकड़ना या बांधना कि वह हिलडुल न सकें।शीत आदि के कोप से शरीर का ऐंठना या तन जाना, अकड़ना।---जक्ड़णाआक्ड़णा---जकड़ना----चीरुं र॑टुनकावरुन---जकिड़णुसीटिजणु, आकिड़िजवुं---जखडणेंआखडणें---जकडवुंसांधानुं अंगनु झलाई जवुं---शक्त करे धरा वा बांधाठाण्डाय देह असाड़ हओया देह---टानकै बांधठेंटुवा लाग, ठेटुवैधर---जाबुड़िबाशीत रे शरीर कड़ा हेबा---बिगिंच़ुटनीलुगुट---इरुक्किक्कट्टविरै॒त्तुपयोग---कुरुक्कुकविर॒ङ्ङलिक्कुक---बिगिदु कट्टुवुदुहिडिदुकॊळ्वुदु,जोमु हिडियुवुदु---
1114जगत्पुंलिंग----संसार, विश्व।----जगत----आ़लम, दुनिया----ज़गथ, सम्सार, दुनियाह----जगतु----जग, विश्व----जगत----जगत, संसार, विश्व----जगत, संसार----जगत----जगत्तु, प्रपंचमु----उलगम्----लोकं----प्रपंच----
1115जगतपुंलिंग----कुएं के चारों ओर बना हुआ चबूतरा जिस पर खड़े होकर पानी खींचा जाता है।----थड़ा, मण्ड----जगत---------खूह जी पग॒----विहिरी भोवतीचा चबुतरा----थाळुं----कुयार पाड़----जगत, रिं----जगती, कुअफदं----नुतिगट्टु----किणट॒टु मेडै----किणट॒टुकर----बावि कट्टॆ----
1116जगमगानाअकारात्मक क्रिया----अपने या दूसरे के प्रकाश से चमकने लगना।----जगमगाउणा----जगमगाना----चमु॑कुन, नपुंनपु॑करुन----बहिकणु, चिम्कणु----लखलखणें----झगमगवुं----झलझल करा, झलमल करा----जकमका----चकचक् हेबा----प्रकाशिंचुट मेरयुट----जॊलिक्क----प्रकाशिक्कुक, तिळङ्ङुक----थलथाळिसुवुदु----
1117जटिलविशेषण----कठिन, पेचीदा।----गुंझलदार----पेचीदा (मुश्किल)----पीचीदु॑----डुख्यो, पेचीदो----अवधड----जटिल, अटपटुं----जटिल, कठिन, जट-पाकान----जटिल, कठिन----जटिळ----जटिलमयिन----शिक्कलान----जटिलमाय, विषमं पिटिच्च----जटिल----
1118जड़-----जिसमें जीवन अथवा चेतना न हो, निर्जीव, अचेतन;पेड़-पौधों आदि का नीचे वाला मूल भाग जो जमीन के अंदर हो।---जड़जड़---जामिदमूल, जड़---जड़ (हि.) बेजान----जडु.पाड़, जड़---निर्जीव, अचेतन, जडमूळ---जड स्थूलजडमूळ---जडशिकड़---जड़, निर्जीवशिपा---जड़, निर्जीवचेर---जडमुब्रेळ्ळु---उण्रवट॒ट॒वेर्---जडं, जीवनिल्लात्तवेरु---निर्जीव, जडबेरु---
1119जनगणनास्त्रीलिंग----किसी देश या राज्य के निवासियों की गिनती।----मरदमशुमारी----मर्दुमशुमारी----मॆंरदुम शुमारी----आदमशुमारी----खाने सुमारी----वसति (ती) गणतरी----लोकगणना, आदमशुमारि----जनगणना----जनगणना----जनाभालेक्क----तॊगैकणक्कु----जनसंख्य ऎटुक्कल् कानेषुमारि----जनगणनॆ----
1120जनजातिस्त्रीलिंग----जंगलों, पहाड़ों आदि पर रहने वाली पिछड़ी जाति जो साधारणत: एक ही पूर्वज की वंशज हो और जिसका प्राय: एक ही पेशा, रहन-सहन और विचार आदि हो।----जनजाती----क़बीला----कबीलु॑----कबीलो, जनजाती----वन्य जमाती----आदिवासी----उपजाति----जनजाति----गिरिजन, जंगली, आदिबासी----आदिमजाति----पऴंकुडि मक्कळ्----गोत्रजाति----बुडकट्टु----
1121जनतंत्रपुंलिंग----ऐसी शासन प्रणाली जिसमें देश या राज्य का शासन जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा होता हो।----लोकतंतर, जनतंतर----जुम्हूरियत----जॊम्हूर्यथ----रैयती राजु, जनतंत्रु----लोकशाही----प्रजासत्ताक राज्यतंत्र रिपब्लिक----गणतंत्र, जनतन्त्र----गणतंत्र----गणतंत्र (गणतंत्र)----प्रजाप्रभुत्वमु----कुडि आट्चि----प्रजायत्तभरणं----प्रजातंत्र----
1122जनतास्त्रीलिंग----किसी देश या राज्य में रहने वाले व्यक्तियों की संज्ञा, जनसाधारण, प्रजा।----जनता----अ़वाम----जनता, अवाम----जनता, रिआया----जनता----जनता----जनता, जनसाधारण----जनता, प्रजा----जनता----प्रजलु----पिरजैगळ्, पॊदु मक्कळ्----जनत----प्रजॆ----
1123जनेऊपुंलिंगपुंलिंग---हिंन्दुओं में बालकों का यज्ञोपवीत नामक संस्कार जिसमें सूत की तिहरी माला पहनाई जाती है;यज्ञोपवीत, ब्रह्मसूत्र।---जंजू, जनेऊ----ज़ुन्नार बंदीज़ुन्नार---योनियोनि---जण्यो; जण्यो पाइण जो संस्कारुजण्यो---जानवेंब्रह्मसूत्र, यज्ञोपवीत---जनोईयज्ञोपवीत---यज्ञेपवीत संस्कारउपवीत, पइता---लगुण क्यिनि, उपवयनउपवीत यज्ञसूत्र लगुण---उपनयन (यज्ञेपबीत)पइता, जज्ञेपवीत---ज़न्देमुयज्ञोपवीतमु---उपनयनम्, पूणूल् पोडुदलपूणूल्---उपनयनं, पूणूल्कल्याणंयज्ञेपवीतं, पूणुनुल्---मुंजिजनिवार, यज्ञोपवीत---
