विक्षनरी:हिन्दी-मलयालम शब्दकोश-०२

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अंक (पुं.) क्रोड, गोद् -- मटि

अंक (पुं.) संख्या के सूचक चिह्न -- अक्कम्

अंक (पुं.) परीक्षा आदि में सफलता की सूचक इकाइयाँ (नंबर) -- मार्क्कु

अंक (पुं.) बहुखंडीय नाटक का एक खंड -- अङ्कम्

अंक (पुं.) पत्र-पत्रिकाओं का किसी निश्चित समय पर होने वाला प्रकाशन -- लक्कम इदळ्

अंकुर (पुं.) अँखुआ -- मुळ, अंकुरम्

अंकुश (पुं.) लोहे का काँटा, जिससे हाथी को चलाया और वश में किया जाता है -- अंकुशम्, तोट्टि

अंकुश (पुं.) नियंत्रण, दबाव -- अंकुश्, तटस्सम्

अंग (पुं.) शरीर के विभिन्न अवयव -- अवयवम्, अंगं

अंग (पुं.) शरीर, देह -- शरीरम्

अंग (पुं.) भाग -- भागम्, अंगम्

अंचल (पुं.) सीमा के आसपास का प्रदेश -- अतिर्त्तिप्रदेशम्, अंचलम्

अंचल (पुं.) आँचल या पल्ला (जैसे साड़ी का) -- अंचलम्, कर

अंडा (पुं.) कुछ विशिष्ट मादा जीवों के गर्भशय से निकलने वाला एक पिंड -- मुट्ट, अंडम्

अंत (पुं.) समाप्ति, अवसान -- अवसानम्, अंतम्

अंतरंग (वि.) घनिष्ठ, आत्मीय -- उट्ट, आत्म

अंतरंग (वि.) भीतरी -- अकत्तं

अंतर (पुं.) दो वस्तुओं के बीच की दूरी, फासला -- अकत्ते

अंतर (पुं.) भेद, भिन्नता -- दूरम्

अंतरराष्ट्रीय (वि.) एक से अधिक राष्ट्रों के बीच परस्पर संबंध रखने वाला -- अंतराष्ट्रीयम्

अंतरिक्ष (पुं.) पृथ्वी तथा अन्य ग्रहों या लोगों के बीच का रिक्त स्थान -- अंतरीक्षम्

अंतिम (वि.) सबसे बाद का, आखिरी -- अवसानत्त

अंतिम (वि.) चरम, परम -- चरममाय, परममाय

अंदर (क्रि.वि.) भीतर -- चरममाय, परममाय

अंधकार (पुं.) अँधेरा -- अकत्तु

अंधा (पुं./वि.) देखने की शक्ति से रहित -- कुरुटन्, अँधन्

अंश (पुं.) भाग, हिस्सा, खंड, टुकड़ा -- भागम्, अंशम्

अकड़ना (अं.क्रि.) पूरे शरीर का या उसके किसी अंगविशेष का कड़ा होना, ऐँठना -- तण्डुकाणिक्कुक

अकड़ना (अं.क्रि.) घमंड दिखाना या दुराग्रह करना -- गर्वु काणिक्कुक, वाशि पिटिक्कुक

अकाल (पुं.) दुर्भिक्ष -- क्षामम्

अकाल (पुं.) कमी, अभाव -- कुरवु, अभाव

अकाल (पुं.) असमय -- NA

अकेला (वि.) बिना साथी का -- एकनाय, तनिच्चुळ्ळ

अक्ल (स्त्री.) बुद्धि, समझ -- बुद्दि, अरिवु

अक्षर (पुं.) वर्ण, स्वर और स्वररहित व्यंजन, जो इकाई के रूप में प्रयुक्त हो -- अक्षरम्

अक्षर (वि.) अविनाशी, नित्य -- नशिक्कात्त, नित्यमाय

अक्सर (अव्य.) बहुधा, प्रायः -- मिक्कवारुम्, साधारण

अखंड (वि.) जिसके खंड न हुए हों, पूरा, समूचा -- अखंडमाय, पूर्णमाय

अखबार (पुं.) समाचारपत्र -- वर्तमानपत्रम्

अखरना (अ.क्रि.) बुरा या अप्रिय लगना, खलना, खटकना -- अनिष्टमायि तोन्नुक

अखाड़ा (पुं.) व्यायामशाला, कुश्ती लड़ने का स्थान -- गोद, कळरि

अखाड़ा (पुं.) साधुओं की सांप्रदायिक मंडली या उनके रहने का स्थान -- संन्यासिमठम्

अगर (अव्य.) यदि, जो -- एङ्किल्

अगर (पुं.) एक पेड़, जिसकी लकड़ी बहुत सुगंधित होती है -- अकिल् मरम्

अगरबत्ती (स्त्री.) वह बत्ती जो सुगंध के निमित्त जलाई जाती है। -- सांप्राणित्तिरि

अगला (वि.) सबसे आगे का, सबसे पहले या सामने वाला -- मुन्पिलुळ्ळ

अगला (वि.) भविष्य में आनेवाला -- वरुन्न, अटुत्त

अगाध (वि.) अथाह, बहुत अधिक गहरा -- अगाधम्

अग्नि (स्त्री.) आग -- ती, अग्नि

अग्रज (पुं.) बड़ा भाई -- ज्येष्ठन, अग्रजन्

अचल (वि.) जो अपने स्थान पर बना रहे, गतिहीन, स्थिर -- उरच्च, स्थिरमाय

अचानक (क्रि.वि.) बिना पूर्व सूचना के, एकाएक, सहसा -- पेट्टेन्नु, विचारिच्चिरि-क्कातै

अच्छा (वि.) ठीक, उपयुक्त -- नल्ल, उपयुक्तमाय

अच्छा (वि.) जो बुरा न हो, दोष रहित -- दोषमिल्लात, चीत्तयल्लात्त

अच्छा (अव्य.) आश्चर्य, विस्मयादि -- काळ्ळांम रारि

अच्छा (अव्य.) स्वीकृतिसूचक उक्ति -- NA

अजगर (पुं.) एक विशाल सर्प -- मलंपांपु

अजायबघर (पुं.) वह भवन, जहाँ पर पुराकालीन कलाकृतियाँ स्थायी रूप से प्रदर्शित की जाती हैं, संग्रहालय -- काल्लचबंगल्लावुॅ

अटकना (अ.क्रि.) चलते-चलते या कोई काम करते-करते रुक जाना, रुकना -- तटस्सप्पेटुक

अड़ना (अ.क्रि.) बीच में रुकना या फँसना -- उटक्कुक

अड़ना (अ.क्रि.) हठ करना -- शाठ्यम् पिटिक्कुक

अड्डा (पुं.) टिकने, ठहरने या बैठने का स्थान -- तावळम्

अणु (पुं.) किसी तत्व या धातु का वह बहुत छोटा अंश, जिसमें उसके सभी संयोजक अंश विद्यमान हों -- अणु

अड्डा (पुं.) अत्यंत सूक्ष्म मात्रा या वस्तु -- सूक्ष्म वस्तु

अतिथि (पुं.) मेहमान -- अतिथि

अदालत (स्त्री.) न्यायालय -- नीतिपीठम्, कच्चेरि

अधिक (वि.) बहुत -- वळरे अधिकम्

अधिक (वि.) अतिरिक्त -- कविञ्ञ

अधिवेशन (पुं.) किसी बड़ी सभा की लगातार होने वाली बैठकों का सामूहिक नाम -- सम्मेळनम्

अधिसूचना (पुं.) किसी बात की ओर विशिष्ट रूप से ध्यान आकृष्ट करने के लिए दी जाने वाली सार्वजनिक सूचना -- विज्ञापनम्

अधूरा (वि.) जो पूरा न हो या जो समाप्त न हुआ हो -- अपूर्णम् पणि तीरात्त

अध्यक्ष (पुं.) किसी संघ, संस्था, समिति आदि का प्रधान -- अध्यक्षन्

अध्यक्ष (पुं.) स्पीकर, लोकसभा का पीठासीन अधिकारी -- स्पीक्कर, अध्यक्षन्

अध्यादेश (पुं.) वह आधिकारिक आदेश, जो किसी कार्य, व्यवस्था आदि के संबंध में ऱाष्ट्रपति, राज्यपाल द्वारा निकाला गया हो -- ओर्डिनेंस्

अध्यापक (पढ़ाने वाला, शिक्षक) अध्यापकः -- अध्यापकन्

अध्याय (पुं.) ग्रंथ या पुस्तक का खंड या विभाग -- अध्यायम्

अध्यय (पुं.) प्रकरण -- प्रकरणम्

अनगिनत (वि.) जिसकी गिनती संभव न हो सके, संख्यातीत -- वळरेयधिकम्, ऐण्णमट्ट

अनशन (पुं.) भूख-हड़ताल -- पट्टिणि सत्याग्रहम्, निराहार सत्याग्रहम्

अनशन (पुं.) आहार त्याग, उपवास -- उपवासम्

अनाथ (वि.) जिसका पालन-पोषण करने वाला कोई न हो -- अनाथन्

अनाथ (पुं.) बिना माँ-बाप का -- अनाथनाय

अनाथालय (पुं.) वह स्थान जहाँ अनाथों का पालन-पोषण होता है -- अनाथालयम्

अनावरण (पुं.) किसी महापुरुष के चित्र, मूर्ति आदि से समारोहपूर्वक परदा हटा कर उसे सर्व साधारण के लिए दर्शनीय बनाया जाना, उद्घघाटन -- अनाच्छादनम्

अनिवार्य (वि.) जिसकी इतनी अधिक जरूरत हो कि उससे बचा न जा सके, अवश्यभांवी -- अनिवार्यम्

अनुकरण (पुं.) नकल, अनुसरण -- अनुकरणम्

अनुक्रमणिका (स्त्री.) किसी विशेष क्रम के आधार पर बनाई गई सूची -- अनुक्रमणिक

अनुज (पुं.) छोटा भाई -- अनुजन्

अनुराग (पुं.) प्रेम, आसक्ति -- अनुरागम्, स्नेहम्

अनुवाद (पुं.) एक भाषा में लिखी या कही हुई बात को दूसरी भाषा में कहने या लिखने की क्रिया, भाषांतर -- परिभाषा तर्जम

अनुसंधान (पुं.) खोज, अन्वेषण -- गवेषणम्

अनुसार (वि.) किसी के ढंग या रूप से मिलता हुआ, अनुरूप -- अनुसरिच्चु

अनुसूचित (वि.) जिसे अनुसूची में स्थान मिला हो -- पट्टटिकयिल् पेट्ट

अनुसूची (स्त्री.) किसी लेख या ग्रंथ के अंत में परिशिष्ट के रूप में लगी हुई सूची -- पट्टिक

अनेक (वि.) एक से अधिक, कई, बहुत -- अनेकम, पल

अन्न (पुं.) अनाज -- धान्यम्

अन्य (वि.) दूसरा -- मट्टोरु अन्य

अन्याय (पुं.) न्याय-विरुद्ध कार्य -- अन्याय

अपना (वि.) आत्मसंबंधी, निज का -- स्वंतम्

अपना (पुं.) आत्मीय, स्वजन -- बंधु, स्वंतक्कार

अपनाना (स.क्रि.) अपना बनाना -- स्वंतमाक्कुक

अपनाना (स.क्रि.) ग्रहण करना, स्वीकार करना -- स्वीकरिक्कुक

अपने-आप (क्रि.वि.) स्वतः, खुद-ब-खुद -- स्वयम्, तन्नत्तान्

अपमान (पुं.) अनादर, तिरस्कार, बेइज्जती -- अपमानमु, अवगणन

अपराध (पुं.) अनुचित या दंडनीय कार्य -- अपराधम् कुट्टं

अपराध (पुं.) दोष, गलती -- तेट्टु

अपराधी (पुं./वि.) अपराध करने वाला -- अपराधि, कुटट्वाळि अपराधि, कुट्टवाळि

अपराह्न (पुं.) दोपहर के बाद का काल, तीसरा पहर -- अपराह्नम्, मध्याह्नम्, उच्चनेरम्

अपाहिज (पु./वि.) लूला-लंगड़ा, विकलांग -- अंगहीनन्, विकलांगन्

अफसर (पुं.) अधिकारी -- आफीसर्

अफीम (स्त्री.) पोस्त के डंठलों से निकाला जाने वाला मादक पदार्थ -- अवीन्

अभयदान (पुं.) सुरक्षा के लिए वचन -- अभयम्

अभिनंदन (पुं.) किसी की उपलब्धि पर उसके प्रति शुभकामना और श्रद्धा प्रकट करना -- अभिनंदनम्

अभिनय (पुं.) हाव भाव के द्ववारा किसी पात्र के चरित्र का अनुकरण (दृश्य कला में) -- अभिनयम्

अभिनेता (पुं.) रंगमंच पर अभिनय या नाटक करने वाला -- अभिनेतवु, नटन्

अभिप्राय (पुं.) उद्देश्य, प्रयोजन -- उद्देश्यम्, आश्यम्

अभिप्राय (पुं.) आशय -- अर्थम्

अभिभावक (पुं.) संरक्षक -- रक्षकर्तावु

अभिमान (पुं.) अहंकार, घमंड -- अभिमानम्

अभियान (पुं.) किसी कार्य विशेष की सिद्धि के लिए चतुर्दिक प्रयास -- प्रयाणम्

अभियान (पुं.) सैनिक आक्रमण, चढ़ाई -- आक्रमणम्

अभियुक्त (पु.) वह, जिस पर न्यायालय में कोई अभियोग चल रहा हो, मुलजिम, अपराधी -- अपराधि, कुंट्टवाळि, अभियुक्तन्

अभियोग (पुं.) अपराध का आरोप -- कुट्टारोपणे

अभियोग (पुं.) दंड दिलाने के लिए न्यायालय से की जाने वाली फरियाद, मुकदमा -- अन्यायम्, व्यवहारम्

अभिलाषा (स्त्री.) इच्छा, आकांक्षा -- आग्रहम्, अभिलाषम्

अभिलेख (पुं.) किसी घटना, विषय, व्यक्ति आदि से संबंधित लिखित प्रामाणिक सामग्री -- रिक्कार्ड, रेख

अभिवादन (पुं.) श्रद्धापूर्वक किया जाने वाला नमस्कार, प्रणाम -- अभिवादनम

अभिशाप (पुं.) श्राप, अहित कामनासूचक शब्द -- शापमु, अभिशापम्

अभी (क्रि.वि.) इसी समय, इसी क्षण, तुरंत -- इप्पोळ् तन्ने

अभी (क्रि.वि.) आजकल, इन दिनों -- ईयिटे

अभीष्ट (पुं./वि.) जिसकी इच्छा या कामना की जाए, -- इष्टर्प्पट्ट, अभीष्टम्

अभीष्ट (पुं./वि.) मनोरथ -- मनोरथम्

अभ्यास (पुं.) दक्षता प्राप्त करने के लिए दत्तचित्त होकर किसी काम को बार बार करने की क्रिया -- अभ्यासम्

अमर (वि.) कभी न मरने वाला -- मनणमिल्लात्त

अमर (वि.) जिसका कभी अंत, क्षय या नाश न हो -- आंटुङ्ङात्त नशिक्कात्त

अमल (पुं.) प्रयोग, व्यवहार -- प्रयोगम्, नटप्पु

अमानत (स्त्री.) धरोहर, थाती -- सूक्षिप्पु, सूक्षिच्चधनम्

अमावस (स्त्री.) चांद्र मास के कृष्ण पक्ष का अंतिम दिन -- अमावसि, करुत्त वावु

अमिट (वि.) न मिटने वाला या नष्ट न होने वाला, स्थायी -- नशिक्कात्त, स्थायियाय

अमिट (वि.) अटल, अवश्यंभावी -- दृढमाय, अवश्यं-भावियाय

अमीर (पुं/वि.) धनवान व्यक्ति, रईस -- धनिकन्

अमीर (पुं/वि.) सरदार -- प्रधानि प्रमुखव्

अमुक (वि.) कोई अनिश्चित व्यक्ति अथवा वस्तु, फलां -- इन्न (व्यक्ति, वस्तु)

अमृत (पुं.) एक प्रसिद्ध कल्पित पेय, जिसके संबंध में यह मान्यता है कि उसके पीने से प्राणी अमर हो जाता है, सुधा, पीयुष -- अमृतम्

अम्ल (पुं.) खट्टापन, खटाई -- पुळिप्पु

अम्ल (पुं.) तेजाब (एसिड) -- अम्लम्

अरथी (अर्थी) (स्त्री.) वह तख्ता, सीढ़ी आदि जिस पर मृत शरीर को अंत्येष्टि के लिए ले जाया जाता है, जनाजा -- श्वमंचम्

अराजकता (स्त्री.) शासनतंत्र का अभाव -- अराजकत्वम्

अराजकता (स्त्री.) अव्यवस्था -- अशांति

अरुण (वि.) लाल रंग का रक्त वर्ण का, सुर्ख -- अरुणमू, चुवन्न

अरुण (पुं.) गहरा लाल रंग -- कटुं चुवप्पु

अरुण (पुं.) सूर्य -- अरुणन्

अर्चना (स्त्री.) पूजा, वंदना -- अचंन, पूज

अर्थ (पुं.) अभिप्राय, माने -- अर्थम्

अर्थ (पुं.) धन-संपत्ति, पैसा -- पणम्, धबम्

अर्थशास्त्र (पुं.) वह शास्त्र, जिसमें विभिन्नअर्थिक क्रियाओं का विवेचन हेता है -- धनतत्वशास्स्त्रम, अर्थशास्त्रम्

अर्ध (वि.) आधा -- पकुति, अर्धम्

अर्धमासिक (वि.) पाक्षिक, मास के अधे भाग का -- पाक्षिकम्, अर्धमासिकम्

अर्धांगिनी (स्त्री.) धर्मपत्नी -- अर्धांगिनि, भार्य

अर्पण (पुं.) किसी को श्रद्धापूर्वक कुछ देना, सौंपना या भेंट करना -- अर्पणम्

अलंकरण (पुं.) पदक या पदवी द्वारा विभूषित करने की क्रिया -- अलंकरिक्कल्

अलंकार (पुं.) सौंदर्यवर्धक वस्तु या सामग्री, सजावट -- अलंकारं

अलंकार (पुं.) आभूषण, गहना -- अलंकारम्

अलंकार (पुं.) रचनागत विशिष्ट शब्द-योजना या अर्थ चमत्कार -- अलंकार्, आभरणङ्ङळ्

अलंग (वि.) दूर हटा हुआ, पृथक -- मारिय, वेरे

अलंग (वि.) औरों से भिन्न -- वेर्पेट्ट

अलता (पुं.) लाख से बना हुआ वह लाल रंग जो स्त्रियाँ शोभा के लिए पैरों में लगाती हैं, महावर -- अलक्ताकं, चेम्मञ्ञि

अलबम (पुं.) तस्वीरें रखने की किताब या कापी -- आल्बम्

अलमारी (स्त्री.) काठ, लोहे आदि का या दीवार में बना एक प्रकार का ऊँचा या लंबा आधान जिसमें चीजें रखने के लिए खाने या घर बने होते हैं। -- अलमारि

अलापना (अ.क्रि.) स्वरविस्तार करना -- आलापनम् चंय्युक, आलपिक्कुक

अलावा (अव्य.) अतिरिक्त, सिवाय -- कूटाते

अलौकिक (वि.) जो इस लोक में न मिलता हो, लोकोत्तर -- अलौकिकम्

अलौकिक (वि.) असाधारण, अद्भुत -- असाधारणम् अद्भुतम्

अल्प (वि.) कम, थोड़ा, विरल -- कुरच्चु, कुरवायि

अल्प (वि.) तुच्छ -- तुच्छमाय

अल्पविराम (पुं.) एक विराम चिह्न (,) जो वाक्य के पदों में पार्थक्य दिखाने या बोलने में कुछ ठहराव सूचित करने के लिए प्रयुक्त होता है -- अल्पविरामम्, कोम

अल्पसंख्यक (वि.) वह दल, पक्ष या समाज, जिसके अनुयायियों की संख्या अन्य दलों, पक्षों या समाजों से अपेक्षाकृत कम हो -- न्यूनपक्षम्

अल्पाहार (पुं.) थोड़ा, भोजन, जलपान, नाश्ता -- लघु भक्षणम्

अवकाश (पुं.) छुट्टी या फुरसत का समय -- अवधि, आंळिवु समयं

अवकाश (पुं.) रिक्त स्थान या शून्य स्थान -- इटं

अवज्ञा (स्त्री.) किसी आज्ञा या कानून को न मानना, उल्लंघन -- अवज्ञा

अवज्ञा (स्त्री.) अनादर, अपमान -- वेरुप्पु, अनादरवु

अवतरण (पुं.) ऊपर से नीचे आना, उतरना -- अवतरणम्

अवतरण (पुं.) लेख, वचन आदि का उद्धृत अंश, उद्धरण -- उद्धरणम्

अवतार (पुं.) पौराणिक मान्यता के अनुसार ईश्वर का भौतिक या मानव रूप धारण करके इस संसार में आना -- अवतरिक्कल्

अवतार (पुं.) जिसके संबंध में यह माना जाता है कि वह ईश्वर का अंश और प्रतिनिधि है -- अवतारम्

अवयव (पुं.) शरीर का कोई अंग -- अवयवम्

अवयव (पुं.) किसी वस्तु का कोई अंश, भाग, हिस्सा -- भागम्, अंशम्

अवरोह (पुं.) ऊँचाई से नीचे आना, उतरना -- मुकळिल् निन्नु इरङ्ङुक

अवरोह (पुं.) संगीत में स्वरों के ऊपर से नीचे आने का क्रम -- (संगीतम्) अवरोहणम् (स्वरत्तिर्न)

अवलंब (पुं.) आश्रय, सहारा, भरोसा -- आश्रयम्, अवलंबम्

अवशेष (पुं.) जो बचा रह गया हो -- निश्चयमायुम्

अवसर (पुं.) सुयोग, मौका -- अवसरमू

अवसाद (पुं.) आशा, उत्साह, शक्ति आदि का अभाव, शिथिलता, उदासी -- विषण्णम्, अवसादम्

अवसाद (पुं.) विषाद, रंज -- विषादम्

अवसान (पुं.) अंत, समाप्ति -- अवसानम्

अवसान (पुं.) मरण, मृत्यु -- मरणम्

अवहेलना (स्त्री.) अवज्ञा, तिरसस्कार, उपेक्षा -- अवहेळनाम्, उपेक्षाभावम्, अनादरम्

अवांछित (वि.) जो चाहा न गया हो -- अनभिलषणीयं

अवाक् (क्रि.वि.) स्तब्ध, चुप -- मौनमाय, स्तब्धमाय

अविकल (वि.) ज्यों का त्यों -- अङ्ङने तन्ने

अविकल (वि.) पूरा, संपूर्ण -- पूर्णमाय

अविरल (वि.) घना, सघन -- इटतूर्न्न, अविरळम्

अविरल (वि.) सतत, निरंतर -- निरंतरमाय

अविलंब (क्रि.वि.) बिना देर किए, तुरंत, तत्काल -- विलंबमिल्लार्त, तामसियाते

अवैतनिक (वि.) बिना वेतन का -- प्रतिफलम् पट्टात्त

अवैध (वि.) जो विधि या विधान के विरुद्ध हो -- नियम-विरुद्धम्

अव्यवस्था (स्त्री.) व्यवस्था (क्रम, नियम, मर्यादा आदि) का अभाव -- व्यवस्थयिल्लाय्म

अव्यवस्था (स्त्री.) प्रबंध आदि में होने वाली गड़बड़ी, कुव्यवस्था -- कुळप्पम्, दुर्व्यवस्थ

अशुद्ध (वि.) जो शुद्ध न, हो, अपवित्र -- अपवित्रम, अशुद्धं

अशुद्ध (वि.) जिसका शोधन या संस्कार न हुआ हो, दोषपूर्ण, त्रुटिपूर्ण -- अशोधितम्

अशुद्धि (स्त्री.) शुद्ध न होने की अवस्था या भाव, अशुद्धता -- अशुद्धत, अशुद्धि

अशुद्धि (स्त्री.) त्रुटि, गलती -- तेटटु

अशुभ (वि.) जो शुभ (भला या हितकर) न हो, अमांगलिक या बुरा -- अशुभम्, अमंगळकरम्

अशुभ (पुं.) अमंगल, अहित -- अमंगळम्

अशुभ (पुं.) दोष या पाप -- पावम्

अश्लील (वि.) नैतिक या सामाजिक आदर्शों से च्युत, फूहड़ -- अश्लीलम्, असभ्यम्

अष्टमी (स्त्री.) शुक्ल या कृष्ण पक्ष की आठवीं तिथि -- अष्टमि

असंख्य (वि.) जो गिनती में बहुत अधिक हो -- असंख्यम्

असंख्य (वि.) जिसकी गिनती न हो सके, अनगिनत -- एण्णमट्ट

असंगत (वि.) जो संगत न हो, बेमेल, असंबद्ध, प्रसंग-विरुद्ध -- असंगतमाय

असंतोष (पुं.) संतोष का अभाव -- असंतृप्ति

असंभव (वि.) जो कभी घटित न हो सके -- असंभाव्यम्

असत्य (वि.) जो सत्य या उसके अनुरूप न हो, झूठा या मिथ्या -- असंत्त्यम्

असभ्य (वि.) जो सभ्य न हो, अशिष्ट, गँवार -- असभ्यम्, असभ्यम्

असमंजस (पुं.) दुविधा, अनिर्णय की स्थिति -- धर्मसकटम्, आश्यक्कुळप्पं

असमर्थ (वि.) जो किसी काम को कर सकने में समर्थ न हो, अशक्त -- कोळ्ळात्तवन्

असर (पुं.) प्रभाव -- प्रभावम, फलम्

असल (वि.) वास्तविक -- असलु, तनि

असल (वि.) मूलधन -- मूलदनम्

असली (वि.) बिना मिलावट का, शुद्ध, खरा -- यथार्थमाय, असल्

असहयोग (पुं.) औरों के साथ मिलकर काम न करने की क्रिया या भाव -- निस्सहकरणं

असह्य (वि.) जो सहा न जा सके, उग्र, तीव्र -- असह्यमाय

असाधारण (वि.) जो सामान्य न हो -- असाधारणमाय, पतिविल्लात्त

असीम (वि.) जिसकी कोई सीमा न हो -- अतिरिल्लात्त

असीम (वि.) बहुत अधिक, अपार -- NA

असुर (पुं.) दैत्य, दानव, राक्षस -- असुरन्

असुविधा (स्त्री.) सुविधा का अभाव, कठिनाई -- विषयम्

अस्तबल (पुं.) वह स्थान जहाँ घोड़े बाँधे जाते हैं, घुड़साल -- कुदुरेयलाय

अस्तव्यस्त (वि.) जिसका क्रम या व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो चुकी हो, इधर-उधर बिखरा हुआ, तितर-बितर -- अविडाविड, तारुमारायि

अस्तित्व (पुं.) होने का भाव, विद्यामानता, सत्ता -- अस्तित्वम्, सत्त

अस्त्र (पुं.) फेंक कर चलाया जाने वाला हथियार -- अस्त्रम्

अस्थि (स्त्री.) हड्डी -- अस्थि

अस्थिर (वि.) जिसमें स्थिरता न हो, गतिमान, चंचल -- अस्थिरम्, चंचलम्

अस्पताल (पुं.) वह स्थान जहाँ रोगियों की चिकित्सा की व्यवस्था होती है, चिकित्सालय -- आशुपत्रि

अस्वस्थ (वि.) जो स्वस्थ न हो, बीमार या रोगी -- रोगि, आरोग्य-मिल्लात्त

अस्वस्थ (वि.) दूषित -- दूषितम्

अहं (पुं.) मैं हूँ का भाव, अहंकार, अभिमान -- अहंकारम्

अहंकार (पुं.) अभिमान, गर्व -- अहंकारम्

अहाता (पुं.) चारों ओर बाड़ आदि से घिरा हुआ मैदान या स्थान -- वळप्पु

अहाता (पुं.) चहारदीवारी -- मतिल् कोट्ट

अहिंसा (स्त्री.) हिंसा का निषेध -- अहिंस

अहित (पुं.) भलाई का अभाव, अपकार, हानि -- अहितम्, तिन्म

आँकड़े (पुं) तथ्यों को सूचित करने वाले अंक-समूह -- स्थितिविवर-क्कणक्कु

आँकना (क्रि.) अंकित, करना -- चित्रत्तिल् अटयाळ-प्पेटुत्तुक

आँकना (स.क्रि.) अनुमान लगाना -- ऊहिक्कुक, मतिक्कुक

आँख-मिचौनी (स्त्री.) लुका-छिपी, बच्चों का एक खेल -- कण्णु पांत्तिक्कळि

आँगन (पुं.) घर के अंदर का खुला चौकोर स्थान -- मुट्टम्

आँचल (पुं.) साड़ी का पल्ला, छोर, सिरा -- अट्टम्, वस्त्रांचलम्

आंतरिक (वि.) अंदर का, भीतरी -- अकर्त्त, आंतरिकमाय

आंतरिक (वि.) अंतःकरण से प्रेरित, सच्चा, वास्तविक -- उळ्ळिल् तटटिय

आंदोलन (पुं) सोद्देश्य किया जाने वाला व्यापक सामूहिक प्रयास -- प्रस्थानम्

आँधी (स्त्री.) धूल भरी तेज हवा, अंधड़ -- कांटुकाट्टु

आंशिक (वि.) अंश या भाग से संबंध रखने वाला -- भागिकम्

आंशिक (वि.) कुछ या थोड़ा, अपूर्ण -- भागिकम, अपूर्णमाय

आँसू (पुं) अश्रुग्रंथि से स्रवित जल कण, अश्रु -- कण्णुनीर्, अश्रु

आकर्षक (वि.) अपनी ओर खींचने वाला -- आकर्षकम्

आकर्षक (वि.) प्रभावित या मोहित करके अपनी ओर ध्यान खींचने वाला -- आकर्षणीयम्

आकर्षण (वि.) अपनी ओर खींचने का भाव -- आकर्षणम्

आकस्मिक (वि.) अकस्मात्, अप्रत्याशित या एकाएक घटित होने या प्रकट होने वाला, अचानक -- आकस्मिकम्, अचिचारितम्

आकार (पुं.) आकृति, शक्ल -- आकारम्, आकजृति

आकार (पुं.) किसी वस्तु या व्यक्ति की लंबाई चौड़ाई, फैलाव, ऊँचाई आदि -- वलिप्पमू

आकाश (पुं.) नभ, गगन, आसमान -- आकाशम्

आकाश-वाणी (स्त्री.) आकाश से सुनाई पड़ने वाली वाणी -- असरीरि, आकाशवाणि

आकाश-वाणी (स्त्री.) ऑल इंडिया रेडियो का हिंदी नाम -- आळ् इंडिया रेडियो, आकाशवाणि

आकृति (स्त्री.) वस्तु, या व्यक्ति का चित्र भावभंगिमा प्रकट करने वाली मुद्रा -- आकृति

आकृति (स्त्री.) रूप, गठन, चेहरा -- रूपम्, मुखम्

आक्रमण (पुं.) प्रहार, हमला -- आक्रमणम्

आक्षेप (पुं.) लांछन, दोषारोपण -- कळंकम्, कळंकारोपक्म्

आखिर (पुं.) अंत, समाप्ति -- अवसानम्

आखिर (पुं.) परिणाम -- फलम्

आखिर (वि.) अंत में, बाद में या पीछे होने वाला -- पिन्नीटुँ संभाविक्कुन

आखेट (पुं.) शिकार -- नायाट्टु

आगंतुक (पुं.) आने वाला (व्यक्ति), अभ्यागत, अतिथि, पाहुना -- आगतन्, अतिथि

आग (स्त्री.) अग्रि -- ती

आग (स्त्री.) जलन, डाह, संताप -- एंरिच्चिल्

आगमन (पुं.) आने, पहुँचने या नए सिरे से प्रकट होने की क्रिया या भाव -- आगमनम्, वरवु

आगामी (वि.) भविष्य में आने या होने वाला, भावी -- वरान् पोकुन्न

आगे (क्रि.वि.) पहले या सामने, किसी की उपस्थिति में -- मुन्निल्, मुन्पिल्

आगे (क्रि.वि.) भविष्य में -- भाविय़िल्

आगे (क्रि.वि.) कुछ दूर और बढ़ने पर -- निबंधिक्कल्, वाशि

आग्रह (पुं.) नम्रतापूर्वक बल, अनुरोध -- अपेक्ष

आग्रह (पुं.) किसी बात पर अड़ते हुए जोर देना, हठ -- निर्बधिक्कल्, वाशि

आघात (पुं.) प्रहार या चोट -- प्रहरम्

आघात (पुं.) किसी दुखद घटना के कारण होने वाली मानसिक व्यथा -- आघातम्

आचरण (पुं.) चाल-चलन, चरित्र -- पंरुमाट्टम्

आचार्य (पुं.) गुरु, शिक्षक -- गुरु, आचार्यन्

आचार्य (पुं.) विभागाध्यक्ष -- प्रोफ़सर्

आचार्य (पुं.) किसी विषय का असाधारण पंडित -- आचार्यन्

आज (क्रि.वि.) वर्तमान में -- इन्नु

आज (क्रि.वि.) इन दिनों में, इस काल में -- इक्कालत्तु

आज (पुं.) प्रस्तुत या वर्तमान -- इन्नु

आजकल (क्रि.वि.) इन दिनों, वर्तमान काल में -- ईयिटे

आजकल (क्रि.वि.) वर्तमान या प्रस्तुत दिनों में, एक दो दिन में -- अटुत्तु तन्न

आजाद (वि.) स्वाधीन,मुक्त, स्वतंत्र -- स्तंत्रमाय

आजीवन (क्रि.वि.) जीवन भर -- जीवितमार्ग, तोळिल्

आजीविका (स्त्री.) रोजी, रोजगार, धंधा -- जीवितमार्ग, तौळिल्

आज्ञा (स्त्री.) आदेश, हुक्म -- आज्ञ

आज्ञा (स्त्री.) अनुमति -- अनुमति, अनुवादम्

आडंबर (पुं) दिखावा, दिखावटी ठाट-बाट -- आडंबरं

आढ़तिया (पुं.) आढ़त का काम करने वाला -- कम्मीषन् एजन्टे, दल्लाळ्

आतिशबाजी (स्त्री.) बारूद से बनी चीज़ों को जलाने का तमाशा -- विटिक्केट्टु, कंपक्केट्टु

आतुर (वि.) अधीर, उतावला -- आतुरन्

आतुर (वि.) विकल, बेचैन -- अस्वस्थन्

आत्मकथा (स्त्री.) अपना लिखा जीवन चरित -- आत्मकथ

आत्म-रक्षा (स्त्री.) अपना, बचाव -- आत्मरक्षा

आत्म-विश्वास (पु.) अपने पर विश्वास या भरोसा -- आत्मविश्वास

आत्म-समर्पण (पुं.) अपने आपको किसी के हाथ में सौंपना -- आत्मसमर्पणम्

आत्म-समर्पण (पुं.) हथियार डाल देना -- कीऴटङ्ङल्

आत्महत्या (स्त्री.) अपने हाथों अपना वध, आत्मघात -- आत्महत्या

आत्मा (स्त्री.) शरीर में रहकर उसे जीवित रखने वाली अविनाशी, अभौतिक शक्ति, प्राण -- आत्मावु, जीवन्

आत्मा (स्त्री.) किसी वस्तु आदि का गूढ़, मूल तथा सार भाग -- तत्वम्

आदत (स्त्री.) प्रकृति, स्वभाव -- पतिवुं, स्वभावम्

आदत (स्त्री.) बान, टेव -- रीति, प्रकृति

आदमी (पुं.) मनुष्य -- मनुष्यन्

आदमी (पुं.) वयस्क और प्रौढ़ व्यक्ति -- प्रायपूर्त्तियायवन्

आदर (पुं.) सम्मान, सत्कार, पूज्य भाव -- आदरवु, पूज्यत

आदरणीय (वि.) आदर-योग्य -- सम्मान्यन्

आदर्श (पुं.वि.) अनुकरणीय, श्रेष्ठ -- अनुकरणीयन्

आदर्श (पुं.वि.) नमूना, बानगी -- आदान-प्रदानम्, कोटुक्कल्-वाङ्ङल्

आदि (पुं.) मूल -- आदि

आदि (वि.) पहला -- आद्यत्ते

आदि (अव्य) इसी प्रकार और या बाकी सब भी, इत्यादि, वगैरह -- आदि, तुटङ्डङिय, मुतलाय

आदिवासी (पुं.) किसी देश का मूल निवासी -- आदिवासि

आदिवासी (पुं.) जनजाति का सदस्य -- आदिवासि

आदेश (पुं.) आज्ञा, हुक्म -- आज्ञ, उत्तरवु

आद्याक्षर (पुं.) (कई पदों वाले) नाम के प्रत्येक पद का आरंभिक अक्षर, जो प्रायः हस्ताक्षर आदि के लिए प्रयुक्त होता है -- आद्यक्षरम्, इनिषियल्

आधा (वि.) वस्तु के दो समान भागों में से प्रत्येक -- प्रकृति

आधार (पुं.) नीचे की वह वस्तु, जिसके ऊपर कोई दूसरी वस्तु टिकी या रखी हो -- आधारम्, आश्रयम्

आधार (पुं.) कारण -- कारणम्

आधारभूत (वि.) आधार रूप में स्थित, मूलभूत -- आधिकारिक, प्रामाणिकम्

आधिकारिक (वि.) अधिकारपूर्वक कहा या किया हुआ -- आधिकारिक, प्रामाणिकम्

आधुनिक (वि.) आजकल का , वर्तमान काल का -- आधुनिकम्

आध्यात्मिक (वि.) आत्मा और ब्रह्म से संबंध रखने वाला -- आध्यात्मिकम्

आनंद (पुं.) हर्ष, खुशी -- आनंदम

आनंद (पुं.) म़ौज -- उल्लासं

आना (अ.क्रि) आगमन, दूर से पास पहुँचना -- वरुक

आना (अ.क्रि) कौशल की जानकारी होना -- अरियुक

आप (सर्व) स्वयं, स्वतः खुद -- स्वयम्

आप (सर्व) तुम या वे के स्थान पर प्रयुक्त आदरसूचक शब्द -- ताङ्कळ्

आपसी (वि.) आपस का, पारस्परिक -- परस्परम् उळ्ळ

आभार (पुं.) किसी के उपकार के लिए प्रकट की जाने वाली कृतज्ञता, एहसान -- कृतज्ञत

आभास (पुं.) झलक, छाया -- तोन्रल्

आभास (पुं.) मिथ्याप्रतीति, भ्रम -- तोन्नल्, प्रतीति

आभूषण (पुं.) अलंकार, गहने, जेवर -- आभरणम्

आमुख (पुं.) प्रस्तावना, भूमिका -- आमुखं, प्रस्तावन

आमोद-प्रमोद (पुं.) जो काम केवल चित्त प्रसन्न करने और मन बहलाने के लिए किए जाते हैं -- आमोदम्, उल्लासम्

आय (स्त्री.) पारिश्रमिक, लाभ आदि के रूप में प्राप्त धन, आमदनी -- वरुमानम्, आदायम्

आयकर (पुं.) राज्य की ओर से लोगों की आय पर लगने वाला कर -- आदायनिकुति

आयत (पुं.) चार भुजाओं वाला वह क्षेत्र, जिसकी आमने-सामने की भुजाएं समांतर हों और चारों कोण समकोण हों -- दीर्घचतुरं

आया (स्त्री.) दाई, बच्चों की देखभाल करने वाली सेविका -- आया, धात्रि

आया (स्त्री.) ‘आना’ क्रिया का पूर्ण कालिक/भूतकालिक रूप -- वन्नु

आयात (पुं.) व्यापार के लिए विदेश से माल मँगाने की क्रिया -- इरक्कुमति

आयात (पुं.) विदेश से मँगाया हुआ माल -- हरक्कुमति-च्चरक्क

आयाम (पुं.) लंबाई, विस्तार -- नीळम्, विस्तृति

आयुष्मान् (वि.) दीर्घजीवी, चिरंजीवी -- दीर्घायुष्मान्

आयोजक (वि.) समारोह या कार्यक्रम का प्रबंध करने वाला -- संयोजकन्, कार्यवाहकन्

आरंभ (पुं.) शुरु, श्रीगणेश -- आरंभ

आरती (स्त्री.) किसी मूर्ति के सामने दीपक घुमाना -- दीपाराधन, नीराजनं

आरती (स्त्री.) स्तोत्र वाचन -- देव-स्तुति

आराम (पुं.) सुख, चैन, विश्राम -- सुखम्, विश्राभम्

आराम (पुं.) रोग कम होने या दूर होने की अवस्था -- रोगशांति

आरोप (पुं.) ऊपर या कहीं से लाकर बैठाना या लगाना -- आरोपिक्कल्

आरोप (पुं.) अनुचित या नियम-विरुद्ध कार्य, इल्जाम -- आरोपणम्

आरोह (पुं.) ऊपर चढ़ना, सवार होना -- आरोहम्, कयट्टम्

आरोह (पुं.) नीचे से ऊपर की ओर जाना या बढ़ना -- कयट्टम्

आरोह (पुं.) संगीत में स्वरों का चढ़ाव -- संगीतत्तिले आरोहणम्

आर्थिक (वि.) रूपए पैसे, आय-व्यय आदि से संबंधित -- धनसंबंधमाय

आर्द्र (वि.) गीला, तर, नम -- ननञ्ञ, ईर्प्पमाय, आर्द्रमाच

आलंब (पुं.) सहारा, आधार -- आलंबनम्

आलंब (पुं.) रसनिष्पत्ति में सहायक एक विभाग -- NA

आलसी (पुं.) सुस्त, काहिल -- अलसन्

आलस्य (पुं.) काम करने की अनिच्छा, सुस्ती, शिथिलता -- अलसत

आला (पुं.) दीवार में थोड़ा सा खाली छोड़ा हुआ स्थान जिसमें छोटी मोटी चीज़ें रखी जाती हैं, ताक -- तट्टु, माटम्

आला (पुं.) कारीगरों के काम करने का उपकरण, औजार -- पणियायुधम्

आला (पुं.) डाक्टर का स्टेथोस्कोप -- NA

आला (पुं.) उच्च कोटि का , श्रेष्ठ बड़ा -- उयन्न्, मेत्तरम्, श्रेष्ठमाय

आलोक (पुं.) प्रकाश रोशनी -- प्रकाशम्, वेळिच्चम्

आलोचक (पुं.) गुण दोष आदि का विवेचन करने वाला, समीक्षक -- निरुपकन्, समीक्षकन्

आलोचना (स्त्री.) गुण दोषों का निरुपण या विवेचन, समीक्षा -- निरूपणम्, समीक्ष

आवभगत (स्त्री.) आदर-सत्कार, खातिरदारी, आतिथ्य -- सत्कारम्

आवरण (पुं.) परदा -- मूडुपटम्

आवरण (पुं.) ढक्कन -- अटप्पु

आवरण (पुं.) किसी वस्तु के चारों ओर लिपटा कागज या कपड़ा -- आवरणम्

आवश्यक (वि.) जिसके बिना काम न चल सकता हो, जरूरी -- आवश्यमाय

आवश्यकता (स्त्री.) ऐसी स्थिति जिसमें किसी चीज या बात के बिना काम ही न चल सकता हो, जरूरत -- आवश्यम्

आवश्यकता (स्त्री.) आवश्यक होने की क्रिया या भाव -- आवश्यकत

आवागमन (पुं.) आना-जाना -- पोक्कुवरवु

आवागमन (पुं.) जन्म-मरण का चक्र -- जननवुम् मरणवुम्

आवारा (पुं.) बेकार घूमने-फिरनेवाला -- नाटोटि

आवारा (पुं.) आवांछनीय आचरण वाला, लफंगा -- दुर्न्नट-पटिक्कारन्

आवास (पुं.) रहने का स्थान -- वासस्थलम्

आवाहन (पुं.) अपने पास बुलाने की क्रिया या भाव -- विळिक्कल्, क्षणम्

आवाहन (पुं.) पूजन के समय किसी देवता को मंत्र द्वारा बुलाने की क्रिया -- आवाहनं

आविष्कार (पुं.) किसी अज्ञात वस्तु को खोज निकालना या बनाना, ईजाद -- कण्डुपिटिक्कल्, कण्डुपिटित्तम्

आवृत्ति (स्त्री.) बार-बार होने की क्रिया या भाव -- आवर्त्तिक्कल्

आवृत्ति (स्त्री.) पुस्तक आदि का उसी रूप में फिर छपना -- पतिप्पु

आवेग (पुं.) प्रबल मनोवेग -- आवेगम्

आवेग (पुं.) बिना सोचे-विचारे कुछ कर बैठने की क्रिया -- आवेशम्, उणहम्

आवेदन (पुं.) निवेदन, प्रार्थना -- अपेक्ष

आशय (पुं.) अभिप्राय, तात्पर्य, इरादा -- उद्देश्यम्, आशयम्

आशा (स्त्री.) उम्मीद -- आश, प्रतीक्ष

आशीर्वाद (पुं.) मंगल कामना के लिए बड़ों द्वारा कहे गए शुभवचन, आशिष -- अनुग्रहम्, अशिस्तु

आश्रय (पुं.) शरण, ठिकाना आशीर्वाद (पुं.) सहारा, आवलंब -- शरणं, आश्रयं

आश्वासन (पुं.) कोई काम पूरा करने के लिए दिया जाने वाला वचन -- सांत्वनवचनम् आश्वसि-प्पिक्कल्

आसन (पुं.) बैठने का कोई विशिष्ट ढंग, प्रकार या मुद्रा -- आसनम्

आसन (पुं.) बैठने के लिए कुश आदि का बना हुआ चौकोर टुकड़ा -- इरिप्पुपलक, इरिप्पिठ्म

आसान (वि.) सरल, सुगम -- सुगममाय, एळुप्पमुळ्ळ

आस्तिक (वि.) ईश्वर की सत्ता को मानने वाला -- आस्तिकन्

आस्तिक (वि.) धर्मनिष्ठ -- धार्मिकन्

आस्था (स्त्री.) भक्तिपूर्ण विश्वास -- विश्वासम्, आस्था

आस्वादन (पुं.) स्वाद लेना, चखना -- आस्वादिक्ककल्

आस्वादन (पुं.) रसास्वादन (कविता आदि का) -- आस्वादनम्

आहट (स्त्री.) हल्की आवाज -- कार्लाच्च, नेरियओच्च

आहार (पुं.) खाद्य पदार्थ, भोजन -- आहारमम्

आहुति (स्त्री.) यज्ञ या हवन करते समय सामग्री को अग्नि में डालने की क्रिया -- आहुति

आहुति (स्त्री.) हवन में डाली जाने वाली सामग्री -- आहुति

इंतज़ाम (पुं.) प्रबंध, व्यवस्था -- एर्पाटु, व्यवस्था

इंदराज (पुं.) दर्ज करना, प्रविष्टि -- पतिक्कल्

इकहरा (वि.) एक ही परत वाला -- ओट्टत्ताट्टाय

इकहरा (वि.) पतला -- मेलिञ्ञ

इकाई (स्त्री.) किसी पूरे वर्ग या समूह का ऐसा भाग, जो विश्लेषण के लिए स्वतंत्रया पृथक माना जाता हो -- यूनिट्ट

इकाई (स्त्री.) किसी संख्या में दाईं ओर का पहला अंक या उसका स्थान -- ओट्ट

इक्का (पुं.) दो पहियों वाली एक छोटी गाड़ी जिसमें केवल एक घोड़ा जोता जाता है -- इक्का वण्डि, कुतिर वण्डि

इक्का (पुं.) ताश का एक बूटिवाला पत्ता -- आस् चिट्ट

इक्का दुक्का (वि.) अकेला-दुकेला, कोई-कोई -- ओट्टयुम् तेट्टयुम्

इच्छा (स्त्री.) चाह, कामना -- आग्रहं, इच्छा

इठलाना (अ.क्रि) गर्वसूचक चेष्टाएँ, इतराना -- गर्वु काणिक्कुक्, अहंकरिक्कुक

इतिवृत्त (पुं.) किसी विषय या घटनाओं का काल-क्रमानुसार पूर्ण विवरण -- इतिवृत्तम, संभव-विवरणम्

इठलाना (पुं.) इतिहास -- इतिवृत्तम्

इतिहास (पुं.) व्यक्ति, समाज, विषय देश की महत्वपूर्ण घटनाओं का काल क्रमानुसार वर्णन -- चरित्रम्

इत्र (पुं.) पुष्पसार, अतर -- अत्तर्

इधर (क्रि.) इस ओर, -- इविर्ड

इधर (वि.) इस तरफ, इस स्थान पर -- NA

इनकार (पुं.) न मानने की क्रिया या भाव, अस्वीकृति -- तळ्ळिक्कळयल्

इनाम (पुं.) पुरस्कार, पारितोषिक -- सम्मानम्, पारितोषिकम्

इमारत (स्त्री.) भवन -- केट्टिटम्

इलाका (पुं.) क्षेत्र, प्रदेश -- एला, प्रदेशम्

इलाज (पुं.) उपचार, चिकित्सा -- चिकित्स

इलाज (पुं.) प्रतिकार की युक्ति का उपाय -- उपायम्

इशारा (पुं.) संकेत -- आंग्यम्

इस्तरी (स्त्री.) कपड़े की सिलवट दूर करने या तह बिठाने के लिए लोहे या पीतल का उपकरण -- इस्तिरि

इस्पात (पुं.) विशेष प्रक्रिया से तैयार किया हुआ एक प्रकार का कड़ा और बढ़िया लोहा -- अरुक्कु

ईंट (स्त्री.) साँचे में ढाला मिट्टी का एक छोटा खंड जो दीवार आदि बनाने के काम आता है -- इष्टिक

ईंट (स्त्री.) ताश के चार रंगों में से लाल रंग की चौकोर बूटियों वाला एक पत्ता विशेष -- डैमन् (चीट्ट)

ईंधन (पुं.) जलाने में काम आने वाली/ पेट्रोलियम पदार्थ -- विरकु

ईख (स्त्री.) गन्ना, ऊख -- ईश्वरन्

उँड़ेलना/उडेलना (स.क्रि.) किसी तरल पदार्थ को एक बर्तन से दूसरे में डालना या जमीन पर गिरा देना -- ओळिक्कुक

उकताना (अ.क्रि) ऊबना -- मुषियुक

उकसाना (स.क्रि.) भड़काना, उत्तेजित करना -- प्रेरिप्पिक्कुक, इळक्किविटुक

उक्ति (स्त्री.) किसी की कही हुई बात, कथन, वचन -- उक्ति, सूक्तम्

उखाड़ना (स.क्रि.) जमी, ठहरी या लगी हुई चीज को खींचकर आधार से अलग करना -- परिच्चुमाट्टुक

उगना (अं.क्रि.) उदय होना, निकलना -- उदिक्कुक

उगना (अं.क्रि.) अंकुरित होना -- मुळक्कुक

उगना (अं.क्रि.) उपजना, पैदा होना -- अंकुरिक्कुक, मुळक्कुक

उगलना (स.क्रि.) खाई हुई वस्तु को मुँह से बाहर निकाल देना -- छर्दिक्कुक

उगाना (स.क्रि.) किसी बीज या पौधे को उपजाने की क्रिया -- मुळप्पिक्कुक

उगाना (स.क्रि.) उत्पन्न या पैदा करना -- विळयिक्कुक

उघाड़ना (स.क्रि.) खोलना, अनावृत करना, नंगा करना -- अनावरणम्, चेय्युक, तुरक्कुक उरिक्कुक

उचटना (अं.क्रि.) किसी जमी या चिपकी हुई वस्तु का अपने आधार से अलग होना, छूटना -- इळकुक, वळतुक

उचटना (अं.क्रि.) मन का हट जाना, न लगना, ऊबना -- मनस्सु मारुक, मुषियुक्

उचित (वि.) उपयुक्त -- उचितम्, शरियाय

उचित (वि.) न्यायसंगत, तर्क संगत -- न्यायमाय

उच्च (वि.) ऊँचा -- पोक्कमुळ्ळ

उच्च (वि.) पद आदि में औरों से ऊपर या बड़ा -- उयर्न्न

उच्च (वि.) श्रेष्ठ -- श्रेष्ठमाय

उच्चारण (पुं.) मुँह से स्वर और व्यंजनयुक्त शब्द निकालना -- उच्चारणं

उछल-कूद (स्त्री.) बार-बार उछलने या कूदने की क्रिया -- तुळ्ळिक्क-ळिक्कुक

उछलना (अ.क्रि) वेगपूर्वक ऊपर/आगे की ओर बढ़ना -- कुतिच्चु चाटुक

उछलना (अ.क्रि) अत्यंत प्रसन्न होना, खुशी से फूलना -- अत्यंतम् आह्ळादिक्कुक, संतोषम् कोण्डु निरयुक

उजड़ना (अ.क्रि) किसी वस्तु का जमे हुए स्थान से उखड़ना -- वासशून्य-मावुक

उजाला (पुं.) चाँदनी, प्रकाश, रोशनी -- वेळिच्चम्

उजाला (पुं.) प्रातःकाल होने वाला प्रकाश -- पुलर्वेंट्टम्

उठना (अ.क्रि) गिरे, झुके, बैठे या लेटे होने की स्थिति से खड़े होने की स्थिति में आना -- एळुन्नेल्क्कुक

उठना (अ.क्रि) ऊपर जाना अथवा बढ़ना -- पोतुंक, पोङ्ङ्क

उड़ना (अ.क्रि) पंखों या परों की सहायता से आधार छोड़कर ऊपर उठना और आकाश या वायु में इधर-उधर आना जाना -- परक्कुक

उड़ना (अ.क्रि) प्राकृतिक, रासायनिक आदि कारणों से पदार्थ का धीरे धीरे भाप बन जाना -- इल्लाताकुक

उड़ना (अ.क्रि) गायब या लुप्त हो जाना -- लोपिक्कुक

उतना (वि.) पहले निर्धारित मात्रा में -- अत्रयुं

उतरना (अ.क्रि) किसी व्यक्ति या वस्तु का ऊपर से नीचे आना -- इरङ्ङुक

उतार-चढ़ाव (पुं.) नीचे उतरने और ऊपर चढऩे की अवस्था, क्रिया या भाव -- कयट्टवुम्, इरक्कवुम्

उतार-चढ़ाव (पुं.) किसी वस्तु के मान, मूल्य स्तर आदि का बराबर घटते बढ़ते रहना उतारना (स.क्रि.) ऊपर से नीचे लाना -- ताळेट्टु कोण्डुवरिक

उतारना (स.क्रि.) अलग करना (वस्त्र आभूषण) -- अळिच्चु-वंक्कुक

उतारना (स.क्रि.) पार या दूसरी ओर पहुँचाना (नदी आदि के) -- कर कटत्तुक

उत्कंठा (स्त्री.) कुछ करने की प्रबल इच्छा, चाव -- उत्कंठ, आग्रहम्

उत्कर्ष (पुं.) ऊपर की ओर उठने, खिंचने या जाने की क्रिया या भाव -- उत्कर्षम्

उत्कर्ष (पुं.) पद, मान, संपत्ति, भाव, मूल्य आदि में होने वाली वृद्धि -- अभिवृद्धि

उत्तम (वि.) गुण, विशेषता आदि में सबसे बढ़कर -- उत्तमम्

उत्तराधिकार (पुं.) मृत्यु हो जाने अथवा अपना अधिकार छोड़ देने पर किसी दूसरे को उसकी धन संपत्ति, पद आदि मिलने का अधिकार -- अनंतरावकाशं

उत्तेजना (स्त्री.) किसी व्यक्ति द्वारा बिना समझे बूझे कोई काम करने में उग्रता तथा शीघ्रता से रत होने का भाव -- उत्तेजनम्

उत्पादन (पुं.) उत्पन्न या पैदा करने की क्रिया या भाव -- उत्पादनम्

उत्सव (पुं.) धूमधाम से होने वाला सार्वजनिक आयोजन -- उत्सवम्, आघोषम्

उत्साह (पुं.) उमंग, हौसला -- उत्साहम्

उत्सुक (वि.) मन में तीव्र अभिलाषा रखने वाला -- उत्सुकन्, तत्परन्

उदय (पुं.) उद्भव -- उदयम्

उदय (पुं.) ग्रह, नक्षत्रों, तारों आदि का क्षितिज से ऊपर उठकर आकाश में आना और दृश्य होना -- उदयम

उदार (वि.) खुले हृदय वाला -- तुरन्न हृदयमुळ्, दानशीलन्

उदार (वि.) जो स्वभाव से नम्र और सुशील हो और पक्षपात संकीर्णता का विचार छोड़कर सबके साथ खुले दिल से आत्मीयता का व्यवहार करता हो। -- उदाराशयन्

उदास (वि.) खिन्न,चिंतित -- दुखितन्

उदासीन (वि.) अलग या दूर रहने वाला -- अकन्नि-रिक्कुन्न

उदासीन (वि.) आसक्ति अथवा कामना रहित -- अनासक्तन्

उदासीन (वि.) तटस्थ, विरक्त -- विरक्तन्

उदाहरण (पुं.) नियम, सिद्धांत आदि को स्पष्ट करने के लिए प्रस्तुत तथ्य -- उदाहरणम्

उदाहरण (पुं.) ऐसा आचरण, कृति या क्रिया जो दूसरों को अनुकरण करने के लिए प्रोत्साहित करे -- मातृक

उद्घाटन (पुं.) आवरण या परदा हटाना -- अनावरणम् चैय्यल् तुरक्कुक

उद्घाटन (पुं.) नया कार्य आरंभ करने के समय औपचारिक उत्सव -- उद्घाटनम्

उद्देश्य (पुं.) वह बात, वस्तु या विषय, जिसका ध्यान रखकर कुछ कहा या किया जाए -- उद्दिष्टकार्यम्

उद्धरण (पुं.) किसी ग्रंथ, लेख आदि से उदाहरण, प्रमाण, साक्षी आदि के रूप में लिया हुआ अंश -- उद्धरणम्

उद्यम (पुं.) परिश्रम, मेहनत -- परिश्रमम्, प्रयत्नम्

उद्योग (पुं.) परिश्रम, अघ्यवसाय -- परिश्रमम्

उद्योग (पुं.) काम-धंधा -- तोऴिल्, व्यवसायम्

उद्योग-पति (पुं.) उत्पादन-उपक्रम का स्वामी -- मुतलाळि

उद्योग-पति (पुं.) किसी भी उद्योग का स्वामी -- तोऴिलुटम

उधेड़ना (स.क्रि.) वस्त्रों की सिलाई बुनाई खोलना -- तुन्नल् अळिक्कुक

उधेड़-बुन (स्त्री.) मन की अनिश्चयात्मक स्थिति, उलझन -- चिंताक्कुऴप्पं

उन्नति (स्त्री.) आगे बढ़ने या विकसित होने की प्रक्रिया -- उन्नति

उन्नति (स्त्री.) उच्चता -- पुरोगति

उन्माद (पुं.) मस्तिष्क की असंतुलित अवस्था -- उन्मादम्, ध्रांतु

उन्माद (पुं.) साहित्य में एक संचारी भाव -- उन्मादम्, संचारी भावम्

उन्मूलन (पुं.) जड़ से नष्ट करना -- उन्मूलनम्

उन्मूलन (पुं.) समाप्त करना -- नशिप्पिक्कल्

उपग्रह (पु.) बड़े ग्रह की परिक्रमा करने वाला छोटा ग्रह -- उपग्रहम्

उपग्रह (पु.) किसी ग्रह की परिक्रमा करने के लिए आकाश में छोड़ा जाने वाला यांत्रिक गोला या पिंड -- कृत्रिम उपग्रहम्

उपचार (पुं.) चिकित्सा -- चिकित्स

उपज (स्त्री.) जो उपजा हो, पैदावार, फसल -- विळवु

उपज (स्त्री.) जो बन कर तैयार हुआ हो, उत्पादन -- उत्पादनम्, उत्पन्नम्

उपज (स्त्री.) मन की नई उद्भावना या सूझ -- आशयम्

उपजना (अ.) उगना, अंकुरण -- विळयुक, किळिर्क्कुक

उपजना (अ.) कोई नई बात सूझना -- तोन्नुक

उपजाऊ (वि.) कृषि के लिए उपयुक्त -- विळवुळ्ळ

उपदेश (पुं.) धर्म और नीति के संबंध में विद्वानों द्वारा बताई गई बातें -- उपदेशम्

उपदेश (पुं.) समुचितराय -- उपदेशम्

उपद्रव (पुं.) फसाद, दंगा -- वऴक्कु, कलहम्

उपद्रव (पुं.) हलचल, ऊधम -- बहळम्

उपनगर (पुं.) नगर के आसपास बसा हुआ क्षेत्र, छोटा नगर -- नगरप्रांतम्

उपनाम (पुं.) वास्तविक नामसे भिन्न कवियों लेखकों आदि का स्वयं रखा हुआ कोई दूसरा नाम -- उपनामम्, तूलिकानामम्

उपन्यास (पुं.) साहित्य की एक विधा, जिसमें वास्तविक जीवन से मिलते-जुलते चरित्रों और कार्य कलापों का गद्यात्मक चित्रण हो -- नोवल्, आख्यायिक

उपभोक्ता (पुं.) उत्पादन का प्रयोजक, खपतकार -- उपभोक्तावु

उपभोग (पुं.) किसी वस्तु का व्यवहार में लाना -- उपभोगम्, मुळुवनुम् उपयोगिच्चु तीर्क्कल्

उपमा (स्त्री.) गुणों के आधार पर दो वस्तुओं की समानता, अलंकार विशेष -- उपमिक्कल्, उपम

उपयोग (पुं.) प्रयोग, व्यवहार -- उपयोगम्

उपयोगी (वि.) प्रयोग, में लाए जाने योग्य -- उपयोगमुळ्ळ

उपयोग (पुं.) प्रयोग, व्यवहार -- उपयोगम्

उपयोगी (वि.) प्रयोग, में लाए जाने योग्य -- उपयोगमुळ्ळ

उपलक्ष्य (पुं.) वह बात, जिसे ध्यान में रखकर कुछ कहा या किया जाए -- लक्ष्यम्, उद्देशम्

उपला (पुं.) जलाने के लिए सुखाया हुआ गोबर -- वरळि, चाणकवरळि

उपवन (पुं.) उद्यान, बाग, पार्क -- उद्यानं, उपवनं

उपवास (पं.) किसी धार्मिक-सांस्कृतिक अवसर पर दिन-भर या दिन-रात भोजन न करने की क्रिया -- उपवासम्

उपसंहार (पुं.) अंत, समाप्ति -- उपसंहारम्

उपसंहार (पुं.) किसी प्रकरण, विषय आदि का वह अंतिम अंश जिसमें विषय का सारांश हो -- उपसंहार-प्प्रसंगम्

उपस्कर (पुं.) औज़ार, उपकरण -- उपकरणम्

उपस्थिति (स्त्री) हाज़िरी -- उपस्थिति, हाजर

उपहार (पुं.) सद्भावपूर्वक अथवा किसी अवसर पर किसी को दी जाने वाली कोई वस्तु -- उपहारम्, काळ्चद्रव्यम्

उपहास (पुं.) हँसी, दिल्लगी, खिल्ली, मज़ाक -- उपहासम्

उपाधि (स्त्री) योग्यता, सम्मान आदि की सूचक खिताब, पदवी, डिग्री -- डिग्री, बिरुदम्

उपासक (पुं.) उपासना करने वाला -- उपासकन्

उपासक (पुं.) आराधक -- भक्तन्

उपासना (स्त्री) ईश्वर, देवता आदि की मूर्ति के पास बैठकर किया जाने वाला आध्यात्मिक चिंतन, पूजन, आराधन -- उपासन

उपासना (स्त्री) किसी वस्तु के प्रति अत्यधिक आसक्ति की भावना -- अत्यधिकम् तात्पर्यम्

उपेक्षा (स्त्री) अवहेलना -- उपेक्ष

उपेक्षा (स्त्री) अनादर -- अनादरवु

उबकाई (स्त्री) उलटी कै, मिचली, मितली -- मनम् मरिच्चल्, ओक्कानम्

उबरना (अ.क्रि) उद्धार या निस्तार पाना -- कर मरिच्चलु, ओक्कानम्

उबलना (अ.क्रि) आग पर रखे हुए तरल पदार्थ का फेन के साथ ऊपर उठना -- तिळ्क्कुक

उबलना (अ.क्रि) उत्तेजित होना, आवेश में आना -- आवेशभरितन् आकुक

उभरना (अ.क्रि) नीचे के तल से उठकर या निकलकर ऊपर आना -- पोङ्ङिवरुक

उभरना (अ.क्रि) ऊपर उठकर या किसी प्रकार उत्पन्न होकर अनुभूत या प्रत्यक्ष होना -- प्रत्यक्षप्पेटुक

उमंग (स्त्री) कोई काम करने के लिए प्रेरित करने वाला आनंद या उत्साह -- उत्साहम्

उम्मीदवार (पुं.) किसी पद पर चुने जाने या नियुक्त होने के लिए प्रस्तुत होने वाला या अपने आपको उपस्थित करने वाला व्यक्ति प्रत्याशी -- स्थानार्थि

उर्वर (वि.) उपजाऊ -- फलभू-यिष्टमाय, विळवुळ्ळ

उर्वर (वि.) जिसकी उत्पादन शक्ति अधिक हो (तत्व) -- उत्पादन-शक्तियेरिय

उर्वरक (पुं.) खेतों को उपजाऊ बनाने के लिए डाली जाने वाली रासायनिक खाद -- वळम् (रासवळम्)

उलझन (स्त्री) जिस स्थिति में किसी प्रकार का निश्चय करना बहुत कठिन हो, पेचीदगी -- कुऴप्पम् चिंता-क्कुऴप्पम्

उलझना (अ.क्रि) किसी चीज के अंगों का आपस में दूसरी चीज के अंगों के साथ इस प्रकार फँसकर लिपटना कि सहज में एक दूसरे से अलग न हो सके -- कुरुङ्ङुक, कुळयुक

उलझना (अ.क्रि) झंझट, झगडे आदि में इस प्रकार फंसना कि जल्दी छुटकारा न हो सके -- अकर्प्पटुक,वलयुक

उलटना (अ, स.क्रि) सीध की विपरीत दिशा या स्थिति में जाना या होना -- मरियुक

उलटना (अ, स.क्रि) साधारण स्थिति से विपरीत या विरुद्ध हो जाना या करना -- विपरीत-माकुक

उलटना (अ, स.क्रि) ऊपर का भाग नीचे और नीचे का भाग ऊपर स्थिति में होना -- कीळूमेल् मरियुक

उलटी (स्त्री) कै, वमन -- छर्दि

उलाहना (पुं.) मूल दोष या त्रुटि आदि को रोष या व्यंग्य के साथ जताना -- परिभवम्, उपालंभम्

उलीचना (स.क्रि.) किसी बड़े आधान या पात्र में भरे हुए जल आदि को बर्तन या हाथ से बाहर निकालना या फेंकना -- वेळ्ळम् तेरिप्पिक्कुक

उल्लंघन (पुं.) आज्ञा, नियम, प्रथा, रीति आदि का पालन न करना अतिक्रमण -- उल्लंघनम्

उल्लास (पुं.) आनंद, प्रसन्नता -- उल्लासम्

उल्लेखनीय (वि.) जिसका वर्णन करना आवश्यक या उचित हो -- ऐटुत्तु परयोण्ट, उल्लेखनीय माय

उसूल (पुं.) सिद्धांत -- तत्वम, सिद्धांतम

उस्तरा (पुं.) बाल मूँड़ने का छुरा -- क्षौरक्कत्ति

ऊँघना (अ.क्रि) झपकी लेना, नींद की आरंभिक अवस्था -- उपक्कम् तूङ्ङूक

ऊँचा (वि.) आधार या तल से ऊपर उठा हुआ -- उयर्न्न, पोङ्ङिय

ऊँचा (वि.) लंबा -- नीण्ट

ऊँचा (वि.) पद, मर्यादा आदि की दृष्टि से दूसरों से आगे बढ़ा हुआ -- उयर्न

ऊँचाई (स्त्री) ऊँचे होने की अवस्था या भाव -- उयर्च्च, पांक्कम्

ऊँचाई (स्त्री) गौरव, बड़ाई -- वलिप्पम्, महत्वम्

ऊपर (अव्य.) आकाश की ओर, ऊर्ध्व दिशा में -- मुकळिल्, मेल्

ऊपर (अव्य.) किसी के आधार या सहारे पर -- एतिनेये-ङ्किलुं आश्रयिच्चुँ

ऊपर (वि.) औरों से बढ़कर, श्रेष्ठ, उत्तम -- श्रेष्ठमाय

ऊपर (वि.) अधिक, ज्यादा -- अधिकम्

ऊबना (अ.क्रि) किसी वस्तु विशेष में रुचि न रह जाना, मन में विरक्ति उत्पन्न होना -- मुषियुक

ऊष्मा (स्त्री) गरम होने की अवस्था, गुण या भावः गरमी, ताप -- उष्मावूं, चूटु

ऊसर (पुं.) रेत की प्रधानता वाली भूमि, जो खेती के लायक न हो -- तरिशाय, विळविल्लात्त

ऊहापोह (पुं.) अनिश्चय की दशा में होने वाला तर्क वितर्क या सोच विचार, उधेड़-बुन -- ऊहापोहम्

ऋण (पुं.) उधार, कर्ज -- कटम्

ऋण (पुं.) किसी का किया हुआ उपकार, एहसान -- कटप्पाटु

ऋण (पुं.) घटाने या बाकी निकालने का चिह्न् (-) -- न्यूनचिह्नम्

ऋणदाता (वि.) ऋण देने वाला -- कटम् कोटुत्तवन्, उत्तमर्णन्

ऋतुराज (पुं.) बसंत ऋतु -- वसंतम्, ऋतुराजन्

ऋषि (पुं.) वेद-मंत्रों का प्रकाश करने वाले महापुरुष या मंत्र द्रष्टा -- ऋषि, मुनि

ऋषि (पुं.) आध्यात्मिक और भौतिक तत्वों का साक्षात्कार करने वाला -- ऋषि, मुनि

एकता (स्त्री.) ऐक्य का भाव -- ऐक्यम्

एकता (स्त्री.) समानता -- साद्श्यम्, साम्यम्

एकत्र (वि.) इकट्ठा, जमा -- ओन्निच्चु

एकदम (क्रि.वि.) तुरंत -- उटन्

एकदम (क्रि.वि.) बिल्कुल -- तिकच्चुम्

एकनिष्ठ (वि.) अनन्य भक्त -- एकनिष्ठनाय

एकनिष्ठ (वि.) एकाग्रचित्त -- एकाग्रचित्तन् मनस्सु वेच्चु प्रवर्त्तिक्कुन्न

एकमत (वि.) एक ही तरह की राय रखने वाला -- एकाभि-प्रायमुळ्ळ

एकमत (पुं.) मत की एकता, मतैक्य -- एककण्ठयम्

एकमात्र (वि.) अकेला, एक ही -- एकमात्रम्, ओर्राट्ट, ओरे ओरु

एकांत (वि.) निर्जन, सूना -- एकांतमाय, विजनमाय

एकांत (पुं.) निर्जन स्थान -- विजन प्रदेशम्

एकाकी (वि.) अकेला -- ओट्ट, एकाकि

एकाग्र (वि.) तन्मय, दत्तचित्त -- एकाग्रमाय

एकाधिकार (पुं.) संपूर्ण स्वामित्व -- एकाधिकारम्, मोणोपळि

ऐंठन (स्त्री.) मरोड़ -- चुळि, पिरि, पिरिमुरुक्कम्

ऐंठना (अ.क्रि.) बल पड़ने के कारण मुड़ना या संकुचित होना -- पिरियुक

ऐंठना (अ.क्रि.) अकड़ दिखाना -- गर्वु काणिक्कुक

ऐंठना (स.क्रि.) मरोड़ना -- पिरि मुरुक्कुक, पिरिक्कुक

ऐंठना (स.क्रि.) धोखा देकर लेना -- चतितक्कुक

ऐनक (स्त्री.) चश्मा -- मूक्कु कण्णाटि, कण्णाट

ऐश्वर्य (पुं.) धन-संपत्ति, वैभव -- ऐश्वर्यम्

ऐश्वर्य (पुं.) प्रभुत्व, शक्ति -- प्रभुत्वम्, अधिकारम्

ओजस्वी (वि.) प्रभावशाली, तेजस्वी -- ओजस्वियाय

ओजस्वी (वि.) शक्तिशाली -- बलवान्

ओझल (वि.,) अदृश्य, छिपा हुआ -- मरञ्ञ,

ओझल (पुं.) NA -- काणाताय

ओझा (NA) भूत प्रेत आदि झाड़ने वाला व्यक्ति -- मंत्रवादि

औझा (NA) ब्राह्मणों की एक उप जाति -- ओरु ब्राह्मणजाति

ओटना (स.क्रि.) कपास के बिनौले अलग करना -- एञ्ञि कटयुक

ओढ़ना (स.क्रि.) किसी कपड़े आदि से बदन ढकना -- पुतक्कुक

ओढ़ना (स.क्रि.) जिम्मा लेना -- चुमतल एल्क्कुक

ओढ़ना (पुं.) तन ढकने के लिए ऊपर से डाला जाने वाला वस्त्र -- पुतप्पु

ओर (स्त्री) दिशा, तरफ -- नेर्क्कु

ओर (स्त्री) पक्ष -- वशम्

ओला (पुं.) वर्षा में गिरने वाले बर्फ के छोटे छोटे टुकड़े -- आलिप्पळ्म्

ओस (स्त्री) वातावरण में फैली हुई भाप, जो जलकण रूप में पृथ्वी पर गिरती है -- मञ्ञुतुळळि

