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विक्षनरी:भारतीय भाषा कोश ०७

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1801पकड़नासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---थामना;बंदी बनाना।---फड़ना----पकड़ना----रटुनरटुन---पकड़णु----पकड़णें, धरणेंकैद करणें---पकडवुंकेदकरवुं---धराधरा, पाकड़ानो---राखधर---धरिबाबन्दी करिबा---पट्टुकोनुटपट्टुकोनुट---पिडिक्ककैदु सॆय्य---पिटिक्कुकतटविल् आक्कुक---हिडियुवुदुबंधिसुवुदु---
1802पकानासकारात्मक क्रिया----अन्न, फल आदि को इस प्रकार आंच, गर्मी आदि देना कि वे मुलायम होकर खाने योग्य हो जाएं (टू कुक)।----पकाउणा----पकाना----रनुन----पचाइणु, रधणु----शिजवणें----पकाववुं, रांधवुं----रांधा----रांध----रांधिबा----वंडुट----समैक्क----पाकं चॆय्युक वेविक्कुक, पळुप्पिक्कुक----अडिगॆ माडुवुदु, बेयिसुवुदु----
1803पक्काविशेषणविशेषण---दृढ़, निश्चित, स्थिर;अच्छी तरह से पका या पकाया हुआ।---पक्का----पक्का----दॊर, पॅखतुपाकनोवमुत---पक्कोपकलु---पक्का, दृढ़, निश्चितपिकलेला---पाकुं, पक्कुंपाकेलुं---पाका, स्थिरपाका---दृढ़, निश्चितपका---पक्का, दृढ़, स्थिररूधा-होइथिबा (भोजन-द्रव्य आदि)---गट्टिपंडिन---दिडमान, वलुवाननन्गु पऴुत्त, वॆन्द---उर॒च्चपऴुत्त, वेविच्च---दृढ़मागिद, बेयसिद---
1804पक्षपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--पक्षियों का डैना और उस पर के पंख;किसी विचार, सिद्धान्त या तथ्य आदि का एक पहलू;चन्द्रमास के दो बराबर भागों में से प्रत्येक भाग जो प्राय: 15 दिन का होता है, पखवाड़ा।--पक्ख----बाजूपहलूपखवाड़ा--पखपॊखपछ--परुपहलू, पासो, तर्फुपखु--पंखपक्ष, बाजूपंधरवडा--पक्ष, पांखतरफेणपखवाडियुं--डानापक्ष, दिक (क्ख)पक्ष--डेउका, पाखिदिश, पक्षपष, पक्ष--डेणा, पंखपख्यपख्य--रेक्कपक्षमुपक्षमु--शिरगुपक्कम्पक्षम् (15 नाळ्)--चिर॒कु, तूवलपक्षंपक्कं, पक्षं--रॆक्कॆपक्ष, कडॆपक्ष--
1805पक्षपातपुंलिंग----न्याय के समय अनुचित रूप से किसी पक्ष के प्रति होने वाली अनुकूल प्रवृत्ति।----पक्खपात----जानिबदारी/तरफ़दारी----तरफ़दारी, दॊर रटुन----पास्-खातिरी, तर्फ़िदारी----पक्षपात----पक्षपात, तरफदारी----पक्षपात (क्ख)----पक्षपात----पख्यपात----पक्षपातमु----पारपक्षम्----पक्षपातं----भेदभाव----
1806पक्षीपुंलिंग----परों वाला, पंछी, परिंदा।----पंछी----परिंदा----जानावार----पखी----पक्षी----पक्षी, पंखी----पक्षी, पाखि (पाखि)----चराइ----पक्खी, चड़ेइ----पक्षि----पक्षि, परवै----पक्षि----हक्कि----
1807पखवाड़ापुंलिंग----पंद्रह दिनों का समय, पक्ष।----पखवाड़ा----पखवाड़ा----पछ----पखु----पंधरवडा----पखवाडियुं----पक्ष (क्ख)----पष, पक्ष----पख्य----पक्षमु----पादिनैन्दु नाळ् (पक्षम्)----पक्कं, पक्षं----पक्ष----
1808पगडंडीस्त्रीलिंग----आने-जाने के कारण जंगल, खेत या मैदान में बना हुआ पतला या संकीर्ण मार्ग।----पगडंडी----पगडंडी----वतु॑ पॊद----वाट, चारो, पेचिरो----पाऊलवाट, पायवाट----पगदंडी----पाये पाये सृष्ट पथ----सुरुकीया बाट----चला बाट----कालिबाट----ऒट॒टै॒यडिप्पादै----ऒट॒ट॒यटिप्पात----कालुदारि----
1809पचानासकारात्मक क्रिया----खाई हुई वस्तु को पक्वाशय की अग्नि से रस में परिणत करना (टू डाइजेस्ट)।----पचाउणा----हज़्म करना----श्रॊपरावुन----पचाइणु, हज़मु करणु----पचविणें----पचाववुं----हजम करा----हजम कर----हजम करिबा----जीर्णमु चेसुकोनुट----जीरणिक्क----दहिप्पिक्कुक----जीर्णिसुवुदु----
1810पछतानाअकारात्मक क्रिया----पश्चाताप करना।----पछताउणा----पछताना----पछतावुन----पछिताइणु----पश्चाताप करणें----पस्तावुं----अनुताप करा----अनुतप्त ह----पश्ताइबा, अनुताप करिबा, पश्चाताप करिबा----पश्चात्ताप्पडुट----पच्चात्ताबप्पड----पश्चात्तपिक्कुक----पश्चात्तप पडुवुदु----
1811पछाड़नासकारात्मक क्रिया----कुश्ती अथवा प्रतियोगिता आदि में किसी को परास्त करना।----पछाड़ना----पछाड़ना----पावुन----दसणु (कुश्ती), हार डि॒यणु----आपटणें----पछाडवुं----परास्त करा, हारानो----पराजित कर----पराजित करिबा, हराइबा----ओडिंचुट----वेट्टि॒ पेरु॒दल----मरि॒च्चिटुक----सोलिसुवुदु----
1812पटकनासकारात्मक क्रिया----किसी व्यक्ति या वस्तु आदि को उठाकर झोंके के साथ पृथ्वी आदि पर गिराना।----पटकाउणा----पटकना----ठासुन----सटणु, हेठि केराइणु----आदळणें----पटकवुं----आछड़ानो, पटकानो----थेकेचा मारि थ----कचाड़िबा----पडवेयुट----इडित्तु कीऴै तळ्ळ----अटिच्चु वीळ्त्तुक----ऎत्ति अप्पळिसुवुदु----
1813पटरी (पटड़ी)स्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--सड़क के दोनों ओर का उठा हुआ पैदल-पथ;लोहे के लंबे छड़ जिन पर रेल-गाड़ी चलती है;काठ का छोटा पतला और लंबोतरा टुकड़ा, छोटा पटरा।--पटडी----पटरी----पटु॑रपटु॑रपटु॑रु॑--फुट पाथुरेल जो पटोपटी (काठ जी)--पायपथ, फूटपाथआगगाडीचे रूळलहान पाट--फूटपाथपाटोपाटलो--फुटपाथरेल लाइनतक्ति--फुटपाथरेलर यिरिपात--पादचला बाट (फुट-पाथ)रेलपटरीपटा, पीढ़ा--कालित्रोवपट्टालुपलक--नडै पादैरयिल् पादैशिरु॒ पलगै--फुटपाथ्, नटवळिपाळंपट्टिक--कालु हादिरैलु कंबिहलगॆ--
1814पटसनपुंलिंगपुंलिंग---सन या सनई नामक प्रसिद्ध पौधा जिसके डंठलों के रेशों से रस्सी, बोरे, गलीचे आदि बनाए जाते हैं;उक्त के रेशे, जूट।---पटसणह, सण----पटसन----सु॑तल, टाठसु॑तल, टाठ---सिणी----जूट, तागजूट, ताग---शणशणना रेसा---पाटपाटेर आँश---सन गछमरापात---काउंरिआ गछझोट---ज़नुमुज़नपनार---चणल् चॆडिचणल्---चणंचणं---सैणबिन गिडसॆणबु---
1815पटाखा (पटाका)पुंलिंग----एक प्रकार की आतिशबाजी जिससे जोर से पट या पटाक का शब्द होता है (क्रैकर)।----पटाका----पटाख़ा----टास, शोरु॑ बोबूस----फटाको----फटाका----फटाकडो----पटका, बाजि----फटका, क्रेकार----ताळ-फोटका, बाण----टपाकायलु----पट्टासु----पटक्कं----पटाकि----
1816पड़नाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---गिरना, रखे रहना;लेटना, बीमार होना।---पैणा----पड़ना----प्यॊनप्यॊन---पवणु, पियो रहणुपवणु, बीमारु थियणु---पडणें, पडून राहणेंपडणें, आजारी होणें---पडवुंपडवुं, मांदा पडवुं---पड़े थाकाअसुस्थ हओया---परशो, बेमार ह---पड़िबा----पडुटपडुकोनुट, पडकवेयुट---बिळ, वैत्तिरुक्कपडुक्क, नोयुर॒---वीऴुककिटक्कुक, रोगियाकुक---बीळुवुदुमलगुवुदु, काइलॆ बीळुवुदु---
1817पड़ावपुंलिंग----मार्ग में पड़ने वाला वह स्थान जहां सेना, काफिले, यात्री आदि कुछ समय के लिए विश्राम आदि करने को ठहरते हैं।----पड़ां----कार्वांसराए (सराए)----पडाव----पड़ाउ----मुक्काम, तळ----पडाव, मुकाम----चटि, शिविर----शिबिर----शिबिर----मजिली----पिरयणिरळ् वऴित्तंगुमिडम्----तावळं तावलं----बीडु----
1818पतंगस्त्रीलिंगपुंलिंग---बांस की कमानियां के ढांचे पर कागज़ मड़कर बनाई हुई वस्तु जिसे तागे से बांधकर हवा में उड़ाते हैं (काइट)।पतंगा, शलभ।---पतंगभंबट, पतंगा---पतंगपतंगा---पतंगपनु॑ पोंपुर---लगड़ुपतंगु, परवानो---पतंगपतंग (एककिडा शलभ)---पतंग, कनकवोंपतंगिवुं---घुड़िपतंग, शलभ---चिलाचगा---गुड़िपतंग---गालिपटमुमिडुत---कात्ताडि, पट्टम्विट्टिल् पूच्चि---पट्टंशलभं---गाळिपटदीपद हुळु---
1819पतनपुंलिंगपुंलिंग---अधोगति, गिरावट;स्तुत्य आचरण को छोड़कर हीन आचरण में प्रवृत्त होना।---पतन----ज़वाल----गिरावठगिरावठ---गिरावट----अधोगति, अपकर्ष, पतनअध: पतन---पतनअध:पतन---पतन, पातअधोगति---पतनअध: पातत---पतन----पतनमुपतनमु---वीऴ्च्चिकॆट्ट वऴियिळ् सॆल्लल्---पतनं, वीऴ्चअध:पतनं---अवनतिपतन---
1820पतलाविशेषणविशेषणविशेषण--जो गाढ़ा न हो, जिसमें तरल अंश अधिक हो;कृश, दुबला;संकरा, बारीक।--पतला----पतला (रक़ीक़)दुबलाबारीक--तॊनतॊन, पतलु॑ज़ा॑व्युल--छिडोसोढ़ोसोढ़ो--पातळकृश, सडपातळ, अशक्तबारीक--पातळुंकृश, अशक्त, नवळुंझीणुं--पातला, तरलकृशपातला, सरु--पातलदुर्वलमिहि--पतळा----पल्च़टिसन्ननिसन्ननि--गॆट्टियिल्लादमॆलिन्दमॆल्लिय--नेर्त्तमॆलिञ्ञइटुड्.डिय--तॆळ्ळगॆसोणकलादसण्णगॆ--
1821पतापुंलिंगपुंलिंग---किसी वस्तु, स्थान या व्यक्ति के ठिकाने का ऐसा परिचय जो उसे पाने, ढूंढने या उनके पास तक समाचार पहुँचाने में सहायक हो;किसी अज्ञात व्यक्ति, विषय आदि के संबंध में ऐसी जानकारी जिसे प्राप्त करना अभीष्ट या आवश्यक हो।---पता----पता----पता, एडरसपता---ऐड्रेस, सर्नामोपतो-ठिकाणों, जा॒ण---पत्ताशोध---सरनामुंपत्तो, बातमी---ठिकानाखोज-खबर---ठिकनापरिचय---ठिकणापरिचय---चिरुनामा, अड्रसुसमाचारमु---मुगवरितगवल्---मेल् विलासंविवरं---विळासगुरुतु---
1822पताकास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---झंडा, ध्वजा;साहित्य में (नाटक में) अधिकारिक कथा की सहायतार्थ दूर तक चलने वाली प्रासंगिक कथा।---झंडा, निशानपताका---पचर्म (झंडा)ज़ेली क़िस्सा---जंडु॑, अलम----झंडो, पताका(नाटक में) मुख्यु कथा सां लागू कथा---झेंडा, ध्वज, पताकानाटकातील प्रासंगिक कथा---पताका, ध्वजानाटक मां आवती आडकथा---पताका, झण्डापताका---पताका, निचानपताका---पताका----पताक, जंडापताक---कॊडिनाडगत्तिल् मुक्किय कदैयुडन् शॆल्लुम तुणैक्कदै---कॊटिपताक---बाउटपताकॆ---
1823पत्तनपुंलिंग----वायुयानों अथवा जलयानों के ठहरने का स्थान।----पत्तन----बंदरगाह----बन्दरगाह, हवाईअडु॑----पतणु----विमानतळ, बंदर----विमानी मथक, गोदी, बंदर----जहाजघाटा----वायुयान बा जलयानर का आड्डो---------आश्रयमु----पट्टणम्----विमानत्तावळं, तुर॒मुखं----विमान निल्दाण----
1824पत्तापुंलिंगपुंलिंग---पेड़-पौधों की शाखाओं में लगने वाले प्राय: हरे रंग के चिपटे लचीले अवयव (लीफ़);ताश (प्लेइंग कार्ड)।---पत्ता----पत्ता----पनु॑वथु॑रतास---पनुपतो, तास---पानपत्ते (प्लेइंग कार्ड)---पांदडुं, पानपानां---पातातास---पातताच पात---पत्र----आकुआकु---इलैविळैयाडुम् शीट्टु---इलचीटु---ऎलॆइस्पीटिन ऎलॆ---
1825पत्थरपुंलिंग----धातु से भिन्न कड़ा ठोस और भारी भूद्रव्य जो प्राय: खानों और पर्वतों को काटकर निकाला जाता है।----पत्थर----पत्थर (संग)----क॑न्य----पथरु----दगड----पथ्थर, पथरो----पाथर----शिल पाथर----पथर----राइ----कल्----कल्लु----कल्लु----
1826पत्रकारपुंलिंग----वह व्यक्ति जो समाचार पत्रों को नित्य नए समाचारों की सूचना देता, उन पर टीका-टिप्पणी करता अथवा उनको संपादित करता हो (जर्नलिस्ट)।----पत्तरकार----अख़्बारनवीस (सिहाफ़ी)----अखबार नवीस----पत्रकारु, अख्बार नवीसु----पत्रकार----पत्रकार----सांवादिक----बार्ताकाकत चलाओंता----सांबादिक----पत्रकारुडु पात्रिकेयुडु----पत्तिरिगैयाळर् निरुबर्----पत्र प्रवर्तकन्----पत्रकार----
1827पत्राचारपुंलिंग----परस्पर एक दूसरे को पत्र लिखना, पत्र-व्यवहार।----चिट्ठी-पत्तर----ख़तोकिताबत----खतकिताबथ, चिठ्य-पतु॑र लेखु॑न्य----ख़तो किताबत, लिखपढ़----पत्र-व्यवहार करणें----पत्र-व्यवहार----पत्र-व्यवहार----पत्र-ब्यवहार----पत्राळाप, पत्रब्यबहार----उत्तरप्रत्युतरमुलु----कडिदप्पोक्कु वरत्तु----ऎळुत्तुकुत्तु, कत्तिटपाटु----पत्रव्यवहार----
1828पथपुंलिंगपुंलिंग---मार्ग, रास्ता, राह;कार्य या व्यवहार की पद्धति।---पंधराह---रास्तातरीक़ा---वथ----वाट, रस्तो, पथु----मार्ग, रस्ता, बाट, पथकार्यपद्धत---पथ, मार्गकार्यपद्धति---पथ, रास्तापद्धति---बाट, आलिपद्धति---पथ----पथमु, मार्गमु, दारिपद्धति---वऴि, शालै, पादैनडैमुरै॒---वऴिप्रवर्तनपद्धति---दारिरीति---
1829पथ-प्रदर्शकपुंलिंग----किसी कार्य या व्यवहार की पद्धति बताने वाला, मार्गदर्शक।----राहनुमा----राहनुमा----वतु॑ हावुख----रहबरु, सूंहों----मार्गदर्शक, पथप्रदर्शक----मार्ग-दर्शक, पथ-प्रदर्शक----पथेर दिशारी----पथ-प्रदर्शक----पथ-प्रदर्शक, मार्गदर्शक----मार्गदर्शकुडु----वऴि काट्टुबवर्----मार्गदर्शि, वऴिकाट्टि----मार्गदर्शक----
1830पथ-भ्रष्टविशेषणविशेषण---जो मार्ग से भटक गया हो;न्याय मार्ग अथवा आचरण से विमुख।---कुराही----गुमराह----वति डॊलमुतवति डॊलमुत---राह-भिटिक्यलुबद इख़्लाकु---पथ भ्रष्ट----पथ-भ्रष्ट----पथभ्रष्ट, दिशाहाराविपथगामी---पथ-भ्रष्ट----पथभ्रष्ट----पथभ्रष्टुडुपथभ्रष्टुडु---वऴि तवरि॒यनल्लॊळुक्कत्तिलिरुन्दु पिळरिय---वऴि पिऴच्चन्यायं विट्ट, बऴिपिऴच्च---दारि तप्पिदपथभ्रष्ट---
1831पथिकपुंलिंग----बटोही, राही।----पांधी----राही----मुसा॑फिर----राही वाटहड़ू----पथिक, वाटसरु, पांथस्थ----पथिक, वटेमार्गु----पथिक, यात्री----पथिक----पथिक----बाटसारि, पांथुडु----वऴिप्पोक्कन्----पान्थन्, वषि पोक्कन्----दारिग----
1832पथ्यविशेषणपुंलिंग---गुणकारी, लाभदायक।वह हल्का भोजन जो अस्वस्थ या रोगी व्यक्ति को दिया जाए।---पत्त्थ----मुफ़ीदपर्हेज़ी ग़िज़ा---फायदु॑मन्दपरहेज़---फ़ाइदेमंदुपरहेज़ वारो खाधो---गुणकारी, लाभप्रदपथ्य---पथ्य, अनुकूलकरी, परेजी---पथ्य, हितकर----गुणकारीपथ्य---पथ्य----पथ्यमुपथ्यमु---पत्तियमानपत्तिय उणवु---पथ्यं, प्रयोजनकरंपथ्यं---गुणकारिपथ्य---
1833पदपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग-कदम, पांव, पैर;वाक्य का अंश या खंड।ओहदा, उपाधि;छंद, श्लोक आदि का चतुर्थांश।-कदमपद---क़दमफ़िक़राऔ़हदामिस्राअ़ (मिस्ऱा)-पॊद, कदमपदऒहदु॑, मनसबु॑--कदमु, विखजुम्ले जो भाङोपदु, उहिदोपदु, छंद या सलोक जी सिट-पद, पाय, चरणपद, वाक्याचा अंश किंवा तुकडापद, हुद्दा, पदवीश्लोकाचा एक चतुर्थांश-पद, पगअर्थवालो शब्ददरज्जोश्लोकनुं पद-पद, पावाक्यांशपदवीपद-भरिपदउपाधिछंदर चतुर्थांश-पादवाक्यांशउपाधिछंद बाश्ळाक आदिर चतुर्थांश-पादमुपदमुपदविचरणमु, पादमु-कालड़ि, अड़ि, पादम्पदम् वातैं, चॊल्पदविशॆय्युळिन् अडि-अटि, काल्पदंस्थानं, पदविपादं-हॆज्जॆ, पादशब्दपदविपाद-
1834पदचापस्त्रीलिंग----चलते समय पैरों से होने वाली ध्वनि।----पैरचाप----चाप----पकन आवाज----पेरनि जी आहट----ध्वनि----पद्ध्वनि----पदध्वनि----पदध्वनि----पदध्वनि----पदखमु, पादालच़प्पुडु----कालडिच्चत्तम्----कालॊच्च----हॆज्जॆय सद्दु----
1835पद-चिह्नपुंलिंगपुंलिंग---पैरों की छाप;दूसरों विशेषत: बड़ों द्वारा बतलाए हुए आदर्श अथवा कार्य करने का ढंग।---पैड़पूरना---नक़्शे क़दम----खॅरन हुंद आखनकशि कदम---पेरोपेरनि जो निशानु---पदचिन्हआदर्श, परंपरा---पदचिह्न, पगलांनी छापआदर्श, परंपरा---पदचिह्नआदर्श---भरिर चिनपरंपरा--------अडुगुजाड़लुअडुगुजाड़लु---अडिच्चुवडुपॆरियोर् वऴिप्पट॒टुदल्---कालटयाळं, पदचिह्नंबऴित्तार, प्रवर्तनरीति---हॆज्जॆय गुरुतुआदर्श---
1836पद्धतिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---कार्य करने का तरीका, कार्य-प्रणाली;रीति, पथ, मार्ग।---पद्धती----तरीक़े कार (तरीक़ा)तरीक़ (तरीक़ा)---तरीकु॑तुलु॑त्राव---तरीको, ढंगुवाट, रीति---पद्धत, कार्यप्रणालीरीत, मार्ग, वाट---पद्धतिरीत, रस्तो, वाट---पद्धति, प्रणा॒ली (न)रीति---पद्धतिरीति-नीति---पद्धति----पद्धतिपद्धति---वेलै मुरै॒वऴि, मुरै॒---पद्धतिवळि---पद्धतिरीति---
1837पनघटपुंलिंग----वह घाट या स्थान जहां से लोग घड़े आदि में पानी भरकर लाते हैं।----घाट----पनघट----यारु॑बल, गाठ----घाटु, पाणी भरण् जो हंधु----पाणवठा----पनघट----घाट----पानी (घाट)----पाणि-तुठ पाणि-घाट----नीटि रेवु----नीर्तुरै॒----कटवु किणट॒टुकर, कुळक्कटवु----बाविकट्टॆ----