1124जन्मकुंडलीस्त्रीलिंग----वह चक्र जिसमें जन्मकाल के ग्रहों की स्थिति बताई गई हो।----जन्म कुंडली----ज़ाइचा----टॆकिन्य----छटी, जन्मकुंडली----जन्म पत्रिका----जन्म-कुंडली (ळी)----जन्म-पत्रिका, कोष्ठी, ठिकुजि----सोंवरणी, जन्म पत्रिका कोष्ठी----जातक (जन्म-कुण्डळि)----जातकमु----जादगम्----जातकं----जातक----
1125जन्म-दिनपुंलिंग----वह दिन जब किसी ने जन्म लिया हो।----जनमदिन----यौमे पैदाइश (यौमे विलादत)----वॊहरु॑ वोद, ज़ादोह----जन्म जो डीं॒हुं जन्म-दिन----बाढदिवस----जन्मदिन----जनम दिन----जन्मदिन, जन्म दिवस----जन्मदिन----जन्मदिनमु, पुट्टिनरोजु----पिर॒न्द नाळ्----पिर॒न्नाळ्----हुटिट्द दिन----
1126जन्म भूमिस्त्रीलिंग----वह देश, राज्य या स्थान जहां किसी का जन्म हुआ हो।----जम्मण-भों, जनम-भूमी----मौलिद (जाए पैदाइश)----ज़्यनु॑ जाय मादरि वतन----जन्म भूमी----मातृभूमि----जन्मभुमि----जन्मभूमि----जन्मभूमि, मातृभूमि----जन्मभूमि----जन्म भूमि----पिर॒न्द नाडु----जन्म भूमि----जन्म भूमि----
1127जपनासकारात्मक क्रिया----फल-प्राप्ति के लिए किसी शब्द, पद, वाक्य आदि को श्रद्धापूर्वक मन ही मन बार-बार कहना।----जपणा----जपना (विर्द करना)----ज़पुन----जपणु----जपकरणें----जपवुं, रटवुं----जपा, जपकरा----जप, नाम ल----जपिबा----जपिंच़ुट----जबिक्क----जपिक्कुक, उरूविटुक----जपिसुवुदु----
1128जबरदस्तविशेषण----प्रबल अथवा स्वभाव से कड़ा (व्यक्ति)।----जबरदसत----ज़बरदस्त----ज़बर्दस्त----ज़बर्दस्तु----जबरदस्त, बळकट (व्यक्ति)----जबरदस्त----जबरदस्त, दुर्दान्त----कठोर, दृढ़, सबल----जबरदस्त----बलर्मायन----वलुवान----प्रबलनाय----जोराद, बलिष्ठ----
1129जमाविशेषणस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग-बचाकर या जोड़कर रखा हुआ।मूलधन, पूंजी;जोड़ (गणित) ;खाते या बही का वह भाग या कोष्ठक जिसमें प्राप्त हुए धन का ब्योरा दिया जाता है।-जमां----जमाशुदासरमायामीज़ानजमा-जमाहजमाहजमाहजमाह-जमा, जमउ कथलुमूड़ीजोडु.आग॒ति, जमा-जमाभांडवलबेरीज (गणित)खात्यातील जमेची बाजू-जमामुछलसरवाळोजमा बाजनुं खातुं-जमाजमा, मूलधनसमष्टि, मोट संखाआमेर हिसाब-जमामूलधनयोगजमा-जमामूळधनमिशाण (मिशाण)बहि-खाता-जमकट्टिनपेट्टुबडिकूडिकजम-शेर्त्तुकैक्प्पट्टमुदल्कूट्टुत्तॊगैवरवु वैक्कुम पगुदि-संपादिच्च, चेर्त्तु वॆच्चनिक्षेपं, मूलधनंकूट्टल्वरवु कोळं-मॊत्त, ऒट्टुगूडिसिदबंडवाळ, मूलधनकूडुवुदुजमा-
1130ज़मानतस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---वह जिम्मेदारी जो न्यायलय द्वारा इस रूप में दी जाती है कि यदि कोई व्यक्ति विशेष समय पर कोई काम नहीं करेगा तो उसका दंड या हरजाना भरा जाएगा (बेल) ;वह धन जो कोई जिम्मेदारी लेते समय किसी अधिकारी के पास जमा किया जाता है (सिक्योरिटि)।---जमानत----ज़मानत----ज़मानथज़मानथ--------जामीनजामीन---जामीनजामिन गीरी---जामिन, जमानतजामिन स्वरूप प्रदत्तत का---जामिनआमानत---जामिनजामिन टंका---जामीनुजामीनु---जामीन्पिणैयम्---जाम्यंसॆक्यूरिटि॒ट॒, जाम्यत्तुक---जामीनुआधार---
1131जमानासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---किसी तरल पदार्थ को शीत अथवा अन्य किसी प्रक्रिया से ठोस बनाना;एक वस्तु को दूसरी वस्तु पर दृढ़तापूर्वक स्थित करना या बैठाना।---जमाउणा----जमाना----जमावुनबॆहनावुन---ज॒माइणुखुपाइणु---घट्ट करणेघट्ट बसविणे---जमाववुंस्थिर के दृढ़ करवुं---जमानो, जमाट करा----डाठ कर, जमा गोट मराखाप खुवाइ थ---धनीभूत करिबा (जाइबा)----गड्डकट्टिंचुटस्थापिंचुट---उरैयच्चॆय्यनन्गु पॊरूत्ति वैक्क---कट्टियाक्कुकउर॒प्पिक्कुक---गट्टिमाडुवुदुकूड्रिसुवुदु---
1132ज़मानापुंलिंग----काल, समय।----जमाना----ज़माना----ज़मानु॑---------काळ, समय, जग----जगतना लोको----युग, काल, समय----काल, समय----काळ, समय----कालमु----कालम्----कालं----काल----
1133जमींदारपुंलिंग----जमीन का मालिक, भूमि का स्वामी।----जिमिंदार----ज़मींदार----ज़मीनदार----ज़मीदारु----जमीनदार----जमीनदार----जमिदार----जमींदार, माटिर मालिक----जमीदार----जमीन्दारु----जमीन्दार, निलक्किऴार्----जमीन्दार॒ भूस्वामी जन्मि, निलवुटम----जमीनुदार----
1134जम्हाईस्त्रीलिंग----एक शारीरिक व्यापार जिसमें, मनुष्य गहरा सांस लेने के लिए पूरा मुंह खोलता है (यानिंग)।----उबासी----जम्हाई----ज़ामन----उबा॒सी----जांभई----बगासुं----हाइ----हामि----हाई मारिबा----आबुलिंत----कॊट्टावि----कोट्टुवा---आकळिकॆ----