ओहदा (पुं.) किसी कर्मचारी या कार्यकर्ता का पद -- स्थानम्, पदवि

औचित्य (पुं.) उचित होने की अवस्था या भाव, उपयुक्तता -- औचित्यम्

औज़ार (पुं.) हथियार, उपकरण -- उपकरण, पणियायुधम्

औटाना (स.क्रि.) किसी तरल पदार्थ को उबालकर या खौला कर गाढ़ा करना -- काच्चिक्कु-रुक्कुक

औद्योगिक (वि.) उद्योग-संबंधी -- व्यवसायिकं

औद्योगिक (वि.) वस्तुएँ तैयार करने के काम से संबंध रखने वाला -- तोऴिल्,

औद्योगी-करण (पुं.) नए-नए कल-कारखाने स्थापित करना -- व्यवसाय-वत्करणम्

औपचारिक (वि.) उपकार-संबंधी -- औपचारिकम्

औपचारिक (वि.) दिखावटी -- औपचारिकम्

औपचारिकता (स्त्री) औपचारिक होने की अवस्था, गुण या भाव -- औपचारिकत्वम्

औपचारिकता (स्त्री) दुनियादारी -- नाटटुनटप्पु

और (योजक (अव्य)) दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ने वाला शब्द -- उम्

और (वि.) दूसरा -- मट्टोरु, मट्टे

और (क्रि.वि.) अधिक -- कूटुतल्

औरत (स्त्री) स्त्री, महिला -- स्त्री, पेण्णु

औरत (स्त्री) पत्नी -- भार्य

औषधालय (पुं.) दवाखाना, चिकित्सालय -- औषधालयम्, आशुपत्रि

औषधालय (पुं.) रोग नाशक जड़ी बूटी -- पच्चिल मरुन्नु

औसत (पुं./वि.) मध्य, बीच का -- शराशरि

औसत (पुं./वि.) साधारण सामान्य -- साधारणमाय

कंगाल (वि) अति निर्धन -- दरिद्न्

कंघा (पुं.) बाल झाड़ने या सँवारने का एक उपकरण -- चिप्पु

कंजूस (वि.) धन संग्रह के लालच में आवश्यक वस्तुओं पर भी खर्च न करने वाला (व्यक्ति) कृपण -- पिशुक्कन्

कंठ (पुं.) गला -- कळुत्तु

कंठ (पुं.) गले से निकला हुआ स्वर -- स्वरम्

कंधा (पुं.) मनुष्य के शरीर की बाँह का वह ऊपरी भाग या जोड़, जो गले के नीचे धड़ से जुड़ा रहता है -- तोळ्

कँपकँपी (स्त्री.) भय, शीत आदि के कारण शरीर में होने वाला कंपन -- विरयल्

कंबल (पुं.) मोटी ऊनी चादर, जो ओढ़ने के काम आती है -- कंपिळि

कई (वि.) एकाधिक -- अनेकम्

कई (वि.) कुछ -- पल

कक्ष (पुं.) किसी इमारत का भीतरी भाग, कमरा या खंड -- मुरि

कक्षा (स्त्री) दर्जा, श्रेणी -- क्ळास्

कचहरी (स्त्री.) न्यायालय, अदालत -- कच्चेरि, कोटति

कचोटना (अ.क्रि.) पीड़ा या वेदना होना -- नोवुक, नोपरप्पेटुक

कच्चा (वि.) खाद्य पदार्थ जो पका न हो, अधपका -- वेवात्त, पळक्कात्त, पच्च

कटघरा (कठघरा) (पुं.) काठ का जंगलेदार घेरा -- कूटुतल्

कटघरा (कठघरा) (पुं.) कचहरी में वह स्थान, जिसमें अभियुक्त खड़े होते हैं -- साक्षिक्कूटु

कटार (स्त्री.) छोटी, छुरी -- कठारि

कटु (वि.) जिसके स्वाद में कड़वापन हो -- कय्प्पुळ्ळ, चवर्प्पुळ्ळ

कट्टर (वि.) पक्का, दृढ़, निश्चयी, सिद्धांतवादी -- उरच्च, याथास्थिति-कनाय

कठपुतली (स्त्री.) काठ (लकड़ी) की बनी हुई पुतली, जिसे धागे या तार की सहायता से नचाया जाता है -- मरप्पाव

कठिन (वि.) जो आसानी से न हो सके, मुश्किल -- कठिनम्

कठोर (वि.) कड़ा, सख्त -- कटुप्पमाय

कठोर (वि.) निर्दयी, निष्ठुर -- दयविल्लात्त

कड़कना (अ.क्रि) कड़कड़ का शब्द होना -- कयर्क्कुक

कड़कना (अ.क्रि) रोषपूर्ण तेज आवाज में बोलना -- NA

कड़वा (वि.) स्वाद में कसैला या कटु -- कैप्प-रसमुळ्ळ

कडवा (वि.) कटु प्रकृति का -- शुण्ठियुळ्ळ

कडवा (वि.) अप्रिय -- अप्रियमाय

कड़ा (पुं.) धातु का मोटा छल्ला -- कटुत्त

कढ़ाई (स्त्री.) बेलबूटे निकालने का या बनाने का काम -- चित्रप्पणि, सूचिवेल

कतरन (स्त्री.) कपड़े कागज आदि के छोटे छोटे रद्दी टुकड़े -- कष्णम्, वेट्टुतुण्टु

कतरना (स्त्री.) कपड़े कागज आदि को केंची से काटना -- कत्रिक्कुक

कतरनी (स्त्री.) कैंची -- कत्रिक

कतराना (अ.क्रि.) बचना -- ओऴिञ्ञु मारुक

कतार (स्त्री.) पंक्ति -- वरि, पंति

कत्था (पुं.) खैर की लकड़ी का सत जो पान में खाया जाता है। -- कत्थ

कथनी (स्त्री.) कही हुई बात, उक्ति -- परच्चिल्, वाक्कु

कथा (स्त्री) किस्सा, कहानी -- कथ चेरुकय

कथा (स्त्री) पौराणिक आख्यान -- कथाप्रसंगम्, हरिकथ

कथानक (पुं.) किसी साहित्यिक रचना की कथा-वस्तु -- कथावस्तु

कद (पुं.) (व्यक्ति की) ऊँचाई -- पोक्कम्, उयरे

कनक (पुं.) सोना, स्वर्ण -- स्वर्णम्

कनक (पुं.) धतूरा -- उम्मत्तै

कन्यादान (पुं.) वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कन्या को वर को सौंपना -- कन्याकादानम् (विवाहम्)

कपट (पुं.) छलपूर्ण आचरण, दुराव -- कपटम्

कपट (पुं.) धोखा -- चति

कपड़ा (पुं.) वस्त्र, वसन -- वस्त्रम्, तुणि

कपड़ा (पुं.) पहनावा, पोशाक -- वेष्म्

कपाट (पुं.) किवाड़, दरवाजे का पल्ला -- कतकु

कपाट (पुं.) दरवाजा, द्वार -- वातिल्

कपास (स्त्री.) एक पौधा जिसके ढ़ौढ़ (फल) में से रुई निकाली जाती है -- पञ्ञि, परुत्ति

कपूत (पुं.) बुरे आचरण वाला पुत्र, व्यसनी पुत्र -- मुटिवनाय पुत्रन्

कपूर (पुं.) सफेद रंग का एक सुगंधित घन पदार्थ, जो हवा में रखने से भाप बन कर उड़ जाता है -- कर्पूरम्

कपोल (पुं.) गाल -- कपोलम्, कविळ्

कफन (पुं.) शव को लपेटने का कपड़ा -- शवक्कोटि

कब (क्रि.वि.) किस समय -- ऐप्पोळ्

कबाड़ी (पुं.) टूटी-फूटी या पुरानी चीजें खरीदेने और बेचने वाला -- आक्रिक्कारन्

कबूलना (स.क्रि.) स्वीकार करना -- स्वीकारिक्कुक

कब्जा (पुं.) अधिकार -- अवकाशम्

कब्रिस्तान (पुं.) शव दफनाने का स्थान -- कबरिटम्, सेमित्तेरि

कभी (क्रि.वि.) किसी समय, किसी अवसर पर -- एप्पोळेङ् किलुं

कमंडल (पुं.) संन्यासियों का जलपात्र -- कमंडलम्, किण्टि

कम (वि.) परिमाण, मात्रा, संख्या में थोड़ा -- कुरवाय

कमजोर (वि.) दुर्बल, असमर्थ -- दुर्बलन्

कमर (स्त्री.) शरीर का मध्य भाग, कटि -- अर

कमरबंद (पुं.) कमर का एक आभूषण -- अरप्पट्ट

कमरा (पुं.) कक्ष, कोठरी -- मुरि

कमल (पुं.) तालाबों में उगने वाला एक प्रसिद्ध फूल -- कमलम्, तामर

कमान (स्त्री.) धनुष, शरासन -- विल्लु

कमाना (स.क्रि.) उपार्जन करना -- संपादिक्कुक

कमी (स्त्री.) कम होने की स्थिति या भाव -- कुरुवु

कमी (स्त्री.) त्रुटि -- कुट्टम्

कमी (स्त्री.) अभाव -- अभावं, इल्लाय्क

कर (पुं.) हाथ -- कै

कर (पुं.) सरकार द्वारा जनता से उगाहा हुआ धन -- तेरिगे, कर

करघा (पुं.) कपड़ा बुनने का यंत्र -- तरि

करना (स.क्रि.) कार्य का संपादन -- चेय्युक

करनी (स्त्री.) कार्य, कर्म, आचरण -- प्रवृत्ति

करनी (स्त्री.) राज-मिस्त्री का एक औजार -- कुलैरु

करवट (स्त्री.) पार्श्व के बल बैठने-लेटने की स्थिति -- (शरीरत्तिन्ट) वशं

करारा (वि.) कुरकुरा -- करुमुरेयुळ्ळ

करारा (वि.) तेज, उत्कट, उग्र -- उग्रमाय, शक्तियाय

कराहना (अ.क्रि.) पीड़ा या वेदना का व्यथा-सूचक शब्द -- वेदन, कोण्टु

करुण (वि.) दुखद -- करुणमाय

करुण (वि.) साहित्य में एक रस -- करुण रसम्

करोड़पति (वि.) करोड़ों की संपत्ति वाला -- कोटीश्वरन्

कर्ज (पुं.) ऋण -- कटम्

कर्तव्य (पुं.) धर्म -- कर्तव्यम्, कटम

कर्तव्य (पुं.) विधिसम्मत कार्य -- कर्तव्यं, कटम

कर्त्ता (पुं.) रचयिता, निर्माता -- कर्त्तावु, निरमातावु

कर्त्ता (पुं.) व्याकरण में पहला कारक -- कर्त्तावु

कर्त्ता (पुं.) गृहस्वामी -- कारणवन्

कर्त्ता-धर्त्ता (पुं.) वह व्यक्ति, जिसको किसी कार्य या विषय के सभी अधिकार प्राप्त हों -- नटत्तिप्पुकारन्

कर्म (पुं.) काम, कार्य -- जोलि

कर्म (पुं.) पूर्व जन्म के कार्य -- पूर्वकर्म्मम्

कर्म (पुं.) धार्मिक कार्य -- मतपरमाय कर्मम्

कर्म (पुं.) हिंदी व्याकरण में दूसरा कारक -- (व्याकरण) कर्मम्

कर्मठ (वि.) मेहनती, अध्यवसायी -- परिश्रमियाय

कलंक (पुं.) दाग, धब्बा -- पाटु अटपाळ्प्

कलंक (पुं.) लांछन, निंदा -- कळंकम्

कल (क्रि.वि.) आज के ठीक पहले का दिन -- इन्नले

कल (क्रि.वि.) आज के ठीक बाद आने वाला दिन -- नाळे

कल (क्रि.वि.) चैन, आराम -- शांति

कल (स्त्री.) मशीन, यंत्र, पुर्जा -- यंत्रम्

कलई (स्त्री.) सफेद रंग का प्रसिद्ध खनिज पदार्थ, राँगा -- वेळुत्तीयम्

कलई (स्त्री.) सफेदी -- वेळ्ळ पूशल्

कलफ (पुं.) नए धुले कपड़ों पर की जाने वाली चावल, अरारोट की माँड -- कञ्ञि

कलम (स्त्री.) लेखनी -- पेन

कलम (स्त्री.) पेड़-पौधों की टहनियों से बनाया गया नया पौधा -- ओट्टुत्तै

कलरव (पुं.) पक्षियों की चहचहाट -- कळरवम्

कलश (पुं.) घड़ा, कलसा -- कलशम्

कलश (पुं.) मंदिरों आदि के शिखर पर लगा घड़ेनुमा कंगूरा -- ताऴिकक्कुटम्

कलह (पुं.) झगड़ा, विवाद -- कलह्म्

कला (स्त्री.) हुनर, आर्ट -- कल

कला (स्त्री.) चंद्र या सूर्य का अंश -- कल, चंद्रक्कल

कलाकार (पुं.) कला-साधक -- कलाकारन्

कलाबाजी (स्त्री.) सिर नीचा करके उलट जाने की क्रिया या खेल -- तलकुत्ति मारिच्चिल्, कुट्टिक्करणम्

कलियुग (पुं.) पुराणानुसार चार युगों में से चौथा युग -- कलियुगम्

कली (स्त्री.) बिना खिला फूल -- पूर्माट्ट

कलुष (पुं.) मलिनता, गंदगी -- पापम्, पातकम्

कलेजा (पुं.) यकृत, जिगर -- नेञ्बु

कलेजा (पुं.) जीवट, साहस -- तंटेटम्

कल्पना (स्त्री.) अन्तःकरण मे अवास्तविक वस्तुओं के स्वरूप को उपस्थित करना -- संकल्पम्

कल्प-वृक्ष् (पुं.) मानव-इच्छाओं को पूर्ण करने वाला देव-लोक का एक वृक्ष -- कल्पवृक्षम्

कल्याण (पुं.) हित, भलाई -- नन्म, समृद्धि

कवि (पुं.) कविता या काव्य का रचयिता -- कवि

कविता (स्त्री.) लय प्रधान तथा शब्द-बद्ध साहित्यिक रचना -- कवित

कष्ट (पुं.) पीड़ा -- कष्टप्पाटु

कष्ट (पुं.) मुसीबत -- कष्टप्पाटु

कष्ट (पुं.) मेहनत, श्रम -- आयासम्

कसना (स.क्रि.) बंधन कड़ा करना -- मुरुक्कुक

कसना (स.क्रि.) कसौटी पर सोने की जाँच करना, परखना -- माटटरक्कुक

कसबा (कस्बा) (पुं.) छोटा शहर -- चेरिय पट्टणम्, पट्टण प्रांते

कसम (स्त्री.) शपथ -- शपथम्

कमर (स्त्री.) कमी, न्यूनता -- कुरवु

कसरत (स्त्री.) व्यायाम -- व्यायामम्

कसाई (पुं.) पशुओं आदि की हत्या करने वाला, बूचड़, वधिक -- कशाप्पुकारन्

कसूर (कुसूर) (पुं.) दोष, अपराध -- कुट्टम्, अपराधम्

कसैला (वि.) आँवले, फिटकरी आदि के स्वाद वाला -- चवर्प्पुळळ

कसौटी (स्त्री.) सोना परखने का काला पत्थर -- उरकल्लु

कसौटी (स्त्री.) मूल्यांकन के मानक आधार -- माट्टु

कस्तूरी (स्त्री.) एक विशेष नर मृग की नाभि के पास की गाँठ में पाया जाने वाला सुगंधित पदार्थ -- कस्तूरि

कहकहा (पुं.) जोर की हँसी, ठहाका -- पोट्टिच्चिरि

कहना (स.क्रि.) बोलना, बताना -- परयुक

कहना (पुं.) कथन, बात -- परच्चिल्

कहाँ (क्रि.) किस स्थान पर -- ऐविटे

कहानी (स्त्री.) कथा, किस्सा -- कथ

कहानी (स्त्री.) मनगढ़ंत बात -- केट्टुकथ

कहावत (स्त्री.) लोक प्रचलित कथन या वाक्य -- पऴंचोल्लु

कांखना (अ.क्रि.) मल-त्याग के समय आँतों या पेट की वायु को दबाना -- मुक्कुक, मुरळुक

कांखना (अ.क्रि.) परिश्रम का काम करते समय ऊँह-आह की ध्वनि करना -- मुरळुक

काँच (पुं.) शीशा -- कण्णाटि

काँटा (पुं.) पेड़-पौधों की डालियों पर निकले नुकीले और कड़े अंकुर कंटक -- मुळ्ळु

काँटा (पुं.) तराजू -- त्रास्

काँटा (पुं.) एक उपकरण, जिससे चीजें उठाकर खाई जाती हैं -- मुळ्ळु (फोर्क)

कांति (स्त्री.) चमक, आभा -- सौंदर्यम्

कांति (स्त्री.) शोभा, सौंदर्य -- सौंदर्यम्

काँपना (अ.क्रि.) क्रोध, भय, शीत आदि से शरीर का रह-रह कर हिलना -- विरक्कुक

कागज (पुं.) सन, बाँस, चीथड़े आदि की लुगदी से बना पत्र -- कटलासु

काट-छाँट (स्त्री.) फालतू अंश काट कर अलग करने की क्रिया या भाव -- चेत्तिमिनुक्कल्, वेट्टिच्चुरुक्कल्

काटना (स.क्रि.) औजार या शस्त्र से किसी वस्तु के टुकड़े करना -- कत्रिक्कुक, वेट्टुक

काटना (स.क्रि.) डंक या दाँत गड़ा कर घाव करना -- कटिक्कुक

काटना (स.क्रि.) खंडन करना, गलत ठहराना -- खंडिक्कुक

काठ (पुं.) लकड़ी, काष्ठ -- मरं, तटि

काठ (पुं.) ईंधन -- विरकु

काढ़ना (स.क्रि.) उकेरना, नक्कासी करना -- कोत्तुपणि

काढ़ना (स.क्रि.) किसी वस्तु के भीतर से कोई चीज बाहर निकालना -- पुरत्तेटुक्कुक

कातना (स.क्रि.) रूई, ऊन, रेशम आदि बट कर धागा बनाना -- नूल्क्कुक

काना (वि.) जिसकी एक आँख खराब या विकृत हो -- ओट्टक्कण्णन्

काना (वि.) कीड़ा लगा फल, सब्जी -- पुळ्क्कुत्तुळ्ळ

कानून (पुं.) राज्य नियम, विधि -- नियमम्

कानून (पुं.) सर्वमान्य नियम या रूढ़ियाँ -- समूह्य संप्रदायम्

काफी (वि.) पर्याप्त, यथेष्ट -- वेण्टत्र

काम (पुं.) कार्य, कृत्य -- कार्यम्

काम (पुं.) धंधा, व्यापार, नौकरी -- जोलि

काम (पुं.) इच्छा, अभिलाषा, कामना -- आग्रहम्, कामन

कामधेनु (स्त्री) कामनाएँ पूरी करने वाली पुराण-प्रसिद्ध गाय -- कामधेनु

कामना (स्त्री.) अभीष्ट, हार्दिक इच्छा -- अभिलाषम्

कामयाब (वि.) सफल -- सफलन्

कायम (वि.) स्थिर, पक्का, दृढ़ -- स्थिरमाय

कायर (वि.) डरपोक -- भीरु

कायाकल्प (पुं.) काया शुद्धि की क्रिया -- कायाकल्पम्, आमूल परिवर्तनम्

कारखाना (पुं.) व्यापारिक दृष्टि से बड़ी मात्रा में वस्तु निर्माण की शाला -- तोऴिल् शाल, व्यवसायशाल, फैक्टरि

कारण (पुं.) हेतु, उद्देश्य, प्रयोजन, वजह -- कारणम्

कारण (पुं.) प्रेरक घटना या परिस्थिति -- कारणम्

कारतूस (पुं.) बंदूक, रिवाल्वर आदि में रखकर चलाईं जाने वाली धातु, दफ्ती आदि की बनी हुई खोली जिसमें धातु की गोली और बारूद भरा होता है -- तोट्ट

कारस्तानी करिस्तानी (स्त्री) हानि पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया कोई काम, चालबाजी -- सूत्रम्, चातुर्यम्

कारस्तानी करिस्तानी (स्त्री) करतूत -- अनावश्य प्रवृत्ति

कारावास (पुं) बंदीगृह में रहने का दंड -- तटवुशिक्ष

कारीगर (पुं.) रचना या मरम्मत करने वाला -- तोऴिलाळि शिल्पि

कार्य (पुं.) काम -- कार्यम्

कार्यकर्ता (पुं.) काम करने वाला व्यक्ति, कर्मचारी -- प्रवर्तकन्, उद्योगस्थन्

कार्य-कारिणी (स्त्री.) संस्था आदि का कार्य चलाने वाली समिति -- प्रवर्तक समिति, निर्वाहक समिति

कार्यक्रम (पुं.) कार्य संपादन विवरणिका -- कार्यपरिपाटि

कार्यक्रम (पुं.) उक्त सूची के अनुसार होने वाला कार्य -- कार्यपरिपाटि

कार्य-पालिका (स्त्री.) नियमों का पालन सुनिश्चित करने वाला शासकीय विभाग -- एक्सिक्यूटीव

कार्यवाही (स्त्री) कृत कार्य का विस्तार से उल्लेख -- नटपटि

कार्यालय (पुं) दफ्तर -- कार्यालयम्, आप्पीस्

काल (पुं.) समय -- कालम्, समयम्

काल (पुं.) मौत, मृत्यु -- कालम्, मरणम्

काल (पुं.) क्रियाओं से सूचित वह तत्व, जिससे किसी घटना या बात के घटित होने का समय ज्ञात होता है -- कालम् (वर्तमान कालम् मुतलायव)

काला (वि.) जो काजल के रंग का हो, कृष्ण, श्याम -- करुत्त

काला (वि.) जिसमें प्रकाश न हो, अंधकारपूर्ण -- प्रकाशम् इरुण्ट

काला (वि.) अनुचित, कलंकित, लांछित -- NA

काला बाजार (पुं.) कानून-विरोधी व्यापार -- कळ्ळ-क्कंपोळम्

कालीन (पुं.) मोटा बिछावन, गलीचा -- कार्पेट्, परवतानि

कालीन (वि.) काल विशेष से संबंधित -- कालत्तिलुळ्ळ

काल्पनिक (वि.) मनगढ़ंत, कल्पित -- ऊहाधिष्ठितम्, काल्पनिकम्

काव्य (पुं.) साहित्यिक रचना -- काव्यम्

काश्तकार (पुं.) किसान, खेतिहर -- कर्षकन्

किताब (स्त्री.) पुस्तक -- ग्रंथम्, पुस्तकम्

किनारा (पुं.) अंतिम छोर, सिरा -- कर, ओरम्

किनारा (पुं.) नदी या समुद्र का छोर, तट -- तीरम्, तटम्

किफायत (स्त्री.) अनावश्यक व्यय में कटौती -- चिलवुचुरु क्कल्

किरकिरा (वि.) महीन, कंकड़, बालू आदि से युक्त वस्तु -- करटु

किराना (पुं.) पंसारी की दुकान में मिलने वाला सामान -- पल व्यंजनम्

किराया (पुं.) भाड़ा -- वाटक

किराया (पुं.) अचल संपत्ति के उपयोग के बदले में देय धन -- वाटक

किरायेदार (किराएदार) (पुं.) अचल संपत्ति किराए पर लेने वाला व्यक्ति -- वाटकक्कारन्

किलकारी (स्त्री.) बच्चे की हर्ष-ध्वनि -- किलकिलारवं

किला (पुं.) दुर्ग, गढ़ -- कोट्ट, दुर्गम्

किवाड़ (पुं.) दरवाजे का पल्ला, कपाट -- कतकु

किशोर (वि.) ग्यारह से पंद्रह वर्ष तक की अवस्था का बालक -- किशोरन्

किसान (पुं.) कृषक -- कर्षकन्

किस्त (स्त्री.) निश्चित समय पर दिए जाने वाले ऋण का एक भाग -- किस्त्, तवण, गडु

किस्म (स्त्री.) प्रकार -- तरम्

किस्सा (पुं.) कहानी -- कथ

कीचड़ (पुं.) पानी मिली धूल, पंक, कर्दम -- चेळि

कीट (पुं.) कीड़ा -- कीटम्, पुळु

कीटाणु (पुं.) बहुत छोटे-छोटे कीड़े -- कीटाणु

कीटाणु (पुं.) सूक्ष्म कीट, विषाणु -- रोगाणु

कीड़ा (पुं.) उड़ने या रेंगने वला छोटा जंतु कीट -- पुळु

कीमत (स्त्री.) दाम, मूल्य -- विल

कीमत (स्त्री.) महत्व -- विल मत्तिप्पु

कीमती (वि.) अधिक कीमत या मूल्य का, मूल्यवान -- विलयेरिय

कीमती (वि.) महत्वपूर्ण -- प्रधानर्प्पट्ट

कीर्ति (स्त्री.) यश, ख्याति -- कीर्ति

कुंज (पुं.) झाड़ियों, लताओं के समूह -- निकुंजं वळ्ळिक्कुटिल्

कुंजी (स्त्री) चाबी, ताली -- ताक्कोल

कुंजी (स्त्री) कठिन पुस्तक के अर्थ स्पष्ट करने वाली पुस्तक -- पठनसहायि, गैडु

कुंभ (पुं.) धातु, मिट्टी, आदि का पात्र, घड़ा कलश -- कुटम्

कुंभ (पुं.) ज्योतिष में ग्यारहवीं राशि -- कुंभ

कुंभ (पुं.) प्रति बारहवें वर्ष मनाया जाने वाला एक प्रसिद्ध पर्व -- कुंभ मेळ

कुकर्म (पुं.) बुरा काम, निंदनीय कर्म -- दुष्कर्म

कुचक्र (पुं.) हानि पहुँचाने के लिए बनाई गई योजना, साजिश -- गूढ़ालोचन

कुचलना (स.क्रि.) व्यक्ति या वस्तु को पैर से रौंदना -- नशिप्पिच्चु-कळयुळ

कुचलना (स.क्रि.) आघात, प्रहार से दबाना -- मर्दिच्चवशना क्कुक

कुछ (वि.) अल्प, कम, थोड़ा-सा -- कुरुच्चु, अल्पं

कुछ (क्रि.वि.) अज्ञात, अनिर्दिष्ट या अनिश्चित परिमाण, मात्रा या रूप -- कुरच्चु

कुछ (सर्व) कोई अज्ञात अनिर्दिष्ट या अनिश्चित वस्तु या बात -- एतो

कुटिया (स्त्री.) घास-फूस की बनी झोंपड़ी, कुटी -- कुटिल्

कुटिल (वि.) टेढ़ा -- वळञ्ज, वक्रमाय

कुटिल (वि.) मन में छल, कपट, द्वेष आदि रखने वाला कपटी, दुष्ट -- दुष्टन्, कपटशालि

कुटीर-उद्योग (पुं.) घरेलू स्तर पर वस्तुओं का उत्पादन -- कुटिल् व्यवसाय्म्

कुटुंब (पुं.) परिवार -- कुटुंबम्

कुढ़ना (अ.क्रि.) मन ही मन दुखी और विकल होना -- मनस्सुरुकुक

कुतरना (स.क्रि.) दाँत से छोटे-छोटे टुकड़े करना -- कटिच्चु-पोट्टिक्कुक

कुतूहल (पुं.) जिज्ञासा -- कुतुहलम्, कौतुकम्

कुतूहल (पुं.) आश्चर्य -- आश्चर्यम्

कुप्पी (स्त्री) तेल, चिकनाई आदि डालने के लिए छोटा पात्र -- कुप्पि

कुबड़ा (पुं.वि) पीठ की हड्डी के मुड़ जाने से ग्रस्त व्यक्ति -- कूनन्

कुमकुम (पुं.) रोली -- कुंकुमम्

कुमुदिनी (स्त्री.) कमल की तरह का सफेद फूलों वाला पौधा -- आंपल्, कुमुदिनि

कुम्हलाना (अ.क्रि.) मुरझाना -- वाटुक

कुम्हलाना (अ.क्रि.) चेहरे का रंग फीका पड़ना -- वाटुक

कुल (पुं.) खानदान, घराना, वंश -- कुल, वंशम्

कुल (वि.) पूरा सारा -- ओर्क्क, मोत्तम्

कुल देवता (पुं.) जिसकी पूजा किसी कुल में परंपरा से होती आई हो -- कुल देवत

कुलीन (वि.) उच्च कुल में उत्पन्न -- कुलीनन्

कुल्हड़ (पुं.) मिट्टी का बना हुआ छोटा पात्र -- मण्-कुटुक्क, मण् किण्णं

कुशल (वि.) चतुर, होशियार -- समर्थन्

कुशल (पुं.) खैरियत, राजी-खुशी -- क्षेमम्

कुश्ती (स्त्री.) एक प्रसिद्ध भारतीय खेल -- गुस्ति

कुष्ठ (पुं.) एक संक्रामिक रोग, जिसमें शरीर की त्वचा, नसें आदि सड़ने-गलने लगती हैं, कोढ़ -- कुष्ठ रोगम्

कुसुम (पुं.) पुष्प, फूल -- पुष्पम्, कुसुमम्

कूँची (कूची) (स्त्री.) तूलिका -- ब्रष्

कूँची (कूची) (स्त्री.) मूँज आदि का बनाया हुआ एक प्रकार का ब्रुश -- ब्रष्

कूआँ (कुआँ, कुवाँ) (पुं.) पानी निकालने के लिए जमीन में खोदा हुआ गहरा तथा गोल गड्ढा -- किणरु, कूपम्

कूटना (स.क्रि.) किसी चीज को महीन करने के लिए लगातार पीटना -- उरलिल् इट्ट इटिक्कुक

कूटना (स.क्रि.) भूसी अलग करने की प्रक्रिया -- NA

कूटनीति (स्त्री.) व्यक्तियों या राष्ट्रों के पारस्परिक व्यवहार में दाँव-पेच की नीति -- नयतेत्रम्

कूटना (अ.क्रि.) छलांग लगाना -- चाटुक

कृतघ्न (वि.) उपकार न मानने वाला -- कृतघ्नन्

कृतज्ञ (वि.) उपकार को मानने वाला -- कृतज्ञन्

कृतार्थ (वि.) जिसका उद्देश्य सिद्ध हो गया हो -- कृतार्थन्

कृतार्थ (वि.) लक्ष्य प्राप्त -- चरितार्थन्

कृत्रिम (वि.) जो प्राकृतिक न हो, मानव निर्मित -- कृत्रिमम्

कृत्रिम (वि.) बनावटी, दिखावटी -- केट्रिटिच्चमच्च

कृपा (स्त्री.) अनुग्रह, दया -- कृप

कृषि (स्त्री.) खेती-बारी -- कृषि

केंद्र (पुं.) मध्य बिंदु -- केंद्रम्

केंद्र (पुं.) मध्य भाग -- मध्य भागम्

केंद्र (पुं.) दूर-दूर तक फैले हुए कार्यों की व्यवस्था तथा संचालन हेतु मुख्य स्थान -- केंद्रम्

केवल (वि.) जिसका या जितने का उल्लेख किया जाए वही या उतना ही -- केवलम्

केवल (क्रि.वि.) मात्र, सिर्फ -- वेरुम्, मात्रम्

केश (पुं.) सिर के बाल -- तलमुटि, केशम्

केश (पुं.)

कै (स्त्री.) उलटी वमन -- छदिं

कैद (स्त्री.) अपराधियों को दंड देने के लिए बंदी बनाना -- बंधनस्थन्, तटवुपुळ्ळि

कोंपल (स्त्री.) पेड़-पौधों आदि में निकलने वाली नई मुलायम पत्तियाँ, कल्ला -- अंकुरम्, पोटिप्पु

कोई (सर्व) अज्ञात, अनिर्दिष्ट वस्तु या व्यक्ति, संपूर्ण मे से एक -- आरो, एतो

कोई (वि.) न जाने कौन एक, बहुतों मे से चाहे जो एक -- आरो, एतो

कोई (अव्य.) लगभग -- एकदेशम्

कोठरी (स्त्री.) छोटा कमरा -- चेरिय मुरि

कोठी (स्त्री.) बहुत बड़ा, ऊँचा और पक्का मकान -- बंघळावुं

कोतवाल (पुं.) पुलिस का वह प्रधान कर्मचारी, जिसके अधीन कई थाने और बहुत-से सिपाही होते हैं -- पोलिस्, इंस्पेक्टर्

कोतवाली (स्त्री.) कोतवाल का मुख्यालय -- पोलिस् स्टेशन्

कोमल (वि.) नरम, मुलायम -- कोमळम्, मृदु

कोरा (वि.) बिल्कुल ताजा और नया, न बरता हुआ -- पुतिय, कोटि

कोलाहल (पुं.) चीखने-चिल्लाने से होने वाला शोर -- कोलाहलम्, बहकम्

कोल्हू (पुं.) बीजों और गन्ने को पेरने का यंत्र -- चक्कुँ

कोश (कोष) (पुं.) किसी विशेष क्रम से शब्द और उनके अर्थ वाला ग्रंथ, कोश -- शब्द कोशम्, निघंटु

कोश (कोष) (पुं.) संचित द्रव्य -- निधि, खजनावु

कोशकार (पुं.) शब्दों का संग्रह तथा उनका संपादन करने वाला -- निघंटुकारन्, कोशकारन्

कोशिश (स्त्री.) प्रयत्न, चेष्टा -- प्रयत्नम्

कोषाध्यक्ष (पुं.) जिसके पास कोष रहता है, खजांची -- खज़ांचि

कोष्ठक (पुं.) (), [], {}, चिन्हों में से कोई एक -- कोष्ठकम्, ब्राक्कट्टु

कोसना (स.क्रि.) सताए जाने पर किसी की अशुभ कामना करना -- पिराकुक, शपिक्कुक

कोंधना (अ.क्रि.) कुछ क्षणों के लिए (बिजली का) चमकना -- मिन्नुक

कौतुक (पं.) आश्चर्य या उत्सुकताजनक विलक्षण बात -- कौतुकम्

कौतुक (पं.) मनोविनोद, दिल्लगी -- मनोविनोदम्, नेरंपोक्कु

कौन (सर्व) जानकारी हेतु वाचक सर्वनाम -- आरु, एनु

कौन (सर्व) कोई व्यक्ति -- एतेङकिलुम् व्यक्ति

क्या (सर्व) प्रश्नवाचक सर्वनाम -- ऐतु

क्या (सर्व) आश्चर्यजनक एवं उपेक्षासूचक प्रसंगों में प्रयुक्त अभिव्यक्ति -- ऐनु

क्यों (क्रि.वि.) कारण जानने के लिए प्रयुक्त प्रश्नवाचक शब्द -- एन्तिनु, एन्तु कोडु

क्योंकि (अव्य.) कारण यह है कि, इसलिए कि -- एंतु, कोंडन्नाल्

क्रम (पुं.) तरतीब, सिलसिला -- क्रमम्

क्रम (पुं.) उचित रूप से काम करने का ढंग -- मुर

क्रमशः (क्रि.वि.) नियत क्रम के अनुसार, सिलसिलेवार -- क्रममायि, मुरय्क्कु

क्रमशः (क्रि.वि.) एक-एक करके, बारी- बारी से -- ओरोन्नायि, क्रमत्तिल्

क्रय (पुं.) मोल लेने की क्रिया या भाव, खरीद -- क्रयम्, वाङ्ङ्ल्

क्रांति (स्त्री.) एक दशा से दूसरी दशा में बड़ा परिवर्तन -- विप्ळवम्

क्रांतिकारी (पुं.वि.) क्रांति का प्रयत्न करने वाला -- विप्ळवकारि

क्रिया (स्त्री.) कोई कार्य चलते या होते रहने की अवस्था या भाव, कोई काम करने का ढंग या विधि -- प्रक्रिया, रीति

क्रिया (स्त्री.) व्याकरण में वे शब्द, जो किसी कार्य घटना आदि के होने या किए जाने के वाचक होते हैं -- क्रियापदम्

क्रीड़ा (स्त्री.) खेलकूद -- कळि

क्रीड़ा (स्त्री.) आमोद-प्रमोद -- क्रीड

क्रूर (वि.) निर्मम तथा हिंसक कार्य करने वाला, निर्दयी -- क्रूरन्, निर्दयन्

क्रोध (पुं.) कोप, गुस्सा -- क्रोधं, कोपम्

क्लेश (पुं.) कष्टपूर्ण मानसिक स्थिति, मनोव्यथा -- क्लेशम्

क्षण (पुं.) काल का एक बहुत छोटा परिमाण, पल -- क्षणम्

क्षति (स्त्री.) चोट लगने से होने वाला घाव -- मुरिवु

क्षति (स्त्री.) हानि, घाटा -- नष्टम्, हानि

क्षतिपूर्ति (स्त्री.) हानि या घाटे का पूरा होना -- नष्टपरिहारम्

क्षत्रिय (पुं.) हिंदुओं के चार वणों में से दूसरा वर्ण -- क्षत्रियजाति

क्षत्रिय (पुं.) उक्त वर्ण का व्यक्ति -- क्षत्रियन्

क्षमता (स्त्री.) सामर्थ्य -- कऴिवु

क्षमता (स्त्री.) कोई कार्य करने का कौशल -- प्राप्ति

क्षमता (स्त्री.) ग्रहण या धारण करने की पात्रता -- सामर्थ्यम्

क्षमा (स्त्री.) किसी भी प्रकार का अहित करने वाले व्यक्ति के प्रति मन में कोई विकार न होना -- क्षम

क्षमा (स्त्री.) किसी दोषी या अपराधी को बिना किसी प्रतिकार के छोड़ देने का भाव माफ़ी -- माप्पु

क्षय (पुं.) क्रमशः तथा प्राकृतिक रूप से होने वाला ह्रास -- क्षयम्

क्षय (पुं.) नाश -- नाशम

क्षय (पुं.) यक्ष्मा (टी.बी.) नामक रोग -- क्षय रोगम्

क्षितिज (पुं.) जहाँ पृथ्वी और आकाश एक-दूसरे से मिलते हुए जान पड़ते हैं -- चक्रवाळं

क्षुधा (स्त्री.) भोजन करने की इच्छा, भूख -- विशप्पु

क्षेत्र (पुं.) जोता-बोया जाने वाला भूमिखंड, खेत -- वयल्

क्षेत्र (पुं.) प्राकृतिक, भौगोलिक, राजनीतिक आदि दृष्टियों से निर्दिष्ट भू-भाग -- प्रदेशम्

क्षेत्रफल (पुं.) किसी क्षेत्र की लंबाई और चौड़ाई को गुणन करने से निकलने वाला वर्गात्मक परिमाण, रकबा -- क्षेत्रफलम्, विस्तीर्णम्

खंड (पुं.) टुकड़ा, अंश -- खंडम्, कषणम्

खंड (पुं.) किसी संपूर्ण वस्तु का कोई विशिष्ट भाग या विभाग -- अंशम्, भागम्

खंडहर (पुं.) इमारत या भवन, खंड-खंड होकर गिरा पड़ा हो, भग्नावशेष -- भग्नावशेषम्

खंभा (पुं.) गोल या चौकोर रचना जिस पर छत या कोई भारी चीज टिकी रहती है -- तूणु

खगोल (पुं.) आकाश, मंडल -- आकाश मंडलम्

खटकना (अ.क्रि.) खट-खट की आवाज होना -- तट्टुक

खटकना (अ.क्रि.) बुरा मालूम होना -- मनस्सिल्ल कोळळुक

खटाई (स्त्री.) खट्टे होने की अवस्था -- पुळि

खटाई (स्त्री.) कोई खट्टी वस्तु -- पुळिक्कुन्न वस्तु

खट्टा (वि.) जिसमें अम्लीयता हो -- पुळिच्च, पुळिरसमुळ्ळ

खड़ाऊँ (स्त्री.) काठ की बनी हुई एक प्रकार की पादुका -- मितियडि, पादुकम्

खतरनाक (वि.) जोखिम-भरा -- अपकटकरम्

खतरा (पुं.) अनिष्ट, संकट आदि की आशंका -- अपकटं

खनिज (वि.) खान से खोद कर निकाला हुआ -- खनियिल् निन्नि ऍटुत

खनिज (वि.) खनिज पदार्थ -- खनिज पदार्थम्

खपत (स्त्री.) खपने या खपाने की क्रिया अथवा भावः माल की बिक्री -- चेलवु

खरा (वि.) विशुद्ध -- शुद्धामाय, तनि

खरा (वि.) ईमानदार, सच्चा और शुद्ध हृदय वाला -- विश्वस्तन्, नेरुकारन्

खराद (पुं.) लकड़ी अथवा धातु की वस्तुओं को सुडौल तथा चिकना बनाने वाला यंत्र -- कटच्चिल् चाण

खरीद (स्त्री.) मोल लेने की क्रिया या भाव, क्रय -- विलक्कु वाङ्ङल्

खरीद (स्त्री.) वह जो खरीदा जाए -- विलक्कु वाङङिय वस्तु

खरीदना (स.क्रि.) मोल लेना, क्रय करना -- विलैक्कु वाङ्ङुक

खरोंच (स्त्री.) नख अथवा अन्य किसी नुकीली वस्तु से छिलने के कारण पड़ा हुआ दाग या चिह्न, खराश -- पोरल्

खर्च (खरच) (पुं) धन, वस्तु, शक्ति आदि का होने वाला उपभोग, व्यय -- चिलवु

खर्च (खरच) (पुं) वह धन-राशि, जो किसी वस्तु को खरीदने या बनाने के लिए व्यय की जाती है -- चिलवु

खलना (क्रि.) अनुचित, अप्रिय या कष्टदायक प्रतीत होना, अखरना, खटकना -- विषममायि तोन्नुक पुण् पड

खलिहान (पुं.) जहाँ फसल काट कर रखी, माँड़ी तथा ओसाई जाती है -- कळम्

खली (स्त्री.) तिलहन का वह अंश, जो उसे पेर कर तेल निकालने के बाद बचा रहता है -- पिण्णाक्कु

खस्ता (वि.) भुरभुरा, बहुत थोड़ी दाब से टूट जानेवाला कुरकुरा -- पोरिञ्ञ, अमर्त्तियाल् पोट्टुन्नु

खस्ता (वि.) टूटा-फूटा, भग्न, दुर्दशाग्रस्त -- पोट्टिय, मोश स्थितियिल् उळ्ळ

खाँसना (अ.क्रि.) खाँसी आने या होने का सा शब्द करना, गला साफ करना -- चुमय्ककुक, कुरय्क्कुक

खाई (स्त्री.) दुर्ग के चारों ओर खोदा हुआ गहरा स्थान जो पानी से भरा रहता है -- ट्रेंच

खाई (स्त्री.) युद्ध क्षेत्र में छिप कर गोली चलाने के लिए खोदे जाने वाले गड्ढे -- ट्रेच्, कुऴि

खाकी (वि.) खाक अर्थात् मिट्टी के रंग का, भूरा -- काक्कि निरम्

खाट (स्त्री.) चारपाई -- कट्टिल्

खाद (स्त्री.) सड़ाया हुआ गोबर, पत्ते आदि -- वळम्

खादी (स्त्री.) खद्दर -- खादि, खदर्

खाद्य (वि.) जो खाए जाने योग्य हो, भोज्य -- खाद्यम्

खाद्य (पुं.) खाए जाने वाले पदार्थ -- खाद्य वस्तु

खाद्य (पुं.) भोजन -- भक्षणम्

खाद्यान्न (पुं.) वे अन्न जो खाने के काम आते हैं -- भक्ष्यधान्यम्

खान (स्त्री.) वह स्थान जहाँ से धातु, पत्थर आदि खोद कर निकाले जाते हैं -- खनि

खान (स्त्री.) वह स्थान , जहाँ कोई वस्तु अधिकता से होती या पाई जाती है -- शेखरम्

खाना (स.क्रि.) भोजन करना -- तिन्नुक, उण्णुक

खाना (स.क्रि.) भोजन -- भक्षणम्

खाना (स.क्रि.) दीवार, आलमारी, मेज आदि में रखने का स्थान -- अर्, कळ्ळि

खारा (वि.) जिसमें क्षार का अंश या गुण हो -- क्षारमुळ्ळ, उप्पुरसमुळ्ळ

खाल (स्त्री.) त्वचा, चमड़ा -- तोलु

खाली (वि.) रिक्त -- कालियाय, ओऴिञ्ञ

खाली (वि.) रोजगार-रहित -- तोऴिल् इल्लात्त

खाली (वि.) जो उपयोग में न आ रहा हो -- उपयोगत्तिल् इल्लात्त

खास (वि.) विशेष, विशिष्ट -- प्रत्येकम्

खिड़की (स्त्री.) दीवार में छोटे दरवाजे की तरह का स्थान -- जन्नल्

खिन्न (वि.) उदास, विकल -- दुखितन्, खिन्नन्

खिन्न (वि.) अप्रसन्न, असंतुष्ट -- अप्रसन्नन्, दुखितन्

खिल-खिलाना (अ.क्रि.) बहुत प्रसन्न होने पर खुलकर हँसना -- पोट्टिच्चि-रिक्कुक

खिलना (अ.क्रि.) कली या फूल का पंखुड़ियाँ खोलना -- विटरुक

खिलना (अ.क्रि.) कोई सुखद कार्य या बात होने पर आनंदित होना -- आनंदिक्कुक

खिलना (अ.क्रि.) सुंदर लगना, फबना -- सुंदरमायि तोन्नुक

खिलाड़ी (पुं.) खेल खेलने वाला -- कळिक्कारन्

खिलाना (स.) भोजन कराना -- ऊणु, कऴिप्पिक्कु-क तीट्टुक

खिलाना (स.) खेल खिलाना -- कळिप्पिक्कुक

खिलाना (स.) दुलारना -- कोञ्जिक्कुक

खिलौना (पुं.) बच्चों के खेलने के लिए बनाई गई धातु, मिट्टी आदि की आकृति, चीज या सामग्री -- कळिप्पाट्टम्

खिलौना (पुं.) मन बहलाने का साधन या सामग्री -- विनोद-सामग्रि

खिसकना (अ.क्रि.) सरकना -- निरङ्ङुक

खिसकना (अ.क्रि.) किसी वस्तु का अपने स्थान से कुछ हट जाना -- वळुतुक

खिसकना (अ.क्रि.) चुपके से उठ कर चल देना -- तटि तप्पुक

खींचना (स.क्रि.) किसी वस्तु को बलपूर्वक अपनी ओर लाना या अपने साथ लेते हुए आगे बढ़ना -- वलिक्कुक

खींचना (स.क्रि.) किसी वस्तु या स्थान में स्थित किसी दूसरी वस्तु को बलपूर्वक बाहर निकालना -- वलिच्चु पुरत्तेटुक्कुक

खींचना (स.क्रि.) किसी वस्तु का तत्व, सार या सुगंध निकालना -- पिऴिञ्ञेटुक्कुक

खुजली (स्त्री.) शरीर के किसी अंग में रक्त का संचार रुक जाने के कारण होने वाली सुरसुरी -- चोरिच्चिल्

खुजली (स्त्री.) खाज -- चोरि

खुजाना (स.क्रि.) शरीर के किसी अंग में खुजली होने पर उस स्थान को नाखूनों अथवा उँगलियों से बार-बार मलना या रगड़ना -- चोरियुक, मांतुक

खुदरा (पुं) किसी चीज के छोटे छोटे अंश, खंड या टुकड़े, फुटकर -- चिल्लर

खुदरा (पुं) वस्तु को थोड़ा थोड़ा बेचना -- चिल्लर कच्चवटम्

खुदरा (वि.) थोड़ा थोड़ा करके बिकने वाला -- चिल्लरयायि विल्क्कुन्न

खुर (पुं.) कुछ पशुओं के पैरों का अगला सिरा, जो प्रायः गोल तथा बीच में से फटा हुआ होता है -- कुळंपु

खुरचना (स.क्रि.) किसी वस्तु को किसी दूसरी वस्तु पर इस प्रकार रगड़ना कि वह कुछ छिल जाए -- चुरण्डुक

खुराक (स्त्री.) खाद्य पदार्थ, भोजन, आहार -- भक्षणम्

खुराक (स्त्री.) किसी पदार्थ की एक नियत मात्रा, इकाई -- ओरु नेरत्ते आहारं

खुश (वि.) प्रसन्न, संतुष्ट -- संतोषमुळ्ळ

खुश-किस्मत (वि.) अच्छे भाग्यवाला, सौभाग्यशाली, भाग्यवान -- भाग्यवान्

खुशखबरी (स्त्री.) शुभ समाचार -- नल्ल वर्त्तामानम्, संतोष वार्ता

खुश्क (वि.) सूखा -- इंर्प्पमिल्लात्त उणङ्ङिय

खुश्क (वि.) चिकनाई रहित -- एण्णमय-मिल्लात्त

खुश्क (वि.) जिसमें कोमलता या रसिकता न हो -- विरसनाय

खून (पुं.) रक्त, रुधिर, लहू -- चोर

खून (पुं.) हत्या -- कोल

खूब (वि.) सब प्रकार से अच्छा और उत्तम, बढ़िया -- मेल्तत्रम्

खूब (क्रि.वि.) अच्छी तरह से भली भाँति -- सुंदरमायि तोन्नुक

खूबसूरत (वि.) सुंदर -- सुंदरमाय, अऴकुळ्ळ

खेत (पुं.) वह भू-खंड, जो फसल उपजाने के लिए जोता बोया जाता है -- वयल्

खेतिहर (पुं.) जमीन को जोत बोकर उसमें फसल उपजाने वाला व्यक्ति, किसान, कृषक -- कर्षकन्, कृषिक्कारन्

खेती (स्त्री.) खेत को जोतने -बोने तथा फसल उपजाने की कला तथा काम -- कृषिप्पणि

खेती (स्त्री.) खेत में बोई हुई फसल -- विळ

खेद (पुं.) कोई अपेक्षित काम न करने अथवा कोई काम या बात ठीक तरह से न होने पर मन में होने वाला दुख, अप्रसन्नता, रंज -- खेदम्, दुखम्

खेना (स.क्रि.) डांड़ों की सहायता से नाव ·को चलाना -- तुऴयुक

खेल (पुं.) मन बहलाने के लिए किया जाने वाला कोई काम, क्रीड़ा -- विनोदम्, कळि

खेल (पुं.) बहुत साधारण या तुच्छ काम -- ऐळुप्पमाय

खेल-कूद (स्त्री.) खेल, क्रीड़ा -- कळि

खेल-कूद (स्त्री.) (बच्चों की) उछल-कूद, आमोद-प्रमोद, कल्लोल -- चाट्टवुम् कळियुम्

खेलना (अ.क्रि.) मन बहलाने के लि शारीरिक क्रियाएँ करना -- कळिक्क

खेलना (अ.क्रि.) मजाक बनाना -- कळिक्कुक

खैरात (स्त्री.) दान के रूप में दिया जाने वाला धन या पदार्थ, दान -- दानम्

खोखला (वि.) जिसके भीतर कुछ न हो, भीतर से रिक्त -- ओऴिञ्ञ, पोळ्ळयाय

खोखला (वि.) निस्सार, थोथा -- पोळ्ळयाय, निस्सारमाय

खोज (सत्री.) किसी नए तथ्य आदि का पता लगाने का काम, शोध, अनुसंधान -- अन्वेषणम्, गवेषणम्

खोज (सत्री.) किसी खोई या छिपी हुई वस्तु को ढूँढ़ने की क्रिया -- तिरच्चिल्, तेटल्

खोजना (स.क्रि.) किसी खोई या छिपी हुई वस्तु के पता लगाने का प्रयत्न करना, ढूँढ़ना -- अन्वेषिक्कुक

खोजना (स.क्रि.) अनुसंधान या शोध करना -- गवेषणम् नट्त्तुक

खोट (स्त्री.) मिलावट (सोना आदि में) -- स्वर्णत्तिल, चेर्त्त चेपुं, कलर्पु, मायम्

खोट (स्त्री.) दोष -- कुट्टम्

खोटा (वि.) मिलावटी -- कलर्प्पुळ्ळ

खोटा (वि.) हीन, अविश्वसनीय -- कृत्रिममाय, कळ्ळमाय

खोदना (स.क्रि.) कुदाल आदि से जमीन पर आघात करके गड़्ढ़ा बनाना -- कुऴिक्कुक

खोदना (स.क्रि.) उक्त क्रिया द्वारा दबी पड़ी हुई वस्तु बाहर निकालना -- कुऴक्कुक

खोदना (स.क्रि.) नक्काशी करना -- कोत्तुवेल चंय्युक

खोना (सं.) किसी वस्तु का भूल से कहीं छूट जाना -- कळयुक पोवुट

खोना (सं.) असावधानी, दुर्घटना, मृत्यु आदि के कारण क्षतिग्रस्त होना -- नष्टपोटुक

खोल (पुं.) किसी चीज का ऊपरी आवरण -- उर, पुरंतोटु

खोल (पुं.) विशिष्ट प्रकार के कीड़े मकोडों का प्राकृतिक आवरण -- उर

खोलना (स.क्रि.) अनावृत करना, आवरण हटाना -- तुरककुक, अट्प्पु माट्टुक

खोलना (स.क्रि.) किसी बँधी हुई वस्तु को मुक्त करना -- केट्टळि क्कूक

खोलना (स.क्रि.) मोड़ी या तह की हुई वस्तु को फैलाना -- विरिक्कुक

खौलना (स.क्रि.) उबलना -- तिळक्कुक

ख्याति (स्त्री.) यश, प्रसिद्धि, कीर्ति -- प्रसिद्धि, ख्याति

गंजा (वि.पुं.) जिसके सिर के बाल झड़ गए हों -- कषण्टियाय

गंदा (वि.) अपवित्र, दूषित, बुरा -- दुषिच्च, अळुक्काय

गंदा (वि.) धूल, मिट्टी आदि से युक्त, मैला -- अळुक्कुळ्ळ

गंध (स्त्री.) कुछ पदार्थों से सूक्ष्म कणों का वायु के साथ मिलकर होने वाला प्रसार, जिसका अनुभव नाक से होता है, बास, दुर्गंध -- मणम्, गंधम्

गंध (स्त्री.) सुगंधित द्रव्य -- सुगंधद्रव्यम्

गंभीर (वि.) गहरा -- आऴमाय

गंभीर (वि.) जटिल, गूढ़ -- जटिलम्

गंभीर (वि.) शांत, धीर -- शांतम्, धीरम्

गँवाना (स.क्रि.) खोना -- कळयुक

गँवाना (स.क्रि.) नष्ट करना -- नष्टर्प्पाटुत्तुक

गँवार (वि.पु.) असभ्य, अशिष्ट -- परिष्कार-मिल्लात्त, अपरिष्कृतन्

गँवार (वि.पु.) मूर्ख, अनाड़ी -- मटयन्

गगन (पुं.) आकाश, आसमान -- आकाशम्

गज (पुं.) हाथी -- गजम्, आन

गज (पुं.) लंबाई की एक माप, जो छत्तीस इंच के बराबर होती है -- गजम, वार

गज (पुं.) उक्त माप का उपकरण -- मुऴक्कोल्

गजरा (पुं.) फूलों की घनी गुँथी हुई छोटी माला -- पुमाल

गड़बड़ (पुं.) ऐसी अवस्था, जिसमें क्रम, व्यवस्था आदि का अभाव हो -- अव्यवस्थ

गड़बड़ (पुं.) असावधानी, भूल आदि से कुछ का कुछ कर देने की क्रिया या भाव -- कुऴप्पम्

गड़बड़ (पुं.) उत्पात, उपद्रव -- बहळम्, कलहम्

गढ़ (पुं.) किला, दुर्ग -- कोट्ट

गढ़ (पुं.) केंद्र, मुख्य स्थान, अड्डा -- केंद्रम्

गढ़ना (स.क्रि.) कोई नई चीज बनाने के लिए किसी स्थूल पदार्थ को काट, छील, ढाल कर तैयार करना -- निर्मिक्कुक

गढ़ना (स.क्रि.) कोई कल्पित बात बनाना या कोई बात नमक मिर्च लगाकर सुंदर रूप में प्रस्तुत करना -- केट्टिच्च-मक्कुक

गण (पुं.) समूह, झुंड, वर्ग -- समूहम्, गणम्

गणतंत्र (पुं.) वह राज्य या राष्ट्र, जिसकी सत्ता जनसाधारण (विशेषतः मतदाताओं या निर्वाचकों) में निहित होती है -- गणतंत्रम्, रिप्पब्लिक, जनाधित्यम्

गणना (स्त्री.) गिनती करने की क्रिया या भाव -- ऐण्णल्

गणना (स्त्री.) गिनती, संख्या -- ऐण्णम्

गणित (पुं.) वह शास्त्र, जिसमें परिमाण, मात्रा, संख्या आदि निश्चित करने की रीतियों का विवेचन होता है, हिसाब -- गणितम्, कणक्कु

गति (स्त्री.) चाल, रफ्तार -- गति, काम्

गति (स्त्री.) हरकत, चेष्टा, हिलना-डुलना -- अनक्कम्

गति (स्त्री.) दशा, अवस्था, हालत, स्थिति -- स्थिति, अवस्था

गतिरोध (पुं.) चलते हुए काम का रुक जाना -- तटस्सम्

गतिरोध (पुं.) झगड़े या बातचीत के समय की ऐसी स्थिति, जिसमें दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़ जाते हैं और समझौते का कोई रास्ता दिखाई नहीं देता -- प्रतिसंधि

गतिविधि (स्त्री.) कार्य-कलाप -- प्रवर्तनम्

गतिविधि (स्त्री.) चेष्टा, हरकत -- प्रयत्नम्

गतिविधि (स्त्री.) आचरण-व्यवहार करने या रहने सहने का रंग-ढंग -- प्रवर्तिकुन्न रीति

गदराना (अ.क्रि.) फलों आदि का पकना शुरु होना -- मूक्कुक, पळु-क्काराकुक

गदराना (अ.क्रि.) जवानी में शरीर के अंगों का भरना और सुडौल होना -- यौवनर्क्का-ळुप्पुण्टाकुक

गद्दा (पुं.) बिछाने की मोटी रूईदार भारी तोशक -- मेत्त

गबन (पुं.) सरकारी या संस्थागत धन की चोरी -- धनापहरणम्

गमला (पुं.) फूल आदि के पौधे लगाने के लिए मिट्टी या धातु का पात्र -- पूच्चट्टि

गरजना (अ.क्रि.) गंभीर तथा घोर शब्द करना जोर से क़ड़क कर बोलना -- गर्जिक्कुक, अलरुक

गरम (गर्म) (वि.) सामान्य से अधिक तापमान वाला, उष्ण -- चूटाय

गरम (गर्म) (वि.) उग्र, आवेश प्रधान -- उग्रमाय, आवेशम् निरञ्ञ

गरिष्ठ (वि.) बहुत भारी -- भारमुळ्ळ

गरिष्ठ (वि.) (खाद्य पदार्थ) जो बहुत कठिनता से या देर में पचता हो -- गुरुवाय, दहिक्कान् विषममुळ्ळ

गरी (स्त्री.) नारियल के अंदर का वह सफेद मुलायम गूदा जो खाया जाता है -- नाळिकेर-त्तिंटे परिप्पु, कळंपु

गरी (स्त्री.) किसी बड़े बीज के अंदर का मुलायम गूदा, गिरी -- परिप्पु

गरीब (वि.) निर्धन, दरिद्र -- दरिद्रन्

गरीब (वि.) दीन-हीन -- दीनन्, विनीतन्

गरीब (वि.) निरुपाय, बेचारा -- पावर्प्पट्ट, पावम्

गर्व (पुं.) अपने को दूसरों से बढ़कर समझने का भाव, अभियान, घमंड -- गर्वु

गर्व (पुं.) अपने किसी श्रेष्ठ कार्य, बात, वस्तु आदि के संबंध में होने वाला न्यायोचित अभिमान -- अभिमानम्

गलत (वि.) जो ठीक न हो, अशुद्ध -- तेटटाय

गलत (वि.) मिथ्या असत्य -- असत्यम्

गलत (वि.) अनुचित, -- अनुचितम्

गलती (स्त्री.) भूल, अशुद्धि, त्रुटि -- अशुद्धि, तेट्ट

गलाना (स.क्रि.) किसी ठोस वस्तु को तरल बनाना, पिघलाना -- वेंविक्कुक

गलाना (स.क्रि.) किसी कड़ी चीज या कच्चे अन्न आदि को उबाल कर नरम करना -- वेंविक्कुक

गलाना (स.क्रि.) घुलाना -- अलियिक्कुक

गली (स्त्री.) सड़क से कम चौड़ा, संकरा रास्ता -- तंरुवु

गवाह (पुं.) ऐसा व्यक्ति, जिसने कोई घटना स्वयं देखी हो अथवा जिसे किसी घटना, तथ्य, बात आदि की ठीक और पूरी जानकारी हो, साक्षी -- साक्षि

गवाह (पुं.) न्यायालय में तथ्य का सत्यापन या समर्थन करने वाला -- साक्षि

गवाह (पुं.) दो पक्षों में होने वाले लेन-देन, व्यवहार, समझौते आदि के लेख पर हस्ताक्षर करने वाला -- साक्षि

गहन (वि.) घना, निविड़, गहरा -- निबिडम्

गहन (वि.) दुरुह, कठिन -- दुर्गम माय

गहना (पुं.) आभूषण, जेवर -- आभरणम्, उरुपपटि

गहरा (वि.) जिसका तल चारों ओर के स्तर से नीचे की ओर अधिक दूरी तक हो -- आऴमाय, अगाधमाय

गहरा (वि.) (व्यक्ति या विषय) गूढ़, गहन, गंभीर -- गूढ़माय

गाँव (पुं.) ऐसा स्थान, जहाँ लोग पीढ़ियों से रहते आए हों, ग्राम -- ग्रामम्, नाटटिन् पुरम्

गाड़ना (स.क्रि.) गड्ढे में रखकर मिट्टी से ढकना, दफनाना -- कुऴिक्कुक

गाड़ना (स.क्रि.) धरती या दीवार आदि में धँसाना -- कुळिच्चिटुक

गाढ़ा (वि.) जो पतला न हो -- कट्टियाय

गाढ़ा (वि.) (रंग आदि) जो अधिक गहरा हो -- कटुत्त

गाढ़ा (वि.) दृढ़, पक्का, घनिष्ठ -- दृढ़माय

गाना (स.क्रि.) लय, ताल के साथ पदों का उच्चारण करना -- पाटुक

गाना (पुं.) गाई जाने वाली रचना, गीत -- पाट्टु, गीतम्, गानम्

गायक (पुं.) गाने वाला, गवैया -- गायकन्

ग्राहक (गाहक) (पुं.) खरीदने वाला, खरीददार -- वाङ्ङुन्नवन्

गिनती (स्त्री.) गिनने की क्रिया या भाव, गणना -- ऐण्णम्, ऐण्णल्

गिनती (स्त्री.) संख्या -- संख्य, ऐण्णं

गिनती (स्त्री.) एक से सौ तक की अंक माला -- ऐण्णम्

गिनना (स.क्रि.) संख्या सूचक अंकों का नियमित क्रम से उच्चारण करना, गिनती करना -- ऐण्णुक

गिनना (स.क्रि.) गणना करना -- ऐण्णुक

गिरजा (पुं.) ईसाइयों का प्रार्थना स्थल -- क्रिस्त्यन् पळ्ळि

गिरफ्तार (वि.) जो किसी अपराध के कारण पुलिस द्वारा पकड़ा गया हो -- तटविलाय, बंधनस्थन्

गिरवी (स्त्री.) बंधक, रेहन -- पणयम्

गिरवी (स्त्री.) बंधक रखी हुई चीज -- पणय वस्तु

गिराना (स.क्रि.) नीचे डालना, फेंकना -- वीळ्त्तुक

गिराना (स.क्रि.) ढहाना, जमीन पर लुढ़का देना -- तळ्ळि वीळ्त्तुक

गिराना (स.क्रि.) किसी वस्तु या रचना को तोड-फोड़ कर उसका नाश या ध्वंस करना -- तल्लिप्पोट्टि क्कुक

गिरोह (पुं.) एक साथ काम करने वाले व्यक्तियों का समूह, गुट या झुंड -- संघम्

गीत (पुं.) छोटी पद्यात्मक रचना जो गाए जाने के लिए बनी हो, गाना -- गीतम्, पाट्टु

गीतकार (पुं.) गीत लिखने वाला -- गीतकारन्, गान-रचयितावु

गुंडा (वि.पुं.) बुरे चाल-चलन वाला, बदमाश -- गुण्ड

गुंडागर्दी (स्त्री.) गुंडों का आचरण या व्यवहार, बदमाशी -- गुण्डा विऴयाट्टम्, तेम्माटिन्त्तारम्

गुंबद (पुं.) वास्तु रचना में वह शिखर, जो अदर्धगोलाकार और अंदर पोला होता है, गुंबज -- ताऴिक क्कुटम्

गुच्छा (पुं.) एक ही प्रकार की बहुत सी वस्तुओं का समूह जो एक साथ गुँथा या उपजा हो -- कोत्तु, कूट्टम्

गुजरना (अ.क्रि.) किसी स्थान से होते हुए आगे बढ़ना -- कटन्नु पोकुक

गुजरना (अ.क्रि.) व्यतीत होना, बीतना -- कऴियुक

गुट (पुं.) टोली, गिरोह, छोटा दल -- चेरि, संघम्

गुण (पुं.) वह लक्षण, जो एक वस्तु से दूसरी वस्तु को अलग करता है -- गुणम्

गुण (पुं.) किसी वस्तु का लाभदायक तत्व, स्वभाव -- मेच्चम्

गुण (पुं.) प्रशंसनीय बात -- वैशिष्ट्यम्

गुणवान (वि.) गुणशाली, गुणी, गुणों से युक्त -- गुणवान्

गुणा (पुं.) गणित में जोड़ने की एक संक्षिप्त रीति, जिसमें कोई संख्या कई बार जोड़ने की बजाए एक बार में ही उतनी गुनी बढ़ाई जा सकती है -- मटङ्ङु, गुण

गुदगुदाना (स.क्रि.) हँसाने या छेड़ने के लिए किसी का तलुवा, बगली आदि सहलाना -- इक्किळि-याक्कुक

गुदगुदी (स्त्री.) गुदगुदाने की क्रिया या भाव -- इक्किळि

गुनगुना (वि.) हल्का गरम -- इळम् चूटाय

गुनगुनाना (स.क्रि.) धीमे स्वर में अस्पष्ट शब्दोच्चारण करते हुए गाना -- मूळुक

गुप्तचर (पुं.) जासूस, भेदिया -- चारन्

गुफा (स्त्री.) जमीन अथवा पहाड़ के अंदर का गहरा तथा अँधेरा गङ्ढा, कंदरा -- गुह

गुब्बारा (पुं.) बच्चों के खेलने की रबड़ की थैलीनुमा वस्तु, जिसमें हवा, गैस आदि भरी जाती है -- बलूण्

गुमनाम (वि.) अप्रसिद्ध, अनजान, अज्ञात -- अप्रसिद्ध-माय

गुमनाम (वि.) बिना नाम का जिसमें किसी का नाम न लिखा हो, अनाम -- पेरिल्लात्त

गुरु (पुं.) विद्या देने वाला, शिक्षक -- गुरु

गुरु (वि.) भारी -- भारमुळ्ळ

गुरु (वि.) कठिन, मुश्किल -- विषममाय

गुरुकुल (पुं.) गुरु का वास स्थान, जहाँ रह कर शिष्य विद्याध्ययन करते हों -- गुरुगृहम्

गुरुकुल (पुं.) प्राचीन पद्धति पर स्थापित विद्यापीठ -- गुरुकुल संप्रदायम्

गुर्राना (अ.क्रि.) कुत्ते, बिल्ली आदि का क्रोध में मुँह बंद करके भारी आवाज निकालना -- मुरळुक

गुर्राना (अ.क्रि.) क्रोध में कर्कश स्वर से बोलना -- शकारिक्कुक

गुलाम (पुं.) मोल लिया हुआ व्यक्ति , दास -- अटिम, दासन्

गुलाम (पुं.) ताश का एक पत्ता, जिस पर गुलाम की आकृति होती है -- जाक्कि, गुलान्

गुलाल (पुं.) रंगदार चूर्ण, जिसे होली के दिनों में एक दूसरे पर डालते या मलते हैं -- (होळियिले) गुलाल् पोटि

गुल्लक (गोलक) (स्त्री.) अल्पबचत हेतु मिट्टी या धातु का बना पात्र -- भंडारर्प्पट्टि, गोळक

गूँगा (वि.) जो बोल न सके, मूक -- उम

गूँज (स्त्री.) टकरा कर लौटने वाली आवाज, प्रतिध्वनि -- मुऴक्कम्, प्रतिध्वनि

गूँजना (अ.क्रि.) आवाज का टकराकर लौटना, किसी ध्वनि से किसी स्थान का व्याप्त होना, ध्वनि का देर तक सुनाई देते रहना -- मुऴङ्ङुकक प्रतिध्वनि क्कुक

गूँधना (स.क्रि.) किसी प्रकार के चूर्ण में थोड़ा पानी अथवा तरल पदार्थ मिलाकर हाथ से माँड़ना, सानना -- (मावु) कुऴक्कुक

गूढ़ (वि.) छिपा हुआ, गुप्त -- गूढ़माय

गूढ़ (वि.) समझने में कठिन, दुरुह -- दुरुहमाय

गूँथना (स.क्रि.) धाणों या बालों को समेट कर वेणी बनाना -- पिन्नुक

गूँथना (स.क्रि.) पिरोना -- कोर्क्कुक

गुदा (पुं.) फल आदि के अंदर का कोमल और गुदगुदा सार भाग -- कांपु, कऴंपु

गृहयुद्ध (पुं.) देश के भीतर चलने वाला आंतरिक कलह -- गृहयुद्धम्, आभ्यंतर युद्धम्

गृहस्थी (स्त्री.) घर-बार और बाल बच्चे -- कुटुंबम्

गृहस्थी (स्त्री.) घर का सब सामान, माल असबाब -- वीट्टुसामानङ्ङळ्

गृहिणी (स्त्री.) घर की मालकिन, पत्नी -- गृहिणि, वीट्टम्म

गेरू (पुं.) लाल रंग का खनिज, जो रंगने और दवा के काम आता है -- कावि

गोंद (पुं.) कुछ विशिष्ट पौधों तथा वृक्षों से निकलने वाला चिपचिपा पदार्थ -- पश, कर

गोता (पुं.) शरीर को जल में इस प्रकार डुबाना, जिससे शरीर का कोई अंग बाहर न रह जाए, डुबकी -- मुङुडि क्कुळि

गोद (स्त्री.) जाँघों के ऊपर का भाग, जिस पर बच्चों आदि को बैठाया जाता है, अंक -- मटि