1838पनडुब्बीस्त्रीलिंग----पानी के अंदर डूबकर चलने वाली नाव (सबमरीन)।----पनडुब्बी----आबदोज----आबदोज़ जहाजु॑----ज़ेर आबी----पाणबूडी----पनडूबी, सबमरीन----साबमेरीन----चाबमेरिन----बुड़ा-जाहाज----जलांतर्गामि----नीर् मूऴगि कप्पल्----जलान्तर्वाहिनि, मुङ्ङिक्कणल्----सब्मॆरीन्----
1839परंतुअव्यय----इतना होने पर भी, लेकिन, पर।----पर, परंतू----लेकिन (मगर)----अमापॊज़----पर, लेकिन----पण, परंतु, तरीहि----परंतु, पण, तोय----किन्तु----किंतु----परंतु, किंतु----कानि, अयिनाकूड----आनाल्----पक्षॆ----आदरॆ----
1840परंपरास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---सिलसिला, क्रम;रीति-रिवाज, प्रथा।---परंपरा----सिलसिलादस्तूर (सिलसिला)---पतु॑वथ, रीथरीथ---परंपरा----क्रम, परंपराप्रथा, चाली रीति---परंपरा, हाररिवाज---क्रम, परंपराप्रथा, रीति-नीति---परंपरारीति-नीति---परंपरा----परंपरपरिपाटि---तॊडर्च्चि, परंपरैपऴक्क वऴक्कंगळ्---क्रमं, परम्परपारंपर्यं---परंपरॆसंप्रदाय---
1841परखनासकारात्मक क्रिया----अच्छे बुरे की पहचान करना।----परखणा----परखना----सरु॑ करुन----पर्खणु----पारख करणें----परखवुं, ओळखवुं----या॒चा, या॒चाइ करा (ज)----चा----परखिबा----परिशीलिंचुट----परीक्षिक्क, बेदम् कंडुपिडिक्क----परिशोधिच्चरियुक वेतिंरिक्कुक----परिशीलनॆ----
1842परदापुंलिंगपुंलिंग---आड़ या बचाव करने के लिए बीच में टांगा या लटकाया जाने वाला कपड़ा आदि;घूंघट।---परदा----पर्दा----परदु॑बुरकु॑, नॊर---पर्दो----पडदाघुंगट---परदो, ओझलघूंघट---पर्दाघोमटा---परदाओरणि---परदाओढ़णा---तेरमुसुगु---पडुदा, तिरैमुट्टाक्कु (मुक्काडु)---कर्ट्टन्, पर॒दमूटुपटं---तॆरॆमुसुकु---
1843परदेसीविशेषण----वह व्यक्ति जो अपना देश छोड़कर किसी दूसरे देश में आया हो, परदेसी।----परदेसी----परदेसी----परदीसी----परदेसी----विदेशी, परदेशी----परदेशी----विदेशी----बिदेशी----बिदेशी, परदेशी----विदेशीयुडु----अन्निय नाट्टिल वशिक्किर----परदेशि, विदेशि----परदेशवनु----
1844परमविशेषणविशेषण---मुख्य, प्रधान;अत्यधिक।---परम----अव्वलीं (ख़ास)निहायत---थॊदस्यठा---परमु, मुख्युधणो---मुख्य, प्रधानपरम, अत्यधिक---परमपरम, अत्यधिक---मुख्य, प्रधानपरम, अत्यधिक---मुख्य प्रधानअत्यधिक---मुख्य, प्रधानपरम, अत्यधिक---परमपरम---मुक्कियमानपरम, मिग, अदिग---मुख्यमायअत्यधिकं, परमं---मुख्यपरम---
1845परमाणुपुंलिंग----किसी तत्व का अविभाज्य टुकड़ा।----परमाणू----एटम----अटम----परमाणू----परमाणु----परमाणु----परमाणु॒ (न)----परमाणु----परमाणु----परमाणुवु----अणु, परमाणु----अणु, परमाणु----परमाणु----
1846परमात्मापुंलिंग----ईश्वर, परब्रह्म।----परमातमा----रूहे मुत्लक (अल्लाह)----दय, परमात्मा----परमात्मा----ईश्वर, परमात्मा----परमात्मा, परब्रह्म, परमेश्वर----ईश्वर, परमात्मा॒ (त्ताँ)----परमात्मा----परमात्मा----परमात्म----परमात्मा, कडवुळ्----परमात्मावु----देवरु----
1847परमार्थपुंलिंगपुंलिंग---मोक्ष;परोपकार।---परमारथपरमारथ---नजातनेकी---परमारथदयिवति---परमार्थु----मोक्ष, परमार्थपरोपकार---परमार्थ, मोक्षपरोपकार---परमार्थ, मोक्ष॒ (क्ख)परोपकार---मुक्तिपरोपकार---परमार्थ----परमार्थमु, मोक्षमुपरोपकारमु---मोक्षम्, मुक्तिपिर॒रुक्कु उदवियळित्तल्, परोपकारम्---मोक्षंपरोपकारं---मोक्षपरमार्थ---
1848परलोकपुंलिंग----इस लोक से भिन्न दूसरा लोक।----परलोक----उ़क़बा (अ़दम)----परलूख, दॊयुम दुनिया----परलोकु----परलोक----परलोक, बीजो लोक----परलोक----परलोक----परलोक----परलोकमु----परलोगम्, मेलुलगम्----परलोकं----परलोक----
1849परसोंअव्ययअव्यय---बीते हुए दिन से ठीक पहले वाला दिन;आगामी कल के बाद वाला दिन।---परसों----परसोंपरसों---ऊतरु॑का॑ल्यक्यथ---टियों डीहुंपरींहं---परवापरवा---परम दिवस, गई काल पहले आवेलो दिवस----परशुपरशु---परहिपरहिलै---पअरि दिन----मोन्नऍल्लुंडि---मुन्दा नाळ्नाळै मरु॒नाळ्, नाळै निन्रु॒---मिनिञ्ञान्नुमट॒टॆ॒न्नाळ्---मॊन्नॆनाडिद्दु---
1850परस्परक्रिया विशेषण----आपस में।----आपो-विच, परसपर----बाहम----पानु॑वन्य----पाण में----आपसात, परस्पर----परस्पर----परस्पर----परस्परे----परस्पर----परस्परमु----तमक्कुळ्ळे, परस्परम्----परस्परं----परस्पर----
1851पराकाष्ठास्त्रीलिंग----चरम सीमा, हद।----सिखर----इंतिहा (हद)----थज़र, हद----हद, छेहु----पराकाष्ठा, परमावधि---------पराकाष्ठा, चूड़ान्त----पराकाष्ठा----पराकाष्ठा----पराकाष्ठ----कड़ैसि ऎल्लै----परमकाष्ठ----परमावधि, तुत्ततुदि----
1852पराक्रमपुंलिंग----शौर्य, सामर्थ्य, बल।----पराकरम----ताक़त (तवानाई)----बहोदरी, ताकथ----पराक्रमु, वीरता----पराक्रम, शौर्य----पराक्रम, बहादुरी----पराक्रम, शौर्य॒ (ज)----पराक्रम----पराक्रम, शोर्ज्य----पराक्रममु----पराक्किरमम् बलम्----पराक्रमं----पराक्रम----
1853परागपुंलिंग----फूल के लंबे केसरों पर जमी रहने वाली धूल।----पराग----ज़रे गुल----व्यूर----परागु, रजु----पराग----पराग, फूलमांनी रज----पराग----पराग, रेणु----पराग, फुल-रेणु, मलरन्द----पुप्पोडि----मकरन्दम्----परागं, पूम्पॊटि----पराग----
1854पराजयस्त्रीलिंग----हार, विजय का उल्टा।----हार----शिकस्त (हार)----हार----हार, पराजय----पराजय----पराजय, हार----पराजय----पराजय----पराजय----पराजयमु, ओटमि----तोल्वि----पराजयं----सोलु----
1855पराधीनतास्त्रीलिंग----दूसरे के अधीन अर्थात् पराधीन होने की अवस्था या भाव।----गुलामी पराधीनता----गुलामी (महकूमियत)----गॅला॑मी----पराधीनता, गुलामी----पराधीनता----पराधीनता, परतंत्रता----पराधीनता----पराधीनता----पराधीनता----पराधीनत----अडिमैत्तनम्----अस्वातंत्र्यं अटिमत्तं----पराधीनतॆ----
1856परामर्शपुंलिंगपुंलिंग---सलाह, सम्मति;विवेचन, विचार।---सलाह----सलाह (मशवरा)मुशाविरत---सलाह, रायसलाह, राय---सलाहसलाह-मस्लिहत---सल्ला, मसलत, सम्मति, परामर्शविवेचन, विचार---परामर्शविचार, उहापोह---परामर्श, सम्मतिविवेचन, विचार---उपदेशबिबेचना---परामर्श----सलहापरामर्श---आलोचनैचचैं---उपदेशंपरामर्शं---सलहॆपरिशीलनॆ---
1857परायाविशेषण, पुंलिंग----जिसका संबंध दूसरे से हो, अपने से भिन्न, आत्मीय या स्वजन से भिन्न।----पराइआ----पराया----वॅपर----पराओ----पका----पारकुं, बीजानुं----परेर, अन्येर----आनर, लोकर, अन्यलोक----पर, अन्यलोक----परायि----अन्निय----मट॒टॊ॒राळुटॆ, अन्य----इतरर----
1858परिक्रमास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---चारों ओर चक्कर लगाना या घूमना;किसी तीर्थ, देवता या मंदिर के चारों ओर भक्ति और श्रद्धा से तथा पुण्य की भावना से चक्कर लगाने की क्रिया।---परकरमापरकरमा---तवाफ़तवाफ़---अन्द्य अन्द्य फेरुन प्रकरम् (हि.)प्रकरम्---परिक्रमा----परिक्रमाप्रदक्षिणा---परिक्रमाप्रदक्षिणा---परिक्रमाप्रदक्षि॒ण॒, परिक्रमा (क्ख)(न)---चारिओफाले घुरापरिक्रमा, प्रदक्षिण---परिक्रमा----प्रदक्षिणमुप्रदक्षिणमु---वलम् तरुदल्पिरदक्षिणम्---प्रदक्षिणंप्रदक्षिणं---सुत्तुवुदुप्रदक्षिणॆ---
1859परिचयपुंलिंगपुंलिंग---ऐसी स्थिति जिसमें दो व्यक्ति एक दूसरे को प्राय: प्रत्यक्ष भेंट के आधार पर जानते और पहचानते हों, जान-पहचान;किसी व्यक्ति के नाम-धाम या गुण-कर्म आदि से संबंध रखने वाली सब या कुछ बातें जो किसी को बतलाई जाएं।---जाण-पछाणजाण-पछाण---तआ़रुफ़----ज़ान, पछानजान, तोरुफ---जा॒ण-पछाणवाकुफ़ियत, सुञाणप---ओळख, परिचयपरिचय---परिचय, सहवासओळखाण---परिचय, चेना-शोनापरिचय---चिना-चिनिपरिचय---परिचय, चिन्हा, (चिन्हा चिन्हिइबा) जणा-शुणापरिचय---परिचयमुपरिचयमु---परिचयम्, अरि॒मुगम्अरि॒मुगम्---परिचयंपरिचयप्पॆटुत्तल्---गुरुतुपरिचय---
1860परिचर्यास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---किसी के द्वारा की जाने वाली अनेक प्रकार की सेवाएं;रोगी की सेवा सुश्रूषा।---टहल, टहल सेवाटहल, टहल सेवा---ख़िदमतगुज़ारीतीमारदारी---खद॑मथखद॑मथ---ख़िज़्मत, सेवा----सेवा-शुश्रुषा, परिचर्यारोग्याची सेवा शुश्रुषा---परिचर्या, सेवाचाकरीरोगीनी सेवा---सेवापरिचर्या शूश्रूषा (जा)---सोध-पोचशुश्रूषा---परिचर्या----परिचर्यपरिचर्य---तोण्डुचिक़िच्चै---सेवनंशुश्रूष, परिचर्य---सेवॆशुश्रूषॆ---
1861परिचारिकास्त्रीलिंग----सेवा करने वाली स्त्री, सेविका (नर्स)।----सेवका----नर्स----दाय, मॊहनिव्यबाय----सेवाधारिणि, दासी, टहली, नर्सि----सेविका, परिचारिका----परिचारिका, दासी, नर्स----परिचारिका, सेविका, नर्स----परिचारिका----परिचारिका----परिचारिक----पणिप्पॆण, शॆविलि----परिचारिक----नर्स----
1862परिच्छेदपुंलिंग----अध्याय, प्रकरण।----अधिआइ, खंड, भाग----बाब (फ़सल)----खंड, अद्याय----अध्याउ, बाबु----अध्याय, प्रकरण----प्रकरण, अघ्याय----परिच्छेद, अध्याय, प्रकरण॒ (न)----अध्याय, परिच्छेद---------अध्यायमु, प्रकरणमु----अद्दियायम्----अध्यायं----परिच्छेद, अध्याय----
1863परिजनपुंलिंगपुंलिंग---चारों ओर के लोग विशेषत: परिवार के सदस्य;अनुगामी और अनुचर वर्ग।---कोड़मा, साकआपणे---लवाहिक़ीनपैरो व ख़िदमतगार---अंग ओशनावपॊतकुछय---मिट-माइटपोइलग॒---परिवार, कुटुंबअनुगामी व अनुचर वर्ग---परिजन, कुटुंबीजननोकर---परिजन, आत्मी॒यजन (त्ती)परिचारक वर्ग---आत्मीय स्वजनअनुचर वर्ग---परिजन, स्वजन, आत्मीय----कुटुम्बमुपरिजनमु परिवारमु---कुडुंबत्तवर, शुट॒टो॒र्पणियाळ्---परिजनंपरिवारं---मनॆयवरुअनुचर्रु---
1864परिणामपुंलिंगपुंलिंग---किसी काम या बात का तर्क संगत रूप में अंत होने पर उससे प्राप्त होने वाला फल (रिज़ल्ट);किसी कार्य के उपरांत क्रियात्मक रूप से पड़ने वाला उसका प्रभाव (कांसीक्वेन्स)।---सिट्टासिट्टा---नतीजा----नतीजिनतीजि---नतीजोनतीजो---परिणामपरिणाम---अंत, फळनतीजो---परिणाम, फलपरिणा॒म (ना)---फलपरिणाम---फळपरिणत, फळ, परिणाम---परिणाममुपरिणाममु---विळैवु, पलन्मुडिवु---फलं, रिसल्ट्अनन्तरफलं, परिणामं---फलितांशपरिणाम---
1865परित्यागपुंलिंग----अधिकार, स्वामित्व, संबंध, अधिकृत वस्तु, निजी संपत्ति, संबंधी आदि का पूर्ण रूप से तथा सदा के लिए किया जाने वाला त्याग, पूरी तरह से छोड़ देना।----तीद्ला-तोड़, दाइआ छड्डणा----तर्क----दल्य दु॑निथ त्रावुन----त्यागु----परित्याग, त्याग, सर्व त्याग----परित्याग----परित्याग----परित्याग----परित्याग----परित्यागमु----तन् उरिमैयै मुट॒टि॒लुम तुर॒त्तल, तियागम्---परित्यागं----परित्याग----
1866परिधिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--वृत की रेखा;किसी गोलाकार वस्तु के चारों ओर खिंची हुई वृत्ताकार रेखा;वह गोलाकार मार्ग जिस पर कोई चीज चलती, घूमती या चक्कर लगाती हो।--घेराघेराघेरा--दाइराहिसारमदार--गेरु॑----घेरो----घेरा, परिधिपरीधपरिधि--परिधि, बर्तळनो घेरावो-चक्रावा पर फरती वस्तु--वृत्तेर वेष्टन रेखा, परिधिपरिधिपरिधि--परिधिबेरघूरणीया पथ--परिधि----परिधिपरिधिपरिधि--वट्टक् कोडुबट्टवडिवमान पॊरुळै शुट्रि इरुक्कुम् कोडुवट्टवडिवमान पादै--परिधिपरिधिचुटट, वृत्तं--परिधिवर्तुल रेखॆवृत्ताकारदारि--
1867परिपक्वविशेषणविशेषण---जो अभिवृद्धि, विकास आदि की दृष्टि से पूर्णता तक पहुँच चुका हो;अच्छी तरह से पका हुआ।---प्रपक्कप्रपक्क---पुख़्ता----पॅखतु॑पॅखतु॑---पूरो उसिर्यलुपकलु---परिपुर्णपक्व---परिपक्वपूरेपूरवं, पाकेलुं---परिण॒त, पूर्णता प्राप्त (न)पाका, परिपक्व---परिपूर्ण, परिपक्बपका---परिपक्व----परिपक्वमयिनपरिपक्वमयिन---मुऴु वळर्चियुटटनन्गु पऴुत्त---परिपक्वंनल्ल पोलॆ पळुत्त---विकसितहण्णाद, मागिद---
1868परिभाषास्त्रीलिंग----ऐसा कथन या वाक्य जो किसी पद या शब्द का अर्थ या आशय स्पष्ट रूप से बतलाता या व्यक्त करता हो (डेफिनिशन)।----परिभाशा----तारीफ़----मानी----परिभाषा, वस्फ़----व्याख्या----लक्षण, व्याख्या----परिभाषा----परिभाषा, सूत्र----परिभाषा----निर्वचनमु----शॊल्लिन् पॊरुळ् विळक्कम्----निर्वचनं----लक्षण निरूपणॆ परिभाषॆ----
1869परिमाणपुंलिंगपुंलिंग---गिनने, तोलने, मापने आदि पर प्राप्त होने वाला फल;नाप-जोख, तोल आदि की दृष्टि से किसी वस्तु की लंबाई-चौड़ाई, भार, घनत्व विस्तार आदि, मान (क्वान्टिटी)।---मिकदारमिकदार---मिक़्दार----परिमान, हा॑सिल॑म्यकदार---वज़नु, तोर, माप वग़ैरह----माप, वजन, परिमाणपरिमाण---परिमाणपरिमाण---परिमापेर फल, परिमाणपरिमाण॒ (न)---संख्याजोख, ओजन---परिमाण----परिमाणमुपरिमाणमु---अळवु, निरै॒परिमाणम, मोत्त अळवु---परिमाणं, अळवुमात्र, अळवु---अळतॆअळतॆ---
1870परिमार्जनपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--साफ करने के लिए अच्छी तरह धोना;अच्छी तरह साफ करना;भूलें आदि सुधारना।--सुध़ाईसोधसोध--शुस्तोशूशुस्तोशूइस्लाह--मांजुनमांजुनथॊज़रुन--पङीअ तरह सां धूअणसाफु करण जो कमुसुधारु--स्वच्छ धुणेंचांगल्या प्रकारे स्वच्छ करणेंसुधारणें--परिमार्जन, धोवुं तेमांजवुं तेसुधारयुं ते--मार्जन, प्रक्षा॒लन (क्ख)परिष्करण॒ (न)संशोधन, परिमार्जन--परिमार्जित करापरिस्कारशुधरणि--परिमार्जन----परिमार्जनमु, तोमुटपरिमार्जनमु, तोमुटसरिदिद्दुट--अलंबुदल्शुद्दीकरिप्पुपिऴै नीक्कल् तिरुत्तल--नल्ल पोलॆ कऴुकल्नल्ल पोलॆ वृत्तियाक्कलतॆट॒ट॒ तिरुत्तल्--तॊळॆयुवुदुशुचिगॊळिसुवुदुसंशोधनॆ--
1871परिवर्धनपुंलिंगपुंलिंग---आकार-प्रकार, विषय-वस्तु आदि में की जाने वाली वृद्धि;इस प्रकार बढ़ाया हुआ अंश।---बधा, वाधाबधा, वाधा---इज़ाफ़ा----व॑डरावुनब॑डरावुन---वाधि, वधाउवध्यलु हिसो---विकास, वृद्धिपरिवर्धित---परिवर्धन, वधारोपरिवर्धित---वृद्धि साधन, परिवर्धनपरिवर्धित अंश---परिबर्धनपरिवर्धित अंश---परिबर्द्धन----परिबर्द्धनमुवर्धितांशमु---कूट्टल्, वळर्त्तलअदिगरित्त पगुदि---परिवर्द्धनंपरिवृद्धि---बॆळवणिगॆवृद्धि---
1872परिवहनपुंलिंग----माल, यात्रियों आदि को एक स्थान से ढोकर दूसरे स्थान पर ले जाने का कार्य (ट्रान्सपोर्ट)।----परिवहन----नक़्लो हमल/रस्लो रसाइल----ट्रानसपोट----ट्रान्सपोर्ट, आमदिरफ़्त----परिवहन----वाहन-व्यवहार----परिवहन----परिबहन----परिबहन----परिवहनमु प्रयाण साधनमु----पोक्कु वरत्तु----गतागतं----सागणॆ----
1873परिवारपुंलिंगपुंलिंग---एक घर में और विशेषत: एक कर्त्ता के अधीन या संरक्षण में रहने वाले लोग (फैमिली);किसी विशिष्ट गुण, संबंध आदि के विचार से चीजों का बनने वाला वर्ग।---परवारपरवार---ख़ानदानक़बील (खानदान)---परिवार, खानदान----परिवारु, कुटंबु----परिवार, कुटुंबकुटुंब---परिवार, कुटुंब, कबीलोकुटुंब---परिवारवर्ग---परियालफैद---परिबार----कुटुम्बमुकुटुम्बमु---कुडुंबम्वगै, जादि---कुटुंबंवर्गं---संसार, कुटुंबवर्ग---
1874परिवार नियोजनपुंलिंग----बढ़ती हुई जन-संख्या को नियंत्रित करने या सीमित रखने के उद्देश्य से गार्हस्थ्य जीवन के संबंध में की जाने वाली वह योजना जिससे लोग आवश्यकता अथवा औचित्य से अधिक संतान उत्पन्न न करें (फ़ैमिली प्लानिंग)।----परवार-नियोजन----कुंबाबंदी----फेमिली प्लैनिंग, खानदान्य मंसूबु॑बंदी----परिवार नियोजन, कुटंबी रिथा----परिवार-नियोजन----परिवार-नियोजन----परिवार-परिकल्पना----परियाल परिकल्पना----परिबार-नियन्त्रण----कुटुम्ब नियंत्रण----कुडुंब कट्टुप्पाडु----कुटुंबासूत्रण----कुटुम्ब नियोजनॆ----
