शकाकुल

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

शकाकुल संज्ञा पुं॰ [अ॰ शकाकुल] शतावर की जाति की एक प्रकार की वनस्पति । शकाकुल मिस्त्री । धुधली । दुधली । गर्सदस्ती । विशेष—यह प्रायः मिस्त्र देश में अधिकता से होती और भारत के भी कुछ स्थानों, विशेषतः काश्मीर और अफगानिस्तान में पाई जाती है । यह प्रायः नम जमीन में वृक्षों के नीचे उगती है । यह बारहों मास रहती है । इसके डंठल डेड़ दो हाथ ऊँचे होते है । इसके पत्ते प्रायः अंगुल चौड़े और एक बालिश्त लंबे होते हैं । इसके पौधे को प्रत्येक गाँठ पर पत्ते होते हैं । इसमें नीली या लाल रंग के छोटे छोटे फूल गुच्छों में होते और काले रंग के फल लगते हैं । इसकी जड़ कंद के रुप में होती और बाजार में प्रायः 'शकाकुल मिस्त्री' के नाम से मिलती है । यह जड़ कामोद्दीपक तता स्नायुओं के लिये बलकारक मानी जाती है और विविध प्रकार का पौष्टिक औषधों में डाली जाती है । कंधार में इसके बीज ओषधि के काम में आते है । इसकी राख का क्षार (नमक) अर्श रोग में लाभदायक समझा जाता है । यह जड़ प्रायः काबूल से आती है और वहीं सबसे अच्छी भी होती है ।