गोदाम (पुं.) वह बड़ा स्थान, जहाँ तिजारती माल जमा करके रखा जाता है। -- गुदाम्

गोधूलि (स्त्री.) सायंकाल का वह समय, जब जंगल से चरकर लौटती हुई गायों के खुरों से धूल उड़ती है और जो शुभ कार्यों के लिए अच्छा मुहूर्त्त माना जाता है -- गोधूळिवेळ, सायं संध्यावेळ

गोपनीय (वि.) जिसे सार्वजनिक न किया जा सके -- गोप्यम्

गोबर (पुं.) गाय, भैंस आदि का मल जो लीपने पोतने और सुखा कर जलाने के काम में आता हैं -- चाणकम्

गोरा (वि.) श्वेत वर्ण वाला (व्यक्ति), गौर -- वेळुत्त

गोल (वि.) मंडलाकार या वृत्ताकार -- उरुण्ट

गोल (पुं.) फुटबाल आदि खेलों का गोल -- गोळ्

गोली (स्त्री.) शीशा, लोहा या अन्य किसी पदार्थ का छोटा गोलाकार पिंड -- उण्ट

गोली (स्त्री.) दवा की टिकिया -- NA

गोष्ठी (स्त्री.) किसी विषय पर चर्चा करना, काव्यपाठ -- चर्चायोगम्

गौना (पुं.) विवाह के कुछ समय बाद वधू का मायके से विदा होकर ससुराल जाना -- कुटिवटपु, वधुविन्टे नूनत गृहप्रवेशम्

गौरव (पुं.) आदर, प्रतिष्ठा, मान-मर्यादा -- मान्यत्वम् आदरवु

गौरव (पुं.) बड़प्पन, महत्त्व -- वलिप्पम्, महत्वम्

ग्रंथ (पुं.) किताब, पुस्तक -- ग्रंथम

ग्रंथ (पुं.) धार्मिक या साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पुस्तक -- प्रमाण ग्रंथम्

ग्रस्त (वि) पकड़ा हुआ -- ग्रसिच्च

ग्रस्त (वि) पीड़ित -- पीडितमाय

ग्रह (पुं.) सौरमंडल में स्थित वह पिंड, जो सूर्य की परिक्रमा करता हो -- ग्रहम्

ग्रह (पुं.) पकड़ने या वश में करने की क्रिया या भाव -- पिटिक्कल्

ग्राम (पुं.) गाँव -- ग्रामम्,

ग्रामीण (वि) ग्राम-संबंधी -- ग्रामीणन्

ग्रामीण (वि) गाँव का -- ग्रामत्तिले

ग्वाला (पुं.) अहीर, गोप -- इटयन्

घंटा (पुं.) दिन-रात का चौबीसवाँ भाग, जो 60 मिनट का होता है -- मणिक्कूर्

घंटा (पुं.) पूजा-अर्चना आदि में स्त्रोतादि की संगति में बजाया जाने वाला वाद्य विशेष -- पूजामणि

घंटी (स्त्री.) छोटा उपकरण, जिससे ध्वनि उत्पन्न की जा सकती हो, जैसे साइकिल की या मेज पर रखी घंटी -- मणि

घटना (अ.क्रि.) घटित होना -- संभविक्कुक

घटना (अ.क्रि.) कम होना -- कुरयुक

घटना (स्त्री.) ऐसी बात या काम आदि, जो हो चुका हो -- संभवं

घटाना (स.क्रि.) कम करना -- कुरक्कुक

घटाना (स.क्रि.) गणित में किसी एक राशि में से कोई दूसरी राशि निकालना -- कुरक्कुक

घटिया (वि.) गुण, कर्म आदि की दृष्टि से औरों की तुलना में हीन -- कुरञ्ञ, ताळून्न तरम्

घड़ा (पुं.) धातु, मिट्टी आदि का बना एक गोलाकार पात्र, जो प्रायः पानी भरने के काम आता है, मटका -- कुटम्

घनघोर (वि) अत्यंत घना, घना -- घोरमाय, अत्यधिकम्

घनघोर (वि) भीषण, विकट -- भीषणमाय

घना (वि.) जिसके अवयव या अंश आस-पास सटे हों -- इटतिङ्ङिय

घना (वि.) गहरा -- आऴमाय

घना (वि.) बहुत अधिक, अतिशय -- वळेयेरे

घनिष्ठ (पुं.) जिसके साथ बहुत अधिक मित्रता या संबंध हो -- अटुत्त, उट्ट

घबराना (अ.क्रि.) व्याकुल होना -- मटिक्कुक

घबराना (अ.क्रि.) हिचकना -- परिभ्रमिक्कुक

घबराना (अ.क्रि.) सकपकाना (आश्चर्य आदि से) -- अंपरक्कुक

घमंडी (वि.) जिसे घमंड हो, अभिमानी -- गर्निष्ठन्, अहंकारि

घर (पुं.) मकान, गृह, निवास -- वीडु, इल्लम्

घरेलू (वि.) घर-संबंधी -- वीट्टिल

घरेलू (वि.) पालतू -- वळर्त्तन्न

घसियारा (पुं.) घास छीलने या काटने वाला -- पुल्लुकारन्

घसीटना (स.क्रि.) किसी वस्तु को इस प्रकार खींचना कि वह जमीन से रगड़ खाता हुआ आए -- वलिक्कुक

घसीटना (स.क्रि.) जल्दी-जल्दी तथा अस्पष्ट लिखना -- कुत्तिवरक्कुक

घसीटना (स.क्रि.) किसी को किसी काम में जबरदस्ती शामिल करना -- वलिच्चुटुक

घाट (पुं.) नदी, झील आदि के तट पर वह स्थान, जहाँ लोग नहाते-धोते और नावों पर चढ़ते-उतरते हैं -- कटवु

घाटा (पुं.) नुकसान, हानि, क्षति -- नष्टम्

घाटी (स्त्री.) पर्वतीय प्रदेशों के बीच का मैदानी या सँकरा मार्ग -- ताऴवर,मलयिटुक्कु

घातक (वि.) मार देने वाला -- घातकन्

घातक (वि.) हानिकर -- हानिकरम्

घायल (वि.) जख्मी, आहत -- मुरिवेट्ट

घास (स्त्री.) छोटी हरी वनस्पति, जिसे चौपाए खाते हैं -- पुल्लु

घिसना (स.क्रि.) किसी वस्तु को किसी वस्तु पर इस प्रकार रगड़ना कि वह छीजने लगे -- उपयुक

घिसना (स.क्रि.) किसी बर्तन आदि पर जमी हुई मैल छुड़ाने के लिए उस पर कोई चीज रगड़ना माँजना -- तेय्क्कुक

घिसना (अ.क्रि.) रगड़ से कटना या छीजना -- तेयुक

घुँघराला (वि.) जिसमें छल्ले की तरह कई बल पड़े हों -- चुरुण्ड

घुंघरु (पुं.) प्रायः नृत्य के समय पैरों में पहने जाने वाले चाँदी, पीतल आदि का गोल पोला दाना, जिसके अंदर कंकड़ी रहती है -- कोलुसु

घुटन (स्त्री.) दम घुटने की-सी अवस्था या भाव -- श्वासम् मुट्टल्

घुटन (स्त्री.) ऐसी अवस्था, जिसमें कर्तव्य न सूझने पर मन में बहुत घबराहट होती है -- विषमम्

घुसना (अ.क्रि.) बलपूर्वक धंसना, प्रवेश करना या आगे बढ़ना -- नुळडयुक

घुसपैठ (स्त्री.) प्रयत्न, करके या बलूपूर्वक कहीं पहुँचकर अपने लिए स्थान बनाने की क्रिया या भाव -- नुळडञ्ञु कयट्टम्

घुसपैठ (स्त्री.) अनधिकृत रूप से छिपकर प्रवेश करने की क्रिया -- NA

घूंघट (पुं.) स्त्रियों की चुँदरी, धोती, साड़ी आदि का वह भाग, जिसे वे सिर से कुछ नीचे खींच कर अपना मुँह ढँकती हैं -- मूट्पट्म्

घूँट (पुं.) तरल पदार्थ की उतनी मात्रा, जितनी एक बार मुँह में भर कर गले के नीचे उतारी जाती है -- कविळ्, इरक्कु

घूँसा (पुं.) बँधी हुई मुट्ठी का वह रूप, जिसमें किसी पर प्रहार किया जाता है, मुक्का -- मुष्टि इटि

घूमना (अ.क्रि.) चक्कर लगाना -- चुट्टुक

घूमना (अ.क्रि.) सैर करना -- उलात्तुक

घूमना (अ.क्रि.) किसी ओर मुड़ना -- तिरुयुक

घूरना (स.क्रि.) आँखें गड़ाकर देखना -- तुरिच्चुनोक्कुक

घूरना (स.क्रि.) काम या क्रोध से एकटक देखना -- चिरञ्ञु नोक्कुक

घूस (स्त्री.) रिश्वत -- कैक्कूलि, कोऴ

घूस (स्त्री.) चूहे के वर्ग का एक बड़ा जंतु, जो पृथ्वी के अंदर बिल खोद कर रहता है -- तुरप्पन्

घूसखोरी (स्त्री.) रिश्वत लेने की क्रिया या भाव -- कोऴ वाङ्डल्

घेरना (स.क्रि.) चारों ओर से रोकना, अवरोध करना -- वळयुक, तटयुक

घेरना (स.क्रि.) कोई जगह इस प्रकार भरना कि औरों के लिए स्थान न रह जाए -- कैयेरुक

घेरा (पुं.) लंबाई-चौड़ाई आदि का सारा विस्तार या फैलाव -- चुट्टळवु, विस्तारम्

घेरा (पुं.) इस प्रकार घेर कर खड़े होने की स्थिति, जिससे उस स्थान से कोई बाहर न निकल सके -- घेराव्, वळयुक

घोंसला (पुं.) वृक्ष आदि पर तिनके, पत्ते आदि का बना हुआ स्थान, जिसमें पक्षी रहते तथा अंडे देते हैं। -- (पक्षिक्कूटु) कूटु

घोंटना (घोटना) (स.क्रि.) गले को इस तरह दबाना कि साँस रुक जाए -- कऴत्तु ञेक्कुक

घोंटना (घोटना) (स.क्रि.) मुँहजबानी याद रखना रटना -- काणाप्पाठम् पठिक्कुक

घोल (पुं.) किसी तरल पदार्थ में कोई दूसरी (घुलनशील) वस्तु मिलाकर तैयार किया हुआ मिश्रण -- लायनि

घोलना (स.क्रि.) किसी तरह पदार्थ में कोई अन्य घुलनशील वस्तु मिलाना -- कलर्त्तुक

घोषणा (स्त्री.) जन-साधारण को जानकारी देने के उद्देश्य से जोर से कही जाने वाली बात -- विळंबरम्

घोषणा (स्त्री.) सार्वजनिक रूप से निकाली गई राजाज्ञा -- पोतुविज्ञापनम्

चंगुल (पुं.) शिकारी पशु-पक्षियों का टेढ़ा पंजा -- पिटि

चंगुल (पुं.) किसी व्यक्ति के प्रभाव या वश में होने की वह स्थिति, जिसमें से निकलना सहज न हो -- पिटियिल् पेटल्

चंचल (वि.) अस्थिर -- चंचलम्

चंचल (वि.) नटखट, शरारती -- कुसृति

चंचल (वि.) जो शांत न हो, विकल, उद्विग्न -- अशांतमाय

चंदन (पुं.) एक प्रसिद्ध पेड़, जिसकी लकड़ी बहुत सुगंधित होती है -- चंदनम्

चंदन (पुं.) उक्त लकड़ी को जल में घस या रगड़ कर बनाया हुआ गाढ़ा घोल या लेप, जिसका टीका आदि लगाया जाता है -- चंदनम्

चंदा (पुं.) चंद्रमा -- चंद्रन्

चंदा (पुं.) किसी परोपकारी अथवा सार्वजनिक कार्य के लिए दी या ली जाने वाली व्यक्तिगत आर्थिक सहायता -- संभावन

चंदा (पुं.) किसी संस्था/पत्रिका आदि को उसके सदस्य, ग्राहक आदि बने रहने के लिए दिया जाने वाला धन -- वरिसंख्या

चंद्रमा (पुं.) पृथ्वी का एक प्रसिद्ध उपग्रह, चाँद -- चंद्रन्

चकबंदी (स्त्री.) जमीन का बड़े-बड़े टुकड़ों में बँटवारा -- (भूमि) अळन्नु-तिरिक्कल्

चकबंदी (स्त्री.) छोटे-छोटे खेतों को एक में मिला कर उनके बड़े-बड़े चक या विभाग बनाने की क्रिया या भाव -- वरंपिटल्

चकराना (अ.क्रि.) चकित होना -- अंबरन्नु पोवुक

चकराना (अ.क्रि.) सिर घूमना -- तल चुट्टुक

चकराना (स.क्रि.) किसी को चक्कर या फेर में डालना, चकित करना -- चुट्टिक्कुक, परिभ्रमि-प्पिक्कुक

चकित (वि.) आश्चर्य में आया या पड़ा हुआ -- आश्चर्य प्पोट्ट

चक्की (स्त्री.) पीसने कूटने व दलने की मशीन के लिए पत्थर का उपकरण -- तिरिकल्लु

चक्र (पुं.) गोलाकार वस्तु जैसे गाड़ी का पहिया आदि -- चक्रम् (वाण्डि)

चक्र (पुं.) गोलाकार एक अस्त्र -- चक्रायुधम्

चक्र (पुं.) देश भक्ति या वीरता आदि के लिए सरकार की ओर से दिया जाने वाला पदक या तमगा -- वीर चक्रम्

चखना (स.क्रि.) किसी खाद्य वस्तु का स्वाद जानने के लिए उसका थोड़ा अंश मुँह में रखना या खाना -- रुचिच्चु नोक्कुक

चटपटा (वि.) मिर्च-मसालेदार, तीक्ष्ण स्वाद का -- ऐरिवुम् पुळियुम् उळ्ळ

चटाई (स्त्री.) फूस, सींक, पतली पट्टियों आदि का बिछावन -- पाय

चट्टान (स्त्री.) पत्थर का बहुत बड़ा और विशाल खंड -- पार

चढ़ना (अ.क्रि.) ऊपर की ओर बढ़ना -- कयरुक

चढ़ना (अ.क्रि.) सवार होना -- कयरुक

चढ़ना (अ.क्रि.) उन्नति करना -- उयर्च्च प्रापिक्कुक

चढ़ना (अ.क्रि.) बही खाते आदि में नामों, रकमों आदि का अंकित होना -- कणक्किल् कयट्टुक

चढ़ाई (स्त्री.) ऊँचाई की ओर जाने वाला मार्ग -- कपट्टम्

चढ़ाई (स्त्री.) आक्रमण -- आक्रमणम्

चतुर (वि.) कार्य और व्यवहार में कुशल, प्रखर -- मिटुक्कुळ्ळ

चतुर (वि.) चालाक, धूर्त -- कौशल-क्कारन्

चपरासी (पुं.) कार्यालय के कागज-पत्र आदि लाने या ले जाने वाला कर्मचारी -- शिपायि

चपरासी (पुं.) अरदली -- आर्डरलि

चपल (वि.) स्थिर न रहने वाला -- स्थिरमल्लात्त

चबाना (स.क्रि.) खाद्य वस्तुओं को दाँतों से काटकर बारीक करना -- चवय्क्कुक

चबूतरा (पु.) मकान के अगले भाग में बैठने के लिए बनाई गई खुली चौकोर और चौरस जगह -- तिण्ण, वरांत, पूमुखम्

चमक (स्त्री.) प्रकाश, क्रांति -- प्रकाशम्, तिळक्कम्

चम़कना (अ.क्रि.) प्रकाश या ज्योति से युक्त होना -- मिन्नुक

चम़कना (अ.क्रि.) क्रांति या आभा से युक्त होना -- प्रकाशिक्कुक, तिळङ्ङुक

चम़कना (अ.क्रि.) उन्नति करना -- उयरुक

चमड़ा (पुं.) मृत पशुओं की खाल का प्रसंस्कृत रूप -- तोल्

चमत्कार (पुं.) अलौकिक-सा जान पड़ने वाला काम या बात, करामात -- चमत्कारम्

चमत्कार (पुं.) आश्चर्यजनक कार्य -- आश्चर्यम्

चरण (पुं.) किसी पूज्य व्यक्ति के पाँव के लिए आदर सूचक शब्द -- चरणम्, पादम्

चरण (पुं.) किसी छंद, श्लोक आदि की पूरी पंक्ति अथवा चौथाई भाग -- चरणम्, पादम्

चरना (स.क्रि.) पशुओं का खेतों आदि में उगी हुई घास, पौधे आदि खाना -- मेयुक

चरबी (चर्बी) (स्त्री.) प्राणियों के शरीर में सफेद या हल्के पीले रंग का गाढ़ा, चिकना तथा लसीला पदार्थ -- कोळुप्पु

चरवाहा (पुं.) वह व्यक्ति जो दूसरों के पशुओं को चराकर अपनी जीविका चलाता हो -- कन्नुकालि मेय्ककुन्नवन्

चरस (स्त्री.) गाँजे के पौधों के डंठलों पर से उतारा हुआ एक प्रकार का हरा या हल्का पीला गोंद या चेप, जिसे लोग गाँजे या तंबाकू की तरह पीते हैं -- चरस्

चरागाह (पुं.) पशुओं के चरने का स्थान, जहाँ प्रायः घास आदि उगी रहती है -- मेच्चिल स्थलम्

चरित्र (पुं.) व्यक्ति के आचरण या व्यवहार को दिखलाने वाले लक्षणों का समुच्चय, आचरण -- स्वभावम्

चरित्र (पुं.) कहानी, नाटक आदि का कोई पात्र -- कथा पात्रम्

चर्चा (स्त्री.) बातचीत, वार्तालाप -- चर्चा

चर्चा (स्त्री.) अफवाह -- किंवदंति ऐनिह्रास

चलचित्र (पुं.) सिनेमा (फिल्म) -- चलच्चित्रम्, सिनिम

चलना (अ.क्रि.) पैरों, पहियों आदि की सहायता से अथवा किसी प्रकार की गति से युक्त होकर आगे बढ़ना -- नटक्कुक

चलना (अ.क्रि.) किसी चीज का ठीक तरह से उपयोग या व्यवहार में आते रहना -- उपयोग-प्पेटुक

चलनी (छलनी) (स्त्री.) आटा, चाय आदि छानने का उपकरण -- अरिप्प

चश्मा (पुं.) ऐनक -- मूक्कुकण्णाट

चश्मा (पुं.) जल-स्रोत, सोता -- अरुवि

चसका (पु.) किसी वस्तु या कार्य से होने वाली तृप्ति को बार-बार पाने की लालसापूर्ण प्रवृत्ति, चाट, लत -- कोति, आर्त्ति

चहकना (अ.क्रि.) पक्षियों का आनंदित होकर कूजना, चहचहाना -- चिलक्कुंक

चहकना (अ.क्रि.) उमंग या प्रसन्नता से बढ़-चढ़ कर बोलना -- (उत्साहम् कोण्डु) कूडुतल संसारिक्कुक

चाँटा (पुं.) हथेली तथा हाथ की उंगलियों से किसी के गाल पर किया जाने वाला प्रहार, थप्पड़, तमाचा, झापड़ -- चेकिट्टत्तटि, प्रहरम्

चाँदनी (स्त्री.) चाँद का प्रकाश -- चंद्रिक, निलावु

चाँदनी (स्त्री.) छत पर या ऊपर की ओर तानने का कपड़ा -- मेल्क्कट्टि

चाँदी (स्त्री.) सफेद रंग की एक चमकीली धातु, जो गहने, सिक्के आदि गढ़ने के काम आती है -- वेळ्ळि

चाकू (पुं.) फल आदि काटने का छोटा औजार, छुरी -- पिच्चात्ति, पेनाक्कत्ति

चाटना (स.क्रि.) जीभ लगाकर या जीभ से पोंछ कर खाना -- नक्कुक

चापलूस (वि.) खुशामदी, चाटुकार -- मुखस्तुति-क्कारन्, सेवक्कारन्

चाबी (स्त्री.) ताली, कुंजी -- ताक्कोल्

चांबुक (पुं.) कोड़ा -- चाट्ट

चारपाई (स्त्री.) खाट, छोटा पलंग -- कट्टिल्

चारा (पुं.) पशुओं के खाने की घास, पत्ती, डंठल आदि -- तीट्ट, कालित्तीट्ट

चारा (पुं.) चिड़ियों, मछलियों आदि को फँसाने अथवा जीवित रखने के लिए खिलाई जाने वाली वस्तु -- तीट्ट, कालित्तीट्ट

चारा (पुं.) उपाय, इलाज, युक्ति -- वळि, मार्गम्

चाल (स्त्री.) चलने की क्रिया या भाव -- नटक्कल्

चाल (स्त्री.) गति -- गति

चाल (स्त्री.) धूर्तता -- वंचन

चाल (स्त्री.) शतरंज, ताश आदि के खेल में अपनी बारी आने पर गोटी, पत्ता आदि आगे बढ़ाने या सामने लाने की क्रिया -- करु नीक्कम्

चालक (वि.) चलाने वाला (ड्राइवर) -- ड्राइवर

चालक (वि.) धूर्त -- वंचकन्

चालान (चलान) (पुं.) रवन्ना -- चेल्लान्

चालान (चलान) (पुं.) अभियोगारंभ -- कुट्टपत्रम् कोडुक्कल् टुक्कल्

चाहना (स.क्रि.) इच्छा करना -- आग्रहिक्कुक

चाहना (स.क्रि.) प्रेम करना -- प्रेमिक्कुक

चिंघाड़ना (अ.क्रि.) हाथी का बोलना या जोर से चिल्लाना -- चिन्नम् विळिक्कुक

चिंतन (पुं.) कोई बात समझने या सोचने के लिए मन में बार-बार किया जाने वाला उसका ध्यान या विचार, मनन -- चिंतनम्, मननम्

चिंता (स्त्री.) सोच, फिक्र -- चिंत, विचार

चिंता (स्त्री.) परवाह -- वकवय्यु

चिकना (वि.) जो छूने में खुरदरा न हो -- मिनुसमाय

चिकना (वि.) जिस पर पैर आदि फिसले -- वळ्क्कुन्न

चिकना (वि.) जिसमें तेल आदि कोई चिकना पदार्थ लगा हो -- मेळुक्कुळ्ळ

चिकित्सा (स्त्री.) रोग-निवारण का उपाय,इलाज -- चिकित्स

चिट्ठी (स्त्री.) पत्र, खत -- एळ्त्तु

चिड़ियाघर (पुं.) वह स्थान, जहां अनेक प्रकार के पशु-पक्षी आदि जन साधारण को प्रदर्शित करने के लिए एकत्र करके रखे जाते हैं -- मृगशाल

चिढ़ाना (स.क्रि.) नाराज करना -- देष्यप्पेटुत्तुक

चिढ़ाना (स.क्रि.) नकल उतारना -- अरिशम् कोळळि-क्कुक

चितकबरा (वि.) सफेद रंग पर काले लाल या पीले दानों वाला -- चित्रवर्ण-मुळ्ळ

चिता (स्त्री.) चुनकर रखी हुई लकड़ियों का ढेर, जिस पर मुर्दा जलाया जाता है -- चित

चित्त (पुं.) मन की एक अवस्था, अंतःकरण -- चित्तं

चित्र (पुं.) तस्वीर (फोटो) -- चित्रं

चित्र (पुं.) पेंटिंग -- पेयिंटिङ्

चित्रकार (पुं.) चित्र बनाने वाला -- चित्रकारन्

चिनगारी (स्त्री.) आग का छोटा कण -- NA

चिनगारी (स्त्री.) कोई ऐसी छोटी बात जिसका आगे चलकर बहुत उग्र या भीषण प्रभाव हो सकता हो (लाक्षणिक) -- तीप्पोरि

चिपकना (अ.क्रि.) किसी लसीली वस्तु के कारण दो वस्तुओं का परस्पर जुड़ना -- ओट्टि-पिटिक्कुक

चिपकना (अ.क्रि.) व्यक्तियों या वस्तुओं का पार-पास सटना -- वळरे अटुत्तुचेर्न्निरिक्कुक

चिमनी (स्त्री.) मकान या कारखाने आदि का धुआँ बाहर निकालने वाली विशेष नली, लैंप या लालटेन के काँच का आवरण -- चिम्मिनि

चिल्लाना (अ.क्रि.) जोर से बोलना, शोर करना, हल्ला करना -- निरविळिक्कुक

चिह्न (पुं.) दाग, धब्बा, निशानी -- चिह्नम्

चिह्न (पुं.) वह शब्द, बात या छाप, जिससे किसी चीज की पहचान हो -- पाटु

चीखना (अ.क्रि.) भावावेश में जोर से चिल्लाना -- निलविळिक्कुक

चीखना (अ.क्रि.) बहुत जोर से बोलना या कर्ण-कटु शब्द निकालना -- मुरविळिकूट्टुक

चीरना (स.क्रि.) किसी चीज को धारदार उपकरण द्वारा काट या फाड़ कर अलग या टुकड़े करना -- कीरुक

चुंगी (स्त्री.) स्थानीय शासन द्ववारा बाहर से आने वाले माल पर वसूल किया जाने वाला कर -- चुंगम्

चुंबक (पुं.) एक प्रकार का पत्थर या धातु, जिसमें लोहे को अपनी ओर आकर्षित करने की शक्ति होती है -- कांतं

चुगना (स.क्रि.) पक्षियों का अपनी चोंच से अनाज के कण, कीड़े मकोड़े आदि उठा-उठा कर खाना -- कोत्तुक, कोरिककुक

चुगलखोर (वि.) किसी की हानि करने के उद्देश्य से पीठ पीछे उसकी बुराई करने वाला -- एषणिक्कारन्

चुटकुला (पुं.) चमत्कारपूर्ण और विलक्षण उक्ति अथवा बात, जिसको सुन कर हँसी आए -- फलितम्, हास्यशकलम्

चुनना (स.क्रि.) बहुत में से कुछ को पसंद करके लेना -- तिरञ्ञेटुक्कुक

चुनना (स.क्रि.) छोटी वस्तुओं को हाथ, चोंच आदि से एक-एक करके उठाना -- पेरुक्कुक

चुनरी (स्त्री.) वह रंगीन विशेषतः लाल कपड़ा, जिसके बीच-बीच में बुंदकियाँ होती हैं -- पुळ्ळि सारि

चुनाव (पुं.) चुनने की क्रिया या भाव -- तिरियल्

चुनाव (पुं.) निर्वाचन -- तेरञ्ञेटुप्पु

चुनौती (स्त्री.) अपनी बात मनवाने के लिए किसी को उत्तेजित करते हुए सामना करने के लिए कहना, ललकार -- वेल्लुविळि

चुप (वि.) मौन, खामोश -- मौनमाय

चुपड़ना (स.क्रि.) किसी गीली या चिपचिपी वस्तु का लेप करना -- पुरट्टुक

चुभन (स्त्री.) किसी नुकीली वस्तु का दबाव पाकर किसी नरम वस्तु में धँसने की क्रिया या भाव -- कुत्तुक, तरय्कुक

चुभन (स्त्री.) उक्त क्रिया के कारण होने वाली टीस या पीड़ा -- कुत्तल्, वेदन

चुभाना (स.क्रि.) कोई नुकीली चीज गड़ाना या धँसाना -- कुत्ति-यिरक्कुक

चुराना (स.क्रि.) छलपूर्वक परायी वस्तु हरण करना -- मोष्टिक्कुक

चुराना (स.क्रि.) भय, संकोच आदि के कारण कोई चीज या बात दबा रखना या दूसरों के सम्मुख न लाना -- अमर्त्ति वेक्कुक

चुस्त (वि.) फुर्तीला -- चोटियुळ्ळ

चुस्त (वि.) खूब कसा हुआ -- मुरुकिय

चूकना (अ.क्रि.) भूल करना -- तेट्टु चेय्युक

चूकना (अ.क्रि.) सुअवसर खो देना -- अवसरम् नष्टप्पेटुत्तुक

चूड़ी (स्त्री.) सोने, चाँदी, काँच, हाथीदाँत आदि से निर्मित स्त्रियों का हाथ में पहनने का एक वृत्ताकार गहना -- वळ

चूड़ी (स्त्री.) किसी पेंच के वृत्ताकार खाँचे -- पिरि

चूना (पुं.) कुछ विशिष्ट प्रकार के कंकड़ पत्थरों, शंख, सीप आदि को फूँक कर बनाया जाने वाला एक प्रसिद्ध तीक्ष्ण और सफेद क्षार, जिसका उपयोग दीवारों पर सफेदी करने और पान आदि के साथ खाने के लिए किया जाता है -- चुण्णंबु, कुम्मायम्

चूना (अ.क्रि.) किसी तरल पदार्थ का किसी छेद या संधि में से टपकना या बाहर निकलना -- इट्टु वीळुक

चूमना (स.क्रि.) होठों से होंठ, हाथ, गाल, मस्तक आदि अंगों का अथवा किसी पदार्थ का स्पर्श करना -- चुंबिक्कुक

चूरन (चूर्ण) (पुं.) खूब महीन पीसी हुई बुकनी (पाउडर) -- चूर्णम्, मिनुसप्पोटि

चूल्हा (पुं.) मिट्टी, लोहे आदि का वह उपकरण जिसमें चीजें पकाने या गरम करने के लिए कोयला, लकड़ी आदि जलाई जाती है -- अडुप्पु

चूसना (स.क्रि.) जीभ और होंठ के संयोग से किसी वस्तु (विशेषतः फल) का रस अंदर खींचना -- उरुंचुक

चूसना (स.क्रि.) किसी गीली वस्तु की आर्द्रता सोखा लेना -- उणक्कुक

चूसना (स.क्रि.) किसी का सत्व या सर्वस्व बलपूर्वक या अनुचित रूप से हड़प लेना -- चूषणम् चेय्युक

चेहरा (पुं.) गर्दन के ऊपर का अगला भाग, जिसमें मुँह, आँख, नाक, कान, मस्तक आदि होते हैं, मुखड़ा -- मुखम्

चेहरा (पुं.) मुखौटा -- मुखंमूटि

चोंच (स्त्री.) पक्षियों के मुँह का नुकीला और आगे की ओर निकला हुआ भाग -- कोक्कु, चुण्टु (पक्षियुटे)

चोट (स्त्री.) किसी वस्तु के आघात से शरीर पर होने वाला घाव -- मुरिवु

चोट (स्त्री.) वार -- वेट्टु

चोटी (स्त्री.) सबसे ऊपर का भाग -- शिखरम्

चोटी (स्त्री.) स्त्रियों के गुँथे हुए सिर के बाल, वेणी -- पिन्नियमुटि

चोटी (स्त्री.) हिंदु पुरुषों के सिर के पिछले भाग के मध्य के थोड़े से लंबे बाल, जिन्हें कटवाया नहीं जाता -- कुटुम

चोर-बाजार (पुं.) व्यापार का वह क्षेत्र, जहाँ चीजें चोरी से और/या अधिक ऊँचे दाम पर खरीदी या बेची जाती हैं -- कळ्ळ-क्वंपोळं

चोरी (स्त्री.) चुराने की क्रिया या भाव -- मोषणम्

चोरी (स्त्री.) दूसरों से कोई बात छिपाने की क्रिया या भाव -- कार्यओळिक्कल्

चौंकना (अ.क्रि.) एकाएक किसी प्रकार की आहट, ध्वनि या शब्द सुनकर कुछ उत्तेजित अथवा विकल हो उठना -- ञेट्टुक

चौंकना (अ.क्रि.) चकित होना -- परिभ्रमिक्कुक

चौक (पुं.) आँगन, सहन -- मुट्टम्

चौक (पुं.) चबूतरा -- तिण्ण, पूमुखम्

चौक (पुं.) चौराहा -- नाल्क्कवल

चौकड़ी (स्त्री.) हिरन की वह दौड़ जिसमें वह चारों पैर एक साथ उठा कर छलाँग मारता हुआ आगे बढ़ता है -- मानिन्टे ओट्टम्

चौकस (वि.) जो अपनी अथवा किसी की रक्षा के लिए पूर्णतः सचेत हो -- जाग्रतयाय

चौकस (वि.) ठीक, दुरुस्त, संपूर्ण -- शरियाय, संपूर्णमाय

चौकीदार (पुं.) किसी स्थान पर पहरे का काम करने वाला कर्मचारी -- चौकीदार्, पारावुकारन्

चौखटा (पुं.) चौखट के आकार का ढाँचा, जिसमें शीशा या तस्वीर आदि को मढ़ा जाता है -- चट्टक्कूटु, फ्रेयिम्

चौड़ा (वि.) जिसके दोनों पाश्र्वों के बीच में अधिक विस्तार हो, जो सँकरा न हो -- वीतियुळ्ळ

चौराहा (पुं.) वह स्थान, जहाँ चारों दिशाओं से आने वाले मार्ग मिलते हों, चौरस्ता -- नाल्क्कवल

छँटनी (स्त्री.) छाँटने की क्रिया -- तिरियल्

छँटनी (स्त्री.) आवश्यकता से अधिक कर्मचारियों को सेवा से हटाने का काम -- पिरिच्चुविटल्

छड़ी (स्त्री.) बाँस, बेंत, लकड़ी आदि की पतली लाठी -- वटि

छत (स्त्री.) चूने, कंकड़ आदि से बनी हुई घर की छाजन, पाटन -- तट्टु

छत (स्त्री.) ऊपर का ढका भाग -- पंदल्

छत (स्त्री.) किसी की समाधि के स्थान पर बना हुआ मंडप -- समाधि मंडपम्

छत (स्त्री.) पैराशूट -- पारच्चूट्टु

छल (पुं.) कपट, धोखेबाजी -- वंचन, चति

छलकाना (स.क्रि.) बरतन में भरे हुए जल आदि को हिलाकर गिराना -- तुळुंबच्चेय्य

छलना (स.क्रि.) धोखा देना, ठगना, भुलावे में डालना -- चतिक्कुक

छलना (स्त्री.) धोखा, वंचना -- चति, वंचन

छल्ला (पुं.) सोने चाँदी आदि के तार को मोड़कर बनाई हुई अँगूठी -- कंपि मोतिरम्

छल्ला (पुं.) उक्त प्रकार की कोई गोलाकार आकृति -- वळयं

छाँटना (स.क्रि.) अनावश्यक अंश अलग करना -- तिरञ्ञु नोक्कुक

छाँटना (स.क्रि.) चुनना -- तिरयुक

छाज (पुं.) सरकंड़ों सींकों आदि का बना हुआ वह उपकरण जिससे अनाज फटका जाता है, सूप -- मुरम्

छाज (पुं.) छप्पर -- मेल्क्कूर

छात्र (पुं.) विद्यार्थी -- विद्यार्थि

छात्रवृत्ति (स्त्री.) विद्यार्थी को विद्याभ्यास के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता -- विद्यार्थिवेतनम्, स्कोळर बिप्पु

छात्रावास (स्त्री.) किसी स्कूल, कालेज के अंतर्गत वह स्थान जहाँ विद्यार्थी रहते हैं -- होस्टल्

छानना (स,क्रि.) आटे आदि को या तरल पदार्थ को चलनी या कपड़े से इस प्रकार निकालना जिसमें मोटा अंश रह जाए और महीन अंश नीचे गिर जाए -- अरिक्कुक

छानना (स,क्रि.) खोज, जाँचना -- अन्वेषिक्कुक, परिशोधिक्कुक

छान-बीन (स्त्री.) जाँच-पड़ताल, खोजबीन -- अन्वेषणम्, परिशोधन

छाप (स्त्री.) वह ठप्पा या साँचा, जिससे कोई चीज छापी जाए, ठप्पा -- मुद्र

छाप (स्त्री.) प्रभाव, असर -- स्वाधीनम्

छापना (स,क्रि.) यंत्रों ठप्पों आदि की सहायता से अक्षर, चित्र आदि की छपाई करना -- अच्चटिक्कुक

छापना (स,क्रि.) पुस्तक, लेख, समाचार-पत्र आदि प्रकाशित करना -- प्रसाधनम् चेय्युक, प्रकाशिप्पि क्कुक

छापा (पुं.) ठप्पा -- मुद्र

छापा (क्रि.) कुछ विशिष्ट वस्तुएँ पकड़ने के लिए पुलिस का अचानक धावा -- मिन्नल् परिशोधन

छाया (स्त्री.) प्रकाश के अवरोध से उत्पन्न हलका अंधेरा -- निऴल्

छाया (स्त्री.) परछाई, प्रतिबिंब -- प्रतिबिंबम्, निळल्

छाया (स्त्री.) सादृश्य, प्रतिकृति -- सादृश्यम्

छाल (स्त्री.) वृक्षों आदि के तने पर का कड़ा खुरदरा और मोटा छिलका -- मरवुरि, मरप्पट्ट

छाला (पुं.) शरीर के किसी अंग पर गरम पानी आदि पड़ने अथवा लगातार रगड़ के कारण होने वाला मांस का कोमल और नरम उभार, फफोला -- पोळ्ळल्, पोळन्

छावनी (स्त्री.) वह स्थान, जहाँ सेना रहती हो, सैनिकों की बस्ती -- पाळयम्

छिड़कना (स.क्रि.) जल या कोई तरल पदार्थ इस प्रकार फेंकना कि उसके छींटें बिखर कर चारों ओर पड़े -- तळिक्कुक

छिड़काव (पुं.) छिड़कने की क्रिया या भाव -- तळिक्कल्

छिपाना (स.क्रि.) किसी प्राणी या वस्तु को ऐसी जगह या स्थिति में रखना, जहाँ कोई देख न सके, आवरण या ओट में रखना, ढाँकना -- ओळिक्कुक

छिपाना (स.क्रि.) किसी को किसी बात की जानकारी न कराना या न होने देना -- अरियिक्का तिरिक्कुक

छींकना (अ.क्रि.) शारीरिक क्रिया जिसमें नाक से वायु बहुत जोर से शब्द करते हुए निकलती है -- तुम्मुक

छिनना (स.क्रि.) किसी से कोई वस्तु आदि जबरदस्ती ले लेना -- नट्टिप्परिक्कुक

छिलना (स.क्रि.) किसी चीज के ऊपर की परत को खींच कर या खुरचकर उससे अलग करना -- चींतुक, पोळिक्कुक

छुट्टी (स्त्री.) काम बंद रहने का दिन -- ओऴिवु

छुट्टी (स्त्री.) जाने की अनुमति -- अनुवादम्

छुट्टी (स्त्री.) छुटकारा -- मोचनम्

छुरा (पुं.) लंबे फलवाला बड़ा चाकू -- वलिय कत्ति

छूट (स्त्री.) बंधन आदि से मुक्ति, छुटकारा -- इळवु, मोचनम्

छूट (स्त्री.) रियायत, सुविधा -- सौजन्यम्, किऴिवु

छूट (स्त्री.) कुछ करने की आजादी -- प्रवर्तन, स्वातंत्र्यम्

छूत (स्त्री.) गंदी, अशुचि या रोग संवाहक वस्तु का स्पर्श या संसर्ग -- तोटील

छूत (स्त्री.) अपवित्र, वस्तु को छूने से होने वाला दोष -- तीण्डल्

छूना (स.क्रि.) किसी वस्तु का शरीर के किसी अंग अथवा पहने हुए वस्त्र से लगाना या स्पर्श होना -- तोटुक

छेड़ना (स.क्रि.) किसी को उत्तेजित करने के लिए कुछ कहना या करना, चिढाना -- शुंठि पिटिप्पिक्कुक

छेड़ना (स.क्रि.) किसी वस्तु को इस प्रकार छूना या स्पर्श करना कि उसके फलस्वरूप कोई क्रिया या व्यापार घटित हो -- NA

छेदना (स.क्रि.) छेद अथवा सुराख करना -- तुळय्कुक

छोटा (वि.) मान, विस्तार आदि में अपेक्षाकृत कम या थोड़ा -- चेरिय

छोटा (वि.) उम्र में कम -- इळय

छोटा (वि.) तुच्छ, हीन -- तुच्छमाय

छोड़ना (स.) बंधन से मुक्त करना, स्वतंत्र करना -- विटुक, क्षमिक्कुक

छोड़ना (स.) माफ करना -- क्षमिक्कुक

छोड़ना (स.) त्याग देना -- उपेक्षिक्कुक

छोड़ना (स.) चलाना, फेंकना -- विदुक, ऐरियुक

छोड़ना (स.) किसी कार्य या उसके अंग को न करना या भूल से छोड़ देना -- विट्टुकलयुक

छोर (पुं.) आंतिम सिरा, किनारा -- तीरम् अट्टम्

जंग (पुं.) युद्ध -- युद्धम्

जंग (पुं.) वायु और नमी के प्रभाव से उत्पन्न होकर लोहे पर जमने वाली मटमैली परत -- तुरुंबु

जंगल (पुं.) वन -- काटु

जंगल (पुं.) निर्जन स्थान -- विजन स्थलम्

जंगला (पुं.) बरामदे, छज्जे आदि के किनारे-किनारे की गई रचना, जिसमें लोहे या लकड़ी की छड़ें या जाली लगी हो -- जनल्-अऴि

जंजीर (स्त्री.) धातु की बहुत-सी कड़ियों को एक-दूसरे में पहनाकर बनाई जाने वाली लड़ी, साँकल, श्रृंखला -- चङ्ङल

जंतु (पुं.) प्राणी, जीव -- जीवि, जीव जंतु

जकड़ना (स.क्रि.) कोई चीज इस प्रकार कसकर पकड़ना या बांधना कि वह हिलडुल न सके -- कुरुक्कुक

जकड़ना (स.क्रि.) शीत आदि के कोप से शरीर का ऐंठना या तन जाना, अकड़ना -- विरङ्ङलिक्कुक

जगत (पु.) संसार, विश्व -- लोकम्

जगत (स्त्री.) कुएँ के चारों ओर बना हुआ चबूतरा, जिस पर खड़े होकर पानी खींचा जाता है -- किणट्टुकर

जगमगाना (अ.क्रि.) अपने या दूसरे के प्रकाश से चमकने लगना -- प्रकाशिक्कुक, तिळङ्ङुक

जटिल (वि.) कठिन, पेचीदा -- जटिलमाय, विषमम् पिटिच्च

जड़ (वि.) जिसमें जीवन अथवा चेतना न हो, निर्जीव, अचेतन -- जडं, जीवनिल्लात्तु

जड़ (स्त्री.) पेड़-पौधों आदि का नीचे वाला भाग जो जमीन के अंदर हो, मूल -- वेरु

जनगणना (स्त्री.) किसी देश या राज्य के निवासियों की गिनती -- जनसंख्या ऐटुक्कल, कानेषुमारी

जनजाति (स्त्री.) जंगलों, पहाड़ों आदि पर रहने वाली आदिम जाति, जो साधारणतः एक ही पूर्वज की वंशज हो और जिसका प्रायः एक ही पेशा, रहन-सहन और विचार आदि हों -- गोत्रजाति

जनतंत्र (पुं.) ऐसी शासन प्रणाली, जिसमें देश या राज्य का शासन जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा होता हो -- प्रजायत्तभरणम्, जनाधिपन्यम्

जनता (स्त्री.) किसी देश या राज्य में रहने वाले व्यक्ति, जनसाधारण, प्रजा -- जनत

जनेऊ (पुं.) हिंदुओं में बालकों का यज्ञोपवीत नामक संस्कार, जिसमें सूत की तिहरी माला पहनाई जाती है -- उपनयनम्, पूणूकल्याणंम्

जनेऊ (पुं.) यज्ञोपवीत, ब्रह्मसूत्र -- यज्ञोपवीतम्, पूणुनल्

जन्मकुंडली (स्त्री.) वह चक्र, जिसमें जन्मकाल के ग्रहों की स्थिति बताई गई हो -- जातकम्

जन्म-दिन (पुं.) वह दिन जब किसी ने जन्म लिया हो -- पिरन्नाळ्

जन्म-भूमि (स्त्री.) वह देश, राज्य या स्थान, जहाँ किसी का जन्म हुआ हो, जन्म स्थान -- जन्म भूमि

अपना (स.क्रि.) फल-प्राप्ति के लिए किसी शब्द, पद वाक्य आदि को श्रद्धापूर्वक मन ही मन बार-बार कहना -- जपिक्कुक, उरुवुटुक

जबरदस्त (वि.) प्रबल अथवा स्वभाव से कठोर घटना या प्रतिक्रिया -- प्रबलनाय

जमा (वि.) बचाकर या जोड़कर रखा हुआ -- संपादिच्च, चेर्त्तु वेच्च

जमा (वि.) जोड़ (गणित) -- कूट्टल्

जमा (वि.) खाते या बही का वह भाग या कोष्ठक, जिसमें प्राप्त हुए धन का ब्यौरा दिया जाता है -- वरवु कोलम्

जमानत (स्त्री.) वह जिम्मेदारी, जो किसी न्यायालय द्वारा इस रूप में दी जाती है कि बुलाने पर न्यायालय में उपस्थित न होने की स्थिति में जमा की गई धनराशि हरजाने के तौर पर जब्त कर ली जाती है -- जाम्यम्

जमानत (स्त्री.) किसी व्यक्ति विशेष के लिए दी गई मौखिक या लिखित जानकारी -- सेक्यूरिट्टि, जाम्यत्तुक

जमाना (स.क्रि.) किसी तरल पदार्थ को शीत अथवा अन्य किसी प्रक्रिया से ठोस बनाना -- उरप्पिक्कुक

जमाना (स.क्रि.) एक वस्तु को दूसरी वस्तु पर दृढ़तापूर्वक स्थित करना या बैठाना -- उरप्पिक्कुक

ज़माना (पुं.) काल, समय -- कालम्

जमींदार (पुं.) जमीन का मालिक, भूमि का स्वामी -- जमींदार, भूस्वामि जन्मि

जम्हाई (स्त्री.) एक शारीरिक क्रिया, जिसमें मनुष्य अपनी तंद्रा व सुस्ती भगाने के लिए पूरा मुँह खोलता है -- कोट्टुवा

जयंती (स्त्री.) जन्मतिथि पर मनाया जाने वाला उत्सव -- जन्म दिनोत्सवम् पिरन्नाळ्

जयंती (स्त्री.) किसी महत्वपूर्ण कार्य के आरंभ होने की वार्षिक तिथि पर होने वाला उत्सव -- वार्षिकोत्सवम्

जयमाला (स्त्री.) विजेता को पहनाई जाने वाली माला -- जयमाल्यम्, जयमाल

जयमाला (स्त्री.) विवाह के समय फूलों आदि की वह माला, जो कन्या अपने भावी पति के गले में डालती है -- वरणमाल्यम्

जरी (स्त्री.) सोने के वे तार, जिनसे कपड़ों पर बेल-बूटे आदि बनाए जाते हैं -- जारिककंपि, कसवुं

जरूर (क्रि.वि.) अवश्य -- तीर्च्चयायुम्

जर्जर (वि.) जीर्ण-शीर्ण, कमजोर, बेकाम -- जर्जरमाय, बलहीनमाय

जर्जर (वि.) टूटा-फूटा -- जर्जरमाय, बलहीनमाय

जलचर (पुं.) जल में रहने वाले जीव जल में रहने वाले जीव-जंतु -- जलजीवि

जलना (अ.क्रि.) आग का संयोग होने पर किसी वस्तु से लपट, प्रकाश, ताप या धुआँ आदि निकलने की स्थिति -- कत्तुक

जलना (अ.क्रि.) उक्त प्रकार के संयोग से विकृत होना, झुलसना या भस्म होना -- कत्तिप्पोकुक, चारमाकुक

जलना (अ.क्रि.) ईर्ष्या, द्वेष आदि से कुढ़ना, संतृप्त होना -- असूयप्पेटुक

जलपान (पुं.) कलेवा, नाश्ता -- लघु भक्षणम्

जलप्रपात (पुं.) ऊँचाई से गिरने वाला जलप्रवाह, झरना -- वेळ्ळच्चाट्टम्

जलयान (पुं.) वह यान या सवारी, जो जल में चलती हो -- तोणि, वळ्ळम्, कप्पल्

जलवायु (पुं.) किसी प्रदेश का प्राकृतिक वातावरण (गर्मी, ठंड, वर्षा आदि) जिसका विशेष प्रभाव जीवों, जंतुओं, वनस्पतियों आदि की उपज, विकास तथा स्वास्थ्य पर पड़ता है -- शीतोष्णावस्था, कालावस्थ

जलसा (पुं.) उत्सव, समारोह, अधिवेशन, बैठक -- उत्सवम्, सम्मेलनम्

जलाशय (पुं.) तालाब, झील -- जलाशयम्

जलूस (जुलूस) (पुं.) गलियों, बाजारों, सड़कों आदि पर प्रचार, प्रदर्शन आदि के लिए निकलने वाला लोगों का समूह -- जाथ, घोषयात्रा

जल्दी (स्त्री.) शीघ्रता, तेजी, उतावलापन -- तिरक्कु, धृति

जहाँ (क्रि.वि.) जिस जगह, जिस स्थान पर -- ऍविटे

जहाज (पुं.) जलपोत -- कप्पल्

जाँचना (स्त्री.) छान-बीन, परख, तहकीकात -- अन्वेषणम्, परिशोधनम्

जाँचना (स.क्रि.) किसी प्रक्रिया, प्रयोग आदि के द्वारा किसी वस्तु की प्रामाणिकता, शुद्धता आदि का पता लगाना -- परीक्षक्कुक, परिशोधक्कुक

जाँचना (स.क्रि.) किसी बात सिद्धांत आदि की उपयुक्तता, सत्यता का पता लगाना -- सत्य स्थिति अन्वेषिक्कुक

जागरण (पुं.) जागते रहने की अवस्था या भाव -- जागृति, जाग्रदवस्थ

जागरण (पुं.) किसी उत्सव, पर्व आदि के उपलक्ष्य में रात को जागते रहने की स्थिति -- उरक्कमिळप्पु

जाड़ा (पुं.) सरदी, शीत -- तणुप्पु

जाड़ा (पुं.) शीतकाल -- शीतकालम्

जाति (स्त्री.) जात, संप्रदाय, नस्ल -- जाति

जाति (स्त्री.) पदार्थों या जीव-जंतुओं की आकृति, गुण, धर्म आदि की समानता के विचार से किया हुआ विभाजन, वर्ग -- वर्गम्

जादू (पुं,) बुद्धि के कौशल् और हाथ की सफाई से दिखाया जाने वाला कोई खेल, जिसका रहस्य न समझने के कारण उसे अलौकिक कृत्य समझा जाए -- इंद्रजालम्, मायाजालम्

जादू (पुं,) किसी वस्तु का वह गुण या शक्ति, जिसके कारण उस वस्तु की ओर लोग बरबस आकृष्ट हो जाते हैं, वशीकरण -- वशीकरणम्

जादूगर (पुं.) जादू के खेल दिखाने वाला व्यक्ति -- ऐंद्र जालिकन्

जादूगर (पुं.) आश्चर्यजनक रीति से विलक्षण कार्य करने वाला -- अद्भुत कृत्यङ्ङ्ळ् चेच्युन्नवन्

जानकारी (स्त्री.) जानकार होने की अवस्था, गुण या भाव का परिचय -- अरिवु

जानना (स.क्रि.) किसी बात, वस्तु, विषय आदि के संबंध की वस्तुस्थिति से अवगत होना -- अरियुक, मनास्सिलाक्कुक

जाना (अ.क्रि.) एक स्थान से चलकर अथवा और किसी प्रकार की गति में होकर दूसरे स्थान पर पहुँचने के लिए आगे या उसकी ओर बढ़ना, गमन या प्रस्थान करना -- पोकुक

जाल (पुं.) धागे, सुतली आदि की विरल बुनी हुई रचना, जो किसी वस्तु या प्राणी आदि को फँसाने के काम आती है -- वलिय कत्ति

जाल (पुं.) फँसाने की युक्ति या फंदा -- कुरुक्कु

जालसाज (पुं.) धोखाधड़ी करने वाला, धूर्त्त -- वंचकन्, चतियन्

जाला (पुं.) मकड़ी द्ववारा बुना हुआ जाला -- ऐट्टुकालिवल

जाला (पुं.) आँख का एक रोग, जिसमें पुतली पर झिल्ली-सी आ जाती है -- पाटरोगं (कण्णिले)

जाली (स्त्री.) लोहे, प्लास्टिक, कपड़े आदि की कोई वस्तु, जिसमें प्रायः नियत और नियमित रूप से छेद या कटाव हों -- कंबिवल

जाली (वि.) झूठा, नकली या बनावटी -- कृत्रिममाय

जासूस (पुं.) वह व्यक्ति जो गुप्त रूप से अपराधियों प्रतिपक्षियों आदि का भेद लेता हो, गुप्तचर, भेदिया -- चारन्

जासूसी (स्त्री.) जासूस का काम, पद या विद्या -- चारवृत्ति

जासूसी (वि.) जासूस-संबंधी -- कुट्टान्वेषण परमाय

जिज्ञासा (स्त्री.) जानने की इच्छा -- जिज्ञास

जीतना (क्रि.वि.) जिस मात्रा या परिमाण में -- ऐत्र

जिम्मेदार (पुं.) वह, जिस पर किसी कार्य, वस्तु अथवा किसी बात की जवाबदेही हो -- चुमतलक्कारन्

जिला (पुं.) किसी राज्य का वह छोटा विभाग, जो किसी एक प्रधान अधिकारी की देख-रेख में हो और जिसमें कई तहसीलें हों -- जिल्ल

जीतना (स.क्रि.) युद्ध, मुकदमा, खेल आदि में विपक्षी के विरुद्ध सफल होना -- जयिक्कुक

जीतना (स.क्रि.) दमन करना, वश में करना -- ज़ीविक्कुक

जीना (स.क्रि.) जीवित रहना, जीवन के दिन बिताना -- पटि, कोणिप्पटि

ज़ीना (पुं.) सीढ़ी -- NA

जीव (पुं.) जिसमें जीवन है, प्राणी -- जीवि, प्राणि

जीव (पुं.) प्राणियों में रहने वाला चेतन तत्व, जीवात्मा -- चैतन्यम, जीवात्मायुॅ

जीव विज्ञान (पुं.) वह विज्ञान, जिसमें जीव-जंतुओं, वनस्पतियों आदि की उत्पत्ति, विकास, शारीरिक रचना तथा उनके रहन-सहन के संबंध में विचार किया जाता है -- जंतुशास्त्रम्

जीवाणु (पुं.) अतिसूक्ष्म जीव रूप, जिसे आँखों से नहीं देखा जा सकता -- जीवाणु

जुआ (जूआ) (पुं.) गाड़ी, हल आदि के आगे की वह लकड़ी, जो जोते जाने वाले पशुओं के कंधों पर रखी जाती है -- नुकम्

जुआ (जूआ) (पुं.) धन आदि की बाजी लगाकर खेला जाने वाला खेल -- चूत्तु

जुआरी (पुं.) जिसे जुआ खेलने का व्यसन हो -- चूताटि, चूतुकाळिक्कारन्

जुटना (अ.क्रि.) चीज़ों, व्यक्तियों आदि का इकट्ठा होना -- चूताटि, चूतुकाळिक्कारन्

जुटना (अ.क्रि.) किसी काम में जी लगाकर योग देना -- मनस्सु लयिक्कुक

जुड़ना (अ.क्रि.) संबंध होना -- बंधर्प्पुटुक

जुड़ना (अ.क्रि.) इकट्ठा होना -- ओन्निच्यु चेरुक

जुड़वाँ (वि.1) जिनका जन्म एक साथ हुआ हो -- इरट्टपेट्ट

जुड़वाँ (वि.1) (कोई ऐसे दो या अधिक पदार्थ) जो आपस में एक साथ जुड़े, लगे या सटे हों -- इरट्ट

जुताई (जोताई) (स्त्री.) जुतने या जोते जाने की क्रिया, भाव या मजदूरी -- उऴवि, उऴवुकूलि

जुरमाना (जुर्माना) (पुं.) किसी अपराध, दोष या भूल के दंड के रूप में ली जाने वाली धनराशि, अर्थ दंड -- पिऴ

जूझना (अ.क्रि.) शारीरिक बल लगाते हुए प्रयत्न करना, संघर्ष करना, लड़ना -- ऐतिरिटुक

जूड़ा (पुं.) सिर के बालों को लपेट कर बनाया हुआ आकार विशेष -- तलमुटिक्केट्टु

जेब (पुं.) कुरते, कमीज आदि में रुपए-पैसे आदि रखने के लिए बनी हुई छोटी थैली -- पोक्कट्ट

जेबकतरा (पुं.) दूसरों की जेब से रुपए-पैसे उड़ाने वाला -- पोक्कट्ट टिक्कारन्

जेल (पुं.) कारा, कारागार -- जयिल्

जैसा (वि.) जिस आकार-प्रकार या रूप रंग का, जिस तरह का -- यातोरु प्रकारमुळ्ळ

जैसा (वि.) समान, सदृश -- पोलळ्ळ

जोंक (स्त्री.) पानी में रहने वाला एक कीड़ा, जो अन्य जीवों के शरीर से चिपक कर उनका रक्त चूसता है -- अट्ट, कुळयट्ट

जो (सर्व) संबंधवाचक सर्वनाम, विशेषण -- यार्तान्नो

जोखिम (स्त्री.) हानि, अनिष्ट, घाटे की संभावना, खतरा -- नष्टसाध्यत

जोड़ना (स.क्रि.) दो वस्तुओं या टुकड़ों को एक-दूसरे के साथ चिपकाना, सीना, मिलाना आदि -- कूट्टिच्चेर्क्कुक

जोड़ना (स.क्रि.) अपनी ओर से कुछ मिलाना -- कूटटिच्चेर्क्कुक

जोड़ना (स.क्रि.) गणित में संख्याओं का योग करना -- कूट्टुक

जोड़ा (पुं.) एक-सी या एक साथ काम में आने वाली दो वस्तुएँ -- इरट्ट, जोडि

जोड़ा (पुं.) एक ही प्रकार के जीवों का नर-मादा का युग्म -- स्त्रिपुरुष जोडि

जोतना (स.क्रि.) कोई चीज घुमाने या चलाने के लिए उसके आगे कोई पशु बाँधना -- नुकत्तिल् केट्टुक

जोतना (स.क्रि.) खेत को बोए जाने के योग्य बनाने के लिए उसमें हल चलाना -- उळुक

जोरदार (वि.) (व्यक्ति) जिसमें जोर अर्थात् बल हो -- शक्तियुळ्ळ

जोरदार (वि.) (बात) जो तत्वपूर्ण और प्रभावशाली हो -- सारमुळ्ळ

जोर-शोर (पुं.) किसी काम को पूरा करने के लिए लगाया जाने वाला बहुत अधिक जोर और दिलाया जाने वाला अधिक उत्साह तथा प्रयास -- उत्साहवुम्, आवेशवुम्

जोश (पुं.) उबाल -- आवेशम्

जोश (पुं.) आवेश, मनोवेग, उत्साह -- उत्साहम्

जौहरी (पुं.) हीरा, लाल आदि बहुमूल्य रत्न परखने और बेचने वाला व्यापारी -- रत्न व्यापारि

ज्ञान (पुं.) जानकारी, बोध -- ज्ञानम्

ज्ञापन (पुं.) जताने या बताने का कार्य -- अरियिप्पु

ज्यादा (वि.) अधिक, अतिरिक्त, बहुत -- अधिकम्, कूटुतल्

ज्योति (स्त्री.) प्रकाश, उजाला -- ज्योतिस्

ज्योति (स्त्री.) लपट, लौ -- ज्वाल

ज्योतिष (पुं.) ग्रह, नक्षत्रों की गति, स्थिति आदि से उत्पन्न प्रभावों का विचार करने वाला शास्त्र -- जयोतिषम्

ज्वर (पुं.) शरीर की वह गरमी, जो अस्वस्थता प्रकट करे, ताप, बुखार -- ज्वरं

ज्वारभाटा (पुं.) चंद्रमा और सूर्य के आकर्षण से समुद्र की जलराशि का चढ़ाव और उतार -- वेलियेट्टवुम्, इरक्कवुम्

ज्वाला (स्त्री.) आग की लपट या लौ, अग्निशिखा -- ज्वाल

ज्वालामुखी (पुं.) वे पर्वत, जिनकी चोटी में से धुआँ, राख तथा पिघले या जले हुए पदार्थ बराबर अथवा समय-समय पर निकलते रहते हैं -- अग्निपर्वतम्

झंकार (स्त्री.) धातु के किसी पात्र अथवा तार पर आघात होने से निकलने वाली झनझनाहट की ध्वनि -- झंकारम्

झंडा (पुं.) पताका, निशान -- कोटि, चिह्नम्

झगड़ा (पुं.) दो पक्षों में होने वाली कहासुनी या विवाद, लड़ाई -- कलहम्, वऴक्कु

झगड़ालू (वि.) जो प्रायः दूसरों से झगड़ा करता हो -- कलहप्रियन्, वऴक्काळि

झटकना (स.क्रि.) किसी चीज को एकाएक जोर से हिलाना, झटका देना -- कुटयुक

झटका (पुं.) हलका धक्का, झोंका, आघात -- आघातम्

झटपट (क्रि.वि.) अति शीघ्र, तुरंत ही, एकदम -- पेट्टुन्नु, अतिवेगम्

झड़प (स्त्री.) कहासुनी, तकरार -- एट्टुमुट्टल्, उरसल्

झड़ी (वि.) कुछ दिनों तक लगातार होने वाली वर्षा -- तुटर्च्चयाय मऴ

झपकी (स्त्री.) हलकी नींद -- मयक्कम्

झपटना (अ.क्रि.) तेजी से लपकना -- जाटि वीळुक

झरना (पुं.) ऊँचे स्थान से नीचे गिरने वाला जल-प्रवाह, प्रपात -- वेळ्ळच्चाट्टम्

झरना (पुं.) चश्मा, सोता -- अरुवि

झरना (अ.क्रि.) ऊँचे स्थान से पानी या किसी चीज का लगातार नीचे गिरना -- पोळियुक

झरोखा (पुं.) दीवार में बनी हुई जालीदार छोटी खिड़की, गवाक्ष -- किळिवातिल्

झलक (स्त्री.) थोड़े समय के लिए होने वाला दर्शन -- शोभ, मिल्लन्

झलक (स्त्री.) प्रतिबिंब -- मिन्नाट्टम्

झाँकी (स्त्री.) किसी पूज्य या प्रिय वस्तु, घटना या व्यक्ति का सुखद अवलोकन, दर्शन -- काळ्च्च, दर्शनम्

झाँकी (स्त्री.) सज़ीव दृश्य, नाटकीय दृश्य, मनोहर दृश्य -- केट्टुकाळ्च

झाग (पुं.) किसी तरल पदार्थ के फेंटने या बिलोने से निकलने वाला फेन -- नुर, पत

झाड़ना (स.क्रि.) फटकार कर धूल-गर्द साफ करना, बुहारना -- पोटि तद्दुक, तूत्तु वारुक

झाड़ना (स.क्रि.) फटकारना -- शकॉरिक्कुक

झाड़ी (स्त्री.) छोटा झाड़ या पौधा -- कुटटिर्च्यटि

झाड़ी (स्त्री.) कँटीले पौधों या झाड़ों का समूह -- कुटटिक्काटु

झाडू (पुं.) लंबी सींकों अथवा ताड़ या खजूर के पत्तों आदि का वह मुट्ठा, जिससे कूड़ा करकट, धूवल आदि साफ की जाती है -- चूल्

झिझक (स्त्री.) किसी काम को करने में होने वाला संकोच, हिचक -- मटि, संकोचम्

झिड़कना (स.क्रि.) अवज्ञा या तिरस्कारपूर्वक बिगड़ कर कोई बात कहना -- शकारिक्कुक

झील (स्त्री.) लंबा-चौड़ा प्राकृतिक जलाशय -- तटाकम्, कायल्

झुँझलाना (अ.क्रि.) झल्लाना, खिझलाना, चिड़चिड़ाना -- देष्यप्पोटुक

झुँझलाहट (स्त्री.) झल्लाहट -- अरिशम्/पिणक्कम्

झुंड (पुं.) समूह -- कूट्टम्

झुंड (पुं.) व्यक्तियों या जीवों का समूह -- कूट्टम्

झुकना (अ.क्रि.) टेढ़ा होना, मुड़ना -- कुनियुक

झुकना (अ.क्रि.) नमित होना -- ताणुवण-ङ्ङुक

झुग्गी (स्त्री.) झोंपड़ी या कुटी -- चेट्टक्कुटिल्

झुठलाना (स.क्रि.) किसी को झूठा ठहराना -- कळ्ळमाक्कुक

झुर्री (स्त्री.) त्वचा पर पड़ने वाली शिकन -- चुळिवु

झूठ (पुं.वि.) असत्य, मिथ्या -- असत्यम्, कळ्ळम्

झूमना (अ.क्रि.) हलकी गति में झोंके खाना -- आटुक

झूमना (अ.क्रि.) नशे, नींद, प्रसन्नता या मस्ती में शरीर को धीरे-धीरे हिलाना -- आटुक

झूलना (अ.क्रि.) किसी लटकी हुई चीज का बार-बार आगे पीछे होना -- चांचाटुक

झूलना (अ.क्रि.) झूले पर बैठ कर पेंग लेना -- ऊञ्ञालाटुक

झूला (पुं.) किसी ऊँचे स्थान से बाधँकर लटकाई गई जंजीरों या रस्सियों पर लगा तख्ता आदि (झूलने का साधन) -- ऊञ्ञाल्

झेंप (स्त्री.) लज्जा का अहसास, संकोच, शर्म -- नाणम्

झेंपना (अ.क्रि.) लज्जित होना, शर्माना -- लज्जिक्कुक, नाणिक्कुक

झेलना (स.क्रि.) अपने ऊपर लेना, सहना -- सहिक्कुक, पोरुक्कुक

झोंकना (स.क्रि.) किसी वस्तु को आग में फेंकना -- तीयिल् इटुक

झोंकना (स.क्रि.) वेग से किसी चीज को डालना या फेंकना -- वेगत्तिल् इटुक

झोंका (पुं.) वायु-लहरी -- काट्टटि

झोंका (पुं.) थोड़े समय के लिए सहसा आने वाली नींद -- मयक्कम्

झोंपड़ी (स्त्री.) घास-फूस की कुटी, झुग्गी -- कुटिल्

झोला (पुं.) चीज़ें रखने के लिए कपड़े का थैला -- संचि

टंकार (स्त्री.) धनुष की प्रत्यंचा तान कर सहसा छोड़ने पर होने वाली ध्वनि -- ठंकारम्

टंकार (स्त्री.) धातु खंड, तार पर आघात लगने से होने वाली टन-टन ध्वनि -- झणत्कारम्

टंकी (स्त्री.) पानी भरने का एक पात्र, हौज, कुंड -- जलसंभरणि

टकराना (अ.क्रि.) जोर से भिड़ना -- इटयुक

टकराना (अ.क्रि.) मार्ग में बाधक होना, मुकाबला या सामना करना, संघर्ष होना -- एट्टुमुट्टुक

टकसाल (स्त्री.) वह स्थान जहाँ सिक्के ढाले जाते हैं -- कम्मट्टम्

टंक्कर (स्त्री.) वेग के साथ आपस में भिड़ जाना -- कूटटिमुट्टल्

टंक्कर (स्त्री.) संघर्ष, मुकाबला -- संघट्टनम्

टटोलना (स.क्रि.) उंगलियों से छूकर वस्तु का अनुमान करना -- तप्पिनोक्कुक

टपकना (अ.क्रि.) बूँद-बूँद करके रिसना या फलों आदि का गिरना -- इट्टुवीळुक

टहनी (स्त्री.) वृक्ष की शाखा, डाल, डाली -- चिल्ल, कोपु

टहलाना (अ.क्रि.) स्वास्थ्य के लिए चलना-फिरना, घूमना -- उलात्तुक

टाँकना (स.क्रि.) सूई, डोरे आदि से कोई चीज कपड़ों पर लगाना -- तुन्निच्चेर्क्कुक

टाँका (पुं.) धागे आदि से दो टुकड़ों को आपस में जोड़ना -- तय्यल्

टाँका (पुं.) धातुओं को ज़ोड़ने या सटाने के लिए लगाया गया जोड़ -- वेल्डिंग

टाँगना (स.क्रि.) लटकाना -- तूक्कियिटुक

टाट (पुं.) सन या पटसन का मोटा कपड़ा -- चाक्कुतुणि

टापू (पुं.) चारों ओर से जल से घिरा स्थान, द्वीप -- द्वीपु

टालना (स.क्रि.) स्थगित करना -- माट्टि वेक्कुकु

टालना (स.क्रि.) बहाना करके पीछा छुड़ाना, टरकाना -- ओऴिवुकऴिवु परयुक

टालना (स.क्रि.) निवारण करना, घटित न होने देना -- ओऴिवाक्कुक

टिकना (अ.क्रि.) किसी आधार पर स्थित होना -- उरच्चु निल्क्कुक

टिकना (अ.क्रि.) यात्रा के समय विश्राम के लिए कहीं ठहरना -- तङ्ङुक

टिकाऊ (वि.) मज़बूत -- ईट्ळ्ळ

टिकिया (स्त्री.) गोल और चपटा छोटा टुकड़ा -- कट्ट

टीका (पुं.) तिर, बिंदी -- पोट्टु कुरि

टीका (स्त्री.) किसी ग्रंथ, पद आदि का अर्थ स्पष्ट करने वाला कथन, व्याख्या -- व्याख्यानम्

टीका-टिप्पणी (स्त्री.) किसी प्रसंग के गुण दोषों आदि के संबंध में प्रकट किए जाने वाले विचार -- अभिप्रायम्, विमर्शनम्

टीला (पुं.) छोटी पहाड़ी की तरह का ऊँचा भूखंड, ढूह -- पार, कुन्नु

टुकड़ा (पुं.) अंश, खंड, भाग -- कषणम्, तुण्टु

टेक (पुं.) सहारा, आधार -- आश्रयम्, ऊन्नु

टेक (पुं.) हठ, आग्रह, संकल्प -- निर्बधम्

टेक (पुं.) गाने की प्रथम पंक्ति, जो बार-बार दोहराई जाती है, मुखड़ा -- पल्लवि

टेकना (स.क्रि.) अपने शरीर को अथवा किसी वस्तु को किसी दूसरी चीज के सहारे खड़ा करना या बैठाना, टिकाना -- ऊन्नुक

टेढ़ा (वि.) जो बीच में इधर-उधर मुड़ा हो, वक्र -- वळञ्ञ

टेढ़ा (वि.) कुटिल, धूर्त -- वक्रबुद्दधियाय

टेढ़ा (वि.) मुश्किल, कठिन, उलझनपूर्ण -- विषमम् पिटिच्च

टोकना (स.क्रि.) रोकना, बाधा डालना -- तटयुक

टोकरी (स्त्री.) बाँस की खमचियों या तीलियों अथवा बेंत, सरकंडे आदि का बना हुआ खुले तथा चौड़े मुँह वाला बड़ा आधान -- कोट्ट

टोली (स्त्री.) छोटा समूह, मंडली या दल -- संघम्

टोह (स्त्री.) खोज, जाँच, तलाशी -- अन्वेषणम्, तेटल्

टोह (स्त्री.) किसी अज्ञात बात का शोधः, पता लगाने की क्रिया अथवा उससे प्राप्त होने वाली जानकारी -- अन्वेषणम्

ठंडक (स्त्री.) शीत, सर्दी, जाड़ा -- तणुप्पु

ठंडक (स्त्री.) जलन की कमी, चैन -- कुळुर्म

ठंडा (वि.) उष्णता या ताप से रहित -- तणुत्तु

ठग (पुं.) वह जो धोखा देकर दूसरे का धन या सामान हड़प ले, कपटी, धूर्त -- वंचकन्, तट्टिप्पुकारन्