1875परिवेशपुंलिंग----वेष्टन, परिधि, घेरा;----घेरा----कुरा----गेरु॑----माहोलु, वातावरणु----परिवेश, वेष्टन, परिधि----परिवेश----परिवेश, परिवेष्टन, परिधि----परिधि----परिबेश----पर्यावरणमु----ऎललै सुट॒टुच्चुवर्----चुट॒टुपाटु----परिधि----
1876परिशिष्टविशेषणपुंलिंग---छूटा या बाकी बचा हुआ, अवशिष्ट।पुस्तकों आदि के अंत में दी जाने वाली वे बातें जो मूल में आने से रह गईं हों, अथवा जो मूल में आई हुई बातों के स्पष्टीकरण के लिए हों।---बचिआ-खुचिआअंतका---बाक़ी मांदाज़्यीमा---पॊतुसपॊत वचुन---छुटी वियलु हिसोज़मीमो---उरलेला, अवशिष्ट, शिळ्ळकपरिशिष्ट, पुरवणी---परिशिष्टपुरवणी---अवशिष्टपरिशिष्ट---अवशिष्टपरिशष्ट---परिशिष्ट----परिशिष्टमुअनुबंधमु---अनुबन्दम्इणैप्पु---शेषिच्चअनुबन्धं---उळिदअनुबंध---
1877परिश्रमपुंलिंग----मानसिक या शारीरिक श्रम, मेहनत।----मेहनत----मेह्नत (रियाज़त)----मेहनथ----महिनत----मेहनत, परिश्रम----परिश्रम, महेनत----परिश्रम----परिश्रम----परिश्रम----परिश्रम----उऴैप्पु----परिश्रमं, प्रयत्नं----श्रम----
1878परिषद्स्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---निर्वाचित या मनोनीत विधायकों की वह सभा जो स्थायी या बहुत-कुछ स्थायी होती है (कौंसिल) ;सभा।---परीशद----कौंसिल (मज्लिस)----कोंसलओजमन---परिषद, काऊंसिलसभा, परिषद---परिषद्सभा, संमेलन---परिषद, काउन्सिलसभा---परिषदसभा---परिषदसभा---परिषदसभा---परिषत्तुपरिषत्तु---मेल्, अवैअवै---परिषत्तुसभ---परिषत्तुसभॆ---
1879परिष्कारपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--अच्छी तरह ठीक और साफ करने की क्रिया या भाव ;त्रुटियां दोष आदि दूर करके सुंदर, सुरुचिपूर्ण और स्वच्छ बनाना ;निर्मलता, स्वच्छता।--सफाईसफाईसफाई--इस्लाहहुस्नकारीसफाई--सफ़ायीसफ़ायीसफ़ायी--सुधारुभुल-सुधारुसफ़ाई--परिष्कारपरिष्कृतनिर्मलळपणा, स्वच्छता--परिष्कारपरिष्कृतनिर्मळता, स्वच्छता--परिष्कारपरिच्छन्नता, परिष्कारनिर्मळता, स्वच्छता--परिष्करणनिर्दोषितानिर्मलता, स्वच्छता--परिष्कार----परिष्कारमुपरिष्कारमुपरिष्कारमु--शुद्दिकरिप्पुशीर् पडुत्तुलतूय्मै--बृत्तियाक्कल्परिष्करिक्कल्स्वच्छत--शुचिसंशोधनॆ, परिमार्जनॆस्वच्छतॆ--
1880परिस्थितिस्त्रीलिंग----चारो ओर की स्थिति, हालत (सर्कमस्टांसिस)।----हालत, सथिति परिसथिति----हालात----हालाथ----हालति----परिस्थिति----परिस्थिति----परिस्थिति----घटना, परिस्थिति----परिस्थिति----परिस्थिति----शूळ्निळै----परित: स्थिति----सन्निवेश परिस्थिति, सन्दर्भ----
1881परीक्षणपुंलिंगपुंलिंग---परीक्षा करने या लेने की क्रिया;जांच, परख।---परखपरख---इम्तिहानआज़माइश---इम्तिहानह्यॊनइम्तिहान, अज़मावुन---पर्खजाच---परीक्षणतपासणी, पारख---परीक्षण, परीक्षातपास, पारखुं---परीक्ष॒ण॒ (क्ख) (न)परख, जाचाइ---परीक्षणपरीक्षा---परीख्यण----परीक्षिंचुटपरीक्षिंचुट---परिशोदनैपरीक्षै---परीक्षिक्कल्परीझणं, परिशोधनं---परीक्षॆशोधनॆ, अरॆरॆ---
1882परीक्षास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---किसी के गुण, धैर्य, योग्यता सामर्थ्य आदि की ठीक-ठाक स्थिति जानने या पता लगाने की क्रिया या भाव ;जांच-पड़ताल या देखभाल।---परीखिआपरीखिआ---इम्तिहानजांच पड़ताल---इम्तिहानइम्तिहान---परीक्षा, इम्तिहानुजाच पड़ताल---परीक्षातपासणी---परीक्षा, कसौटीतपासणी---गुणागुण विचारयाचाई, परीक्षा---परीक्षानिरीक्षण, परीक्षण---परीख्या----परीक्षपरीक्ष---परीक्षै, तेरवुआयवु---परीक्षअन्वेषणं---परीक्षॆपरिशीलनॆ---
1883परोक्षविशेषणविशेषणविशेषणपुंलिंगपुंलिंगआंखो से ओझल ;जो सामने न हो, अनुपस्थित ;छिपा हुआ, गुप्त।आंखों के सामने न होने की अवस्था या भाव, अनुपस्थिति;व्याकरण में पूर्ण भूतकाल।परोखेपरोखेपरोखेपरोखेपूरण भूतकालग़ाएबग़ाएबग़ाएबग़ैर हाज़िरीमाज़ी मुत्लक़पथकुनपथकुनपथकुनपथकुनपथकुननज़रि न ईदंडुग़ैर हाजिरुलिकलु गुझोग़ैर हाज़िरीज़मानु माज़ी बईदुपरोक्ष, अप्रत्यक्षजे समोर असत नाही, अनुपस्थितगुप्तअनुपस्थिति, गैर हजेरीपरोक्ष (भूतकाळ)परोक्षअप्रत्यक्ष, गेरहाजरगुप्तगेर हाजरीपरोक्ष (भूतकाळ)चोखेर आड़ाल, परोक्षअनुपस्थितलुकानो, गुप्तचोखेर अन्तराल, अनुपस्थितभूतकालपरोक्षअनुपस्थितगुप्तपरोक्षपुर्ण भूतकालपरीख्य, चु-र पछरेदृष्टिआढआळरे-अनुपस्थितिपूर्ण भूतकाळपरोक्षमु----पुलप्पडादमुरै॒मुगमानमरै॒न्दुळ्ळइल्लामैइर॒न्दकाल मुट॒टुविनैपरोक्षमायमुन्पिल् इल्लात्तपरोक्षंपरोक्षमायिरि क्कल्परोक्ष भूतंपरोक्षऎदुरिगिल्लदगुप्तवादअगोचरतॆपूर्ण भूतकाल
1884परोपकारपुंलिंग----दूसरों की भलाई, दूसरों के हित का काम।----पर उपकार----नेकी (कारे ख़ैर)----पर वॅपकार, खा॑रि आम----पर उपकारु----परोपकार----परोपकार----परोपकार----परोपकार----परोपकार----परोपकारमु----उपगारं----परोपकारं----परोपकार----
1885पर्यटकपुंलिंग----देश-विदेश में घूमने-फिरने वाला।----सैलानी----सय्याह----सालान्य, विज़िटट----सैलानी----पर्यटक, प्रवासी----पर्यटक----पर्य॒टक (ज)----पर्यटक----पर्ज्यटक----पर्यटकुडु----पयणि, सुट॒टुला पयणि----संचारि----पर्यटक----
1886पर्यटनपुंलिंग----अनेक महत्त्वपूर्ण स्थल देखने तथा मन-बहलाव के लिए अधिक विस्तृत भूभाग में किया जाने वाला भ्रमण।----सैल सपाटा----सियाहत----सा॑ल----सैलु----पर्यटन, प्रवास----पर्यटन, मुसाफरी----पर्य॒टन (ज)----पर्यटन----पर्ज्यटन----पर्यटनमु----सुंट॒टुला----पर्यटनं----पर्यटन----
1887पर्याप्तविशेषण----जितना आवश्यक हो उतना सब, यथेष्ट, काफी।----काफी----काफ़ी----स्यठा, वार्याह----काफ़ी, पूरो----यथेष्ट, पर्याप्त----पर्याप्त, पूरतुं, संपूर्ण----पर्याप्त, प्रचुर, यथेष्ट----यथेष्ट, उपर्याप्त----पर्ज्याप्त, जथेष्ट----चालिनन्त, पर्याप्तमु----पोदुमान----पर्याप्तं, वेष्टत्र----साकष्टु----
1888पर्यायपुंलिंग----सामानार्थक शब्द।----परिआइ----मुतरादिफ़ (मुरादिफ़)----ह्युव लफ़॑ज़----हम माना, सम अर्थी----पर्याय, समानार्थक शब्द----पर्याय, समानार्थ शब्द----पर्याय, समानार्थबोधक शब्द----पर्यायबाची शब्द----पर्य्याय, समनार्थक शब्द----पर्यायपदमु----अदे पॊरुळुळ्ळ शोल्----पर्यायं----पर्याय----
1889पर्वपुंलिंगपुंलिंग---ग्रंथ आदि का अंश, खंड, भाग ;उत्सब और त्यौहार।---परवपुरब---जुज़्वतक़ीब (तक़्रीब)---वॅछुब, बॊडदोहवॅछुब, बॊडदोह---अध्याउ, बाबुडि॒णु---अध्याय, पर्वउत्सव, पर्व---ग्रंथनो भागतव्हेवार, पवित्र दिवस---अध्यायपर्व, उत्सव---अंशउत्सव---ग्रंथर बिभागउत्सब---पर्वमुपर्वमु, पंडुग---परुवंतिरुविऴा, पंडिगै---पर्वंउत्सवं---पर्वहब्ब---
1890पर्वतारोहणपुंलिंग----पहाड़ पर चढ़ने की क्रिया या पहाड़ पर चढ़ना।----परबत-चढ़ाई----कोहपैमाई----पहाड़स खसुन----पहाड़ ते चढ़ाई----गिर्यारोहण----पर्वतारोहण----पर्वतारोहण॒ (न)----पर्बतारोहण----पर्बतारोहण----पर्वतारोहणमु----मलै ऎरु॒दल्----पर्वतारोहणं----पर्वतारोहण----
1891पलायनपुंलिंग----निकल भागने या बच निकलने की क्रिया या भाव।----फरार, पलाइन----फ़रार----च़लुन, पॊत ह्यॊन----भाजि----पलायन----पलायन----पलायन, पालानो----पलायन----पळायन----पलायनमु----तप्पि ओडुदल्----पलायनं----पलायन----
1892पवनपुंलिंग----वायु हवा।----पौण----हवा----हवा----वाउ, हवा----हवा, वारा, पवन----पवन----पवन, वायु, हओया----बताह----पबन----गालि, पवनमु----काट॒टॅ॒----वायु----गाळि----
1893पवित्रविशेषणविशेषणविशेषण--(पदार्थ) जो धार्मिक उपचारों से इस प्रकार शुद्ध किया गया हो अथवा स्वत: अपने गुणों के कारण इतना अधिक शुद्ध माना जाता हो कि पूजा-पाठ, यज्ञ होम आदि में काम में लाया या बरता जा सके;निश्छल, धार्मिक, सद्वृत्तिवाला और पूज्य व्यक्ति;साफ, स्वच्छ, निर्मल।--पवित्तरपवित्तरपवित्तर--पाकमुक़द्दसपाक--श्रूच, शूचश्रूच़, शूच़श्रूच़, शूच़--पवित्रुपवित्रुपवित्रु--पवित्र, पुनीत, पावनपूज्य व्यक्तिस्वच्छ निर्मळ--पवित्र, शुद्ध, पावनपवत्रि (व्यक्ति)साफ, स्वच्छ, निर्मल--पवित्र (पदार्थ)निष्कपट, धार्मिक व्यक्तिसाफ, स्वच्छ, विशुद्ध, निर्मल--पबित्रधार्मिकचाफा, निका--पबित्र, शूद्ध पदार्थधार्मिक पूज्य व्यक्तिस्वच्छ, निर्मल--पवित्रमयिनपवित्रमयिनपवित्रमयिन--तूय्मैयानपजिक्कतूतक्कमाशट॒ट॒--पवित्रंसद्वृत्तन्वृत्तियाय, निर्मलमाय--पवित्रपवित्रात्मानिर्मल--
1894पशुपुंलिंग----चार पैरों से चलने वाला दुमदार जंतु, जानवर।----पसू----जानवर----पॊश, गुपुन----पसूं ढोरु----जनावर, पशु----पशु जानवर----पशु, जन्तु, जनोयार----पशु, जंतु----पशु, जन्तु----पशुवु----मिरुगम्----मृगं----दन----
1895पश्चातापपुंलिंग----किसी कर्म के बाद उसके औचित्य का भान होने पर मन में होने वाला दु:ख, पछतावा।----पछतावा----पशेमानी----पछताव----पछिताउ----पश्चाताप----पश्चात्ताप, पस्तावो----अनुताप, पश्चात्ताप----पश्चात्ताप, अनुताप----पश्चात्ताप, अनुताप----पश्चात्तापमु----पच्चात्ताबम्, परिताबम----पश्चात्तापं----पश्चात्ताप----
1896पसारनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---अधिक विस्तृत करना ;फैलाना।---पसारना----वसीअ़ करनापसारना---वाहरावुनवाहरावुन---फहिलाइणु----अधिक विस्तृत करणेंपसरविणें---पसारवुंफेलाववुं---पसारा, प्रसारित कराछड़ानो---अधिक विस्तृत करबहला---बिस्तारिबा, प्रसारिबा----चाचुटच़ाचुट---विस्तरिक्कपरप्प---विरिक्कुकपरत्तुक---विस्तरिसुवुदुहरडिसुवुदु---
1897पसीनापुंलिंग----ताप, परिश्रम आदि के कारण शरीर या अंगो में से निकलने वाले जलकण, स्वेद।----पसीना----पसीना----गुमु----पधरु, पसीनो----घाम, स्वेद----परसेवो, पसीनो, प्रस्वेद----घाम----घाम----झाळ, स्वेद----चेमट----वियवैं----वियर्प्पु----बॆबरु----
1898पहचान (पहिचान)स्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--पहचानने की क्रिया, भाव या शक्ति ;कोई ऐसा चिह्न या लक्षण जिससे पता चले कि वह अमुक व्यक्ति या वस्तु है ;परिचय।--पछाणपछाणपछाण--पहचान----ज़ानज़ानज़ान--सुञाणपसुञाणप जो निशानुपछाण, वाकुफ़ियत--ओळखखूण, चिन्हपरिचय--पिछाण, ओळखाणमाहितीपरिचय--चेनाअभिज्ञान, चिह्नपरिचय--चिना कार्य बा भावचिनपरिचय--चिह्निबा कामपरिचय चिह्नपरिचय--गुर्तुपट्टुटगुरुतुपरिचयमु, ऎरुक--अडैयाळम् तेरिन्दु काळ्ळल्अडैयाळम्अरिमुगम, परिच्चयम्--तिरिच्चरि॒यल्लक्षणंपरिचयं--गुरुतिसुवुदुगुरुतुपरिचय--
1899पहचाननासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---किसी वस्तु या व्यक्ति को देखते ही उसके चित्रों, लक्षणों, रूप-रंग के आधार पर यह जान या समझ लेना कि यह अमुक व्यक्ति या वस्तु है जिसे मैं पहले से जानता हूँ ;किसी वस्तु या व्यक्ति के गुण-दोषों, योग्यताओं आदि से भली-भांति परिचित होना।---पछानणापछानणा---पह्चानना----ज़ानुनज़ानुन---सुञाणणुपछाड़णु---ओळखणें॒गुणदोष जाणणें---पिछाण॒ (न) वुं, ओळखावुंपरिचित होवुं---चेना, परिचित बलिया जानादोष गुण॒ बोझा (न)---चिनाक्त कर, चिनाकि पापरिचित ह---चिह्निबागुण दोष सहित परिचित हेबा---गुर्तुपट्दुटगुर्तुपट्दुट---अडैयाळम्, तॊरिन्दुकॊळ्ळगुणादिशयंगळै अरि॒य---तिरिच्चरियुकमनस्सिलाक्कुक---गुरुतिसुवुदुगोत्तु इरुवुदु---
1900पहननासकारात्मक क्रिया----शरीर या अंग पर विशेषकर कपड़े, गहने आदि धारण करना।----पाउणा, पहनणा----पहनना----छुनुन, गंडुन----पहिरणु, पाइणु----घालणें----पहरेवुं----परा----पिंघ----पिन्धिबा----धरिंचुट, वेसिकौनुट----उडुत्तिक्कॊळ्ळ, अणिन्दुकोळ्ळ----धरिक्कुम, उटुक्कुक----उडुवुदु, तॊडुवुदु----
1901पहनावा (पहरावा)पुंलिंगपुंलिंग---पहनने के कपड़े, पोशाक ;किसी जाति, देश आदि के लोगों द्वारा सामान्यत: पहने जाने वाले कपड़े।---पहिरावापहिरावा---पोशाक, लिबास----पॅशाखपोशाख---पोशाकपहिराउ---कपड़े, पोशाखवेशभूषा---पोशाक, लेबासवेशभूषा---पोशाक, परिच्छदवेशभूषा---पोछाक, साजपोछाक---पिन्धिबा बस्त्र, पोषाकपहरण, परिधान---वेषभूषवेषभूष---उडै, आडैगळ्उडुप्पु---वेषं, वस्त्रङ्ङळ्वस्त्रधारणं, उटुप्पु---पोषाकुउडिगॆ-तॊडिगॆ---
1902पहरेदारपुंलिंग----वह जिसका काम कहीं खड़े-खड़े घूम-घूम कर चौकसी करना हो, चौकीदार, संतरी।----पहिरेदार----पह्रेदार----पहरूदार----पहरेदारु----पहारेकरी, प्रहरी----पहेरेदार, पहेरेगीर, चौकीदार, संत्री----प्रहरी, चौकिदार----चंतरी, परीया----पहराबाला, पाहारी----कापलावाडु----पाराक्कारन, कावल्कारन्----परावुकारन्----कावलुगार----
1903पहलवानपुंलिंग----कुश्ती लड़ने वाला मजबूत और कसरती व्यक्ति।----पलवान, पहिलवान----पह्लवान----पहलवान----पहलवानु----मल्ल, पैलवान----पहेलवान, मल्ल----पालोयान----पालोवान----पहिल्वान्----वस्तादु----पयिल्वान्----गुस्तिक्कारन्, फयल्वान्----जट्टि----
1904पहलाविशेषणविशेषणविशेषण--समय के विचार से जो और सब के आदि में हुआ हो ;किसी चीज विशेषत: किसी वर्गीकृत चीज के आरंभिक या प्रांरभिक अंश या वर्ग से संबंध रखने वाला ;वर्तमान से पूर्व का, विगत।--पहिलापहिलापहिला--पहला (अव्वल)----गॅडन्युकगॅडन्युकगॅडन्युक--पहिर्यो----पहिला, प्रथम, आदिमहिलापूर्वीचा, विगत--पहेलुं, प्रथमक्रममां पहेलुंपहेलां, अगाउ, पूर्वे--प्रथम, आदिगोड़ार, आरम्भकालीनविगत--प्रथम, पहिलाआगअतीत--पहिला, प्रथम, आदि----मोदटिमोदटिमोदटि--मुदलावदुतॊडक्कात्तिलुळ्ळइदर्कु मुन्दिय--आद्यत्तेंऒन्नामत्तॆपऴय, मुन्--मॊदलनॆयमॊदलनॆयहिंदिन मुंचिन--
1905पहलेक्रिया विशेषणक्रिया विशेषणक्रिया विशेषण--आदि, आरंभ या शुरु मे, सर्व प्रथम;काल, घटना, स्थिति आदि के क्रम के विचार से आगे या पूर्व;बीते हुए समय में, पूर्वकाल में पुराने जमाने में।--पहिलों, पहिलांपहिलों, पहिलांपहिलो, पहिलां--पहले----गॅड॑गॅड॑गॅड॑ पथकालि--पहिरीं----आरंभी, पूर्वी, सर्वप्रथमपुढे, पूर्वीपूर्वकाळचा--शरूआतमांसौथी, आगळपहेलां, पूर्वे--प्रथमें, गोड़ायेआरम्भे, अग्रेआगे, पूर्वे--आगत, प्रथमेआगते, प्रथमेआगते, आगर दिनत--पहिले, प्रथमे, आरंभरेपूर्ब रे, पूर्बेबिगत, पुरातन, पूर्ब--मोदटमोदट, पूर्वमुमोदट, पूर्वमु--मुदल्मुदलिल्मुन्नालपळंकालत्तिल मुर॒कालत्तिल--आद्यं, आरंभत्तिल् ऒन्नामतुमुन्पुमुन्पु, पण्टु--मॊट्टमोदलुमुंचेहिन्दॆ--
1906पहाड़पुंलिंग----चट्टानों का वह प्राकृतिक पुंज जो जमीन की सतह से बहुत ऊंचा होता है, पर्वत।----पहाड़----पहाड़ (कोह)----बाल, पहाड----पहाडु, जबलु----डोंगर, पर्वत----पहाड़, डुंगर, पर्वत----पाहाड़, पर्वत----पाहार----पाहाड़, पर्बत----पर्वतमु----मलै----पर्वतं, मल----बॆट्ट----
1907पहाड़ापुंलिंग----किसी अंक की गुणन सारणी।----पहाड़ा----पहाड़ा----पहाडु----खोड़ो----पाढा----पाडो, आंकनो गडियो----नामता----पुरण नेओता----गुणन (-सूची) पणकिआ----ऍक्कमु----वाय्पाडु (पॆरुक्कल्)----गुणनप्पट्टिक----मग्गि----
1908पहियापुंलिंगपुंलिंग---गाड़ी, यान आदि का वह गोलाकार हिस्सा जिसकी धुरी पर घूमने से गाड़ी या यान आगे बढ़ता है ;यंत्रों आदि में लगा हुआ उक्त प्रकार का गोलाकार जिसके घूमने से उस यंत्र की कोई क्रिया संपन्न होती है।---पहीआपहीआ---पहिया----पीय----फीथो----चाक, चक्र----पैडुं----चाकायन्त्रादि चालित करा चक्र विशेष---चकाचका---पहिगोलाकार चक्र बा चक्री---चक्रमुचक्रमु---वंडियिन् सक्करमयदि रंगळिन् सक्करम्---चक्रं, उरुळ्चक्रं---गालिगालि---