1135जयंतीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---जन्मतिथि पर मनाया जाने वाला उत्सव;किसी महत्वपूर्ण कार्य के आरंभ होने की वार्षिक तिथि पर होने वाला उत्सव।---जयंती----जश्ने सालगिरहजुबली (सालाना जश्न)---जयन्तीजयन्ती---जयंती----जयंतिवाढदिवस---जयंतीजन्म दिवस---जन्मोत्सवजयन्ती---जन्मोत्सवजयंती---जन्मदिनजयन्ती---जयंतिजयंति---पिर॒न्द नाळ् बिऴावर डान्दिर विऴा---जन्मोत्सवंवार्षिकोत्सवं---जयंतिवार्षिकोत्सव---
1136जय-मालास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---विजेता को पहनाई जाने वाली माला;विवाह के समय फूलों आदि की वह माला जो कन्या अपने भावी पति के गले में डालती है।---जैमाला----जयमाला----जय-मालजय-माल---जय-मालावरमाला---जयमाळवरमाला---जयमालजयमाला, वरमाळा---जय माल्यमाला---जयमालाबरमाल्य---जयमाळाबख्माळा---जयमालवरमाल---वॆटटि वाहैमण्पण् मणमगनुक्कुं अणिविक्कुं मालै---जयमाल्यंवरणमाल्यं---जयमालॆमालॆ वरमालॆ---
1137जरीस्त्रीलिंग----सोने के वे तार जिनसे कपड़ों पर बेल-बूटे आदि बनाए जाते हैं।----जरी----ज़री----ज़री---------जर----जरीनो तार----सोनाली जरि----गुना---------जरी----जरिगै----जरिककंपि, कसवु----जरतारि----
1138जरूरक्रिया विशेषण----अवश्य।----जरूर----ज़रूर----ज़रूर----ज़रूर----अवश्य, जरूर----जरूर----अवश्य, निश्चय, जरूर----अवश्ये, निश्चय----जरूर, अबश्य----तप्पकुण्ड----अवसियम्, कट्टायम्----तीर्च्चयायुं----खंडित, अगत्य----
1139जर्जरविशेषणविशेषण---(वस्तु) कमजोर, बेकाम;खंडित, टूटा-फूटा, जीर्ण।---जरजरा----बोसीदा, ख़स्ता----ज़ॅज्रुरज़ॅज्रुर योमुत---कमज़ोरुभग॒लु, भर्यलु---जर्जरजीर्ण, तुटलेली फुटलेली---जर्जरजीर्ण: तूटेलुं फूटेलुं---जर्जर, अकेजोजींण, भङाचोरा---जर्जर, दुर्बलभङा-छिडणा जराजीर्ण---जर्जर----जर्जरमयिनशिथिळमयिन---उबयोगमट॒ट॒उबयोगमट॒ट॒---जर्जरमाय, बलहीनमायजर्जरमाय, बलहीनमाय---जीर्ण, सवॆदभग्नवाद, पाळुबिद्द---
1140जलचरपुंलिंग----जल में रहने वाले जीव जंतु।----जलचर----आबी जानवर----पान्युक जानवर आबुक जानवर----जल-चरु, जल-जीवु----जलचर----जलचर----जलचर----जलचर----जळचर----जलचरमु----नीर-वाऴव्न----जलजीवि----जलचर----
1141जलनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया--आग का संयोग होने पर किसी वस्तु से लपट, प्रकाश, ताप या धुआं आदि निकलने की स्थिति;उक्त प्रकार के संयोग से विकृत होना, झुलसना या भस्म होना;ईष्या, द्वेष आदि से कुढ़ना, संतप्त होना।--सड़णा----जलना----दज़ुन-रेह गंडु॑न्य--ब॒रणुसड़णुसड़णु--जळणेंजळणेंजळफळणें--जळवुं, बळवुं, सळगवुंवळवुंइर्षा करवी--ज्वला, पोडापोड़ाज्वला--जलजलि नष्ट हजलि उठ--जळिबापोड़िबिकृत हेबा (ईबा)ईष्यरि कष्ट पाइबा--कालुट, मंडुटकालुटकालुट--ऎरियऎरिन्दु नाशमागपॊरा॒मैप्पड--कत्तुक (ती)कत्तिप्पोकुक, चारमाकुकअसूयप्पॆटुक--उरियुवुदुसुट्टुहोगुवुदु भस्मवागुवुदहॊंट्टॆकिच्चु पडुवुदु--
1142जलपानपुंलिंग----कलेवा, नाश्ता।----पाणी-धाणी, जलपान----नाश्ता----नाश्तु॑, चाय-पोन्य----चपो चूरो, नाश्तो----न्याहारी, फराळ, नाश्ता----नास्तो----जलयोग, जलखाबार----जलप्रपात----जळप्रात----अल्पाहारमु----शिट्टुण्डि, नाश्ता----लधु भक्षण----उपाहार, फलाहार----
1143जलप्रपातपुंलिंग----ऊंचाई से गिरने वाला, जल-प्रवाह, झरना (वाटर फाल)।----झरना----आबशार----आबशार----झर्णो, अबशरु----धबधबा, झरा----जलप्रपात, पाणीनो धोध----जलप्रपात----जलप्रपात----जळप्रपात----जलपातमु----नीर् वीळ्च्चि----वॆळ्ळच्चाट्टं----जलपात----
1144जलयानपुंलिंग----वह यान या सवारी जो जल में चलती हो।----जहाज----बहरी जहाज़ (जहाज़)----समंदरी जहाज़----पाणिअ में हलंदडु, (बेडी॒, जहाजु वगैरह)----जहाज----जलयान----जलयान (ण)----जलयान----जळयान----नाव, जलयानमु ओड----पडगु, कप्पल्----तोणि, वळ्ळं, कप्पल----हडगु----
1145जलवायुपुंलिंग----किसी प्रदेश की प्राकृतिक या वातावरणिक स्थिति जिसका विशेष प्रभाव जीवों, जंतुओं वनस्पतियों आदि की उपज, विकास तथा स्वास्थ्य पर पड़ता है (क्लाइमेट)।----पौण-पाणी----आबो हवा----आबु॑ हवा----आब-हवा----हवामान----आबोहवा, हवापाणी----जलवायु, आबहाओया----जलबायु----जळबायु----शीतोष्णस्थिति----तट्प-वॆट्प निलै----शीतोष्णावस्थ कालावस्थ----वायुगुण----
