विधवा

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

विधवा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] वह स्त्री जिसका पति मर गया हो । पति- हीन स्त्री । रड़ि । बेवा । उ॰—(क) सुत वधू विधवा सों बोलि कै सुनायो लेहु धनपति गेह श्री गुपाल भरतार है ।—नाभा (शब्द॰) । (ख) ब्राह्मण विधवा नार सुर गुरु अंश चुरावहीं । कहैं न वचन विचार, परै सोई निरश्वास मँह ।—विश्राम (शब्द॰) । विशेष—स्मृतियों में विधवा स्त्रियों के लिये ब्रह्मचर्य तथा कठिन कठिन नियमो का पालन विधेय है । जैसे,—तांबूल और मद्य- मांस आदि का त्याग । द्विजातियों में विधवा के लिये पुनर्विवाह का नियम नहीं है । केवल पराशर संहिता में यह कहा गया है कि स्वामी के नष्ट अर्थात् लापता होने, मरने, अथवा संन्यासी, क्लीव या पतित होने पर स्त्री दूसरा पति कर सकती है । पर और स्मृतियों के साथ अविरोध सिद्ध करने के लिये पंडित लोग 'अन्य पति' शब्द का अर्थ 'दूसरा पालनकर्ता' किया करते हैं ।