1909पहुंचनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---(वस्तु अथवा व्यक्ति का) एक स्थान से चलकर अथवा किसी प्रकार दूसरे स्थान पर उपस्थित या प्रस्तुत होना ;किसी स्थान या पद आदि को प्राप्त होना।---पहुंचणापहुंचणा---पहुंचना----वातुनवातुन---पहुचणुपहुचणु---पहोंचवुं, जवुं, पूगवुंएखादे स्थान वा पद प्राप्त करणें---पहोंचवुं----पाँछानोपाँछनो---गै, पालाभकर---पहंचिबा----चेरुटपोंदुट---पोय् सेरऒरु इडत्तै/पदविये/अडैय---ऎत्तुकऎत्तिच्चेरुक---तलुपुवुदु, सेरुवुदुतलुपुवुदु, पडॆयुवुदु---
1910पांडुलिपिस्त्रीलिंग----पुस्तक, लेख आदि की मुद्रण योग्य प्रति।----खरड़ा----मुसव्वदा----कलमी नॅस्खु॑----कलिमी नुस्खो, हथ अखरी लेखु----हस्तलिखित----हस्तप्रत, मूलप्रत----पांडुलिपि----पांडुलिपि----पांडुलिपि----व्रात प्रति----कै ऎळुत्तुप्पिरदि----कय्यॆलुत्तु प्रति----हस्तप्रति----
1911पाक्षिकविशेषणविशेषण---चांद्र मास के पक्ष से संबंध रखने वाला ;जो एक पक्ष (15 दिन) में एक बार होता है।---पक्खवारपक्खवार----पंद्रह रोज़ह---पछ्यप॑छ्य---पख संबंधीअधमाही---पाक्षिकपाक्षिक---पाक्षिकपखवाडिये थतुं---पाक्षि॒क (ख)पाक्षि॒क (ख)---पषेकीया, पषेकपषेकीया---पाक्षिक्खक----पाक्षिकमुपाक्षिकमु---वळर पिरै॒/तेय् पिरै॒ये शान्दपदिनैन्दु नाळुक्कु ऒरु मुरै निगळ्गिर्---पाक्षिकंपाक्षिकं---पाक्षिकपाक्षिक---
1912पांखडपुंलिंगपुंलिंग---दिखावटी आचरण, उपासना या भक्ति ;पूजा-पाठ आदि का आडंबर, ढकोसला, ढोंग।---पखंडपखंड---रिया (रियाकारी)----पाखंड, हावबावपाखंड, हावबाव---पाखंडु----पाखंड, ढोंगअवडंबर, ढोंग---पाखंड, ढोंगदंभ---भण्डामि, भानभण्डामि, बुजरुकि---भंडामिभंडामि---पाषंडआडंबर---बूटकमुबूटकमु---पॊय् नडत्तैपाशांगु---कपटाचरणं, कळ्ळ भक्तिपुर॒मोटि---बूटाटिकॆ, सोगु, आषाढमूतिआडंबर, कपट, ठक्कु---
1913पागलविशेषण----जो किसी तीव्र मनोविकार के कारण ज्ञान या विवेक खो बैठा हो, विक्षिप्त, सनकी।----पागल----पागल----पागल----पाग॒लु, चर्यो----वेडा----गांडुं, गेलुं----पागल, खेया----पगला, बलिया----पागळ----पिच्चिवाडु पुं. पिच्चदि स्त्री.----पैत्तियम् पिडित्त----भ्रान्तन्, विक्षिप्तन् किरु॒क्कन्----हुच्च----
1914पाचकविशेषणपुंलिंग---पचाने वाला ;वह दवा जो खाई हुई चीज पचाती या पाचन शक्ति बढ़ाती हो।---पाचकपाचक---हाज़िम----वाजु॑श्रोपरावन वोल---हाज़िमेदारुहाज़िमेदारु शइ---पचविणारेपाचक औषध---पचावनारुंपाचक दवा---पाचकपाचक, हजमी---हजम कारकहजमी, औषध----पाचक---पाचकमुपाचकमु---जीरण शक्ति युडैयजीरण मरुन्दु---पचिप्पिक्कुन्नपचनौषधं---जीर्णकारिजीर्णकारि---
1915पाठकपुंलिंग----पढ़ने वाला।----पाठी, पाठक----क़ारी----परन वोल----पाठकु----वाचक----पाठकी, वाचक----पाठक----पाठक----पाठक----पाठकुडु----वाचगर्----अनुवाचकन्----ओदुग----
1916पाठशालास्त्रीलिंग----वह स्थान जहाँ विद्यार्थियों को पढ़ना-लिखना सिखाया जाता है, विद्यालय।----पाठशाला----मदरिसा (इस्कूल)----च़ाटु॑ हाल़----पाठशाला, स्कूलु----पाठशाळा, विद्यालय----पाठशाला, निशाळ----पाठशाला, विद्यालय----पाठशाला----पाठशाळा----पाठशाल बडि----पाडशालै पळ्ळिक्कूडम्----पाठशाल----पाठशालॆ, विद्यालय----
1917पातालपुंलिंगपुंलिंग---पृथ्वी के नीचे के सात लोकों में से सबसे नीचे का लोक, नाग-लोक ;बहुत अधिक गहरा और नीचा स्थान।---पतालपताल---तह्तस्सरा----पाताल, तलपातालपाताल, तलपाताल---पातालु----पाताळ, नाग-लोकपाताळ, खोल जागा---पाताल (ळ)----पाताल, नागलोकअति गभीर निम्न स्थान---पातालअति द और चापर ठाइ---पाताळ----पाताळमुपाताळमु---पाताळम्, कीऴुलगम्ताऴ्न्द, आळमान इडम्---पाताळंकयं---पाताळआळवाद---
1918पात्रपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--वह आधान जिसमें कुछ रखा जा सके, बरतन, भाजन;ऐसा व्यक्ति जो किसी काम या बात के सब प्रकार से उपयुक्त या योग्य समझा जात हो ;उपन्यास, कहानी, काव्य नाटक आदि में वे व्यक्ति जो कथा-वस्तु की घटनाओं के घटक होते हैं और जिनके क्रिया-कलाप या चरित्र से कथा-वस्तु की सृष्टि और परिपाक होता है।--पातरपातरपातर--ज़र्फ़ (बरतन)मुस्तहिक़ (हक़दार)किरदार--बानु॑बानु॑किरदार--बर्तणुलाइकु, जोगो॒ शख्सु (केंहि कम वगैरह जे ख्याल खां)पात्रु, किरदार--पात्र, भांडेपात्र योग्य व्यक्तिपात्र (साहित्यातील)--पात्र, बासणयोग्य, लायकनाटकमां वेश लेनार--पात्र, बासनपात्र, योग्य व्यक्तिपात्र (साहित्ये)--पात्रपात्रपात्र, चरित्र--पात्र, बासन, भाजनउचजुक्त-पात्र, प्रकृत-भाजनपात्र, चरित्र--पात्रपात्रुडुपात्र--पात्तिरम्तगुदि पॆट॒ट॒वर्इलक्किय- पात्तिरंगळ्--पात्रंपात्रंकथा पात्रं--पात्रॆसत्पात्रपात्र--
1919पानासकारात्मक क्रिया----प्राप्त करना।----पाउणां----पाना----प्रावुन, लबुन----पाइणु, हसुलु करणु----मिळणें, प्राप्त करणें----पामवूं, मेळववुं----प्राप्त करा पाओया----पा, प्राप्त कर----पाइबा----पोंदुट----पॆट॒टुक्कॊळ्ळ----नेटुक----पडॆयुवुदु----
1920पापपुंलिंग----धर्म और नीति के विरूद्ध किया जाने वाल ऐसा निंदनीय आचारण या काम जो बुरा हो और जिसके फलस्वरूप मनुष्य को नरक भोगना पड़ता हो।----पाप----गुनाह----पाफ, गॅनाह----पापु----पाप----पाप, दुष्कृत्य----पाप, धर्म ओ नीति विरुद्ध कर्म----पाप----पाप----पापमु----पावम्----पापं----पाप----
1921पारंगतविशेषण----जिसने किसी विद्या या शास्त्र का बहुत अधिक ज्ञान प्राप्त कर लिया हो।----परंगत----माहिरे कामिल----आ॑लिम, मा॑हिर----माहिरु, भडु.----पारंगत----पारंगत, पूरेपूरां माहितगार----प्रकाण्ड विद्वान, शा॒स्त्रज्ञ॒ (छ) (ग्गँ)----पंडित----पारंगम, पारंगत----पारंगतुडु----करैकड़न्द अरि॒वुळ्ळ----पारंगतन्----पारंगत----
1922पारपुंलिंगपुंलिंग---झील, नदी, समुद्र आदि का दूसरी ओर का किनारा ;किसी काम या बात का अंतिम छोर या सिरा, विस्तार या व्याप्ति की चरम सीमा या हद।---पारपार---पारहद---अपोरअन्द---पारु, पर्यो किनारोपारु, हद---पैलतीरपरिसीमा व हद---पार, तीरहद, सीमा, छेडो, अंत---पारपार, प्रान्त, सीमा---पार, काषशेष सीमा---पार----अवतलि ओड्डुपारमु---अक्करै, मरु॒करैकड़ैशि ऎल्लै---मरु॒करअट॒टं॒---आचॆय दडकॊनॆ---
1923पारदर्शीविशेषणविशेषण---आर-पार अर्थात् बहुत दूर तक की बात देखने और समझने वाला ;दूरदर्शी, पारदर्शक।---पारदरशी----दूरबींशफ़्फ़ाफ़---दूरंद॑शीदूरंद॑शी---दूरदिशुशिफ़ाफु, पारदर्शी---पारदर्शी, दूरदर्शीदूरदर्शी, पारदर्शक---पारदर्शीपारदर्शक---पारदर्शी, विचक्षणदूरदर्शी, परिणा॒मदर्शी (न)---पारदर्शीदूरदर्शी---पारदर्शी----पारदर्शकमुपारदर्शकमु---पिन् निगळुबबैगळै मुन्नरे अरियुम् तिर॒मैयुळ्ळदीर्ग दरिसियान---दीर्घदर्शिदूरदर्शि---दूरदृष्टि, दूरालोचकदूरदर्शक, पारदर्शक---
1924पारसपुंलिंग----एक कल्पित पत्थर जिसके स्पर्श से लोहा सोना हो जाता है।----पारस----पारस----पारस----पारसु----पारस----पारस, पारसमणि----परश पाथर----परसमणि----परश (मणि), परश-पथर----पारसमणि----मुट॒ट॒ उलोंगंगळै पॊन्नाक्कुम शक्तियुळ्ळ दाग सॊल्लप्पडुम ऒरु कल्----'पारसमणि' स्पर्शमणि----स्पर्शमणि----
1925पारावारपुंलिंग----समुद्र।----पारावार----समुंदर----सॊदुर----समुंडु----समुद्र----पारावार, दरियो, समुद्र----पारावार, समुद्र----सागर----पराबार----समुद्रमु----कड़ल्----पारावारं----समुद्र----
1926पारिभाषिकविशेषणविशेषण---परिभाषा संबंधी ;जो (शब्द) जो किसी शास्त्र या विषय में अपना साधारण से भिन्न कोई विशिष्ट अर्थ रखता हो (टेक्नीकल)।---परिभाषकपरिभाषक---इस्तिलाही----टॆकनिकु॑ल----पारिभाषा या वस्फ़, संबंधीपरिभाषिकु वस्फ़ी, इस्तिलाही, टेक्नीकलु, तकनीकी---पारिभाषिकपारिभाषिक शब्द---पारिभाषिक----पारिभाषिकपारिभाषिक शब्द---पारिभाषा संबंधीपारिभाषिक---पारिभाषिक----पारिभाषिकसांकेतिक---पॊरुळै विळक्कुगिरतॊळिल् नुट्पमुळ्ळ---निर्वचनात्मकंसांकेतिक (पदं)---परिभाषॆगॆ संबंधिसिदपारिभाषिक---
1927पारिश्रमिकपुंलिंग----किए हुए श्रम या कार्य के बदले में मिलने वाला धन, करने की मजूरी (रिम्यूनरेशन)।----मेहनताना----मेह्नताना (उज़त)----मेहनु॑तानु॑----उजूरो, महिनताणों----मेहेनताना, मजुरी, पारिश्रमिक----महेनताणुं----पारिश्रमिक, मजुरि----पारिश्रमिक----पारिश्रमिक----प्रतिफलमु----ऊदियम्----प्रतिफलं----संभावनॆ----
1928पालकीस्त्रीलिंग----एक प्रसिद्ध सवारी जिसे कहार या मजदूर कंधे पर उठाकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं।----पालकी----पालकी----ज़ाँ॑पानु॑----पालकी----पालखी----पालखी, सुखपाल----पालकि, शिविका----पाल्की, दोला----पालिंकी----पल्लकी----पल्लक्कु----मंचल्, पल्लक्कु----पल्लक्कि----
1929पालतूविशेषण----(पशु पक्षियों के संबंध में) जो पकड़ कर घर में रखा तथा पाला गया हो (जंगली से भिन्न)।----पालतू----पालतू----पालतू----पालतू----पाळीव----पालित, पाळेलुं----पोषा----पोहनीया----गृह पाळित----पेंपुडु----वीट्टिल् वळ्र्क्किंर॒----वळर्त्तुन्न----साकिद----
1930पालनपुंलिंगपुंलिंग---भरण-पोषण, परवरिश ;आज्ञा, आदेश, कर्त्तव्य, वचन आदि कार्यों का निर्वाह।---पालण----परवरिशबजाआवरी (त़ामील)---पालुन, रछुनपालुन, रछुन---पालनु, पालना----पालन-पोषणपालन, पाळणें---पालन-पोषणपालन---प्रतिपालन, भरण-पोषण॒ (न)पालन---पालनपालन---पाळनपाळन---पालनपालन---वळरत्तल्परमारित्तल्---पालनं, वळर्त्तल्पालिक्कल्---पालनॆनिर्वहणॆ---
1931पालनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया--भरण-पोषण करना, परवरिश करना;आज्ञा, आदेश प्रतिज्ञा, वचन आदि के अनुसार आचरण या व्यवहार करना;पशु-पक्षियों को अपने पास रख कर खिलाना-पिलाना, पोसना।--पालणापालणापालणा--परवरिश करनाबजा लानापालना--पालुन रछुन----पालणु----पालन-पोषण करणेंपालन करणें पाळणें (वचन, आज्ञा, कर्तव्य इ)पाळणें (पशु-पक्षी)--पाळवुंमानबुंपाळवुं, पोषवुं--प्रतिपालन करापालन करासंरक्ष॒ण करा (न)--भरण-पोषण देपालन करपोह--पाळना----पालन, पालिंचुटपालन, पालिंचुटपेंचुट--परिपालिक्कअनुसरिक्कवळर्क्क--वळर्त्तुकपालिक्कुकवळर्त्तुक--साकुवुदु, पोसजॆनिर्वाहिसुवुदुसाकुवुदु--
1932पावनविशेषणविशेषण---पवित्र;(समस्त पदों के अंत में) पवित्र करने या बनाने वाला।---पावनपावन---पाक, (ताहिर)मुतह्हिर---श्रूच़----पवित्रु----पावन, पवित्रपवित्र करणारा---पावन, पवित्र, शुद्धशुद्ध करनारुं---पवित्रपावनं---पबित्रपबित्र करोंता---पाबन----पावनमयिनपावनमयिन---तूय्मैयानतूय्मै आक्कुगिर॒---पवित्रमायपवित्र माक्कुन्न---पवित्र, पावनउद्धारक---
1933पाशपुंलिंग----वह चीज जिससे किसी को फंसाया या बांधा जाए, बंधन, फंदा।----फाही, फंदा----फंदा----फंदु॑, जाल----फंदो, फंदु----पाश, बंधन, जाळे----पाश, फांसों, गाळो----फांद----फंदि----फाश, पाश----पाशमु, त्राडु----पाशक् कयिरु॒----पाशं, कयरु॒, कुटुक्कु----पाश, बलॆ----
1934पासविशेषणविशेषणविशेषण--जो अवकाश, काल आदि के विचार से अधिक दूरी पर न हो, निकट, समीप;अधिकार में, हाथ में ;जो जांच, परीक्षा आदि में उपयुक्त या ठीक ठहरा हो।--कोल, पासकोल, पास---पास----नर॑वुअथस मंज़पास--बेझोवटि, हथ मेंपासि--निकट, जवळ, समीपअधिकारांत, हतांतउत्तीर्ण--पासे, नजीक, पडखे, बाजुमांताबामांपास, पसार--पाशे, काछेअधिकारे, हातेपास, उत्तीर्ण--ओचरहाततपाच, उत्तीर्ण--पास, समीपहात रे, अधिकार रेपास, उत्तीर्ण--दग्गरदग्गरपासयिन, उत्तीर्णडु--किट्ट, अरुगेकैवशम्तेर्वु पॆट॒ट॒--अटुत्तु, अरिकॆकैयिल् वशत्तुपासाय--हत्तिरअधिकार दल्लिरुवपासु, उत्तीर्ण--
1935पिंजरापुंलिंग----धातु बांस आदि की तीलियों का बना हुआ बक्स की तरह का वह आधान जिसमें पक्षी, पशु आदि बंद करके रखे जाते हैं (केज)।----पिंजरा----पिंजरा (कफस)----ठ्युप, पंजरु॑----पिञिरो----पिंजरा----पांजरुं----खांचा----पिंजरा----पिंजरा----पंजरमु, बोनु----कूण्डु----कूटु, पंजरं----पंजर----
1936पिंडपुंलिंगपुंलिंग---धनी या ठोस चीज का छोटा और प्राय: गोलाकार खंड या टुकड़ा, ढेला या लोंदा ;जौ के आटे, भात आदि का बनाया हुआ वह गोलाकार खंड जो श्राद्ध में पितरों के उद्देश्य से वेदी आदि पर रखा जाता है।---ढीम, ढेलापिंड---ढेलापिंड---प्यंडप्यंड---गोढ़ो, पिंडुपिंडु---गोळा, पिंडपिंड---पिंड, गोळोपिंड---पिण्ड, डेलापिण्ड---टुकुरापिंड---पिंड----पिंडमु, मुद्दपिंडमु, मुद्द---उरुण्डैशिराद्दत्तिल्, अळिक्कुम् पिण्डम्---कट्ट, उण्ट, उरुळपिण्डं---उंडॆपिंड---
1937पिंडदानपुंलिंग----कर्मकांड के अनुसार पितरों का पिंड देने का कर्म जो श्राद्ध में किया जाता है।----पिंडदान----पिंडदान----श्राद, प्यंड थवुन----पिंडदानु----पिंडदान----पिंडदान----पिंडदान----पिंडदान----पिंडदान----पिंडदानमु----शिराद्दत्तिल् पिण्डम वैत्तल्----पिण्डं वैक्कल् पिण्डदानं----पिंडदान----
1938पिचकारीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---नली के आकार का धातु का बना हुआ एक उपकरण जिसके मुंह पर एक या अनेक ऐसे छोटे-छोटे छेद होते हैं, जिनके मार्ग से नाली में भरा हुआ तरल पदार्थ दबाव से धार या फुहार के रूप में दूसरों पर या दूर तक छिड़का या फेंका जाता है (सिरिंज) ;किसी चीज से जोर से निकलने वाली तरल पदार्थ की धार।---पिचकारीपिचकारी---पिचकारी----पिचकार्य----पिचकारी----पिचकारीपिचकारीची धार---पिचकारीधार---पिचकारीफोयारा---फिचकारीफिचकारीर दरे मरा---पिचकारीपिचकारी (सिरिज) (इंजेक्शन सिरिंज)---पिचिकारु चिम्मनगोट्टमुपिचिकारु---पीच्चां कुऴलपीच्चुगिर॒ दिरवम्---पीच्यांकुळल्धार---नीर्कोळवॆपिचकारि---
1939पिछलाविशेषणविशेषणविशेषण--जो किसी वस्तु के पीछे की ओर हो (हिंड, बैक) ;काल, घटना, स्थिति आदि के क्रम के विचार से किसी के पीछे अर्थात पूर्व में या पहले पड़ने या होने वाला (प्रीसीडिंग) ;बीता हुआ।--पिछलापिछलापिछला--अ़क़बी (पिछला)माब़ाद (पिछला)गुजश्ता (साबिक़)--प॑त्युमप॑त्युमप॑त्युम--पोयों, पुठ्योंपहिर्योंगुज़िर्यलु--पाठीमागचापूर्वीचाविगत--पाछलुंपाछळनुं, पूर्वनुबीती गयेलुं--पश्चातेर, पिछनेरआगेकारगत--पिछ फालआगर, पूर्बबर्तीहै योवा--पिछिला, गतआगे पूर्बेगत, व्यतीत, विगत--वेनुकटिवेनुकटिवेनुकटि--पिन पुर॒त्तुकड़न्द, मुन्दैयकऴिन्द--पिन्मन्, कळिञ्ञकऴिञ्ञु पोय--हिंदिनमुंचिनकळॆद--
1940पिपासास्त्रीलिंग----पानी या और कोई तरल पदार्थ पीने की इच्छा, तृष्णा, तृषा, प्यास।----तेह, मेह, पिआस----तश्नगी (पियास)----त्रेश----प्यास, उञ----तहान, पीपासा, तृषा----पिपासा, तरस, तृष्णा, तृषा----पिपासा, तृष्णा॒ (न)----पियाह----पिपासा----पिपास, दप्पिक दाहमु----दाहम्----तृष्ण, पिपास----पिपासॆ, बायारिकॆ----
1941पिशाचपुंलिंग----एक प्रकार के भूत या प्रेत जिनकी गणना हीन देव योनियों में होती है तथा जो वीभत्स कर्म करने वाले माने जाते हैं।----भूत----ख़बीस----पेशाच़----पिशाचु, भूतु----पिशाच्च, भूत----पिशाच, प्रेत----पिशाच----पिशाच----पिशाच----पिशाचमु----पिशाशु, पेय्----पिशाचु----पिशाचि----
1942पीछेक्रिया विशेषणक्रिया विशेषणक्रिया विशेषण--पीठ की ओर ;काल क्रम, देश आदि के विचार से किसी के पश्चात् या उपरांत, घटना या स्थिति के विचार से किसी के अनंतर, उपरांत, पश्चात्;किसी के कारण या खातिर निमित्त, के लिए, वास्ते।--पिच्छेपिच्छेपिच्छे--पीछे (अ़क़ब)ब़ाद (पीछे)वास्ते--प॑त्यकिन्यपॊतुसप्यठ, पतु॑--पुठ्यांखां पोइलाइ, ख़ातिर--पाठीभागेनंतर, पश्चातकोणासाठी, कोणा करिता--पाछळपछीपाछल, ने माटे--पिछने, पश्चातेपरे, पश्चातेजन्मे, खातिरे--पिठिफालेपाछतकारणे--पछै----वेनुकवेनुककोरकु, निमित्तमु--पिन्नाल्पिर॒गुकारण माग--पिन्निलेक्कुपिन्नीटुवेण्टि--हिंदुगडॆ बॆन्नकडॆतरुवायगागि--