1146जलसापुंलिंग----उत्सव, समारोह, अधिवेशन, बैठक।----जलसा----जलसा----जलसु॑----जल्सो----सभा-समारंभ, उत्सव, जलसा----जलसो----जलसा, उत्सव, समारोह----उत्सव, अधिवेशन, बैठक----उत्सव, अधिबेशन----जातर, उत्सवमु----विऴा----उत्सवं, सम्मेलनं----उत्सव, अधिवेशन----
1147जलाशयपुंलिंग----तालाब, झील।----तलाअ----तालाब----तलाव----तलाउ, ढंढ वगेरह----तलाब, सरोवर, जलाशय----जलाशय----जलाशय, पुकुर----जलाशय, बिल----जळाशय, पोखरी----जलाशयमु, कोलन्----कुळम्, एरि----जलाशयं----कॆरे----
1148जलूस (जुलूस)पुंलिंग----गलियों, बाजारों, सड़कों आदि पर प्रचार, प्रदर्शन आदि के लिए निकलने वाला लोगों का समूह।----जलूस----जुलूस----जॊलूस----जलूस----मिरवणूक----सरघस----मिछिल, शोभायात्रा----शोभायात्रा----पटुआर, जनसमारोह (शोभायात्रा)----ऊरेगिंपु, उत्सवमु----ऊर्वलम्----जाथ, घोषयात्र----मॆरवणिगॆ----
1149जल्दीस्त्रीलिंग----शीघ्रता, तेजी, उतावलापन।----जलदी----जल्दी----जलदी----जल्दी----घाई, तांतडी, लवकर जलदी----जलदी----शीघ्रता, ताड़ा, जलदी----दुतगति, बेग----जल्दी----चरगा----जल्दी, शीक्किरम्----तिरक्कु, धृति----अवसर, गाडिबिडि----
1150जहांक्रिया विशेषण----जिस जगह, जिस स्थान पर।----जित्त्थे----जहाँ----यॆति----जिते----जेथे, ज्याठिकाणी----ज्यां----येखाने, ये स्थाने (ज)----जि ठारत, यॅत----जहि, जेउंठारे----ऎक्कडयिते----ऍविटॆ----ऎविटॆ----ऎलिल----
1151जहाजपुंलिंग----जलयान।----जहाज----जहाज़----जहाज़----जहाज़ु----जहाज----जहाज----ज़ाहाज----जाहाज----जाहाज----ओड----कप्पल्----कप्पल्----हडगु----
1152जांचस्त्रीलिंग----छान-बीन, परख, तहकीकात।----जांच----तहक़ीक़ात (जांच)----जाँच, तहकीकात----जाच, तहकीकात----तपासणी, चौकशी----तपास----याचाइ----परीक्षा, अनुसंधान----जांच----परीक्षॆ, विचारणॆ----आयवु----अन्वेषणं, परिशोधनं----परीक्ष, विचारण शोधनॆ----
1153जांचनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---किसी प्रक्रिया, प्रयोग आदि के द्वारा किसी वस्तु की प्रामाणिकता, शुद्धता आदि का पता लगाना;किसी बात, सिद्धान्त आदि की उपयुक्तता, सत्यता का पता लगाना।---जाचणा----जांचना----जाँचुन, परखुनजाँचुन, परखुन---जाचणु----तपासणेंतपासणें, चौकशी करणें---तपासवपासवुं---याचा, याचाइकरायाचाइ करा---परीक्षा, करि चाअनुसंधान कर---जांच करिबाअनुसंधान करिबा---परीक्षिचुटपरिशोधिंच्रुट विचारण सल्पुट---परीक्षिक्क, सोदिक्कपॊरुत्तम अल्लद उण्मैयै आराय---परीक्षिक्कुक, परिशोधिक्कुकसत्य स्थिति अन्वेषिक्कुक---शोधनॆमाडुवुदु, परीक्षिसुवुदुविमर्शिसुवुदु---
1154जागरणपुंलिंगपुंलिंग---जागते रहने की अवस्था या भाव;किसी उत्सव, पर्व आदि के उपलक्ष में रात को जागते रहने का भाव।---जगराता----बेदारीशब बेदारी (शबीना)---हुशयॉरीजागरथ, शब करुन---जाग॒रणु----जाग्राणजाग्रण---जागरणउजागरो---जागिया थाका, जाग्रत अवस्थाजागरण्---जागरणउजागरे थका भाव---जागरण----जागरण, मेलकुवजागरण, मेलकुव---विऴित्तिरुत्तलकण् विऴित्तल, मेन्मै पॆर॒---जागृति, जाग्रदवस्थउर॒क्कमॊऴप्पु---ऎच्चरजागरणॆ---
1155जाड़ापुंलिंगपुंलिंग---सरदी, शीत;शीतकाल।---पाला----सर्दी (जाड़ा)सर्मा (सर्दी)---सरदी, शिशुरवन्दु॑---थधिसियारो---थंडीहिवाळा, शीत काल---शरदी, ठंडीशीतकाळ---शीत, ठाण्डाशीत काल---जार ठांडाशीतकाल, जारकालि---जाड़/शीतशीतकाळ---च़लिच़लिकालमु---कुळिर्कुळिर् कालम्---तणुप्पुशीतकालं---चळि, शीतचळि, शीत---
1156जातिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---जात, संप्रदाय, नस्ल;पदार्थो या जीव-जन्तुओं की आकृति, गुण, धर्म आदि की समानता के विचार से किया हुआ विभाग, वर्ग।---जातजाती---ज़ात (नस्ल)जिंस, नोअ़---ज़ाथज़ाथ---जातिकिस्मु, जाति---जात, जमातवर्ग, प्रकार---जातिवर्ग प्रकार---जाति, सम्प्रदाय, वंशसमलक्षण अनुयायी विभाग---जातिश्रेणी, भाग---जातिश्रेणी-बर्ग---जातिजाति---जातिइनम्---जातिवर्गं---जातिवर्ग---
