विशेषण

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

विशेषण ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. वह जो किसी प्रकार की विशेषता उत्पन्न करता या बतलाया हो । विभेदक लक्षण या चिह्न ।

२. व्याकरण में वह विकारी शब्द जिससे किसी संज्ञा की कोई विशेषता सूचित होती है; अथवा उसकी व्याप्ति मर्यादित होती है । जैसो,—'वीर मराठे' या 'चपल बालक' में बीर और 'चपल' शब्द विशेषण है । विशेष—जब विशेषण किसी संज्ञा के साथ लगता है तब उसे विशेष्य विशेषण कहते हैं; और जब वह क्रिया के साथ लगता है, तब उसे विधेय विशेषण कहते हैं । जैसे,—'हमें तो संसार सूना देख पड़ता है ।यहाँ 'सूना' विधेय विशेषण है । साधार- णतः विशेषण तीन प्रकार के होते है—(१) सार्वनामिक विशेषण; जैसे,—'वह आदमी' चला गया । में 'वह' सार्वनामिक विशेषण है । (२) गुणवाचक विशेषण; जैसे, नया, पूराना, सडौल, सूखा, खराब आदि; और (३) संख्यावाचक विशेषण; जैसे,—आधा, एक चार, दसवाँ ।

३. प्रकार । किस्म । जाति (को॰) ।

४. भेद । अंतर । पार्थक्य (को॰) ।

५. गुणवर्णन या गुणोत्कर्ष (को॰) ।

विशेषण ^२ वि॰

१. गुण बतानेवाला । विशेषता बतानेवाला ।

२. प्रभेदक । व्यच्छेदक [को॰] ।

परिभाषा[सम्पादन]

  1. जिस शब्द से किसी व्यक़्ति या वस्तु की विशेषता अथवा गुण का बोध हो ।

उदाहरण : काला घोड़ा, छोटा बच्चा

संज्ञा[सम्पादन]

पु॰

अनुवाद[सम्पादन]