1943पीटनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---आघात करना, चोट पहुंचाना ;चौसर, शतरंज आदि के खेलों में विपक्षी की गोट या मोहरा मारना।---कुट्टणाकुट्टणा---पीटना----चेटुन, लायुनहरावुन---मारणु धकु हणणुमारणु, जीतणु (रांदि में)---मार देणें, चोप देणें, ठोकणेंसोंगटी, मोहरे उडवणें, मारणें---पीटवुंडोकवुं, उडाडवुं---पिटानो, पेटानोघुंटि मात करा---मारमार---पीटिबापिटिबा---कॊट्टुटकॊट्टुट---अडिक्कसदुरंगत्तिल् तोर्कडिक्क---अटिक्कुकतोल्पिक्कुक---हॊडॆयुवुदुकॊल्लुवुदु---
1944पीठिकास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---छोटा पीढ़ा, पीढ़ी ;वह आधार जिस पर कोई चीज विशेषत: देवमूर्त्ति रखी, लगाई या स्थापित की गई हो।---पीढ़ापीढ़ा---पीढ़ीचौकी---पीरप्यंड॑---संदुलीटेक---छोटा चौरंग, मोढ़ावेदि---पीढिका, बाजठपीढिका---पिंडिपीढिका, वेदी---सरु पीरापीठिका, पीठिया---पीठिका----पीटपीठमु---शिरि॒य उट्कारुम, पलगै, आसनप्पलगैपडिच्चट्टम्---चॆरि॒य स्टूळ्पीठं पीठिक---पीठमंदासन---
1945पीड़ास्त्रीलिंग----शारीरिक या मानसिक कष्ट, दर्द, त्वचा का दर्द।----पीड़----तक्लीफ़ (दर्द)----तकलीफ----पीड़ा, कष्टु----पीडा, वेदना----पीडा, दु:ख, चूंक----पीड़ा, व्यथा----कष्ट, दुख----पीड़ा, कष्ट, ब्यथा----बाध, नोप्पि----वेदनै, वलि----पीड----नोवु----
1946पीढ़ीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--किसी कुल या वंश की परम्परा में, क्रम-क्रम से आगे बढ़ने वाली संतान की प्रत्येक कड़ी या स्थिति ;छोटा पीढ़ा ;किसी विशिष्ट समय का वह सारा जनसमुदाय जिसकी वय में अधिक छोटाई-बड़ाई न हो।--पीढ़ीपीढ़ीपीढ़ी--सिल्सिलए नस्लपीढ़ीनस्ल--पीरपीर, पुयपीर--पीढ़ीनंढो मूड़ो---पीढ़ी, कुल, वंश परंपरालहान, मोठापिढी--पेढीकबीलोसमकालीन पेढी--वंश, परम्परापिंड़िसमकालीन व्यक्ति वर्ग--कुल, बंशसरु पीराफैद--पीढ़ीछोटा पीढ़ा---तरमु वंशपरंपरपीटतरमु--तलै मुरै॒शिरि॒य इरुक्कैकुरि॒प्पिट्ट कालत्तिल् समवयदुळ्ळ जन समूगम्--वंशपरंपरचॆरि॒य पीठंतलमुर॒--पीळिगॆचिक्क मणॆतलॆमारू तलॆमारु--
1947पीनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---किसी तरल पदार्थ को घूँट-घूँट करके पेट मे उतारना ;धूम्रपान करना या शराब आदि से नशा करना।---पीणापीणा---पीनापीना---चॊनचॊन---पियणुछिकणु (तमाक)---पिणेंधुम्रपान करणें, दारु पिणें---पीवुंधुम्रपान करवुं---पान करा, खाओयापान करा, खाओया---पी, खापी, खा---पीइबा----तागुटतागुट---कुडिक्क, अरुन्दकळ् कुडिक्क---कुटिक्कुककुटिक्कुक, वलिक्कुक---कुडियुवुदुसेदुवुदु---
1948पीलाविशेषणविशेषण---जो केसर, सोने या हल्दी के रंग का हो।आभा-रहित, निष्प्रभ।---पीलापीला---पीला (ज़र्द)----ल्यॊदुरल्यॊदुर---पीलो, फिकोफिको---पिवळेनिष्प्रभ---पीळुं हळदरना रंगनु, पीतफीकुं, फिक्कुं---हल्देनिष्प्रभ, फ्याकाशे---हालधीयाशेंता---हऴदिआ----पसुपुपच्च़निपालिपोयिन---मंजळानवॆळिरिय---मञ्ञविवर्णमाय---हळदियसप्पॆयाद---
1949पीसनासकारात्मक क्रिया----रगड़ या दबाव पहुंचा कर किसी वस्तु को चूरे के रूप में बदलना।----पीहणा, पीसणा----पीसना----प्युहुन----पींहणु----दळणें----पीसवुं, दळवुं----पेषा----पिह----पेषिबा, बाटिबा----नूरुट, रुब्बुट----अरैक्क----पॊटिक्कुक----बीसुवुदु----
1950पुंजपुंलिंगपुंलिंग---ढेर, राशि ;समूह।---ढेर, समूह, पुंज----अंबार (ढेर)मज्मूआ़---डेर, राश----ढेरुमेडु.---ढीगसमूह---पुंज, ढगलोसमूह---पुंज, राशिढेर, समूह---दमसमूह---पुंजपुंज---पुंजमु, राशिसमूहमु---कुवियल्शेर्क्कै---राशि, पुञ्जंसमूहं---पुजं, राशिसमूह---
1951पुकारस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---जोर से नाम लेकर संबोधित करने की क्रिया या भाव;आत्मरक्षा, सहायता आदि के लिए दूसरों को बुलाने की क्रिया या भाव।---पुकारपुकार---पुकार (सदा)----आलव, नादआलव, नाद---पुकार, सडु----हांक, आरोळीहाक, आरोळी---पोकार, पुकारबूम---डाक, सम्बोधनडाक, चित्कार---चिञरआर्तनाद, चिञर---डाक, फुकार----केक, पिलुपुअरुपु---कूप्पिडुदल्उदविक्कु अऴैत्तल्---विळिनिलविळि---करॆकरॆ, कूगु---
1952पुकारनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---किसी को बुलाने, संबोधित करने या उसका ध्यान आकृष्ट करने के लिए जोर से उसका नाम लेना ;रक्षा, सहायता आदि के लिए किसी का आह्वान करना, आवाज लगाना या चिल्लाना।---पुकारनाहाल-पाहरिआ पाउणा---पुकारना----आलव द्युननाद द्युन---पुकारणु, सड॒णु----हांक मारणेंबोलाविणें वा ओरडणें---पोकारवुंबूम पाडवी, बोलाववुं---डाका, सम्बोधन कराडाका---मातआर्तनाद कर---ड़ाकिबा, फुकारिबा----केकवेयुटअरुचुट---उरक्क कूप्पिडउदविक्काग उरक्क कूप्पिड---विळिक्कल्निलविळिक्कुक---करॆयुवुदुकूगिकॊळ्ळुवुदु---
1953पुचकारनासकारात्मक क्रिया----प्यार जतलाते हुए मुंह से पुच-पुच शब्द करना।----पुचकारना----पुचकारना----टाठिन्यार क॑रुन्----बुचिकारणु----चुचकारणें----पुचकारवुं----चुमकुड़ि देओया----जंतुक मरमेरे मात----गेल करिबा----मुद्दुलाडुट, बुज्जगिंचुट----शॆल्लम् कॊंज----उम्म वॆक्कुक ओमनिक्कल्----मुद्दाडुवुदु----
1954पुजारीपुंलिंग----किसी देवी-देवता की मूर्त्ति या प्रतिमा की पूजा करने वाला व्यक्ति।----पुजारी----पुजारी----पुज़ार्य, गोर----पूजा॒री----पुजारी----पूजारी----पुरुत, पूजारी/पूजरी----पुजारी----पूजारी----पूजारि----पूशारी----पूजारि, शान्तिक्कारन्----पूजारि----
1955पुण्यविशेषणविशेषणविशेषणपुंलिंगपुंलिंगपवित्र, शुद्ध ;मंगलकारक, शुभ ;धर्म-विहित और उत्तम फलदायक।धार्मिक दृष्टि से कुछ विशिष्ट अवसरों पर कुछ विशिष्ट कर्म करने से प्राप्त होने वाला शुभ फल;अच्छे और शुभ कर्मों का संचित रूप जिसका आगे चलकर उत्तम फल मिलता हो।पुन्नपुन्नपुन्नपुन्नपुन्यपाकनेकनेकसवाबनेकीपॊन्य, सवाब--पॊन्य, सवाबपॊन्य, सवाबपुञु----पवित्र, शुद्ध, पुण्यमंगलकारक, शुभधर्मविहित आणि उत्तम फलदायकपुण्य, शुभ फळपुण्य कर्मपुण्य, पवित्रशुभधर्म्यपुण्यशुभ, संचित कर्मपुण्यदायक, पवित्रमंगलदायक, शुभपुण्यपुण्य, शुभफलपुण्य, सुकृतिपबित्र, शुद्धशुभ मंगलकारीधम-बिहितपुण्यपुण्यपुण्य----पुण्यवंतमुशुभमुशुभमुपुण्यमुपुण्यमुतूय्मैयानमंगळ करमानपुण्णिय करमानपुण्णियम्नल्ल कारियंगळ् शॆय्वदिनाल् अडैयुम् पयन्पवित्रमायमंगलकरमाय-पुण्यंपुण्यकर्मंपुण्यमंगलकारकपुण्यपुण्यपुण्य
1956पुनरावृत्तिस्त्रीलिंग----किए हुए काम या बात को फिर से करने या दोहराने की क्रिया या भाव।----दुहराउ----तक्रार----फ्युर द्युन----दौरु, दुहिराउ----पुनरावृत्ति----पुनरावृत्ति----पुनरावृत्ति----पुनराबृत्ति----पुनराबृत्ति----पुनरावृत्ति----तिरुम्बच्चॆय्दल----पुनरावर्तनं----पुनरावृत्ति----
1957पुनरीक्षणपुंलिंग----किए हुए काम को जांचने के लिए फिर से देखना।----मुड़-परख----नज़रे सानी----बॆयि वुछुन----नज़रसानी, बी॒हर जाच----फेरतपासणी----पुनरावलोकन----पुनरीक्ष॒ण॒ (क्ख) (न)----पुनर्परीक्षण----पुनरीक्षण----पुनर्वीक्षण----परिशीलित्तल्----पुन: परिशोधन----पुनरीक्षणॆ----
1958पुनर्जन्मपुंलिंग----मरने के बाद फिर से उत्पन्न होना, दोबारा शरीर धारण करना।----पुनरजनम----पुनरजनम----पॅनर ज़नु॑म----पुनर्जन्मु----पुनर्जन्म----पुनर्जन्म, नवो जन्म----पुनर्जन्म----पुनर्जन्म----पुनर्जन्म----पुनर्जन्म----मरु॒-पिर॒प्पु----पुनर्जन्मं----पुनर्जन्म----
1959पुनीतविशेषण----पवित्र।----पुनीत----पाक----श्रूच़----पवित्रु----पुनीत, पवित्र----पुनित पवित्र----पुनीत, पवित्र----पबित्र----पबित्र, पुनीत----पुनीतमु, पवित्रमु----तूय्मैयान----पवित्रमाय, पुनीतमाय----पवित्र----
1960पुरस्कारपुंलिंग----अच्छी तरह कोई प्रशस्त और कठिन कार्य करने पर आदर या सत्कार के रूप में दिया जाने वाला धन या पदार्थ (प्राइज़, एवार्ड, रिवार्ड)।----नाम----इन्आ़म----यनामु॑----इनामु----पुरस्कार, बक्षीस, इनाम----पुरस्कार, इनाम----पुरष्कार, पारितोषिक----पुरस्कार----पुरस्कार, पारितोषिक----बहुमति बहुमानमु----वॆगुमदि----सम्मानं----पुरस्कार----
1961पुरूषार्थपुंलिंगपुंलिंग---वह मुख्य अर्थ, उद्देश्य या प्रयोजन जिसकी प्राप्ति या सिद्धि के लिए मनुष्य का प्रयत्न करना आवश्यक और कर्त्तव्य हो (पूरुषार्थ चार हैं- धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष);उद्योग, उद्यम।---पुरशारथपुरशारथ---फ़र्ज़मेह्नत---ह्यमथवुद्यूग---पुरुषार्थु----पुरुषार्थउद्यम---पुरुषार्थउद्योग, महेनत, पराक्रम---पुरुषार्थउद्यो॒ग उद्यम, पौरुष (ज) पराक्रम---पुरुषार्थउद्योग, चेष्टा---पुरुषार्थ----पुरुषार्थमुपुरुषार्थमु---नल्ल पलन् पॆर॒ शॆय्युम कडमै, पुरुषार्थम्मुयर्चि, उऴैप्पु---पुरुषार्थंपौरुषं, प्रयत्नं---पुरुषार्थ----
1962पुरोहितपुंलिंग----कर्मकांड आदि जानने वाला ब्राह्मण जो अपने यजमान के यहां मुंडन, यज्ञोपवीत, विवाह आदि संस्कार कराता तथा अन्य अवसरों पर उनसे दान, दक्षिणा आदि लेता है (हिन्दू प्रीस्ट)।----पुरोहित----परोहित----गोर----पुरोहितु, बां॒भणु----पुरोहित----पुरोहित----पुरोहित, पुरुत----पुरोहित----पुरोहित----पुरोहितुडु----पुरोगिदर्----पुरोहितन्----पुरोहित----
1963पुलपुंलिंग----खाइयों, नदी-नालों, रेल लाईनों, आदि के ऊपर आर-पार पाट कर बनाई हुई वह वास्तु रचना, जिस पर से होकर गाड़ियाँ और आदमी इधर से उधर आते जाते हैं सेतु (ब्रिज)।----पुल----पुल----कदु॑ल----पुलि----पुल, सेतु----पुल, सेतु----पुल, सेतु, साँको----दलं----पोल----वन्तेन----पालम्----पालं----सेतुवॆ----
1964पुष्पपुंलिंग----फूल, कुसुम।----फूल (गुल)----गुल----गुलु, पुष्पु----फूल, पुष्प, कुसुम----फूल, कुसुम----फूल----पुष्प, फुल----फुल----पुष्प, फुल, कुसुम----पुष्पमु, पुव्वु----पुष्पम्, पू, मलर्----पुष्पं----हूवु----
1965पुष्पांजलिस्त्रीलिंग----फूलों से भरी हुई अंजली जो किसी देवता या महापुरुष को अर्पित की जाती है।----पुशपांजली---------पोशि दॅछ़----पुष्पांजली----पुष्पांजली----पुष्पांजली----पुष्पाञ्जळि----पुष्पांजली----पुष्पांञ्जळि----पुष्पांजली----मलर्गळ समर्पित्तु वणंगुदल्----पुष्पांजली----हूवु तुंबिद बॆगसॆ----
1966पुस्तकालयपुंलिंग----वह स्थान जिसमें विभिन्न प्रकार की पुस्तकें सुव्यवस्थित ढंग से रखी जाती हैं।----लाइब्रेरी, पुसतकाला----कुतुबख़ाना----कुतुबखानु, लयब्रेरी----पुस्तकालय, लाइबररी----ग्रंथालय----पुस्तकालय----पुस्तकालय, ग्रन्थागार----पुस्तकालय, पुथिभॅराल----पुस्तकाळय----ग्रन्थालयमु----नूलगम् पुत्तगालयम्----गंथशाल----पुस्तकालय----
1967पूंजीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---जोड़ा या जमा किया हुआ धन ;ऐसा धन जो अधिक कमाने के उद्देश्य से व्यापार आदि में लगाया गया हो अथवा ऋण आदि पर उधार दिया गया हो।---पूंजी, सरमाइआपूंजी, सरमाइआ---सरमाया----संच़्यथ, सरमायिद्यार---पूंजी, मूड़ी----भांडवलमुद्दल---पूंजी, दोलतमूडी---सञ्चित धनमूलधन, पुँजि---पुंजिमूलधन---पुंजि----मूलधनमुपेट्टुबडि---ईट्टिय पणम्वियाबारतिल ईडु शॆय्युम् मुदल्, मुदलीडु---मुतल्, संपाद्यंमुटक्कुमुतल्, मूलधनं---आस्तिबंडवाळ असलु---
1968पूछताछस्त्रीलिंग----किसी बात की जानकारी के लिए उसके संबंध में एक या अनेक व्यक्तियों से बार-बार पूछना।----पुच्छ गिच्छ----म़ालूमात----प्रिछु॑-गार॑----पुछागा॒छा----विचारपूस----पूछताछ, पूछपाछ----जिज्ञासावाद----अनुसंधान----अनुसंधान----विचारण----विशारणै----अन्वेषणं----विचारणॆ----
1969पूछनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया--किसी बात की जिज्ञासा से कोई प्रश्न करना ;जाँच, परीक्षा आदि के प्रसंग में किसी के सामने कुछ प्रश्न रखना कि वह उसका उत्तर दे;किसी का हाल-चाल या खोज खबर लेना।--पुच्छणापुच्छणापुच्छणा--पूछना----प्र॑छुनप्रुछुऩप्रुछुऩ--पुछणु----प्रश्न विचारणेंविचारणेंविचारपूस करणें--पूछवुं, सवाल करवोजवाब मागवोतपास करवी--जिज्ञासा कराजिज्ञासा करा, प्रश्न कराखोंज खबर लओया--सोधसोधभाल-बेया-जान--पुछिबा, पचारिबाप्रश्न-पचारिबाभल-मन्द पचारिबा--प्रश्निंचुट, अडुगुटप्रश्निंचुट, अडुगुटविचारिंचुट--केट्क, विनवकेळ्वि केट्ककुशलम् विशारिक्क, नलम् विशारिक्क--चोदिक्कुकचादिक्कुकविवरं अन्वेषिक्कुक--केळुवुदुविचारणॆ माडुवुदुविचारिसुवुदु--
1970पूजनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---देवी-देवता को प्रसन्न या संतुष्ट करने के लिए यथाविधि श्रद्धाभाव से जल, फूल नैवेद्य आदि चढ़ाना ;किसी को परम श्रद्धा, भक्ति और आदर की दृष्टि से देखना और आदरपूर्वक उसकी सेवा तथा सत्कार करना।---पूजणापूजणा---पूजना----पूजुनपूजुन---पूज॒णु----पूजा करणेंभजणें, आदर सत्कार करणें---पूजवूं, पूजा करवीसेववुं भजवुं---पूजा कराश्रद्धा करा---पुजआदर-सादर कर---पूजिबा----पूजिंचुटपूजिंचुट---पूजिक्कतॊण्डु पुरिय, सेविक्क---पूजिक्कुकआराधिक्कुक---पूजिसुवुदुसत्करिसुवुदु---
1971पूजनीयविशेषण----पूजा करने योग्य, अर्चनीय या आदरणीय।----पूजनीक----क़ाबिले परस्तिश, क़ाबिले एहतिराम----पूज़ायि युग्य, पूज़ि लायख----पूजण॒ जोगो॒ पूजि, पूज्य----पूज्य, आदरणीय, पूजनीय----पूजनीय पूज्य----पूजनीय, पूज्य----पूजनीय----पूजनीय----पूजनीयमैन----वणक्कत्तिर्कुरिय----पूज्यनाय----पूज्य, पूजनीय----
1972पूजास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---किसी देवी-देवता पर विनय, श्रद्धा और समर्पण के भाव के साथ जल, फूल, फल, अक्षत आदि चढ़ाने का धार्मिक कृत्य, अर्चन, पूजन ;बहुत अधिक आदर-सत्कार, आव-भगत।---पूजापूजा---पूजा (इ़बादत)----पूज़ापूज़ा---पूजा॒----पूजा, पूजन, आ़राधनाआदर सत्कार, सन्मान---पूजा, पूजन, उपासनासन्मान---पूजा, पूजनआदर-आप्यायन---पूजाआदर-सादर---पूजाआदर-सत्कार---पूजपूज---पूजैवणंगुदल्, उपचरित्तल्---पूजबहुमानं, सत्कारं---पूजॆमर्यादॆ---
1973पूराविशेषणविशेषण---पूरी तरह से, भरा हुआ, परिपूर्ण ;समग्र, समूचा, सारा, कुल।---पूरापूरा---पूरा (पुर)कुल/तमाम---पूरु॑पूरु॑---पूरो, पूरो भर्यलुसमूरो, पूरो---भरलेला, परिपूर्णसमग्र, सर्व---पुरूं, पूर्ण परिपूर्णआखुं---पूर्ण, भरासमग्र, पूरो---परिपूर्ण, पूरासकलो, संपूर्ण---पूरासकल, समग्र, संपूर्ण, पूरा---पूर्तिगमोत्तमु, पूर्ति---मुऴुमॊत्तम्, एल्लाम्---निर॒ञ्ञऎल्लां, मुळुवन्---तुंबिरुवऎल्ल---
1974पूर्णविशेषणविशेषणविशेषण--जो पूरी तरह से भरा हुआ हो ;सब प्रकार की यथेष्टता के कारण जिसमें कुछ भी अपेक्षा, अभाव या आवश्यकता न रह गई हो, सबका सब, पूरा, सारा समस्त;हर तरह से ठीक और पूरा।--पूरन----लबरेज़ (पुर)तमाममुकम्मल--पूरु॑पूरु॑पूरु॑--पूरो, पूरो भर्यलुपूर्ण, पूरोपूरो, सही--पूर्ण, भरलेलापूर्ण, समग्र, समस्तसंपूर्ण--पूर्ण, पूरुंपूर्ण, अखंड, आखुंसंपूर्ण--परिपूर्ण॒, भरा (न)सारा, समस्त, समग्रपूर्ण॒ (न)--पूर्ण, पूरासंपूण, भरपूरसंपूर्ण--पूर्ण----संपूर्णमयिनसंपूर्णमयिनसंपूर्णमयिन--निरंबिय, पूर्णमानकुरैवट॒ट॒मुळु, पूर्णमान--पूर्णमायमुऴुवनुंसर्वथा, पूर्णमाय--पूर्ति, तुंबिरुवसंपूर्णपरिपूर्ण--