1157जादूपुंलिंगपुंलिंग---बुद्धि के कौशल और हाथ की सफाई से दिखाया जाने वाला कोई खेल जिसका रहस्य न समझने के कारण उसे अलौकिक कृत्य समझा जाए (मैजिक);किसी वस्तु का वह गुण या शक्ति जिसके कारण उस वस्तु की ओर लोग बरबस आकृष्ट हो जाते हैं, वशीकरण।---जादू----जादू (सिहर)----जोदूजोद---जादू----जादूवशीकरण---जादु, मंत्र-तंत्र के हाथ चालाकीनुं कामवशीकरण---जादु, यादुयादु, वशीकरण---यदु, मोहिनीबशीकरण---जादु, कुहुकबशीकरण---गारडि, इन्द्रजालमु, मायवशीकरणमु---जालविद्दैमाया जालम्, इन्द्रजालम्---इंद्रजालं, मंत्रजालंवशीकरणं---मंत्रगारिकॆ, इंद्रजालआकर्षणॆ---
1158जादूगरपुंलिंगपुंलिंग---जादू के खेल दिखाने वाला व्यक्ति;आश्चर्यजनक रीति से विलक्षण कार्य करने वाला।---जादूगर----जादूगर----जोदूगरजोदूगर---जादूगर----जादुगारजादुगार---जादु (दू) ग (गी) रआश्चर्यजनक रीते विलक्षण काम करवा वाळी व्यक्ति---जादुकर, यादुकरजादुकर, बाजिकर---यादुधरयादुकर---जादुगरबिलख्यणकार्य करिबा वाला---गारडिवाडुऐन्द्रजालिकुडु---जाल विद्दैक्कारन्अर्बुदस्सॆयल् सॆय्बवन्---ऐंद्र जालिकन्आश्चर्यकरमाय प्रवृत्तिकळ् चॆच्युन्नवन्---मोडिकार, मंत्रगार गारुडिगमाटगार, ऎद्रजालिक---
1159जानकारीस्त्रीलिंग----जानकार होने की अवस्था, गुण या भाव, परिचय।----जाणकारी----वाक़फ़ीयत, आगाही, इ़त्तिला----ज़ा॑न्यकारी----जा॒ण----महिती----जाणकारी----अवगति----ज्ञन, परिचय----ज्ञन, परिचय----परिचयमु, ऎरूक----अरि॒न्दिरूत्तल्----अनुभवं अरि॒वु----परिचय----
1160जाननासकारात्मक क्रिया----किसी बात, वस्तु, विषय आदि के संबंध की वस्तुस्थिति से अवगत होना।----जानणा----जानना----ज़ानुन----जा॒णणु----जाणणें, समजणें----जाणवुं, समजवुं----जाना, अवगत हओया----जान----जाणिबा----तेलिसिकोनुट----अरि॒य, तॆरिन्दुकॊळ्ळ----अरि॒युक, परिचयप्पॆटुक----तिळिदुकळांळ्ळुवुदु----
1161जानाअकारात्मक क्रिया----एक स्थान से चलकर अथवा और किसी प्रकार की गति में होकर दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए आगे या उसकी ओर बढ़ना, गमन या प्रस्थान करना।----जाणा----जाना----गछुन----वञणु----जाणें----जवुं----याओया (ज)----या----जिबा----वेळ्ळुट पोवुट----पोग----पोकुक, पुर॒प्पॆटुक----होगुवुदु----
1162जालपुंलिंगपुंलिंग---धागे, सुतली आदि की बुनी हुई वह छेदों वाली रचना जो चिड़िया, मछलियां आदि फंसाने के काम आती है;फंसाने की युक्ति या फंदा।---जाल----जाल----ज़ालज़ाल---जा॒रु, जा॒री----जाळेफसविण्याची युक्ति, जाळे---जाल (ळ)फांदो---जाल, फाँदफाँद, चक्रान्त---जालजाल, फंदी---जालफांद---वलवल---वलैपारि॒---वलकुरुक्कु---बलॆ, जालबलॆ---
1163जालसाजपुंलिंग----धोखाधड़ी करने वाला, धूर्त्त।----धोखेबाज़----जअ़लसाज़----ज़ालसाज़----जालसाज्रु----धूर्त्त----कपटी, धूर्त----जालियात, प्रतारक, शठ----धूर्त, बदमाच----धूर्त्त----मोसगाडु----मोशडि सॆयबवन्----वंचकन् चतियन्----मोसगार----
1164जाला-----मकड़ी द्वारा बुना हुआ जाला;आंख का एक रोग जिसमें पुतली पर झिल्ली-सी आ जाती है।---जाला----जाला----ज़॑लुर्य ज़ालपाह, ठ्यूर---जा॒रो (कोरीअड़े जो)जा॒रो (अख्युनि जी बीमारी)---जाळे (कोळ्याचे)डाळयांचा एक रोग---करोळियानुं जाळुआंखनी छारी---जाल (माकड़सार)छानि---मकरा जालजाल, चलिहा---बुढिआणि जाल (बुढ़िआणिजाल)परळ माड़िबा (आखि-रोग)---सालेपट्टुशुक्लमु---शिलन्दिक् कूडुकण नोय्---ऎट्टुकालि वलपाटरोगं (कण्णिलॆ)---बलॆकण्णिन पॊरॆ---
1165जालीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगविशेषण--कोई ऐसी रचना जिसमें प्राय: नियत और नियमित रूप से छेद या कटाव हो;एक प्रकार का कपड़ा जिसमें बहुत छोटे-छोटे छेद होते हैं।धोखा देने के लिए बनाया गया, झूठा, नकली या बनावटी।--जालीजालीजाह्ली--जालीजालीजअ़ली--जा॑ल्यजा॑ल्यजा॑ली--जा॒रीजा॒रीदार कपिड़ोजाली, नकुली--जाळीजाळीखोटे, नकली, बनावटी--जाळीजाळीतरकटी--जालिजालिदार कापडजालि, मेकि--जालिजाल-कापोरनकली, सजोवा--जालीजाली (कपड़ा)नकली--जालिजालिनकली--जालि वलैप्पिन्नल्जल्लात्तुणिपोलि--कृत्रिममाय, कळ्ळमायवलत्तुणिकृत्रिममाय--जालि, जाळंदरजाळु बट्टॆनकलि--
1166जासूसपुंलिंग----वह व्यक्ति, जो गुप्त रूप से अपराधियों, प्रतिपक्षियों आदि का भेद लेता हो। गुप्तचर, भेदिया।----जासूस, जसूस----जासूस (सुराग़रसाँ)----जोसूस----जासुसु----हेर, गुप्त पोलिस,----जासूस----गोयेन्दा, गुप्तचर----गुप्तचर----गुप्तचर, भेदिआ भेदुआ----गूढचारुडु----ऒट॒ट॒न् उळवाळि----चारन्----पत्तॆदार----