ठगना (स.क्रि.) धोखा देना, छलना -- चतिक्कुक, वंचिक्कुक

ठप्पा (पुं.) धातु, लकड़ी आदि की छाप या मुहर -- मुद्र

ठप्पा (पुं.) ठप्पे का छापा या चिह्न -- मुद्र

ठहरना (अ.क्रि.) रुकना -- निल्क्कुक, तङ्ङुक

ठहरना (अ.क्रि.) किसी स्थान पर थोड़े समय के लिए रहने के लिए रुकना -- तङ्ङुक

ठहाका (पुं.) जोर से हँसने का शब्द, कहकहा, अट्टहास -- अट्टहासम्, पोट्टिच्चिरि

ठाट-बाट (पुं.) आडंबर, तड़क-भड़क, शान शौकत -- आडंबरम्

ठिकाना (पुं.) रहने या ठहरने का स्थान -- तावळम्

ठीक (वि.क्रि.वि.) उपयुक्त -- योजिच्च, शरियाय

ठीक (पु.) शुद्ध, सत्य -- शरि

ठुकराना (स.क्रि.) पैर से ठोकर लगाना -- चविट्टक, तट्टक

ठुकराना (स.क्रि.) उपेक्षा या तिरस्कारपूर्वक अस्वीकार करना -- चविट्टित्तळ्ळुक

ठूँठ (पुं.) वह पेड़ जिसकी डालें, पत्तियाँ आदि न रह गई हों, सूखा पेड़ -- कुट्टि

ठूँसना (स.क्रि.) कोई चीज किसी में जबरदस्ती डालना या भरना -- तिरुकिनिरक्कुक

ठेकेदार (पुं.) वह व्यक्ति, जो ठेके पर दूसरों के काम करता या करवाता है -- करारुकारन्, कोंट्राक्टर

ठोंकना (स.क्रि.) किसी चीज को धँसाने के लिए उसके सिरे पर जोर से आघात करना -- आञ्ञटि-क्कुक

ठोंकना (स.क्रि.) अच्छी तरह पीटना -- तरक्कुक

ठोकर (स्त्री.) आघात, जो चलने में कंकड़, पत्थर आदि के धक्के से पैर में लगे -- तट्टु

ठोकर (स्त्री.) पदाघात -- चविट्टु

ठोस (वि.) जिसकी रचना में अंदर कहीं खोखलापन न हो, भरपूर -- कट्टियाय

ठोस (वि.) तथ्यपूर्ण, दृढ़, प्रामाणिक -- उरच्च

डंक (पुं.) बिच्छू, मधुमक्खी आदि में पीछे का जहरीला काँटा -- कुत्तु, मुऴळु

डंडा (पुं.) लकड़ी का मोटा सीधा टुकड़ा -- वटि

डकार (स्त्री.) भोजन करने के पश्चात् पेट में भरी वायु का कंठ से शब्द के साथ निकल पड़ने का शारीरिक व्यापार -- ऐबक्कम्

डकैती (स्त्री.) डाका, लूट-मार -- कोळ्ळ

डग (पुं.) कदम -- अटि, काल् वेप्पु

डगमगाना (अ.क्रि.) लड़खड़ाना, डिगना, विचलित होना या करना -- इटरुक, इळकुक

डरना (अ.क्रि.) भयभीत होना -- पेटिक्कुक

डरपोक (वि.) कायर, भीरु -- भीरु

डराना (स.क्रि.) किसी के मन में डर उत्पन्न करना, धमकाना -- पेटिप्पिक्कुक, भयप्पेटुत्तुक

डरावना (वि.) भयानक -- भयानकमाय

डसना (स.क्रि.) जहरीले कीड़े का काटना -- कटिक्कुक, दंशिक्कुक

डाँट (स्त्री.) किसी को सचेत करने के लिए कड़ी बात करना -- शकारिक्कुक

डाँवाडोल (वि.) जो सहसा किसी आघात से हिलने-डुलने लगे -- आटुन्न इळकुन्न

डाँवाडोल (वि.) अनिश्चित (व्यक्ति अथवा स्थिति) -- अनिश्चितम्

डाक (स्त्री.) पत्रों, बंडलों आदि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने की सरकारी व्यवस्था -- तपाल्

डाक (स्त्री.) उक्त व्यवस्था द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाया जाने वाला पत्र या सामग्री -- तपाल् उरुप्पटि

डाकघर (पुं.) डाकखाना -- पोस्टाफीस, तपालाफीस्

डाका (पुं.) डकैती, लूट-मार -- कोळ्ळ

डाकू (पुं.) डाका डालने वाला -- कोळ्ळक्कारन

डांल (स्त्री.) पेड़-पौधे आदि की टहनी या शाखा -- कोपु, शाख

डालना (स.क्रि.) किसी आधार या पात्र में कोई चीज कुछ ऊँचाई से गिराना, छोड़ना या रखना -- इटुक

डाह (स्त्री.) ईर्ष्या, जलन, कुढ़न -- असूय

डिबिया (स्त्री.) किसी वस्तु को रखने का ढक्कनदार बहुत छोटा आधान, बहुत छोटा डिब्बा -- डप्पि

डिब्बा (पुं.) सामान रखने का बड़ा ढक्कनदार आधान, जो धातु, लकड़ी आदि का बना होता है -- डप्प, टिन्नु

डिब्बा (पुं.) यात्रियों एवं माल आदि के लिए रेलगाड़ी का कक्ष -- कंपार्टमेंटु, तीवण्डि पेट्टि

डींग (स्त्री.) अपने बल, योग्यता या साहस के बारे में बढ़ा-चढ़ा कर बात करना, शेखी -- पोङ्ङच्चम् परयल्

डुबाना (स.क्रि.) ऐसा काम करना, जिससे कोई चीज डूब जाए -- मुक्कुक

डेढ़ (वि.) मान, मात्रा, संख्या आदि की किसी एक इकाई और उसकी आधी इकाई के योग का सूचक विशेषण -- न्नर

डेरा (पुं.) पैदल यात्रा आदि के समय अस्थायी रुप से बीच में ठहरने का स्थान, पड़ाव -- पाळयम्, तावळम्

डोंगी (स्त्री.) एक प्रकार की छोटी खुली नाव -- वंचि

डोर (स्त्री.) सूत आदि का बटा हुआ पतला मजबूत धागा -- चरटु

डोर (स्त्री.) पतंग आदि उड़ाने के लिए वह धागा जिस पर मांझा लगा होता है -- चरटु

डोल (पुं.) कुएँ से पानी खींचने का बरतन -- पाळ, तोट्टि

डोली (स्त्री.) पालकी की तरह की एक प्रसिद्ध सवारी, जिसे दो कहार कंधे पर उठाकर चलते हैं -- मंचल्, पल्लक्कु

डोली (स्त्री.) विवाह के समय मायके से विदा होते हुए वधू पहले पहल ससुराल जाती है -- NA

ड्योढ़ी (स्त्री.) किसी भवन या मकान के मुख्य प्रवेश द्वार के आस-पास की भूमि या स्थान -- वीट्टुमुट्टम्

ड्योढ़ी (स्त्री.) घर के मुख्य द्वार के अंदर का वह भाग, जिसमें से होकर घर के कमरों, आँगन आदि में जाया जाता है -- निलप्पटि

ढंग (पुं.) कोई काम करने की रीति -- मट्टु

ढकना (स.क्रि.) किसी पर आवरण डालना ताकि वह दिखाई न पड़े -- मूटुक

ढकना (पुं.) वह चीज या रचना, जिससे कोई चीज ढकी रहती है, ढक्कन -- अटप्पु

ढकेलना (स.क्रि.) धक्का देकर आगे बढ़ना -- तळ्ळि-नीक्कुक

ढकोसला (पुं.) स्वार्थ-सिद्धि के लिए अपनाया हुआ झूठा रूप, दिखावा -- कपटम्

ढक्कन (पुं.) ढाँकने की वस्तु -- अटप्पु

ढलाई (स्त्री.) ढालने की क्रिया या भाव -- वाप्पु

ढलाई (स्त्री.) पिघली हुई धातु को साँचे में ढालकर बरतन, मूर्तियाँ आदि बनाने की क्रिया भाव और मजदूरी -- वार्प्पुकूलि

ढलान (स्त्री.) कोई ऐसा भूखंड, जो चपटा और समतल न हो, बल्कि तिरछा हो जिसमें नीचे की ओरj ढाल हो -- चरिवु

ढाँचा (पुं.) कोई वस्तु या रचना बनाते समय उसके विभिन्न मुख्य अंगों को जोड़ या बाँध कर खड़ा किया हुआ आरंभिक रूप -- चट्टम्

ढाँचा (पुं.) ठठरी या पंजर -- ऐल्लिंकूदु, अस्थिपंजरम्

ढाई (वि.) दो और आधा का मान -- रण्टर

ढाढ़स (पुं.) तसल्ली, सांत्वना, धीरज -- समाधानम्, सांत्वनम्

ढाबा (पुं.) वह स्थान, जहाँ रोटी, दाल आदि बिकते हैं, एक प्रकार का कच्चा और अस्थायी भोजनालय -- तट्टुकट

ढाल (स्त्री.) चमड़े धातु आदि का बना हुआ वह गोलाकार उपकरण जिसे युद्ध क्षेत्र में सैनिक लोग तलवार, भाले आदि का वार रोकने के लिए अपने बाएँ हाथ में रखते थे -- परिच

ढाल (स्त्री.) किसी भूखंड का ऐसा तल, जो क्षितिज के समतल न हो, बल्कि तिरछा या नीचे की ओर झुका हो, ढलान -- चरिवु

ढिंढोरा (ढँढोरा) (पुं.) वह डुग्गी या ढोल, जिसे बजा कर किसी बात की सार्वजनिक घोषणा की जाती है -- चेण्ड कोट्टुक

ढिंढोरा (ढँढोरा) (पुं.) उक्त प्रकार से की हुई घोषणा -- कोट्टि अरियिप्पु

ढीठ (वि.) जो जल्दी किसी से डरता न हो और जो भय या संकट के समय भी अपने हठ पर अड़ा रहता हो, धृष्ट -- दुर्वाशिक्कारन्

ढीठ (वि.) जो प्रायः ऐसे अवसरों पर भी संकोच न करता हो, जहाँ बड़ों की मान मर्यादा का ध्यान रखना आवश्यक हो -- धिक्कारि, अहंकारि

ढीला (वि.) शिथिल -- शिथिलमाय

ढीला (वि.) जिसमें उचित कसाव खिंचाव या तनाव का अभाव हो -- अयञ्ञ

ढीला (वि.) जो नाप में आवश्यकता से अधिक गहरा, लंबा या चौड़ा हो -- अयञ्ञ

ढुलाई (स्त्री.) ढोने की क्रिया, भाव या मजदूरी -- चुमक्कल्, चुमट्टकूलि

ढूँढ़ना (स.क्रि.) कोई छिपी या इधर-उधर पड़ी हुई वस्तु या आँख से ओझल व्यक्ति का पता लगाना, खोजना -- अन्वेषिक्कुक, तिरयुक

ढेर (पुं.) एक स्थान पर विशेषतः एक दूसरे पर रखी हुई बहुत सी वस्तुओं का ऊँचा समूह -- कूंपारम्

ढेला (पुं.) मिट्टी या पत्थर का कड़ा टुकड़ा -- मण्णांकट्ट

ढोंगी (वि.) झूठा आडंबर खड़ा करने वाला धोखेबाज, पाखंडी -- कपटन् वेकिवेषकारन्

ढोना (स.क्रि.) पीठ या सिर पर रखकर कोई भारी चीज एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना -- चुमक्कुक

तंग (वि.) संकरा, संकीर्ण -- इटुङ्ङिय

तंग (वि.) आवश्यकता से अधिक कसा हुआ और कुछ छोटा, चुस्त -- मुरुकिय

तंग (वि.) परेशान, हैरान,, कमी -- विषमिच्च

तंतु (पुं.) ऊन, रेशम, सूत आदि का बटा हुआ डोरा, तागा -- नूलु, तंतु

तंदूर (पुं.) एक तरह का चूल्हा, जिसकी ऊंची गोलाकार दीवार के भीतरी भाग में रोटियाँ चिपका कर बनाई जाती है -- तंदूर, अटुप्पु

तंद्रा (स्त्री.) हलकी नींद, ऊँघ -- तंद्र अयक्कम्

तंबाकू (पुं.) एक प्रसिद्ध पौधा और उसके पत्ते जो नशे के लिए अनेक रूपों में काम में लाए जाते हैं -- पुकयिल

तंबू (पुं.) शामियाना, खोमा -- कूटारम्

तंबोली (तमोली) (पुं.) पान लगाकर बेचने अथवा पान का व्यवसाय करने वाला -- वेटटिल-क्कारन्, मुरिक्कान् कटक्कारब्

तकनीक (स्त्री.) शिल्प, पद्धति -- टेक्निक

तकला (पुं.) सूत कातने और लपेटने के काम आने वाली चरखे से लगी लोहे की सलाई टेकुआ -- चर्खयिले कंपि, स्पिंडिल्

तकलीफ़ (स्त्री.) कष्ट, दुख, पीड़ा -- कष्टप्याटु

तकलीफ़ (स्त्री.) विपत्ति, संकट -- आपत्तु

तख्त (पुं.) राजसिंहासन -- सिंहासनम्

तख्त (पुं.) लकड़ी की बनी बड़ी चौकी -- पीठम् इरुप्पिटम्

तख्ता (पुं.) लकड़ी या आयताकार बड़ा तथा समतल टुकड़ा -- पलक

तट (पुं.) कूल, किनारा तीर -- कर, तीरम्, तटं

तटस्थ (वि.) विरोध, विवाद आदि के प्रसंगों में दोनों दलों से अलग और निर्लिप्त रहने वाला, निरपेक्ष -- तटस्थन, मध्यस्थन्

तड़पना (अ.क्रि.) अत्यंत दुखी होना, छटपटाना, तिलमिलाना -- पिटयुक

तड़पना (अ.क्रि.) किसी वस्तु के लिए बेचैन होना -- अस्वस्थ-नाकुक

तत्परता (स्त्री.) उद्यत होने की अवस्था, गुण या भाव, सन्नद्धता -- तत्परत

तत्परता (स्त्री.) मनोयोगपूर्वक काम करने का भाव, तल्लीनता -- श्रद्ध, तल्लीनत

तथा (अव्य.) दो चीज़ों, बातों आदि में योग या संगति स्थापित करने वाला एक योजक अव्यय, और -- उम्

तथा (अव्य.) किसी के अनुरूप या तथा अनुसार, वैसा ही -- अतुपोले

तथ्य (पुं.) सत्यता यथार्थता -- सत्यम्, यथार्थम्

तन (पुं.) शरीर, देह, जिस्म -- शरीरम्

तनखाह (तनख़ाह) (स्त्री.) वेतन -- शंपळम्

तना (पुं.) पेड़-पौधों का जमीन से ऊपर निकला हुआ वह मोटा भाग, जिसके ऊपरी सिरे पर डालियाँ निकली होती हैं, धड़ -- तटि

तन्मयता (स्त्री.) मग्न अथवा दत्तचित होने की अवस्था, गुण या भाव -- तन्मयत

तपस्या (स्त्री.) मन की शुद्धि, मोक्ष की प्राप्ति, पाप के प्रायश्चित आदि के लिए स्वेच्छा से किया जाने वाला कठोर आचरण और नियम-पालन, तप -- तपस्सु

तपस्या (स्त्री.) कष्ट-सहन -- कष्टम् सहिक्कल्

तब (क्रि.वि.) उस समय -- अप्पोळ्

तब (क्रि.वि.) बाद में -- पिन्नीटु

तब (क्रि.वि.) उस कारणः -- अतुकोण्टु

तबीयत (स्त्री.) स्वास्थ्य की दृष्टि से किसी की शारीरिक या मानसिक स्थिति, मिजाज -- शरीर-स्थिति

तबीयत (स्त्री.) मन का रुझान, प्रवृत्ति -- मनः स्थिति

तमगा (पुं.) पदक -- मेडल्, पतक्कम्

तमाचा (पुं.) थप्पड, झापड़, चाँटा -- अटि, प्रहरम्

तमाशा (पुं.) मनोरंजक दृश्य -- नेरम् पोक्कु, कळि तमाश

तमाशा (पुं.) अद्भुत बात -- अद्भुत कार्यम्

तय करना (NA) फैसला या निर्णय अथवा निश्चित करना -- निश्चयिक्कुक

तय करना (NA) (रास्ता आदि) पूरा या समाप्त करना -- कटक्कुक, ताण्टुक

तरंग (स्त्री.) पानी की लहर, हिलोर -- तिर

तरंग (स्त्री.) उमंग -- उत्साहम्

तरंग (स्त्री.) स्वरलहरी -- स्वर लहरि

तरकीब (स्त्री.) उपाय, युक्ति -- उपायम्, वऴि

तरक्की (स्त्री.) प्रगति, बढ़ोतरी, उन्नति -- उन्नति

तरक्की (स्त्री.) पदवृद्धि, पदोन्नति -- स्थान-क्कयट्टम्

तरह (स्त्री.) ढंग, प्रकार, तरीका, किस्म -- रीति

तरीका (पुं.) रीति, ढंग -- रीति, विधम्, तदम्

तरीका (पुं.) उपाय, युक्ति -- उपायम्

तरुण (वि.) जवान -- युवावु, तरुणन्

तर्क (पुं.) युक्ति, दलील -- युक्ति, वादम्

तल (पुं.) निचला भाग, पेंदा, तला -- तलम्, चुवडटु, अटि भागं

तल (पुं.) ऊपरी सतह -- मेल्तळम्, मेल्भागम्

तलवा (पुं.) पैर के नीचे का भाग,पदतल -- उळ्ळंकाल्

तलवार (स्त्री.) लोहे का एक लंबा धारदार हथियार, खङ्ग -- वाळ्, खड्गम्

तला (पुं.) पेंदा -- चुवटु

तला (पुं.) जूते के नीचे का चमड़ा -- चेरिप्पिन्टे अटित्तोल्

तलाक (पुं.) वैधानिक रीति से विवाह संबंध का विच्छेद -- विवाह-मोचनम्

तसल्ली (स्त्री.) ढ़ाढ़स, दिलासा, सांत्वना -- समाधानम्, सांत्वनम्

तसल्ली (स्त्री.) संतोष -- तृप्ति

तसवीर (स्त्री.) चित्र -- चित्रम्, पटम्

तस्कर (पुं.) देय शुल्क चुकाए बिना अवैधानिक रूप से एक देश का माल दूसरे देश में पहुँचने वाला -- कळ्ळक्कटत्तुकारन्

तह (स्त्री.) परत -- मटक्कु, अट्क्कु, अट्टि

ताकना (स.क्रि.) देखना -- सूक्षिच्चु नोक्कुक

तागा (पुं.) डोरा -- नूल्, चरटु

ताज (पुं.) राजमुकुट -- किरीटम्

ताजा (वि.) जो अधिक दिनों का या बासी न हो -- पुत्तन् पुनिय

ताजा (वि.) प्रफुल्लित और स्वस्थ -- पऴकात्त

ताड़ी (स्त्री.) ताड़ के वृक्ष से निकला हुआ सफेद मादक रस -- कळ्ळु

ताना-बाना (पुं.) बुनाई के समय क्रमशः लंबाई तथा चौड़ाई के बल फैलाए या बुने जाने वाले सूत -- ऊटुम् पावुम्

ताप (पुं.) उष्णता, गरमी -- चूटु

ताप (पुं.) ज्वर, बुखार -- ज्वरम्, पनि

ताप (पुं.) उष्मा -- ऊष्मावु, चूटु

तापमान (पुं.) थर्मामीटर आदि द्ववारा मापी गई ताप की मात्रा -- तापनिल, टेंपरेचर

ताम्रपत्र (पुं.) ताँबे की पत्तर -- चेपुत्तकिटु ताम्रपत्रम्

ताम्रपत्र (पुं.) ताँबे का वह पत्तर, जिस पर महत्वपूर्ण बात स्थाई रूप से लिखी गई हो -- चेंपुपट्टयम्, ताम्रपत्रम्, चेप्पेटु

तार (पुं.) धातु का तागा-रूप -- कंपि

तार (पुं.) तार द्वारा समाचार या वह कागज जिस पर उक्त समाचार पहुँचाया जाता है -- कंपि, टेलिग्राम्

तारकोल (पुं.) अलकतरा, काले रंग का एक गाढ़ा द्रव, जो लक़ड़ी आदि रँगने के काम आता है -- टार्, कीलु

तारतम्य (पुं.) क्रम, क्रमबद्धता -- क्रमम्, अटुककु

तारा (पुं.) नक्षत्र, सितारा -- नक्षत्रम्

तारा (पुं.) आँख की पुतली -- कृष्णमणि

तारीख (स्त्री.) दिनांक, तिथि -- तीयति

तालमेल (पुं.) समन्वय, संगति -- समन्वयम्

ताला (पुं.) दरवाजा, संदूक आदि बंद करने का उपकरण -- पूट्टु, ताळु

तालाबंदि (स्त्री.) कारखाने आदि का उसके मालिक द्ववारा अनिश्चित काल के लिए बंद किया जाना -- लॉक औट्

तालाब (पुं.) पोखर, सरोवर -- कुळम्

तालिका (स्त्री.) सूची -- सूचिक, पट्टिक

तावीज (पुं.) चाँदी, सोने आदि का वह छोटा संपुट, जो रक्षा कवच के रूप में गले या बाँह पर पहना जाता है -- रक्ष, यंत्रम्

ताश (पुं.) गत्ते या दफ्ती के 52 पत्ते, जिसमें विभिन्न खेल खेले जाते हैं -- चीट्टु

तिजोरी (स्त्री.) लोहे की वह मजबूत छोटी अलमारी या पेटी, जिसमें कीमती वस्तुएँ रखी जाती हैं -- इरुंपुपेट्टि, पणप्पेट्टि

तिथि (स्त्री.) चंद्रमास के किसी पक्ष का कोई दिन अथवा उसे सूचित करने वाली कोई संख्या -- तिथि

तिनका (पुं.) तृण, घासफूस -- पुल्लु, तृणम्

तिपाई (स्त्री.) बैठने या सामान रखने की तीन पायों वाली ऊँची चौकी -- स्टूळ्, मुक्कालि

तिमाही (वि.) हर तीसरे महीने का, त्रैमासिक -- त्रैमासिकम्

तिरंगा (वि.) तीन रंगों वाला -- त्रिवर्णम्

तिरपाल (पुं.) राल या रोगन चढ़ाया हुआ एक प्रकार का मोटा कपड़ा -- टार्पोळिन्

तिलक (पुं.) केसर, चंदन आदि से ललाट पर लगाई जाने वाली गोल बिंदी या लंबी रेखा, टीका -- तिलकम्, पोट्टु

तिलमिलाना (अ.क्रि.) बेचैन या विकल होना -- पिटक्कुक

तिलमिलाना (अ.क्रि.) बौखलाना -- विरळुक

तिलांजलि (स्त्री.) सदा के लिए किसी से संबंध विच्छेद -- तिलांजलि, उपेक्षिक्कल्

तीक्ष्ण (वि.) तेज नोंक या धार वाला, तीखा, तेज -- तीक्ष्णम्, मूर्च्चयुळ्ळ

तीक्ष्ण (वि.) उग्र, कटु -- उग्रमाय

तीखा (वि.) कटु, अप्रिय -- अप्रियम्

तीखा (वि.) चरपरे स्वाद वाला -- एरिवुळ्ळ

तीखा (वि.) तेज नोंक या धार वाला -- मूर्च्ययुळ्ळ

तीर (पुं.) नदी का किनारा, तट -- तीरम्

तीर (पुं.) बाण -- बाणम्, अंबु

तीर्थ (पुं.) धार्मिक दृष्टि से पवित्र स्थल, पुण्य क्षेत्र -- पुण्यस्थलम्, तीर्थस्थलम्

तीली (स्त्री.) माचिस की सलाई -- कोळ्ळिईर्किलि

तुकबंदी (स्त्री.) साधारण पद्य रचना -- पोट्टक्कवित

तुतलाना (अ.क्रि.) शब्दों का अस्पष्ट उच्चारण, हकलाना -- कोञ्चुक

तुम (सर्व.) मध्यम, पुरुष सर्वनाम, जिसका प्रयोग बराबर के व्यक्ति के लिए किया जाता है -- निङ्ङळ्

तुम्हारा (सर्व.) तुम का षष्टी विभक्ति लगने पर बनने वाला रूप -- निङ्ङ्ळुट

तुरंत (क्रि.वि.) शीघ्र, झटपट -- उटन्, शीघ्रं

तुरपना (स.क्रि.) सूई-धागे से टाँके लगाना या सीना -- इऴनूल् इटुक

तुला (स्त्री.) तराजू काँटा -- त्रासु

तुलादान (पुं.) किसी व्यक्ति के शरीर के भाग के बराबर तोल कर दिया जाने वाला अन्न, द्रव्य आदि का दान -- तुलादानम्

तुषारपात (पुं.) बर्फ का गिरना, हिमपात -- हिमपातम्

तू (सर्व.) एक सर्वनाम जिसका प्रयोग मध्यम पुरुष एकवचन में अपने से छोटे व्यक्ति के लिए किया जाता है -- नी

तूफान (पुं.) समुद्र तल से उठने वाली आँधी, जिसके साथ बादल गरजते हैं और वर्षा होती है -- कोटुंकाट्टु

तूलिका (स्त्री.) चित्र अंकित करने की कूँची -- ब्रष्

तृण (पुं.) तिनका, घास -- तुणम्, पुल्लु

तृप्ति (स्त्री.) आवश्यकता अथवा इच्छा पूरी हो जाने पर मिलने वाली मानसिक शांति या आनंद -- संतृप्ति

तेज (पुं.) दीप्ति -- तेजस्सु

तेज (पुं.) प्रताप -- प्रतापम्, शक्ति

तेज (वि.) तीक्ष्ण, पैनी धार वाला -- मूर्च्ययुळ्ळ

तेज (वि.) प्रखर, प्रचंड -- उग्रमाय

तेरा (सर्व.) तू का संबंध कारक रूप -- निन्टे

तेल (पुं.) तिल के बीजों या विशिष्ट वनस्पतियों को पेर कर निकाला जाने वाला स्निग्ध तरल पदार्थ -- ऐण्ण

तेली (पुं.) तेल पेरने और बेचने का पेशा करने वाली एक जाति -- वाणियन्

तैयार (वि.) कुछ करने के लिए उद्यत -- तय्याराय

तैयार (वि.) जो पक कर खाने योग्य बन गया हो -- तिन्नान पाकमाय

तैयार (वि.) जो बन कर बिल्कुल ठीक और हर प्रकार से दुरुस्त हो गया हो -- शरिक्कुम् तय्याराय

तैरना (अ.क्रि.) किसी का हाथ पैर आदि चलाते हुए पानी में इस प्रकार आगे बढ़ना कि वह डूबे नहीं -- नींतुक

तैराक (पुं.) वह व्यक्ति जो अच्छी तरह तैरना जानता हो -- नींतल् विदग्घन्

तोड़ना (स.क्रि.) किसी वस्तु को खंडित या नष्ट करना -- उटय्क्कुक

तोड़ना (स.क्रि.) किसी नियम, कानून आदि का उल्लंघन करना -- लंघिक्कुक

तोड़ना (स.क्रि.) फूल, फल आदि को डाली से पृथक् करना -- NA

तोड़फोड़ (स्त्री.) क्षति पहुँचाने के उद्देश्य से किसी भवन या रचना को खंडित करना -- नासनष्टम्

तोरण (पुं.) शोभा यां सजावट के लिए बनाया जाने वाला अस्थायी स्वागत द्वार -- प्रवेशनद्वारम्, तोरणम्

त्याग (पुं.) किसी चीज पर अपना अधिकार या स्वत्व हटा लेने अथवा उसे छोड़ने की क्रिया -- त्यागम्

त्योहार (पुं.) प्रतिवर्ष निश्चित तिथि को मनाया जाने वाला कोई धार्मिक, सांस्कृतिक या जातीय पर्व -- उत्सवम्

त्रस्त (वि.) भयभीत -- भयप्पेट्ट

त्रस्त (वि.) पीड़ित -- पीडितनाय

त्रिशूल (पुं.) लोहे का तीन फालों वाला एक प्रसिद्ध अस्त्र, जो शिवाजी का प्रधान अस्त्र है -- त्रिशूलम्

थकना (अ.क्रि.) श्रम के कारण शिथिल होना, श्रांत होना -- क्षीणिक्कुक

थकना (अ.क्रि.) उत्साह न रह जाना, हार जाना -- तळरुक

थन (पुं.) गाय, बकरी आदि चौपायों का वह अंग, जिसमें दूध भरा रहता है, स्तन -- मुल

थपथपाना (स.क्रि.) लाड़-प्यार से आवेश शांत करने के लिए या शाबाशी देने के लिए किसी की पीठ को स्नेह से सहलाना, थपथपाना -- पतुक्के तट्टि-क्कोटुक्कुक

थप्पड़ (पुं.) चाँटा, तमाचा -- चेकिट्टिळ् अटि क्कुक

थलचर (पुं.) पृथ्वी पर रहने वाले जीव -- करजीवि

थलसेना (स्त्री.) वायुसेना और नौसेना से भिन्न वह सेना, जिसका कार्य क्षेत्र मुख्यतः स्थल तक सीमित हो -- करसेन

थाती (स्त्री.) धरोहर, अमानत -- ईटु

थाती (स्त्री.) जमापूँजी, संचित धन -- संचित धनम्, मुतल्

थान (पु.) एक निश्चित लंबाई का कपड़े का टुकड़ा -- केट्टु

थाना (पुं.) पुलिस कार्यालय पुलिस चौकी -- पोलिस् स्टेषन, ठाणावु

थापी (स्त्री.) राज या मजदूर द्वारा छत पीटने के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली लकड़ी की चौरस हत्थेदार पट्टी -- इटितटि, निलंतल्लि

थिरकना (अ.क्रि.) नाचने में अंगों को हाव-भाव के साथ संचालित करना -- नृत्तम् चेय्युक

थूकना (अ.क्रि.) मुँह से थूक बाहर निकाल फेंकना -- तुप्पुक

थूथन (पुं.) कुछ विशिष्ट प्रकार के पशुओं का लंबोतरा और कुछ आगे की ओर निकला हुआ मुँह -- मोंत

थैला (पुं.) झोला -- संचि

थोक (पुं.) एक ही तरह की बहुत सी चीजों का ढेर या राशि -- कूंपारम्

थोका (पुं.) चीजें खरीदने बेचने का वह प्रकार, जिसमें बहुत सी चीजें एक साथ खरीदी बेची जाती हैं, खुदरा या फुटकर का विपर्याय -- मोत्तक्कच्चवटम्

थोड़ा (वि.) अल्प मात्रा -- अल्पमाय, कुरवाय

थोड़ा (क्रि.वि.) अल्प मात्रा में, कुछ, जरा -- कुरच्चु, अल्पम्

दंगल (पुं.) पहलवानों की कुश्ती प्रतियोगिता -- गुस्ति

दंगा (पुं.) उपद्रव, फसाद -- लहळ

दंड (पुं.) सज़ा, जुर्माना -- शिक्ष

दंड (पुं.) बाँस या लकड़ी का डंडा -- वटि

दंडनीय (वि.) दंड दिए जाने योग्य -- शिक्षार्हन्

दंपत्ती (पुं.) पति-पत्नी -- दंपति मार्

दंभ (पुं.) अहंकार -- दंभम्, डंभु

दक्षिणा (स्त्री.) यज्ञ-पूजा आदि के अंत में ब्राह्मणों और पुरोहितों को दिया जाने वाला द्रव्य -- दक्षिण

दत्तक (पुं.) गोद लिया हुआ -- दत्तुपुत्रन्

दत्तचित्त (वि.) जो किसी कार्य में मनोयोग से लगा हुआ हो, तल्लीन -- तल्लीनन्

दफनाना (स.क्रि.) मुदें को जमीन में गाड़ना -- कबरटक्कुक

दबंग (वि.) जो किसी से दबता न हो, साहसी -- कूसलिल्लात्त तंटेटियाय, साहसि, प्रतापि

दबदबा (पुं.) रोब, आतंक -- प्रतापम्

दबाना (स.क्रि.) भार या दाब के नीचे लाना -- अमर्त्तुक, ओतुक्कुक

दबाना (स.क्रि.) किसी बात या मामले को आगे न बढ़ने देना -- ओतुक्कित्तीर्क्कुक

दबाना (स.क्रि.) दमन करना -- अमर्च्च वरुत्तुक, कीळटक्कुक

दबाव (पुं.) दबाने की क्रिया या भाव, दाब -- स्वाधीनम्, शक्ति

दबोचना (स.क्रि.) झपट कर दबा लेना -- सम्मर्दम् कोण्डु कीऴमर्त्तुक

दम (पुं.) ताकत, जोर -- शक्ति

दम (पुं.) हुक्के आदि का कश -- वलि

दम (पुं.) साँस, श्वास, प्राण -- श्वासम्

दमक (स्त्री.) चमक, प्रभा -- प्रभ, शोभ, तिळक्कम्

दमकल (स्त्री.) आग बुझाने का यंत्र, जिससे कोई तरल पदार्थ हवा के दबाव से वेगपूर्वक फेंका जाता है -- अग्नि-शमनयंत्रम्, तीकेटुत्तु यंत्रम्

दयनीय (वि.) दया के योग्य -- दयनीयम्

दया (स्त्री.) रहम, अनुकंपा, तरस -- दय

दयादृष्टि (स्त्री.) दया या करुणापूर्ण दृष्टि या भावना -- कृपादृष्टि

दर (पुं.स्त्री.) द्‍वार, दरवाजा -- वातिल्

दर (पुं.स्त्री.) भाव (रेट) -- निरक्कु

दरखास्त (दरख्वास्त) (स्त्री.) आवेदन, प्रार्थनापत्र, अर्जी -- अपेक्ष, दर्घास्

दरबान (पुं.) फाटक/प्रवेश द्वार पर तैनात चौकीदार -- डर्बान्, कावल्-क्कारन्

दरवाज़ा (पुं.) द्‍वार, कपाट, किवाड़ -- वातिल्, कतकु

दरार (स्त्री.) रेखा की तरह का लंबा छिद्र -- विटवु

दरिद्र (वि.पुं.) निर्धन, कंगाल, गरीब -- दरिद्रन्

दरी (स्त्री.) मोटे सूत का एक बिछावन -- विरि

दर्जन (पुं.) बारह वस्तुओं की इकाई -- डसल्

दर्जी (पुं.) कपड़े सीने का काम करने वाला -- तय्यल्-क्कारन्

दर्पण (पुं.) मुँह देखने का शीशा, आईना -- दर्पणम्, कण्णाटि

दर्शक (पुं.) देखने वाला -- दर्शकन्

दल (पुं.) गुट, टोला, समूह -- संघम्, चेरि

दल (पुं.) फूल की पंखड़ी -- दळम्, इतळ्

दलना (स.क्रि.) चक्की में डालकर दो या अधिक टुकड़े करना -- तरियायि पोटिक्कुक, तकर्क्कुक

दलाल (पुं.) सौदा आदि करवाने में मध्यस्थता करने वाला, बिचौलिया -- दल्लाळ्

दवा (स्त्री.) औषधि -- मरुन्नु

दवा (स्त्री.) इलाज, उपचार -- चिकित्स

दशक (पुं.) दस वर्षों की अवधि -- दशकम्

दस्तकारी (स्त्री.) हाथ से किया गया कारीगरी का काम, हस्तशिल्प -- कैत्तोऴिल्

दहकना (अ.क्रि.) इस प्रकार जलना कि लपटें निकलने लगे, धधकना -- कत्तिज्वलिक्कुक, आळिक्कत्तुक

दहाड़ (स्त्री.) शेर की गरज -- गर्जनम्

दहाड़ (स्त्री.) जोर की चिल्लाहट -- उरक्केयुळ्ळ विळि

दहाड़ना (अ.क्रि.) शेर का गरजना -- गर्जिक्कुक, अलरुक

दहाड़ना (अ.क्रि.) जोर सो चिल्लाना -- उच्चत्तिल् निल विळिक्कुक

दहेज (पुं.) विवाह के अवसर पर कन्या पक्ष की ओर से दिया जाने वाला धन और सामान -- स्त्रीधनम्

दाई (स्त्री.) उपमाता, धाय -- वळर्त्तम्म

दाई (स्त्री.) प्रसूति के समय मदद करने वाली स्त्री -- वयट्टाट्टि, मिड्वैफ्

दातुन (स्त्री.) नीम, बबूल आदि की नरम टहनी का टुकड़ा, जो दाँत साफ करने के काम आता है -- पल्लुकुत्ति

दान (पुं.) देने की क्रिया -- कोटुक्कल्

दान (पुं.) धर्म आदि की दृष्टि से किसी को कोई वस्तु देने की क्रिया, खैरात -- दानम्

दानव (पुं.) राक्षस, असुर -- दानवन्

दानवीर (पुं.) उदारतापूर्वक दान करने वाला -- दानवीरन्

दाना (पुं.) अन्न या फल का कण या बीज -- धान्य मणि

दाना (पुं.) माला आदि का मनका, मूंगा -- मालयिले मणि

दाना (पुं.) छोटी गोल फुंसी -- चेरिय कुरु

दाना-पानी (पुं.) अन्न-जल, खाना-पीना, जीविका -- उपजीवनम्

दानेदार (वि.) जिसमें दाने या रवे हों -- तरि तरियाय

दाम (पुं.) कीमत, मूल्य -- विल

दायाँ (वि.) दाहिना -- वलत्ते

दारोगा (दरोगा) (पुं.) निगरानी, देख-भाल करने वाला अधिकारी -- इंस्पेक्टर

दारोगा (दरोगा) (पुं.) पुलिस का एक अधिकारी -- पोलीस् इंस्पेक्टर्

दावत (स्त्री.) भोज -- सद्य

दावत (स्त्री.) निमंत्रण -- क्षणम्, विळि

दावा (पुं.) अधिकार, स्वत्व, हक -- अधिकारम्

दावा (पुं.) स्वत्व की रक्षा या अन्याय के प्रतिकार के लिए न्यायालय में दिया हुआ प्रार्थना-पत्र नालिश -- अवकाशवादं

दावा (पुं.) किसी बात की यथार्थता के विषय में अत्यधिक आत्मविश्वास, गर्वोक्ति -- उरप्पु

दिखावटी (वि.) जो केवल दिखाने के लिए किया गया हो -- पुरं मोटि मात्रा-मुळ्ळ, कृत्रिममाय

दिन (पुं.) वह समय, जिसका आरंभ सूर्योदय तथा अंत सूर्योस्त से होता है, दिवस -- पकल्

दिन (पुं.) चौबीस घंटे की अवधि -- दिवसम्

दिनकर (पुं.) सूर्य -- सूर्यन्

दिमाग (पुं.) सिर के भीतर का गूदा -- तलच्चोरु

दिमाग (पुं.) सोचने-समझने की शक्ति -- मस्तिष्कम्, बुद्धि शक्ति

दियासलाई (स्त्री.) एक सिरे पर गंधक आदि मसाला लगाकर बनाई हुई छोटी तीली, जो रगड़ने पर जल उठती है -- तीप्पेट्टि

दिल (पुं.) हृदय -- हृदयम्

दिलासा (पुं.) क्षुब्ध या दुखित हृदय को दिया जाने वाला आश्वासन, तसल्ली, ढाँढस -- आश्वसनम्

दिवंगत (वि.) जो मर गया हो, परलोकवासी -- दिवंगतनाय

दिवाला (पुं.) धनहीनता की वह स्थिति, जिसमें कोई व्यक्ति अथवा संस्था अपना ऋण न चुका सके, सर्वथा अभाव की स्थिति -- पाप्पर्

दिवालिया (वि.) जिसका दिवाला निकल गया हो, जो सर्वथा अभाव की स्थिति में हो -- दीवाळि कुळिच्च, पाप्पराय

दिशा (स्त्री.) क्षितिज मंडल के चार मार्गों पूर्व, पश्चिम, दक्षिण, उत्तर में से एक -- दिक्कु

दिशा (स्त्री.) ओर, तरफ -- नेक्कु

दीक्षा (स्त्री.) किसी मंत्र की वह शिक्षा, जो आचार्य या गुरु से विधिपूर्वक शिष्य बनने अथवा किसी संप्रदाय में सम्मिलित होने के समय ली जाती है, गुरुमंत्र -- मंत्र-दीक्ष

दीपक (पुं.) दीया, चिराग -- दीपम्

दीया (दिया) (पुं.) दीपक, चिराग -- विळक्कु

दीर्घा (स्त्री.) आने जाने के लिए कोई लंबा और ऊपर से छाया हुआ मार्ग -- गालरि, वरांत

दीवार (स्त्री.) मिट्टी, ईंटों, पत्थरों आदि की प्रायः लंबी, सीधी और ऊँची रचना, जो कोई स्थान घेरने के लिए खड़ी की जाती है, भीत -- मतिल्, चुवर भित्ति

दुख (पुं.) कष्ट, क्लेश, तकलीफ -- दुःखम्

दुकान (दूकान) (स्त्री.) सौदा खरीदने और बेचने की जगह -- कट, पीटिक

दुकानदार (दूकानदार) (पुं.) दुकान का स्वामी, दुकानवाला -- कटक्कारन्

दुतकारना (स.क्रि.) उपेक्षा या तिरस्कारपूर्वक हटाना, तिरस्कृत करना -- तिरस्करिक्कुक, निंदिक्कुक

दुबला (वि.) दुर्बल, कमजोर, पतले बदन वाला -- दुर्बलमाय, मेलिञ्ञ

दुभाषिया (पु.) वह मध्यस्थ व्यक्ति, जो अलग भाषाओं के बोलने वाले दो व्यक्तियों की वार्ता के समय एक को दूसरे का अभिप्राय समझाए -- द्विभाषि

दुरुपयोग (पुं.) किसी चीज़ या बात का अनुचित उपयोग -- दुरुपयोगम्

दुर्गंध (स्त्री.) बुरी गंध, बदबू -- दुर्गंधम्

दुर्ग (पुं.) किला, गढ़, कोट -- दुर्गम्, कोट्ट

दुर्घटना (स्त्री.) अचानक होने वाली दुखद घटना -- अपकटम्

दुर्दशा (स्त्री.) बुरी हालत, दुर्गति -- दुर्दश

दुर्भिक्ष (पुं.) अकाल -- दुर्भिक्षम्, क्षामम्

दुर्लभ (वि.) जो कठिनाई से अथवा कम मात्रा में प्राप्त होता हो, -- दुर्लभम्

दुलहन (दुलहिन) (स्त्री.) नई बहू, नव विवाहिता -- मणवाट्टि

दुलार (पुं.) लाड्-प्यार -- स्नेहम्, ओमनिक्कल्

दुविधा (स्त्री.) ऐसी मनःस्थिति जिसमें दो या कई बातों में से किसी एक बात का निश्चय न हो रहा हो -- धर्मसंकटम्

दुश्मन (पुं.) शत्रु, बैरी -- शत्रु

दुष्ट (वि.) दूषित मनोवृत्ति वाला, दूसरों को परेशान करने वाला -- दुष्टन्, उपद्रवि

दुहना (स.क्रि.) मादा जीवों के स्तनों से दूध निकालना/प्राप्त करना -- (पाल्) करक्कुक

दूत (पुं.) पत्र या संदेशवाहक, हरकारा -- दूतन्

दूत (पुं.) किसी राजा या राष्ट्र का वह प्रतिनिधि, जो राजनीतिक कार्य से अन्य राष्ट्र में भेजा गया हो या स्थायी रूप से वहाँ रहता हो -- नयतंत्र-प्रतिनिधि

दूतावास (पुं.) राजदूत के रहने का स्थान और उसका कार्यालय -- नयतंत्र-कार्यालयम्, ऐबसि

दूभर (वि.) कठिन, मुश्किल -- विषमम्, असह्यम्

दूर (क्रि.वि.) देश-काल, स्थान आदि की दृष्टि से अधिक अंतर पर, फासले पर अलग, पृथक -- दूरे, वेरे

दूरदर्शन (पुं.) टेलीविजन -- टेलिविषन्, दूरदर्शनम्

दूरबीन (स्त्री.) एक यंत्र, जिसके द्वारा दूर की वस्तुएँ समीपस्थ दिखाई देती हैं -- दूरदर्शनि

दूरभाष (पुं.) एक यंत्र, जिसकी सहायता से दूर बैठे लोग आपस में बातचीत करते हैं, टेलीफोन -- टेलिफोण्

दुल्हा (पुं.) वह व्यक्ति, जिसका विवाह होने को हो या कुछ ही दिनों पहले हुआ हो, वर, नवविवाहित -- वरन्

दूसरा (वि.) जो गणना में दो के स्थान पर हो, पहले के बाद का -- रण्टामत्ते

दूसरा (वि.) प्रस्तुत से भिन्न, अन्य -- वेरे, मट्टै

दृढ़ (वि.) अविचलित -- दृढ़माय

दृढ़ (वि.) कड़ा, मजबूत -- कटुप्पमुळळ, उरप्पुळळ

दृढ़ (वि.) जिसमें कोई हेर-फेर न हो सके, पक्का, निश्चित -- निश्चितमाय, उरच्च

दृश्य (पुं.) जो देखने में आ सके या दिखाई दे सके, जिसे देख सकते हों -- काळ्च, विनोदम्

दृश्य (पुं.) नजारा -- दृश्यम्

देखना (स.क्रि.) नेत्रों द्वारा किसी के होने का ज्ञान प्राप्त करना -- काणुक

देखना (स.क्रि.) निगरानी करना या रखना -- कात्तुसूक्षिक्कुक

देख-रेख (स्त्री.) निगरानी -- मेल्लोट्टम्

देनदार (वि.) कर्जदार, ऋणी -- कटम् वाङ्ङियवन्, अधमर्णन्

देना (स.क्रि.) प्रदान करना -- कोटुक्कुक

देर (स्त्री.) विलंब -- तामसम्

देवता (पुं.) दिव्य शक्ति संपन्न सत्ता -- देवत

देवता (पुं.) देव प्रतिमा -- देव-प्रतिम, तेवर्

देवी (स्त्री.) दिव्य गुण वाली शक्ति जैसी दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती आदि -- देवि

देवी (स्त्री.) स्त्रियों के लिए एक आदरसूचक संबोधन -- देवि

देश (पुं.) राजनैतिक दृष्टि से एक विशिष्ट भू-भाग -- देशम्

देश (पुं.) कोई विशिष्ट भू-भाग या खंड -- राज्यम्

देशद्रोही (पुं.) षड्यंत्र रचकर अपने देश को हानि पहुँचाने वाला, देश से विश्वासघात करने वाला -- देशद्रोहि

देशवासी (पु.) देश में रहने-बसने वाला -- देशवासि, स्वदेशि

देहांत (पुं.) मृत्यु, मौत -- मरणम्, मृत्यु, देहवियोगम्

देहात (पुं.) गाँव, ग्राम -- ग्रामम् नाट्टिन्न्पुरम्

दैनंदिनी (स्त्री.) डायरी, रोजनामचा -- डयरि

दैनिकी (स्त्री.) जेब में रखी जाने वाली वह छोटी पुस्तिका, जिसमें रोज के किए जाने वाले कामों का उल्लेख होता है, दैनंदिनी, डायरी -- कैक्कणक्कु

दोपहर (पुं.) दिन के बारह बजे और उसके आस-पास का समय, मध्याह्न -- उच्च, मध्याह्नम्

दोहराना (स.क्रि.) कोई काम या बात फिर से उसी प्रकार करना या कहना, पुनरावृत्ति -- आवर्त्तिक्कुक, उरुविदुक

दोहराना (स.क्रि.) किए हुए काम को फिर से आदि से अंत तक इस दृष्टि से देखना कि उसमें कहीं कोई भूल तो नहीं रह गई, पुनरीक्षण -- पुनरवलोकनं चेय्यक

दौड़-धूप (स्त्री.) वह प्रयत्न जिसमें अनेक स्थानों पर इधर-उधर बार-बार आना-जाना पड़े -- ओट्टवुम् चाट्टवुम्, कठिन परिश्रमम्

दौड़ना (अ.क्रि.) इतनी तेजी से चलना कि पाँव पृथ्वी पर पूरा न पड़े, भागना -- ओटुक

दौलत (स्त्री.) अधिकृत धन, संपत्ति -- स्वत्तु

द्योतक (वि.) किसी चीज को प्रकट करने वाला, परिचायक -- प्रकाशिप्पिक्कुन्न, प्रकटमाक्कुन्न

द्रोही (वि.) किसी के विरुद्ध षड्यंत्र रचने वाला, विश्वासघाती -- चतियन्, द्रोहि

द्‍वंद्‍व (पुं.) जोड़ा युगल -- इरट्ट

द्‍वंद्‍व (पुं.) दो व्यक्तियों का परस्पर युद्ध -- द्‍वंद्‍वयुद्‍धम्

द्वार (पुं.) दरवाजा -- कतकु

द्वीप (पुं.) चारों ओर समुद्र से घिरा हुआ भू-भाग, टापू -- द्वीयु

द्वेष (पुं.) चित्त का वह भाव, जो अप्रिय वस्तु या व्यक्ति का नाश करने की प्रेरणा देता है, शत्रुता, वैर -- द्वेषभावम्, वैर भावम्, पक

धंधा (पुं.) वह उद्योग या कार्य, जो जीविका निर्वाह के लिए किया जाए -- जोलि

धकेलना (स.क्रि.) धक्का देना, ढकेलना -- तळ्ळुक

धड़ (पुं.) शरीर का वह बीच वाला भाग, जिसमें छाती, पीठ और पेट हैं -- उटल

धड़ (पुं.) तना -- तटि

धड़कन (स्त्री.) हृदय का स्पष्ट स्पंदन -- नेञ्चिटिप्पु

धधकना (अ.क्रि.) आग का दहकना, भड़कना -- कत्तिक्काळुक, कत्तिर्यरियुक

धन (पुं.) संपत्ति, दौलत -- धनम् पणम्

धन (पुं.) पूँजी -- मुतल्

धनवान (वि.) जिसके पास बहुत धन हो, धनी, दौलतमंद -- धनाढ्यन्

धनाढ्य (वि.) बहुत बड़ा धनी -- धनाढ्यन्

धनुष (पुं.) कमान -- धनुस्सु, विल्लु

धन्यवाद (पुं.) किसी उपकार या अनुग्रह के बदले में कहा जाने वाला कृतज्ञतासूचक शब्द शुक्रिया -- कृतज्ञता, नंदि

धरती (स्त्री.) पृथ्वी, जमीन, भूमि -- भूमि, तर

धरना (स.क्रि.) किसी स्थान पर किसी चीज को रखना -- वेक्कुक

धरना (पुं.) कोई काम कराने के लिए अड़कर बैठ जाना और जब तक काम न हो जाए, वहाँ से न हटना -- कुत्तियिरुप्पु, पिक्कट्टिंग

धर्म (पुं.) किसी वस्तु या व्यक्ति की वह नित्यवृत्ति, गुण या लक्षण, जो उससे कभी अलग न हो, सहजगुण -- कर्तव्यम्, धर्मम्

धर्म (पुं.) मजहब -- मतम्

धर्मशाला (स्त्री.) परोपकार की दृष्टि से बनाया गया वह भवन, जिसमें यात्री बिना कोई शुल्क दिए कुछ समय तक रह सकते हैं -- सत्रम्, वऴियंपलम्

धर्मात्मा (वि.पुं.) धार्मिक आचरण करने वाला -- धार्मिकन्

धर्मात्मा (वि.पुं.) साधु-संत -- संन्यासि

धवल (वि.) उजला, सफेद -- वेळुत्त, धवळम्

धवल (वि.) निर्मल -- निर्मलम्

धाँधली (स्त्री.) अव्यवस्था, दुर्व्यवस्था, गड़बड़ -- कुऴप्पम्

धाँधली (स्त्री.) निरंकुशता, स्वेच्छाचारिता -- तोन्यासम्

धागा (पुं.) बटा हुआ महीन सूत जो प्रायः सीने-पिरोने के काम आता है, डोरा -- नूल्, चरटु

धातु (स्त्री.) कुछ विशिष्ट प्रकार के खनिज पदार्थ -- लोहम्

धातु (स्त्री.) (संस्कृत व्याकरण में) क्रिया का मूल रूप -- क्रियाधातु

धार (स्त्री.) पानी आदि के गिरने या बहने की धारा, प्रवाह -- प्रवाहम्

धार (स्त्री.) किसी हथियार का वह तेज सिरा या किनारा, जिससे कोई चीज काटते हैं। -- वाय्त्तल

धारणा (स्त्री.) व्यक्तिगत विचार या विश्वास -- धारण

धारणा (स्त्री.) किसी नियम, नियमावली, विधान आदि का वह स्वतंत्र अंश, जिसमें किसी एक विषय से संबंध रखने वाली सब बातों का एक अनुच्छेद में उल्लेख होता है, दफा -- सेक्शन्, वकुप्पु

धारणा (स्त्री.) निरंतर चलने वाला क्रम -- तुटर्च्च

धारावाहिक (वि.) अविछिन्न क्रम या गतिवाला -- अविच्छिन्न-माय, तुटर्च्चयाय

धारावाहिक (वि.) जो क्रमशः खंडों के रूप में बराबर कई अंशों अथवा अंकों में प्रकाशित होता रहे -- तुटप्रेसिद्धीकरणम्

धिक्कार (पुं.) भर्त्सना, लानत -- भर्त्सन, शकारम्

धीमा (पुं.) कम वेगवाला, मंद -- मंदम्, पनुक्केप

धीर (वि.) जो शांत स्वभाव वाला हो, अविचल -- शांतन्

धीर (वि.) दृढ़, अटल, दृढ़-प्रतिज्ञ -- धीरनाय

धीरे (क्रि.वि.) धीमी या मंद गति से, आहिस्ता -- सावधानत्तिल्, पर्य्य

धीरे (क्रि.वि.) नीचे या हल्के स्वर में -- पतुक्के तट्टि-क्कोटुक्कुक

धुँधला (वि.) धुंध से भरा हुआ -- मुङ्ङिय

धुँधला (वि.) धुएँ की तरह का कुछ-कुछ काला -- पुकञ्ञ

धुँधला (वि.) मंद, फीका -- मंदमाय, शोभयिल्लात्त

धुआँ (पुं.) जलती हुई चीजों से निकलने वाला वायवीय पदार्थ, जो कुछ कालापन लिए होता है -- पुक, धूमम्

धुन (स्त्री.) मन की लगन, तरंग -- इच्छ

धुन (स्त्री.) सनक, झक -- किरुक्कु

धुन (स्त्री.) गाने या बजाने का विशिष्ट ढंग -- रागम्, मेट्टु

धुनना (स.क्रि.) धुनकी से रूई साफ करना, ताकि उससे बिनौले अलग हो जाएँ -- कटयुक (पञ्ञि)

धुनना (स.क्रि.) खूब मारना-पीटना -- अटिक्कुक तल्लुक

धुरंधर (वि.) किसी विषय में बहुत बढ़ा-चढ़ा, प्रवीण -- धुरंधरन्, प्रवीणन्

धुरी (स्त्री.) लकड़ी या लोहे की वह छड़ या डंडा, जो पहियों के केंद्र में रहता है और जिसके सहारे पहिया घूमता है, अक्ष -- अच्चुतण्डुँ, अक्षम्

धुरी (स्त्री.) मूल आधार -- मूलाधारम्

धूम-धाम (स्त्री.) उल्लास से युक्त आयोजन, जिसमें खूब चहल-पहल और ठाठ-बाट हो -- कोलाहलम्, आंडबरम्

धूम्र-पान (पुं.) तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट आदि पीना -- पुकवलि

धृष्टता (स्त्री.) ढिठाई, दुस्साहस -- धाष्ट्येम् साहसम्

धैर्य (पुं.) धीरज, सब्र -- क्षम, समाधानम्

धोखा (पुं.) छल, कपट -- चति

धोखा (पुं.) भ्रम, भ्रांति -- तेट्टिद्धारण

धोना (स.क्रि.) जल या किसी तरल पदार्थ के प्रयोग से गंदगी को साफ करना -- कळुकुक

धोना (स.क्रि.) दूर करना, मिटाना -- कळुक्कि-कळयुक

धौंकना (स.क्रि.) आग दहकाने के लिए पंखे आदि की सहायता से जोर की हवा करना -- उल ऊतुक

ध्यान (पुं.) चित्त या मन को पूरी तरह एकाग्र और स्थिर करने की क्रिया या भाव -- ध्यानम्

ध्यान (पुं.) सोच-विचार, मनन -- मननम्, चिन्न

ध्येय (पुं.) उद्देश्य, लक्ष्य -- उद्देशम्

ध्रुव (वि.) अचल, अटल -- दृढ़, स्थिरम्

ध्रुव (वि.) स्थायी, नित्य, शाश्वत -- स्थायि, शाश्वतम्

ध्रुव (पुं.) पृथ्वी के उत्तरृ-दक्षिण सिरे -- ध्रुवम्

ध्रुव (पुं.) वह तारा, जो पृथ्वी की अक्ष के सिरे की सीध में उत्तर की ओर दिखाई देता है। -- ध्रुवनक्षत्रम्

ध्वज (पुं.) झंडा, पताका -- ध्वजम्, कोटि

ध्वजारोहण (पुं.) झंडा फहराने की क्रिया -- ध्वजारोहणम्, कोडिपेट्टम्

ध्वनि (स्त्री.) आवाज, शब्द -- ध्वनि

ध्वनि (स्त्री.) (काव्य में) व्यंग्य, व्यंग्यार्थ -- व्यंग्यम्, ध्वनि (काव्यत्तिले)

नंगा (वि.) जो कोई कपड़ा न पहने हो, दिगंबर -- नग्नमाय

नंगा (वि.) जिस पर कोई आवरण या आलंकारिक वस्तु न हो -- तुरन्न

नंगा (वि.) निर्लज्ज, बेशर्म, दुष्ट, पाजी -- नाणम् केट्ट

नकद (पुं.) लेन-देन में व्यवहार में आने वाला धन जो तुरंत दिया या चुकाया जाता है -- रोक्कम्

नकद (वि.) जिसका मूल्य रुपए पैसे के रूप में तुरंत चुकाया जाए -- रोक्कम्

नकद (क्रि.वि.) तुरंत भुगतान रुपए के रूप में -- रोक्कम्

नकदी (स्त्री.) रूपया पैसा जो तैयार या नोटों, सिक्कों आदि के रूप में सामने हो, खड़ा धन -- रोक्कम् पणम्

नकल (स्त्री.) किसी को कोई काम करते हुए देखकर उसी के अनुसार करने की क्रिया या भाव -- अनुकरणम्

नकल (स्त्री.) किसी कृति, चित्र, लेख आदि की ज्यों की त्यों तैयार की हुई प्रतिलिपि, अनुलिपि -- पकर्प्पु

नक्काशी (स्त्री.) धातु, पत्थर आदि पर खोद कर बेल-बूटे बनाने का काम या कला -- पूवेल कोत्तुपणि

नक्काशी (स्त्री.) उक्त प्रकार से बनाए गए बेल-बूटे आदि -- कोत्तिय पूक्कळ्

नक्शा (पुं.) रेखाओं आदि द्वारा किसी वस्तु की अंकित की हुई वह आकृति, जो उस वस्तु का सामान्य परिचय कराती है, मानचित्र -- भूपटम्

नक्शा (पुं.) रूपरेखा, खाका -- स्केच्, रूपरेख करडु

नक्षत्र (पुं.) तारा -- नक्षत्रम्

नक्षत्र (पुं.) चंद्रमा के पथ में पड़ने वाला 27 तारों का समूह -- नक्षत्रम्

नख-शिख (पुं.) पैरों के नाखून से लेकर सिर के बालों तक के सब अंग, शरीर के अंग-प्रत्यंग -- नख-शिखोन्तम्, पादादिकेशम्

नग (पं.) नगीना, मणि -- रत्नम्

नग (पं.) अदद या संख्यासूचक एक शब्द -- ऐण्णम्

नगर (पुं.) वह बस्ती जो गाँवों, कस्बों आदि से बड़ी हो, शहर -- नगरम्

नगरपालिका (स्त्री.) वह संस्था, जो नगर के स्वास्थ्य, जल, निकास, रोशनी आदि का प्रबंध करती है -- मुनिसिपालिट्टि

नगाड़ा (पुं.) डुगडुगी की तरह का चमड़ा मढ़ा हुआ एक प्रकार का बड़ा वाद्य यंत्र, नक्कारा -- पेरुंपरम नगरावु

नगीना (पुं.) रत्न, मणि, नग -- रत्नम्,

नग्न (वि.) नंगा -- नग्नम्

नग्न (वि.) आवरण रहित, उघड़ा -- तुरन्न

नजरबंद (वि.) वह बंदी, जिसकी चेष्टाओं पर नजर रखी जा सके और जो निश्चित स्थान और सीमा के बाहर आ-जा न सके -- वीट्टुतट-विलुळ्ळ

नट (पुं.) नाटक करने वाला, अभिनेता -- नटन् अभिनेतावु

नट (पुं.) तरह-तरह के शारीरिक करतब दिखाने वाली एक जाति -- कूत्ताटि

नटखट (वि.) चंचल, ऊधमी, शरारती -- विकृति

नमस्कार (वि.) झुककर आदरपूर्वक किया गया अभिवादन -- नमस्कारम्

नमस्कार (वि.) अभिवादन सूचक शब्द -- नमस्कारम्

नमूना (पुं.) इकाई जो उस वस्तु का स्वरूप बतलाने के लिए दिखाई जाती है -- सांपिळ्, मातृक

नमूना (पुं.) वह जिसे देखकर उसके अनुसार वैसा ही कुछ और बनाया जाए, प्रतिमान -- मातृक

नम्रता (स्त्री.) विनीय होने का भाव -- नम्रत, वणक्कम्

नया (वि.) जो अभी हाल में निकला या बना हो, नवीन -- पुतिय

नर (पुं.) पुरुष, आदमी, मर्द (मादा का विपर्यय) -- नरन्, मनुष्यन्

नरम (वि.) कोमल, मृदु, मुलायम -- मृदुत्वम्, मार्दवम्

नरमी (नर्मी) (स्त्री.) नरम या नर्म होने की अवस्था, गुण या भाव, मृदुता, कोमलता -- मृदुत्वम्, मार्दवम्

नरेश (पुं.) राजा -- राजावुं, नरेशन्

नर्तकी (स्त्री.) नाचने में प्रवीण स्त्री -- नर्तकि

नल (पुं.) गोल लंबा खंड या रचना, जिसका भीतरी भाग खोखला या पोला हो -- कुऴल्, टाप् पैप

नलकूप (पुं.) मशीन-चालित यंत्र, जिसके द्वारा जमीन के अंदर से पानी खींचा जाता है -- कुऴल्-क्किणर

नव (वि.) नया, नवीन, आधुनिक -- नवीनमाय, पुतिय

नवनीत (पुं.) ताज़ा मक्खन -- वेण्ण, नवनीतम्

नवयुवक (पुं.) जो अभी हाल में जवान हुआ हो, नौजवान, तरुण -- युवावु

नवीन (वि.) नया, नूतन -- नूतनम्, नवीनम्

नवीन (वि.) जो पहले-पहल या मूल रूप में बना हो, मौलिक -- आद्यमा-यिट्टुळ्ळ

नशाबंदी (स्त्री.) राज्य या समाज द्वारा मादक पदार्थों के बेचने-खरीदने और पान करने पर पाबंदी लगाना -- मद्यनिरोधनम्

नष्ट-भ्रष्ट (वि.) सब तरह से खराब और बरबाद -- नशिच्च

नष्ट-भ्रष्ट (वि.) व्यर्थ, बेकार -- उपयोग-शून्यम्

नस (स्त्री.) रक्तवाहिनी नली -- ञरंपु

नसबंदी (स्त्री.) शल्य-क्रिया द्वारा पुरुष की जननेंद्रिय के वीर्य-प्रवाह के मार्ग को अवरुद्ध कर देने की क्रिया, ताकि वह प्रजनन कार्य में अक्षम हो जाए -- बंध्यकरणम्

नसल (नस्ल) (स्त्री.) वंश -- इनम्, वंशम्

नलस (नस्ल) (स्त्री.) संतति -- संतति

नहाना (अ.क्रि.) स्नान करना -- कुळिक्कुक

नाग (पुं.) सर्प, साँप -- नाहम्, पांपु

नाग (पुं.) काले रंग का बड़ा और फन वाला साँप -- करिमूर्खन्

नागरिक (वि.) नगर में रहने वाला, नगर से संबंधित -- नगरवासि

नागरिक (वि.) असैनिक -- सिविल्

नागरिक (पुं.) किसी राज्य में जन्म लेने वाला वह व्यक्ति जिसे उस राज्य में रहने, नौकरी करने, संपत्ति रखने आदि के अधिकार प्राप्त होते हैं -- पौरन्

नागिन (स्त्री.) नाग (सर्प) की मादा -- पेण्णाम्यु

नाचना (अ.क्रि.) नृत्य करना -- तुळ्ळुक

नाचना (अ.क्रि.) संगीत के स्वर में ताल स्वर के अनुसार हाव-भावपूर्ण चेष्टाएँ करना -- आटुक, नृत्तम् वय्क्कुक

नाटक (पुं.) दृश्य काव्य -- नाटकम्

नाटक (पुं.) दिखावटी कार्य -- प्रहसनम्

नाता (पुं.) संबंध, रिश्ता -- बंधम्

नाथ (पुं.) प्रभु, स्वामी -- नाथन्, यजमानन्

नाथा (पुं.) पति को संबोधित करने वाला शब्द (नाटक अादि में) -- पति, भर्त्तावु

नाथा (पुं.) एक संप्रदाय -- NA

नाथा (स्त्री.) ऊँटों, बैलों आदि को वश में रखने के लिए नथनों में डाली जाने वाली रस्सी -- मुक्कुकयरु

नादान (वि.) भोला, अनुभवहीन, अकुशल या अनाड़ी -- निष्कपटनाय

नाप-तोल (स्त्री.) नाप-जोख -- अळक्कल्

नाप-तोल (स्त्री.) माप और वजन -- अळवु, अळवुम् तूक्कवुम्

नापना (स.क्रि.) लंबाई, चौड़ाई, गहराई-ऊँचाई, परिमाण, मात्रा आदि का ठीक ज्ञान प्राप्त करना, मापना -- अळक्कुक

नाम (पुं.) वस्तु, व्यक्ति आदि का बोधक शब्द संज्ञा -- पेरु, नामम्

नाम (पुं.) ख्याति, यश, प्रतिष्ठा -- प्रसिद्धि, पेरु

नामकरण (पुं.) नाम रखने की क्रिया या भाव -- नामकरणम्, पेरिटल्

नामकरण (पुं.) बच्चे का नाम रखने के लिए एक संस्कार -- नामकरण संस्कारम्

नामे (पुं.) लेखा आदि वह खाता, स्तंभ या मद जिसमें किसी पक्ष को दी गई रकम लिखी जाती है, जमा का विपर्याय -- पेरिल् चेलवु

नायक (पुं.) नेता, मार्गदर्शक -- नेतावु

नायक (पुं.) काव्य, नाटक, उपन्यास आदि का प्रधान पात्र -- नायकन्

नायिका (स्त्री.) महिला नेता, वीरांगना, अभिनेत्री -- नायिक

नायिका (स्त्री.) काव्य, नाटक, कहानी, उपन्यास आदि का मुख्य स्त्री पात्र -- नायिक

नारा (पुं.) किसी दल, समुदाय आदि के द्वारा जुलूस आदि के साथ उच्च स्वर में बोला जाने वाला वाक्य -- मुद्रावाक्यम्

नाराज (वि.) अप्रसन्न, रुष्ट -- क्रुद्यन्, देष्यप्पेट्ट

नारी (स्त्री.) स्त्री, औरत -- स्त्री, नारि

नाला (पुं.) गंदे पानी का निकास मार्ग, जलमार्ग -- ओट, चेरिय तोटु

नाव (स्त्री.) नौका, किश्ती -- तोणि

नाविका (पुं.) वह, जो नौका खेता हो, माँझी, मल्लाह -- वंचिक्कारन्

नाश (पुं.) वस्तु आदि की टूट-फूट कर ध्वस्त होने की क्रिया या भाव, ध्वंस, विध्वंस -- नाशम्

नाश (पुं.) अपव्यय, बरबादी -- पाऴाक्कल्

नास्तिक (पुं.) ईश्वर, परलोक, मत-मतांतरों आदि को न मानने वाला -- नास्तिकन्

निंदा (स्त्री.) किसी के दोषों, बुराइयों आदि का उल्लेख -- निंद

निःशुल्क (वि.) जिस पर कोई शुल्क या कर न लगता हो -- फीसिल्लाते, सौजन्यमायि

निःसंतान (वि.) संतान-रहित -- संतान-मिल्लात्त

निकट (क्रि.वि.) समय या स्थान की दृष्टि से पास ही में, समीप -- अटुत्तु

निकम्मा (वि.) जो कोई काम न करता हो, बेकार -- पणियोन्नुं चेय्यात्त

निकम्मा (वि.) जो किसी काम में आने योग्य न हो -- उपयोग-शून्यम्

निकलना (अ.क्रि.) भीतर से बाहर आना, प्रकट होना -- पुरत्तु वरिक

निकलना (अ.क्रि.) उदित होना -- उदिक्कुक

निकासी (स्त्री.) निकलने या निकालने की क्रिया -- पुरत्ताक्कल्

निकासी (स्त्री.) दुकान में रखे हुए अथवा कारखानों आदि में तैयार होने वाले माल का बिकना -- विल्पन

निकृष्ट (वि.) नीच, गिरा हुआ, निम्न, घटिया -- निकृष्टम्

निखट्टू (वि.) (व्यक्ति) जो कुछ भी न कमाता हो -- संपादिक्कान् कोळ्ळात्त

निखट्टू (वि.) आलसी, बेकार -- मुळुमटियन्

निगलना (स.क्रि.) कोई चीज बिना चबाए ही गले के नीचे उतार लेना -- विळङ्.ङ्.क

निग्रह (पुं.) अवरोध, रोक -- निग्रहम्, अटक्कल्

निग्रह (पुं.) आचरण को मर्यादित करना -- NA

निचोड़ (पुं.) सार, सत्व -- रसम्, चारु, सारांश

निचोड़ना (स.क्रि.) गीली या रसदार वस्तु से उसका रस निकालना -- पिऴियुक

निडर (वि.) निर्भय, निर्भीक -- निर्भयन्

निडर (वि.) साहसी -- धैर्यशीलन्

नितांत (क्रि.वि.) बहुत अधिक -- वळरेयधिकम्

नितांत (क्रि.वि.) बिल्कुल -- पूर्णमाय

निथारना (स.क्रि.) पानी आदि से मैल को अलग करना -- ऊट्टि त्तेळिक्कुक

निदान (पुं.) मूल कारण -- मूल कारणम्

निदान (पुं.) चिकित्सा शास्त्र में रोग की पहचान एवं समाधान -- रोग निदानम्

निदान (पुं.) समाधान -- NA

निद्रा (स्त्री.) नींद -- उरक्कम्, निद्र

निधन (पुं.) मृत्यु, देहावसान -- मरणम्

निधि (पुं.) विशेष कार्य के लिए जमा किया हुआ धन -- फण्डु, निधि

निपटना (अ.क्रि.) पूरा होना, संपन्न होना -- पूर्णमाकुक

निपटना (अ.क्रि.) निवृत्त होना -- ओऴियुक, विरमिक्कुक

निपटना (अ.क्रि.) लेन-देन, झगड़े विवाद आदि का निपटना होना -- तीरुमानम्, वरुत्तुक

निपटाना (स.क्रि.) कार्य आदि पूर्ण या संपादित करना -- कार्यम् नेटुक

निपटाना (स.क्रि.) विवाद या झगड़े को समाप्त करना -- वऴ्क्कु अवसानि प्पिक्कुक

निपुण (वि.) दक्ष, प्रवीण, कुशल -- निपुणन्, कुशलन्

निबंध (पुं.) वह विचारपूर्ण विवरणात्मक विस्तृत लेख, जिसमें सब अंगों का विवेचन किया गया हो -- उपन्यासम्

निबाहना (स.क्रि.) निर्वाह करना, निभाना -- निर्वहिक्कुक

निबाहना (स.क्रि.) (दायित्व, कार्य वचन आदि का) पालन करना, पूरा करना -- पालिक्कुक, पूर्त्तियाक्कुक

निभाना (स.क्रि.) उत्तरदायित्व, कार्य, वचन आदि को पूरा करना -- शोभिक्कुक

निभाना (स.क्रि.) व्यक्ति अथवा स्थिति के -- शोभिक्कुक

निमंत्रण (पुं.) किसी अवसर विशेष पर आदरपूर्वक बुलाने की क्रिया या भाव -- क्षणम्

नियंत्रण (पुं.) मनमानी रोकने के लिए बंधन लगाना, नियम आदि द्वारा रोकना -- नियंत्रणम्