1975पूर्णमासीस्त्रीलिंग----शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि जिसमें चन्द्रमा अपनी सोलहों कलाओं से युक्त होता है, पूर्णिमा।----पूरनमासी----चौहदवीं----पुनिम----पूर्णमासी----पौर्णिमा----पूर्णमासी, पूनम----पूर्ण॒मासी, पूर्णि॒मा (न) (न)----पूर्णिमा----पूर्णमासी, पूर्णिमा----पूर्णिम----पौर्णमि----पौर्णमि, वॆळुत्त वावु----हुण्णिमॆ, पौर्णमि----
1976पूर्णिमास्त्रीलिंग----चाँद्र मास के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि जिसमें चन्द्रमा अपने पूरे मंडल से उदय होता है, पूर्णमासी।----पुन्निआ----चौदहवीं----पुनिम----पूर्णिमा, पूर्णमासी----पौर्णिमा----पूर्णिमा----पूर्णिमा, पूर्णमासी----पूर्णिमा----पूर्णिमा----पूर्णिम----पौर्णमि----पूर्णिम, वॆळुत्त वावु----हुण्णिमॆ----
1977पूर्वजपुंलिंग----बाप, दादा, परदादा आदि पूर्व पुरुष, पुरखा।----वड-वडेरे, वडके----अज्दाद (सलफ़)----जद, अज्दाद----वडा॒, अबाडा॒डा॒----पूर्वज----पूर्वज, वडवो, पितृ----पूर्वज, पूर्वपुरुष----पूर्बपुरुष----पूर्बज----पूर्वजुलु, पूर्विकुलु----मुन्नोर्----पूर्वीकन्----पूर्वजरु----
1978पूर्वानुमानपुंलिंग----किसी भावी काम या बात के स्वरूप आदि के संबंध में पहले से किया जाने वाला अनुमान या कल्पना।----पूरब अनुमान----पेशक़ियासी (पेशबीनो)----ब्रोंह आं॑कु॑वन----अग॒कथी----पूर्वानुमान----पूर्वानुमान----पूर्वानुमान----पूर्बानुमान----पूर्बानुमान----अंजना----मुन् कूट्टिये कॊण्ड ऎण्णम्----पूर्वानुमांनं----पूर्वानुमान----
1979पूर्वाभासपुंलिंग----किसी काम या बात के संबंध में पहले से ही हो जाने वाला अनुमान।----खुड़क----एहसास----आं॑कु॑वन----पिरूं----पूर्वाभास----पूर्वाभास----पूर्वाभास----पूर्बाभास----पूर्बाभास----प्रगाभासमु----अबिप्पिरायम्----तोन्नल, ऊहं----पूर्वज्ञान----
1980पूर्वाह्नपुंलिंग----दिन का पहला भाग, सवेरे से दोपहर का समय।----सवेर----क़ब्लअज़ दोपहर----दुपहा॑रु॑ ब्रोंह----मंझंदि, डी॒हं जो पहियों अधु----पूर्वाह्न----पूर्वाह्न----पूर्वाह्न----पूर्बाह्न पुवाबेला----पूर्बाह्न----पूर्बाह्णमु----मुर्पहल्----पूर्वाह्नं----पूर्वाह्ण, बॆळग्गॆ----
1981पृथ्वीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---सौर जगत का पाँचवां सबसे बड़ा ग्रह जिसमें हम लोग रहते हैं ;आकाश तथा जल से भिन्न वह अंश जिस पर मनुष्य तथा पशु विचरण करते तथा पेड़-पौधे उगते हैं, जमीन, मिट्टी।---धरती----ज़मीनख़ुश्की---बुतु॑राथबुतु॑राथ---पृथ्वी, धर्ती----पृथ्वीभूमि, जमीन---पृथ्वीजमीन, माटी---पृथिवीभू-भाग---पृथिबीभू-खंड---पृथिबी----पृथ्वि, भूमिपृथ्वि, भूमि---उलगम्, बूमिबूमि, मण्---पृथ्वी, भूमिभूमि---भूमिनॆल---
1982पृष्ठभूमिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---पिछला भाग ;पहले की वे सब बातें और परिस्थितियाँ जिसके आगे या सामने कोई नई विशेष बात या घटना हो और जिनके साथ मिलान करने पर उस बात या घटना का रूप स्पष्ट होता है, भूमिका (बैकग्राउण्ड)।---पिछोकड़----पसमंज़र----पॊत बोगपस मंज़र---पुठ्यों भाङोपसे मन्ज़रु---पाश्र्व भूमि, पृष्ठभूमिभूमिका---पृष्ठभूमिभूमिका---पृष्ठदेशपटभूमि---पिछफालपटभूमि---पृष्ठभूमि----पाश्र्वभागमुनेपथ्यमु---पिर पगुदिपिन्नणि---पिन् भागंपश्चात्तलं---हिंभागहिन्नॆलॆ---
1983पेचीदाविशेषणविशेषण---जिसमें बहुत से पेंच हो ; घुमाव-फिराव वाला;(काम या बात) जिसमें बहुत-सी उलझनें कठिनाइयां या झंझट हों।---गुंझलदार, पेचीदा----पेचीदा----पीचीदु॑पीचीदु॑ खुर्यलद---पेचीदो----गुंता गुतीचा, अवघडकठिण---पेचीदा----प्याँचालोजटिल---कठिन, जटिल----पेंचुआ, बंका, बक्रजटिळ, कठिन---चिक्कुलुगल् जटिलमयिनपेची---सुट॒टि॒ वळैत्तसिक्कलान---कुरुक्कुळ्ळप्रयासं निर॒ञ्ञ---सुत्तुळ्ळतॊडकिन, सिक्काद---
1984पेटीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---कमर में लपेट कर बाँधने का तमसा, कमरबंद;छोटा संदूक, संदूकची, छोटी डिबिया।---पेटी----कमरबंद (पेटी)पेटी (संदूकचा)---कमरबन्दपीट्य---पटो, कमरबंदुपेत्ती---कमरपट्टालहान पेटी, लहान डबी---भेट, पेटीपेटी---पेटि, कोमरबन्दपेटी, छोट पेटरा---पेटीहाथ बाकच, पेटारि---अंटा-पटी, कमर-बंदछोट सिंदुक---बेल्टुपेट्टे---इडुप्पिल् अणियुम् पट्टैपॆट्टि---अरप्पट्टपॆट्टि---बॆल्ट, डाबुचिक्क पॆट्टिगॆ---
1985पेड़पुंलिंग----वृक्ष।----रुक्ख, विरछ----दरख़्त (पेड़)----कुल----वणु, दर्ख़तु----झाड----झाड, वृक्ष----गाछ, वृक्ष----गछ----गछ बृख्य----चेट्टु----मरम्----वृक्षं, मरं----मर----
1986पेशगीस्त्रीलिंग----अग्रिम धन (एडवान्स)।----पेशगी----पेशगी----सय, पेशु॑गी----पेशिगी----आगाऊ रक्कम----पेशगी----अग्रिम, आगाम----आगाधन----अग्रिम, बहिना----बयाना----मुन्पणम्, अचचारम्----मुन्कूर॒----मुंगड----
1987पेशापुंलिंग----व्यवसाय, धंधा।----पेशा----पेशा----पेशि----पेशो, धंधो----धंदा----पेशो, पेश, धंधो----पेशा, ब्यबसा---------पेसा----वृत्ति, उद्योगमु----तॊळिळ्, उद्दियोगम्----तॊळ्ळि----उद्योग----
1988पैदावारस्त्रीलिंग----फसल, अन्न आदि जो खेत में बोने से पैदा होता है, उत्पादन।----पैदावार----पैदावार----पा॑दावार----पैदावार----उत्पादन, पीक----पेदाश, उपज----उत्पादन, उत्पन्न शस्य----उत्पादन----फसल----पंट----विळैच्चल्----विळवु----बॆळॆ----
1989पोंछनासकारात्मक क्रिया----किसी सूखे कपड़े को इस प्रकार किसी अंग, वस्तु या स्थान पर फेरना कि उस स्थान की नमी को सोख ले।----पूंझणा----पोंछना----वॅथरुन----उघणु----पुसणें----लूछवुं----मोछा----मोच----पोछिबा----तुडुचुट----तुडैक्क----तुटय्क्कुक----ऒरसुवुदु----
1990पोतपुंलिंग----जहाज़, जलयान।----जहाज़----जहाज़----जहाज़----जहाज़ु, बे॒ड़ो----जहाज़----पोत, मछवो, नाव----पोत, जाहाज----जाहाज----पोत, जाहाज----ओड, पडव----कप्पल्----कप्पल्, पोतं----हडगु----
1991पोतनासकारात्मक क्रिया----लेप करना, चुपड़ना।----चोपड़णा, लिप्पणा----पोतना----लिवुन----लेपणु, मखणु----चोपडणें----पोतवुं, लीपवुं----लेपा----लेप, लिप----लेपिबा----राचुट----पूश, तडव----पुरट्टुक----बळियुवुदु, हच्चुवुदु----
1992पोषणपुंलिंगपुंलिंग---लालन-पालन ;पुष्टि, समर्थन।---पालण-पोसणपुशटी---परवरिशतौसीफ़---रछुनपालुन---पालनापुठि, भराई---पोसणेंपुष्टि, समर्थन---पोषण, पोषवुं ते----पालन-पोषण॒, लालन-पालन (न)पुष्टि, समर्थन---लालन- पालनसमर्थन---पोषण----पोषणसमर्थन---पोषित्तल्आदरित्तल्---पोषणंसमर्थिक्कल्---लालनॆ-पालनॆपुष्टि---
1993पोशाकस्त्रीलिंग----पहनावा, लिबास।----पुशाक----पोशाक----पॅशाख----पोशाक----पोशाख----पोशाक, पहेरवेश, लेबास----पोशाक, परिच्छद----पोछाक, साज----पोषाक, पहरण----वेषमु, दुस्तुलु----उड़ै, आड़ै----वेषं, ड्रॆस्स्----पोषाकु----
1994पौधापुंलिंग----छोटा पेड़, नया पेड़।----बूटा----पोदा----कुल----बूटो----रोप, रोपटे----छोडवो----चारागाछ----पुलि----छोट गछ----मोक्क----सॆड़ि----चॆटि----गिड----
1995पौना (पौन)विशेषणविशेषण---तीन चौथाई।----पौणा----पौऩा (पोन)----दून----पौणा, टे भाङ----पाऊण----पोणुं----पौने----चारिभागर तिनि----पौने----मुप्पावु----मुक्काल्----मुक्काल्----मुक्कालु----
1996पौरुषपुंलिंग----पुरुषार्थ, पराक्रम, उद्यम।----पुरखत्त, मरदऊ----जह्द----ह्यमथ----पुरुषार्थु, ब॒लु----पौरुष----पौरुष----पोरुष, पराक्रम----पौरुष, पुरुषत्व----पोरुष----पौरुषमु----आण्मै, वीरम्----पौरुषं----पौरुष----
1997पौष्टिकविशेषण----शक्तिवर्धक।----ताकतवर----मुक़व्वी----ताकथवर----ताक़तमंदु, ब॒लु डी॒दंड़ु----पौष्टिक----पौष्टिक----पौष्टिक----पौष्टिक----पौष्टिक, शक्तिबर्धक----पौष्टिकमयिन----पुष्टिकरमान----पुष्टिकरम्----पौष्टिक, शक्तिवर्धक----
1998प्याऊपुंलिंग----वह स्थान जहाँ राह चलते लोगों को नि:शुल्क पानी पिलाया जाता है।----छबील----पियाऊ----प्यावू, त्र॑शि----प्याऊ----पाणपोई----परब----जल छत्र----पथिकक पानी खुओवा ठाइ----जळ-छत्र----चलिवेंद्र----तण्णीर् पन्दल----तण्णीर॒----अरवट्टिगॆ----
1999प्यारपुंलिंग----स्नेह, प्रेम, अनुराग।----पिआर----पियार----लोल----प्यारु----स्नेह, प्रेम----प्यार, प्रेम, स्नेह----भालोबासा, प्रेम, अनुराग----मरम, स्नेह, चेनेह----स्नेह, प्रेम, अनुराग----प्रेम, आपेक्ष----अन्बु----स्नेहं, प्रेमं----प्रीति, स्नेह----
2000प्याराविशेषणविशेषण---जो देखने में अच्छा और भला लगे;स्नेह या प्रेम का पात्र।---पिआरा----पियारामहबूब---टोठटोठ---प्यारो----आवडताप्रेमास पात्र---सरस, भलुं, माजानुंप्यारु, बहालु---सुन्दर, मनोरमस्नेहभाजन---मरमर, चेनेहरमरमी---सुन्दर, मनोरमस्नेह-भाजन, प्रेम-पात्र---मुद्दुलोलुकुप्रियमयिन---अऴगुळ्ळ, मनंकर्वन्दअन्बार्न्द---प्रियप्पॆट्टस्नेहभाजनं---अंदवाद, सुदरप्रियवाद, प्रीतिपात्र---
2001प्यालापुंलिंग----एक प्रकार की कटोरी (कप)।----पिआला----पियाला----प्यालु॑----प्यालो, कोपु----पेला----प्यालो, प्यालुं----पियाला, काप----पियला, काप----पियाला, कप्, गिना, ताटिआ----कप्पु, पात्र----कोप्पै----कप्पु, कोप्प----बट्टलु, कप्----
2002प्यासस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---वह स्थिति जिसमें जल या कोई तरल पदार्थ पीने की उत्कट इच्छा होती है, तृष्णा, पिपासा ;प्रबल इच्छा या कामना।---तेह, मेह, पिआस----पियासतश्नगी---त्रेशत्रेश---प्यास, उञउत्कंठा---तहानपिपासा---प्यास, तरसतृषा, पिपासा---पिपासा, तृष्णा॒ तेष्टा (न)तृष्णा॒, प्रबल इच्छा (न)---पियाहहेपाह---शोष, तृष्णा, चिचासाइच्छा, कामना---दप्पिक, दाहमुदाहमु---दाहम्मिगुन्द विरुप्पम्, आर्वम्---दाहंबलमाय आग्रहं---बायारिकॆलालसॆ---
2003प्रकटविशेषण----ज़ाहिर, स्पष्ट, उद्भूत।----परगट----ज़ाहिर----नॊन----ज़ाहिर, प्रघटु----प्रकट, स्पष्ट----प्रकट, प्रत्यक्ष----प्रकट, स्पष्ट----स्पष्ट----प्रकट----प्रकटमुग----वॆळिप्पड़ैयान----प्रकटमाय----स्पष्ट----
2004प्रकांडविशेषण----उत्तम, सर्वश्रेष्ठ।----उत्तम----अफ़्ज़ल----स्यठा थॊद----प्रकांडु----उत्तम, सवश्रेष्ठ----प्रकांड, उत्तम सर्वश्रेष्ठ----प्रकाण्ड, उत्तम सर्वश्रेष्ठ----प्रकांड, श्रेष्ठ----प्रकांड----प्रकांडमयिन----शिर॒न्द----उत्तमं----सर्वश्रेष्ठ----
2005प्रकृतिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---सहज स्वाभाविक गुण, स्वभाव ;विश्व में रचना या सृष्टि करने वाली मूल नियामक तथा संचालन शक्ति, कुदरत (नेचर)।---प्रकिरती----फ़ित्रतक़ुद्रत---प्रकरथ, मिज़ाजकॅदरथ---सुभाउकुदिरत, प्रकृति---स्वभावप्रकृति, निसर्ग---प्रकृति, स्वभावकुदरत तबियत, धर्म---प्रकृति, स्वभाव, सहज गुण॒ (न)प्रकृति---सभाव, व्यवहारप्रकृति---प्रकृति----प्रकृति, स्वभावमुप्रकृति---सुबाव़म् इयल्बुइयरकै---प्रकृति, प्रकृतंप्रकृति---स्वभावप्रकृति---
2006प्रकोपपुंलिंगपुंलिंग---अत्यधिक क्रोध ;किसी बीमारी का ज़ोर।---परकोपफुहारा---क़ह्रक़ह्रनाकी---क॑हर----घणी कावड़िजोशु, ज़ोरु---प्रकोप, क्रोधआजाराची साथ---प्रकोप, गुस्सो, क्षोभघोर, प्रबलता---अत्यधिक कोपप्रकोप---अतिपात खंबेमारर प्रकोप---प्रकोपं----प्रकोपमुप्रकोपमु---शीट॒ट॒म्नोयिन् शीट॒ट॒म्---वल्लात्त कोपंप्रकोपनं---रुद्रकोपउल्बण---
2007प्रखरविशेषण----तीक्ष्ण, उग्र तेज।----तिक्खा----शदीद (तेज़)----तीज़----तेजु, तिखो----प्रखर, तीक्ष्ण----प्रखर, तीक्ष्ण, उग्र----प्रखर, उग्र----प्रखर----प्रखर----प्रखरमयिन----तीविरमान, ऒळिमयमान----तीक्ष्णमाय, मूर्च्चयुळ्ळ----तीक्ष्ण, उग्र----
2008प्रगतिशीलविशेषण----जो आगे बढ़ रहा हो या उन्नति कर रहा हो।----प्रगतिशील----तरक़्कीपज़ीर----ब्रोंह पकवुन, तरकी वोल----प्रगतिशीलु, तर्कीपसंदु----पुरोगामी, प्रगतिशील----प्रगतिशील----प्रगतिशील----प्रगतिशील----प्रगतिशीळ----अभ्युदयकरमयिन----मुन्नेरु॒गिर॒----पुरोगमनवादि----प्रगतिशील----
2009प्रचंडविशेषण----अति तीव्र भंयकर।----प्रचंड----तेज़----स्यठा तेज, बयानख----तमामु तेजु, भयानकु----प्रचंड----प्रचंड, भयंकर, कदावर----प्रचण्ड भयङ्कर----प्रचंड, भयंकर----प्रचंड----प्रचंडमयिन----मिगत्तीविरमान, बयंगरमान----तीव्रं, भयंकरं----प्रचंड----
2010प्रचलितविशेषण----जो उपयोग या व्यवहार में आ रहा हो।----प्रचल्लत----मुरव्वज (राइज)----चलवुन----हलंदडु, वहिवार में ईदडु----प्रचलित----प्रचलित, चालु----प्रचलित----प्रचलित----प्रचळित----प्रचलितमयिन----नड़ै मुरै॒यिल् उळ्ळ----नटप्पिलुळ्ळ, प्रचारत्तिलुळ्ळ----प्रचलित, व्यवहारदल्लिरुव----
2011प्रचारपुंलिंग----वह प्रयास जो किसी बात या सिद्धान्त को फैलाने के लिए किया जाता है (प्रोपगेंडा)।----प्रचार----तब्लीग़----प्रचार----प्रचारु----प्रचार----प्रचार, फेलावो----प्रचार----प्रचार----प्रचार----प्रचारमु----पिरचारम्, परप्पुदल्----प्रचारं----प्रचार----
2012प्रचुरविशेषण----बहुत अधिक, प्रभूत।----बहुत ही----वाफ़िर----स्यठा, वार्याह----घणो, घणे अंदाज में----प्रचुर, पुण्कळ----प्रचुर खूब, पुष्कळ----प्रचुर, प्रभूत, ढेर----प्रचुर----प्रचूर----प्रचुरमु, मिक्किलि----निरै॒य, दाराळमान----प्रचुरं----बहळ, हॆरळ----
2013प्रजननपुंलिंगपुंलिंग---संतान उत्पन्न करना ;पशुओं आदि को पाल पोस कर उनकी उन्नति और वृद्धि करना (ब्रीडिंग)।---प्रजनन----तनासुलनस्ल अफ़्जाई---ज़्य॑वरावुनज़्य॑वरावुन---ज॒मुजानिवरीन जे नसुल जो वाधारो---प्रजोत्पतिपशुपालन---प्रजनन, प्रजोत्पत्तिपशुपालन---प्रजननप्रजन, पशुपालन---संतान उत्पादनजनन---प्रजनन----प्रजननमु----पिरसवम्इन बळर्प्पु---सन्तानोत्पादनंवळर्त्तल्---हॆरुवुदुसंतान संवर्धनॆ---
2014प्रजास्त्रीलिंग----किसी राज्य या राष्ट्र की जनता।----परजा----अ़वाम (रिआ़या)----प्रज़ा, लुख, अवाम----प्रजा, रैयत----प्रजा, जनता----प्रजा, जनता, रैयत----प्रजा----प्रजा----प्रजा----प्रजलु----पिरजै, कुडिमक्कळ्----प्रज, जनत----प्रजॆ----
2015प्रजातंत्रपुंलिंग----प्रजा की प्रजा के प्रतिनिधियों द्वारा प्रजा के लिए शासन व्यवस्था (डिमाक्रेसी)।----लोकतंतर, परजातंतर----जम्हूरियत----जॊमहूरियथ----प्रजातंत्रु----लोकसत्ता----प्रजातंत्र----प्रजातंत्र, गण॒तंत्र (न)----प्रजातंत्र, गणतंत्र----प्रजातंत्र----प्रजातंत्रमु----कुडि अरसु मुरै॒----जनायत्त भरणं जनाधिपत्यं----प्रजाप्रभुत्व----
2016प्रणपुंलिंग----दृढ़ निश्चय, प्रतिज्ञा।----प्रण----अ़ह्द----प्रन----प्रणु, अंजामु----प्रण, प्रतिज्ञा----प्रण, पण, टेक----पण्, प्रतिज्ञा, संकल्प----प्रतिज्ञा----प्रतिज्ञा, प्रण----प्रतिज्ञ----प्रतिज्ञै, शबदम----प्रतिज्ञ----प्रतिज्ञॆ----
2017प्रणयपुंलिंग----प्रेम, प्रीति।----पिआर, प्रीत----मुहब्बत----प्रॆयम----प्रेमु----प्रणय, प्रेम----प्रणय----प्रणय, प्रेम, भालोबासा----प्रेम----प्रणय----प्रणयमु----कादल्----प्रणयं, प्रेमं----प्रणय----
2018प्रणामपुंलिंग----नमस्कार, अभिवादन।----प्रणाम----सलाम----नमस्कार, सलाम----प्रणामु----प्रणाम, नमस्कार----प्रणाम, नमस्कार----प्रणा॒म, अभिवादन (न)----प्रणाम----प्रणाम----नमस्कारमु, प्रणाममु----नमस्कारम्, वणक्कम्----नमस्कारं, प्रणामं----नमस्कार----
2019प्रणालीस्त्रीलिंग----पद्धति, रीति, ढंग।----प्रणाली----निज़ाम----रीथ----ढंगु, तरीको----प्रणाली, रीत----प्रणाली, परंपरा----प्रणा॒ली, पद्धति, रीति (न)----प्रणाली, पद्धति----प्रणाळी----पद्धति----वऴि मुरै॒----प्रणाली, रीति----रीति----