1167जासूसीस्त्रीलिंगविशेषण---जासूस का काम, पद या विद्या।जासूस संबंधी।---जासूसीजासूसी---जासूसीजासूसी---जोसूसीजासूसी---जासूसीजासूसी---हेरगिरीहेरगिरी विषयक---जासूसी----गोयेन्दा-गिरिगोयेन्दा सम्बन्धीय---चोरांचोवा पुलिसगुप्त अनुसंधानकारी---गुप्तचर-काम----गूढचारवृत्तिगुढचरि संबंधमयिन---उळवरि॒दल्मर्म (उळवु संबन्दमान)---चारवृत्तिकुटटान्वेषण पर॒माय---पत्तॆदारिपत्तॆदारिय---
1168जिज्ञासास्त्रीलिंग----जानने की इच्छा।----जगिआसा----तजस्सुस----ज़ानु॑नु॑च यछ़----जिग्या॒सा----जिज्ञासा----जिज्ञासा----जिज्ञासा (ग्याँ)----जिज्ञासा----जिज्ञासा----जिज्ञास----आवल्----जिज्ञास----कुतूहल, जिज्ञासॆ----
1169जितनाक्रिया विशेषण----जिस मात्रा या परिमाण में।----जिन्ना----जितना----यूत----जेतिरो----जितका----जेटलुं----यत (ज)----यिमान, यत----जेतेक----ऎन्तयिते----ऎन्द अळविल्----ऎत्र----ऎष्टु----
1170जिम्मेदारपुंलिंग----वह जिस पर किसी कार्य, वस्तु अथवा और किसी बात की जावाबदेही हो।----जुम्मेवार----ज़िम्मेदार (ज़िम्मादार)----ज़िसुवार----ज़िम्मेदारु, जवाबदारु----जबाबदार----जवाबदार----उत्तरदायी, जिम्मादार----उत्तरदायी----दायित्व बेबा व्यक्ति, उत्तरदायी----बाध्यतगलवाडु जवाबुदारु----पॊरुप्पुळ्ळ----चुमतलक्कारन्----जवाबदार----
1171जिलापुंलिंग----किसी राज्य का वह छोटा विभाग जो किसी एक प्रधान अधिकारी की देख-देख में हो और जिसमें कई तहसीलें हो (डिस्ट्रिक्ट)।----जिला----ज़िला----ज़िलु॑----ज़िलो----जिल्हा----जिलो, जिल्लो----जेला----जिला----जिला----जिल्ला----जिल्ला, मावट्टम्----जिल्ल----जिल्लॆ----
1172जीतनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---युद्ध, मुकदमा, खेल आदि में विपक्षी के विरुद्ध सफल होना;दमन करना, वश में करना।---जित्तणा----जीतना----ज़ेनुनज़ेनुन---जीतणु, खटणु----जिकणेंदमन करणें, वश करणें---जीतवुंवश करवुं---जेता, जय कराबाँचा, जीवित थाका---जयलाभ करजीवन अतिवाहित कर---जितिबाजीइबा---गेलुचुट, जयिंच़ुटवशपरचुकोनुट---वॆल्लउयिर् बाळ---जयिक्कुकज़ीविक्कुक---गॆल्लुवुदुदमन माडवदु---
1173जीनासकारात्मक क्रिया----जीवित रहना, जीवन के दिन बिताना।----जिउणा----जीना----ज़िन्दु॑ रोजुन----जीअणु----जिवंत राहणें----जीववुं----सिंड़ि----चिरि, जखला----सिड़ि----जीविंचुट----माडिप्पडि----पटि, एणिप्पटि----बदुकुवुदु----
1174ज़ीनापुंलिंग----सीढ़ी।----पौड़ी----ज़ीना----हेर----डा॒कणि----जिना, शिडी, पावडी----जीनो, दादरबारी, अलग कादेली सीडी------------------------निच्चेन मेट्लु---------मंट्टलु----
1175जीवपुंलिंगपुंलिंग---जीवधारी, प्राणी;प्राणियों में रहने वाला चेतन तत्व, जीवात्मा।---जीअ, जीव----जानदार (ज़ीरूह)रूहे हेवानी (रूह)---ज़ीव, जानदारज़ीवात्मा---जीवु----प्राणी, जीवजीवात्मा---जीव, प्राणीजीवात्मा---जीव, प्राणीप्राणियों में रहने वाला चेतन तत्व, जीवात्मा---जीव, प्राणीजीव, जीवात्मा---जीब----जीवमु, प्राणिजीवात्म---उयिरुळ्ळवै, पिराणिउयिर्, जीवात्मा---जीवि, प्राणिचैतन्यं, जीवात्मावु---ज़ीवजीवात्म---
1176जीव-विज्ञानपुंलिंग----वह विज्ञान जिसमें जीव जन्तुओं, वनस्पतियों आदि की उत्पत्ति, विकास, शारीरिक रचना तथा उनके रहन-सहन के संबंध में विचार किया जाता है (बायॅलाजी)।----जीव-विगिआन----हयातीयात इल्मुल हयात----जानदारनहुन्द सायनस----जीव-विज्ञान, इलमु हयात, जीव-विद्या----प्राणी-शास्त्र----जीव-विद्या----जीवविद्या, प्राणीविद्या----जीव-विज्ञान, प्राणी-विज्ञान----प्राणि विज्ञान----जीवशास्त्रमु----उयिर् इयल्----जन्तुशास्त्रं----जीव-विज्ञान----
1177जीवाणुपुंलिंग----सेन्द्रिय जीवों का वह मूल और बहुत सूक्ष्म रूप जो विकसित होकर नये जीव का रूप धारण करता है।----जीवाणू----जुर्सूमा----ज़ीवानु----जीविड़ो----सूक्ष्मजंतु----जीवडुं----जीवाणु----जीवाणु कीटाणु----जीबाणु----जीवाणुवु, सूक्ष्मजीवि----जीव-अणु----जीवाणु----जीवाणु----
1178जुआ (जूआ)पुंलिंगपुंलिंग---गाड़ी, हल आदि के आगे की वह लकड़ी जो जोते जाने वाले पशुओं के कंधों पर रखी जाती है (योक);धन आदि की बाजी लगाकर खेला जाने वाला खेल (गैंबलिंग)।---जूआजूआ---जुआ----अलु॑बा॑न्यज़ार---पाञारीजूआ---जोखड, जूंद्यूत, जुगार---धूंसरीजुगार---जोयालजुया---युँवलिजुवा---जुआळीद्युत क्रीड़ा, जुआ खेळ---काडिमानुजूदमु---नुगत्तडिशूदाट्टम्---नुकंचूतु---नॊगजूजु---