नियंत्रण (पुं.) व्यापारिक क्षेत्र में शासन द्वारा किसी वस्तु के मूल्य और वितरण को नियमित और सुनिश्चित करना -- नियंत्रणम्

नियम (पुं.) मनमानी रोकने के लिए बनाए गए आदेश/निर्देश -- नियमम्, चट्टम्

निरंकुश (वि.) जिस पर किसी प्रकार का नियंंत्रण न हो -- निरंकुशमाय

निरंकुश (वि.) स्वेच्छाचारी -- तांतोन्नियाय तन्निष्टक्कारनाय

निरंतर (वि.) लगातार -- निरंतरम्, तुटरे

निरस्त्रीकरण (पुं.) परस्पर युद्ध की संभावना कम करने के लिए देशों का सैनिक बल कम करना -- निरायुधीकरणम्

निरा (वि.) विशुद्ध -- शुद्धामाय

निरा (वि.) केवल, सिर्फ, एकमात्र -- वेरुम्

निराकरण (पुं.) दूर करना या हटाना -- निराकरणम्, अकट्टुक

निराकरण (पुं.) आपत्ति आदि का तर्कपूर्वक खंडन, निवारण करना -- खण्डनम्

निराकार (वि.) जिसका कोई आकार न हो, स्वरूप रहित -- निराकारनाथ रूपमिल्लात्त

निराकार (पुं.) ब्रह्म -- ब्रह्मं

निराधार (वि.) जिसका कोई आधार न हो, आधारहीन -- अटिस्थानरहित्म

निरामिष (वि.) जिसमें मांस न मिला हो -- सस्यभुक्काय

निरामिष (वि.) शाकाहारी -- सस्यभुक्कु

निराश (वि.) जिसे आशा न रह गई हो, हताशा -- निराशनाय

निरीक्षक (पुं.) जाँच-पड़ताल, निरीक्षण आदि करने वाला -- निरीक्षकन्

निरूपण (पुं.) छान-बीन तथा सोच विचार कर किसी बात या विषय का विवेचन करना -- निरूपणम्

निर्जीव (वि.) प्राणरहित, जड़, अचेतन -- जीवनिल्लात्त

निर्णय (पुं.) निष्कर्ष, परिणाम, फैसला -- तीरुमानम्, विधि

निर्दय (वि.) दया-हीन, कठोर, निष्ठुर -- निर्दयन्, निष्ठुरन्

निर्देशक (पुं.) दिशा बताने या निर्देशन करने वाला -- निर्देशकन्, डयरेक्टर्

निर्दोष (वि.) दोषरहित -- दोषमिल्लात्त, कुट्टमट्ट

निर्दोष (वि.) जिसने कोई अपराध न किया हो, निरपराध -- निरपराधि

निर्धन (वि.) धन-रहित, गरीब -- निर्धनन्, दरिद्रनाय

निर्धारण (पुं.) तय या निश्चित करना, दृढ़ धारणा बनाना -- निर्धारणम्, निश्चयिक्कल्

निर्बल (वि.) (शारीरिक दृष्टि से बलहीन, कमजोर) -- बलमिल्लात्त

निर्बल (वि.) जिसे यथेष्ट अधिकार या सत्ता प्राप्त न हो, शक्तिहीन -- अधिकार-मिल्लात्

निर्भर (वि.) किसी दूसरे पर अवलंबित या आश्रित -- आश्रयिच्च

निर्मल (वि.) साफ, स्वच्छ -- स्वच्छम्, निर्मलम्

निर्मल (वि.) निष्कपट, शुद्ध -- निष्कपटम्

निर्माण (पुं.) कोई नई चीज तैयार करना या बनाना, रचना -- निर्माणम्

निर्यात (पुं.) माल बाहर भेजने की क्रिया या भाव -- कयट्टुमति

निर्यात (पुं.) बाहर या विदेशों में भेजा हुआ माल -- कयट्टुमतिच्चरक्कु

निर्वाचन (पुं.) किसी एक या अधिक को चुनना, चयन -- तिरञ्ञटुक्कल, तिरञ्ञेटुप्पु

निवारण (पुं.) दूर करना, हटाना -- निवारणम्

निवेदन (पुं.) नम्रतापूर्ण अनुरोध, प्रार्थना -- निवेदनम्

निवेदन (पुं.) अर्पण, समर्पण -- समर्पणम्, निवेदनम्

निवेश (पुं.) किसी व्यापार, उद्योग आदि में धन या पूँजी लगाने का कार्य तथा इस प्रकार से लगाया हुआ धन, पूँजी आदि -- मुतलिरक्कल्, मुतल्मुटक्कु

निशा (स्त्री.) रात -- रात्रि, निश

निशान (पुं.) चिह्न या लक्षण -- अटपाळम्

निशान (पुं.) दाग, धब्बा -- अटयाळम्, पाटु

निशान (पुं.) झंडा या पताका -- चिह्नम्, कोडि, पताक

निश्चय (पुं.) कोई कार्य करने का अंतिम निर्णय या संकल्प करना -- निश्चयम्

निश्चल (वि.) अविचल, स्थिर -- स्थिरम्

निश्चल (वि.) अपरिवर्तनशील -- मारात्त

निश्चित (वि.) (बात या प्रस्ताव) जिसके संबंध में निश्चय हो चुका हो -- निश्चितम्, तीरु मानिच्च

निश्चित (वि.) जो अटल या स्थिर हो -- दृढ़

निश्छल (वि.) (व्यक्ति) छल कपट से रहित -- कपटमिल्लात्त, निष्कपटन्

निष्कर्ष (पुं.) विचार विमर्श आदि के उपरांत निकलने वाला परिणाम -- निगमनम्

निष्कर्ष (पुं.) सारांश, निचोड़ -- सारम्,निष्कार्मण

निष्काम (वि.) (व्यक्ति) जिसके मन में कामनाएँ या वासनाएँ न हों -- निर्लिप्तन्

निष्काम (वि.) (कार्य) जो बिना किसी प्रकार की कामना के किया जाए -- निष्कामम्

निष्कासन (पुं.) किसी को किसी पद, क्षेत्र, स्थान, वर्ग, दल आदि से निकालना, बाहर करना या हटाना -- निष्कासनम् पुरत्ताक्कल्

निष्क्रिय (वि.) क्रियारहित, निश्चेष्ट -- निष्क्रियन्

निष्क्रिय (वि.) अकर्मण्य, आलसी -- मटियन्

निष्ठा (स्त्री.) दृढ़ निश्चय या विश्वास -- दृढ़विश्वासम्

निष्ठा (स्त्री.) आस्था, श्रद्धा, भक्ति -- भक्ति

निष्ठा (स्त्री.) ईमानदारी, वफादारी -- निष्ठ

निष्पक्ष (वि.) (व्यक्ति) जो किसी पक्ष या दल में सम्मिलित न हो, तटस्थ -- निष्पक्षन्

निष्पक्ष (वि.) पक्षपात-रहित -- पक्षपात-मिल्लात्त

निष्पादन (पुं.) आज्ञा, आदेश, नियम, निश्चय आदि के अनुसार कोई काम ठीक तरह से पूरा करना -- निर्वहणम्

निस्पंद (वि.) जिसमें किसी प्रकार की हलचल न हो -- इळकात्त स्थिरम्

निस्संदेह (वि.) जिसमें संदेह न हो, असंदिग्ध, बेशक -- संशयमिल्लात्त

निस्संदेह (क्रि.वि.) निश्चित रूप से अवश्य -- संशयमन्ये

नींद (स्त्री.) निद्रा -- निद्र, उरक्कम्

नींव (स्त्री.) जमीन के अंदर का हिस्सा, बुनियाद -- अस्थिवारम्

नीचा (वि.) अधिकार, पद, मर्यादा आदि की दृष्टि से जो औरों से घटकर हो, छोटा -- ताळ्न्न

नीचा (वि.) जो किसी सम धरातल या स्तर से निम्न स्तर पर स्थित हो, निम्न -- ताळून्न

नीचे (क्रि.वि.) किसी की तुलना में निम्न धरातल पर -- ताऴे

नीचे (क्रि.वि.) किसी की अधीनता या वश में -- कीऴिल

नीति (स्त्री.) सदाचार, सद्व्यवहार आदि के नियम, ढंग या रीतियाँ -- नीति

नीति (स्त्री.) राज्य या शासन की रक्षा और व्यवस्था के लिए स्थिर किए हुए सिद्धांत -- नयम्

नीति (स्त्री.) युक्ति, तरकीब -- तंत्रम्

नीलामी (स्त्री.) वस्तुओं की वह सार्वजनिक बिक्री, जिसमें सबसे अधिक या बढ़कर दाम लगाने वाले के हाथ वस्तुएँ बेची जाती हैं -- लेलम्

नीहारिका (स्त्री.) रात के समय आकाश में दिखाई पड़ने वाले घने कोहरे की तरह के प्रकाश पुंज -- नीहारिक

नुकसान (पुं.) हानि, घाटा -- नष्टम्

नुकसान (पुं.) किसी प्रकार होने वाली खराबी या विकार -- दोषं, कुट्ट

नेता (पुं.) नायक -- नेतावु

नेता (पुं.) राजनैतिक या सामाजिक दल का अगुआ -- नेतावु

नेतृत्व (पुं.) नेता का पद तथा कार्य -- नेतृत्वम्

नैतिक (वि.) नीति-संबंधी -- नयंसंबंधिच्च

नैतिक (वि.) नीति-सम्मत -- नीतियुक्तम्, नैतिकम्

नौकर (पुं.) सेवक -- भृत्यन्, वेलक्कारन्

नौकर (पुं.) कर्मचारी -- उद्योगस्थन्

नौकरी (स्त्री.) नौकर बनकर सेवा अथवा कार्य करते रहने की अवस्था या भाव -- वेल

नौकरी (स्त्री.) वह पद या काम जिसके लिए वेतन मिलता हो, रोजगार -- जोलि, तोऴिल्

नौका (स्त्री.) नाव, किश्ती -- तोणि वळ्ळम्

पंकज (वि.पुं.) कीचड़ से उत्पन्न, कमल -- पंकजम्

पंक्ति (स्त्री.) कतार -- वरि, पंक्ति, पंति

पंक्ति (स्त्री.) छपे हुए अक्षरों की एक सीध में पढ़ने के क्रम से लगी हुई श्रृंखला -- पंक्ति, वरि

पंख (पुं.) पक्षियों तथा कुछ जंतुओं का वह अंग, जिससे वे उड़ते है, पर -- चिरकु

पंखा (पुं.) गर्मी से बचाव के लिए ताड़ धातु आदि की बनी वस्तु जिससे हवा का वेग बढ़ाया जाता हो -- विशरि

पंचांग (पुं.) वह पंजी या पुस्तिका, जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का उल्लेख होता हो, जंत्री, पत्रा -- पंचांगम्

पंचायत (स्त्री.) गाँव या बिरादरी के चुने हुए सदस्यों की सभा, जो लोगों के झगड़ों का विचार और निर्णय तथा विकास कार्य करती है -- पंचायत्तु

पंछी (पुं.) पक्षी, परिंदा -- पक्षि

पंडित (नि.) कुशल, निपुण -- पंडितन्

पंडित (पुं.) शास्त्रों आदि का ज्ञाता, ब्राह्मण -- आचर्यन्

पंथ (पुं.) मार्ग, रास्ता -- वऴि

पंथ (पुं.) धार्मिक मत या संप्रदाय -- मतप्रस्थानम्, संप्रदायम्

पकड़ना (स.क्रि.) थामना -- पिटिक्कुक

पकड़ना (स.क्रि.) बंदी बनाना -- तटविल् आक्कुक

पकाना (स.क्रि.) अन्न, फल आदि को इस प्रकार आँच, गर्मी आदि देना कि वे मुलायम होकर खाने योग्य ह जाएँ -- पाकम्, चेय्युकु, वेविक्कुक, पळुप्पिक्कुक

पक्का (वि.) दृढ़, निश्चित, स्थिर -- उरच्च

पक्का (वि.) अच्छी तरह से पका या पकाया हुआ -- पळुत्त, वेविच्च

पक्ष (पुं.) पक्षियों का डैन या पंख -- चिरकु, तूवल्

पक्ष (पुं.) किसी विचार, सिद्धांत या तथ्य आदि का एक पहलू -- पक्षम्, वशम्

पक्ष (पुं.) चांद्रमास के दो बराबर भागों में से प्रत्येक भाग, जो प्रायः 15 दिन का होता है, पखवाड़ा -- पक्षम्

पक्षपात (पुं.) अनुचित रूप से किसी का पक्ष लेना -- पक्षपातम्

पक्षी (पुं.) परों वाला, पंछी, परिंदा -- पक्षि

पखवाड़ा (पुं.) पंद्रह दिनों का समय, पक्ष -- पक्षम्

पगडंडी (स्त्री.) आने-जाने के कारण जंगल, खेत या मैदान में बना हुआ सँकरा मार्ग -- ओट्टयटिप्पात

पचाना (स.क्रि.) खाई हुई वस्तु को पक्वाशय की अग्नि से रस में परिणत करना -- दहिप्पिक्कुक

पछताना (अ.क्रि.) पश्चाताप करना -- पश्चात्तपिक्कुक

पछाड़ना (स.क्रि.) कुश्ती अथवा प्रतियोगिता आदि में किसी को परास्त करना -- मरिच्चिटुक

पटकना (स.क्रि.) किसी व्यक्ति या वस्तु आदि को उठाकर झटके के साथ पृथ्वी पर गिराना -- अटिच्चु वीळ्त्तुक

पटरी (पटड़ी) (स्त्री.) सड़क के दोनों ओर का उठा हुआ पैदल-पथ -- फुटपाथ, नटवऴि

पटरी (पटड़ी) (स्त्री.) लोहे के लंबे छड़, जिन पर रेलगाड़ी चलती है -- पाळम्

पटरी (पटड़ी) (स्त्री.) काठ का छोटा पतला और लंबोतरा टुकड़ा, छोटा पटरा -- पट्टिक

पटसन (पुं.) सन नामक प्रसिद्ध पौधा, जिसके डंठलों के रेंशों से रस्सी, बोरे, गलीचे आदि बनाए जाते हैं -- चणम्

पटसन (पुं.) सन के रेशे, जूट -- चणम्

पटाखा (पटाका) (पुं.) एक प्रकार की आतिशबाजी, जिससे जोर से पट या पटाक की ध्वनि होती है -- पटक्कम्

पड़ना (अ.क्रि.) गिरना, पड़े रहना -- वीऴुक

पड़ना (अ.क्रि.) लेटना, बीमार होना -- किटक्कुक, रोगियाकुक

पड़ाव (पुं.) मार्ग में पड़ने वाला वह स्थान जहाँ सेना, काफिले, यात्री आदि कुछ समय के लिए विश्राम करने को ठहरते हैं -- तावळम्

पतंग (स्त्री.) बाँस की कमानियों के ढाँचे पर कागज़ मढ़कर बनाई हुई वस्तु, जिसे तागे से बाँधकर हवा में उड़ाते हैं -- पट्टम्

पतंग (पुं.) पतंगा, शलभ -- शलभम्

पतन (पुं.) अधोगति, गिरावट -- पतनम्, वीळ्च

पतन (पुं.) निंदनीय आचरण में प्रवृत्त होना -- अधःपतनम्

पतला (वि.) जो गाढ़ा न हो, जिसमें तरल अंश अधिक हो -- नेर्त्त

पतला (वि.) कृश, दुबला -- मेलिञ्ञ

पतला (वि.) सँकरा, बारीक -- इटुङ्डिय

पता (पुं.) किसी वस्तु स्थान या व्यक्ति का ठिकाना -- मेल् विलासम्

पता (पुं.) किसी व्यक्ति, विषय आदि के संबंध में जानकारी -- विवरम्

पताका (स्त्री.) झंडा, ध्वजा -- कोटि, पताक

पताका (स्त्री.) साहित्य में (नाटक में) आधिकारिक कथा की सहायतार्थ दूर तक चलने वाली प्रासंगिक कथा -- पताक

पत्तन (पुं.) वायुयानों अथवा जलयानों के ठहरने का स्थान -- विमानत्तावळं, तुरमुखम्

पत्ता (पुं.) पेड़-पौधों की शाखाओं में लगने वाले प्रायः हरे रंग के चपटे लचीले अवयव -- इल

पत्ता (पुं.) ताश (प्लेइंगकार्ड) -- चीट्टुँ

पत्थर (पुं.) धातु से भिन्न कड़ा ठोस और भारी भूद्रव्य -- कल्लु

पत्रकार (पुं.) वह व्यक्ति, जो समाचार पत्रों को नित्य नए समाचारों की सूचना देता, उन पर टीका टिप्पणी करता अथवा उनको संपादित करता हो (जर्नलिस्ट) -- पत्र प्रवर्तकन्

पत्राचार (पुं.) परस्पर एक दूसरे को पत्र लिखना, पत्र-व्यवहार -- ऐळुत्तुकुत्तु, कत्तिटपाटु

पथ (पुं.) मार्ग, रास्ता, राह -- वऴि

पथ (पुं.) कार्य या व्यवहार की पद्धति -- प्रवर्तन-पद्धति

पथ-प्रदर्शक (पुं.) किसी कार्य या व्यवहार की पद्धति बताने वाला, मार्गदर्शक -- मार्गदर्शि, वऴिकाट्टि

पथ-प्रदर्शक (पुं.) न्याय मार्ग अथवा आचरण से विमुख -- न्यायम् विट्ट, वऴिपिऴिच्च

पथिक (पुं.) बटोही, राही -- पांथन, वऴि पोक्कन्

पथ्य (वि.) गुणकारी, लाभदायक -- पथ्य प्रयोजनकरम्

पथ्य (पुं.) वह हल्का भोजन, जो रोगी व्यक्त को दिया जाए -- पथ्यम्

पद (पुं.) कदम, पाँव, पैर -- अटि, काल्

पद (पुं.) वाक्य का अंश या खंड -- पदम्, वाक्कु

पद (पुं.) ओहदा, उपाधि -- पदवि

पद (पुं.) छंद, श्लोक आदि का चतुर्थांश -- पादम्

पदचाप (स्त्री.) चलते समय पैरों से होने वाली ध्वनि -- कालोच्च

पद-चिह्न (पुं.) पैरों की छाप -- कालटयाळम्, पदंचिह्नम्

पद-चिह्न (पुं.) बड़ों द्वारा बतलाए हुए आदर्श अथवा कार्य करने का ढंग -- वऴित्तार, प्रव्रर्तन-रीति

पद्धति (स्त्री.) कार्य करने का तरीका, कार्य प्रणाली -- पद्धति

पद्धति (स्त्री.) रीति, पथ मार्ग -- वऴि

पनघट (पुं.) वह घाट या स्थान, जहाँ से लोग पानी भरकर लाते हैं -- कटवु, किणट्टुकर, कुळक्कटवु

पनडुब्बी (स्त्री.) पानी के अंदर डूबकर चलने वाली नाव (सबमरीन) -- जलांतर्वाहिनि, मुङगि कप्पल्

परंतु (अव्य.) इतना होने पर भी, लेकिन, पर -- पक्षे ऐन्नल्

परंपरा (स्त्री.) सिलसिला, क्रम -- क्रमम्, परंपरे

परंपरा (स्त्री.) रीति, रिवाज, प्रथा -- पारपर्यम्

परखना (स.क्रि.) अच्छे-बुरे की पहचान करना -- परिशोधिच्चरियुक

परदा (पुं.) आड़ या बचाव करने के लिए बीच में टाँगा जाने वाला कपड़ा आदि -- कर्टन्, परद

परदा (पुं.) घूँघट -- मूटुपटम्

परदा (पुं.) टी.वी., सिनेमा आदि में प्रयुक्त पटल -- NA

परदेसी (वि.) जो अपना देश छोड़कर किसी दूसरे देश में गया हो -- परदेशि, विदेशि

परम (वि.) मुख्य, प्रधान -- मुख्यमाय

परम (वि.) अत्यधिक -- अत्यधिकम्, परमम्

परमाणु (पुं.) किसी तत्व का एक अविभाज्य टुकड़ा -- अणु, परमाणु

परमात्मा (पुं.) ईश्वर, परब्रह्म -- परमात्मावु

परमार्थ (पुं.) मोक्ष -- मोक्षम्

परमार्थ (पुं.) परोपकार -- परोपकारम्

परलोक (पुं.) इह लोक से भिन्न दूसरा लोक -- परलोकम्

परसों (अव्य.) बीते हुए दिन से ठीक पहले वाला दिन -- मिनिञ्ञान्नु

परस्पर (क्रि.वि.) आपस में -- परस्परम्

पराकाष्ठा (स्त्री.) चरम सीमा, हद -- परमकाष्ठ

पराक्रम (पुं.) शौर्य, सामर्थ्य, बल -- पराक्रमम्

पराग (पुं.) फूल के लंबे केसरों पर जमे रहने वाले रज कण -- परागम्, पूंपोटि

पराजय (स्त्री.) हार, विजय का उल्टा -- पराजयम्

पराधीनता (स्त्री.) दूसरे के अधीन अर्थात् पराधीन होने की अवस्था -- अस्वातंत्र्यं, अटिमत्तम्

परामर्श (पुं.) सलाह, सम्मति -- उपदेशम्

परामर्श (पुं.) विवेचन, विचार -- परामर्शम्

पराया (वि./पुं.) जिसका संबंध दूसरे से हो, अपने से भिन्न, आत्मीय या स्वजन से भिन्न -- मट्टोराळुटे, अन्य

परिक्रमा (स्त्री.) चारों ओर चक्कर लगाना या घूमना -- प्रदक्षिणम्

परिक्रमा (स्त्री.) धार्मिक एवं खगोलीय संदर्भ में किसी तीर्थ, देवता या मंदिर के चारों ओर भक्ति और श्रद्धा से तथा पुण्य की भावना से चक्कर लगाने की क्रिया -- प्रदक्षिणम्

परिचय (पुं.) ऐसी स्थिति जिसमें दो व्यक्ति एक दूसरे को प्रायः प्रत्यक्ष भेंट के आधार पर जानते और पहचानते हों, जान-पहचान -- परचयम्

परिचय (पुं.) किसी व्यक्ति के नाम धाम या गुण-कर्म आदि से संबंध रखने वाली बातें जो किसी को बतलाई जाएँ -- परिचयप्पोटुत्तल्

परिचर्या (स्त्री.) किसी के द्वारा दी जाने वाली अनेक प्रकार की सेवाएँ, सेवा सुश्रुषा -- सेवनम्

परिचर्या (स्त्री.) रोगी की सुश्रुषा -- शुश्रूष, परिचर्य

परिचारिका (स्त्री.) सेवा करने वाली स्त्री, सेविका (नर्स) -- परिचारिक

परिच्छेद (पुं.) अध्याय, प्रकरण -- अध्यायम्

परिजन (पुं.) चारों ओर के लोग विशेषतः परिवार के सदस्य -- परिजनम्

परिजन (पुं.) अनुगामी और अनुचर वर्गः संबंधी -- परिवारम्

परिणाम (पुं.) किसी काम या बात का तर्क संगत रूप में अंत होने पर उससे प्राप्त हाने वाला फल (रिजल्ट) -- फलम्, रिजल्ट्

परिणाम (पुं.) किसी कार्य के उपरांत क्रियात्मक रूप से पड़ने वाला प्रभाव (कांसीक्वेंस) -- अनंतरफलं, परिणामम्

परित्याग (पुं.) अधिकार, स्वामित्व, संबंध तथा निजी संपत्ति आदि का सदा के लिए किया जाने वाला त्याग, पूरी तरह से छोड़ देना -- परित्याग

परिधि (स्त्री.) वृत्त की रेखा -- परिधि

परिधि (स्त्री.) किसी गोलाकार वस्तु के चारों ओर खिंची हुई वृत्ताकार रेखा -- परिधि

परिधि (स्त्री.) वह गोलाकार मार्ग, जिस पर कोई चीज चलती, घूमती या चक्कर लगाती हो -- वृत्ताकारमाय

परिपक्व (वि.) जो विकास आदि की दृष्टि से पूर्णता तक पहुँच चुका हो -- नल्ल पोले पळुत्त

परिपक्व (वि.) अच्छी तरह से पका हुआ -- नल्लपोले पळुत्त

परिभाषा (स्त्री.) ऐसा कथन या वाक्य, जो किसी पद या शब्द का अर्थ या आशय स्पष्ट रूप से बतलाता या व्यक्त करता हो (डेफिनिशन) -- निर्वचनम्

परिमाण (पुं.) गिनने, तोलने, मापने आदि पर प्राप्त होने वाला फल -- परिमाणम्, अळवु

परिमाण (पुं.) नाप-जोख, तोल आदि की दृष्टि से किसी वस्तु की लंबाई-चौड़ाई, भार, घनत्व, विस्तार आदि, मान (क्वान्टिटी) -- मात्र, अळवु

परिमार्जनन (पुं.) साफ करने के लिए अच्छी तरह धोना -- नल्ल पोले कळुकल्

परिमार्जनन (पुं.) अच्छी तरह साफ करना -- नल्ल पोले वृत्तियाक्कल

परिमार्जनन (पुं.) भूलें आदि सुधारना -- तेट्ट तिरुत्तल्

परिवर्धन (पुं.) आकार-प्रकार, विषय-वस्तु आदि में की जाने वाली वृद्धि -- परिवर्द्धनम

परिवर्तन (पुं.) बढ़ाया हुआ अंश -- परिवृद्धि

परिवहन (पुं.) माल, यात्रियों आदि को एक स्थान से ढोकर दूसरे स्थान पर ले जाने का कार्य (ट्रांसपोर्ट) -- गतागतम्

परिवार (पुं.) एक परिवार में और विशेषतः एक कर्ता के अधीन या संरक्षण में रहने वाले लोग, कुटुंब (फैमिली) -- कुटुंबं

परिवार (पुं.) समान गुणधर्म वाला वर्ग -- वर्ग

परिवार नियोजन (पुं.) जनसंख्या नियंत्रण का तरीका (फैमिली प्लानिंग) -- कुटुंबासूत्रणाम्

परिवेश (पुं.) परिधि, घेरा, चारों तरफ का माहौल -- चुट्टुपाटु

परिशिष्ट (वि.) छूटा या बाकी बचा हुआ, अवशिष्ट -- अनुबंधम्

परिशिष्ट (पुं.) पुस्तकों आदि के अंत में दी जाने वाली वे बातें, जो मूल में आने से रह गईं हों अथवा जो मूल में आई हुई बातों के स्पष्टीकरण के लिए हों -- अनुबंधम्

परिश्रम (पुं.) मानसिक या शारीरिक श्रम, मेहनत -- परिश्रमम्, प्रयत्नं

परिषद् (स्त्री.) किसी संस्था के निर्वाचित या मनोनीत सदस्यों का समूह कौंसिल -- परिषात्तु

परिषद् (स्त्री.) सभा -- सभ

परिष्कार (पुं.) अच्छी तरह ठीक और साफ करने की क्रिया या भाव -- शुद्धिकरणम्

परिष्कार (पुं.) त्रुटियाँ, दोष आदि दूर करके सुंदर, सुरुचिपूर्ण और स्वच्छ बनाना -- परिष्करिक्कल्

परिष्कार (पुं.) निर्मलता, स्वच्छता -- स्वच्छत

परिस्थिति (स्त्री.) चारों ओर की स्थिति, हालत (सर्कमस्टांसिल) -- परित-स्थिति

परीक्षण (पुं.) परीक्षा करने या लेने की क्रिया -- परीक्षिक्कल्

परीक्षण (पुं.) जाँच, परख -- परिक्षणम्, परिशोधनम्

परीक्षा (स्त्री.) किसी के गुण, धैर्य, योग्यता, सामर्थ्य आदि की ठीक ठाक स्थिति जानने या पता लगाने की क्रिया या भाव -- परीक्ष

परीक्षा (स्त्री.) जाँच-पड़ताल या देख-भाल -- अन्वेषणम्

परोक्ष (वि.) आंखों से ओझल -- परोक्षमाय

परोक्ष (वि.) जो सामने न हो, अनुपस्थित -- मुन्यिल् इल्लात्त

परोक्ष (वि.) छिपा हुआ, गुप्त -- परोक्षम्

परोक्ष (पुं.) आँखों के सामने न होने की अवस्था, अनुपस्थिति -- परोक्ष-मायिरिक्कल्

परोक्ष (पुं.) व्याकरण में पूर्ण भूतकाल -- परोक्ष भूतकालम्

परोपकार (पुं.) दूसरों की भलाई का काम -- परोपकारम्

पर्यटक (पुं.) देश-विदेश में घूमनेफिरने वाला -- संचारि

पर्यटन (पुं.) अनेक महत्वपूर्ण स्थल देखने तथा मन-बहलाव के लिए किया जाने वाला भ्रमण -- पर्यटनम्

पर्याप्त (वि.) जितना आवश्यक हो उतना सब, यथेष्ट, काफी -- पर्याप्तम्, वेण्टत्र

पर्याय (पुं.) समानार्थक शब्द -- पर्यायम्

पर्व (पुं.) ग्रंथ आदि का अंश, खंड, भाग -- पर्वम्, अध्यायम्

पर्व (पुं.) उत्सव और त्योहार -- उत्सवम्

पर्वतारोहण (पुं.) पहाड़ पर चढ़ने की क्रिया -- पर्वतारोहणं

पलायन (पुं.) निकल भागने या बच निकलने की क्रिया या भाव -- पलायनम्

पवन (पुं.) वायु, हवा -- वायु

पवित्र (वि.) शुद्ध, पाक -- पवित्रम्

पवित्र (वि.) पूज्य व्यक्ति -- सद्वृत्तन

पवित्र (वि.) साफ, स्वच्छ, निर्मल -- वृत्तियाय, निर्मलमाय

पशु (पुं.) जानवर, डंगर, चौपाया -- मृगम्

पश्चाताप (पुं.) पछतावा, किसी कर्म के बाद उसके अनौचित्य का भान होने पर मन में होने वाला दुःख -- पश्चात्तापम्

पसारना (स.क्रि.) अधिक विस्तृत करना -- विरिक्कुक, विस्तरिक्कुक

पसारना (स.क्रि.) फैलाना -- परत्तुक

पसीना (पुं.) ताप, परिश्रम आदि के कारण शरीर या अंगों में से निकलने वाले जलकण, स्वेद -- वियर्प्यु

पहचान (पहिचान) (स्त्री.) पहचानने की क्रिया, भाव या शक्ति -- तिरिच्चरियल्

पहचान (पहिचान) (स्त्री.) कोई ऐसा चिह्न या लक्षण जिससे पता चले कि वह अमुक व्यक्ति या वस्तु है -- लक्षणम्

पहचान (पहिचान) (स्त्री.) परिचय -- परिचयम्

पहचानना (स.क्रि.) चित्रों, लक्षणों, रूप-रंग के आधार पर व्यक्ति या वस्तु को जानना या समझ लोना कि यह अमुक व्यक्ति या वस्तु है जिसे मैं पहले से जानता हूँ -- तिरिच्चरियुक

पहचानना (स.क्रि.) किसी वस्तु या व्यक्ति के गुण दोषों, योग्यताओं आदि से भली भाँति परिचित होना -- मनस्सिलाक्कुक

पहनना (स.क्रि.) कपड़े, गहने आदि धारण करना -- वेषम्, वस्त्रङ्ङ्ळ्

पहनावा (पुं.) पहनने के कपड़े, पोशाक -- वेषम्, वस्त्रङ्ङळ्

पहनावा (पुं.) किसी जाति, देश आदि के लोगों द्वारा सामान्यतः पहने जाने वाले कपड़े -- वस्त्रधारणम्, उट्टप्पु

पहरेदार (पुं.) चौकीदार, संतरी -- पारावुकारन्

पहलवान (पुं.) कुश्ती लड़ने वाला मजबूत और कसरती व्यक्ति -- गुस्तिक्कारन्, फयल्वान्

पहला (वि.) समय के विचार से जो आदि में हुआ हो -- आद्यत्ते

पहला (वि.) प्रथम -- ओनामार्त

पहला (वि.) वर्तमान से पूर्व का, विगत -- पऴप, मुन्

पहले (क्रि.वि.) आदि, आरंभ या शुरू में, सर्वप्रथम -- आद्यम्, आरंभत्तिल्, ओन्नामतु

पहले (क्रि.वि.) काल, घटना, स्थिति आदि के क्रम के विचार से आगे या पूर्व -- मुंदु

पहले (क्रि.वि.) बीते हुए समय में, पूर्वकाल में, पुराने जमाने में -- मुन्पु, पण्टु

पहाड़ (पुं.) पर्वत, चट्टानों का वह प्राकृतिक पुंज जो जमीन की सतह से बहुत ऊँचा होता है -- पर्वतम्, मल

पहाड़ा (पुं.) किसी अंक की गुणन सारणी -- गुणनप्पट्टिक

पहिया (पुं.) गाड़ी, यान आदि का वह गोलाकार हिस्सा, जिसकी धुरी पर घूमने से गाड़ी या यान आगे बढ़ता है -- चक्रम्, उरुळ्

पहिया (पुं.) यंत्र का चक्र, यंत्रों आदि में लगा हुआ उक्त प्रकार का गोलाकार, जिसके घूमने से उस यंत्र की कोई क्रिया संपन्न होती है -- चक्रम्

पहुँचना (अ.क्रि.) (वस्तु अथवा व्यक्ति का) एक स्थान से चलकर दूसरे स्थान पर उपस्थित या प्रस्तुत होना -- ऐत्तुक

पहुँचना (अ.क्रि.) किसी स्थान या पद आदि को प्राप्त होना -- ऐत्तिच्चेरुक, प्रापिक्कुक

पांडुलिपि (स्त्री.) पुस्तक, लेख आदि की हस्तलिखित या मुद्रण योग्य प्रति -- कय्येळुत्तु प्रति

पाक्षिक (वि.) चांद्र मास के पक्ष से संबंध रखने वाला -- पाक्षिकम्

पाक्षिक (वि.) जो एक पक्ष (15 दिन) में एक बार होता है -- पाक्षिकम्

पाखंड (पुं.) दिखावटी आचरण, उपासना या भक्ति -- कपटाचरणम् कळ्ळ भक्ति

पाखंड (पुं.) पूजा-पाठ आदि का आडंबर, ढकोसला ढोंग -- पुरमोटि

पागल (वि.) जो किसी तीव्र मनोविकार के कारण ज्ञान या विवेक खो बैठा हो, विक्षिप्त, सनकी -- भ्रांतन्, विक्षिप्तन्, किरुक्कन्

पाचक (वि.) पचाने वाला -- दहिप्पिक्कन्न पचिप्पिक्कुन्न

पाचक (पुं.) वह दवा जो खाई हुई चीज को पचाती या पाचन शक्ति बढ़ाती हो -- पाचनौषधं

पाठक (पुं.) पढ़ने वाला -- अनुवाचकन्, वायनक्कारन्

पाठशाला (स्त्री.) वह स्थान, जहाँ विद्यार्थियों को पढ़ना लिखना सिखाया जाता है, विद्यालय -- पाठशाल

पाताल (पुं.) पृथ्वी के नीचे के सात लोकों में से सबसे नीचे का लोक, नाग-लोक -- पाताळम्

पाताल (पुं.) बहुत अधिक गहरा और नीचा स्थान -- कयम्

पात्र (पुं.) वह आधान, जिसमें कुछ रखा जा सके, बरतन, भाजन -- पात्रम्

पात्र (पुं.) ऐसा व्यक्ति, जो किसी काम या बात के लिए सब प्रकार से उपयुक्त या योग्य समझा जाता हो -- पात्रम्

पात्र (पुं.) उपन्यास, कहानी, काव्य, नाटक आदि में वे व्यक्ति, जो कथा-वस्तु की घटनाओं के घटक होते हैं और जिनके क्रिया कलाप या चरित्र से कथा वस्तु की सृष्टि और परिपाक होता है -- कथा पात्रम्

पाना (स.क्रि.) प्राप्त करना -- नेटुक

पाप (पुं.) धर्म और नीति के विरुद्ध किया जाने वाला ऐसा निंदनीय आचरण या काम, जो बुरा हो और जिसके फलस्वरूप मनुष्य को नरक भोगना पड़ता हो -- पापम्

पारंगत (वि.) जिसने किसी विद्या या शास्त्र का बहुत अधिक ज्ञान प्राप्त कर लिया हो -- पारंगतन्

पार (पुं.) झील, नदी, समुद्र आदि का दूसरी ओर का किनारा -- मरुकर

पार (पुं.) किसी काम या बात का अंतिम पार, छोर या सिरा, विस्तार या व्यक्ति की चरम सीमा या हद -- अट्टम्

पारदर्शी (वि.) जिसके आर-पार देखा जा सके -- दीर्घदर्शि

पारदर्शी (वि.) दूरदर्शी, पारदर्शक -- दूरदर्शि

पारस (पुं.) एक कल्पित पत्थर जिसके स्पर्श मात्र से लोहा सोना हो जाता है -- पारसमणि, स्पर्शमणि

पारावार (पुं.) समुद्र -- पारावारम्, समुद्रम्

पारिभाषिक (वि.) परिभाषा-संबंधी -- निर्वचनात्मकम्

पारिभाषिक (वि.) (शब्द) जो किसी शास्त्र या विषय में अपना साधारण से भिन्न कोई विशिष्ट अर्थ रखता हो (टेक्नीकल) -- सांकेतिक पद्म

पारिश्रमिक (पुं.) किए हुए श्रम या कार्य के बदले में मिलने वाला धन, करने की मजूरी (रिम्यूनरेशन) -- प्रतिफलम्

पालकी (स्त्री.) बैठने का एक प्रसिद्ध साधन, जिसे कहार या मजदूर कंधे पर उठाकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं -- मंचल्, पल्लक्कुँ

पालतू (वि.) (पशु-पक्षियों के संबंध में) जो घर में रखा तथा पाला गया हो (जंगली से भिन्न) -- वळर्त्तुन्न

पालन (पुं.) भरण-पोषण, परवरिश -- पालनम्, वळर्त्तल्

पालन (पुं.) आज्ञा, आदेश, कर्तव्य, वचन आदि का यथावत निर्वाह -- पालिक्कल्

पालना (स.क्रि.) भरण-पोषण करना, परवरिश करना -- वळर्त्तुक

पालना (स.क्रि.) पशु-पक्षियों को अपने पास रख कर खिलाना-पिलाना, पोसना -- वळर्त्तुक

पालना (स.क्रि.) आज्ञा, आदेश, प्रतिज्ञा, वचन आदि के अनुसार आचरण या व्यवहार करना -- पालिक्कुक

पालना (पुं.) शिशुओं का झूला -- NA

पावन (वि.) पवित्र -- वळर्त्तुक

पावन (वि.) (समस्त पदों के अंत में) पवित्र करने या बनाने वाला -- पवित्र माक्कुन्न

पाश (पुं.) वह चीज, जिससे किसी को बांधा जाए, बंधन, फंदा -- पाशम्, कयरु, कुरुक्कु

पास (क्रि.वि.) जो अवकाश, काल आदि के विचार से अधिक दूरी पर न हो, निकट, समीप -- अटुत्तु, अरिके

पास (क्रि.वि.) अधिकार में, हाथ में -- कैयिल्, वशत्तु

पास (क्रि.वि.) जो जाँच, परीक्षा आदि में उपयुक्त या ठीक ठहरा हो -- पासाय

पिंजरा (पुं.) धातु, बाँस आदि की तीलियों का बना हुआ बक्से की तरह का वह आधान, जिसमें पक्षी, पशु आदि बंद करके रखे जाते हैं -- कूटु, पंजरम्

पिंड (पुं.) घनी या ठोस चीज का छोटा और प्रायः गोलाकार खंड -- कट्ट, उण्ट, उरुळ

पिंड (पुं.) जौ के आटे, भात आदि का बनाया हुआ वह गोलाकार खंड, जो श्राद्ध में पितरों के उद्देश्य से वेदी आदि पर रखा जाता है -- पिंडम्

पिंडदान (पुं.) कर्मकांड के अनुसार पितरों को पिंड देने का कर्म जो श्राद्ध में किया जाता है -- पिंडम् वैक्कल् पिंडदानम्

पिचकारी (स्त्री.) नली के आकार का धातु का बना हुआ एक उपकरण, जिसके मुँह पर एक या अनेक ऐसे छोटे छोटे छेद होते हैं, जिनसे नली में भरा हुआ तरल पदार्थ दबाव से धार या फुहार के रूप में दूसरों पर या दूर तक छिड़का या फेंका जाता है -- पीच्चांकुऴल्

पिछला (वि.) जो पीछे की ओर हो -- पुरकिलुळ्ळ

पिछला (वि.) काल, घटना, स्थिति के क्रम के विचार से किसी के पूर्व में या पहले पड़ने या होने वाला -- मुन् कऴिञ्ञ

पिछला (वि.) बीता हुआ -- कऴिञ्ञु पोय

पिपासा (स्त्री.) पानी या और कोई तरल पदार्थ पीने की इच्छा, तृष्णा, तृषा, प्यास -- तृष्ण, दाहम्

पिशाच (पुं.) भूत या प्रेत योनि वाला वर्ग जिसकी गणना हीन देव योनियों में होती है तथा जो वीभत्स कर्म करने वाला माना जाता है -- पिशाचु

पीछे (क्रि.वि.) पीठ की ओर -- पिन्निलेक्कु

पीछे (क्रि.वि.) कालक्रम, देश आदि के विचार से किसी के पश्चात् या उपरांत, घटना या स्थिति के विचार से किसी के अनंतर, उपरांत, पश्चात् -- पिन्नीटु

पीछे (क्रि.वि.) किसी के कारण या खातिर, निमित्त, के लिए वास्ते -- निमित्तमायि, वेण्टि

पीटना (स.क्रि.) हाथ, डंडे आदि से प्रहार करना, चोट पहुँचाना -- अटिक्कुक

पीटना (स.क्रि.) चौसर, शतरंज आदि के खेलों में विपक्षी की गोट या मोहरा मारना -- चतुरंगक्कळियिल् तोल्पिक्कुक

पीठिका (स्त्री.) छोटा पीढ़ा, पीढ़ी -- चेरिय स्टूळ्

पीठिका (स्त्री.) वह आधार, जिस पर कोई चीज विशेषतः देवमूर्ति रखी, लगाई या स्थापित की गई हो -- पीठम्, पीठिक

पीड़ा (स्त्री.) शारीरिक या मानसिक कष्ट, दर्द -- पीड वेदन

पीढ़ी (स्त्री.) किसी कुल या वंश की परंपरा में क्रम से आगे बढ़ने वाली संतान की प्रत्येक कड़ी या स्थिति -- वंशपरंपरा

पीढ़ी (स्त्री.) किसी विशिष्ट समय का वह सारा जन समुदाय जिसकी वय में अधिक छोटाई बढ़ाई न हो, लगभग समान वय वर्ग वाला -- तलमुर

पीढ़ी (स्त्री.) छोटा पीढ़ा -- चेरिय पीठम्

पीना (स.क्रि.) किसी तरल पदार्थ को घूँट-घूँट करके पेट में उतारना -- कुटिक्कुक

पीना (स.क्रि.) धूम्रपान करना या शराब आदि से नशा करना -- कळ्ळ कुटिक्कुक, सिगरेट्टु वलिक्कुक

पीला (वि.) जो केसर, सोने या हल्दी के रंग का हो -- मञ्ञ

पीला (वि.) आभा-रहित, निष्प्रभ -- विवर्णमाय

पीसना (स.क्रि.) रगड़ कर किसी वस्तु को चूरे के रूप में बदलना -- पोटिक्कुक, अरय्क्कुक

पुंज (पुं.) ढेर, राशि -- समूहम्, राशि, पुञ्जम्

पुकार (स्त्री.) जोर से नाम लेकर संबोधित करने की क्रिया या भाव -- विळि

पुकार (स्त्री.) आत्मरक्षा, सहायता आदि के लिए दूसरों को बुलाने की क्रिया या भाव -- निलविळि

पुकारना (स.क्रि.) किसी को बुलाने, संबोधित करने या उसका ध्यान आकृष्ट करने के लिए जोर से उसका नाम लेना -- विळिक्कल

पुकारना (स.क्रि.) रक्षा, सहायता आदि के लिए किसी का आह्वान करना, आवाज लगाना या चिल्लाना -- निलविळिक्कुक

पुचकारना (स.क्रि.) प्यार जताते हुए मुँह से पुच पुच शब्द करना -- उम्म वेक्कुक, ओमनिक्कुक

पुजारी (पुं.) किसी देवी देवता की मूर्ति या प्रतिमा की पूजा करने वाला व्यक्ति -- पूजारि

पुण्य (वि.) धर्म-विहित और उत्तम फल-दायक -- पुण्यमाय

पुण्य (पुं.) अच्छे और शुभ कर्मों का संचित रूप, जिसका आगे चलकर उत्तम फल मिलता हो -- पुण्यकर्मम्

पुण्य (पुं.) धार्मिक दृष्टि से कुछ विशिष्ट अवसरों पर कुछ विशिष्ट कर्म करने से प्राप्त होने वाला शुभ फल -- पुण्यम्

पुनरावृत्ति (स्त्री.) किए हुए काम या बात को फिर से करने या दोहराने की क्रिया या भाव -- पुनरावर्तनम्

पुनरीक्षण (पुं.) किसी किए हुए काम को जाँचने के लिए फिर से देखना -- पुनःपरिशोधन

पुनर्जन्म (पुं.) मरने के बाद फिर से उत्पन्न होना, दुबारा शरीर धारण करना -- पुनर्जन्मम्

पुनीत (वि.) पवित्र -- पवित्रमाय, पुनीतमाय

पुरस्कार (पुं.) किसी प्रशस्त और कठिन कार्य को सफलतापूर्वक करने पर आदर या सत्कार के रूप में दिया जाने वाला धन या वस्तु -- सम्मानम्

पुरुषार्थ (पुं.) वह मुख्य अर्थ, उद्देश्य या प्रयोजन, जिसकी प्राप्ति या सिद्धि के लिए मनुष्य का प्रयत्न करना आवश्यक और कर्तव्य हो (पुरुषार्थ चार हैं-धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) -- पुरुषार्थम्

पुरुषार्थ (पुं.) उद्योग, उद्यम -- पौरुषम्, प्रयत्नम्

पुरोहित (पुं.) कर्मकांड आदि जानने वाला ब्राह्मण, जो धार्मिक कार्य, संस्कारादि संपन्न कराता है (हिंदू प्रीष्ट) -- पुरोहितन्

पुल (पुं.) खाइयों, नदी-नालों, रेल लाइनों आदि के ऊपर आर-पार पाट कर बनाई हुई वह वास्तु रचना, जिस पर से होकर गाड़ियाँ और व्यक्ति इधर से उधर आते-जाते हैं, सेतु (ब्रिज) -- पालम्

पुष्प (पुं.) फूल, कुसुम -- पुष्पम्

पुष्पांजलि (स्त्री.) फूलों से भरी हुई अंजलि, जो किसी देवता या महापुरुष को अर्पित की जाती है -- पुष्पांजलि, अर्चन

पुस्तकालय (पुं.) वह स्थान, जिसमें विभिन्न प्रकार की पुस्तकें सुव्यवस्थित ढंग से रखी जाती हैं -- ग्रंथशाल

पूँजी (स्त्री.) जोड़ा या जमा किया हुआ धन -- मुतल्, संपाद्यम्

पूँजी (स्त्री.) ऐसा धन, जो अधिक कमाने के उद्येश्य से व्यापार आदि में लगाया गया हो अथवा ऋण आदि पर उधार दिया गया हो -- मुटक्कुमुतल्, मूलधनम्

पूछताछ (स्त्री.) किसी बात की जानकारी के लिए उसके संबंध में एक या अनेक व्यक्तियों से बार-बार पूछना -- अन्वेषणम्

पूछना (स.क्रि.) किसी बात के बारे में जिज्ञासावश कोई प्रश्न करना -- चोदिक्कुक

पूछना (स.क्रि.) जाँच, परीक्षा आदि के प्रसंग में किसी के सामने कुछ प्रश्न रखना कि वह उसका उत्तर दे -- चोदिक्कुक

पूछना (स.क्रि.) किसी का हाल-चाल या खोजखबर लेना -- विवरम् अन्वेषिक्कुक

पूजना (स.क्रि.) देवी-देवता को प्रसन्न या संतुष्ट करने के लिए यथाविधि श्रद्धाभाव से जल, फूल, नैवेद्य आदि चढ़ाना -- पूजिक्कुक

पूजना (स.क्रि.) किसी को परम श्रद्धा, भक्ति से देखना और आदरपूर्वक उसकी सेवा तथा सत्कार करना -- आराधिक्कुक

पूजनीय (वि.) पूजा करने योग्य, अर्चनीय या आदरणीय -- पूज्यनाय

पूजा (स्त्री.) किसी देवी देवता पर विनय, श्रद्धा और समर्पण के भाव के साथ जल, फूल, फल, अक्षत आदि चढ़ाने का धार्मिक कृत्य, अर्चन, पूजन -- पूज

पूजा (स्त्री.) बहुत अधिक आदर-सत्कार -- बहुमानम्, सत्कारम्

पूरा (वि.) पूरी तरह से भरा हुआ, परिपूर्ण -- निरञ्ञ

पूरा (वि.) समग्र, समूचा, सारा, कुल -- ऐल्लाम्, मुळुवन्

पूर्ण (वि.) जो पूरी तरह से भरा हुआ हो -- पूर्णमाय

पूर्ण (वि.) सब प्रकार की यथेष्टता के कारण जिसमें कुछ भी अपेक्षा, अभाव या आवश्यकता न रह गई हो, सबका सब, पूरा, सारा, समस्त -- मुळुवनुं

पूर्ण (वि.) हर तरह से ठीक और पूरा -- पूर्णमाय

पूर्णमासी (स्त्री.) चाँद्र मास के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि, जिसमें चंद्रमा अपने पूरे मंडल से उदय होता है, पूर्णमासी -- पौर्णमि

पूर्णिमा (स्त्री.) दे. पूर्णमासी -- वेळुत्त वावु

पूर्वज (पुं.) बाप, दादा, परदादा आदि पूर्व पुरुष, पुरखा -- पूर्वीकन्

पूर्वानुमान (पुं.) किसी भावी काम या बात के स्वरूप आदि के संबंध में पहले से किया जाने वाला अनुमान -- पूर्वानुमानम्

पूर्वाभास (पुं.) किसी बात या बात के संबंध में पहले से ही हो जाने वाला अनुमान -- तोन्नल्, ऊहम्

पूर्वाह्न (पुं.) दिन का पहला भाग, सवेरे से दोपहर तक का समय -- पूर्वाह्नम्, उच्चक्कु मुंबुळ्ळ समयम्

पृथ्वी (स्त्री.) सौर जगत का पाँचवाँ सबसे बड़ा ग्रह, जिस पर जीवन तथा वनस्पति है -- पृथ्वी, भूमि

पृथ्वी (स्त्री.) आकाश तथा जल से भिन्न वह अंश, जिस पर मनुष्य तथा पशु विचरण करते तथा पेड़-पौधे उगते हैं, जमीन, मिट्टी -- भूमि नेल

पृष्ठभूमि (स्त्री.) पिछला भाग -- पिन् भागम्

पृष्ठभूमि (स्त्री.) पहले की वे सब बातें और परिस्थितियाँ, जिसके आगे या सामने कोई नई विशेष बात या घटना हो और जिनके साथ मिलान करने पर उस बात या घटना का रूप स्पष्ट होता है, भूमिका (बैकग्राउंड) -- पश्चात्तलम्

पेचीदा (वि.) जिसमें बहुत से पेंच हो, घुमाव-फिराव वाला -- कुरुक्कुळ्ळ

पेचीदा (वि.) (काम या बात) जिसमें बहुत-सी उलझनें, कठिनाइयाँ या झंझट हों -- कुरुक्कुळ्ळ

पेटी (स्त्री.) कमर में लपेट कर बाँधने का तसमा, कमरबंद -- अरपट्ट

पेटी (स्त्री.) छोटा संदूक, संदूकची, छोटी डिबिया -- पेट्टि

पेड़ (पुं.) वृक्ष -- वृक्षम्, मरम्

पेशगी (स्त्री.) अग्रिम धन -- मुन्कूर

पेशा (पुं.) व्यवसाय, धंधा -- तोऴिल्

पैदावार (स्त्री.) फसल, अन्न आदि जो खेत में बोने से पैदा होता है, उत्पादन -- विळवु

पोंछना (स.क्रि.) किसी सूखे कपड़े को इस प्रकार किसी अंग, वस्तु या स्थान पर फेरना कि वह उस स्थान की नमी को सोख ले -- तुटय्क्कुक

पोत (पुं.) जहाज, जलयान -- कप्पल्

पोशाक (स्त्री.) पहनावा, लिबास -- वेषम्, ड्रेस्स्

पोषण (पुं.) पुष्ट करना, लालन-पालन -- समर्थिक्कल, पोषणम्

पौधा (पुं.) छोटा पेड़, नया पेड़ -- चेटि

पौना (पौन) (वि.) तीन चौथाई -- मुक्काल्

पौरुष (पुं.) पुरुषार्थ, पराक्रम, उद्यम -- पौरुषम्

पौष्टिक (वि.) पुष्ट करने वाला, शक्तिवर्धक -- पुष्टिकरमाय

प्याऊ (पुं.) वह स्थान, जहां राह चलते लोगों को मुफ्त पानी पिलाया जाता है -- तण्णीर पंत्तल्

प्यार (पुं.) स्नेह, प्रेम, अनुराग -- स्नेहम्, प्रेमम्

प्यारा (वि.) जो देखने में अच्छा और भला लगे -- स्नेहभाजनम्

प्यारा (वि.) स्नेह या प्रेम का पात्र -- स्नेहभाजनम्

प्याला (पुं.) एक प्रकार की कटोरी (कप) -- कप्पु, कोप्प

प्यास (स्त्री.) वह स्थिति,जिसमें जल या कोई तरल पदार्थ पीने की उत्कट इच्छा होती है, तृष्णा,पिपासा -- दाहम्

प्रकट (वि.) ज़ाहिर, स्पष्ट, उद्भूत -- प्रकटमाय

प्रकांड (वि.) उत्तम, सर्वश्रेष्ठ -- उत्तम माय

प्रकृति (स्त्री.) विश्व में रचना या सृष्टि करने वाली मूल नियामक तथा संचालन शक्ति, कुदरत (नेचर) -- प्रकृति

प्रकृति (स्त्री.) सहज स्वाभाविक गुण, स्वभाव -- प्रकृति, प्रकृतम्

प्रकोप (पुं.) अत्यधिक क्रोध -- वल्लात्त कोपं

प्रकोप (पुं.) किसी बीमारी का जोर -- प्रकोपनम्

प्रखर (वि.) तीक्ष्ण, उग्र, तेज -- तीक्ष्णमाय, मूर्च्चयुळ्ळ

प्रगतिशील (वि.) जो आगे बढ़ रहा हो या उन्नति कर रहा हो -- पुरोगमन, पुरोगमिक्कुन्न

प्रचंड (वि.) अति तीव्र, भयंकर -- तीक्ष्णमाय, भयंकरमाय

प्रचलित (वि.) जो उपयोग या व्यवहार में आ रहा हो -- नटप्पिलुळ्ळ, प्रचारत्तिलुळ्ळ

प्रचार (पुं.) वह प्रयास, जो किसी बात या सिद्धांत को फैलाने के लिए किया जाता है -- प्रचारम्

प्रचुर (वि.) बहुत अधिक, प्रभूत -- प्रचुरम्

प्रजनन (पुं.) जन्म देना, संतान उत्पन्न करना -- संतानोत्पादनम्

प्रजनन (पुं.) पशुओं आदि को पाल पोस कर उनकी उन्नति और वृद्धि करना -- वंशवृद्धि

प्रजा (स्त्री.) किसी राज्य या राष्ट्र की जनता -- प्रज, जनत

प्रजातंत्र (पुं.) प्रजा के प्रतिनिधियों द्वारा शासन व्यवस्था (डिमोक्रेसी) -- जनायत्त भरणम्, जनाधिपत्यम्

प्रण (पुं.) दृढ़, निश्चय, प्रतिज्ञा -- प्रतिज्ञ

प्रणव (पुं.) प्रेम, प्रीति -- प्रणयं, प्रेमम्

प्रणाम (पुं.) नमस्कार, अभिवादन -- नमस्कारम्, प्रणामम्

प्रणाली (स्त्री.) पद्धति, रीति, ढंग -- प्रणालि, रीति

प्रताप (पुं.) तेज, प्रभाव, पौरुष, वीरता -- पौरुषम्, प्रतापम्

प्रतिकार (पुं.) बदला चुकाने के लिए किया गया कार्य, बदला, प्रतिशोध (रिवेंज) -- प्रतिकारम्

प्रतिकार (पुं.) किसी बात को रोकने दबाने के लिए किया जाने वाला उपाय, रोकथाम -- प्रतिविधि

प्रतिकूल (वि.) जो अनुकूल न हो, विपरीत -- प्रतिकूलम्

प्रतिक्रिया (स्त्री.) किसी कार्य या घटना के परिणामस्वरूप होने वाला कार्य -- प्रतिकरणम्

प्रतिज्ञा (स्त्री.) शपथ, सौगंध, प्रण -- प्रतिज्ञ, शपथम्

प्रतिद्वंद्वी (पुं.) वह व्यक्ति या वस्तु, जो किसी दूसरे व्यक्ति या वस्तु के मुकाबले हो या जिससे उसका मुकाबला हो (राइवल) -- ऐतिराळि

प्रतिद्वंद्वी (पुं.) एक व्यक्ति की दृष्टि में वह दूसरा व्यक्ति, जो एक ही वस्तु या पद को पाने के लिए उसी की तरह उम्मीदवार हो, प्रतियोगी (कॅनटेस्टन्ट) -- प्रतियोगि

प्रतिध्वनि (स्त्री.) गूँज, प्रतिशब्द -- प्रतिध्वनि

प्रतिनिधि (पुं.) वह व्यक्ति , जो दूसरों की ओर से कहीं भेजा जाए अथवा उनकी ओर से कार्य करे (रिप्रेजेंटेटिव) -- प्रतिनिधि

प्रतिपादन (पुं.) किसी विषय का सप्रमाण कथन, निरूपण, विषय का स्थापन -- प्रतिपादनम्

प्रतिबंध (पुं.) बंधन या रोक, मनाही -- प्रतिबंधम्

प्रतिबंध (पुं.) किसी काम में लगाई गई शर्ते -- व्यवस्था

प्रतिबिंब (पुं.) परछाई, प्रतिच्छाया -- प्रतिबिंबम्, प्रतिच्छाय

प्रतिभा (स्त्री.) असाधारण बुद्धिबल, विलक्षण बौद्धिक शक्ति -- प्रतिभ

प्रतिमा (स्त्री.) मूर्ति, अनुकृति -- प्रतिम, विग्रहम्

प्रतियोगिता (स्त्री.) होड़, मुकाबला -- मत्सरम्

प्रतिलिपि (स्त्री.) किसी लिखी हुई चीज की नकल (कापी) -- पकर्प्पु

प्रतिशत (क्रि.वि.) हर सौ पर, फीसदी -- शतमानम्

प्रतिशोध (पुं.) बदला, प्रतिकार -- प्रतिकारम्, पकवीट्टल्

प्रतिष्ठा (स्त्री.) स्थापन -- मान्यत

प्रतिष्ठा (स्त्री.) मान, मर्यादा, इज्जत -- प्रसिद्धि

प्रतिष्ठा (स्त्री.) ख्याति, प्रसिद्धि -- स्थापिक्कल, प्रतिष्ठ

प्रतिस्पर्धा (स्त्री.) होड़, प्रतियोगिता -- मत्सरम्

प्रतीक (वि.) वह गोचर या दृश्य वस्तु, जो किसी अगोचर या अदृश्य वस्तु के बहुत कुछ अनुरूप होने के कारण उसके गुण रूप का परिचय कराने के लिए उसका प्रतिनिधित्व करती हो -- प्रतिकम्, चिह्नम्

प्रतीक्षा (स्त्री.) इंतजार -- प्रतीक्ष, कात्तिरिप्पु

प्रतीक्षालय (पुं.) वह स्थान, जहाँ थोड़े समय के लिए बैठकर इंतजार किया जाता है -- प्रतीक्षालयम्

प्रत्यक्ष (वि.) जो आँखों के सामने स्पष्ट दिखाई दे रहा हो -- प्रत्यक्ष, प्रत्यक्ष-प्पोट्ट

प्रत्यय (पुं.) विश्वास, धारण -- विश्वासम्

प्रत्यय (पुं.) व्याकरण में वह अक्षर या अक्षरों का समूह जो धातुओं अथवा विकारी शब्दों के अंत में लगकर उनके अर्थों में विशेषता उत्पन्न करते हैं (सफिक्स) -- प्रत्ययम्

प्रत्याशी (पुं.) उम्मीदवार -- स्थानार्थि

प्रत्येक (वि.) हरएक -- ओरो, प्रत्येकमाय

प्रथम (वि.) जो पहले स्थान पर हो -- प्रथमम्, ओन्नाम् आद्यर्त्ते

प्रथा (स्त्री.) रीति, परिपाटी -- पतिवु, कीळ्वऴक्कं

प्रदक्षिणा (स्त्री.) किसी पवित्र स्थान या देव मूर्ति के चारों ओर इस प्रकार घूमना कि वह पवित्र स्थान या मूर्ति बराबर दाहिनी ओर रहे, परिक्रमा -- प्रदक्षिणम्

प्रदर्शनी (स्त्री.) वह स्थान, जहाँ तरह तरह की वस्तुएँ दिखाने के लिए रखी हों -- प्रदर्शनम्

प्रदेश (पुं.) भू-भाग का कोई खंड विशेष -- प्रदेशम्

प्रदेश (पुं.) किसी संघ या राज्य-की कोई इकाई -- राज्यम्

प्रधान (वि.) सबसे बड़ा, मुख्य, मुखिया -- प्रधानप्पे, प्रधानि

प्रबंध (पुं.) व्यवस्था, इंतज़ाम, बंदोबस्त -- एर्प्पाटॅ

प्रबंध (पुं.) सुव्यवस्थित रचना -- प्रबंधम्

प्रबल (वि.) जिसमें बहुत अधिक बल हो -- प्रबलमाय

प्रबल (वि.) तेज, प्रचंड, घोर -- शक्तियोरिय

प्रभा (स्त्री.) आभा, चमक, प्रकाश -- प्रभ, शोभ

प्रभात (पुं.) सूर्य निकलने से कुछ पहले का समय, प्रातःकाल -- प्रभातम्, पुलर्च्च

प्रभाव (पुं.) किसी के बुद्धिबल, उच्चपद आदि के फलस्वरूप दूसरों पर पड़ने वाला दबाव (इंफ्लूएंस) -- प्रभावम्, स्वाधीनम्

प्रभाव (पुं.) फल, परिणाम, असर -- फलम्, परिणामम्

प्रभु (पुं.) ईश्वर, परब्रह्म -- भगवान्, देवन्

प्रभु (पुं.) स्वामी, शासक -- यजमानन्

प्रमाण (पुं.) सबूत -- तेळिवु

प्रमाण (पुं.) जिसका वचन या निर्णय यथार्थ या सत्य माना जाए -- साक्षि

प्रमुख (वि.) प्रथम, मुख्य -- प्रधानप्पोट्ट

प्रमुख (वि.) श्रेष्ठ, सम्मान्य, प्रतिष्ठित -- श्रेष्ठम्

प्रयत्न (पुं.) कोशिश, प्रयास -- प्रयत्नम्, परिश्रमम्

प्रयास (पु.) प्रयत्न, कोशिश -- यत्नम्

प्रयोग (पुं.) इस्तेमाल -- प्रयोगम्, उपयोगम्

प्रयोग (पुं.) अस्त्र-शस्त्र चलाना या छोड़ना -- प्रयोगम्

प्रयोग (पुं.) वैज्ञानिक प्रयोगशाला में की जाने वाली कोई परीक्षणात्मक किया (एक्सपेरिमेंट) -- परीक्षणम्

प्रयोगशाला (स्त्री.) वह स्थान, जहाँ विभिन्न तकनीकी विषयों से संबंधित प्रयोग किए जाते हैं (लेबोरेटरी) -- परीक्षणशाला

प्रयोजन (पुं.) उद्देश्य, हेतु -- उद्देशम्

प्रयोजन (पुं.) अभिप्राय, मतलब -- आशयम्

प्रलय (पुं.) संसार का अपने मूल कारण प्रकृति में सर्वथा लीन हो जाना, सृष्टि का सर्वनाश -- प्रळयम्, लोकाव-सानम्

प्रलय (पुं.) भयंकर नाश या बरबादी -- वन्-केटुति, महानाशम्

प्रलेख (पुं.) दस्तावेज -- रिकार्ड, पत्रम्, आधारम्

प्रलोभन (पुं.) लालच -- प्रलोभनम्

प्रवचन (पुं.) धार्मिक नैतिक आदि गंभीर विषयों में परोपकार की दृष्टि से कही जाने वाली अच्छी तथा विचारपूर्ण बातें -- प्रभाषणम्

प्रवचन (पुं.) उपदेशपूर्ण भाषण -- प्रभाषणम्

प्रवास (पुं.) परदेश में रहना, विदेशवास -- परदेशवासम्, प्रवासम्

प्रवासी (वि.) परदेस में रहने वाला, जो प्रवास में हो -- मरुनाटन् प्रवासि

प्रवाह (पुं.) बहने की क्रिया या भाव, बहाव -- ओळुक्कु, प्रवाहम्

प्रवाह (पुं.) किसी वस्तु का अट्टू क्रम -- तुटर्चयाय इटविटात्त

प्रविष्टि (स्त्री.) प्रवेश -- प्रवेशनम्

प्रविष्टि (स्त्री.) इंदराज, बही-खाते आदि में लेखे, विवरण आदि लिखना -- चार्त्तल्, पतितक्कल्

प्रवीण (वि.) निपुण, कुशल -- प्रवीणन्, समर्थन्

प्रवृत्ति (स्त्री.) मन का किसी विषय की ओर झुकाव -- प्रवणत

प्रवीण (स्त्री.) मनुष्य का साधारण आचरण या व्यवहार -- पेरुमाट्टम्

प्रवेश (पुं.) अंदर जाने की क्रिया या भाव -- प्रवेशिक्कल्, प्रवेशनम्

प्रवेश (पुं.) किसी विशिष्ट संस्था आदि में भर्ती होना, दाखिला -- प्रवेशनम्

प्रशंसा (स्त्री.) गुणों का बखान, तारीफ -- प्रशंस

प्रशासन (पुं.) सार्वजनिक व्यवस्था की दृष्टि से किया जाने वाला कार्य, शासन (एडमिनिस्ट्रेशन) -- भरणम्

प्रशिक्षण (पुं.) किसी व्यावहारिक या प्रायोगिक शिक्षा पद्धति से दी जाने वाली विशेष शिक्षा, सिखलाई (ट्रैनिंग) -- परिशीलनम्, ट्रेनिंङ्

प्रसंग (पुं.) विषय का तारतम्य, प्रकरण, संबंध -- प्रकरणम्, संदर्भम्

प्रसन्न (वि.) खुश, संतुष्ट, प्रफुल्लित -- प्रसन्नतयुळळ

प्रसारण (पुं.) फैलाना -- परप्पु

प्रसारण (पुं.) आकाशवाणी आदि सूचना माध्यमों द्वारा कार्यक्रमों और सूचनाओं को दूर-दूर तक लोगों को सुनाना, लोगों को सुनाने के लिए सूचना माध्यमों से प्रसारित करना -- प्रक्षेपणं

प्रसिद्ध (वि.) विख्यात, मशहूर -- प्रसिद्धियार्जिच्च

प्रसूति (स्त्री.) प्रसव, उत्पत्ति -- प्रसवम्

प्रसूति (स्त्री.) संतति, संतान -- संतति

प्रस्ताव (पुं.) किसी के सामने विचारार्थ रखी गई बात या सुझाव -- प्रस्तावम्

प्रस्ताव (पुं.) उक्त का वह रूप, जो किसी सभा या संस्था के सदस्यों के समक्ष विचारार्थ रखा जाए (मोशन) -- प्रमेयम्

प्रस्तावना (स्त्री.) किसी ग्रंथ का वह आरंभिक वक्तव्य, जिसमें उससे संबंधित कुछ मुख्य बातों का विवेचन किया जाता है (प्रीफेस) -- प्रस्तावन, मुखवुर

प्रस्तुत (वि.) मौजूद, उपस्थित, वर्तमान -- इप्पोळुळ्ळ, प्रस्तुत

प्रस्तुत (वि.) प्रकरण प्राप्त, प्रासंगिक -- वंधप्पेट्ट

प्रस्तुत (वि.) उद्यत, तैयार -- तय्याराक्क-प्पेट्ट, तय्याराय

प्रहरी (पुं.) पहरेदार -- पारावुकारन्

प्राण (पुं.) शरीर के भीतर की जीवनाधार वायु, श्वास -- प्राणन्

प्राणदंड (पुं.) मौत की सजा, मृत्यु दंड -- मरणशिक्ष, वधशिक्षा

प्राथमिकता (स्त्री.) किसी कार्य, बात या व्यक्ति को औरों से पहले दिया जाने या मिलने वाला अवसर, स्थान या अग्रता (प्राइऑरिटी) -- मुन्गणन

प्राथमिकता (स्त्री.) प्रथम स्थान में होने या रखे जाने की अवस्था या भाव -- प्रथम स्थानम्

प्रादेशिक (वि.) प्रदेश-संबंधी, प्रदेश का -- प्रादेशिकम्

प्राप्त (वि.) जो मिला हो, लब्धा -- प्राप्तम्, लभिच्च, किटरिय

प्रामाणिक (वि.) जो प्रमाण के रूप में माना जाता हो या माना जा सकता हो -- प्रमाणिकम्

प्रामाणिक (वि.) जो शास्त्रों आदि से प्रमाणित या सिद्ध हो -- शास्त्रसम्मतम्

प्रायः (क्रि.वि.) लगभग, करीब-करीब -- एकदेशम्

प्रामाणिक (क्रि.वि.) अक्सर, अधिकतर -- मिक्कवारुम्, प्रायेण

प्रायद्वीप (पुं.) स्थल का वह भाग जो तीन ओर से पानी से घिरा हो और एक ओर स्थल से लगा हो (पिनिन्रयुला) -- उपभूखंडम्

प्रायश्चित (पुं.) गलत अनुचित कार्य हो जाने पर अफसोस करना, पछतावा -- पश्चास्तापम्, दुखं

प्रायश्चित (पुं.) पाप का मार्जन करने के लिए किया जाने वाला शास्त्रविहित कर्म -- प्रायश्चितम्

प्रार्थना (स्त्री.) निवेदन, याचना -- अपेक्ष

प्रार्थना (स्त्री.) अपने या किसी और के लिए भक्ति और श्रद्धा पूर्वक ईश्वर से कल्याण की कामना -- प्रार्थन

प्रिय (वि.) जिसके प्रति बहुत अधिक स्नेह या प्रेम हो, मन को अच्छा लगने वाला, प्यारा, मनभावन -- प्रियप्पेट्ट

प्रीतिभोज (पुं.) किसी मांगलिक या सुखद अवसर पर बंधु-बांधवों और इष्ट मित्रों को कराया जाने वाला भोजन, दावत -- सद्य, विरुन्नु

प्रेम (पुं.) प्रीति, प्यार, स्नेह, अनुराग -- स्नेहम्, प्रमं

प्रेरक (वि.) प्रेरित करने वाला, प्रेरणा देने वाला -- प्रेरकमाय

प्रेरणा (स्त्री.) किसी को किसी कार्य में प्रवृत्त करने की प्रक्रिया या भाव -- प्रेषण