2020प्रतापपुंलिंगपुंलिंग---तेज, प्रभाव ;पौरुष, वीरता।---परताप----जलालशजाअ़त---तीज़, जलालह्यमथ---प्रतापु----प्रताप, तेजपौरुष---प्रताप, तेज, कांतिसामर्थ्य---प्रताप, तेज, प्रभावप्रताप, पराक्रम, पौरुष---शक्ति, प्रतापपुरुषत्व, बीरत्व---प्रताप----प्रतापमुप्रतापमु---पेरुमै, पुगऴ्आण्मै, वीरम्---प्रतापंपौरुषं---प्रताप, तेजस्सुशौर्य---
2021प्रतिकारपुंलिंगपुंलिंग---बदला चुकाने के लिए किया गया कार्य बदला, प्रतिशोध (रिवेंज);किसी बात को रोकने दबाने के लिए किया जाने वाला उपाय, रोकथाम।---बदलारोकथाम---सिला (बदला)पेशबंदी---बदलु॑ह्यॊनबचाब---बदिलोरोकण जो उपाउ---सूडप्रतिकार---प्रतिकार, विरोधउपाय---प्रतिशोधप्रतिकार---प्रतिशोधप्रतिरोध---प्रतिकारप्रतिकार---प्रतीकारमुप्रतीकारमु---पऴि वांगुदल्तडुत्तु वैत्तल् परिहारम् सॆय्दल्---प्रतिकारंप्रतिविध---प्रतीकार, सेडुनिवारणॆ, उपाय---
2022प्रतिकूलविशेषण----जो अनुकूल न हो, विपरीत।----उलट, विपरीत----नामुआफ़िक़ (बरअ़क्स)----वुलटु॑----उबतड़ि, खिलाफु----प्रतिकूल, विपरीत----प्रतिकूल----प्रतिकूल, विपरीत----प्रतिकूल----प्रतिकूळ----प्रतिकूलमु----ए॑दिरान्, विरोदमान्----प्रतिकूलं----प्रतिकूल----
2023प्रतिक्रियास्त्रीलिंग----किसी कार्य या घटना के परिणाम स्वरूप होने वाला कार्य।----प्रतिकिरिआ----रद्दे अ़मल----तर, असर----रदे अमलु, नतीजो----प्रतिक्रिया----प्रतिक्रिया, उपाय----प्रतिक्रिया----प्रतिक्रिया----प्रतिक्रिया----प्रतिक्रिय----मारु॒पट्ट, पिरदिपलन्----प्रतिकरणं----प्रतिक्रियॆ----
2024प्रतिज्ञास्त्रीलिंग----शपथ, सौगंध, प्रण।----परतिगिआ----हलफ़ (अ़ह्द)----कसम----प्रतिज्ञा, अंजामु----प्रतिज्ञा, शपथ----प्रतिज्ञा, पण, शपथ----प्रतिज्ञा, पण॒ (ग्गाँ) (न)----प्रतिज्ञा, पण----प्रतिज्ञा----प्रतिज्ञ----पिरतिज्ञै, उरु॒दिमोळि----प्रतिज्ञ, शपथं----शपथ प्रतिज्ञॆ----
2025प्रतिद्वंद्वीपुंलिंगपुंलिंग---वह व्यक्ति या वस्तु जो किसी दूसरे व्यक्ति या वस्तु के मुकाबले की हो या जिससे उसका मुकाबला हो (राइवल)।एक व्यक्ति की दृष्टि में वह दूसरा व्यक्ति जो एक ही वस्तु या पद को पाने के लिए उसी की तरह उम्मीदवार हो, प्रतियोगी (कॅनटेस्टन्ट)।---मुकाबले दी घिर----हरीफ़हरीफ़ (मुक़ाबिल्)---मुकाबलुकमदिमुकाबिल---विरोधी, मुख़ालिफ़ती----प्रतिद्वंद्वी, प्रतिपक्षीप्रतियोगी---प्रतिद्वन्द्वी, शत्रुबरोब़रियुं हरीफ---प्रतिद्वन्द्वीप्रतियो॒गी (ज)---प्रतिद्वंद्वी, बिपक्षप्रतियोगी---प्रतिद्वंद्वीप्रतिजोगी---प्रतिद्वन्द्वी, पोटीदारुप्रतिद्वन्द्वी पोटीदारु---ऎदिराळि पोट्टि पोडुबवन्पोट्टि पोडुबवन्---ऎतिराळिप्रतियोगि---ऎदुराळिऎदुराळि, प्रतिस्पर्धि---
2026प्रतिध्वनिस्त्रीलिंग----गूँज, प्रतिशब्द।----गूंज----सदाए बाज़गश्त----गुंबद----पड़ाडो॒----प्रतिध्वनि----प्रतिध्वनि, पडछो----प्रतिध्व॒नि (ध)---प्रतिध्वनि----प्रतिध्वनि----प्रतिध्वनि----ऎदिरोलि----प्रतिध्वनि----प्रतिध्वनि----
2027प्रतिनिधिपुंलिंग----वह व्यक्ति जो दूसरों की ओर से कहीं भेजा जाए अथवा उनकी ओर से कार्य करे (रेप्रिजेंटेटिव)।----प्रतीनिधी----नुमाइंदा----नुमायन्दु॑----एविज़ी----प्रतिनिधि----प्रतिनिधि, एलची----प्रतिनिधि----प्रतिनिधि----प्रतिनिधि----प्रतिनिधि----पिरतिनिदि----प्रतिनिधि----प्रतिनिधि----
2028प्रतिपादनपुंलिंग----किसी विषय का सप्रमाण कथन, निरूपण, विषय का स्थापन।----(विशेदी) सथापणा----इस्बात----सा॑बिथ करुन----समुझाणी, व्याख्या----प्रतिपादन----प्रतिपादन----प्रतिपादन, निरूपण----प्रतिपादन----प्रतिपादन----प्रतिपादिंचुट प्रतिपादनमु----विषयत्तै विळळुक्कुदल् विषयत्तै निरूबित्तळ्----प्रतिपादनं----निरूपणॆ----
2029प्रतिबंधपुंलिंगपुंलिंग---बंधन या रोक, मनाही ;किसी काम या बत में लगाई कई शर्ते।---पाबंदीपाबंदी---पाबंदी----ठाख, रुकावठपाबं॑दी---बं॒धनु, रोकबंदिश---प्रतिबंध, मनाईअट---प्रतिबंध, मनाई, रुकावटशरत---प्रतिबन्ध, निषेधप्रतिबन्ध---बाधाप्रतिबंधक---विघ्न, बंधत्रप्रतिबन्ध---प्रतिबंधनमुशरतु---तडैषरत्तु---प्रतिबन्धंव्यवस्थ---तडॆषरत्तु---
2030प्रतिबिंबपुंलिंग----परछाई, प्रतिच्छाया।----प्रतिबिंब----अ़क्स----छ़ाय, अकु॑स----पाछो, अक्सु----प्रतिबिंब----प्रतिबिंब, पडछायो----प्रतिबिम्ब----प्रतिबिंब----प्रतिबिंब----प्रतिबिंबमु----निऴलुरुवम्----प्रतिबिंबं, निऴल्----प्रतिबिंब----
2031प्रतिभास्त्रीलिंग----असाधारण बुद्धिबल, विलक्षण बौद्धिक शक्ति।----बुधी----ज़हानत----ज़ॆहनथ----ग़ैर रवाजी बुधी----प्रतिभा----प्रतिभा, कांति, तेज----प्रतिभा, विलक्षण बौद्धिक शक्ति----प्रतिभा----प्रतिभा----प्रतिभ----मदि नुट्पम्----प्रतिभ----प्रतिभॆ----
2032प्रतिमास्त्रीलिंग----मूर्ति, अनुकृति।----मूरती----मूर्ती----मूरथ----मूर्ती, बोतो----प्रतिमा, मूर्ती----प्रतिमा, मूर्ति----प्रतिमा, मूर्ति----प्रतिमा, मूर्ति----प्रतिमा----विग्रहमु----मूर्त्ति, सिलै, विग्रहम्----प्रतिम----प्रतिमॆ----
2033प्रतियोगितास्त्रीलिंग----होड़, मुकाबला।----मुकाबला----मुक़ाबला----मुकाबलु॑----चटाभेटी, मुकाबिलो----चढाओढ, स्पर्धा----प्रतियेगिता, मुकाबलो, हरीफाई----प्रतियो॒गिता (ज)----प्रतियोगिता----प्रतिजोगिता----पोटी----पोट्टि----मत्सरं----स्पर्धे----
2034प्रतिलिपिस्त्रीलिंग----किसी लिखी हुई चीज की नकल (कापी)।----नकल----नक़्ल----नकु॑ल----नकुलु, कापी----प्रतिलिपि, नक्कल----प्रतिलिपि----प्रतिलिपि, नकल----प्रतिलिपि, नकल----प्रतिलिपि----प्रतिलिपि----नगल् मरु॒पिरदि----पकर्प्पु----नकलु----
2035प्रतिशतक्रिया विशेषण----हर सौ पर, फीसदी।----फीसदी, प्रतिशत----फ़ीसदी (फ़ीसद)----फीसदी----सेकिड़ो, फी सदी----दरशेकडा----टको----शतकरा----शतकरा----शतकरा/शतकड़ा----शातमु----शत-विहिदम्----शतमानं----शेकडा, प्रतिनूरक्कॆ----
2036प्रतिशोधपुंलिंग----बदला प्रतिकार।----बदला----बदला----बदलु॑----बदिलो, वेरु----सूड, बदला----प्रतिशोध, बदलो लेवो----प्रतिशोध----प्रतिशोध----प्रतिशोध----प्रतीकारमु, बदुलुतीर्चुकोनुट----पऴिक्कुप्पऴि----प्रतिकारं, पकवीट्टल्----सेडु----
2037प्रतिष्ठास्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--मान, मर्यादा, इज्ज़त ;ख्याति, प्रसिद्धि ;स्थापन।--इज्जत----इज़्ज़तशुह्रतक़ियाम--यज़थ, शॊहरथ----मानु, मर्यादानामूस, मशहूरीस्थापना--प्रतिष्ठाख्याति, प्रसिद्धीस्थापना--प्रतिष्ठा, आबरुप्रसिद्धि, ख्यातिप्रतिष्ठा--प्रतिष्ठा, मर्या॒दा (ज)प्रतिष्ठा, ख्यातिप्रतिष्ठा, संस्थापन--मान सन्मानख्यातिस्थापना--प्रतिष्ठा----प्रतिष्ठपरुवुप्रतिष्ठ--गौरवम्पुगऴ्निरु॒वुदल्--मान्यतप्रसिद्धिस्थापिक्कल्, प्रतिष्ठ--प्रतिष्ठॆ, गौरवप्रसिद्धिस्थापनॆ--
2038प्रतिस्पर्धास्त्रीलिंग----होड़, प्रतियोगिता।----मुकाबला----मुक़ाबला----मान मान----चटाभेटी मुकाबिलो----प्रतिस्पर्धा----प्रतिस्पर्धा----प्रतिस्पर्धा, प्रतियो॒गिता (ज)----प्रतियोगिता----प्रतिस्पर्धा----पोटी----पोट्टि----मत्संरं----स्पर्धे----
2039प्रतीकविशेषण----वह गोचर या दृश्य वस्तु जो किसी अगोचर या अदृश्य वस्तु के बहुत कुछ अनुरूप होने के कारण उसके गुण रूप का परिचय कराने के लिए उसका प्रतिनिधित्व करती हो (सिंबल)।----प्रतीक----अ़लामत----तश्बीह----प्रतीकु, अलामत, आसारु----प्रतीक----प्रतीक, चिह्न----प्रतीक----प्रतीक----प्रतीक----प्रतीकमु----अडैयाळम्, संकेतक्कुरि॒----प्रतीकं, चिह्नं----प्रतीक, चिह्नॆ----
2040प्रतीक्षास्त्रीलिंग----इन्तज़ार।----उडीक----इंतिज़ार----इन्तिज़ार----इन्तज़ारु----प्रतीक्षा----प्रतीक्षा----प्रतीक्षा, ऊपेक्षा॒ (क्ख)----प्रतीक्षा----प्रतीख्या----प्रतीक्ष, निरीक्षण----ऎदिर् पार्त्तल्, कात्तुक्कोण्डु इरुत्तल्----प्रतीक्ष, कात्तिरुप्पु----निरीक्षॆ----
2041प्रतीक्षालयपुंलिंग----वह स्थान जहाँ बैठकर किसी का इन्तजार किया जाता है।----वेटिंगरूम----वेटिंगरूम----इन्तिज़ारुच जाय----तर्सण जी जाइ, वेटिंग रुमु----प्रतीक्षालय----प्रतीक्षालय----प्रतीक्षा॒लय (क्ख)----प्रतीक्षालय----प्रतीक्षाळय----निरीक्षणालयमु----कात्तिरुक्कुम् इडम्----प्रतीक्षालयं----निरीक्षालय----
2042प्रत्यक्षविशेषण----जो आंखो के सामने स्पष्ट दिखाई दे रहा हो।----प्रतक्ख----वाज़ेह, हाज़िर----द्रेंठमान----ज़ाहिरु, प्रतखु----प्रत्यक्ष----प्रत्यक्ष, स्पष्ट----प्रत्यक्ष----प्रत्यक्ष----प्रत्यख्य----प्रत्यक्षयुग----नेरुक्कुनेराग, नन्णु पुलप्पडुगिर॒----प्रत्यक्षं----प्रत्यक्ष----
2043प्रत्ययपुंलिंगपुंलिंग---व्याकरण में वह अक्षर या अक्षरों का समूह जो धातुओं अथवा विकारी शब्दों के अंत में लगकर उनके अर्थो में विशेषता उत्पन्न कर देते हैं (साफिक्स);विश्वास, धारणा।---पिछेत्तरविशवास---लाहिक़ायक़ीन---पॊतलॊग, प्रत्ययपछ़---प्रत्ययु, लफ़्ज जे पुठियां लगंदड़ पछाड़ीविश्वासु---प्रत्ययविश्वास---प्रत्ययविश्वास---प्रत्ययप्रत्यय, विश्वा॒स (श्श)---पर, प्रत्ययबिश्वास---प्रत्यय----प्रत्ययमुविश्वासमु---विगुदिनंबिक्कै---प्रत्ययंविश्वासं, प्रत्ययं---प्रत्ययनंबिकॆ, निर्धार, संकल्प---
2044प्रत्याशीपुंलिंग----उम्मीदवार।----उमीदवार----उम्मीदवार----वॅमेदवार----उम्मीदवारु----उम्मेदवार----उमेदवार----प्रत्याशी----प्रार्थी----प्रार्थी----अभ्यर्थि----अपेक्षकर्----स्थानार्थि----उमेदुवार----
2045प्रत्येकविशेषण----हरएक।----हरेक----हरएक (हर)----प्रथकाँह----हरहिकु, हरिको----प्रत्येक----प्रत्येक, दरेक----प्रत्येक----प्रत्येक----प्रत्येक----प्रति ओक्क----ओव्वोरु----ओरो----प्रतियॊन्दु----
2046प्रथमविशेषण----जो पहले स्थान पर हो।----प्रथम, अव्वल----अव्वल----गॅडन्युक----पहिर्यों----प्रथम----प्रथम, पहेलुं----प्रथम----प्रथम----प्रथम----प्रथममु----मुदलावदु----प्रथमं ऒन्नां, आद्यत्तॆ----प्रथम----
2047प्रथास्त्रीलिंग----रीति, परिपाटी।----प्रथा, रीत----रिवाज (रस्म)----रॆवाज----प्रथा, रवाजु----प्रथा, रीत----प्रथा, रीत, परिपाटी----प्रथा, रीति----प्रथा, नियम----प्रथा----परिपाटि----मरबु, वळक्कम्----पतिवु, कीऴ्वऴक्कं----रूढि, परिपाटि----
2048प्रदक्षिणास्त्रीलिंग----किसी पवित्र स्थान या देव मूर्ति के चारों ओर इस प्रकार घूमना कि वह पवित्र स्थान या मूर्ति बराबर दाहिनी ओर रहे, परिक्रमा।----परदक्खणा----तवाफ़----प्रदिख्यन----परिक्रमा----प्रदक्षिणा----प्रदक्षिणा----प्रदक्षि॒णा॒, परिक्रमा (क्ख) (न)----प्रदक्षिण----प्रदक्खिणा----प्रदक्षिण----पिरदक्षिणम्, कोविलै वलम् वरुदल----प्रदक्षिणं----प्रदक्षिणॆ----
2049प्रदर्शिनिस्त्रीलिंग----वह स्थान जहाँ तरह-तरह की वस्तुएं दिखाने के लिए रखी हों।----नुमाइश----नुमाइश----नुमा॑यिश----नुमाउ, नुमाइश----प्रदर्शन----प्रदर्शनि----प्रदर्शनी----प्रदर्शनी----प्रदर्शनी----प्रदर्शन----पॊरुट् काट्चि----प्रदर्शनं----प्रदर्शन----
2050प्रदेशपुंलिंगपुंलिंग---भू-भाग का कोई खंड विशेष;किसी संघ या राज्य की कोई इकाई।---प्रदेश----इ़लाक़ासूबा---सूबु॑सूबु॑---प्रदेसुप्रांतु---प्रदेश----प्रदेश, मुलकप्रांत---प्रदेश, भू भागप्रदेश---अंचलराज्य---प्रदेश----प्रदेशमुप्रांतमु---पिरदेशम् नाट्टिन् ऒरु पगुदिमानिलम्---प्रदेशंराज्यं---प्रदेश, नाडुराज्य---
2051प्रधानविशेषण----सबसे बड़ा मुख्य, मुखिया।----प्रधान----आ़ज़म----ज़्युठ----प्रधानु, मुख्यु----प्रधान, मुख्य----प्रधान, मुख्य----प्रधान----प्रधान, मुख्य----प्रधान----प्रधानमयिन, प्रधानुडु----मुक्किय, मुदल्----प्रधानप्पॆट्ट, प्रधानि----मुखंड----
2052प्रबंधपुंलिंगपुंलिंग---व्यवस्था ;निबन्ध, रचना।---प्रबंध----इंतिज़ाममक़ाला, नज़्म---इन्तिज़ाम----प्रबंधु, बंदोबस्तु,बडो॒ मज़्मूनु, मकालो---व्यवस्थानिबंध, प्रबंध---प्रबंध, बंदोबस्तनिबंध---प्रबन्ध, व्यवस्थाप्रबन्ध, रचना---ब्यवस्थाप्रबंध---ब्यबस्थारचना, प्रबन्ध---एर्पाटुव्यासमु---एर्पाडुकट्टुरै---एर्प्पाटॅप्रबन्धं---व्यवस्थॆप्रबंध---
2053प्रबलविशेषणविशेषण---जिसमें बहुत अधिक बल हो ;तेज, प्रचंड, घोर।---प्रबल----ज़ोरशदीद---ताकथवरतेज़---ब॒लवानुतेज---प्रबल, बलवानतिखो, जोरदार---प्रबल, बलबानप्रबल, प्रचंड---प्रबल, बलशालीप्रबल, प्रचण्ड---बलीप्रचंड, प्रबल---प्रबळ----प्रबलमयिनप्रचंडमयिन---वलुवानऒळिमयमान---प्रबलमायशक्तियेरि॒य---प्रबलप्रचंड---
2054प्रभास्त्रीलिंग----प्रकाश, दीप्ति;----प्रकाश----नूर (रोशनी)----दिवथ, चमख----प्रकाशु----प्रभा----प्रभा, तेज, आभा----प्रभा, दीप्ति----प्रभा, पोहर----प्रभा----प्रभ, वेलुगु----ऒळि ऎळिळ्----प्रभ, शोभ----प्रकाश, कांति----
2055प्रभातपुंलिंग----सूर्य निकलने से कुछ पहले का समय, प्रात: काल।----सवेरसार, प्रभात----सुबह----प्रबाथ, प॑त्युम पहर----प्रभाति----प्रभात, सकाळ----प्रभात, सवार----प्रभात, सकाल----युवा, प्रात:----प्रभात----प्रभातमु----अदिकालै----प्रभातं----वॆळगिन जाव----
2056प्रभावपुंलिंगपुंलिंग---किसी के बुद्धिबल, उच्चपद आदि के फलस्वरूप दूसरों पर पड़ने वाला दबाब (इन्फ्लूएन्स);फल, परिणाम, असर।---प्रभाव----असर, तासीर----असर----प्रभा, असरु----प्रभावपरिणाम---प्रभाव, शक्ति, प्रतापअसर---प्रभावफल, परिणाम---प्रभावपरिणाम---प्रभाब----प्रभावमुप्रभावमु---सॆल्वाक्कुनल्विळैवु---प्रभावं स्वाधीनंफलं परिणामं---प्रभावपरिणाम---
2057प्रभुपुंलिंगपुंलिंग---ईश्वर ;स्वामी, शासक---प्रभू----मौला----दयमा॑लिख---प्रभू, ईश्वुरसाईं, मालिकु---प्रभु, ईश्वरस्वामी, शासक---प्रभु, परमात्मास्वामी, मालिक---प्रभु, ईश्वरप्रभु, शासक---ईश्वरस्वामी, गराकी---प्रभु----प्रभुवुप्रभुवु---कडवुळ्ऎजमान्---भगवान्प्रभु---देवरुस्वामि, यजमान्---
2058प्रमाणपुंलिंगपुंलिंग---सबूत ;जिसका वचन या निर्णय यर्थाथ या सत्य माना जाए।---प्रमाण----सुबूतसनद---सॊबूथ, प्रमानप्रमान---प्रमाणु, सबूतु----पुरावाप्रमाण---प्रमाण, पुरावो, साबिती----प्रमाण॒ (न)प्रमाण॒ (न)---प्रमाणसिद्ध वचन---प्रमाण----प्रमाणमुनिदर्शनमु---साट्चिसाट्चि, प्रमाणम्---तॆळिवुप्रमाणं, प्रमाणि---साक्षिप्रमाण, आणॆ---
2059प्रमुखविशेषणविशेषण---प्रथम, मुख्य ;श्रेष्ठ, सम्मान्य, प्रतिष्ठित।---प्रमुख----आ़लामुअज़्ज़ज़---ज़्युठथॊद---प्रमुखु, मुख्यु----प्रथम, मुख्यप्रमुख, श्रेष्ठ---प्रमुख, मुख्यप्रतिष्ठित---प्रमुख॒, मुख्य (क्ख)श्रेष्ठ, प्रतिष्ठित---प्रथम, मुख्यश्रेष्ठ---प्रमुख----प्रमुखमयिन्, मुख्यमुप्रमुखमयिन, मुख्यमु---तलेमैयानशिरू॒---मुख्यं, प्रमुखंश्रेष्ठं---प्रमुखश्रेष्ठ, प्रतिष्ठित्---
2060प्रयत्नपुंलिंग----कोशिश, प्रयास।----जतन, यतन----कोशिश----कूशिश----यतनु, कोशिश----प्रयत्न----प्रयत्न, कोशिश----प्रयत्न, चेष्टा, प्रया॒स (ज)----यत्न, चेष्टा----प्रजत्न, चेष्टा----प्रयत्न्मु----मुयर्चि----प्रयत्नं----प्रयत्न----
2061प्रयासपुंलिंग----प्रयत्न, कोशिश।----जतन, यतन----कोशिश----कूशिश----कोशिश, यतनु----प्रयास----प्रयास, श्रम, महेनत----प्रया॒स, प्रयत्न, चेष्टा (ज)----यत्न, चेष्टा----प्रयास----प्रयत्नमु----मुयर्चि----यत्नं----प्रयत्न----