1179जुआरीपुंलिंग----जिसे जुआ खेलने का व्यसन हो।----जुआरी----जुएबाज़ (जुआरी)----ज़ार्य----जूआरी----जुगारी----जुगारी----जुयाड़ी, जुयारी----जुवारि, जुवारी----जुआड़ि----जूदरि----शूदाडुबवन्----चूताटि, चूतुकळिक्कारन्----जूजुकोर----
1180जुटनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---चीजों, व्यक्तियों आदि का इकट्ठा होना;किसी काम में जी लगाकर योग देना।---जुड़णा----जुटना----तनुमनु॑ लगुनजुटुन---जुड़णु, गडु थियणुजुंबणु---गोळा होणेंजुंपणें---जोडावुंजुंटवुं---जोटा, एकत्र हओया----गोट खामनपुति लाग---जुटिबा----जम अगुटलीन मगुट---ऒन्रु॒ सेरवेलैयिल् ईडुपड---ऒन्निच्चु चेरुकमनस्सु वयक्कुक---सेरुवुदु कूडुवुदुतल्लीननागुवुदु---
1181जुड़नाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---संबंध होना;इकट्ठा होना।---जुड़णा----जुड़णा----जुडुन, मेलुनमेलुन---जुड़णुगडु थियणु---जोडणेंएकत्र होणें---जोडावुंएकठा थवुं---संयु॒क्त हओया (ज)एकत्र हओया, जोटा---मेर खाइ थाक, साङोर खाएकत्रित ह---जोड़िबा----कलियुटकलियुट---इणैयऒन्रु॒ शेर---बन्धप्पॆटुकबन्धप्पॆटुक---सेरुवुदुसेरुवुदु---
1182जुड़वांविशेषणविशेषण---जिनका जन्म एक साथ हुआ हो;(कोई ऐसे दो या अधिक पदार्थ) जो आपस में एक साथ जुड़े, लगे या सटे हों।---जोड़े----जुड़वाँ----दुकु॑वेरिदुकु॑वेरि---जाड़ाजुड़्यलु---जुळी मुलेंजुळें---जोडियुंजोडकुं---यमजयुक्त, युग्म, जोड़ा---यँज़ासाङोर खाइ थका---जांआळा (जआंळा)----कवलपिल्ललुकवल---इरट्टैयानऒन्रागइणैन्द इरु पॊरुळ्गळ्---इरट्ट पॆट॒ट॒इरट्ट---अवळिसेरिकॊड़िरुव---
1183जुताई (जोताई)स्त्रीलिंग----जुतने या जोते जाने की क्रिया, भाव या मजदूरी।----वाही----जुताई----वायुन----जोटाणी----जुंपणें जाणें, मजुरी----हळ के गाडीए जोतरावुं----चाष, कृषिकर्म, चोषेर मजुरी----जोत----हळकरिबा----दुन्नट----उळुविकॆ उऴवुकूलि----उऴवु, उऴवुकूलि----उळुविकॆ----
1184जुरमाना (जुर्माना)पुंलिंग----किसी अपराध, दोष या भूल के दंड स्वरूप ली जाने वाली धनराशि, अर्थ दंड।----जुरमाना----जुर्माना----जुरमानु॑----डं॒डु----दंड----दंड----जरिमाना----जरिमना----जेरिमाना, अर्थदंड----ज़रिमाना----अबरादम्----पिऴ----जुल्मानॆ----
1185जूझनाअकारात्मक क्रिया----शारीरिक बल लगाते हुए प्रयत्न करना, संघर्ष करना, लड़ना।----जूझणा----भिड़ना----मुकाबलु॑----जुटणु, विढ़णु----झगडणें----झूझवुं----युझा, योझा----युँज----जुझिबा----कलियबडुट पोराडुट----मुळु बलत्तुडन् मुयर्चिक्क, पोराड----ऎतिरिटुक----होराडुवुदु----
1186जूड़ापुंलिंग----सिर के बालों को लपेट कर बनाया हुआ आकार-विशेष।----जूड़ा----जूड़ा----जूडु॑----चोटो----अंबाडा, बुचडा----अंबोडो----खोंपा----खोपा----जूड़ा----कोप्पु----कॊण्डै----तलमुटिक्कॆट्टु----तुरुबु----
1187जेबपुंलिंग----कुरते, कमीज़ आदि में रुपए-पैसे आदि रखने के लिए बनी हुई थैली (पाकेट)।----जेब, खीसा, बोझा----जेब----चन्दु॑----खीसो, जेबु----खिसा----जेब, खीसुं, गजवुं, खिस्सुं----पकेट----जेप----पकेट----जेबु----जेबि, शट्टैप्पै----पोक्कट॒टॅ----जेबु----
1188जेबकतरापुंलिंग----दूसरों के जेब के रुपए-पैसे उड़ाने वाला।----जेब कतरा----जेबकतरा (गिरहकट)----चन्दु॑च़ूर----गं॒ढी-छोडु, खीसेकपु----खिसेकापू----खीसा कातरु----पकेटमार, गाँटकाटा----पकेटमार----पकेट-मारु----जेबुदोंग----जेबडित् तिरूडन्----पोक्कट॒ट॒ टिक्कारन्----जेबुगळ्ळ----
1189जेलपुंलिंग----कारा, कारागार।----जेल----जेल, जेलख़ाना, कैदख़ाना----जेल----जेलु----तुरुंग----जेल, केदरवानुं----जेल----जेल, कारागार----जेल, काराणार----जैलु, कारागारमु----जयिल, शिरैच्चालै----जयिल्----जैलु----
1190जैसाविशेषणविशेषण---जिस आकार-प्रकार या रूप रंग का, जिस तरह का;समान, सदृश।---जिहा----जैसा----युथह्यू---जहिड़ोसाग्यो॒, अहुड़ो---जसा, जसे, ज्याप्रकारेसमान, सदृश---जेवुंसमान, सरखुं---ये॒मन (ज)मतन, सदृश---येनेकुवासमान, निचिना---जेषा (जेसा)समान, सदृश---ऎलागयितेसमानमु, मादिरि---ऎप्पडिप्पट्टपोन्र॒---यातॊरु प्रकारमुळ्ळसदृशनाय---ऎन्तहअंतह---