प्रेषण (पुं.) भेजना, रवाना करना -- प्रेषणम्, अयक्कल्

प्रोत्साहन (पुं.) हिम्मत बढ़ाना -- प्रोत्साहिप्पिक्कल्

प्रोत्साहन (पुं.) प्रोत्साहित करने के लिए कही जाने वाली बात -- प्रोत्साहन

प्रौढ़ (वि.) अच्छी या पूरी तरह से बढ़ा हुआ -- वळर्च्चर्यत्तिय

प्रौढ़ (वि.) मध्य अवस्था में पहुँचा हुआ व्यक्ति (एडल्ट) -- प्रायपूर्त्तियाय

प्रौढ़ (वि.) पुष्ट, परिपक्व (मैच्योर) -- पक्वत वन्न, पाकत वन्न

फकीर (पुं.) संत, साधु -- सन्यासि, फकीर

फकीर (पुं.) भिखमंगा, भिखारी -- भिक्षक्कारन्

फटकना (स.क्रि.) सूप आदि के द्वारा अन्न साफ करना -- चेरुक, पाट्टक

फटकना (स.क्रि.) कपड़े को इस प्रकार झाड़ना कि उसमें से लगी हुई धूल या सिलवटें निकल जाएँ -- कुटयुक

फड़कना (अ.क्रि.) शरीर के किसी अंग में स्फुरण होना -- तुटिक्कुक

फड़कना (अ.क्रि.) कोई बहुत बढ़िया या विलक्षण चीज़ देखकर मन में उक्त प्रकार का स्फुरण होना, जो उस चीज़ के विशेष प्रशंसक होने का सूचक देता हैं। -- तुटिक्कुक

फड़कना (अ.क्रि.) पक्षियों के पर हिलना, फड़फड़ाना -- चिर्कटिक्कुक

फबना (अ.क्रि.) किसी वस्तु का किसी पर सुंदर लगना या जँचना, -- शोभिक्कुक

फबना (अ.क्रि.) बात आदि का ठीक मौके पर उपयुक्त लगना -- शोभिक्कुक

फर्क (पुं.) दो वस्तुओं व्यक्तियों आदि में दिखाई पड़ने वाली विषमता, भिन्नता -- व्यत्यासम्

फर्क (पुं.) भेद-भाव, दुराव -- भेदभावम्

फर्क (पुं.) हिसाब-किताब आदि में भूल-त्रुटि आदि के कारण पड़ने वाला अंतर -- अंतर, पोरुत्तक्केटु

फल (पुं.) पेड़ का फल -- काय्, फऴम्

फल (पुं.) किसी प्रकार की क्रिया, घटना, प्रयत्न आदि के परिणाम के रूप में होने वाली बात, क्रिया, घटना, प्रयत्न आदि का परिणाम -- फलम्

फलना (अ.क्रि.) वृक्ष का फलों से युक्त होना -- काय्वकुक

फलना (अ.क्रि.) किसी काम या बात का शुभ परिणाम प्रकट होना -- फलिक्कुक

फलना (अ.क्रि.) सुख-सुमृद्धि का कारण बनना -- समृद्धि उण्टाकुक

फसल (स्त्री.) खेत में बोए हुए अनाजों आदि की पैदावार -- विळवु

फव्वारा (पुं.) एक विशिष्ट प्रकार का उपकरण, जिसमें पानी दबाव के कारण धारा या बूंदों में नीचे गिरता है, फुहारा (फाउंटेन) -- अरुवि, ऊटटॅ फौंटेन

फहराना (स.क्रि.) कोई चीज इस प्रकार खुली छोड़ देना जिससे वह हवा में लहराती रहे -- परत्तुक

फाँसना (स.क्रि.) फंदे में किसी पशु पक्षी को फँसाना -- कुरुक्कुक

फाँसना (स.क्रि.) छल, ठगी, युक्ति आदि से किसी व्यक्ति को अपने लाभ के लिए फँसाना -- कुरुक्कुक

फाँसी (स्त्री.) प्राणदंड -- तुक्कुशिक्ष

फाँसी (स्त्री.) रस्सी का वह फंदा जिसे लोग गले में फँसाकर आत्महत्या के लिए झूल या लटक जाते हैं -- कोल-क्कयरु, कोल-क्कुरुक्कु

फाटक (पुं.) मुख्य द्वार पर लगा हुआ बड़ा दरवाजा (मेनगेट) -- प्रधान कवाटम्

फाड़ना (स.क्रि.) कागज, कपड़े आदि को बलपूर्वक खींचकर टुकड़े-टुकड़े कर देना -- कीरुक

फाड़ना (स.क्रि.) किसी गाढ़े द्रव पदार्थ आप के संबंध में ऐसी क्रिया करना कि उसका जलीय अंश तथा ठोस अंश अलग हो जाए -- (पाल्) पिरिक्कुक, वेळ्ळवुम् कटट्युम् वेरेयाक्कुक

फाड़ना (स.क्रि.) किसी वस्तु का मुँह साधारण से अधिक और दूर तक फैलाना या बढ़ाना -- NA

फालतू (वि.) आवश्यकता से अधिक, अनावश्यक -- आवश्यत्तिलधकमाय, वेण्टतिलेरे

फालतू (वि.) बेकार -- उपयोग-मिल्लात्त

फिर (क्रि.वि.) दोबारा या पुनः -- वींटुम्

फिर (क्रि.वि.) पीछे, अनंतर, उपरांत, बाद -- पिन्नीडु, अनंतरम्

फिर (क्रि.वि.) तब -- अप्पोळ्

फीका (वि.) स्वादहीन (पदार्थ) -- स्वादिल्लात्त

फीका (वि.) जो यथेष्ट चमकीला या तेज न हो (रंग) -- मङ्ङिय

फीका (वि.) जिसमें आनंद की प्राप्ति न हुई हो नीरस (खेल) तमाश आदि -- नीरसमाय

फीता (पुं.) सूत आदि की बनी हुई कम चौड़ी और लंबी पट्टी (लेस) -- लेस्, रेंत

फीता (पुं.) लंबाई, चौड़ाई मापने वाली पट्टी -- टेप्प्, अळवुनाट

फीस (स्त्री.) विशिष्ट कार्यों के बदले दिया गय धन -- फीस्

फीस (स्त्री.) वह धन, जो विद्यार्थी की शिक्षा के लिए मासिक रूप में देना पड़ता है, शुल्क -- फीस्

फुंकार (स्त्री.) वह ज़ोर की ध्वनि, जो सर्प आदि द्वारा क्रोध में वेगपूर्वक साँस बाहर निकालते समय होती है, फूत्कार, फुफकार -- फूत्कारम् चीट्टुक

फुटकर (वि.) भिन्न या अनेक प्रकार का, अलग-अलग छोटे हिस्से में -- पल तरम्

फुटकर (वि.) जो इकट्ठा या एक साथ नहीं, बल्कि अलग अलग खंडों में आता या रहता हो, खुदरा, थोक या विपर्याय (रिटेल) -- चिल्लर

फुदकना (अ.क्रि.) पक्षियों, जंतुओं आदि द्वारा उछलते हुए चलना -- तत्ति नटक्कुक

फुदकना (अ.क्रि.) उमंग में आकर अथवा प्रसन्नता पूर्वक उछलते हुए इधर-उधर आना जाना -- तुळ्ळिच्चाटुक

फुलझड़ी (स्त्री.) छोटी, पतली डंडी वाली आतिशबाजी, जिसमें से फूल की सी चिनगारियाँ निकलती हैं -- पूत्तिरि

फुलवारी (स्त्री.) फूलों से भरा छोटा उद्यान या बगीचा -- पूंतोट्टम्

फुसफुसाना (अ.क्रि.) बहुत ही धीमे या दबे स्वर में बोलना -- कुशु-कुशुक्कुक

फुहार (स्त्री.) ऊपर से गिरने वाली पानी की या किसी तरल पदार्थ की छोटी छोटी बूँदें -- नीर्त्तळ्ळि, एरवेळ्ळम्

फुहारा (पुं.) जमीन से फूट पड़ने वाली पानी की या तेल, पेट्रोल की तेज धार -- ऊट्टु, उरव

फुहारा (पुं.) एक विशिष्ट प्रकार का उपकरण, जिसमें पानी या किसी तरल पदार्थ की बूँदें निरंतर गिरती हैं, फव्वारा (फाउंटेन) -- कृत्रिम अरुवि

फूँकना (स.क्रि.) मुँह का विवर समेटकर वेग के साथ हवा छोड़ना, मुँह से हवा भरकर किसी नली आदि से वेगपूर्वक हवा छोड़ना -- ऊतुक

फूँकना (स.क्रि.) आग लगाना, जलाना या सुलगाना -- कत्तिक्कुक

फूँकना (स.क्रि.) बुरी तरह से नष्ट या बरबाद करना -- पाऴाक्कुक

फूट (स्त्री.) आपसी अनबन या बिगाड़ -- पिळर्पु, कलहम्

फूट (स्त्री.) एक प्रकार की बड़ी ककड़ी जो पकने पर प्रायः खेतों में ही फट जाती है -- ओरु तरम् कक्करिक्क

फूल (पुं.) पुष्प, कुसुम -- पूवु, पुष्पम्

फूल (पुं.) शव के जल जाने के बाद बची हुई हड्डियाँ -- चिताभस्मम्

फूलदान (पुं.) फूल सजाने के लिए मिट्टी, धातु, शीशे आदि का बना पात्र, गुलदान -- पूप्पलिक

फूलना (अ.क्रि.) पेड़-पौधों में फूल आना -- पूक्कुक

फूलना (अ.क्रि.) बहुत अधिक उभर जाना या ऊँचा होना, सूजना -- विर्क्कुक

फूलना (अ.क्रि.) उमंग से भर जाना, बहुत प्रसन्न होना -- सन्नोषिक्कुक, प्रफुल्लित-नावुक, विकसिक्कुक

फेंकना (स.क्रि.) किसी वस्तु को वेग से दूर हटाना -- ऐरियुक

फेन (पुं.) बुलबुलों का समूह, झाग -- पत, नुर

फेरा (पुं.) परिक्रमा, किसी चीज़ के चारों ओर घूमने की क्रिया या भाव -- चुट्टल्, वलं वेक्कल्

फोरा (पुं.) बार-बार कहीं आने जाने की क्रिया या भाव, चक्कर -- करक्कम्

फोरा (पुं.) विवाह के समय वर-वधू द्वारा की जाने वाली अग्नि की परिक्रमा -- विवाहत्तिल् अग्निये प्रदक्षिणम् वेय्क्कुक

फैलना (अ.क्रि.) किसी चीज का विस्तार होना -- परक्कुक

फैलना (अ.क्रि.) किसी बात आदि का व्यापक क्षेत्र में चर्चा का विषय बनना -- परक्कुक

फोड़ना (स.क्रि.) शीशा, चीनी या मिट्टी आदि की कोई वस्तु खंड-खंड करना या तोड़ना, किसी खोखली या वायु भरी वस्तु को आघात या दबाव द्वारा तोड़ना -- उटय्क्कुक, पौट्टिक्कुक

फोड़ना (स.क्रि.) किसी दल या पक्ष के व्यक्ति को प्रलोभन देकर अपनी ओर मिलाना -- वशत्ताक्कुक

बंगला (पुं.स्त्री.) चारों तरफ से खुला हुआ एक मंजिला मकान -- बंगळावु

बंगला (पुं.स्त्री.) बंगाल की भाषा -- बंगाळि भाष

बंजर (वि.स्त्री.) भूमि जिस पर कुछ पैदा न हो -- ऊषर भूमि, पाळ्निलम्

बंद (वि.) बँधा हुआ, कसा हुआ -- अटञ्ञ

बंद (वि.) चारों ओर की दीवारों आदि से घिरा (स्थान) -- मूटिय

बंद (वि.) बाधायुक्त -- तटस्समुळ्ळ

बंदनवार (पुं.) आम, अशोक आदि की पत्तियों को रस्सी में टाँक कर बनी श्रृंखला, जो शुभ अवसरों पर दरवाजों आदि पर लटकाई जाती है -- तोरणम्

बंदरगाह (पुं.) समुद्र के किनारे का वह स्थान, जहाँ जहाज ठहरते हैं (सी पोर्ट, हार्बर) -- तुरमुखम्

बंदी (पुं.) कैदी (प्रिजनर) -- तटवुकारन्

बंदूक (स्त्री.) ऐसा अस्त्र, जिसमें कारतूस, गोली आदि भरकर इस प्रकार छोड़ी जाती है कि लक्ष्य पर लगे (गन, राइफल, मस्केट) -- तोक्कु

बंधक (पुं.) गिरवी या रेहन -- पणयम्, ईटु

बकना (स.क्रि.) ऊटपटांग या व्यर्थ की बातें करना -- पुलंपुक, चिलय्कुक

बकाया (वि.) बाकी बचा हुआ -- शेषिच्च

बकाया (पुं.) किसी काम, बात या राशि का वह अंश, जिसकी अभी पूर्ति होनी शेष हो -- कुटिश्शिक

बगीचा (पुं.) छोटा बाग या फुलवारी -- चेरिय पूंतोट्टम्

बचत (स्त्री.) व्यय से बची रहने वाली राशि -- मिच्चम्

बचत (स्त्री.) लागत आदि निकालने के बाद बचा हुआ धन, मुनाफा, लाभ -- संपाद्यम्, लाभम्

बचना (अ.क्रि.) उपयोग, व्यय आदि के बाद जो कुछ शेष रहे -- शेषिक्कुक

बचना (अ.क्रि.) बंधन, विपद, संकट आदि से किसी प्रकार सुरक्षित रहना -- रक्षप्पेटुक

बचना (अ.क्रि.) किसी कार्य, व्यक्ति से संकोच करना -- ओऴिञ्ञु मारुक

बचपन (पुं.) बाल्यावस्था -- कुट्टुक्कालम्

बच्चा (पुं.) नवजात शिशु -- कुञ्ञु

बच्चा (पुं.) बालक -- बालन्

बजना (अ.क्रि.) किसी चीजॉ पर आघात किए जाने पर निकली ध्वनि -- मुऴङ्ङुक

बजना (अ.क्रि.) संगीत अथवा वाद्य यंत्र से ध्वनि निकालना -- मुऴङ्ङुक

बजे (अ.) समय-मान, जैसे दस बजे ( क्लॉक) -- मणिक्कु

बटुआ (पुं.) कपड़े चमड़े आदि का खानों वाला तथा ढक्कन-दार आधान, जिसमें रुपए-पैसे रखे जाते हैं (पर्स) -- कैसंचि, फऴ्स्

बड़ा (वि.) किसी वस्तु का वह गुण, जो आकार, आयतन या माप में दूसरी वस्तु से अधिक होता है -- वलिय

बड़ा (वि.) पद, गरिमा, गुण आदि की दृष्टि से श्रेष्ठ -- महानाय

बड़ा (वि.) उरद की दाल का एक प्रकार का नमकीन पकवान -- वट

बड़ाई (स्त्री.) बड़े होने की अवस्था या भाव -- वलिप्पम्

बड़ाई (स्त्री.) प्रशंसा, तारीफ -- प्रशंस

बढ़ना (अ.क्रि.) आकार, क्षेत्र, परिमाण, विस्तार, सीमा आदि में वृद्धि होना -- वळरुक

बढ़ना (अ.क्रि.) आगे की ओर चलना -- पुरोग-मिक्कुक

बढ़ना (अ.क्रि.) किसी प्रकार की उन्नति होना -- उयर्च्च प्रापिक्कुक

बढ़ाना (स.क्रि.) किसी को बढ़ने में प्रवृत्त करना -- वळर्त्तुक

बढ़ाना (स.क्रि.) परिमाण, मात्रा, संख्या आदि में वृद्धि करना -- अळवु वर्धिप्पिक्कुक

बढ़ाना (स.क्रि.) किसी प्रकार की व्याप्ति में विस्तार करना -- अळवु वर्धिप्पिक्कुक

बढ़िया (वि.) जो गुण, रचना, रूप-रंग आदि की दृष्टि से उच्च कोटि का हो, उत्तम, उम्दा -- मेल्तरम्

बताना (स.क्रि.) किसी को कोई जानकारी देना -- परञ्ञु कोटुक्कुक

बताना (स.क्रि.) किसी प्रकार का निर्देश या संकेत करना -- निर्देशिक्कुक

बत्तीसी (स्त्री.) मनुष्य के 32 दातों का समूह -- मुप्पतिरण्टु पल्लुकळ्

बदनाम (वि) जिसकी निंदा हो रही हो, कुख्यात -- दुष्पेरुळ्ळ, अपख्याति युळ्ळ

बदलना (अ.क्रि.) परिवर्तन होना -- मारुक

बदला (पुं.) प्रतिकार, पलटा -- प्रतिकारम्, पकपोक्कल्

बदसूरत (वि.) भद्दी सूरत वाला, कुरूप -- विरूपन्

बधाई (स्त्री.) मुबारकबाद -- अभिनंदनम्

बधाई (स्त्री.) मंगल अवसर का गाना-बजाना -- आशंस

बधिर (वि.) बहरा -- बधिरन्

बनजारा (पुं.) वह व्यक्ति जो बैलों आदि पर सामान लादकर बेचने के लिए एक देश से दूसरे देश को जाता है, एक खानाबदोश जाति -- नाटोटि

बनाना (स.क्रि.) किसी वस्तु को तैयार करना -- उण्टाक्कुक

बनाना (स.क्रि.) किसी की प्रशंसा करते हुए उसे उपहासास्पद या मूर्ख बनाना -- प्रशंसच्चु नाणिप्पि -क्कुक मुखस्तुनि चेय्युक

बनावटी (वि.) वास्तविकता से परे, ऊपरी या बाहरी -- कृत्रिममाय

बनावटी (वि.) वास्तविकता के अनुकरण पर बनाया हुआ, कृत्रिम, नकली -- कृत्रिममाय

बनिया (पुं.) व्यापार करने वाला व्यक्ति, वैश्य -- वैश्यन्, व्यापारि

बनिया (पुं.) आटा, दाल, नमक, मिर्च आदि बेचने वाला दुकानदार -- पल चरक्कु कटक्कारन्

बरसना (अ.क्रि.) वर्षा होना -- पेय्युक बरिर्डक्कुक

बरसना (अ.क्रि.) किसी चीज का बहुत आधिक मात्रा, मान, संख्या में लगातार गिरना -- पेय्युक

बरसात (स्त्री.) बारिश, वर्षा-ऋतु -- मऴ, वर्षकालं, वर्ष

बरसी (स्त्री.) किसी के मरने के बाद हर वर्ष पड़ने वाली तिथि -- चरमदिनं

बरसी (स्त्री.) मृत का वार्षिक श्राद्ध -- आंडुबलि

बराती (पुं.) किसी की बारात में सम्मिलित होने वाला व्यक्ति -- वरपक्षक्कार्

बराबर (वि.) जो तुलना के विचार से एक-सा हो, समान -- ओप्पम्, समम्, तुल्यम्

बराबर (वि.) (तल) जो ऊँचा-नीचा या खुरदरा न हो, सम -- समतलम्

बराबर (क्रि.वि.) लगातार, निरंतर -- मुरक्कु, तुटरे

बर्फ (स्त्री.) हिम (स्नो) -- मञ्ञु

बर्फ (स्त्री.) बहुत अधिक ठंडक के कारण जमा हुआ पानी जो ठोस हो जाता है और आघात लगने पर टुकड़े टुकड़े हो जाता है (आइस) -- मञ्ञुकट्ट

बर्बर (वि.) जंगली, असभ्य -- संस्कार हीनन्, काटन्

बल (पुं.) जोर, शक्ति, ताकत -- बलम्

बल (पुं.) कपड़ों आदि पर पड़ने वाली सिलवट, शिकन -- चुळिवु

बलवान (वि.) शक्तिशाली, ताकतवर -- बलवान्

बलात्कार (पुं.) बलात् या बलपूर्वक कोई काम करना -- बलात्कारम्

बलात्कार (पुं.) किसी लड़की अथवा स्त्री के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध बलपूर्वक किया जाने वाला चौनाचार -- बलात्संगम्

बलिदान (पुं.) किसी उद्देश्य या बात के लिए अपने प्राण दे देना, कुर्बानी -- प्राणत्यागम्, बलि

बलिदान (पुं.) देवताओं को प्रसन्न करने के उद्देश्य से किसी पशु का किया जाने वाला वध, बलि -- बलि

बल्कि (अव्य.) ऐसा नहीं का आशय सूचित करने वाला अव्यय प्रत्युत, वरन -- नेरे मरिच्चु,ऐनाल्

बवंडर (पुं.) आँधी, तूफान -- चुऴलि-वकाट्ट

चहकाना (स.क्रि.) चकमा या भुलावा देना -- कबळिप्पि क्कुक

बहना (अ.क्रि.) द्रव पदार्थ का धारा के रूप में किसी नीचे तल की ओर प्रवाहित होना -- ओळुकुक, प्रवाहिक्कुक

बहरा (वि.पुं) जिसे सुनाई न पड़ता हो, बधिर -- चेकिटन्, बधिरन्

बहलाना (स.क्रि.) किसी को प्रसन्न या शांत करना -- समाधानि-प्पिक्कुक, संतोषिप्पिक्कुक

बहस (स्त्री.) तर्क, युक्ति आदि के द्वारा होने वाला खंडन-मंडन, विवाद -- वाद-प्रतिवादम्

बहादुर (वि.) वीर, शूर-वीर, सूरमा -- वीरन्

बहाना (पुं.) तथ्य को छिपाने के लिए चालाकी की बात -- ओऴिवु कऴिवु

बहार (स्त्री.) फूलों के खिलने का मौसम, वसंत-ऋतु -- वसंतकालम्

बहार (स्त्री.) सौंदर्य आदि के फलस्वरूप होने वाली रमणीयता या शोभा -- रम्यत

बहिर्मुख (वि.) जिसका मुँह बाहर की ओर हो -- बहिमुर्खन्

बहिर्मुख (वि.) जो बाहर की ओर उन्मुख या प्रवृत हो -- NA

बहिष्कार (पुं.) जाति समुदाय आदि से बाहर निकालना -- पुरत्ताक्कल्

बहिष्कार (पुं.) देश विदेश के माल का सामूहिक व्यवहार त्याग (बायकाट) -- बहिष्करणम्

बही-खाता (पुं.) हिसाब-किताब लिखने की पुस्तक -- कणक्कु-पुस्तकम्

बहुत (वि.) परिमाण, मात्रा, आदि में अधिक -- वयरे

बहुत (क्रि.वि.) अधिक परिमाण या मात्रा में, ज्यादा -- कूटुतल्

बहुभाषी (पुं.) बहुत भाषाएँ जानने-बोलने वाला -- बहुभाषा पंडितन्

बहुभाषी (पुं.) बहुत बोलने वाला, बकवादी -- वायाटि

बहुमूल्य (वि.) जिसका मूल्य बहुत हो, महार्घ -- विलकूटिय

बहुमूल्य (वि.) जो गुण, महत्व की दृष्टि से अति उपयोगी हो -- विलपिटिच्च

बहुरूपिया (पुं.) अनेक प्रकार के रूप धारण करने वाला -- पलवेषक् कारन्

बहू (स्त्री.) पुत्रवधू, नव विवाहिता स्त्री -- वधु, कल्याण-प्पोण्णु

बहू (स्त्री.) पत्नी -- पत्नि, भार्य

बाँग (स्त्री.) भोर के समय में मुरगे के बोलने का स्वर -- कोऴिकूवल्

बाँग (स्त्री.) मसजिद में नमाज पढ़ने के लिए मुल्ला द्वारा की जाने वाली उच्च स्वर में पुकार -- बांगॅ विळि

बाँझ (वि.स्त्री.) वह स्त्री जो संतान उत्पन्न न कर सके -- मलड़ि

बाँटना (स.क्रि.) किसी चीज को कई भागों में विभक्त करना, वितरण -- पंकिटुक

बाँध (पुं.) वह वास्तु-रचना, जो किसी नदी की धारा को रोकने अथवा किसी ओर प्रवृत्त करने के लिए बनाई गई हो (डैम) -- अणक्केट्टु

बाँधना (स.क्रि.) डोरी, रस्सी आदि कसकर किसी चीज के चारों ओर लपेटना -- केट्टुक

बाँधना (स.क्रि.) कागज, कपड़े आदि से किसी चीज को इस प्रकार लपेटना कि वह बाहर न निकले (पैक) -- पोतियुक, पोतिञ्ञु केट्टुक

बाँसुरी (स्त्री.) मुरली या वंशी -- मुरळि, ओटक्कुऴल्

बाकी (वि.) जो व्यय या क्षय होने के बाद बच रहा हो -- बाक्कि

बाकी (स्त्री.) गणित में बड़ी संख्या में से छोटी संख्या घटाने पर निकलने वाला फल -- शेषम् बाक्कि

बागडोर (स्त्री.) लगाम -- कटिञ्ञाण्

बाजार (पुं.) वह स्थान, जहाँ अनेक चीजों की बिक्री व खरीद के लिए दुकानें होती हैं -- बसार, अङ्ङाटि

बाजीगार (पुं.) जादू के खेल दिखाने वाला, नट, जादूगर -- इंद्रजालक्कारन्, चेप्पटि विद्यक्कारन्

बाट (स्त्री.) राह, रास्ता, मार्ग -- वऴि

बाट (पुं.) पत्थर, लोहे आदि का वह टुकड़ा जो चीजें तौलने के काम आता है (वेट्स) -- त्रासिले कट्टि

बाढ़ (स्त्री.) नदी नाले में जलस्तर का सीमा से अत्यधिक बढ़ जाना -- वेळ्ळप्पोक्कम्

बाण (पुं.) एक प्रकार का नुकीला अस्त्र, जो कमान या धनुष पर चढ़ाकर चलाया जाता है, तीर -- बाणम्, अंपु

बातचीत (स्त्री.) वार्तालाप -- वर्त्तमानम्, संसारम्

बाद (अव्य.) पश्चात्, अनंतर, पीछे -- शेषम्, पिन्नीटु

बादल (पुं.) मेघ -- मेघम्

बादशाह (पुं.) सम्राट, शासक -- चक्रवर्ति

बाधक (वि.) विघ्न या अड़चन डालने वाला -- विघ्नकारि, तडस्सक्कारन् तडयुन्नवन्

बाधक (पुं.) बाधा के रूप में होने वाला -- बाधकमाय

बाधा (स्त्री.) रोक, रुकावट, अड़चन -- तटस्सम्

बाप (पुं.) पिता, जनक -- अच्छन्

बायाँ (वि.) दायाँ का उल्टा, वाम (लैफ्ट) -- इटतु

बारूद (स्त्री.) गंधक, शोरे, कोयले आदि का वह मिश्रण, जो विस्फोटक होता है और तोपें, बंदूकें आदि चलाने के काम आता है -- वेटि मरुन्नु

बारे में (अव्य.) किसी के प्रसंग, विषय या संबंध में -- फट्टि, कुरिच्चु

बाल (पुं.) बालक, बच्चा -- बालन् कुट्टि

बाल (पुं.) जीव-जंतुओं के शरीर में त्वचा से ऊपर निकले हुए तंतु जो रोयों से मोटे होते हैं, केश, सिर के बाल -- तलमुटि

बाली (स्त्री.) कानों में पहनने का एक वृत्ताकार आभूषण -- कुणुक्कु

बाली (स्त्री.) अनाज की हरी नन्हीं बाल, सिट्टा -- कतिरु

बालू (पुं. /स्त्री.) पत्थरों का चूर्ण, जो रेगिस्तानों में या नदियों के तटों पर पड़ा रहता है, रेत -- मणल्

बावला (वि. /पुं.) विक्षिप्त, पागल, दीवाना -- भ्रंतन्

बासी (वि.) जो एक या अधिक दिन पहले बना या पका हो ताजा का विपर्यय -- पऴय, पऴकिय

बाहर (क्रि.वि.) किसी क्षेत्र, घेरे, विस्तार आदि की सीमा से परे, अंदर और भीतर का विपर्यय -- पुरत्त, पुरमे

बिंदी (स्त्री.) गोलाकार टीका, जो स्त्रियाँ माथे पर लगाती हैं -- पोट्टु

बिंदी (स्त्री.) शून्य सूचक चिह्न, सिफर -- पूज्यम्

बिंब (पुं.) किसी आकृति की वह झलक, जो किसी पारदर्शक पदार्थ में दिखाई पड़ती है, परछाई -- बिंबम्, निऴल्

बिंब (पुं.) प्रतिमूर्ति -- प्रतिम

बिखरना (अ.क्रि.) किसी वस्तु के घटकों का अधिक क्षेत्र में फैल जाना -- चितरुक, परक्कुक

बिखरना (अ.क्रि.) अलग अलग या दूर दूर होना -- वेरे वेरे यावुक

बिखेरना (स.क्रि.) वस्तुओं को बिना किसी सिलसिले के फैलाना या डालना -- चितरुक, वितरुक

बिगाड़ना (स.क्रि.) ऐसी क्रिया, जिससे किसी काम, चीज या बात में खराबी आ जाए, खराब करना -- कुऴप्पमा क्कुक, तेट्टिक्कुक

बिछाना (स.क्रि.) दूर तक फैलाना या बिखेरना, फैलाना -- वारिक्कुक, परत्तुक

बिछुड़ना (अ.क्रि.) अलग होना -- पिरियुक

बिछौना (पुं.) बिछावन, बिस्तर -- विरिप्पु किटक्क

बिजली (स्त्री.) बादलों की रगड़ के कारण उत्पन्न होने वाला प्रकाश (लाइटनिंग) -- मिन्नल्

बिजली (स्त्री.) घर्षण, ताप और रासायनिक क्रियाओं से उत्पन्न होने वाली एक शक्ति, जिससे ताप और प्रकाश उत्पन्न होता है (इलेक्ट्रिसिटि) -- वैद्युति, विद्युच्छक्ति

बिजलीघर (पुं.) वह स्थान, जहाँ रासायनिक प्रक्रियाओं, जल-प्रपातों आदि से बिजली उत्पन्न व वितरित की जाती है (पावर हाउस) -- वैदयुत्ति केंद्रम्, पवर हौस

बिना (अव्य.) बगैर -- कूटाते

बिना (अव्य.) अतिरिक्त, सिवा -- पुरमे

बिनौला (पुं.) कपास का बीज -- परुत्तिक्कुरु

बिरादरी (स्त्री.) किसी एक ही जाति या वर्ग के लोग जो सामाजिक उत्सवों पर एक दूसरे के यहाँ आते-जाते हैं (समाज) -- करक्‍कार्, समूहम्

बिरादगी (स्त्री.) भाईचारा, बंधुत्व -- बंधुत्व, साहोदर्य

बिल (पुं.) जमीन के अंदर खोद कर बनाया हुआ जीव–जंतुओं के रहने का स्थान -- पोत्तु

बिल (पुं.) हिसाब चुकता करने के लिए दिया जाने वाला वह कागज, जिसमें प्राप्य मूल्य का ब्यौरा रहता है, भुगतान अनुरोध -- बिल्, विळच्चीट्टु

बिलकुल (क्रि.वि.) पूरा-पूरा, कूल, सब, जितना हो, उतना सब -- तीरे, मुळुवनुम्

बिलकुल (क्रि.वि.) निरा, निपट -- वेरुम्

बिलखना (अ.क्रि.) रोना, कलपना, विलाप करना -- करयुक, विलपिक्कुक

बिलोना (स.क्रि.) किसी तरल पदार्थ को मथानी आदि से अच्छी तरह हिलाना, मथना -- कटयुक

बिस्तर (पुं.) बिछावन या बिछौना -- कटयुक

बीच (पुं.) किसी वस्तु का वह केंद्रीय अंश या भाग, जहाँ से उसके सभी छोर समान दूरी पर पड़ते हैं, मध्य -- मध्यम्

बीच (अव्य.) दरमियान, अंदर, में -- नटुविल्, इटक्कु

बीज (पुं.) अन्न आदि का वह कण, जो खेत में बोने के काम आता है (सीड) -- वित्तु

बीजक (पुं.) सूची, फेहरिस्त -- सूचि, पट्टिक

बीजक (पुं.) वह सूची, जिसमें किसी को भेजे जाने वाले माल का ब्यौरा, दर, मूल्य आदि लिखा रहता है (इन्वायस) -- इन्वाय्स्, बिल

बीजगणित (पुं.) गणित की वह शाखा, जिसमें अक्षरों को अज्ञात संख्याएं मानकर वास्तविक मान या संख्याएँ जानी जाती हैं (अलजेबरा) -- बीजगणितम्

बीनना (स.क्रि.) छोटी-छोटी चीजों को उठाना या चुनना, छाँटना -- पेरुक्कुक, तिरियुक

बीमा (पुं.) किसी प्रकार की विशेषतः आर्थिक हानि पूरी करने की जिम्मेदारी जो कुछ निश्चित धन लेकर उसके बदले में की जाती है (इंश्योरेन्स) -- इन्ष्युरन्स्

बीमार (वि.) वह व्यक्ति, जो किसी रोग से पीड़ित हो, रोगी -- असुखमु-ळ्ळवन्, रोगि

बुझाना (स.क्रि.) ऐसी क्रिया करना जिससे आग जलना बंद हो जाए -- केटुत्तुक

बुझाना (स.क्रि.) शांत करना -- NA

बुढ़ापा (पुं.) बूढ़ा होने की अवस्था या भाव, वृद्धावस्था -- वार्द्धक्यम, वयस्सुकालं

बुद्धि (स्त्री.) विचार या निश्चय करने की शक्ति, अकल, समझ -- बुद्धि

बुनकर (पुं.) कपड़ा बुनने वाला कारीगर, जुलाहा -- नेयुत्तुकारन्

बुनना (स.क्रि.) करघे पर वस्त्र बनाना -- नेय्युक

बुनना (स.क्रि.) ऊन, तार आदि से स्वेटर, चटाई आदि बनाना -- स्वेटरुम् मट्टम् पिन्नुक

बुरा (वि.) खराब, दोषयुक्त -- चीत्त

बुरादा (पुं.) लकड़ी चीरने या धातु रेतने पर उसमें से निकलने वाला महीन अंश, चूरा -- मरप्पोटि, अरक्क-प्पोटि

बुलाना (स.क्रि.) किसी को अपनी ओर आने के लिएआवाज या संकेत देना -- विळिक्कुक

बूटी (स्त्री.) ऐसी जंगली वनस्पति, जिसका उपयोग औषध आदि के रूप में होता है -- मरुन्नु, पच्चिल मरुन्नु

बूटी (स्त्री.) छोटे पौधों या फूलों के आकार का कोई अंकन या चित्रण -- पूवेल

बूढ़ा (वि.पुं.) बड़ी आयु का प्राणी, वृद्ध -- वयस्सन्, वृद्धन्

बेईमान (वि.) जिसकी नीयत ठीक न हो -- नारित्तकन

बेईमान (वि.) अविश्वसनीय -- अविश्वस्तन

बेगार (स्त्री.) ऐसा काम, जो जबरदस्ती और बिना पारिश्रमिक दिए करवाया जाए -- शंफ्ळ-मिल्लाते निबंधिच्चु चेय्यिक्कुन्न जोलि

बेगार (स्त्री.) बेमन का काम, अनिच्छा से किया गया काम -- पाळ्वेल्, इष्ट मिल्लात्त वेल

बेचना (स.क्रि.) कोई चीज या संपत्ति मूल्य लेकर देना -- विल्क्कुक

बेचारा (वि.) निःसहाय, दीन, गरीब -- निस्सहायन्, दरिद्रन्

बेल (पुं.) एक प्रसिद्ध फल, जो पेट के रोग के लिए गुणकारी होता है -- विल्वम्, कूवळम्

बेल (पुं.) लता -- वळ्ळि

बेल (पुं.) कपड़े आदि पर टाँका जाने वाला फीता -- पूवुळ्ळ नाट

बेलबूटा (पुं.) किसी चीज पर लताओं, पेड़ पौधों आदि का अंकन या चित्र -- पूवेल, चित्रप्पणि

बैठक (स्त्री.) बैठने का स्थान -- इरिप्पुमुरिस्वीकरण मुरि

बैठक (स्त्री.) सभासदों का एकत्र होना -- योगम्, सभ

बैठना (अ.क्रि.) आसीन होना अथवा स्थान ग्रहण करना -- इरिक्कुक, उपविष्ट-नावुक

बैर (पुं.) शत्रुता या बदला लेने की भावना, दुश्मनी -- शत्रुत, वैरं

बैरा (पुं.) होटलों आदि में खाना खिलाने वाला सेवक -- विळंपुकारन्, बेयरर्

बैल (पुं.) गाय का नर, जो गाड़ी और हल आदि में जोता जाता है -- काळ

बैलगाड़ी (स्त्री.) बैल द्वारा खींची जाने वाली गाड़ी -- काळवण्डि

बोझ (पुं.) वजन, भार -- चुमटु, भारम्

बोतल (स्त्री.) शीशी -- कुप्पि

बोना (स.क्रि.) पेड़-पौधे उगाने के लिए जमीन में बीज डालना -- वितय्क्कुक

बोलचाल (स्त्री.) वार्तालाप -- संभाषणम्

बोलना (अ.क्रि.) शब्द, ध्वनि आदि को स्वर मे उच्चारित करना -- संसारिक्कुक

बोलना (अ.क्रि.) शब्दों द्वारा कहकर विचार प्रकट करना -- परयुक

बौखलाना (अ.क्रि.) आवेश या क्रोध में आकर अंड-बंड बकना -- देष्यत्तिल् पुलंपुक

बौखलाना (अ.क्रि.) मानसिक संतुलन खो बैठना -- विरलुक

बौछार (स्त्री.) बूंदों की झड़ी जो हवा के झोंके से तिरछी गिरती हो -- चाट्टल्

बौछार (स्त्री.) बहुत अधिक संख्या में लगातार किसी वस्तु का बरसना -- पेय्यल्

बौद्धिक (वि.) बुद्धि संबंधी, बुद्धि द्वारा ग्रहण किए जाने के योग्य -- बौदधिकमाय

ब्यौरा (पुं.) वृत्तांत, किसी घटना के अंतर्गत एक बात का उल्लेख या कथन -- विवरणम्

भंडार (भांडार) (पुं.) कोष, खजाना -- खजनावु

भंडार (भांडार) (पुं.) अन्नादि रखने का स्थान -- कलवर

भँवर (पुं.) जलावर्त -- चुऴि

भक्ति (स्त्री.) निष्ठा, विश्वास या श्रद्धा -- भक्ति

भगवान (पुं.) परमेश्वर -- भगवान्

भगवान (पुं.) पूज्य/ आदरणीय और महिमाशाली -- महात्मावु

भड़काना (स.क्रि.) आग को तेज करना, उत्तेजित या क्रुद्ध करना -- देष्यप्पेटुत्तुक

भड़कीला (वि.) जिसमें खूब चमक-दमक हो -- निरप्पकिट्टार्न्न

भद्र (वि.) शिष्ट, सभ्य, सुशिक्षित -- संस्कारमुळ्ळ

भरती (भर्ती) (स्त्री.) प्रवेश, दाखिला -- प्रवेशनम्

भरती (भर्ती) (स्त्री.) नियुक्ति -- NA

भरना (स.क्रि.) खाली बरतन आदि में कोई चीज डालना, उड़ेलना, रखना -- निरय्क्कुक

भरना (स.क्रि.) रिक्तता अथवा हानि की पूर्ति करना -- निकत्तुक

भला (वि.) अच्छा, नेक -- नल्ल, नेरुळ्ळ

भला (पुं.) हित, लाभ -- नन्म

भवन (पुं.) प्रासाद, महल, घर, मकान, इमारत -- भवनम्, कोट्टारम्, वीडु, केट्टिटम्

भविष्य (पुं.) आने वाला समय, भविष्यत् काल -- भावि

भव्य (वि.) सुंदर और प्रभावशाली, शानदार -- भव्यम्, प्रौढ़ियुळ्ळ

भाँपना (स.क्रि.) रंग-ढंग से जान लेना, ताड़ लेना -- ऊहिच्चरियुक

भागना (अ.क्रि.) दौड़ना -- ओटुक

भागना (अ.क्रि.) जान बचाना, पीछा छुड़ाना -- रक्षप्पोट्टु ओटुक

भाग्य (पुं.) किस्मत, तकदीर, नसीब -- भाग्यम्

भाना (अ.क्रि.) रुचना, अच्छा लगना, पसंद आना -- इष्टप्पेटुक

भारतीय (वि.) भारत में उत्पन्न अथवा उससे संबंधित -- भारतीयम्

भारतीय (पुं.) भारतवासी -- भारतीयर्

भारी (वि.) अधिक भार वाला, वजनी -- भारिच्च

भारी (वि.) दुःखी, उदास (मन आदि) -- दुखितन्

भावना (स्त्री.) चिंतन, ध्यान -- ध्यानम्, चिंत

भावना (स्त्री.) विचार, ख्याल, इच्छा -- भावन, आग्रहम्

भाषण (पुं.) व्याख्यान -- प्रसंगम्

भाषा (स्त्री.) बोलकर, लिखकर अथवा ध्वनि-संकेतों द्वारा भावों को प्रकट करने का साधन, बोली, जबान -- भाष, संसारम्, मोऴि

भिक्षु (पुं.) भिखारी -- भिक्षु

भिक्षु (पुं.) संन्यासी, विशेषतः बौद्ध संन्यासी -- सन्यासि

भिखारी (पुं.) भीख माँगने वाला, कंगाल, अकिंचन -- भिक्षक्कारन्, पिच्चक्कारन्, दरिद्रन

भिगोना (स.क्रि.) पानी से गीला या तर करना, पानी में डालना -- ननय्क्कुक, कुतिर्क्कुक

भिन्न (वि.) अलग, पृथक -- भिन्नम्, व्यत्यस्तम्

भिन्न (पुं.) गणित में किसी पूरा इकाई का छोटा अंश या टुकड़ा -- भिन्न संख्या

भीड़ (स्त्री.) जन समूह -- जनक्कूट्टम्, आळ्क्कूट्टम्

भीरु (पुं.) कायर, डरपोक -- भीरु, पेटित्तोण्टन्

भीषण (वि.) भयानक, डरावना -- भयंकरम्

भीषण (वि.) दुष्परिणाम के रूप में होने वाला, विकट -- भीषणमाय

भुगतान (पुं.) मूल्य आदि चुकाने की क्रिया या भाव, अदायगी -- अटय्वकल्, ओटुक्कल्

भुनाना (स.क्रि.) किसी खाद्य पदार्थ को अंगारों पर सेंककर या गरम बालू में पकाने अर्थात् भूनने का काम किसी दूसरे से कराना -- वरुक्कुक, पोरिक्कुक

भुनाना (स.क्रि.) नोट, रुपए आदि को छोटे सिक्कों में बदलवाना -- चिल्लर माट्टुक

भुरभुरा (वि.) हलके दबाव से जिसके कण या रवे अलग-अलग हो जाएँ -- पोटियुन्न

भूकंप (पुं.) भूगर्भ में होने वाली उथल-पुथल से धरती के हिलने की अवस्था, भूचाल -- भूकंपम्

भूख (स्त्री.) भोजन की इच्छा, क्षुधा -- विशप्पु

भूख (स्त्री.) कोई चीज़ प्राप्त करने की उत्कट इच्छा -- वलिय आग्रहं आर्ति

भूख-हड़ताल (स्त्री.) किसी नीति या कार्य आदि के प्रति विरोध प्रकट करते हुए अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए भोजन, अन्न-जल आदि ग्रहण न करना (हंगर-स्ट्राइक) -- निराहार सत्याग्रहम्

भूचाल (पुं.) (दे.) भूकंप -- भूकंपम्

भूत (वि.) बीता हुआ, अतीत, भूतकाल -- कऴिञ्ञ कालम्, भूतकालम्

भूत (पुं.) प्रेत, पिशाच -- भूतम्

भूतपूर्व (वि.) पूर्ववर्ती, पहला -- मुन्

भूमि (स्त्री.) जमीन, धरती -- भूमि

भूमि (स्त्री.) पृथ्वी जो सौर जगत के एक ग्रह के रूप में है -- तर, निलम्

भूमिका (स्त्री.) ग्रंथ आदि की प्रस्तावना -- मुखवुर

भूमिका (स्त्री.) किरदार -- वेषम्

भूमिका (स्त्री.) किसी क्षेत्र विशेष में किसी व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य -- पंकु

भूरा (वि.) मटमैला, खाकी -- तविट्टु निमुळ्ळ

भूरा (पुं.) खाकी रंग -- तविट्टुनिरम्

भूल-चूक (स्त्री.) लेखे या हिसाब में दृष्टि–दोष आदि के कारण होन वाली गलती, अशुद्धि -- तेट्टुम् कुट्टवुम्

भूलना (अ.क्रि.) याद न रहना, विस्तृत होना -- मरक्कुक

भूलना (अ.क्रि.) गलती या त्रुटि करना -- तेट्टिक्कुक

भेजना (स.क्रि.) रवाना करना, प्रेषण करना -- अयक्कुक

भेद (पुं.) अंतर, फरक -- व्यत्यासम्

भेद (पुं.) रहस्य, मर्म -- रहस्यम्

भेद (पुं.) प्रकार, तरह -- वक, तरं

भोला (वि.) छल-कपट, रहित सीधा सादा, सहज-विश्वासी -- कपटमिल्लात्त

भोला (वि.) बुद्धू -- मठयन्

भौतिक (वि.) लौकिक, सांसारिक -- लौककम्, ऐहिकम्

भौतिक (वि.) पंचभूतों से संबंध रखने वाला -- भौतिकम्

भ्रम (पुं.) मिथ्या ज्ञान, कुछ का कुछ समझना, धोखा -- अमळि

भ्रमण (पुं.) घूमना-फिरना, विचरण -- चुट्टित्तिरियल् यात्रा

भ्रभर (पुं.) भौंरा, मधुप, भँवर -- भ्रमरम्, वण्टु

भ्रष्ट (वि.) बुरे आचार-विचार वाला -- आचारहीनन्, अऴिमतिक्कारन्

भ्रष्ट (वि.) (मार्ग से) च्युत, विचलित -- (वऴि) तेट्टिय अधः पतिच्च

मंगल (वि.) कल्याणकारी, शुभ -- मंगळकरम्

मंगल (पुं.) कल्याण, भलाई , हित -- मंगळं, हितं

मंगल (पुं.) सौर मंडल का एक ग्रह -- चोव्व, कुजन्

मंगल (पुं.) मंगलवार -- चोव्वाळ्च्च

मंगल-सूत्र (पुं.) सधवा स्त्रियों द्वारा गले में पहना जाने वाला पवित्र सूत्र -- केट्टुतालि, मंगल्यासूत्रम्

मंगलाचरण (पुं.) शुभकार्य के आरंभ में पढ़ा जाने वाला मांगलिक मंत्र, श्लोक, पद्यमय रचना आदि -- ईश्वर प्रार्थन

मंगलाचरण (पुं.) ग्रंथ के आरंभ में मंगल की कामना तथा उसकी निर्विघ्न समाप्ति के लिए लिखा जाने वाला पद्य -- मंगल श्लोकम्, नांदि

मंच (पुं.) सभा-समितियों में ऊँचा बना हुआ मंडप, जिस पर बैठकर सर्वसाधारण के सामने किसी प्रकार का कार्य किया जाए रंगमंच (स्टेज) -- अरङ्डु, वेदि

मंच (पुं.) कुछ विशिष्ट प्रकार के कार्य कलापों के लिए उपयुक्त क्षेत्र (फोरम) -- वेदि

मंजिल (स्त्री.) गंतव्य (डेस्टिनेशन) -- लक्ष्यम्

मंजिल (स्त्री.) पड़ाव, मुकाम -- पाळयम्

मंत्र (पुं.) देवताओं को प्रसन्न करने अथवा सिद्धि आदि प्राप्त करने वाला शब्द समूह -- मंत्रम्

मंत्र (पुं.) कार्य-सिद्धि का ढंग, गुर -- सूत्रम्

मंत्री (पुं.) मंत्रणा अथवा परामर्श देने वाला -- मंत्रि

मंत्री (पुं.) अमात्य -- मंत्रि

मंत्री (पुं.) सचिव -- सचिवन्, कार्यदर्शि

मंदा (वि.) जिसकी माँग कम हो (सौदा), जिसमें तेजी न हो (व्यापार) -- विलयिटिञ्ञ

मंदिर (पुं.) देवालय -- देवालयम्, क्षेत्रम्, अंपलम्

मक्कार (वि.) कपटी, छली -- तट्टिप्पुकारन्, चतियन्

मखमल (स्त्री.) एक तरह का चिकना तथा रोएँदार कपड़ा -- विल्लीस्

मगर (पुं.) घड़ियाल -- मुतल

मगर (अव्य.) लेकिन, परंतु -- पक्षे

मग्न (मगन) (वि.) किसी काम या बात में तन्मय, लीन -- लीनन्, मग्नन्

मच्छरदानी (स्त्री.) जालीदार कपड़े का बना हुआ आवरण, जिसका उपयोग मच्छरों से बचाव के लिए किया जाता है, मसहरी -- कोतुकुवल

मजदूर (पुं.) शारीरिक श्रम द्वारा जीविका कमाने वाला व्यक्ति -- कूलिक्कारन् तोऴिलाळि

मजदूरी (स्त्री.) मजदूर का काम -- कूलिवेल

मजदूरी (स्त्री.) भाड़े या वेतन के रूप में मजदूर को दिया जाने वाला धन -- कूलि

मजबूत (वि.) दृढ़, पक्का, टिकाऊ -- उरच्च, दृढ़माय

मजबूत (वि.) हृष्ट-पुष्ट तगड़ा, शक्तिशाली (देह) -- शक्तियुळ

मजाक (पुं.) परिहास, हँसी, दिल्लगी -- नेरंपोर्क्कु, विनोदम्

मझधार (स्त्री.) नदी आदि के बीच की धारा -- आट्टिन् नटुवु

मझधार (स्त्री.) किसी काम या बात के मध्य की स्थिति -- मध्यस्थिति

मठ (पुं.) साधु-संन्यासियों के रहने का स्थान -- मठम्

मतदान (पुं.) चुनाव में मत देने की क्रिया -- वोट्टेटुप्पु

मताधिकार (पुं.) किसी चुनाव या विषय में मत देने का अधिकार -- वोट्टवकाशम्

मथना (स.क्रि.) दूध, दही को मथानी आदि से बिलोना -- कटयुक

मथानी (स्त्री.) दही मथने का काठ का बना हुआ एक उपकरण -- कटकोल्

मद (पुं.) नशा, मस्ती -- लहरि

मद (पुं.) अहंकार या गर्व -- मदे

मद (पुं.) मतवाले हाथी का कनपटी से बहने वाला गंधयुक्त द्रव्य -- मदजलम्, मदे

मदारी (पुं.) बाजीगर -- इंद्रजालक्कारन्

मदारी (पुं.) बंदर भालू आदि नचाकर जीविका चलाने वाला -- कुरङ्ङाट्टि

मदिरा (स्त्री.) शराब, मद्य -- मद्याम्

मद्ययप (पुं.) जो मदिरापान करता हो, शराबी -- कुटियन् मद्यपन्

मधु (पुं.) शहद -- मधु, तेन्

मधु (पुं.) शराब -- मद्यम्

मधु (पुं.) बसंत ऋतु -- वसंतम्

मधुर (वि.) मीठा, जिसका स्वाद मधु के समान हो -- मधुर रमाय

मध्यस्थ (पुं.) आपस में मेल या समझौता कराने वाला, बिचौलिया -- मध्यस्थन् इटनिलक्कारन्

मन (पुं.) मनुष्य के अंतःकरण का वह अंश, जिससे वह अनुभव, इच्छा, बोध और संकल्पविकल्प करता है -- मनस्सु

मन (पुं.) वजन में चालीस सेर -- मन्नु

मनचाहा (वि.) जिसे मन चाहता हो, इच्छानुसार -- इष्टप्पेट्ट

मनोरंजन (पुं.) दिल बहलाव, मन की प्रसन्नता -- मनोविनोदं, नेरंपोक्कु

मनोरथ (पुं.) अभिलाषा, वांछा, इच्छा -- मनोरथम्

मनोरम (वि.) जिसमें मन रमने, लगे, सुंदर या आकर्षक -- मनोरमम्, आकर्षकम्

ममता (स्त्री.) अपनत्व का भाव, ममत्व -- ममत

ममता (स्त्री.) मन में होने वाला मोह या लोभ का भाव -- मोहम्

मरना (अ.क्रि.) मृत्यु को प्राप्त होना, प्राणांत होना -- मरिक्कुक

मरना (अ.क्रि.) खेलों में खिलाड़ियों का हार जाना -- तोल्क्कुक

मरहम (मलहम) (पुं.) घाव आदि पर उपचार के लिए लगाया जाने वाला औषधियों का लेप -- कुऴंपु

मरोड़ना (स.क्रि.) किसी चीज में घुमाव, बल आदि डालने के उद्देश्य से उसे कुछ जोर से घुमाना, ऐंठना -- पिरिक्कुक

मर्म (पुं.) किसी बात के अंदर छिपा हुआ तत्व, भेद, रहस्य -- मर्मम्, रहस्यम्

मर्यादा (स्त्री.) सीमा, हद -- अतिरु

मर्यादा (स्त्री.) लोकप्रचलित व्यवहार नियम आदि, लोकाचार -- मर्याद, नाट्टाचारम्

मलना (स.क्रि.) किसी पदार्थ को कहीं लगाने के उद्देश्य से रगड़ना -- पुरट्टुक

मलना (स.क्रि.) लेप करना -- तेय्क्कुक, लेपनम् चेय्युक

मलबा (पुं.) कूड़ा-करकट, टूटी या गिराई हुई इमारत का ईंट-पत्थर, चूना आदि -- चवरु, कुप्प, भग्नावशेषम्

मलिन (वि.) मैला-कुचैला, गंदा -- मलिनम्

मलिन (वि.) उदास, म्लान -- म्ळानम्

मल्लाह (पुं.) नदी में नाव खेकर अपनी जीविका अर्जित करने वाला व्यक्ति, केवट, माँझी -- वळ्ळक्कारन्

महँगा (वि.) जिसका दाम अधिक हो -- विलकूटिय, विलयेरिय

महँगाई (स्त्री.) उचित से अधिक मूल्य पर वस्तुओं की बिक्रि -- विलक्कयट्टम

महत्ता (स्त्री.) बड़प्पन, महिमा, महत्व -- महत्वम्

महत्व (पुं.) बड़प्पन, महिमा -- वलिप्पम्, महत्वम्

महत्वाकांक्षा (स्त्री.) महत्व प्राप्त करने की आकांक्षा, उच्चाकांक्षा -- महत्वा भिलाषम्

महल (पुं.) भवन, प्रासाद -- कोटट्रम्, माळिक

महान (वि.) बहुत बड़ा, विशाल -- वळरे वलिय

महान (वि.) उच्च कोटि का -- महत्तय

महापुरुष (पुं.) महिमाशाली पुरुष, श्रेष्ठ जन -- महान्

महा विद्यालय (पुं.) उच्च शिक्षा देने वाला विद्यालय, कॉलेज -- काळेज्, कलालयम्

महिला (स्त्री.) स्त्री, औरत -- महिळ

माँग (स्त्री.) माँगने की क्रिया या भाव, याचना -- आवश्यप्पेटल्

माँग (स्त्री.) किसी निश्चित मूल्य पर किसी चीज की खरीद या चाही जाने वाली मात्रा -- आवश्यम्

माँग (स्त्री.) सिर के बालों को विभक्त करने से बनने वाली रेखा, सीमंत -- सीमंतरेख

माँगना (स.क्रि.) किसी से यह कहना कि आप अमुक वस्तु या धन दें, याचना करना -- आवश्यप्पेटुक, याचिक्कुक

माँजना (स.क्रि.) पात्र को अच्छी तरह से साफ करने के लिए राख, साबुन आदि से अच्छी तरह मलना या रगड़ना -- तेय्कुक, मिनुक्कुक

माँजना (स.क्रि.) किसी काम या चीज का अभ्यास करना ताकि कार्य में महारथ हासिल हो या पूर्ण सफलता मिले -- अभ्यसिक्कुक

मांस (पुं.) शरीर में हड्डियों तथा चमड़े के बीच का मुलायम तथा लचीला पदार्थ -- मांसम्

माड़ना (स.क्रि.) गूँधना, सानना -- कुऴय्क्कुक

माड़ना (स.क्रि.) अन्न की बालों में से दाने झाड़ना -- धान्यं उतिर्क्कुक

मातृभाषा (स्त्री.) अपने जन्म स्थान या घर में बोली जाने वाली भाषा -- मातृभाष

मातृभूमि (स्त्री.) जन्मभूमि, स्वदेश -- मातृभूमि

मादक (वि.) नशा उत्पन्न करने वाला नशीला -- मादकम्, लहरियुळ्ळ

माधुर्य (पुं.) मधुरता, मिठास -- मधुरम्, माधुर्यम्

माधुर्य (पुं.) काव्य का एक गुण -- माधुर्यम्

माध्यम (पुं.) साधन, जरिया -- माध्यमम्

मानक (पुं.) वस्तुओं के आकार-प्रकार महत्व आदि जाँचने का कोई आदर्श मानदंड या रूप -- निलवारम्, मानदंडम्

मानकीकरण (पुं.) एक ही वर्ग की बहुत सी वस्तुओं के गुण, महत्व आदि का एक मानक रूप स्थिर करने की क्रिया या भाव (स्टैंडर्डाइजेशन) -- निलवारर्प्पटुतल्

मानना (स.क्रि.) स्वीकार करना, सहमत होना -- अंगीकरिक्कुक, सम्मतिक्कुक

मानना (स.क्रि.) (किसी के प्रति) श्रद्धा रखना, गुण योग्यता आदि का कायल होना -- मानिक्कुक, करुतुक

मानव (पुं.) मनुष्य, आदमी -- मनुष्यन्

मानवता (स्त्री.) मानव होने की अवस्था या भाव -- मनुष्यत्वम्, मानवराशि

मानवता (स्त्री.) मनुष्य के आदर्श तथा स्वाभाविक गुणों, भावनाओं आदि का प्रतीक या समूह -- मनुष्यत्वम्

मानसिक (वि.) मन-संबंधी -- मानसिकम्

मान्य (वि.) मानने योग्य -- अंगीकार्यमाय

मान्य (वि.) आदरणीय, सम्मान का अधिकारी -- मान्यन्

माप (स्त्री.) मापने की क्रिया या भाव -- अळवु, अळक्कल्

माप (स्त्री.) मापने पर ज्ञात होने वाला नाप, परिमाण, मात्रा या मान -- अळवु

मापन (स.क्रि.) वस्तु का विस्तार, घनत्व या वजन मालूम करना -- अळक्कुक

माफ (वि.) क्षमा किया हुआ -- माप्पु

मायका (मैका) (पुं.) विवाहित स्त्री की दृष्टि से उसके माता-पिता का घर और परिवार, नैहर, पीहर -- जन्मगृहम्

मारना (स.क्रि.) जान लेना, हत्या करना -- कोल्लुक

मारना (स.क्रि.) पीटना, प्रहार करना, चोट पहुँचाना -- तल्लुक, अटिय्क्कुक

मारना (स.क्रि.) मानसिक या शारीरिक आवेग दबाना या रोकना -- नियंत्रिक्कुक, अटक्कुक

मार्ग (पुं.) रास्ता, पथ, राह -- मार्गम्, वऴि

मार्ग (पुं.) माध्यम, साधन -- मार्गम्

मार्मिक (वि.) मर्म स्थान पर प्रभाव डालने वाला, मर्मस्पर्शी -- मर्म प्रधानम्

माल (पुं.) प्रत्येक ऐसी मूल्यवान वस्तु, जिसका कुछ उपयोग होता है -- चरक्कु

माल (पुं.) धन-संपत्ति, रुपया-पैसा, दौलत -- स्कलु, संपल्लु

मालूम (वि.) जाना हुआ, ज्ञात, विदित -- अरियावुन्न

मिटाना (स.क्रि.) दाग, निशान आदि दूर करना -- माच्चु कळयुक

मिटाना (स.क्रि.) नष्ट करना, बरबाद करना -- नशिप्पिक्कुक

मिट्टी (स्त्री.) धरती की ऊपरी सतह का वह भुरभुरा मुलायम तत्व, जिसमें प्रायः पेड़ पौधे उगते हैं -- मण् मण्णु

मिठाई (स्त्री.) विशिष्ट प्रकार की बनाई हुई खाने की मीठी चीजें -- मिठायि, मधुर-पलहारम्

मितभाषी (वि.) कम तथा आवश्यकतानुसार बोलने वाला व्यक्ति -- मितभाषि

मित्र (पुं.) दोस्त, सखा -- सुहत्तु

मिथ्या (वि.) असत्य, झूठा -- मिथ्य

मिथ्या (वि.) कृत्रिम, बनावटी -- कृत्रिममाय

मिलनसार (वि.) जिसकी प्रवृत्ति सबसे मिल जुल कर रहने की हो -- स्नेहस्वभावियाय

मिलान (पुं.) तुलनात्मक दृष्टि अथवा ठीक होने की जाँच करने के लिए दो या अधिक चीजों या बातों का आपस में साथ रखकर मिलाया और देखा जाना -- ओत्तुनोक्कुक

मिलान (पुं.) गुण, दोष, विभिन्नता या समानता जानने के लिए दो चीजों या बातों के संबंध में किया जाने वाला विवेचन, तुलना -- तारतम्यप्पेटुतल

मिलाना (स.क्रि.) मिश्रित करना, एक करना, मिलावट करना -- कलर्त्तुक

मिलाना (स.क्रि.) जोड़ना, सटाना -- कूट्टक, चेर्क्कुक

मिलाना (स.क्रि.) एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति से मेल मिलाप कराना, भेंट कराना -- परिचय-प्पेटुत्तुक, संधिप्पिक्कुक

मिलाना (स.क्रि.) तुलना करना, जाँच करना -- तुलनम् चेप्युक, ओत्तुनो-क्कक

मिलाना (स.क्रि.) किसी को अपने पक्ष में लाना -- वशत्ताक्कुक

मिलावट (स्त्री.) किसी बढ़िया वस्तु में घटिया वस्तु का मेल -- कलर्प्पु

मिश्रण (पुं.) दो या अधिक चीजों को एक में मिलाना, मिलावट करना या मिलाना, मिलावट -- मिश्रणम्, कलार्प्पु

मिश्रण (पुं.) उक्त प्रकार से मिलाने से तैयार होने वाला पदार्थ या रूप -- मिश्रण

मीठा (वि.) जिसमें मिठास हो, मधुर रस वाला -- मधुरमाय

मीठा (वि.) धीमा, मंदा -- पतुक्कने-युळ्ळ

मिनाकीरी (स्त्री.) सोने-चाँदी पर होने वाला मीने का रंगीन काम -- पूच्चुपणि, गिल्टुपणि

मुँडेर (स्त्री.) छत के चारों ओर मेंड़-जैसी दीवार -- कैवरि

मुकदमा (पुं.) वह विवादास्पद विषय, जो न्यायालय के सामने विचार और निर्णय के लिए प्रस्तुत किया जाए -- अन्यायम्, व्यवहारम्

मुकुट (पुं.) एक प्रसिद्ध शिरोभूषण, जिसे राजा लोग पहनते हैं और जो प्रायः देवी-देवताओं की मूतियों के सिर पर पहनाया जाता है -- किरीटम्

मुक्त (वि.) जो किसी प्रकार के बंधन से छूट गया हो -- बंधन-मुक्तनाय

मुक्त (वि.) मोक्ष-प्राप्त, भव बंधन से मुक्त -- मोक्षम्

मुक्त (वि.) छूटा हुआ, फेंका हुआ -- मुक्तनाय

मुक्ति (स्त्री.) किसी प्रकार के बंधन आदि से छुटकारा -- मोचनम्

मुक्ति (स्त्री.) धार्मिक क्षेत्र में वह स्थिति, जिसमें जीव जन्म-मरण के बंधन से छूट जाता है, मोक्ष -- मोक्षम्

मुख (पुं.) मुँह -- मुखम्

मुख (पुं.) किसी वस्तु का अगला या ऊपरी खुला भाग -- वायॅ

मुखपृष्ठ (पुं.) किसी ग्रंथ या पुस्तक का सबसे ऊपर वाला वह पृष्ठ, जिसमें उस पुस्तक तथा उसके लेखक का नाम छपा होता है -- पुरंचट्ट

मुख्य (वि.) प्रधान, खास -- मुख्यम्

मुख्य (वि.) महत्वपूर्ण या सारभूत -- प्रधानप्पेट्ट

मुख्यालय (पुं.) किसी संस्था का केंद्रीय तथा प्रधान कार्यालय -- प्रधान कार्यालयम्

मुग्ध (वि.) मोहित, मूढ़ -- मुग्धन्

मुट्ठी (स्त्री.) हथेली की वह स्थिति, जिसमें उँगलियाँ अंदर की ओर मोड़कर बंद कर ली जाती हैं -- मुष्टि, पिटि

मुट्ठी (स्त्री.) उतनी वस्तु जितनी मुट्ठी में आ सके -- ओरु पिटि

मुट्ठी (स्त्री.) मुट्ठी की चौड़ाई का माप -- पिटि

मुद्रण (पुं.) छापने की क्रिया या भाव -- अच्चटि

मुद्रण (पुं.) मुद्रा से अंकित करना, मोहर लगाना -- अच्चटि-क्कुक

मुद्रणालय (पुं.) जहाँ छापने का काम होता है, छापाखाना -- मुद्रणालयम्, अच्चटिशाल

मुद्रा (स्त्री.) आँख-मुँह, हाथ आदि की ऐसी क्रिया, जिससे मन की कोई विशिष्ट प्रवृत्ति या भाव प्रकट हो -- आंग्यम्, मुद्र

मुद्रा (स्त्री.) चिह्न, नाम आदि अंकित करने की मुहर , सील -- मुद्र, सील्

मुद्रा (स्त्री.) क्रय विक्रय का आधिकारिक माध्यम, सिक्का -- नाणयम्

मुद्रा (स्त्री.) ऐसी अंगूठी जिस पर किसी का नाम या कोई वैयक्तिक चिह्न अंकित हो -- मुद्रमोंतिरं

मुनाफा (पुं.) क्रय-विक्रय में आर्थिक दृष्टि से होने वाला लाभ, नफा -- लाभम्

मुरझाना (अ.क्रि.) फूल-पत्तों आदि का सूखने लगना, कुम्हलाना -- वाटुक

मुरझाना (अ.क्रि.) उदास या सुस्त होना, कांति, श्री आदि से रहित होना -- वाटुक, मङ्ङुक

मुर्दनी (स्त्री.) चेहरे से प्रकट होने वाला मुर्दे जैसा भाव -- मरण लक्षणम्

मुश्किल (वि.) कठिन, दुष्कर, दुस्साध्य -- विषमम, कठिनम्

मुश्किल (स्त्री.) कठिनाई, परेशानी -- काठिन्यम्, बुद्धिमुट्टु

मुस्कान (स्त्री.) मंद-मंद हँसी, स्मित -- पुंचिरि

मुहावरा (पुं.) वह वाक्यांश, जो अपने अभिधार्य से भिन्न किसी और अर्थ में रूढ़ हो गया हो -- शैलि कीऴ वळक्कम्

मुहूर्त (पुं.) काल का एक मान, जो दिन-रात के तीसवें भाग के बराबर होता है -- मुहूर्त्तकालम्

मुहूर्त (पुं.) ज्योतिष के अनुसार शुभा शुभ समय -- मुहूर्त्तम्

मुहूर्त (पुं.) श्रीगणेश, आरंभ -- आरंभम्

मूक (वि.पु.) गूँगा -- ऊम, मूकन्

मूलभूत (वि.) आधार-रूप, बुनियादी -- आधार-भूतमाय

मूल्यांकन (पुं.) मूल्य अथवा उपयोगिता निर्धारित या निश्चित करने की क्रिया या भाव -- मूल्यांकनम् विलयिरुत्तल्

मृत्यु (स्त्री.) मरण, मौत -- मरणम्, मृत्यु

मेहँदी (स्त्री.) एक प्रकार की झाड़ी, जिसकी पत्तियाँ हाथ-पैर रंगने सजाने के काम आती हैं -- मयिलांचि

मेखला (स्त्री.) करधनी, कमरबंद, पेटी -- मेखल

मेधावी (वि.) असाधारण बुद्धि वाला, बुद्धिमान -- प्रतिभाशालि

मेरा (सर्व.वि.) मै का संबंध कारक -- ऐन्टु

मेरु-दंड (पुं.) मनुष्यों और बहुत से जीवों में पीठ के बीचों-बीच गरदन से लेकर कमर तक जाने वाली एवं माला की तरह गुँथी हुई हड्डी -- मेरुदण्डम्, नट्टेल्लु

मेहतर (पुं.) सफाई कर्मचारी -- तोट्टि

मैं (सर्व) सर्वनाम उत्तम-पुरुष में कर्ता का रूप, स्वयं, खुद -- ञान्

मैदान (पुं.) विस्तृत क्षेत्र या भूखंड, दूर तक फैली हुई सपाट जमीन -- मैतानम्

मैदान (पुं.) पर्वतीय क्षेत्र से भिन्न समतल भू-भाग -- समतल भूमि

मैदान (पुं.) खेल आदि का स्थान -- कळि स्थळम्, कळम्

मैदान (पुं.) युद्ध-क्षेत्र, रण-भूमि -- युद्धक्कळम्

मैल (स्त्री.) शरीर, कपड़े आदि की गंदगी, गर्द, धूल आदि -- अळुक्कु

मैल (स्त्री.) किसी के प्रति मन में संचित दुर्भाव -- दुर्भावन

मैलखोरा (वि.) धूल, गर्द आदि पड़ने पर भी जो मैला न दिखाई दे, जो मैल को छिपा सके -- अळुक्किल्लात

मैला (वि.) जिस्म पर मैल जमी हो, गर्द, धूल आदि पड़ी हो, गंदा, अस्बच्छ -- मलिनम्, अळुक्कुळ्ळ

मैला (पुं.) विष्ठा -- मलम्

मोटा (वि.) जिसकी देह में मांस मेद अधिक हो, स्थूलकाय -- तटिच्च

मोटा (वि.) जो पतला या बारीक न हो (कपड़ा आदि) -- कट्टियुळ्ळ

मोदक (पुं.) आनंद देने वाला -- आनंद मरुळुन्न

मोदक (पुं.) लड्डू -- मोदकम्, कोळुक्कट्ट

मोल (पुं.) कीमत, मूल्य, दाम -- विल

मोह (पुं.) स्नेह, लगाव -- मोहम्

मोहक (वि.) मोह उत्पन्न करने वाला -- मोहकारि

मोहक (वि.) मन को आकृष्ट करने वाला, लुभावना -- मोहिप्पिक्कुन्न

मौत (स्त्री.) मरण, मृत्यु -- मरणम्, मृत्यु

मौन (पुं.) न बोलने की क्रिया या भाव, चुप्पी -- मौनम्

मौन (वि.) जो न बोले, चुप -- मिण्डात्त

मौलिक (वि.) मूल-संबंधी, मूलगत -- अटिस्थानपरम्, मौलिकम्

मौलिक (वि.) जो किसी की छाया, अनुवाद, अनुकृति आदि न हो -- स्वतंत्रम्

मौसम विज्ञान (पुं.) मौसम की जानकारी से संबंध रखने वाला विज्ञान -- व्योम-निरीक्षण शास्त्रम्

म्यान (पुं.) तलवार, कटार आदि रखने का कोष या गिलाफ -- वाळुर

यंत्र (पुं.) औज़ार, उपकरण -- यंत्र

यथार्थ (वि.) जैसा है वैसा, वास्तविक जो अपने अर्थ (आशय, उद्देश्य, भाव आदि) के ठीक अनुरूप हो, वास्तविक -- यथार्थम्

यथार्थ (पुं.) वास्तविकता -- NA

यद्यपि (अव्य.) यद्यपि, अगर ऐसा है -- ऐकिलुम्

यशस्वी (वि.) जिसका यश चारों ओर फैला हो -- यशस्वि

यह (सर्व) एक सर्वनाम, जिसका प्रयोग वक्ता और श्रोता को छोड़कर निकट के और सब मनुष्यों तथा पदार्थों के लिए होता है -- इवन्, इवळ्, इतु, ई

या (अव्य.) विकल्पसूचक शब्द, अथवा -- अल्लेङ् किल्

याचक (वि.पुं.) माँगने वाला, भिक्षुक -- याचकन्

यातना (स्त्री.) घोर कष्ट -- यातन

यातायात (पुं.) एक स्थान से दूसरे स्थान पर आते-जाते रहने की क्रिया या भाव, आना-जाना -- पोक्कुवरवु, संचारम्

