शक

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

शक ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. एक प्राचीन जाति । विशेष—पुराणों में इस जाति की उत्पत्ति सूर्यवंशी राजा नरिष्यंत से कही गई है । राजा सगर ने राजा नरिष्यंत को राज्यच्युत तथा देश से निर्वासित किया था । वर्णाश्रम आदि के नियमों का पालन न करने के कारण तथा ब्राह्मणों से अलग रहने के कारण वे म्लेच्छ हो गए थे । उन्हीं के वंशज शक कहलाए । आधुनिक विद्वनों का मत है कि मध्य एशिया पहले शकद्वीप के नाम से प्रसिद्ध था । युनानी इस देश को सीरिया कहते थे । उसी मध्य एशिया के रहनेवाला शक कहे जाते है । एक समय यह जाति बड़ी प्रतापशालिनी हो गई थी । ईसा से दो सौ वर्ष पहले इसने मथुरा और महाराष्ट्र पर अपना अधिकार कर लिया था । ये लोग अपने को देवपुत्र कहते थे । इन्होंने १९० वर्ष तक भारत पर राज्य किया था । इनमें कनिष्क और हविष्क आदि बड़े बड़े प्रतापशाली राजा हुए हैं ।

२. वह राजा या शासक जिसके नाम से कोई संवत् चले ।

३. राजा शालिवाहन का चलाया हुआ संवत् जो ईसा के ७८ वर्ष पश्चात् आरंभ हुआ था ।

४. शालिवाहन के अनुयायी अथवा उसके वंशज ।

५. संवत् । यौ॰—शककर्ता, शककृत् = दे॰ 'शककारक' । शककाल = दे॰ 'शक संवत्' । शक संवत् = राजा शालिवाहन का चलाया हुआ संवत् । दे॰ 'शक'—३ ।

६. तातार देश ।

७. जल ।

८. मल । गोमय ।

९. एक प्रकार का पशु ।

१०. संदेह । आशंका । भय । त्रास । डर ।

शक ^२ संज्ञा पुं॰ [अ॰] शंका । संदेह । द्विविधा । क्रि॰ प्र॰—करना ।—डालना ।—निकालना ।—पड़ना ।— मिटना ।—मिटना ।