1191जोंकस्त्रीलिंग----पानी में रहने वाला एक कीड़ा जो अन्य जीवों के शरीर से चिपक कर उनका रक्त चूसता है।----जोक----जोंक----दु॑ख----जौ॒र----जळूं----जळो----जोंक----जोक----जोक----जलग----अट्टै----अट्ट, कुळयट्ट----जिगणॆ----
1192जोसर्वनामविशेषण---एक संबंधवाचक सर्वनाम जिसका प्रयोग पहले कही हुई किसी बात अथवा पहले आई हुई संज्ञा, सर्वनाम या पद के संबंध में कुछ और कहने से पहले किया जाता है।किसी अज्ञात या अनिश्चित बात का सूचक।---जो----जों----युस----जो, जेको----जो, जर, जरी----जे----ये॒, याहा (ज)यं॒, याहा (ज)---यियि---जेअज्ञात बा अनिश्चितता सूचक---एदयितेएदि---ऎन्दएदो---यातोन्नु, यातोरु आर॒यातॊन्नो---यारुयाव---
1193जोखिमस्त्रीलिंग----हानि, अनिष्ट, घाटे की संभावना, खतरा।----जोखम----ख़त्रा (ख़तरा)----खतरु॑----जोखमु----जोखिम, भय----जोखम----झुँकि----लोकचान, बिपद----हानि, अनिष्ट----अपायमु, विपत्ति----आघत्तु, आबायम्----नष्टसाध्यत----अपाय, गंडांतर----
1194जोड़नासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया--दो वस्तुओं या टुकड़ों को एक दूसरे के साथ चिपकाना, सीना, मिलाना आदि;अपनी ओर से कुछ मिलाना;गणित में संख्याओं का योग करना।--जोड़ना----जोड़ना----जोडुनजोडुनजोडुन--गंढणु, जोड़णुगं॒ढणुजोड़णु--जोडणेंवृद्धि करणेंबेरीज--जोडवुं, सांधवुंउमेरवुंसरवाळो करवो--जोड़ा, साँटाजुड़े देओया, मन थेके बानानोयो॒ग करा (ज)--जोड़ा लगायोग देयोग दे--जोड़िबा----कलुपुटचेर्च़ुटकूडुट--इणैक्कसेर्क्ककूट्ट--कूट्टि च्येर्क्कुककूट्टिच्चेर्क्कुककूट्टुक--जोडिसुवुदु, अंटिसुवुदुकूडिसुवुदुकुडुवुदु--
1195जोड़ापुंलिंगपुंलिंग---एक सी या एक साथ काम में आने वाली दो वस्तुएँ;एक ही प्रकार के जीवों का नर-मादा का युग्म।---जोड़ा----जोड़ा----जूर्यजूर्य---जोड़ो, जोड़ीजोड़ो---जोडीजोडपें---जोड़ी, जोडुंजोडुं---जोड़ा, जुड़ी, जुड़िजोड़ा, युग्म---जोड़ा, हालहाल---जोड़ा----ज़तज़ंट---जोडिऒरि इनत्तै शेर्न्द आण्-पॆण् जोडि---इरट्ट, जोटिस्त्रीपुरुष जोडि---जोडि, जॊतॆजोडि, दंपति---
1196जोतनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---कोई चीज घुमाने या चलाने के लिए उसके आगे कोई पशु बांधना;खेत को बोये जाने के योग्य बनाने के लिए उसमें हल चलाना।---जोणावाहुणा---जोतना----लागुनलागुन---जोटणु----जुंपणेंनांगरणें---जोतरवुंनांगरवुं---जोताचषा, लांगल देओया---जोतचाह कर---जुआळीरे, जोचिबाहळ करिबा---पून्चुटदुन्नुट---बाण्डियिल् पूट्ट एरिल् पूट्टउऴ---नुकत्तिल् केट्टुक, पूट्टुकउऴुक---हूडुवुदु, कट्टुवुदुउळुवुदु---
1197जोरदारपुंलिंगपुंलिंग---(व्यक्ति) जिसमें ज़ोर अर्थात् बल हो;(बात) जो तत्वपूर्ण और प्रभावशाली हो।---जोरावरजोरदार---ज़ोरदार----ज़ोरदारज़ोरदार---ज़ोरदारु----जोरदार, बळकटमहत्त्वपूर्ण, युक्तिसंगत---जोरदारमहहत्त्वपूर्ण---जोरालोतत्त्वपूर्ण कथा---बलवान्, बलीयुक्तिपूर्ण, युक्तिसंगत---जोरदारतत्त्वपूर्णकथा---बलमुगलशक्तिवन्तमयिन---बलत्तउरु॒दियान, शक्तिवायन्द---शक्तियुळ्ळसारमुळ्ळ---बलिष्ठ, गट्टिजोराद्, प्रभावपूर्ण---
1198जोर-शोरपुंलिंग----किसी काम को पूरा करने के लिए लगाया जाने वाला जोर और दिलाया जाने वाला उत्साह तथा प्रयास।----जोर-शोर----ज़ोरो-शोर----ज़ोरशोर----ज़ोर-शोर----धूम-धड़ाका, धामधूम----जोर-शोर----पूर्ण उत्साह----हात उजान दिया कार्य----जोरसोर----संरंभमु आर्भाटमु----दडबुडल्----उत्साहवुं आवेशवुं----हुम्मस्सु, संभ्रम----
1199जोशपुंलिंगपुंलिंग---आंच या गरमी के कारण द्रव-पदार्थ में आने वाला उफान, उबाल;आवेश, मनोवेग, उत्साह।---जोश----जोश----जोशजोश---उभामजोशु---आवेगआवेश, उत्साह---जोशजुस्सो---उथलानो, उपचानोआवेश, आवेग, उत्साह---गरम, उतलउत्साह---उत्तेजना, गरमि, उष्मता, उत्साहउत्साह---पोंगुआवेशमु, उत्साहमु---कॊदिप्पुउर्चाहम्---उत्साहंआवेशं---कुदि कुद्दु मेलॆबरुवुदुआवेश---
1200जौहरीपुंलिंग----हीरा, लाल आदि बहुमूल्य रत्न परखने और बेचने वाला व्यापारी।----जौहरी----जौहरी----लाल फरोश----जोहरी----जवाहिर्या----झवेरी----जोहुरी----जहरी, सोनारि----जोहरी (जहरी), हीरा रत्नादिर बिक्रेता----रत्नाल व्यापारि----रत्तिन वियापारि----रत्न व्यापारि----रत्नदव्यापारि----