याद (स्त्री.) स्मरण रखने की क्रिया या भाव -- स्मरण, ओर्म्म

यान (पुं.) वह उपकरण या साधन, जिस पर सवार होकर यात्रा की जाती है अथवा माल ढोया जाता है -- वाहनम्

युक्त (वि) किसी के साथ जुड़ा, मिला या लगा हुआ -- चेर्न्न

युक्त (वि) सम्मिलित -- कूटिच्चेर्न्न

युग (पुं.) काल, समय -- कालम्, समयम्

युग (पुं.) काल-गणन के विचार से कल्प के चार उप विभाग (सत, त्रेता, द्वापर और कलि में से प्रत्येक) -- युगम्

युगल (वि.पुं.) युग्म, जोड़ा -- युगळम्, जोडि, इरट्ट

युगम (पुं.) दो चीज़ें, जो प्रायः या सदा साथ आती या रहती हों, जोड़ा -- युग्मम्, जोडि

युद्ध (पुं.) अस्त्र-शस्त्रों की सहायता से दो पक्षों में होने वाली लड़ाई, रण, संग्राम -- युद्धम्

युवक (पुं.) जवान आदमी -- युवावु

योगदान (पुं.) किसी को सहायता देने, हाथ बँटाने की क्रिया या भाव -- सहकरणम्

योगी (पुं.) वह, जो योग की साधना करता हो -- योगि

योग्य (वि.) योग्यता रखने वाला, काबिल, लायक, उपयुक्त, उचित -- योग्यम्, उचितम्

योग्यता (स्त्री.) योग्य होने की अवस्था या भाव, काबिलियत, गुण -- योग्यत

योजना (स्त्री.) किसी कार्य को निष्पादित करने का प्रस्तावित कार्यक्रम (प्लान) -- पद्धिति

यौवन (पुं.) युवा या युवती होने की अवस्था या भाव -- यौवनम्

रंग (पुं.) वर्ण (कलर) -- निरम्, वर्ण

रँगना (स.क्रि.) रंग में डुबा कर किसी चीज को रंगीन करना -- निरं पिटिप्पिक्कुक

रंगमंच (पुं.) वह ऊँचा उठा हुआ स्थान जहाँ पर पात्र अभिनय करते हैं -- स्टेज्, अरङ्ङु

रँभाना (अ.क्रि.) गाय का मुँह से आवाज करना -- पशु अमरुक

रक्तपात (पुं.) लहू का गिरना या बहना, खून-खराबा -- रक्तच्चोरिच्चिल्

रक्षा (स्त्री.) ऐसा काम, जो आक्रमण, आपद, नाश से बचने या बचाने के लिए किया जाता है, बचाव -- रक्ष

रखना (स.क्रि.) किसी स्थान पर स्थित करना -- वेक्कुक

रगड़ (स्त्री.) रगड़ने की क्रिया या भाव -- उरसल्

रगड़ (स्त्री.) वह चिह्न, जो किसी चीज से रगड़े जाने पर दिखाई देता है, खरोंच -- पोरल

रचना (स्त्री.) रचने की क्रिया या भाव, बना कर तैयार की हुई चीज, कृति, साहित्यिक कृति -- रचन, रचिक्कुक

रजनी (स्त्री.) रात, रात्रि -- रात्रि, रजनि

रटना (स.क्रि.) कंठस्थ करना -- मनःपाठ्भ् आक्कुक

रण (पुं.) लड़ाइ, युद्ध -- युद्धम्, रणम्

रति (स्त्री.) काम क्रीड़ा -- रति

रति (स्त्री.) साहित्य में श्रृंगार रस का स्थायी भाव -- रति

रत्न (पुं.) बहुमूल्य पत्थर, जो आभूषण आदि में जड़े जाते हैं -- रत्नम्

रफ्तार (स्त्री.) चाल, गति -- वेगत

रमणी (स्त्री.) सुंदर नारी, युवती -- रमणि, युवति

रमणीक (वि.) सुंदर, मनोहर -- रमणीयम्, मनोहरम्

रवि (पुं.) सूर्य -- सूर्यन्, रवि

रश्मि (स्त्री.) किरण -- रश्मि

रस (पुं.) शोरबा -- चारु

रस (पुं.) मन में उत्पन्न होने वाला वह भाव, जो काव्य आदि पढ़ने या नाटक आदि देखने से होता है, काव्यानंद -- रसम्

रसायन (पुं.) द्रव का अशोधित रूप, पौष्टिक औषधि -- रसायनम्

रसीला (वि.) रस से भरा हुआ, रसदार, स्वादिष्ट -- सरसम्

रस्सा (पुं.) मोटी डोरी -- वटम्

रहट (पुं.) खेतों में सिंचाई के लिए कुएँ से पानी निकालने का चक्राकार यंत्र (पर्शिंयन व्हील) -- राट्टु कप्पि

रहस्य (पुं.) मर्म या भेद की बात, गुप्त बात -- रहस्यम्

रहित (वि.) (से) बिना, (से) खाली, विहीन -- रहितम्, इल्लाते

राक्षस (पुं.) निशाचर, दैत्य -- राक्षसन्

राग (पुं.) अनुराग, प्रेम -- अनुरागम्, स्नेहम्

राग (पुं.) शास्त्रीय संगीत का विशिष्ट गान-प्रकार -- रागम्

राज (पुं.) राज्य, राजकीय शासन -- राज्यभरणम्

राज (पुं.) मकान बनाने वाला कारीगर (मेसन) -- कल्याणि-क्कारन्, कोत्तन्न, कल्लाशरि

राजकुमार (पुं.) राजा का पुत्र -- राजरकुमारन्

राजचिह्न (पुं.) राजकाज के संबंध में उपयोग किया जाने वाला कोई भी चिह्न या साधन जो शासक के प्राधिकार का द्योतक हो -- राजचिह्नम्

राजदूत (पुं.) किसी राजा या राज्य का दूत -- राजदूतन्, अंबासडर्

राजद्रोही (पुं.) वह व्यक्ति जिसने सत्ता के विरुद्ध विद्रोह किया हो, बागी -- राजद्रोही, राज्यद्रोही

राजधानी (स्त्री.) किसी राज्य का वह नगर, जो उसका शासन केंद्र हो -- राजधानी

राजनीति (स्त्री.) वह नीति या पद्धति, जिसके द्वारा किसी राज्य का प्रशासन सुचारु रूप से चलाया जाता है (स्टेटमैन शिप) -- राजतंत्रम्

राजनीति (स्त्री.) गुटों, वर्गों आदि की पारस्परिक स्पर्धा वाली स्वार्थपूर्ण नीति (पॉलिटिक्स) -- राष्ट्र मीमांस

राजभाषा (स्त्री.) किसी देश की वह भाषा, जो राजकाज तथा न्यायालयों आदि में प्रयोग में आती हो -- औद्योगिक भाष

राजमार्ग (पुं.) मुख्य मार्ग, राजपथ -- राजमार्ग, पेरुवऴि

राजस्व (पुं.) वह धन, जो राजा या राज्य को आधिकारिक रूप से मिलता हो -- राजस्वम्, रेवन्यु

राजा (पुं.) वह व्यक्ति , जो किसी राज्य या भूखंड का मालिक हो, नृपति, भूपति -- राजावु

रात्रि (स्त्री.) रात, निशा -- रात्रि

राशि (स्त्री.) किसी पदार्थ का समूह -- कूट्टम्

राशि (स्त्री.) गणित में कोई ऐसी संख्या जिसके संबंध में जोड़, गुणा, भाग आदि क्रियाएँ की जाती हैं -- तुक

राशि (स्त्री.) ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत क्रांति वृत्त में पड़ने वाले 12 तारा समूहों में से कोई एक -- राशि(मेषादि)

राष्ट्र (पुं.) राज्य, देश किसी निश्चित और विशिष्ट क्षेत्र में रहने वाले लोग, जिनकी भाषा और रीति-रिवाज एक से होते हैं -- राष्ट्रम्, राज्यम्

राष्ट्रगान (पुं.) किसी राष्ट्र या देश का मान्यता प्राप्त विशिष्ट गान, जो राष्ट्रीय उत्सवों आदि पर गाया जाता हो -- राष्ट्रगीतम्

राष्ट्रध्वज (पुं.) किसी भी राष्ट्र या देश का मान्यता प्राप्त झंडा -- राष्ट्र पताक

राष्ट्रभाषा (स्त्री.) राष्ट्र की ऐसी भाषा, जिसका प्रयोग उसके निवासी सार्वजनिक कामों के लिए करते हों -- राष्ट्र भाष

राष्ट्रमंडल (पुं.) ब्रिटेन तथा स्वतंत्र राष्ट्रों का मंडल, जो कभी ब्रिटेन के अधीन थे (कामनवेल्थ) -- कामण् वेल्थ्

राष्ट्रवादी (वि.) राष्ट्रवाद से संबंधित -- देशीयवादि, नेषनलिस्ट्

राष्ट्रवादी (पुं.) राष्ट्र के प्रति निष्ठा रखने वाला -- NA

राष्ट्रीयकरण (पुं.) सरकारी अधिकार क्षेत्र में लेने की क्रिया या भाव -- देशवत्करणम्

रास्ता (पुं.) मार्ग, पथ -- मार्गम्, वऴि

रिमझिम (स्त्री.) वर्षा की फुहार, छोटी छोटी बूँदों की वर्षा -- चारल्, तुळ्ळिमऴ

रिवाज (पुं.) प्रथा, चलन -- पतिवु, संप्रदायम्

रिश्वतखोरी (स्त्री.) घूस लेने की क्रिया -- कैक्कूलि, कोऴ

रीझना (अ.क्रि.) मोहित होना, किसी पर प्रसन्न होना -- संतोषि क्कुक, मोहिक्कुक

रीति (स्त्री.) प्रथा, रिवाज -- रीति, पतिवु

रीति (स्त्री.) काम करने का विशिष्ट ढंग या तरीका, कायदा -- संप्रदायम्, मट्टु

रुकना (अ.क्रि.) ठहरना, थमना -- निल्क्कुक

रुकावट (स्त्री.) विघ्न, बाधा, अटकाव -- विघ्नम्, तटस्मम्

रुचना (अ.क्रि.) रुचि के अनुकूल प्रतीत होना, अच्छा लगना, भाना -- रुचिक्कुक

रुचि (स्त्री.) अच्छा लगने की वृत्ति -- रुचि

रुचि (स्त्री.) दिलचस्पी -- तात्पर्यम्

रुपया (पुं.) सौ पैसे के मूल्य का भारतीय सिक्का या नोट -- रूप, उरूप्पिक

रुष्ट (वि.) रोष से भरा हुआ, क्रुद्ध -- क्रुद्ध्न्

रुष्ट (वि.) रूठा हुआ, अप्रसन्न -- पिणङ्ङिय

रूखा (वि.) जिसमें चिकनाहट का अभाव हो, शुष्क, नीरस -- मिनुसमि-ल्लात्त, उणङाङिय, शुष्कमाय

रूठना (अ.क्रि.) रुष्ट या अप्रसन्न होना -- पिणङ्ङुक

रूढ़ि (स्त्री.) परंपरा से चली आई कोई ऐसी प्रथा, जिसे साधारणतया सभी लोग मानते हों -- मामूल्, परंपर्यम्

रूपक (पुं.) ऐसी साहित्यिक रचना, जिसका अभिनय हो सके, नाटक -- रूपकम्

रूपक (पुं.) साहित्य में एक प्रकार का अर्थालंकार (मेटाफर) -- रुपका-लंकारम्

रूपरेखा (स्त्री.) रेखाओं द्वारा ऐसा अंकन, जिससे किसी के रूप का स्थूल ज्ञान होता हो (स्केच) -- स्केच्

रूपरेखा (स्त्री.) किसी कार्य या बात के संक्षिप्त रूप (आउट-लाइन), योजना आदि का खाका -- संक्षिप्त रूपम्

रूपांतर (पुं.) रूप-परिवर्तन -- रूपांतरम्

रेंगना (अ.क्रि.) पेट के बल सरकना (क्रीप) -- इऴयुक

रेखागणित (पुं.) ज्यामिति (जिओमिट्री) -- रेखागणितम्

रेखाचित्र (पुं.) केवल रेखाओं से बनाया गया कोई चित्र या आकृति (स्केच) -- रेखाचित्रम् स्केच्

रेजगारी (स्त्री.) छोटे सिक्के, छुट्टा -- चिल्लर माट्टुक

रेत (स्त्री.) बालू -- मणल्

रेलगाड़ी (स्त्री.) भाप, डीजल, बिजली आदि से लोहे की पटरियों पर चलने वाली गाड़ी -- तीवष्टि

रोक (स्त्री.) प्रतिबंध -- तटस्सम्

रोक (स्त्री.) रोकने (बाधा डालने या निषेध करने) की क्रिया या भाव -- तटस्सर्प्प टुत्तल्

रोकथाम (स्‍त्री.) किसी प्रवृत्‍ति, रोग आदि के उन्मूलन तथा प्रसार आदि को रोकने के उपाय -- तटस्सम्, प्रतिरोधम्

रोग (पुं.) बीमारी -- रोगम्

रोचक (वि.) अच्छा लगने वाला, मनोरंजक -- रुचिक्कुन्‍न

रोजगार (पुं.) धंधा, पेशा, आजीविका का साधन -- तोऴिल् उपजीवनम्

रोना (अ.क्रि.) आँसू बहाना, रुदन करना -- करयुक

रोम (पुं.) शरीर पर के बाल, रोआँ -- रोमम्

रोली (स्‍त्री.) हल्दी और चूने के योग से बना एक प्रकार का चूर्ण, जिससे तिलक लगाया जाता है -- तिलकम्, कुंकुमम्

रोशनदान (पुं.) रोशनी, हवा आदि आने का छोटा रास्ता, गवाक्ष, वातायन -- जन्‍नल्, जालकम्

रोष (पुं.) क्रोध, गुस्सा, कोप -- रोषम्

रौंदना (स.क्रि.) किसी चीज़ को पैरों तले पीसना, कुचलना -- चविट्‍टि-त्‍तेय्क्कुक

रौनक (स्‍त्री.) चमक-दमक, शोभा -- शोभ, कांति

रौनक (स्‍त्री.) चहल-पहल, जमघट -- उत्साहम्

लँगड़ाना (अ.क्रि.) लँगड़ा कर चलना -- मुटंतुक

लंगर (पुं.) लोहे का बहुत भारी काँटा, जिसे नदी, समुद्र आदि में गिरा कर जहाज आदि को रोक कर स्थिर किया जाता है -- नंकूरम्

लंगर (पुं.) वह स्थान, जहाँ पका हुआ भोजन पंगत में बैठे भक्‍तों और गरीबों को खिलाया जाता है तथा इस प्रकार बाँटा जाने वाला भोजन -- सत्रम्, सर्वणि भोजनम्

लंपट (वि.) कामी, विषयी -- लंपटन, विष्या-सक्‍तन्

लंबा (वि.) जो अधिक ऊँचा हो -- नीळमुळ्ळ

लंबा (वि.) अधिक विस्तार वाला, दीर्घकायिक -- दीर्घकालम्, निल्क्कुन्‍न

लकड़ी (स्‍त्री.) कटे पेड़ का कोई भी सूखा भाग, शाख, टहनी आदि -- तटि

लकीर (स्‍त्री.) रेखा (लाइन) -- वर, रेख

लक्षण (पुं.) किसी वस्तु या व्यक्‍ति में होने वाला कोई ऐसा गुण या विशेषता जो सहसा औरों में दिखाई न देती हो (फीचर, करेक्टरिस-टिक्स) -- लक्षणम्

लक्षण (पुं.) शरीर में दिखाई पड़ने वाले वे चिहन आदि, जो किसी रोग के सूचक हों या सामुद्रिक के अनुसार शुभाशुभ के सूचक हों -- लक्षणम्

लक्षणा (स्‍त्री.) वह शब्द शक्‍ति, जो सामान्य अर्थ से अन्य अर्थ प्रकट करती हो -- लक्षण

लक्ष्मण रेखा (स्‍त्री.) ऐसी सीमा, जिसका अतिक्रमण नहीं किया या सके -- लक्ष्मण रेख

लक्ष्मी (स्‍त्री.) धन-संप्पत्‍ति की देवी, श्री, धन संप्पति -- ऐश्‍वर्यम्, शोभ

लक्ष्य (पुं.) निशाना -- उन्‍नम्, लक्ष्यम्

लक्ष्य (पुं.) अभीष्‍ट वस्तु, उद्‍देश्य -- उद्‍देशम्

लखपती (पुं.) लाखों रुपए का मालिक, बहुत अमीर व्यक्‍ति -- लक्षाधिपति, लक्षप्रभु

लगन (स्‍त्री.) मन का किसी ओर लगना, धुन, लौ -- उत्साहम्, तात्पर्यम्

लगन (पुं.) विवाह या अन्य शुभ कार्य का मुहूर्त्‍त लगान (पुं.) सरकार को मिलने वाला भूमि कर, भूकर -- भूनिकुति

लगाना (अ.क्रि.) जोड़ना, संलग्‍न करना -- कूट्‍टुक

लगाना (अ.क्रि.) रोपना -- नटुक

लगाम (स्‍त्री.) बाग, रास -- कटिञ्ञाण्

लगाव (पुं.) जुड़ने का भाव, स्‍नेह -- स्‍नेहम्

लगाव (पुं.) दिलचस्पी -- अभिरुचि, तात्पर्यम्

लघुतम (वि.) सबसे छोटा -- लघुवाय, वळरे चूचेरिय

लचकना (अ.क्रि.) दबाव आदि पड़ने के कारण किसी लंबी चीज का मध्य भाग पर से कुछ झुकना या मुड़ना -- कूनुक

लज्‍जा (स्‍त्री.) लाज, शर्म, हया -- लज्‍ज, नाणम्

लटकना (अ.क्रि.) ऊँची जगह से नीचे की ओर लंबित होना -- तूङ्डुक

लटकना (अ.क्रि.) काम पूरा न होना, देर होना -- कुऴयुक

लट्टू (पुं.) लकड़ी का एक खिलौना, जिसके मध्य में कील जड़ी होती है और जो चलाए जाने पर उक्‍त कील पर घूमने या चक्‍कर लगाने लगता है (स्पिनिंग टॉप) -- पंपरम्

लड़कपन (पुं.) बाल्यावस्था, बचपन -- कुट्‍टिक्‍कालम्

लड़कपन (पुं.) बचकाना आचरण -- कुट्‍टित्‍तम्

लड़का (पुं.) बालक, जो अभी युवक न हुआ हो -- आण्कुट्ऍटि, बालन्

लड़का (पुं.) पुत्र -- पुत्रन्

लड़खड़ाना (अ.क्रि.) चलते समय सीधे न रह सकने के कारण इधर-उधर झुकना, डगमगाना -- इटरुक, चांचाटुक

लड़ना (अ.क्रि.) लड़ाई करना, भिड़ना, झगड़ना -- युद्‍धम् चेय्युक, पट वेट्‍टुक इटयुक

लता (स्‍त्री.) जमीन पर या किसी आधार पर फैलने वाला पौधा, बेल -- लत

लदना (अ.क्रि.) बोझ या भार से युक्‍त होना -- भारम् कयट्‍टुक

लपकना (अ.क्रि.) सहसा तेजी से या फुर्ती से आगे बढ़ना -- कुतिच्‍चु चाटुक

लपकना (अ.क्रि.) फेंकी गई किसी वस्तु को जमीन पर गिरने से पूर्व पकड़ लेना -- चाटि पिटिंक्कुक

लपट (स्‍त्री.) आग की लौ, ज्वाला -- ज्वाल

लपेटना (स.क्रि.) सूत, कपड़े आदि को किसी चीज के चारों ओर फेरा देकर बाँधना -- चुट्‍टुक

लय (पुं.) एक वस्तु का दूसरी वस्तु में विलीन होना, समा जाना -- विलयम्

लय (स्‍त्री.) स्वर के आरोह-अवरोह का ढंग -- लयम्

ललकार (स्‍त्री.) लड़ने के लिए प्रतिपक्षी को दी गई चुनौती -- वेल्लुविळि

ललकारना (स.क्रि.) विपक्षी को लड़ने की चुनौती देना -- वेल्लु विळिक्कुक, पोरिनु विळिक्कुक

ललचाना (स.क्रि.) कोई चीज देखकर किसी के मन में लोभ का भाव जगना -- कोतिप्पि-क्कुक

ललाट (पुं.) माथा -- नेट्‍टि, ललाटम्

ललाट (पुं.) भाग्य -- भाग्य, विधि

ललित (वि.) मनोहर, सुंदर -- लळितम्

लहर (स्‍त्री.) हिलोर, मौज, तरंग (वेव) -- तरंगम्

लहराना (अ.क्रि.) हवा के झोंकों से हिलना-डुलना -- तिरयटि-क्कुक

लहलहाना (अ.क्रि.) हरा भरा होना, पनपना -- तळिर्क्कुक, पच्‍च पिटिक्कुक

लहू-लुहान (वि.) खून से तर-बतर -- रक्‍तमयम्, चोरपुरण्ट

लाँघना (स.क्रि.) डग भर कर या छलाँग लगाकर पार करना, फाँदना -- चाटिक्‍कट-क्कुक, कटक्कुक

लांछन (पुं.) चरित्र पर धब्बा, कलंक -- कळंकम्

लाख (पुं.) सौ हजार की अंकों में सूचक संख्या-1,00,000 -- लक्षम्

लाख (वि.) जो संख्या में सौ हजार हो -- लक्षम् (तुक)

लागत (स्‍त्री.) किसी पदार्थ के निर्माण में होने वाला खर्च -- मुतल् मुटक्कु

लाचारी (स्‍त्री.) मजबूरी, असमर्थता, विवशता -- गतिकेटु

लाड़-प्यार (पुं.) प्रेमपूर्ण व्यवहार, दुलार -- स्‍नेहं, लाळन

लाभ (पुं.) प्राप्‍ति, लब्धि -- प्राप्‍ति

लाभ (पुं.) फायदा, नफा -- लाभम्

लाभदायक (वि.) जो लाभ कराता हो, लाभ देने वाला -- लाभकरम्

लाभांश (पुं.) लाभ का वह अंश, जो हिस्सेदारों को लगाई गई पूँजी के अनुपात में मिलता हो (डिविडेन्ड) -- लाभवीतम्

लाल (पुं.) छोटा और प्रिय बालक, प्यारा बच्‍चा, पुत्र, बेटा -- ओमनप्पुत्रन्, ओमन

लाल (पुं.) माणिक नामक रत्‍न -- माणिक्यम्

लाल (वि.) रक्‍तवर्ण का, सुर्ख -- चुवन्‍न

लालच (पुं.) कोई वस्तु पाने की बहुत बड़ी इच्छा, लोभ -- कोति, अत्याग्रहम्

लालटेन (स्‍त्री.) हाथ में लटकाने योग्य चिमनीदार लैंप, कंडील -- रांतल्

लाश (स्‍त्री.) किसी प्राणी का मृत शरीर, शव -- शवम्

लिपि (स्‍त्री.) वर्णमाला के अक्षर लिखने की एक प्रणाली, अक्षरों-वर्णों के चिहन -- लिपि

लीन (वि.) जो किसी में समा गया हो -- लीनन्

लीन (वि.) जो किसी काम में इस प्रकार लगा हुआ हो कि उसे और बातों का ध्यान न रहे, तन्मय -- लयिच्‍च

लीपना (स.क्रि.) किसी वस्तु पर गाढ़े या पतले तरल पदार्थ का लेप करना -- पूशुक

लुटेरा (पुं.) लूटने वाला, डाकू -- कोळ्ळ-क्‍कारन्

लुभाना (अ.क्रि.) आकृष्‍ट, मोहित या राग-युग्त होना, लालच में पड़ना -- कोतिक्कुक

लू (स्‍त्री.) ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली बहुत गर्म हवा -- चूटुकाटटु

लू (स्‍त्री.) ग्रीष्म ऋतु में गर्म हवा लग जाने से होने वाली एक बीमारी -- सूर्यातापम्

लूट (स्‍त्री.) जबरदस्ती छीनने की क्रिया -- कोळ्ळ मुतल्

लेकिन (अव्य.) परंतु, किंतु, मगर -- पक्षे, ऐन्‍नाल्

लेखक (पुं.) पत्र-पत्रिका आदि के लिए लेख लिखने वाला या साहित्यिक ग्रंथ लिखने वाला व्यक्‍ति -- लेखकन्, एऴ्‍त्‍तुकारन्

लेखा-जोखा (पुं.) हिसाब-किताब -- कणक्कु

लेटना (अ.क्रि.) विश्राम करने के लिए लंबाई के बल पड़े रहना -- किटक्‍कुक

लेन-देन (पुं.) किसी को कुछ देने और उससे कुछ लेने का व्यवहार -- कोटुक्‍कल्-काङ्ङल्

लेन-देन (पुं.) उधार लेने-देने का व्यवहार -- कोटुक्‍कल्-काङ्ङल्

लेना (स.क्रि.) थामना, पकड़ना -- ऐटुक्कुक

लेना (स.क्रि.) खरीदकर या उधार के रूप में प्राप्‍त करना -- वाङ्ङुक

लेप (पुं.) गीली या घोली हुई चीज, जो किसी दूसरी चीज पर पोती जाए -- लेपनम्

लेप (पुं.) शरीर पर लगाया जाने वाला उबटन आदि -- कुळंपु, तैलम्

लोक कथा (स्‍त्री.) लोक विशेषत: ग्राम्य लोगों में प्रचलित कोई प्राचीन गाथा (फोक टेल) -- नाटोटिक्‍कथ, ऐतिहयम्

लोककला (स्‍त्री.) अंचल विशेष में परंपरागत प्रचलित नृत्य, गीत आदि कलाएँ -- नाटन् कल

लोकगीत (पुं.) जनसाधारण में गीत -- नाटन् पाट्टु

लोकप्रिय (वि.) ज़ो जनसाधारण को प्रिय हो -- जन सम्मतम् नेटिय

लोक संगीत (पुं.) परंपरा से चला आया वह संगीत, जो लोक में प्रचलित हो -- नाटोटि संगीतम्

लोकापवाद (पुं.) लोक निंदा, बदनामी -- जनापवादम्

लोकोक्‍ति (स्‍त्री.) लोकोक्‍ति -- पऴंचोल्लु

लोभ (पुं.) दूसरे की वस्तु पाने की प्रबल कामना, लालच -- लोभम्, कोति

लोरी (स्‍त्री.) छोटे बच्‍चों के सुलाने के लिए गाए जाने वाले गीत -- ताराट्‍टु

लोहा (पुं.) प्राय: काले रंग की एक प्रसिद्‍ध धातु -- इरुंपु

लौ (स्‍त्री.) आग की लपट, ज्वाला -- ज्वाल

लौ (स्‍त्री.) लगन, धुन -- तात्पर्यम्

लौकिक (वि.) सांसारिक -- लौकिकम्

लौटना (अ.क्रि.) वापस आना या जाना -- मटङ्ङुक

लौटना (अ.क्रि.) पीछे की ओर घूमना, मुड़ना -- पिंतिरियुक, मटङ्ङुक

वंश (पुं.) जीव या प्राणी की संतान, परंपरा, कुल -- वंशम्

वंशज (पुं.) वंश विशेष में उत्पन्‍न संतान -- वंशजन् पिन्मुर-क्‍कारन्

वंशावली (स्‍त्री.) किसी वंश में उत्पन्‍न पुरुषों की पूर्वोत्‍तर क्रम सूची -- वंशावलि

वकालत (स्‍त्री.) वकील का काम या पेशा -- वक्‍कील्पणि

वकालत (स्‍त्री.) किसी के पक्ष का किया जाने वाला मंडन, पक्ष समर्थन -- वक्‍कालत्‍तु

वचन-बद्‍ध (वि.) जिसने किसी को कोई काम करने या न करने का वचन दिया हो -- वाक्कु कोटुत्‍तु

वध (पुं.) अस्‍त्र-शस्‍त्र से की जाने वाली हत्या -- वधम्

वधू (स्‍त्री.) ऐसी कन्या, जिसका विवाह हो रहा हो, अथवा हाल में हुआ हो, दुलहन -- वधु

वधू (स्‍त्री.) पत्‍नी -- पत्‍नि, भार्य

वनवास (पुं.) वन का निवास, जंगल में रहना -- वनवासम्

वनस्पति (स्‍त्री.) जमीन से उगने वाले पेड़, पौधे, लताएँ आदि -- सस्यवर्गम्, वनस्पति

वनिता (स्‍त्री.) औरत, स्‍त्री -- वनित

वयस्क (वि.) पूर्ण शारीरिक विकास प्राप्‍त, प्रौढ़ -- पूर्णवळर्च्‍च ऐत्‍तिय

वयस्क (वि.) विधिक दृष्‍टि से आयु विशेष का वह व्यक्‍ति, जिसे निर्वाचन में मत देने, अपनी संपत्‍ति की व्यवस्था करने, कानूनन विवाह करने आदि का अधिकार प्राप्‍त होता है, बालिग -- प्रायपूर्त्‍तियाय

वर (पुं.) कन्या के विवाह के लिए उपयुक्‍त पात्र -- वरन्

वर (पुं.) नव विवाहित स्‍त्री पति, दुल्हा -- पुतुमाप्पिळ, नवविवा-हितन्

वर (पुं.) वरदान -- वरम्

वरदान (पुं.) देवता, महापुरुष आदि के द्‍वारा दिया हुआ वर -- वरदानम्, अनुग्रहम्

वर्ग (पुं.) स्वजातीय या समान-धर्मियों का समूह, श्रेणी -- समूहम्

वर्ग (पुं.) कुछ विशिष्‍ट कार्यों के लिए बना लोगों का समूह, दल -- वर्गम्

वर्गीकरण (पुं.) गुण-धर्म, रंग-रूप, आकार-प्रकार आदि के आधार पर वस्तुओं आदि के भिन्‍न-भिन्‍न वर्ग बनाना -- वर्गीकरणम्

वर्णन (पुं.) किसी विशिष्‍ट अनुभूति, घटना, दृश्य, वस्तु, व्यक्‍ति आदि के संबंध में विस्तारपूर्ण कथन -- वर्णन

वर्णमाला (स्‍त्री.) किसी लिपि के वर्णों या अक्षरों की यथाक्रम सूची -- अक्षरमाल, वर्णमाल

वर्तमान (वि.) जो इस समय अस्तित्व या सत्‍ता में हो अथवा लागू हो -- वर्तमानम् इन्‍नत्‍ते

वर्तमान (वि.) उपस्थित, प्रस्तुत, विद्‍यमान -- NA

वर्षगाँठ (स्‍त्री.) जन्म की तिथि के बाद प्रतिवर्ष पड़ने वाला दिवस, जन्मदिन, सालगिरह -- पिरन्‍नाळ्, जन्म दिनम्

वसीयत (स्‍त्री.) वह लिखित आदेश, जिसमें मृत्यु के उपरांत उस व्यक्‍ति की संपत्‍ति के वारिस का वर्णन हो -- मरणपत्रम्, ओस्यत्‍तु

वसीयत (स्‍त्री.) वसीयत-नामा, इच्छापत्र -- मरण पत्रम्, ओस्यत्‍तु

वसुंधरा (स्‍त्री.) पृथ्वी -- भूमि, वसुंधर

वसूली (स्‍त्री.) वसूल करने की क्रिया या भाव, उगाही -- वसूल्, पिरिवु

वस्तु (स्‍त्री.) गोचर पदार्थ, चीज -- वस्तु

वस्‍त्र (पुं.) ऊन, रुई, रेशम आदि के कपड़े -- वस्‍त्रम्

वह (सर्व.) बातचीत में दूर स्थित या परोक्ष व्यक्‍ति या पदार्थ को संकेत का शब्द -- अवन्, अवळ्, अतु, आ

वहाँ (अव्य.) उस स्थान में, -- अविटे

वांछनीय (वि.) जिसकी वांछा या कामना की गई हो या की जाने वाली हो -- आग्रहिच्‍च

वांछित (वि.) चाहा हुआ, इच्छित -- आग्रहिच्‍च

वाङ्‍मय (पुं.) लिपिबद्‍ध विचारों का समस्त संग्रह या समूह, साहित्य -- साहित्यम्, वाङ्‍मयम्

वाणिज्य (पुं.) बड़े पैमाने पर होने वाला व्यापार -- वाणिज्यम्, व्यापारम्

वाणी (स्‍त्री.) मुँह से निकलने वाली सार्थक बात, वचन -- वचनम्, स्वरम्

वाणी (स्‍त्री.) जिहवा, जीभ -- नाक्कु, जिहव

वाणी (स्‍त्री.) सरस्वती -- सरस्वति

वातानुकूलन (पुं.) तापमान नियंत्रक उपकरण -- वातानुकूलने, ऐयर् कंडिशनिंग

वातावरण (पुं.) वायु की वह राशि, जो पृथ्वी, ग्रह आदि पिंडों को चारों ओर से घेरे रहती है, वायुमंडल -- अंतरीक्षम्

वातावरण (पुं.) परिस्थिति, पर्यावरण -- चुट्‍टुपाटु

वात्सल्य (पुं.) माता-पिता का बच्‍चों के प्रति नैसर्गिक प्रेम -- वात्सल्यम्

वाद-विवाद (पुं.) तर्क-वितर्क, खंडन-मंडन, वाद-विवाद -- वादम्, तर्कम्

वादी (पुं.) वह, जो न्यायालय में किसी के विरुद्‍ध कोई अभियोग उपस्थित करे, फरियादी -- वादि

वायु (स्‍त्री.) हवा, पवन -- वायु

वायुमार्ग (पुं.) हवाई मार्ग, विमान मार्ग -- विमान मार्गम्

वायु सेना (स्‍त्री.) वायुमार्गों की रक्षा करने वाली सेना, हवाई सेना -- व्योमसेन

वार्तालाप (पुं.) बातचीत, कथोपकथन, संवाद -- संभाषणम्

वार्षिक (वि.) प्रतिवर्ष होने वाला, एक वर्ष के बाद होने वाला -- वार्षिकम्, आण्टोटाण्टु

वार्षिक (वि.) एक वर्ष तक चलता रहने वाला -- वार्षिकम्

वाष्प (पुं.) भाप -- बाष्पम्, नीरावि

वास्तविक (वि.) जो वास्तव में हो, यथार्थ, सत्य -- वास्तवम्, यथार्थम्

वाहन (पुं.) सवारी, यान -- वाहनम्

विकराल (वि.) भीषण आकृति वाला, डरावना -- भयंकरम्

विकल (वि.) बेचैन, व्याकुल -- व्याकुलन्

विकास (पुं.) उन्‍नति, प्रसार, अभिवृद्‍धि -- विकासम्

विक्रम (पुं.) पौरुष, बल, वीरता, पराक्रम -- पराक्रमम्

विख्यात (वि.) प्रसिद्‍ध, मशहूर -- विख्यातन्, विख्यातम्, प्रसिद्‍धम्

विचार (पुं.) सोचने-समझने की क्रिया या भाव, मनन, चिंतन -- विचारम्

विचार (पुं.) मत, राय, धारणा -- अभिप्रायम्

विचार विमर्श (पुं.) विचारों का आदान-प्रदान, सलाह-मशवरा -- आशय विनिमयम्

विचित्र (वि.) साधारण से भिन्‍न, अद्‍भुत, अनोखा -- विचित्रम्, अद्‍भुतम्

विजय (स्‍त्री.) शत्रु या प्रतिस्पर्धी को हराना, जीत -- विजयम्

विजय (स्‍त्री.) सफलता, कामयाबी -- साफल्यम्

विजेता (पुं.) जीतने वाला, विजयी -- विजेतावु

विज्ञान (पुं.) आविष्कृत सत्यों तथा प्राकृतिक नियमों पर आधारित क्रमबद्‍ध तथा व्यवस्थित ज्ञान -- सयन्सॅ, शास्‍त्रम्

विज्ञापन (पुं.) प्रचार तथा बिक्री आदि के उद्‍देश्य से वस्तु के गुण, कार्य-पद्‍धति बताते हुए पत्रिकाओं आदि में प्रकाशित कराई जाने वाली सूचना -- परस्यम्

विज्ञापन (पुं.) प्रचार आदि के उद्देश्य से बाँटी जाने वाली सामग्री, इश्तहार -- नोट्‍टीसं

विडंबना (स्‍त्री.) क्रूर, परिहास -- क्रूर विनोदम्

विडंबना (स्‍त्री.) असंगति -- वैलक्षण्यम्, पोरुत्‍तमिल्लाय्म

वितरण (पुं.) बाँटना, देना -- वितरणम्

विदूषक (पुं.) अपने विचित्र वेश, चेष्‍टा, बातचीत आदि से दूसरों की नकल उतार कर लोगों को हँसाने वाला, मसखरा, नाटकों में इस प्रकार का पात्र -- विदूषकन्

विदेश (पुं.) दूसरा देश, परदेश -- विदेशम्

विद्‍या (स्‍त्री.) अध्ययन, शिक्षा आदि से अर्जित किया जाने वाला ज्ञान -- विद्‍या, ज्ञानम्

विद्‍या (स्‍त्री.) किसी तथ्य या विषय का विशिष्‍ट और व्यवस्थित ज्ञान -- विज्ञानम्

विद्‍यालय (पुं.) शिक्षण संस्थान, स्कूल, पाठशाला -- विद्‍यालयम्

विद्‍युत (स्‍त्री.) बिजली -- वैद्‍युति

विद्रोह (पुं.) राज्य या शासन के विरुद्‍ध किया जाने वाला आचरण और व्यवहार, उपद्रव -- विप्ळवम्

विधर्मी (पुं.) अपने धर्म के विपरीत आचरण करने वाला, धर्म-भ्रष्‍ट -- विधर्मि

विधर्मी (पुं.) दूसरे धर्म का अनुयायी -- अन्य-मतस्थन्

विनती (स्‍त्री.) विनीत भाव से की जाने वाली प्रार्थना, अनुनय-विनय -- विनयम्, प्रार्थन, अपेक्ष

विनय (स्‍त्री.) विनम्रता और सौजन्य -- विनयम्

विनय (स्‍त्री.) नम्रतापूर्वक की जाने वाली प्रार्थना या विनती -- अपेक्ष

विनीत (वि.) जिसमें विनय हो, विनयी, नम्र, -- विनीतन्

विनोद (पुं.) मन-बहलाव, मनोरंजन -- विनोदम्

विनोद (पुं.) हँसी-ठट्‍ठा -- कळि-तमाश

विपक्ष (पुं.) विरोधी पक्ष या दल -- प्रतिपक्षम्

विपुल (वि.) संख्या या परिमाण में बहुत अधिक -- विपुलम्

विमल (वि.) मल-रहित, निर्मल, साफ -- पवित्रम्, स्वच्छम्

विमोचन (पुं.) बंधन आदि खोलकर मुक्‍त करना, छुड़ाना या छोड़ना -- विमोचि-प्पिक्‍कल्

विमोचन (पुं.) प्रकाशनोद्‍घाटन, लोकार्पण -- प्रकाशनम्

वियोग (पुं.) प्रेमियों का एक-दूसरे से बिछुड़ना -- वियोगम्, विरहम्

वियोग (पुं.) उक्‍त अवस्था का कष्‍ट -- विरह दु:खम्

विराट (वि.) बहुत बड़ा या व्यापक -- विराटम्, व्यापकम्

विराम (पुं.) क्रिया, गति, चाल आदि में होने वाला अटकाव, ठहराव -- विरामम्

विराम (पुं.) वाक्य की समाप्‍ति पर लगाया जाने वाला रुकने का चिहन, पूर्णविराम -- पूर्ण विरामम्, कुत्‍तु

विराम (पुं.) विश्राम, आराम -- विश्रमम्

विरोध (पुं.) कार्य या प्रयत्‍न को रोकने की कोशिश -- तटस्सप्पे-टुत्‍तल्-ऐतिर्प्पु

विलंब (पुं.) औचित्य से अधिक समय, देरी -- विळंबम्

विलय (पुं.) एक पदार्थ का अथवा राज्य का किसी दूसरे पदार्थ या राज्य में घुलना-मिलना, विलीन होना -- लयनम्

विलय (पुं.) सृष्‍टि का नष्‍ट होकर मूल तत्वों में मिल जाना, प्रलय अथवा ध्वंस, नाश -- विलयम्

विलास (पुं.) सुख-सुविधाओं का यथोचित मात्रा से अधिक उपभोग -- आडंबरम्

विलास (पुं.) विषय भोग -- क्रीडा-विलासम्

विलीन (वि.) जो अपनी स्वतंत्र सत्‍ता खोकर दूसरे में मिल गया हो -- अलिञ्ञ, विलयम् प्रापिच्‍च

विलीन (वि.) गायब, लुप्‍त, अदृश्य -- काणाताय

विलोम (वि.) विपरीत क्रम से होने वाला -- विलोमम्

विलोम (वि.) विपरीत अर्थ वाला -- विपरीतार्थकम्

विवश (वि.) मजबूर, बाध्य, लाचार -- निर्बधितन्, परवशन्

विवाद (पुं.) कहा-सुनी, तकरार -- विवादम्

विवाद (पुं.) पारस्परिक मतभेद -- अभिप्राय भेदम्

विवाह (पुं.) शादी, पाणिग्रहण -- विवाहम्

विवाह (पुं.) उक्‍त के अवसर पर होने वाला उत्सव या धार्मिक कृत्य -- विवाहाघोषम्

विवेक (पुं.) सत् और असत् के विवेचन निर्णय करने वाली बुद्‍धि, सुबुद्‍धि -- विवेकम्

विशाल (वि.) बड़ा, बृहद् -- विशालम्

विशाल (वि.) भव्य, शानदार -- गंभीरमाय

विशिष्‍ट (वि.) (वस्तु) जिसमें औरों की अपेक्षा कोई बड़ी विशेषता हो -- विशिष्‍टम्

विशिष्‍ट (वि.) (व्यक्‍ति) जिसे अन्यों की अपेक्षा अधिक आदर, मान आदि प्राप्‍त हो -- विशिष्‍ट व्यक्‍ति

विशेष (वि.) जिसमें औरों की अपेक्षा कोई नई बात अथवा कुछ अलग हो, विशेषतायुक्‍त -- प्रत्येकमाय

विशेष (वि.) विचित्र, विलक्षण -- असाधारण-माय, विशेष प्पेट्‍ट

विश्राम (पुं.) आराम, चैन, सुख -- विश्रमम्, शांति

विष (पुं.) जहर -- विषम्

विषम (वि.) जो सम अर्थात् समान या बराबर न हों, असमान -- तुल्यमल्‍लात्‍त

विषम (वि.) जो (संख्या) दो से भाग देने पर पूरी न बँटे -- विषम संख्य, ओट्‍ट संख्य

विषम (वि.) (कार्य, स्थिति या विषय) जो कठिन या विकट हो -- प्रयास-मुळ्ळ, विषम-मुऴळ

विषय-सूची (स्‍त्री.) विषयों की अनुक्रमणिका या सूची -- विषयानुक्र-मणिक, विषय विवरम्

विसंगति (स्‍त्री.) संगति का न होना, असंगति -- असंगति, युक्‍तिहीनत

विस्फोट (पुं.) एकत्र गैस, बारूद आदि का अग्‍नि या ताप के कारण जोर का शब्द करके बाहर निकल पड़ना -- विस्फोटनम्

वे (सर्व.) वह’ का बहुवचन रूप -- अवर, अव, आ

वेग (पुं.) गति या चाल की तीव्रता या तेजी, शीघ्रता -- वेगम्

वेतन (पुं.) तनख्वाह, पगार -- शंपळम्, वेतनम्

वेदवाक्य (पुं.) ऐसा वाक्य या कथन, जिसकी सत्यता असंदिग्ध हो -- वेदवाक्यम्

वेदी (स्‍त्री.) मांगलिक या शुभ कार्य के लिए तैयार किया हुआ चौकोर स्थान, वेदिका -- वेदि

वेशभूषा (स्‍त्री.) पहनने के कपड़े, पोशाक, पहनावा -- वेषालंकारम्, उटुत्‍तुकेट्‍टु

वैज्ञानिक (पुं.) विज्ञान का ज्ञाता, विज्ञानवेत्‍ता -- शास्‍त्रज्ञन्

वैज्ञानिक (वि.) विज्ञान-संबंधी -- शास्‍त्रीयम्

वैर (पुं.) घोर शत्रुता -- वैरम्, शत्रुत

वैश्य (पुं.) हिंदुओं में तीसरे वर्ण का व्यक्‍ति, जिसका मुख्य कर्म व्यापार कहा गया है -- वैश्यन्

व्यंग्य (पुं.) शब्द की व्यंजना शक्‍ति द्‍वारा निकलने वाला अर्थ, कटाक्ष, ताना -- मुळ्ळुवाक्कु, व्यंग्यम्

व्यंग्य (पुं.) विडंबना -- विलक्षणत्वम्, वैपरीत्यम्

व्यंग्य-चित्र (पुं.) किसी घटना, बात, व्यक्‍ति आदि की हँसी उड़ाने के उद्‍देश्य से बनाया गया उपहासात्मक तथा सांकेतिक चित्र -- कार्टूण्, हास्यचित्रम्

व्यंजना (स्‍त्री.) व्यंग्यार्थ-बोधक, शब्द की तीन प्रकार की शक्‍तियों में से एक -- व्यंजन

व्यंजना (स्‍त्री.) व्यंग्यार्थ -- व्यंग्यार्थम्

व्यक्‍त (वि.) प्रकट, प्रत्यक्ष -- व्यक्‍तम्

व्यक्‍ति (पुं.) मनुष्य, आदमी -- व्यक्‍ति

व्यक्‍तिगत (वि.) व्यक्‍ति विशेष से संबंधित -- व्यक्‍तिपरम्

व्यथा (स्‍त्री.) उग्र शारीरिक या मानसिक पीड़ा -- व्यथ, वेदन

व्यय (पुं.) खर्च -- चिलवु

व्यय (पुं.) उपभोग आदि में आने के कारण किसी चीज का होने वाला क्षय, नाश या लोप -- क्षयम्

व्यवसाय (पुं.) जीविका-निर्वाह का साधन, पेशा, व्यापार -- तोऴिल्

व्यवस्था (स्‍त्री.) प्रबंध, इंतजाम -- व्यवस्थ, एर्प्पाडु

व्यवस्था (स्‍त्री.) ठीक अवस्था, अच्छी हालत -- नल्‍ल निल

व्यष्‍टि (स्‍त्री.) समष्‍टि का एक स्वतंत्र अंग, व्यक्‍ति -- व्यष्‍टि

व्यस्त (वि.) कार्य आदि में लगा हुआ अथवा उलझा हुआ -- तिरक्कुळ्ळ

व्याकुल (वि.) बेचैन, व्यग्र, विकल -- व्याकुलन्

व्याकुल (वि.) उत्कंठित, उत्सुक -- उत्सुकन्

व्याख्या (स्‍त्री.) सविस्तार वर्णन, विवेचन -- व्याख्यानम्

व्याख्या (स्‍त्री.) अर्थ का स्पष्‍टीकरण, टीका -- टीक

व्याघ्र (पुं.) बाघ, शेर -- पुलि, कटुव, व्याघ्रम्

व्याधि (स्‍त्री.) शारीरिक कष्‍ट, बीमारी -- व्याधि, रोगम्

व्यापक (वि.) चारों ओर फैला हुआ, विस्तृत -- व्यापकम्

व्यापक (वि.) वृहद् -- बृहत्‍ताय

व्यापार (पुं.) रोजगार, तिजारत -- व्यापारम्, कच्‍चवटम्

व्यायाम (पुं.) कसरत -- व्यायामम्, कसर्त्‍तु

व्युत्पत्ति (स्‍त्री.) मूल, उद्‍गम या उत्पत्‍ति का स्थान -- व्युत्पत्‍ति

व्योम (पुं.) आकाश, अंतरिक्ष, आसमान -- आकाशम्, व्योमम्

शंका (स्‍त्री.) संशय, संदेह, शक -- संशयम्, शंक

शंका (स्‍त्री.) भय, अंदेशा, खटका -- भयम्, आशंक

शंख (पुं.) समुद्र में पैदा होने वाले एक जंतु का कड़ा और सफेद खोल -- शंखु

शंख (पुं.) दस खरब अथवा एक लाख करोड़ की संख्या -- शंखं

शकुन (पुं.) विशिष्‍ट पशु, पक्षी, व्यक्‍ति, वस्तु, व्यापार आदि के देखने-सुनने, होने आदि से मिलने वाली शुभ-अशुभ की पूर्व-सूचना -- शकुनम्

शक्‍कर (स्‍त्री.) चीनी -- पंचसार

शक्‍कर (स्‍त्री.) कच्‍ची चीनी, खाँड -- चक्‍कर

शक्‍ति (स्‍त्री.) पराक्रम, बल, सामर्थ्य -- शक्‍ति

शक्‍ति (स्‍त्री.) दुर्गा -- दुर्गादेवी

शक्‍तिशाली (वि.) बलवान, शक्‍ति संपन्‍न -- शक्‍तिशालि

शताब्दी (स्‍त्री.) सौ वर्षों की अवधि, शती, सदी -- शताब्दम्, नूट्‍टाण्डु

शत्रु (पुं.) वैरी, दुश्मन -- शत्रु

शपथ (स्‍त्री.) सौगंध, कसम -- शपथ

शब्दकोश (पुं.) वह ग्रंथ, जिसमें शब्दों के सम्यक् वर्ण-विन्यास, अर्थ-प्रयोग, पर्याय आदि हों -- निघंटु

शमन (पुं.) बढ़े हुए उपद्रव, कष्‍ट, दोष को दबाने की क्रिया, दमन -- शमनम्

शमन (पुं.) शांति -- समाधानम्

शरण (स्‍त्री.) पनाह, आश्रय, -- शरणम्

शरणार्थी (पुं.) शरण चाहने वाला, असहाय -- निस्सहायन्

शरणार्थी (पुं.) किसी अन्य देश से भागकर शरण लेने के लिए आया हुआ, विस्थापित -- अभयार्थि

शरमाना (अ.क्रि.) झेंपना -- लज्‍जिक्कुक, नाणिक्कुक

शरमाना (अ.क्रि.) लज्‍जित होना -- नाणिक्कुक

शराब (स्‍त्री.) मद्‍य, मदिरा -- मद्‍यम्

शरीर (पुं.) देह, तन -- शरीरम्

शल्य-क्रिया (स्‍त्री.) शारीरिक विकार को दूर करने के लिए की जाने वाली चीर-फाड़ -- ओपरेषन्, शस्‍त्रक्रिय

शव-परीक्षा (स्‍त्री.) मृत व्यक्‍ति के शव की मृत्यु के कारणों की जाँच के लिए की जाने वाली परीक्षा या जाँच (पोस्टमार्टम) -- शव परिशोधन

शस्‍त्र (पुं.) हाथ में रखकर प्रयोग किया जाने वाला हथियार -- आयुधम्

शहद (पुं.) मधु -- मधु, तेन्

शहीद (वि.) अपने धर्म, कर्तव्य-परायणता अथवा देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण देने वाला (मार्टेअर) -- रक्‍तसाक्षि

शांत (वि.) आवेग, चंचलता, वासना अथवा विकास से रहित -- शातंन्

शांत (वि.) नि:शब्द, नीरव, चुप, मौन -- निश्शब्दन्

शांति (स्‍त्री.) नीरवता, सन्‍नाटा, स्तब्धता -- निश्शब्दत

शांति (स्‍त्री.) उत्पात, उपद्रव, कलह आदि से रहित अवस्था, अमन -- समाधानम्

शांति (स्‍त्री.) आराम, चैन -- शांति, सुखम्

शाकाहारी (पुं/वि.) मांस न खाने वाला, निरामिष भोजी -- सस्य भुक्कु

शानदार (वि.) भड़कीला, तड़क-भड़क वाला -- आडंबर-मुळ्‍ळ

शानदार (वि.) ऐश्‍वर्यपूर्ण, उच्‍च कोटि का -- ऐश्‍वर्यपूर्ण-माय

शाप (पुं.) अनिष्‍ट कामना के उद्‍देश्य से कहा गया कथन, बद्‍दुआ -- शापम्

शायद (अव्य.) कदाचित, संभवत: -- ओरु पक्षे

शायिका (स्‍त्री.) शयनिका (स्लीपर) -- स्लीपर्

शालीन (वि.) लज्‍जाशील, शिष्‍ट -- कुलीनन्

शाश्‍वत (वि.) सतत्, स्थायी, नित्य, सनातन -- शाश्‍वतम्

शासक (पुं.) शासन करने वाला व्यक्‍ति, शासन-कर्ता -- भरणाधिकारि

शासन (पुं.) सरकार, हुकूमत -- भरणम्

शासन (पुं.) सरकार या किसी अन्य द्‍वारा नियंत्रण, संचालन, व्यवस्था आदि -- भरणम्

शास्‍त्र (पुं.) धर्म ग्रंथ -- शास्‍त्रम्

शास्‍त्र (पुं.) किसी कला, विद्‍या या विशिष्‍ट विषय का सांगोपांग ग्रंथ, विज्ञान -- शास्‍त्र ग्रंथम्

शिकायत (स्‍त्री.) किसी के दोष या अनुचित काम का किसी के समक्ष किया गया कथन -- पराति

शिकायत (स्‍त्री.) किसी के अनुचित काम के प्रति होने वाला असंतोष -- आक्षेपम्

शिकायत (स्‍त्री.) हल्का शारीरिक कष्‍ट या रोग -- असुखम्

शिकार (पुं.) आखेट, मृगया -- नायाट्‍टु

शिकार (पुं.) आखेट में मारा या पकड़ा गया पशु-पक्षी -- इर

शिक्षा (स्‍त्री.) किसी प्रकार के ज्ञान के सीखने-सिखाने का क्रम, पढ़ाई या उक्‍त प्रकार से प्राप्‍त ज्ञान या विद्‍या -- विद्‍याभ्यासम्

शिक्षा (स्‍त्री.) उपदेश, सबक, नसीहत -- गुणपाठम्

शिखर (पुं.) किसी चीज का सबसे ऊपरी भाग, सिरा, चोटी, कलश, कंगूरा (मंदिर, मकान के संदर्भ में) -- शिखरम्

शिखर (पुं.) पर्वत की चोटी -- कोटुमुटि, शिखरम्

शिथिल (वि.) जो कसकर बँधा न हो, ढीला -- शिथिलमाय अयञ्ञ

शिथिल (वि.) आलसी, सुस्त -- मटियन्, अलसन्

शिथिल (वि.) जिसे कुछ छूट दी गई हो, जिसका पालन दृढ़तापूर्वक न हो -- शिथिलमाय

शिरकत (स्‍त्री.) शरीक होने की अवस्था, क्रिया या भाव, शामिल होना -- पंकेटुक्‍कल्

शिरकत (स्‍त्री.) साझेदारी -- पंकाळित्‍तम्

शिरोमणि (पुं.) सिर या मस्तक पर धारण करने का रत्‍न, चूड़ामणि -- चूडामणि, शिरोरत्‍नम्

शिरोमणि (पुं.) श्रेष्‍ठ पुरुष -- श्रेष्‍ठन्, शिरोमणि

शिरोमणि (वि.) सर्वश्रेष्‍ठ -- सर्वश्रेष्‍ठन्

शिलान्यास (पुं.) नए भवन की नींव के रूप में पत्थर रखना -- तरक्‍क-ल्लिटल्, शिला-स्थापनम्

शिलान्यास (पुं.) नींव रखने का कृत्य या समारोह -- शिलास्थापनम्

शिलालेख (पुं.) पत्थर पर खुदा हुआ लेख -- शिला-लिखितम्

शिलालेख (पुं.) लेख आदि से गुदा हुआ पत्थर -- शिलालिखितम् कोत्‍तिय शिल

शिल्प (पुं.) हस्तकला, दस्तकारी -- करकौशलम्

शिल्प (पुं.) रचना विधान, निर्माण -- शिल्पम्

शिल्प (पुं.) स्थापत्य, वास्तुकला -- स्थापत्यकल

शिल्पकार (पुं.) शिल्पी, कारीगर -- शिल्पि

शिल्पी (पुं.) शिल्प संबंधी काम करने वाला, शिल्पकार -- शिल्पि

शिविर (पुं.) पड़ाव, छावनी -- शिबिरम्, पाळयम्

शिविर (पुं.) खेमा, तंबू -- कूटारम्

शिशु (पुं.) बहुत ही छोटा बच्‍चा -- शिशु, कुञ्ञु

शिष्‍ट (वि.) सभ्य, सज्‍जन -- शिष्‍टत, सत्स्वभावम्

शिष्‍टता (स्‍त्री.) शिष्‍ट होने की अवस्था, गुण या भाव, सौजन्य -- शिष्‍टत, सत्स्वभावम्

शिष्‍टाचार (पुं.) शिष्‍टतापूर्ण आचरण और व्यवहार -- मर्याद

शिष्‍टाचार (पुं.) औपचारिक आचरण -- उपचारम्

शिष्य (पुं.) छात्र, विद्‍यार्थी -- शिष्यन्

शिष्य (पुं.) अनुयायी, चेला -- अनुयायि

शीघ्र (कि. वि) जल्द, अविलंब, तुरंत, फौरन -- शीघ्रम, वेगम्

शीघ्रता (स्‍त्री.) जल्दी -- शीघ्रत

शीघ्रता (स्‍त्री.) तेजी, फुर्ती -- वेगत

शीतल (वि.) ठंडा, सर्द -- शीतलमाय, तणुप्पन्

शीतल (वि.) आवेशरहित, शांत, सौम्य -- तणुप्पन्

शीर्ष (पुं.) किसी चीज का सबसे ऊपरी तथा उन्‍नत सिरा -- मेलट्‍टम्

शीर्ष (पुं.) सिर -- शिरस्सु, तल

शीर्ष (पुं.) ज्यामिति में वह बिंदु, जिस पर दो ओर से दो तिरछी रेखाएँ आकर मिलती हों -- शीर्ष बिंदु

शीर्षक (पुं.) किसी लेख अथवा ग्रंथ आदि के ऊपर दिया जाने वाला नाम, जिससे उनके विषय का कुछ परिचय मिलता है (टाइटल) -- तलक्‍केट्‍टु

शीशा (पुं.) दर्पण, आईना -- कण्णाटि

शुद्‍ध (वि.) पवित्र, निर्मल -- पवित्रम्

शुद्‍ध (वि.) मिलावट रहित, असली -- कलर्प्पि-ल्लात्‍त, तनि

शुद्‍ध (वि.) अशुद्‍धि, गलती या भूल से रहित, ठीक, सही -- शारियाय

शुभ-चिंतक (वि.) किसी की भलाई की सोचने वाला, शुभेच्छु -- अभ्युदय-कांक्षि

शुभागमन (पुं.) मंगलप्रद या सुखद आगमन -- स्वागतम्

शुरु (पुं.) आरंभ, प्रारंभ -- आरंभम्, तुटक्‍कम्

शुल्क (पुं.) वह धन, जो वस्तुओं की उत्पत्‍ति, उपभोग, आयात, निर्यात आदि करने पर कानूनन कर के रूप में देय हो -- चुङ्कम्

शुल्क (पुं.) विशिष्‍ट सुविधा प्रदान करने पर किसी संस्था को दिया जाने वाला धन, फीस -- फीस्

शुल्क (पुं.) चंदा -- वरिसंख्य

शुष्क (वि.) सूखा -- शुष्काम्, उणक्‍क

शुष्क (वि.) सहृदयता एवं कोमलता रहित -- नीरस माय

शून्य (वि.पुं.) रिक्‍त, खाली -- शून्यम्, ओऴिञ्ञ

शून्य (वि.पुं.) गणित में अभाव सूचक चिहन -- पूज्यम्

शूर (वि.पुं.) बहादुर, वीर, सूरमा -- शूरन्, वीरन्

श्रृंखला (स्‍त्री.) क्रम, तारतम्य, माला, पंक्‍ति, कतार -- श्रृंखल, परस्पर

श्रृंखला (स्‍त्री.) जंजीर, सिकड़ी -- चङ्ङल

श्रृंगार (पुं.) सौंदर्य वृद्‍धि के लिए प्रसाधनों द्‍वारा बनाव-सजाव -- अलंकारम्, चमयल्

श्रृंगार (पुं.) साहित्य में एक रस, रसराज -- श्रृंगार रसम्

शेष (वि.) बचा हुआ, बाकी -- बाक्‍कि, शेषम्

शैली (स्‍त्री.) ढंग, तरीका, पद्‍धति -- पद्‍धति

शैली (स्‍त्री.) (साहित्य, कला) रचना अथवा अभिव्यक्‍ति का विशिष्‍ट ढंग -- शैलि

शैशव (पुं.) शिशु होने की अवस्था, गुण या भाव, बचपन -- शैशवम्, कुट्‍टिक्‍कालम्

शोक (पुं.) इष्‍ट वस्तु या आत्मीयजन की मृत्यु के कारण होने वाली मानसिक व्यथा, घोर दुख -- दुखम्, शोकम्

शोध (पुं.) छिपी हुई तथा रहस्यपूर्ण बातों की खोज करना, अन्वेषण -- अन्वेषणम्, गवेषणम्

शोध (पुं.) जाँच, परीक्षण -- परिशोधन, परीक्षणं

शोभा (स्‍त्री.) कांति, चमक -- शोभ

शोषण (पुं.) परोक्ष उपायों से किसी की कमाई या धन धीरे-धीरे अपने हाथ में करना, दुखी करना (एक्सप्लायटेशन) -- चूषणम्

श्रद्‍धांजलि (स्‍त्री.) किसी पूज्य या बड़े व्यक्‍ति के संबंध में श्रद्‍धा और आदरपूर्वक कही जाने वाली बातें -- श्रद्‍धांजलि अर्पिक्कुक

श्रद्‍धा (स्‍त्री.) पूज्य और बड़े लोगों के प्रति आदरपूर्ण भावना, आस्था -- बहुमानम्

श्रम (पुं.) मेहनत, परिश्रम -- प्रयत्‍नम्, परिश्रमम्

श्रम (पुं.) जीविका-निर्वाह या धन-उपार्जन के लिए किया जाने वाला कार्य -- वेल

श्रमदान (पुं.) किसी सामूहिक हित के लिए स्वेच्छा से नि:शुल्क श्रम करना -- श्रमदानम्

श्रमिक (पुं.) शारीरिक श्रम द्‍वारा जीविका चलाने वाला, मजदूर -- तोऴिलाळि

श्राद्‍ध (पुं.) सनातनी हिंदुओं में पितरों या मृत व्यक्‍तियों को प्रसन्‍न कराने के उद्‍देश्य से किया जाने वाला पिंडदान, ब्राहमण-भोज आदि -- श्राद्‍धम्, चात्‍तम्

श्राद्‍ध (पुं.) आश्‍विन मास का कृष्ण पक्ष, जिसमें विशिष्‍ट रूप से उक्‍त प्रकार के कृत्य करने का विधान है, पितृपक्ष -- महाळय पक्ष, श्राद्‍धम्

श्रीमान (श्रीमती) (पुं.) श्री’, पुरुषों के नाम के पूर्व प्रयुक्‍त एक आदर-सूचक विशेषण (स्‍त्री के नाम के पूर्व श्रीमती) -- श्रीमान्, श्रीमति

श्रुतलेख (पुं.) वह लेख, जो किसी के द्‍वारा बोले हुए वाक्यों को सुनकर लिखा जाए -- केट्‍टेळुत्‍तु

श्रेणी (स्‍त्री.) कतार, पंक्‍ति -- श्रेणि, वरि, पंति

श्रेणी (स्‍त्री.) कार्य, योग्यता, आदि के विचार से पदार्थों, व्यक्‍तियों आदि का वर्ग, विभाग या दर्जा -- क्ळासु, तरम्

श्रेय (पुं.) अच्छाई, उत्‍तमता -- श्रेयस्स्

श्रेय (पुं.) मंगल, कल्याण -- मंगळम्, नन्म

श्रेय (पुं.) यश -- कीर्ति

श्रेष्‍ठ (वि.) गुण, मान आदि के विचार से बढ़कर, उत्‍तम, उत्कृष्‍ट -- श्रेष्‍ठम्, उत्कृष्‍टम्

श्रोता (पुं.) सुननेवाला (लिसनर) -- श्रोतावु

श्रोता (पुं.) किसी सभा, नाटक-प्रदर्शन आदि के दर्शक, सुनने वाले या पाठक (बहुवचन में ऑडेयंस) -- सदस्यर्

श्‍लाघनीय (वि.) प्रशंसनीय -- श्‍लाघनीयम्, श्‍लाघ्यम्

श्‍लाघा (स्‍त्री.) प्रशंसा -- श्‍लाकिक्कुक, प्रशंस

श्‍लाघा (स्‍त्री.) चापलूसी -- मुख-स्तुति

श्‍वास (पुं.) प्राणियों का नाक से वायु खींचकर अंदर फेफड़ों या हृदय तक पहुँचाना और फिर बाहर निकालना, साँस -- श्‍वासम्

श्‍वास (पुं.) दमा नामक रोग -- आस्तुम रोगम्, कासम्

श्‍वेत (वि.) धवल, उजला, सफेद, गोरा -- वेळुत्‍त, श्‍वेतम्

श्‍वेत (वि.) निर्मल, स्वच्छ, साफ -- स्वच्छम्, निर्मलम्

षड्‍यंत्र (पुं.) साजिश, कुचक्र -- गूढालोचन

संकट (पुं.) विपत्‍ति, मुसीबत, आफत -- आपत्‍तु, विषम-संधि

संकलन (पुं.) एकत्र करने की क्रिया, संग्रह करना -- संग्रहिक्‍कल, समाहरणम्

संकलन (पुं.) ऐसी साहित्यिक कृति, जिसमें अनेक ग्रंथों या स्थानों से बहुत-सी रचनाएँ इकट्‍ठी करके रखी गई हों -- समाहारम्

संकल्प (पुं.) दृढ़ निश्‍चय, इरादा -- संकल्पम्

संकल्प (पुं.) सभा-समिति में किसी विषय में विचारपूर्वक किया हुआ पक्‍का निश्‍चय (रिजोल्यूशन) -- प्रमेयम्

संकीर्ण (वि.) तंग, संकुचित, अनुदार -- संकीर्णं, इटुङ्ङिय

संकेत (पुं.) अभिप्राय सूचक अंगचेष्‍टा, इशारा -- आङ्‍ग्यम्

संकेत (पुं.) चिहन, निशान -- चिहनम्, अटयाळम्

संकोच (पुं.) सिकुड़ने की क्रिया या भाव -- चुरुङ्ङल्

संकोच (पुं.) झिझक, हिचक -- सङ्कोचम्

संक्राति (स्‍त्री.) सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में जाना -- संक्रांति, संक्रमम्

संक्राति (स्‍त्री.) वह दिन, जिसमें सूर्य का उक्‍त प्रकार का संचार होता है -- संक्रांति

संक्रामक (वि.) एक से दूसरे में संक्रमण करने वाला, छूत आदि से फैलने वाला (रोग) (कान्टेजियस) -- संक्रामकम्, पकरुन्‍न

संक्षिप्‍त (वि.) छोटा किया हुआ लेख, पुस्तक आदि का रूप, सार, संक्षेप -- संक्षिप्‍तम्. चुरुङ्ङिय

संक्षेप (पुं.) लेख आदि का काट- छाँटकर छोट किया हुआ रूप, सार -- संक्षेपम्, चुरुक्कम्, सारांशम्

संख्या (स्‍त्री.) गिनती, तादाद, गणना सार -- संख्य, अक्‍कम्

संगठन (पुं.) कार्य विशेष की सिद्‍धि के लिए निर्मित कोई संस्था -- संघटन

संगति (स्‍त्री.) मेल-मिलाप, संग, साथ, सोहबत -- कूट्टु

संगति (स्‍त्री.) सामंजस्य, उपयुक्‍तता -- सामंजस्यम्, योजिप्पु

संगीत (पुं.) ध्वनियों या स्वरों का कुछ विशिष्‍ट लय में होने वाला प्रस्फुटन (म्यूजिक) -- संगीतम्

संगोष्‍ठी (स्‍त्री.) किसी निर्धारित विषय पर आमंत्रित विद्‍वानों की चर्चा तथा उनका निबंध-पाठ -- चर्चा सम्मेळनम्

संग्रहालय (पुं.) वह स्थान, जहाँ विशेष महत्व की वस्तुओं का संग्रह किया गया हो (म्यूजियम) -- संग्रहालयम्, म्यूसियम, काऴ्‍च-बंग्ळावु

संग्राम (पुं.) युद्‍ध, लड़ाई, समर -- समरम्, युद्‍धम्

संघटन (पुं.) कार्य विशेष की सिद्‍धि के लिए निर्मित कोई संस्था -- संघटन

संघटन (पुं.) किसी चीज के विभिन्‍न अवयवों को जोड़कर उसे प्रतिष्‍ठित करना, रचना -- घटन, ओन्‍निचु चेर्कुकु

संघर्ष (पुं.) स्पर्धा, होड़ -- मत्सरं

संघर्ष (पुं.) कठिनाइयों या प्रबल विरोधी शक्‍तियों को दबाने के लिए प्राणपण से की जाने वाली चेष्‍टा -- संघर्षम्

संचय (पुं.) चीजें इकट्‍ठी करने की क्रिया या भाव -- शेखरणम्

संचय (पुं.) इकट्‍ठी की हुई चीजों का ढेर या राशि -- संचयम्, शेखरम्

संचार (पुं.) गमन, चलना, चलाना -- संचरिक्‍कल्

संचार (पुं.) संदेश, समाचार तथा सामान आदि भेजने की क्रिया, प्रकार और साधन -- वार्ताविनिमयं

संचालक (वि.) चलाने या गति देने वाला (कंडक्‍टर) -- नटत्‍तिप्पु-कारन्, कण्डक्‍टर्

संचालक (पुं.) वह प्रधान अधिकारी, जो किसी कार्य, विभाग, संस्था आदि को चलाने की सारी व्यवस्था करता हो, निदेशक -- मानेजर्, मेधावि

संतति (स्‍त्री.) संतान, बाल-बच्‍चे, औलाद -- संतति

संताप (पुं.) अग्‍नि, धूप आदि का बहुत तीव्र ताप -- कोटुंचूटु

संताप (पुं.) बहुत तीव्र मानसिक क्लेश या पीड़ा -- संतापम्, दुखम्

संतुलन (पुं.) वह स्थिति, जिसमें सभी अंग बराबर के हों -- संतुलनम्

संतुलन (पुं.) तोलते समय दोनों पलड़ों का बराबर होना -- सममान ऍडै

संतुष्‍ट (वि.) जिसको संतोष हो गया हो, तृप्‍त -- संतृप्‍तन्

संतुष्‍ट (वि.) जो समझाने-बुझाने से राजी हो गया हो -- अनुकूलिच्‍च

संतुष्‍टि (स्‍त्री.) संतुष्‍ट होने की क्रिया या भाव, तृप्‍ति -- तृप्‍ति

संतुष्‍टि (स्‍त्री.) संतोष -- तृप्‍ति

संतोष (पुं) वह मानसिक अवस्था, जिसमें व्यक्‍ति प्राप्‍त होने वाली वस्तु को यथेष्‍ट समझता है और उससे अधिक की कामना नहीं करता -- संतृप्‍ति

संतोष (पुं) सब्र, धीरज, इतमीनान -- क्षम, समाधानम्

संतोषजनक (वि.) संतोष देने वाला, संतोषप्रद -- तृप्‍ति करम्

संतोषजनक (वि.) पर्याप्‍त, यथेष्‍ट, काफी -- यथेष्‍टम्

संदर्भ (पुं.) पुस्तक, लेख आदि में वर्णित प्रसंग, विषय आदि, जिसका विचार या उल्लेख हो, प्रसंग -- संदर्भम्

संदेश (पुं.) समाचार, पैगाम, खबर -- संदेशम्

संन्यास (पुं.) पूरी तरह से छोड़ना, परित्याग करना -- संन्यासम्

संन्यास (पुं.) चतुर्थ आश्रम, (हिंदुओं का) जिसमें सब प्रकार के सांसारिक संबंध छोड़कर मनुष्य त्यागी और विरक्‍त हो जाता है -- संन्यासम्