2062प्रयोगपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--इस्तेमाल ;अस्त्र-शस्त्र चलाना या छोड़ना ;आजकल विज्ञान के क्षेत्र में किसी प्रकार का अनुसंधान करने के लिए की जाने वाली कोई परीक्षणात्मक क्रिया (ऐक्सपेरिमेन्ट)।--वरतोंप्रयोग---इस्तेमालचलानातज़ुबा--इस्तिमाल-तजरुबु॑--इस्तेमालु-प्रयोगु, तजुर्बो--वापरशस्त्र चालविणेंप्रयोग--प्रयोग, वापरप्रयोगप्रयोग--प्रयोग, व्यवहारप्रयोग, चालानप्रयोग, परीक्ष॒ण (क्ख)--ब्यवहारअस्त्र-शस्त्रर ब्यवहारपरीक्षा, प्रयोग--प्रयोग----उपयोगमुप्रयोगिंचुटप्रयोगमु--उबयोगम्ऎयदल (आयुदंगळै)परिशोदनै--प्रयोगं, उपयोगंप्रयोगंपरीक्षणं--बळकॆप्रयोगप्रयोग--
2063प्रयोगशालास्त्रीलिंग----वह स्थान जहाँ विभिन्न तकनीकी विषयों से संबंधित प्रयोग किए जाते हैं (लेबोरेटरी)।----प्रयोगशाला----तज़ुबागाह----ल्यबाट्री, तजरूबु॑गाह----प्रयोगशाला----प्रयोगशाळा----प्रयोगशाला----प्रयोगशाला----गवेषणागार----प्रयोगशाळा----परिशोधनशाला----परिशोदनैक्कूडम्----परीक्षणशाल----प्रयोगशालॆ----
2064प्रयोजनपुंलिंगपुंलिंग---उद्देश्य, हेतु ;अभिप्राय, मतलब।---प्रयोजन----मंशा, मक़्सद----मकसदमतलब---मक्सदु----प्रयोजन, उद्देश्यअभिप्राय---प्रयोजन, हेतु, सबवअभिप्राय, मतलब---प्रयोजन, उद्देश्यप्रयोजन, अभिप्राय---उद्देश्य, कारणअभिप्राय---प्रयोजन----प्रयोजनमुअभिप्रायमु---नोक्कम्ऎण्णम्---उद्देशंआशयं---उद्देशअभिप्राय---
2065प्रलयपुंलिंगपुंलिंग---संसार का अपने मूल कारण प्रकृति में सर्वथा लीन हो जाना, सृष्टि का सर्वनाश ;भयंकर नाश या बरबादी।---परलो----क़ियामत----कयामथकह॑र---प्रलय----प्रलयविनाश---प्रलयविनाश---प्रलयभयङ्कर नाश---प्रलयघ्वंस---प्रळय----प्रलयमुसर्वनाशनमु---पिरळयम् अळि वॆळ्ळम्अऴिवु---प्रऴयंवन् कॆटुति महानाशं---प्रंळयसर्वनाश---
2066प्रलेखपुंलिंग----दस्तावेज, अनुबंध पत्र।----दसतावेज़----दस्तावेज़----दस्तावेज़----दस्तावेज़ु----दस्तावेज----दस्तावेज----दलिल दस्तावेज----खत, दलिल----दस्ताबिज----दस्तावेजु----दस्तावेजु, इणैप्पुक्कागिदम्----रिकार्डु----कागद पत्र----
2067प्रलोभनपुंलिंग----लालच।----लालच----लालच----लालच----लोभु, लालचि----लालच----प्रलोभन, भारे, लालच----प्रलोभन----प्रलोभन, लोभ----प्रलोभन----प्रलोभनमु----आसैयै तूण्डुलद्----प्रलोभनं----दुरासॆ----
2068प्रवचनपुंलिंगपुंलिंग---धार्मिक नैतिक आदि गंभीर विषयों में परोपकार की दृष्टि से कही जाने वाली अच्छी तथा विचारपूर्ण बातें ;उपदेशपूर्ण भाषण (सर्मन)।---प्रवचन----वाज़----वॅपदीशवाज़---प्रवचनु, धर्मी व्याख्यानुउपदेशु---प्रवचनउपदेश---प्रवचन, व्याख्यानप्रबोधन---प्रवचनप्रवचन---नीति-उपदेशउपदेशपूर्ण, भाषण---धर्म संबंधी बक्तृताप्रबचन---प्रवचनमुप्रवचनमु---वियाककियानम्, विळक्क उरै॒उपदेश मोऴि---प्रभाषणंप्रभाषणं---उपन्यासउपदेश---
2069प्रवासपुंलिंग----परदेस में रहना, विदेशवास।----प्रवास----मुहाजरत----परदेसु॑ रोजुन----परदेश वासु----प्रवास----प्रवास, परदेशवास----प्रवास----प्रबास----प्रबास----प्रवासमु----अयल् नाट्टुवासम्----परदेशवासं----परदेशबास----
2070प्रवासीविशेषण----परदेश में रहने वाला, जो प्रवास में हो।----प्रवासी----मुहाजिर----परद॑स॑स॑ मंज रोज़न वोल----परदेसवासी----प्रवासी----प्रवासी, मुसाफर----प्रवासी----प्रबासी----प्रबासी----प्रवासि----अयळ् नाट्टिल् वसिप्पवर्----मरु॒नाटन्----प्रवासि, परदेश दल्लि इरुवव----
2071प्रवाहपुंलिंगपुंलिंग---बहने की क्रिया या भाव, बहाव ;किसी वस्तु का अटूट क्रम।---प्रवाह----रवानी----बहाव, वसुनसिलसलु॑---बहुकिरो/वहिकिरोअटूटु सिलसिलो---प्रवाह----प्रवाहअटूट क्रम---प्रवाह, धाराअविराम, गति, प्रवाह---धारा, प्रवाहलानि निछिङा धार---प्रबाह----प्रवाहमुप्रवाहमु---पिरवाहम् पॆरुक्कॆडुतु ओडुदलतॊडर् वरिशै---ऒळुक्कु, प्रवाहंगति---हरियुविकॆ, प्रवाहनिरंतर क्रम---
2072प्रविष्टिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---प्रवेश ;इन्दराज, बही खाते आदि में लेखे विवरण आदि लिखना।---प्रवेशइन्दराज---दाख़िलाइन्दिराज---दा॑खलु॑यन्दराज---दाखिला----प्रवेशनोंदणी---प्रवेशप्रविष्टि---प्रवेशलिपिवद्धकरण॒ (न)---प्रबेशभर्तिकरण---प्रबिष्टि----प्रवेशमुप्रविष्टि---नुऴैवुपदिवु---प्रवेशनंचार्त्तल्, पतिक्कल्---प्रवेशदाखलु, नमूदु---
2073प्रवीणविशेषण----निपुण, कुशल।----परवीण----कामिल (माहिर)----मा॑हिर----प्रवीणु, माहिरु----प्रवीण, निपुण----प्रवीण, होशियार, निपुण----प्रवीण॒ दक्ष॒ (न) (क्ख)----निपुण----प्रबीण----प्रवीणुडु----निबुणर----प्रवीणन्, समर्थन्----कुशल----
2074प्रवृत्तिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---मन का किसी विषय की ओर झुकाव (ट्रैन्ड) ;मनुष्य का साधारण आचरण या व्यवहार।---प्रविरती----रुज्हान (मैलान)रवैया---लॅय-खॅयलॅय-खॅय---सभाउ, झुकाउ लाड़ोमन जी वृती---प्रवृत्ति, वृत्तिव्यवहार, आचरण---प्रवृत्ति, मननों झोकहिल चाल---प्रवृत्ति, झोंकआचार, व्यवहार---मनर भाव, आटकालस्वभाव---प्रबृत्ति----प्रवृत्तिप्रवृत्ति---मनप्पोक्कुइयल्बान नडत्तै ईडुपाडु---प्रवणतपॆरुमाट॒टं॒---प्रवृत्ति, ऒलवुव्यवहार---
2075प्रवेशपुंलिंगपुंलिंग---अन्दर जाने की क्रिया या भाव ;किसी विशिष्ट संस्था आदि में भरती होना, दाखिला।---प्रवेशदाखला---दुख़ूलदाख़िला---दा॑खलु॑दा॑खलु॑---दाखिला----प्रवेशप्रवेश---प्रवेशप्रवेश, सामेल---प्रवेशप्रवेश, भर्त्ति---प्रबेशनाम भर्तिकरण---प्रबेश----प्रवेशमुप्रवेशमु---नुऴैवुशेर्न्दु, कॊळ्ळल्---प्रवेशिक्कल् प्रवेशनंप्रवेशनं---प्रवेशसेरुविकॆ, दाखलु---
2076प्रशंसास्त्रीलिंग----गुणों का बखान, तारीफ।----प्रसंसा----तारीफ़----ता॑रीफ----साराह, तारीफ----प्रशंसा----प्रशंसा, वखाण----प्रशंसा----प्रशंसा----प्रशंसा----प्रशंश----पुगऴ्च्चि----प्रशंस----हॊगळुविकॆ----
2077प्रशासनपुंलिंग----सार्वजनिक व्यवस्था की दृष्टि से किया जाने वाला कार्य, शासन, (एडमिनिस्ट्रेशन)।----प्रशासन----इंतिज़ाम----हॅकूमथ, इंन्तिजामियि----हुकूमत, कारोबारु----शासन----प्रशासन----प्रशासन, शासन----प्रशासन----प्रशासन----परिपालन----आट्चि----भरणं----आडळित----
2078प्रशिक्षणपुंलिंग----किसी व्यावहारिक या प्रायोगिक शिक्षा पद्धति से दी जाने वाली विशेष शिक्षा, सिखलाई ; (ट्रेनिंग)।----सिखलाई, प्रसिक्खिया----तरबियत----ट्रेनिंग----ट्रेनिंग, सिख्या, तिर्बियत----प्रशिक्षण----तालीम----प्रशिक्ष॒ण (क्ख)----प्रशिक्षण----प्रशिख्यण----शिक्षण, तर्फीदु----पयिर॒चि----शिक्षणं ट्रेनिङं----तरबेति----
2079प्रसंगपुंलिंग----विषय या तारतम्य, प्रकरण, संबंध।----प्रसंग----हवाला----प्रसंग----प्रसंगु----प्रसंग, प्रकरण----प्रसंग, प्रकरण, घटना----प्रसंग, प्रकरण॒ (न)----प्रसंग----प्रसंग----संदर्भमु----सन्दर्बम्----प्रकरण, संदर्भं----प्रसंग, संगति----
2080प्रसन्नविशेषण----खुश, संतुष्ट, प्रफुल्लित।----प्रसन्न----ख़ुश----ख्वश----प्रसन्नु, खुशि----प्रसन्न----प्रसन्न, खुश----प्रसन्न प्रफुल्लित----प्रफुल्लित प्रसन्न----प्रसन्न----प्रसन्नमु----मगिऴ्च्चियुटट----प्रसन्नतयुळ्ळ----प्रसन्न----
2081प्रसारणपुंलिंगपुंलिंग---आकाशवाणी आदि द्वारा अपने कार्यक्रमों को दूर-दूर के लोगों को सुनाने के लिए फैलाना, (ब्राडकास्टिंग);फैलाना---प्रसारणप्रसारण---नश----नशरियाथफहलावुन---प्रसारुफैलाउ---ध्वनिक्षेपणपसरविणें---प्रसारणफेलावो---प्रसारण॒ (न),प्रसारण॒ (न), छड़ानों---प्रसारण, प्रचारप्रचार---प्रसारण----प्रसारणमुप्रसारणुम---ऒलिपरप्पुपरप्पुदल्---प्रक्षेपणंपरप्पु---प्रसारहरडिसुवुदु---
2082प्रसिद्धविशेषण----विख्यात, मशहूर।----प्रसिद्ध----मशहूर----मशहूर----मशहूरु----प्रसिद्ध----प्रसिद्ध, जाहेर----प्रसिद्ध, विख्यात----प्रसिद्ध----प्रसिद्ध----प्रसिद्धिचेंदिन----पॆयर् पॆट॒ट॒----प्रसिद्धं----हॆसरुपडॆद----
2083प्रसूतिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---प्रसव, उत्पत्ति ;संतति, संतान।---जच्चासंतान---बिलादतऔलाद---प्रसुनशुर्य, सन्तान---ज॒मुसन्तान, औलादु---प्रसूतिसंतति---प्रसूतिसंतति---प्रसव, उत्पत्तिप्रसूति, सन्तति---प्रसव उत्पत्तिसंतान---प्रसूति----प्रसवमुसंतानमु---पिरसवम्संददि---प्रसवंसंतति---हॆरिगॆसंतान---
2084प्रस्तावपुंलिंगपुंलिंग---किसी के सामने विचारार्थ रखी गई बात या सुझाव ;उक्त का वह रूप जो किसी सभा या संस्था के सदस्यों के समक्ष विचारार्थ रखा जाए (मोशन)।---प्रसतावमता---तज्वीज़तहरीक---तजवीज़तजवीज़---प्रस्ताउ, ठहिराउप्रस्ताव, ठहिराउ रिथ---प्रस्ताव, सूचनाप्रस्ताव, ठराव---प्रस्ताव, दरखास्तठराव---प्रस्तावप्रस्ताव---प्रस्ताव, परामर्शआबेदन, प्रस्ताव---प्रस्ताव----सूचनप्रस्तावन---योजनैपिरेरणै---प्रस्तावंप्रमेयं---प्रस्तापठरावु---
2085प्रस्तावनास्त्रीलिंग----किसी ग्रंथ का वह आरम्भिक वक्तव्य जिसमें उससे संबंधित कुछ मुख्य बातों का विवेचन किया जाता है (प्रिफेस)।----प्रसतावना----दीबाच: (तम्हीद)----ब्रोहंकथ, तमहीद----मुहागु----प्रस्तावना----प्रस्तावना, आमुख----प्रस्तावना, भूमिका----प्रस्तावना, आगकथा----प्रस्ताबना----अवतारिक----मुन्नुरै----प्रस्तावन, मुखवुर----मुन्नुडि----
2086प्रस्तुतविशेषणविशेषणविशेषण--मौजूद, उपस्थित, वर्तमान ;प्रकरण प्राप्त, प्रासंगिक ;उद्यत, तैयार।--पेश, प्रस्तुत----मौजूदपेशतैयार--पेशपेशपेश--मौजूदु, हाज़ुरुमौजूदु, हाजुरुतयारु--प्रस्तुत, हजर, उपस्थितप्रासंगिकप्रस्तुत, उद्यत--प्रस्तुतचर्चातुंउद्यत--उपस्थित, वर्तमानप्रासंगिकप्रस्तुत, उद्यत--बर्तमानप्रासंगिकसाजु--प्रस्तुत----प्रस्तुतमुप्रासंगिकमुसिद्धमु--मुन्नुळ्ळसंबन्दप्पट्टतयारान--इप्पोळुळ्ळ, प्रस्तुतसांदर्भिकमायतैयारा॒य--इंगिन, इत्तीचिनप्रासंगिकउद्यत, तयारु, सिद्ध--
2087प्रहरीपुंलिंग----पहरेदार।----पहिरेदार----पहरेदार----पहरु॑दर----पहिरेदारु----प्रहरी, पहारेकरी----प्रहरी, पहेरेदार----प्रहरी, चौकिदार----परीया, प्रहरी----प्रहरी----कापलावाडु, प्रहरि----पाराक्कारन्, कावल्कारन्----पारा॒वुकारन्----कावुलगार, पहरॆदार----
2088प्राणपुंलिंग----शरीर के भीतर की जीवनाधार वायु, श्वास।----जान----जान----प्रान, ज़ुव----प्राणु, साहु----प्राण, श्वास----प्राण, श्वास----प्राण, प्राणवायु----प्राण----प्राण----प्राणमु----उचिर्----प्राणन्----उसिरु----
2089प्राणदंडपुंलिंग----मौत की सजा, मृत्यु दंड।----मौत दी सज़ा----सज़ाए मौत----मोतुक सज़ा----मौत जी सज़ा----मृत्युदंड----मृत्युदंड----प्राण॒दंड (न)----मृत्युदंड----प्राणदंड----मृत्युदंडमु, मरणदंडमु----मरण दंडनै----मरणशिक्ष, वधशिक्ष----मरणदंडनॆ----
2090प्राथमिकतास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---किसी कार्य, बात या व्यक्ति को औरों से पहले दिया जाने या मिलने वाला अवसर या स्थान, अग्रता (प्राइअरिटी);प्रथम स्थान में होने या रखे जाने की अवस्था या भाव।---पहिल, प्रथमतापहिल, प्रथमता---तरजीह (अव्वलीयत)----गॅडु॑ अनवार्यगडु॑ अनवार्य---अगि॒राईअवलियत---प्राधान्यप्राथमिकता---प्रथमता, पहेलापणुंप्राथम्य---अग्राधिकारप्राथमिकता---प्राथमिकता, अग्राधिकारप्राथमिकता---प्राथमिकता----प्राथम्यमुप्राधान्यमु---मुदलिडम्मुदन्मै---मुन्गणनप्रथम स्थानं---आद्यतॆ, प्रमुख्यतॆप्राथमिकतॆ, मॊदल स्थान---
2091प्रादेशिकविशेषण----प्रदेश संबंधी, प्रदेश का।----प्रादेशक----सूबाई/इलाक़ाई----सूबा॑यी----प्रादेशिक, प्रदेस संबंधी----प्रदेशिक----प्रोदेशिक----प्रादेशिक----प्रादेशिक, राज्यिक----प्रादेशिक----प्रादेशिकमु, प्रांतीयमु----मानिलत्तिय----प्रादेशिकं----प्रादेशिक----
2092प्राप्तविशेषण----जो मिला हो लब्ध।----प्रापत----हासिल/वुसूल----प्रा॑वमुत----हासुलु----प्राप्त----प्राप्त----प्राप्त, लब्ध----प्राप्त, पोवा----प्राप्त----प्राप्तिंचिन----किडैत्त----प्राप्तं, लभिच्च----सिक्किद----
2093प्रामाणिकविशेषणविशेषण---जो प्रमाण के रूप में माना जाता हो या माना जा सकता हो ;जो शास्त्रोंआदि से प्रमाणित या सिद्ध हो।---परमाणिकपरमाणिक---मुस्तनद----सॊबूथु॑वोलसॊबूथवोल---सनदीसिद्धि, साबितु---प्रमाणितशास्त्रसंमत---प्रमाणिक----प्रमाणि॒क (न)शास्त्र सम्मत---प्रामाणिकप्रामाणिक---प्रामाणिक----प्रामाणिकमुप्रामाणिकमु---अत्ताट्चि पेट॒ट॒शास्तिरंगळिल् ओप्पुदल्पेट॒ट॒---प्रामाणिकंशास्त्रसम्मतं---प्रामाणिक, नंबलर्हप्रामाणिक, शास्त्रोक्त---
2094प्राय:क्रिया विशेषणक्रिया विशेषण---लगभग, करीब-करीब ;अक्सर, अधिकतर।---लगभगअक्सर---तक़्रीबनअक्सर---अकसर----लग॒भग॒घणों करे, अक्सर---जबळ जवळबहुधा---प्राय:, बहुधाघणुं खरुं---प्राय, काछाकाछिप्राय, साधारण॒त: (न)---प्राय, अधिकांशप्राये---प्राय----दादापुसामान्यमुगा, प्रायिकमुगा---अनेगमाहपेरुम्बालुम्---एकदेशंमिक्कवारुं॒, प्रायेण---सुमारुसामान्यवागि, बहुमट्टिगॆ---
2095प्रायद्वीपपुंलिंग----स्थल का वह भाग जो तीन ओर पानी से घिरा हो और एक ओर स्थल से लगा हो (पिनिन्स्युला)।----प्राइदीप----जज़ीरानुमा----जज़ीरु॑नुमा----उपबे॒टु----द्वीपकल्प----द्वीपकल्प----उपद्वी॒प (दी)----उपद्वीप----अंपरीप----द्वीपकल्पमु----दीपगर्बम्----उपभूखंडं----पर्याय द्वीप----
2096प्रायश्चितपुंलिंगपुंलिंग---कोई ग़लत या अनुचित कार्य हो जाने पर अफसोस करना, पछतावा ;पाप का मार्जन करने के लिए किया जाने वाला शास्त्रविहित कर्म।---पछतावाप्राशचित---पशेमानीकफ़्फ़ारा---प्रायाच्य़थतोबु॑---पछिताउप्राश्चितु, प्रायश्चित---पश्चातापप्रायश्चित---प्रायश्चित, पस्तावोप्रायश्चित---प्रायश्चित, अनुशोचनाप्रायश्चित---अनुतापप्रायश्चित, पराचित---प्रायश्चित----पाश्चात्तापमुप्रायश्चित्तमु---पच्चात्ताबम्पिरायच्चित्तम्---पश्चास्तापं, दुखंप्रायश्चित्तं---पश्चात्तापप्रायश्चित्त---
2097प्रार्थनास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---निवेदन, याचना ;अपने अथवा किसी और के कल्याण की कामना भक्ति और श्रद्धापूर्वक ईश्वर से करना।---अरज़, प्रारथनाप्रारथना---दरख़्वास्तदुआ़---प्रार्थनाप्रार्थना---प्रार्थना----विनंतिप्रार्थना---प्रार्थना, अरज, विनतीउपासना---प्रार्थना, निवेदन, या॒चना (ज)प्रार्थना, स्तुति---निबेदनप्रार्थना---प्दार्थना----निवेदनप्रार्थन---वेण्डुकोळ्पिरार्त्तनै---अपेक्षप्रार्थन---निवेदनॆ, बेडिकॆप्रार्थनॆ---
2098प्रियविशेषण----जिसके प्रति बहुत अधिक स्नेह या प्रेम हो, मन को अच्छा लगने वाला, प्यारा।----पिआरा----अज़ीज़ (मह्बूब)----टोठ----प्रिय, प्यारो----प्रिय----प्रिय, गमतुं----प्रिय----मरमर, प्रिय----प्रिय----प्रियमयिन----पिरियमुळ्ळ, अन्बुळ्ळ----प्रियप्पॆट्ट----प्रिय, इष्ट----
2099प्रीतिभोजपुंलिंग----किसी मांगलिक या सुखद अवसर पर बंधु-बांधवों और इष्ट मित्रों को अपने यहाँ बुलाकर कराया जाने वाला भोजन, दावत।----प्रीतिभोज----द़ावत----साल----प्रीतिभोजु----मेजवानी----प्रीतिभोजन----प्रीतिभोज----प्रतिभोज----प्रीतिभोजन, भोजी----विंदु----पाराट्टु विरुन्दु----सद्य, विरुन्नुं----औतण, भोजनकूट अथवा समारंभ----
2100प्रेमपुंलिंग----प्रीति, प्यार, स्नेह, अनुराग।----प्रेम----मुहब्बत----प्रॆयम, टाठिन्यार----प्रेमु----प्रेम----प्रेम, प्रीति, प्यार, हेत----प्रेम भालोबासा, अनुराग----प्रेम चेनेह----प्रेम----प्रेम----अन्बु, कादल्----स्नेहं, प्रेमं----प्रेम----