संन्यासी (पुं.) जिसने संन्यास आश्रम ग्रहण किया हो -- संन्यासि

संन्यासी (पुं.) त्यागी और विरक्‍त -- विरक्‍तन्

संपन्‍न (वि.) पूरा किया हुआ, पूर्ण, मुकम्मल -- निरवेरिय

संपन्‍न (वि.) किसी गुण या वस्तु से युक्‍त -- चेर्न्‍न

संपन्‍न (वि.) खुशहाल, धनी, अमीर -- संपन्‍नन्, धनिकन्

संपर्क (पुं.) मेल, संयोग -- संपर्कम्

संपर्क (पुं.) आपस में होने वाला किसी प्रकार का लगाव, वास्ता या संसर्ग -- संबंधम्, बंधम्

संपर्क (पुं.) स्पर्श -- स्पर्शम्

संपर्क भाषा (स्‍त्री.) वह भाषा, जिससे विभिन्‍न देशों अथवा प्रदेशों के लोग आपस में सूचना, विचारों आदि का आदान-प्रदान करते हैं -- संपर्क भाष, बंधभाष

संपादक (पुं.) वह, जो किसी पुस्तक, सामयिक पत्र आदि के सब लेख या विषय अच्छी तरह ठीक करके उन्हें प्रकाशन के योग्य बनाता है (एडिटर) -- पत्राधिपर्, ऐडिटटर्

संपादकीय (वि.) संपादक संबंधी या संपादक का -- पत्राधिपरुटे, अग्रलेखनम्/ऐडिटटोरियल्

संपादकीय (पुं.) संपादक द्‍वारा लिखी हुई टिप्पणी या अग्रलेख -- NA

संपादन (पुं.) पूरा करना, प्रस्तुत करना -- निरवेट्‍टल्

संपादन (पुं.) किसी पुस्तक का विषय आदि ठीक करके उन्हें प्रकाशन के योग्य बनाना (एडिटिंग) -- एडिट्‍टु चेय्युक

संपूर्ण (वि.) आदि से अंत तक सब, सारा, कुल, समूचा -- संपूर्ण, मुळुवन्

संपूर्ण (वि.) पूरा या समाप्‍त किया हुआ -- पूर्ण-माक्‍किय

संप्रदाय (पुं.) एक ही तरह का मत या सिद्‍धांत रखने वाले लोगों का समूह या वर्ग -- वर्गम्

संप्रदाय (पुं.) परंपरा से चला आया ज्ञान या सिद्‍धांत, प्रथा, परिपाटी या रीति -- मामूल, पारंपर्चमाय

संप्रदाय (पुं.) कोई विशिष्‍ट धार्मिक मत या सिद्‍धांत, धर्म -- मतम्, प्रस्थानम्

संबंध (पुं.) रिश्ता, नाता -- बंधुत्वम्

संबंध (पुं.) आपस में होने वाली घनिष्‍ठता या मेल-जोल -- बंधम्, अटुप्पम्

संभव (वि.) जो किया जा सकता हो, या हो सकता हो, मुमकिन -- संभवि-क्‍कावुन्‍न

संभालना (सम्हालना) (स.क्रि) पालन करना, सहारा देना -- पालिक्कुक, सहायिक्कुक

संभालना (सम्हालना) (स.क्रि) प्रबंध करना, भार उठाना -- एर्पार्डु चेय्युक

संभालना (सम्हालना) (स.क्रि) गिरते हुए के बीच में रोकना -- ताङ्ङुक

संयुक्‍त (वि.) किसी के साथ जुड़ा, मिला, लगा या सटा हुआ -- चेर्न्‍न

संयुक्‍त (वि.) जिसके दो या अधिक संयुक्‍त भागीदार हों, साझा -- कूट्‍टाय

संरक्षक (वि.) देखभाल, निरीक्षण करने वाला, आश्रयदाता, अभिभावक -- संरक्षकन्, आश्रय-दातावु

संरक्षक (पुं.) संस्थाओं आदि में वह बड़ा और मान्य व्यक्‍ति जो उसके प्रधान पोषकों और समर्थकों में माना जाता है -- रक्षाधिकारि, पेट्रण्

संरक्षक (पुं.) वह, जिसके निरीक्षण या देख-रेख में किसी वर्ग के कुछ लोग रहते हों -- रक्षाकर्तावु, संरक्षकन्

संरक्षण (पुं.) अच्छी और पूरी तरह से रक्षा करने की क्रिया या भाव, पूरी देख-रेख और हिफांजत (कस्टडी) -- सूक्षिप्पु

संरक्षण (पुं.) अपने आश्रय में रखकर पालना-पोसना, आश्रय -- आश्रयम्, संरक्षणम्

संरचना (स्‍त्री.) कोई वस्तु ऐसी बनाने की क्रिया या भाव जिसमें अनेक प्रकार के अंगो-उपांगों को प्रयोग करना पड़ता है। -- घटन

संरचना (स्‍त्री.) उक्‍त प्रकार से बनी हुई कोई चीज (स्ट्रक्‍चर) -- संरचन

संवाद (पुं.) बातचीत, वार्तालाप -- संभाषणम्

संवाद (पुं.) खबर, समाचार -- वार्त्‍त

संवाददाता (पुं.) संवाद या समाचार भेजने वाला -- पत्र प्रतिनिधि

संवाददाता (पुं.) आजकल वह व्यक्‍ति, जो समाचारपत्रों में छपने के लिए स्थानिक घटनाओं का विवरण लिखकर भेजता हो (रिपोर्टर) -- रिपोर्टर, वार्ता लेखकन्

सँवारना (स.क्रि) सुसज्‍जित करना, सजाना -- अलंक-रिक्‍कुक

सँवारना (स.क्रि) सुधारना, मरम्मत करना -- नन्‍नाक्कुक

संवाहक (पुं.) एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने वाला, सुचालक, वहनक (करियर) -- वाहकन्

संविधान (पुं.) राजनीति और शासनतंत्र में कानून के रूप में बने वे मौलिक नियम और सिद्‍धांत जिनके अनुसार किसी राष्‍ट्र, राज्य या संस्था का संघटन और संचालन होता है (कान्स्टियूशन) -- भरण घटन

संवेग (पुं.) मन में होने वाली खलबली, उद्‍विग्‍नता, घबराहट, डर -- आवेशम्

संवेदना (स्‍त्री.) मन में होने वाला बोध या अनुभूति, अनुभव -- संवेदनम्

संवेदना (स्‍त्री.) दुख या सहानुभूति प्रकट करने की क्रिया या भाव (कंडोलेंस) -- अनुशोचनम्

संशय (पुं.) संदेह, शक, अनिश्‍चय -- संशयं

संशय (पुं.) खतरे या संकट की आशंका या संभावना -- आशंक

संशोधन (पुं.) त्रुटि, दोष आदि दूर करके ठीक और दुरुस्त करना, सुधार -- तिरुत्‍तु

संशोधन (पुं.) शुद्‍ध करना या साफ करना -- शरियाक्‍क, शुद्‍धीकरणम्

संस्करण (पुं.) पुस्तकों आदि की एक बार में एक ही तरह की होने वाली छपाई, आवृत्‍ति (एडीशन) -- पतिप्पु, संस्करणम्

संस्कार (पुं.) किसी वस्तु को ठीक करके उचित रूप देने की क्रिया, परिष्कार -- परिष्करणम्

संस्कार (पुं.) पूर्व जन्म के आचार व्यवहार, पाप-पुण्य आदि का आत्मा पर पड़ा वह प्रभाव, जो मनुष्य के परवर्ती जन्म में उसके कार्यों, प्रवृत्‍तियों आदि के रूप में प्रकट होता है -- संस्कारम्

संस्कार (पुं.) हिंदुओं में जन्म से मरण तक होने वाले वे विशिष्‍ट धार्मिक कृत्य जो द्‍विजातियों के लिए विहित हैं -- संस्कारम् (षोडश संस्कारम्), चडङडु

संस्कृति (स्‍त्री.) आचरणगत परंपरा, सभ्यता (कल्चर) -- संस्कारम्

संस्तुति (स्‍त्री.) अच्छी या पूरी तरह से होने वाली तारीफ या स्तुति -- प्रशंस

संस्तुति (स्‍त्री.) अनुशंसा, सिफारिश -- शुपार्श

संस्था (स्‍त्री.) किसी उद्‍देश्य के लिए स्थापित संगठन -- स्थापनम्

संस्थान (पुं.) साहित्य, कला, विज्ञान आदि की उन्‍नति के लिए स्थापित संस्था या संघटन -- संघटन, इन्स्टिट्‌यूट्

संस्थापक (पुं.) स्थापित करने वाला -- स्थापकन्

संस्थापक (पुं.) नए काम या बात का प्रवर्तन करने वाला, प्रवर्तक -- स्थापकन्, प्रवर्त्‍कव्

संस्थापक (पुं.) किसी संस्था, सभा या समाज की पहले-पहल स्थापना करने वाला -- स्थापकन्

संस्मरण (पुं.) किसी व्यक्‍ति के जीवन की महत्वपूर्ण और मुख्य घटनाओं या बातों का उल्लेख या कथन -- अनुस्मरणम्

संस्मरण (पुं.) इष्‍ट देव आदि का बार-बार स्मरण करना या उनका नाम जपना -- इष्‍ट-स्मरणम्, नाम स्मरणम्

संहार (पुं.) ध्वंस, नाश -- संहारम्

संहार (पुं.) बहुत से व्यक्‍तियों की युद्‍ध आदि में एक साथ होने वाली हत्या -- कूट्‍टक्‍कोल

सकपकाना (अ.क्रि.) चौंकना, चकित होना -- ञेट्‍टुक

सकपकाना (अ.क्रि.) घबराना (लज्‍जा आदि के कारण) -- परिभ्र-मिक्कुक

सख्‍त (वि.) कठोर, कड़ा -- कठोरम्, कट्‍टियाय, कटुत्‍त

सख्‍त (वि.) कठिन, मुश्किल -- कठिनम्

सघन (वि.) घना, अविरल, ठोस -- इटतूर्न्‍न

सचमुच (क्रि.वि.) यथार्थत:, वास्तव में -- वास्तवत्‍तिल्

सचमुच (क्रि.वि.) निश्‍चित रूप से, अवश्य -- तीर्च्‍चयायुम्

सच्‍चरित्र (वि.) जिसका चरित्र अच्छा हो, सदाचारी -- सत्स्वभावि, सदाचार-शीलन्

सच्‍चा (वि.) सच बोलने वाला, सत्यवादी -- सत्यवादि

सच्‍चा (वि.) ईमानदार -- सत्यसंधन्

सच्‍चा (वि.) जो नकली या बनावटी न हो, बल्कि असली और वास्तविक हो, जिसमें खोट न हो -- यथार्थमाय, कळ्‍ळ-मिल्लात्‍त

सजनी (स्‍त्री.) सखी, सहेली -- सखि, तोऴि

सजनी (स्‍त्री.) प्रेमिका -- कामुकि, प्रेयसि

सजा (स्‍त्री.) अपराधी को दिया जाने वाला दंड -- शिक्ष

सजाना (स.क्रि) वस्तुओं को ऐसे क्रम से रखना कि वे आकर्षक और सुंदर जान पड़ें, सँवारना -- अटुक्‍कि वय्क्कुक

सजाना (स.क्रि) अलंकृत करना -- अलंक-रिक्‍कुक

सजावट (स्‍त्री.) सजे हुए होने की अवस्था, क्रिया या भाव, शोभा -- अलंकारम्

सजीव (वि.) जीवयुक्‍त, जिसमें प्राण हो -- सजीवमाय, जीवनुळ्ळ

सजीव (वि.) तेज, फुरतीला -- शक्‍तियुळ्ळ, वेगतयुळ्ळ

सज्‍जन (वि./पुं.) भला आदमी, सत्पुरुष, शरीफ -- सज्‍जनम्, कुलीनन्

सज्‍जा (स्‍त्री.) साज-सामान -- अलंकरण वस्तु

सटीक (वि.) जिस में मूल के साथ टीका भी हो, व्याख्या सहित, टीका सहित -- सव्याख्यानम्

सटीक (वि.) बिलकुल ठीक, उपयुक्‍त -- शरियाय

सड़क (स्‍त्री.) मार्ग, रास्ता, पथ -- मार्गम्, वऴि रोडु

सड़ना (अ.क्रि.) किसी वस्तु के संयोजक तत्वों का विकृत हो जाना -- अळियुक, चीयुक

सतत (क्रि.वि.) निरंतर, बराबर, लगातार -- निरंतरम्, तुटर्च्‍चयाय

सतत (क्रि.वि.) सदा, हमेशा -- ऐप्पोऴुम्

सतर्क (वि.) सचेत, सावधान, सजग, होशियार -- श्रद्‍धयोटुकूटि, जाग्रतयुळ्ळ

सतर्कता (स्‍त्री.) सावधानी, होशियारी, सजगता -- जाग्रत, उणर्वु

सत्कार (पुं.) आदर-सम्मान -- बहुमानम्

सत्कार (पुं.) आवभगत, आतिथ्य, खातिर -- सत्कारम्

सत्‍ता (स्‍त्री.) होने का भाव, अस्तित्व, हस्ती -- अस्तित्वम्

सत्‍ता (स्‍त्री.) अधिकार, शक्‍ति, सामर्थ्य -- अधिकारम्

सत्‍तू (पुं.) भुने हुए जौ, चने आदि का आटा या चूर्ण -- मलरपोटि

सत्यनिष्‍ठा (स्‍त्री.) सत्य पर निष्‍ठा, सत्य में विश्‍वास, सच या वास्तविक से प्रेम -- सत्यनिष्‍ठ

सत्याग्रह (पुं.) सत्य का पालन और रक्षा करने के लिए किया जाने वाला आग्रह या हठ -- सत्याग्रहम्

सत्याग्रह (पुं.) आधुनिक राजनीति में वह अहिंसात्मक कार्रवाई, जो किसी सत्‍ता या अधिकारी के व्यवहार आदि के प्रति असंतोष प्रकट करने के लिए की जाती है -- सत्याग्रहम्

सत्यापन (पुं.) जाँच या मिलान करके देखना कि ज्यों-का-त्यों और ठीक है कि नहीं -- प्रमाणीकरणम्, ओतुनोक्कुक, सत्यापनम्

सत्रावसान (पुं.) विधान मंडल या विश्‍वविद्‍यालय आदि में दीर्घकाल के लिए किया जाने वाला स्थगन -- सम्मेळनम् अवसानिप्पि-क्‍कल्

सत्संग (पुं.) अच्छे आदमियों का साथ, अच्छी सोहबत, सज्‍जनों के साथ उठना बैठना -- सत्संगम्

सत्संग (पुं.) वह समाज या जन-समूह, जिसमें कथावार्ता या भगवत् पाठ होता है -- भक्‍तमंडलि

सदन (पुं.) घर, मकान -- वीटु

सदन (पुं.) वह स्थान, जहाँ किसी देश या राज्य के विधान बनने के कार्य होते हों -- सभामण्डपम् असेंब्लि-मंदिरम्

सदस्य (पुं.) उन व्यक्‍तियों में से हर एक, जिनके योग से कुटुंब, परिवार, समाज आदि बनते हैं -- अंगम्

सदस्य (पुं.) वह व्यक्‍ति, जिसका संबंध किसी समुदाय से हो और जिसका वह नियमित रूप से चंदा आदि देता हो या उसके कार्यों में सम्मिलित होता हो -- अंगम्, मेंबर्

सदा (क्रि.वि.) नित्य, हमेशा, हर समय -- सदा, ऐप्पोळुम्

सदा (क्रि.वि.) निरंतर, लगातार -- निरंतरम्

सदाचार (पुं.) अच्छा और शुभ आचरण, अच्छा चालचलन -- सदाचारम्

सदुपयोग (पुं.) अच्छा और उत्‍तम उपयोग -- सदुपयोगम्

सद्‍भाव (पुं.) शुभ भाव, हित का भाव, छल कपट, द्‍वेष आदि से रहित भाव -- सद्‍भावम्

सद्‍भाव (पुं.) दो व्यक्‍तियों या पक्षों में होने वाली मैत्रीपूर्ण स्थिति -- सौमनस्यम्, सौहृदम्

सद्‍व्यवहार (पुं.) अच्छा बरताव, अच्छा सलूक या व्यवहार -- सद्-व्यहारम्

सद्‍व्यवहार (पुं.) सद्‍वृत्‍ति, सदाचार -- नल्ल नटपटि

सन्‍नाटा (पुं.) निस्तब्धता, नीरवता -- निश्शब्दत

सपना (स्वप्‍न) (पुं.) वह घटना या दृश्य, जो सोए होने पर अंतर्मन में काल्पनिक रूप में भासित होता है -- स्वप्‍नम्

सपरिवार (वि.) परिवार के सदस्यों के साथ -- सकुटुंबम्, कुटंबसहिते

सप्तक (पुं.) सात वस्तुओं का समूह -- सप्‍तकम्

सत्पक (पुं.) संगीत के सात स्वरों का समाहार -- सप्‍तस्वरम्

सफर (पुं.) यात्रा -- यात्र

सफल (वि.) जिसका अच्छा परिणाम हो -- सफलमाय

सफलता (स्‍त्री.) सफल होने का भाव, कामयाबी, सिद्‍धि -- साफल्यम्

सबल (वि.) बलवान, ताकतवर, बलशाली -- बलवान्, शक्‍तिशालि

सभा (स्‍त्री.) बैठक, परिषद् -- सभ

सभापति (पुं.) सभा का अध्यक्ष -- अध्यक्षन्

सभी (वि.) सार, संपूर्ण -- ऐल्लावरुम्, ऐल्लाम्

सभ्य (वि.) जिसका आचार-व्यवहार उत्‍तम हो, शिष्‍ट, विनम्र -- नागरीगमान, पण्बुळ्ळ

सभ्यता (स्‍त्री.) सभ्य होने की अवस्था या भाव -- सभ्यत, परिष्कारम्

सभ्यता (स्‍त्री.) किसी जाति या देश की बाहय तथा भौतिक उन्‍नतियों का सामूहिक रूप -- संस्कारम्

समकक्ष (वि.) जोड़ या बराबरी का, सब बातों में बराबरी करने वाला -- ओप्पम्

समझना (अ.क्रि.) किसी बात को ठीक और पूर्ण रूप से मन में बैठाना -- मनस्सि-ताक्कुक, अरियुक

समझना (अ.क्रि.) विचारना -- आलोचि-क्कुक

समझौता (पुं.) राजीनामा, मेल, सुलह -- ओत्‍तुतीर्प्पु

समझौता (पुं.) आपस में होने वाला करार या निश्‍चय, संधि -- संधि

समता (स्‍त्री.) सादृश्य, बराबरी, संतुलन -- समत्वम्

समदर्शी (वि.) सब को एक-सा देखने-समझने वाला -- समदर्शि

समन्वय (पुं.) वह अवस्था, जिसमें कथनों या बातों का पारस्परिक विरोध न रहे -- समन्वयम्

समय (पुं.) दिन-रात के विचार से काल का कोई मान, वक्‍त -- समयम्, नेरम्

समय (पुं.) अवसर, मौका -- इट, अवसरम्

समय-सारणी (स्‍त्री.) समय सूचित करने के लिए बनाई हुई सारिणी -- टाइम् टेबिळ्

समय-सारणी (स्‍त्री.) वह पुस्तिका, जिसमें विभिन्‍न स्टेशनों से छूटने और पहुँचने के समय का उल्लेख सारिणियों में किया जाता है (टाइमटेबल) -- समय विवर-प्पवाट्‍टिक, टाइम्टेबिळ्

समर (पुं.) युद्‍ध, संग्राम, लड़ाई -- युद्‍धम्, समरम्

समर्थ (वि.) जिसमें कोई काम करने की शक्‍ति हो, योग्य, उपयुक्‍त -- शक्‍तन्, उपयुक्‍तन्

समष्‍टि (स्‍त्री.) अनेकों का समूह, संपूर्णता -- समष्‍टि

समांतर (समानांतर) (वि.) जो समान अंतर पर रहे -- समांतरम्

समाचार (पुं.) खबर, वृत्‍तांत, संदेश -- वर्तमानम्, वार्त

समाचार-पत्र (पुं.) नियमित समय पर प्रकाशित होने वाला वह पत्र, जिसमें अनेक प्रदेशों, राष्‍ट्रों आदि से संबंधित समाचार रहते हों (न्यूजपेपर) -- वर्तमानपत्रम्, पत्रम्

समाज (पुं.) बहुत से लोगों का समूह -- जनसमूहम्

समाज (पुं.) किसी विशिष्‍ट उद्‍देश्य से स्थापित की हुई सभा -- समाजम्

समाज (पुं.) किसी प्रदेश या भूखंड में रहने वाले लोग जिनमें सांस्कृतिक एकता होती है -- समुदायम्

समाज-विज्ञान (पुं.) मानव समाज का विकास, प्रकृति और नियम बताने वाला वैज्ञानिक अध्ययन, समाजशास्‍त्र (सोशिअलॉजी) -- सामूहय-शास्‍त्रम्

समाजी-करण (पुं.) किसी काम, बात, व्यवहार को ऐसा रूप देना कि उस पर समाज का अधिकार हो जाए और सब लोग समान रूप से उसका लाभ उठा सकें (सोशिअलाइजेशन) -- समुदायी-करणम्, सामूह वलकरणम्

समाधान (पुं.) आपत्‍ति की निवृत्‍ति करना, संदेह निवारण करना -- संशय-निवृत्‍ति

समाधान (पुं.) समस्या का हल -- समाधानम्

समापन (पुं.) समाप्‍त करने की क्रिया या भाव, समाप्‍ति -- समाप्‍ति

समाप्‍ति (स्‍त्री.) खत्म या पूरा करने की क्रिया या भाव, समापन -- समाप्‍ति

समायोजन (पुं.) अनुकूल बनाने की क्रिया या भाव -- अनुकूल-माक्‍कल्

समायोजन (पुं.) आँकड़ों का मेल बिठाना या ठीक-ठाक करने की क्रिया या भाव -- कणक्‍कु नोक्‍कल्

समारोह (पुं.) कोई ऐसा शुभ आयोजन, जिसमें चहल-पहल हो -- उत्सवम्, आघोषम्

समालोचक (पुं.) समीक्षक -- निरूपकन्

समास (पुं.) योग, मेल -- योजिप्पु, चेर्च

समास (पुं.) दो या अधिक पदों के मेल से बनने वाला नया पद -- समासम्

समाहार (पुं.) बहुत-सी चीजों को एक जगह हकट्‍ठा करना, संग्रह -- समाहरणम्

समाहार (पुं.) ढेर, राशि -- कूट्‍टम्

समिति (स्‍त्री.) किसी विशिष्‍ट कार्य के लिए नियुक्‍त व्यक्‍तियों का समूह -- समिति

समिति (स्‍त्री.) किसी विशेष कार्य के लिए गठित कुछ व्यक्‍तियों की सभा -- सम्मट्‍टि

समुदाय (पुं.) समाज, बिरादरी -- समुदायम्

समुदाय (पुं.) समूह, राशि -- कूट्‍टम्

समुद्र (पुं.) सागर -- समुद्रम्

समूह (पुं.) बहुत-सी चीजों का ढेर, राशि -- समूहम्, कूट्‍टम्

समूह (पुं.) झुँड, समुदाय -- NA

समृद्‍ध (स्‍त्री.) संपन्‍न, धनवान -- संपन्‍नन्, धनिकन्

समृद्‍धि (स्‍त्री.) बहुत अधिक संपन्‍नता, अमीरी, ऐश्‍वर्य -- समृद्‍धि, ऐश्‍वर्यम्

सम्मान (पुं.) इज्‍जत, आदर, प्रतिष्‍ठा -- बहुमानम्

सम्मेलन (पुं.) मनुष्यों का किसी विशेष उद्‍देश्य से अथवा किसी विषय पर विचार करने के लिए एकत्र होने वाला समाज -- सम्मेळनम्

सम्मेलन (पुं.) कोई बहुत बड़ी स्थायी संस्था -- स्थापनम्

सम्मोहन (पुं.) मोहित करने या लुभाने की क्रिया, मुग्ध करने की शक्‍ति या गुण -- मोहिप्पि-क्‍कल्, सम्मोहन शक्‍ति

सम्राट (पुं.) साम्राज्य का स्वामी -- सम्राटु, चक्रवर्ति

सरकना (अ.क्रि.) जमीन से सटे हुए आगे बढ़ना, रेंगना -- वऴुतुक, मुट्‍टिल् इऴयुक

सरकना (अ.क्रि.) धीरे-धीरे तथा थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ना -- इऴयुक

सरकार (स्‍त्री.) शासन तंत्र -- सरकार्, भरणकूटम्

सरल (वि.) सीधा, भोला -- शुद्‍धन्

सरल (वि.) आसान, सहज -- ऐळुप्पमाय

सरस (वि.) रसयुक्‍त, रसीला -- रसमुळ्ळ

सरस (वि.) रचना जो भावमयी और मोहक हो -- सरसमाय

सराहना (स्‍त्री.) तारीफ, प्रशंसा -- प्रशंस

सराहना (स्‍त्री.) तारीफ करना, प्रशंसा करना -- प्रशसिक्कुक, श्‍लाधिक्कुक

सरोकार (पुं.) वास्ता, संबंध -- बंधम्

सरोवर (पुं.) तालाब -- सरोवरम्, कुळम्

सर्ग (पुं.) किसी ग्रंथ विशेषत: काव्य ग्रंथ का अध्याय -- सर्गम्

सर्जन (पुं.) उत्पन्‍न करना या जन्म देना -- सृष्‍टि

सर्प (पुं.) साँप -- सर्पम्, पाम्पु

सर्वज्ञ (वि.) सब कुछ जानने वाला -- सर्वज्ञन्

सर्वज्ञ (पुं.) ईश्‍वर -- भगवान्

सर्वत्र (क्रि. वि.) सब जगह -- सर्वत्र

सर्वव्यापक (पुं.) जो सब स्थानों और सब पदार्थों में व्याप्‍त हो -- सर्वव्यापि

सर्वसम्मति (स्‍त्री.) सबकी एक सम्मति या राय, मतैक्य -- सर्वसम्मतम्, ऐककंठ्‍यम्

सर्वांगीण (वि.) सब अंगों में व्याप्‍त होने वाला -- सर्वांगीणम्

सर्वांगीण (वि.) जो सभी अंगों से युक्‍त हो -- सर्वांगयुक्‍तम्

सर्वेक्षण (पुं.) किसी विषय के सही तथ्यों की जानकारी के लिए उसके सभी अंगों का किया गया आधिकारिक निरीक्षण -- सर्वेक्षणम्, सर्वे

सर्वोदय (पुं.) सभी का उदय या उन्‍नति -- सर्वोदयम्

सर्वोदय (पुं.) सब लोगों के आर्थिक, नैतिक तथा सामाजिक उत्थान के लिए चलाया गया स्वतंत्र भारत का आंदोलन -- सर्वोदय प्रस्थानम्

सलाहकार (पुं.) राय देने वाला, परामर्शदाता -- उपदेष्‍टावु

सस्ता (पुं.) कम मूल्य का -- विल कुरञ्ञ

सस्ता (पुं.) घटिया -- तरम् ताऴन्‍न

सहकारिता (स्‍त्री.) साथ मिल कर काम करना, मदद, सहायता -- सहकरणम्, कूट्‍टाय्म

सहज (वि.) जन्मजात, प्राकृतिक -- जन्मसहजम्

सहज (वि.) आसान -- ऐळुप्पमाय

सहन शक्‍ति (स्‍त्री.) सहने की शक्‍ति, सहिष्णुता, सहनशीलता, सहयता -- सहनशक्‍ति

सहना (स.क्रि.) सहन करना, झेलना -- सहिक्कुक

सहना (स.क्रि.) बर्दाश्त करना, कष्‍ट उठाना -- पोरुक्कुक

सहमत (वि.) जो दूसरे के मत को मान कर उसकी पुष्‍टि करता हो -- योजिप्पुळ्ळ

सहमति (स्‍त्री.) सहमत होने का भाव या अवस्था, एक मत होना -- अभिप्रायैक्यम् योजिप्पु

सहयोग (पुं.) साथ मिलकर काम करना -- सहकरणम्

सहयोग (पुं.) किसी के काम में हाथ बँटाना -- सहायम्

सहयोग (पुं.) सहायता देना -- सहायिक्‍कुक

सहयोगी (पुं.) साथ में काम करने वाला, सहायता करने वाला -- सहप्रवर्तकन्

सहलाना (स.क्रि.) धीरे-धीरे मलना या हाथ फेरना -- तटवुक

सहानुभूति (स्‍त्री.) हमदर्दी -- सहतापम्

सहायता (स्‍त्री.) मदद -- सहायम्

सहिष्णु (वि.) सहने वाला, बरदाश्त करने वाला -- सहिक्‍कुन्‍न, सहनशक्‍ति युळ्ळ

सहिष्णुता (स्‍त्री.) सहनशीलता -- सहिष्णुत

सहृदयता (स्‍त्री.) दयालुता, करुणा -- करुण

सहृदयता (स्‍त्री.) रसज्ञता -- सहृदयत्वम्

सांकेतिक (वि.) संकेत संबंधी, संकेत रूप में होने वाला -- सांकेतिकम्

सांगोपांग (वि.) सभी अंगों और उपांगों सहित -- सांगोपांगम्

सांत्वना (स्‍त्री.) शोकाकुल या संतप्‍त व्यक्‍ति को शांत करने या समझाने-बुझाने की क्रिया, तसल्‍ली -- सांत्वनम्, आश्‍वासम्

साकार (वि.) मूर्त, आकारयुक्‍त -- मूर्तम्, साकारम्

साकार (वि.) बात या योजना, जिसे क्रियात्मक रूप प्राप्‍त हुआ हो -- सफलम् नटप्पिलाक्‍किय

साक्षरता (स्‍त्री.) पढ़े-लिखे होने का भाव -- साक्षरत्वम्

साजन (पुं.) पति, स्वामी -- पति, भर्त्‍तावु

साजन (पुं.) प्रेमी -- कामुकन्

साज-सामान (पुं.) सामग्री, उपकरण, असबाब -- उपकरणम्, सामग्रि

साज-सामान (पुं.) ठाठ-बाट -- आडंबरम्

साझेदारी (स्‍त्री.) हिस्सेदारी, शराकत -- पंकाळित्‍तम्, पंकु

सात्विक (वि.) सतोगुणी, सत्वगुण-प्रधान, अनुभूति या भावनाजन्य -- सात्विकम्

सादर (क्रि.वि.) आदरपूर्वक, इज्‍जत से -- आदरपूर्वम्

सादा (वि.) खालिस, बिना मिलावट -- कलर्प्पि-ल्लात्‍त

सादा (वि.) जिसमें किसी तरह की उलझन, पेंच की बात या बनावट न हो, सरल -- नेर्वऴि-क्कुळ्ळ

सादृश्य (पुं.) समानता, तुल्यता, बराबरी -- सादृश्यम्

साधन (पुं.) सामान, सामग्री, उपकरण -- उपकरणम्

साधन (पुं.) कोई ऐसी चीज या वस्तु, जिससे कुछ कर सकने की शक्‍ति आती है (मीन्स) -- वऴि

साधन (पुं.) जिसके सहारे कोई काम पूरा होता है (रिसोर्सिस) -- विभवं

साधना (स्‍त्री.) कोई कार्य सिद्‍ध करना -- कार्यम् नेटल्

साधना (स्‍त्री.) ऐसी आराधना या उपासना, जो बहुत कष्‍ट सहते हुए मनोयोगपूर्वक की जाती है अथवा किसी महत्वपूर्ण कार्य को सिद्‍ध करने के लिए त्याग तथा परिश्रम से किया गया प्रयत्‍न या प्रयास -- साधन, उपासन

साधारण (वि.) जिसमें कोई विशेषता न हो, सामान्य, मामूली -- साधारण

साधारण (वि.) सहज, सुगम, सरल -- साधारण

साधु (पुं.) संत, महात्मा -- महात्मावु, सन्यासि

साधु (पुं.) बढ़िया, उत्‍तम -- श्रेष्‍ठम्

साधु (पुं.) सज्‍जन, भला आदमी -- साधु

साध्य (वि.) जो सिद्‍ध या पूरा किया जा सके -- साध्यम्

साध्य (वि.) (रोग आदि) अच्छा करने योग्य -- साध्यम्

सान्‍निध्य (पुं.) निकटता, समीपता -- सॉनिध्यम्

सापेक्ष (वि.) जो किसी की अपेक्षा रखता हो, जो दूसरों पर अवलंबित हो -- सापेक्षम्

साफ (वि.) स्वच्छ, शुद्‍ध, स्पष्‍ट -- वृत्‍तियुऴळ, निर्मलमाय, कुट्‍टमिल्लात संशय रहितमाय

साबुन (पुं.) नहाने या कपड़े धोने का एक पदार्थ (सोप) -- सोप्पु

सामंजस्य (पुं.) वह स्थिति, जिसमें परस्पर किसी प्रकार की विपरीतता या विषमता न हो, संगति, अनुकूलता -- सामंजस्यम्, पोरुत्‍तम्

सामग्री (स्‍त्री.) आवश्यक वस्तुओं का समूह, सामान -- सामग्रि

सामग्री (स्‍त्री.) किसी उत्पादन, निर्माण रचना आदि के सहायक अंग या तत्व -- साधनम्

सामने (अव्य.) आगे, समक्ष -- मुन्पिल्, ऐतिरे, नेरे

सामने (अव्य.) मुकाबले में -- अपेक्षिच्चु

सामर्थ्य (पुं.) कोई कार्य करने की योग्यता और शक्‍ति -- सामर्त्‍तियम् कऴिवु

सामयिक (वि.) समयोचित, ठीक समय में -- समयोचितम्

सामयिक (वि.) वर्तमान समय का -- तात्कालिकम्

सामाजिक (वि.) समाज का, समाज से संबंध रखने वाला -- सामूहयम्

सामान्य (वि.) मामूली -- साधारण

सामान्य (वि.) सार्वजनिक, आम -- पोतु

साम्राज्य (पुं.) वे अनेक राष्‍ट्र या देश, जिन पर कोई एक शासन-सत्‍ता राज्य करती हो -- साम्राज्यम्

साम्राज्य वाद (पुं.) वह सिद्‍धांत, जिसमें यह माना जाता है कि किसी देश को अपने अधिकृत देशों में वृद्‍धि करते हुए अपने साम्राज्य का विस्तार करते रहना चाहिए (इम्पीरियलिज्म) -- साम्राज्यवादं, एकाधिन्यम्

सामुद्रिक (वि.) समुद्र संबंधी, समुद्र से संबंध रखने वाला -- समुद्र-संबंदमान

सामुद्रिक (पुं.) फलित ज्योतिष की वह शाखा, जिसमें मनुष्य की हस्त रेखाओं और शरीर के चिहनों आदि के शुभ-अशुभ फल पर विचार होता है -- सामुद्रिक शास्‍त्रम्

सामूहिक (वि.) कई व्यक्‍तियों (समूह) द्‍वारा किया जाने वाला -- सामूहयम्

सार (पुं.) मूल भाग, सत -- सारम्, सत्‍तु

सार (पुं.) तात्पर्य या निष्कर्ष, सारांश सारणी (स्‍त्री.) वर्गीकृत सूची (टेबल) -- पट्‍टिक

सारांश (पुं.) संक्षिप्‍त रूप, सार, निचोड़, उपसंहार -- सारांशम्, पोरुळ्

सारा (वि.) कुल, समस्त, पूरा, समग्र -- समस्तम्, ऐल्लाम्

सार्थक (वि.) जिसका कुछ अर्थ हो, अर्थवान -- अर्थवत्‍ताय

सार्वजनिक (वि.) सर्वसाधारण-संबंधी -- सर्वसाधारण-माय

सार्वजनिक (वि.) समान रूप से सब लोगों के काम आने वाला -- पोतुतात्पर्य मुळ्ळ

सावधान (वि.) सचेत, सतर्क, खबरदार -- श्रद्‍धयुळ्ळ

साहित्य (पुं.) ग्रंथों का समूह, किसी भाषा की समस्त गद्‍य तथा पद्‍यात्मक रचनाएँ -- साहित्यम्

साहित्यकार (पुं.) साहित्य की रचना करने वाला -- साहित्य-कारन्

साहूकार (पुं.) बड़ा व्यापारी, महाजन -- उण्टियल् व्यापारि

सिंगार (श्रृंगार) (पुं.) सजाने की क्रिया, सजधज -- अलंकारम्, चमयम्

सिंगारदान (पुं.) श्रृंगार की सामग्री रखने का छोटा संदूक -- आभरण-प्पेट्‍टि

सिंदूर (पुं.) एक प्रकार का लाल चूर्ण, जिसे सौभाग्यवती स्‍त्रियाँ माँग में भरती हैं -- सिंदूरम्, कुंकुम्

सिंहनाद (पुं.) सिंह का गर्जन, युद्‍ध आदि के समय गरज कर की जाने वाली ललकार, जोरदार शब्दों में ललकार कर कही जाने वाली बात -- सिंहगर्जनम्, सिंहनादम्

सिंहासन (पुं.) राजा का आसन, राजगद्‍दी -- सिंहासनम्

सितारा (पुं.) तारा, नक्षत्र -- नक्षत्रम्

सितारा (पुं.) भाग्य -- भाग्यम्

सिद्‍धांत (पुं.) निश्‍चित मत जिसे सत्य के रूप में ग्रहण किया जाए (प्रिंसिपल) -- सिद्‍धांतम्, तत्वम्

सिद्‍धांत (पुं.) विचार, तर्क और प्रयोग द्‍वारा सिद्‍ध मत; कला, विज्ञान आदि के संबंध में कोई ऐसी मूल बात जो किसी विद्‍वान द्‍वारा प्रतिपादित हो और जिसे बहुत से लोग ठीक मानते हों। (थीअरी) -- सिद्‍धांतम्, वादम्

सिपाही (पुं.) फौजी, सैनिक -- पट्‍टाळ-क्‍कारन् ळिप्पायि

सिपाही (पुं.) पुलिस विभाग का साधारण कर्मचारी -- पोलीसुकारन्

सिफारिश (स्‍त्री.) किसी का कोई काम करने के लिए दूसरे से कहना -- शुपार्श

सिफारिश (स्‍त्री.) किसी के गुण, योग्यता आदि का परिचय देने वाली बात किसी दूसरे व्यक्‍ति से कहना, जो उस पहले व्यक्‍ति का कोई उपकार कर सकता है, संस्तुति -- शुपार्श

सिर्फ (वि.) बस, इतना ही, केवल -- मात्रम्, केवलम्

सिलसिला (पुं.) एक के बाद एक का क्रम,श्रृंखला -- क्रमम्, तुटर्च्‍च

सिलाई (स्‍त्री.) सीने की क्रिया या भाव -- तुन्‍नुक, तय्क्कुक

सिलाई (स्‍त्री.) सिलने पर दिखाई पड़ने वाले टाँके -- तय्यल्

सिलाई (स्‍त्री.) सिलने के बदले में मिलने वाली मजदूरी -- तय्यल-क्कूलि

सिवाय (अव्य.) जो है या हो उसको छोड़कर -- कूटाते

सींचना (स.क्रि.) खेत या पेड़े-पौधों में पानी देना -- ननय्कुक

सीखना (स.क्रि.) किसी विषय या कला का ज्ञान प्राप्‍त करना, पढ़ना -- पठिक्कुक

सीधा (वि.) जिसमें टेढ़ापन या घुमाव न हो -- वळविल्लात्‍त, नेरे थुळ्ळ

सीधा (वि.) जिस में छलकपट न हो -- कपट-मिल्लात्‍त

सीधा (वि.) सरल, सुगम, आसान -- ऐळुप्पमाय

सीना (स.क्रि.) सिलाई करना -- तय्क्‍कुक, तुन्‍नुक

सीना (पुं.) छाती, वक्षस्थल -- नेञ्‍चु, मारु

सीमा (स्‍त्री.) एक स्थान से दूसरे स्थान को विभाजित करने वाली रेखा, हद, सरहद -- अतिरु

सीमा (स्‍त्री.) वह अंतिम हद जहाँ तक कोई बात हो सकती हो या होनी उचित हो, नियम या मर्यादा की हद -- सीम

सीमित (वि.) विभाजक रेखा के अंदर -- सीमितम्

सीमित (वि.) जिसका प्रभाव या विस्तार एक निश्‍चित सीमा के अंतर्गत हो -- NA

सुंदर (वि.) जो आँखों को अच्छा लगे, खूबसूरत -- सुंदरमाय

सुख (पुं.) इंद्रियों को अनुकूल लगने वाली चेतना, चैन, आराम -- सुखम्

सुख-सुविधा (स्‍त्री.) ऐसी चीजें, जिनके होने पर मनुष्य सुखपूर्वक जीवन बिता सके -- सुख-सौकर्य-ङ्ङ्‍ळ्

सुगंध (स्‍त्री.) अच्छी गंध, खुशबू, प्रिय महक -- सुगंधम्

सुगम (वि.) सहज में आने या पाने योग्य -- सुगमम्

सुगम (वि.) आसान, सरल -- ऐळुप्पमुळ्ळ

सुघड़ (वि.) जिसकी बनावट सुंदर हो, सुडौल -- वटिवोत्‍त

सुघड़ (वि.) कुशल, निपुण, होशियार -- सामर्थ्य-मुळ्ळ

सुचारु (वि.) अत्यंत सुंदर, मनोहर, बहुत खूबसूरत -- सुचारु, सुंदरम्

सुझाव (पुं.) सुझाने की क्रिया या भाव -- उपदेशम्

सुझाव (पुं.) वह नई बात जो किसी को सुझाई गई हो या जिसकी ओर ध्यान आकृष्‍ट किया गया हो (सजेशन) -- अभिप्रायम्

सुडौल (वि.) सुंदर डीलडौल या आकार वाला -- नल्ल आकृतियि लुळ्ळ, सुंदरम्, वटिर्वात्‍त

सुध-बुध (स्‍त्री.) होश-हवास, चेतना -- बोधम्

सुध-बुध (स्‍त्री.) याद -- ओर्म्म

सुधा (स्‍त्री.) अमृत, पीयूष -- अमृतम्, सुध

सुधार (पुं.) दोष दूर करने या होने का भाव -- परिष्कारम्, मेच्‍च-प्पेटुत्‍तल्

सुधार (पुं.) वह काँट-छाँट, जो किसी रचना को अच्छा रूप देने के लिए की जाती है -- नन्‍नाक्‍कल्

सुधीर (वि.) धैर्यवान, जिसमें धैर्य हो -- सुधीरन्, धीरन्

सुनना (स.क्रि.) कानों से शब्द या ध्वनि ग्रहण करना -- केळ्‍क्‍कुक

सुनहरा (सुनहला) (वि.) सोने के रंग का -- स्वर्ण वर्णमाय, पोन्‍निर-मुळ्ळ

सुबोध (वि.) जो आसानी से समझ आ जाए, सरल और बोधगम्य -- बोधगम्यम्

सुमति (स्‍त्री.) अच्छी मति या बुद्‍धि -- सद्‍बुद्‍धि

सुमन (पुं.) पुष्प, फूल -- पुष्पम्, पूवु

सुरंग (स्‍त्री.) जमीन खोद कर उसके नीचे बनाया हुआ रास्ता -- तुरङ्कम्

सुरंग (स्‍त्री.) जमीन या समुद्र के नीचे बिछाया गया बारूद, जाल आदि जिससे व्यक्‍ति या जहाज नष्‍ट हो जाते हैं -- खनि

सुर (पुं.) गले, बाजे आदि से निकलने वाला स्वर -- स्वरम्

सुर (पुं.) देवता -- देवन्, सुरन्

सुरक्षा (स्‍त्री.) समुचित रक्षा -- सुरक्ष

सुरक्षा (स्‍त्री.) आक्रमण, आघात आदि से बचने के लिए किया जाने वाला प्रबंध -- प्रतिरोधम्, राज्यरक्ष

सुरभि (स्‍त्री.) सुगंध, खुशबू -- सुगंधम्, सौरभ्यम्

सुरमा (पुं.) काजल -- सुरुम

सुराही (स्‍त्री.) जल आदि रखने का मिट्‍टी का पात्र, जिसका नीचे का भाग लोटे की तरह गोल और ऊपर का भाग लंबा नल की तरह होता है -- कूज

सुलगना (अ.क्रि.) इस प्रकार जलना कि उसमें से लपट न निकले, बल्कि धुआँ निकले, धीरे-धीरे जलना -- मङ्ड़ि कत्‍तुक

सुलझना (अ.क्रि.) किसी समस्या आदि की पेचीदगी का दूर होना -- ज्वळिक्कुक, बऴियुक

सुलभ (वि.) जो आसानी से मिल जाए -- सुलभम्

सुवास (स्‍त्री.) अच्छी महक, खुशबू, सुगंध -- सुगंधम्

सुविधा (स्‍त्री.) आसानी -- सौकर्यम्

सुविधा (स्‍त्री.) आराम -- सौकर्यम्

सुसज्‍जित (वि.) भली-भाँति सजा या सजाया हुआ -- समलंकृतम्

सुस्ताना (अ.क्रि.) थकावट दूर करना, थोड़ी देर के लिए आराम करना -- विश्रमिक्कुक

सुहाग (पुं.) विवाहिता स्‍त्री की वह स्थिति, जिसमें उसका पति जीवित हो, सौभाग्य -- मंगल्यम्

सुहाग (पुं.) विवाह के समय कन्यापक्ष में गाए जाने वाले मांगलिक गीत -- मंगळ गीतम्, कल्याण-प्पाट्टु, ओप्पन-प्पाट्टु

सुहागा (पुं.) एक क्षार द्रव्य, जो सोना गलाने और दवा के काम आता है -- पोन्कारम्

सूक्ष्मदर्शी (वि.) बारीकी से देखने वाला -- सूक्ष्मदृक्कु

सूखा (वि.) शुष्क, निर्जल -- उणक्‍क, वरण्ट

सूखा (वि.) अकाल, दुर्भिक्ष -- विरसन्

सूचना (स्‍त्री.) कुछ बताने या जताने के लिए कही या लिखी गई बात, इत्‍तिला -- अरियिप्पु

सूची (स्‍त्री.) किसी प्रकार की वस्तुओं, नामों, बातों आदि का क्रमबद्‍ध लेखा या विवरण -- पट्‍टिक, सूचिक

सूजना (अ.क्रि.) शरीर के किसी अंग का अधिक फूलना या फैलना -- वीर्कुक, वीङ्डुक

सूझना (अ.क्रि.) अचानक ध्यान में आना -- तोन्‍नुक

सूझना (अ.क्रि.) दृष्‍टि में आना, दिखाई देना -- काणप्पेटुक

सूत्र (पुं.) महीन सूत या धागा -- सूत्रम्

सूत्र (पुं.) गूढ़ अर्थयुक्‍त संक्षिप्‍त वाक्य या पद -- नूल्, नूलु

सूत्र (पुं.) संकेत, पता, सुराग -- प्रभाव स्थानम्

सूद (पुं.) ब्याज -- पलिश

सूना (वि.) जनहीन, निर्जन -- शून्यमाय, ओऴिञ्ञ

सूराख (पुं.) छेद, छिद्र -- ओट्‍ट, द्‍वारम्

सूर्य (पुं.) सूरज, रवि -- सूर्यन्

सृजन (पुं.) सृष्‍टि करने अर्थात् जन्म देने की क्रिया या भाव, रचना -- सृष्‍टि, सर्ज्‍जनम्

सृष्‍टि (स्‍त्री.) सारा विश्‍व तथा इसके सभी प्राणी एवं पदार्थ -- सृष्‍टि

सृष्‍टि (स्‍त्री.) निर्माण, रचना -- सृष्‍टि

सेंकना (स.क्रि.) आँच के पास या आग पर रख कर गरम करना अथवा पकाना -- चूटु कायुक

सेंकना (स.क्रि.) शरीर को गरमी या धूप देना -- चूटु कोडुक्कुक

सेठ (पुं.) बहुत धनवान या संपन्‍न व्यक्‍ति -- सेट्‍टु

सेतु (पुं.) नदी आदि पार करने के लिए बनाया हुआ रास्ता, पुल -- पालम्

सेना (स्‍त्री.) रण-शिक्षा प्राप्‍त सशस्‍त्र व्यक्‍तियों का दल, फौज -- सैन्यम्, सेन

सेनापति (पुं.) सेना का नायक, फौज का अफ़सर -- सेनापति, सेनाना-यकन्

सेवा (स्‍त्री.) परिचर्या, टहल -- सेवनम्

सेवा (स्‍त्री.) नौकरी -- जोलि, पणि

सेवा (स्‍त्री.) पूजा, आराधना -- सेव पूज

सैकड़ा (पुं.) सौ, शत की संख्या का सूचक, जो इस प्रकार (100) लिखा जाता है -- नूरु

सैनिक (वि.) सेना-संबंधी, सेना का -- सैनिकम्

सैनिक (पुं.) सेना या फौज का सिपाही, फौजी -- पटयाळि, सैनिकन्

सैर (स्‍त्री.) मनोरंजन के लिए घूमना-फिरना, भ्रमण -- विनोदयात्र, पर्यटनम्

सोचना (स.क्रि.) किसी विषय पर विचार करना -- चिंतिक्कुक

सोचना (अ.क्रि.) चिंता या फिक्र में पड़ना -- विचारि-क्कुक

सोना (पुं.) स्वर्ण, कँचन -- स्वर्णम्, पोन्‍नु

सोना (अ.क्रि.) निद्राग्रस्त होना, नींद लेना -- उरङ्ङुक

सोना (अ.क्रि.) एक ही स्थिति में रहने के कारण सुन्‍न होना -- मरविक्कुक

सोपान (पुं.) सीढ़ी, ज़ीना -- सोपानम्

सौंपना (स.क्रि.) (कोई वस्तु आदि) किसी के जिम्मे या सुपुर्द करना, किसी के अधिकार में देना -- एल्पिक्कुक

सौजन्य (पुं.) सज्‍जनता, भलमनसाहत -- सन्मन्स्सु

सौतेला (वि.) सौत से उत्पन्‍न -- वैमात्रेय

सौतेला (वि.) सौत अथवा सपत्‍नी संबंधी -- NA

सौभाग्य (पुं.) अच्छा भाग्य, अच्छी किस्मत -- सौभाग्यम्

सौभाग्य (पुं.) सुहाग -- मंगल्यम्

स्तंभ (पुं.) खंभा -- तूणु

स्तंभ (पुं.) पत्र-पत्रिका आदि में ऐसे विभाग, जिनमें किसी विशेष विषय का प्रतिपादन अथवा निरूपण होता है -- पंक्‍ति, कोळम्

स्तब्ध (वि.) जड़ीभूत, निश्‍चेष्‍ट, हक्‍का-बक्‍का -- स्तब्धम्

स्तुति (स्‍त्री.) आदर भाव से किसी के गुणों के कथन करने का भाव, बड़ाई तारीफ -- स्तुति, प्रशंस

स्तोत्र (पुं.) वह रचना, विशेषत: पद्‍यबद्‍ध रचना, जिसमें किसी देवता आदि की स्तुति हो, स्तव, स्तुति -- स्तोत्रम्

स्‍त्री (स्‍त्री.) महिला, औरत -- स्‍त्री

स्‍त्री (स्‍त्री.) पत्‍नी, जोरू -- भार्य

स्थगन (पुं.) सभा की बैठक, बात की सुनवाई या विचार अथवा कोई चलता हुआ काम कुछ समय के लिए रोक रखना -- निर्त्‍तिवय्पु माटुटिवय्क्कुक

स्थान (पुं.) जगह, स्थल -- स्थानम्

स्थान (पुं.) पद, ओहदा -- पदवि, स्थानम्

स्थानांतरण (पुं.) किसी वस्तु या व्यक्‍ति का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना या भेजना, बदली -- स्थलमाट्‍टम्

स्थानीय (वि.) स्थान विशेष का, मुकामी, स्थानिक -- स्थलत्‍तुळ्ळ

स्थापना (स्‍त्री.) स्थापित करने की क्रिया या भाव -- स्थापि-क्‍कल्

स्थापना (स्‍त्री.) प्रतिपादन, निरूपण -- प्रतिपादनम्

स्थायी (वि.) सदा स्थित रहने वाला, हमेशा बना रहने वाला, स्थिर, अटल, नियत -- शाश्‍वत

स्थायी (वि.) टिकाऊ -- उरप्पुळ्ळ

स्थिति (स्‍त्री.) दशा, हालत, अवस्था -- स्थिति

स्थिति (स्‍त्री.) पद, मर्यादा आदि के विचार से समाज में स्थान -- स्थानम्

स्थिति (स्‍त्री.) किसी कार्य आदि की प्रगति की अवस्था, चरण -- निलवारम्, अवस्थ

स्थिर (वि.) अटल, निश्‍चल -- निश्‍चलम्

स्थिर (वि.) स्थायी -- स्थिरम्

स्थिर (वि.) धीर, शांत -- शांतम्

स्‍नेह (पुं.) प्रेमियों, हमजोलियों, बच्‍चों आदि के प्रति होने वाला प्रेमभाव -- स्‍नेहम्

स्‍नेह (पुं.) चिकना पदार्थ, चिकनाहट वाली चीज -- स्‍निग्धत

स्पंदन (पुं.) धीरे-धीरे हिलना या काँपना -- स्पंदनम्

स्पंदन (पुं.) फड़क, प्रस्फुरण, गति -- तुटिक्‍कल्-तुटिप्पु मिटिप्पु

स्पर्धा (स्‍त्री.) प्रतियोगिता आदि में किसी से होने वाली होड़ -- मत्सरम्

स्पर्श (पुं.) त्वचा का वह गुण, जिससे छूने, दबने आदि का अनुभव होता है -- स्पर्शम्

स्पर्श (पुं.) एक वस्तु के तल का दूसरी वस्तु के तल से सटना या छूना, संपर्क -- तोटुक, संपर्कम्

स्पष्‍ट (वि.) जिसे देखने, समझने, सुनने आदि में नाम मात्र भी कठिनता न हो, बिलकुल साफ -- स्पष्‍टम्

स्फूर्ति (स्‍त्री.) तेजी, फुर्ती -- उत्साहम्, वेगम्

स्मरण (पुं.) कोई बात फिर से याद आने की क्रिया या भाव, स्मृति, याद -- स्मृति, ओर्म

स्मारक (वि.) स्मरण कराने वाला -- ओर्मिप्पु-क्कुन्‍न

स्मारक (पुं.) स्मरण चिहन, यादगार -- स्मारकम्

स्मृति (स्‍त्री.) स्मरण शक्‍ति -- ओर्म्मशक्‍ति

स्मृति (स्‍त्री.) याद, अनुस्मरण -- ओर्म्म

स्मृति (स्‍त्री.) धर्म, आचार-व्यवहार आदि से संबंधित हिंदू धर्मशास्‍त्र, जिसकी रचना ऋषियों और मुनियों ने वेदों का स्मरण या चिंतन करके की थी -- स्मृति

स्रष्‍टा (वि.) सृष्‍टि या रचना करने वाला, रचयिता, निर्माता -- स्रष्‍टावु

स्रष्‍टा (पुं.) ब्रहमा, सृष्‍टि का रचयिता -- ब्रहमावु

स्वचालित (वि.) अपने आप चलने वाला, जिसके अंदर ऐसे कल-पुरजे लगे हों कि एक पुरजा चलाने से ही वह अपने आप चलने या कोई काम करने लगे -- स्वयं प्रवर्त्‍तिक्कुन्‍न

स्वजन (पुं.) अपने परिवार के लोग, आत्मीय जन -- स्वजनम्

स्वजन (पुं.) सगे-संबंधी, रिश्तेदार, बंधु-बांधव -- बंधक्‍कार्

स्वतंत्र (वि.) जिसका तंत्र अथवा शासन अपना हो, जो किसी के तंत्र या शासन में न हो, आजाद -- स्वतंत्रम्

स्वतंत्र (वि.) किसी प्रकार के नियंत्रण, दबाव या बंधन से रहित -- NA

स्वतंत्रता (स्‍त्री.) स्वतंत्र रहने या होने की अवस्था या भाव, आजादी, स्वातंत्र्य -- स्वातंत्र्यम्

स्वप्‍न (पुं.) सपना, ख्वाब -- स्वप्‍नम्

स्वप्‍न (पुं.) मन ही मन की जाने वाली बड़ी-बड़ी कल्पनाएँ और बाँधे जाने वाले मनसूबे -- संकल्पम्

स्वभाव (पुं.) प्रकृति, खासियत, मिजाज -- प्रत्येकत

स्वभाव (पुं.) आदत, बान -- स्वभावम्

स्वयं (वि., क्रि.वि.) खुद (व्यक्‍ति) -- स्वयं, स्व, तनिये (संभविक्कुक)

स्वरूप (पुं.) आकृति, रूप, शक्ल -- स्वरूपम्

स्वरूप (पुं.) प्रकृति, स्वभाव, गुण -- स्वभावम्

स्वर्ग (पुं.) देवलोक -- स्वर्गम्

स्वर्ग (पुं.) ऐसा स्थान, जहाँ सभी प्रकार के सुख प्राप्‍त हों और नाममात्र भी कष्‍ट या चिंता न हो -- स्वर्गम्

स्वर्ण-युग (पुं.) उत्कर्ष का समय, अभ्युदय काल -- स्वर्णयुगम्

स्वर्णिम (वि.) सोने, का, सुनहला -- पोन्मयं

स्वस्थ (वि.) रोग, विकार आदि से रहित -- आरोगदृढ गात्रन्

स्वागत (पुं.) सादर अभिनंदन -- स्वागतम्, स्वागतम् चेय्यल्

स्वाद (पुं.) खाने-पीने पर जीभ को होने वाली अनुभूति, जायका -- स्वादु

स्वादिष्‍ट (वि.) जिसका जायका या स्वाद बहुत अच्छा हो -- स्वादुळ्ळ, स्वादिष्‍टमाय

स्वाभाविक (वि.) प्राकृतिक, कुदरती -- स्वाभाविकम्

स्वाभाविक (वि.) जो या जैसा प्रकृति के या स्वभाव के अनुसार साधारणत: हुआ करता है -- स्वाभाविक-माय, प्रकृत्याउळ्ळ

स्वामित्व (पुं.) मालिक अथवा स्वामी होने की अवस्था या भाव -- उटम, उटमस्था-वकाशम्

स्वामित्व (पुं.) प्रभुता, आधिपत्य -- अधिकारम्, आधिपत्यम्

स्वामी (पुं.) वह व्यक्‍ति, जिसे किसी वस्तु पर पूरे और सब प्रकार के अधिकार प्राप्‍त हों, मालिक -- उटमस्थन्

स्वामी (पुं.) पति, शौहर -- भर्तावु

स्वार्थ (पुं.) अपना अर्थ या उद्‍देश्य, अपना मतलब -- स्वार्थम्, स्वार्थन

स्वार्थी (वि.) मात्र अपने उद्‍देश्य की सिद्‍धि चाहने वाला, खुदगर्ज़ -- स्वार्थि

स्वावलंबन (पुं.) अपने पर ही भरोसा रखने और दूसरे से सहायता न लेने की अवस्था, गुण या भाव; आत्मनिर्भरता -- स्वाश्रयशीलम्

स्वावलंबी (वि.) अपने ही बल पर काम करने वाला, दूसरे की सहायता न लेने वाला, आत्मनिर्भर -- स्वाश्रयशीलन्

स्वास्थ्य (पुं.) स्वस्थ अर्थात् नीरोग होने की अवस्था, गुण या भाव, आरोग्यता, तंदुरुस्ती -- आरोग्यम्

स्वीकार (पुं.) अपना बनाने, ग्रहण करने या लेने या अपनाने की क्रिया या भाव -- स्वीकरिक्‍कल्

स्वीकार (पुं.) कोई बात मान लेने की क्रिया या भाव -- अंगीकरिक्‍कल्

स्वीकृति (स्‍त्री.) स्वीकार करने की क्रिया या भाव, सहमति -- स्वीकृति, सम्मतम्

स्वीकृति (स्‍त्री.) प्रस्ताव, शर्त आदि मान लेने अथवा ग्रहण करने की क्रिया या भाव -- अंगीकारम्

हँसना (अ.क्रि.) मुख-मुद्रा द्‍वारा प्रसन्‍नता प्रकट करना -- चिरिक्‍कुक

हँसना (अ.क्रि.) दिल्लगी, मजाक या परिहास करना -- परिहसिक्कुक

हँसमुख (वि.) जिसका मुख सदा हँसता हुआ-सा रहता हो, विनोदी -- प्रसन्‍नन्

हँसली (स्‍त्री.) गले के नीचे और छाती के ऊपर की धनुषाकार हड्‍डी -- अक्षकास्ति

हँसली (स्‍त्री.) स्‍त्रियों का एक चंद्राकार गहना -- अड्‍डियल् नेक्लेस्

हँसी (स्‍त्री.) हँसने की क्रिया, ध्वनि या भाव -- चिरि

हँसी (स्‍त्री.) परिहास, दिल्लगी, मज़ाक, ठट्‍ठा -- परिहासम्

हकलाना (अ.क्रि.) अटक-अटक कर बोलना -- विक्कुक

हटना (अ.क्रि.) एक जगह से चल कर, खिसक कर या सरक कर दूसरी जगह जाना -- मारुक पिंतिरियुक, ओऴिवाकुक

हड़ताल (स्‍त्री.) विरोध प्रकट करने के लिए काम बंद करना -- हर्त्‍ताल्, पणिमुटक्कु

हड़पना (स.क्रि.) मुँह में डाल कर निगलना या पेट में उतारना -- विऴुङ्ङक

हड़पना (स.क्रि.) किसी की चीज अनुचित रूप से लेकर दबा बैठना -- तट्‍टियेटुक्कुक अपहरिक्कुक

हत्था (पुं.) हाथ से चलाए जाने वाले बड़े औजारों और छोटी कलों का वह हिस्सा, जिसे हाथ से पकड़ कर घुमाने या चलाने से वे चलते हैं, दस्ता -- कैप्पिटि

हथ-करघा (हाथ-करघा) (पुं.) कपड़ा बुनने का वह करघा, जो हाथ से चलाया जाता है -- कैत्‍तरि

हथियाना (स.क्रि.) अपने प्रभुत्व या अधिकार में कर लेना -- कैवशप्पेटुत्‍तक

हथियार (पुं.) अस्‍त्र-शस्‍त्र -- आयुधं

हथौड़ा (पुं.) धातु, पत्थर, ईंट आदि ठोकने-पीटने वाला लोहे का एक औजार -- कोट्‍टुवटि, चुट्‍टिक

हदबंदी (स्‍त्री.) दो खेतों, प्रदेशों, राज्यों, देशों की सीमा निर्धारण करना -- अतिरु तिरिक्‍कल्

हम (सर्व.) उत्‍तम पुरुष बहुवचन सूचक सर्वनाम ‘मैं’ का बहुवचन -- नाम्, नमळ्, ञङ्ङळ्

हमारा (वि.सर्व.) हम’ का संबंधकारक रूप -- नम्मुटे, जङ्ङळुटे

हमेशा (क्रि.वि.) सदा, सर्वदा, सदैव -- ऐल्लाय्पोऴम्, सदा

हरण (पुं.) उठा ले जाना, छीनना या लूटना -- अपहरिक्‍कल्

हरा (वि.) ताजी उगी हुई घास या पत्‍तों के रंग का, हरित, सब्ज़ -- पच्‍चनिरमुळ्ळ

हरा (वि.) हरियाली से भरा हुआ -- पच्‍चप्पटर्पाय

हरा (वि.) हरा रंग -- पच्‍चनिरम्, हरितवर्णम्

हरित (वि.) हरे रंग का, हरा -- निरत्‍तलुळ्ळ

हरित-क्रांति (स्‍त्री.) फल-फूल, पौधे आदि को लगाए जाने के लिए किया जाने वाला आंदोलन -- हरितविप्ळवं

हरियाली (स्‍त्री.) हरे-भरे पेड़-पौधों आदि का विस्तृत फैलाव या समूह -- पच्‍चनिरम् पच्‍चप्पटर्प्पु

हरियाली (स्‍त्री.) आनंद, प्रसन्‍नता -- आनंदम्

हर्ष (पुं.) प्रसन्‍नता, आनंद, खुशी -- हर्षम्

हल (पुं.) खेत जोतने का एक प्रसिद्‍ध यंत्र -- कलप्प

हल (पुं.) गणित के प्रश्‍न का उत्‍तर -- उत्‍तरम्

हल (पुं.) किसी विषय या समस्या का समाधान -- समाधानम्

हलचल (स्‍त्री.) दौड़-धूप -- ओच्‍चयुम् अनक्‍कवुम्

हवन (पुं.) देवताओं को प्रसन्‍न करने के लिए अग्‍नि में घी, जौ आदि की आहुति देने की क्रिया, होम -- होमम्, हवनम्

हवाई-अड्‍डा (पुं.) वायुयानों के उतरने, रुकने या उड़ान भरने का स्थान -- विमानत्‍तावळम्

हवाई जहाज (पुं.) हवा में उड़ने वाला यान, वायुयान, विमान -- विमानम्

हवाई डाक (स्‍त्री.) वायुयान द्‍वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजी जाने वाली डाक, चिट्‍ठियाँ आदि -- विमानत्‍तपाल्

हस्तकला (स्‍त्री.) हाथों के कौशल द्‍वारा किया जाने वाला काम -- करकौशलम्

हस्तक्षेप (पुं.) किसी दूसरे के काम में अनावश्यक रूप से तथा बिना अधिकार दखल देना -- इटपेटल्

हस्तांतरण (पुं.) वस्तु, संपत्‍ति का एक हाथ से दूसरे हाथ में जाना -- कैमाट्‍टम्

हस्ताक्षर (पुं.) किसी व्यक्‍ति द्‍वारा लिखा जाने वाला अपना नाम, जो इस बात का सूचक होता है कि ऊपर लिखी हुई बातें मैंने लिखी हैं और उनका दायित्व मुझ पर है, दस्तखत -- कैयोप्पु, ओप्पु

हाँ (अव्य.) स्वीकृति, निश्‍चय आदि का सूचक शब्द -- अर्त

हाँकना (स.क्रि.) जानवरों को आगे बढ़ाने के लिए मुँह से कुछ कहते हुए चाबुक आदि लगाना, पशु वाली गाड़ी चलाना -- तंळिक्‍कुक

हाँकना (स.क्रि.) बहुत बढ़-चढ़ कर बातें करना -- वीन्पु परयुक

हाँफना (अ.क्रि.) थकावट, भय आदि के कारण फेफड़ों का जल्दी-जल्दी और लंबे साँस लेना -- कितक्कुक

हाथापाई (स्‍त्री.) वह लड़ाई, जिसमें एक-दूसरे के हाथ को पकड़ कर खींचते और ढकेलते हैं -- कैयांकळि, अटिपिटि

हाथी दाँत (पुं.) हाथी के मुँह के दोनों ओर निकले हुए सफेद दाँत -- आनक्‍कोम्पु. वंतम्

हानि (स्‍त्री.) क्षति, नुकसान -- दोषम्, नष्‍टम्

हार (स्‍त्री.) पराजय, जीत का विपर्याय -- तोल्वि, पराजयम्

हार (पुं.) फूलों-मोतियों आदि की माला -- हारम्, माल

हारना (अ.क्रि.) युद्‍ध, खेल आदि में पराजित होना, गँवाना, खोना -- तोल्कुक

हारना (अ.क्रि.) विफल होना -- निष्कलं आकुक

हार्दिक (वि.) हृदय में रहने या होने वाला, हृदय का -- हृदयंगममाय

हालचाल (पुं.) अवस्था, दशा, वृत्‍तांत, समाचार -- अवस्थ

हालाँकि (अव्य.) यद्‍यपि -- एङ्किलुम्

हालाँकि (अव्य.) अगरचे -- NA

हास्य (पुं.) हँसने की क्रिया या भाव, हँसी, हास -- चिरि

हास्य (पुं.) दिल्लगी, मजाक -- नेरंपोक्‍कु

हास्य (पुं.) साहित्य में नौ स्थायी भावों या रसों में से एक -- हास्यम्

हिंसा (स्‍त्री.) हत्या, वध -- वधम् कोल

हिंसा (स्‍त्री.) किसी प्रकार की हानि पहुँचाने, अनिष्‍ट या अपकार करने, कष्‍ट या दुख देने की क्रिया या भाव -- हिंस

हिचकी (स्‍त्री.) खाँसी, छींक, डकार आदि की तरह का एक शारीरिक व्यापार, जिसमें साँस लेने के समय क्षण भर के लिए फेफड़े का मुँह बंद होकर पेट की वायु कुछ रुक कर हल्का शब्द करती हुई बाहर निकलती है (हिकप) -- ऐङ्ङल, इक्‍किळ्

हिचकी (स्‍त्री.) उक्‍त के फलस्वरूप झटके से होने वाला तीव्र शब्द, जो कंठ से निकलता है -- विक्कुक

हितैषी (वि.) भला चाहने वाला, कल्याण मनाने वाला, हितचिंतक -- अभ्युदयकांक्षी, शुभाकांक्षी

हिनहिनाना (अ.क्रि.) घोड़े का हिन-हिन शब्द करना, हींसना -- करयुक

हिरासत (स्‍त्री.) किसी को इस प्रकार अपने बंधन या देख-रेख में रखना कि वह भाग कर कहीं जाने न पाए, अभिरक्षा, परिरक्षा -- कस्टडि, अधीनम

हिरासत (स्‍त्री.) वह स्थान, जहाँ उक्‍त प्रकार के लोग बंद करके रखे जाते हैं -- लोक्अप्

हिलाना (स.क्रि.) हिलने में प्रवृत्‍त करना, झुलाना -- इळक्कुक

हिलाना (स.क्रि.) हेल-मेल में लाना, परचाना -- इणक्कुक, ताळिक्कुक

हिसाब किताब (पुं.) लेखा-जोखा -- कणक्कु

हिसाब किताब (पुं.) व्यापारिक लेन-देन या व्यवहार -- भागम्

हिस्सा (पुं.) भाग, अंश, खंड -- पंकु, षेयर, ओहरि

हिस्सा (पुं.) वह धन जो किसी साझे की वस्तु या व्यवसाय में किसी एक या हर एक साझेदार ने लगाया हो (शेयर) -- भागम्

हिस्सा (पुं.) साझेदार को मिलने वाला आनुपातिक लाभ या अंश -- ओहरि विहितम्

हुंडी (स्‍त्री.) एक लिखित पत्र, जिस पर लिखा रहता है कि इतने रुपए अमुक व्यक्‍ति, महाजन या बैंक को दे दिए जाएँ -- हुंडी, उण्डियल्

हुंडी (स्‍त्री.) वह महाजनी पत्र, जिस पर यह लिखा रहता है कि ऋणकर्ता इतने दिनों में ब्याज समेत चुका देगा -- बोंडु, प्रमाणम्

हृदय (पुं.) कलेजा, दिल -- हृदयम्

हृदय (पुं.) अंत:करण -- अंत:करणं, विवेकं

हृष्‍ट-पुष्‍ट (वि.) मोटा-ताजा -- तटिच्‍च कोळुत्‍त

हेरा-फेरी (स्‍त्री.) चालबाजी, गड़बड़ -- तिरिमरि, कुऴप्पु

होना (अ.क्रि.) अस्तित्व में आना -- उण्डाकुक

होना (अ.क्रि.) कार्य या घटना का क्रियात्मक या वास्तविक रूप में सामने आना -- संभविक्कुक

होनी (स्‍त्री.) ऐसी घटना या बात, जिसका होना अनिवार्य हो -- विधि

होश (पुं.) चेतना, संज्ञा -- बोधम्

होश (पुं.) याद, स्मृति -- ओर्म

होशियार (वि.) सावधान, सतर्क, सजग, चौकस -- जाग्रतयुळळ

होशियार (वि.) चतुर, चालाक -- कौशलक्‍कारन्

होशियार (वि.) माहिर, कुशल, दक्ष -- विदग्धन्

ह्रास (पुं.) क्षय, नाश, घटती -- क्षीणम्, कुरवु

ह्रास (पुं.) पतन, अवनति -- पतनम्, अपकर्षम् अध:पतनम्


स्रोत[सम्पादन]

  • यह भारतीय भाषा कोश] से केवल मलयालम भाषा की प्रविष्टियों को छाँटकर बनाया गया है।