शकुन्तला

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

शकुंतला संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ शकुन्तला]

१. राजा दुष्यत की स्त्री जो भारतवर्ष के सुप्रसिद्ध राजा भरत की माता और मेनका अप्सरा की कन्या थी । विशेष—महाभारत में लिखा है कि शकुंतला का जन्म विश्वामित्र के वीर्य से मेनका अप्सरा के गर्भ से हुआ था जो इसे वन में छोड़कर चली गई थी । वन में शकुंतों (पक्षियों) आदि ने हिंसक पशुओं से इसकी रक्षा की थी इसी से इसका नाम शकुंतला पड़ा । वन में से इसे कणव ऋषि उठा लाए थे और अपने आश्रम में रखकर कन्या के समान पालते थे । एक बार राजा दुष्यंत अपने साथ कुछ सैनिकों को लेकर शिकार खेलन े निकले और घूमते फिरते कणव ऋषि के आश्रम में पहुँचे । ऋषि उस समय वहाँ उपस्थित नहीं थे, इससे युवती शकुंतला ने ही राजा दुष्यंत का आतिथ्य सत्कार किया था । उसी अवसर पर दोनों में पहले प्रेम और फिर गंधर्व विवाह हो गया । कुछ दिनों के बाद राजा दुष्यंत वहाँ से अपने राज्य को चले गए । कणव मुनि जब लौटकर अपने आश्रम में आए, तब वे यह जानकर बहुत प्रसन्न हुए कि शकुंतला का विवाह दु्ष्यंत से हो गया । शकुंतला उस समय गर्भवती हो चुकी थी अतः समय पाकर उसके गर्भ से बहुत ही बलवान् और तेजस्वी पुत्र उत्पन्न हुआ, जिसका नाम भरत रखा गया । कहते हैं, इस देश का भारतवर्ष नाम इसी के कारण पड़ा कुछ दिनों बाद शकुंतला अपने पुत्र को लेकर राजा दुष्यंत दरबार में पहुँची । परंतु शकुंतला को बीच में दुर्वासा ऋषि का शाप मिल चुका था, इससे राजा ने बिलकुल न पहचाना और स्पष्ट कह दिया कि न तो मैं तुम्हैं जानता हुँ और न तुम्हें अपने यहाँ आश्रय दे सकता हुँ । परंतु उसी अवसर पर एक आकाश वाणी हुई जिससे राजा को विदित हुआ कि यह मेरी ही पत्नी है और यह पुत्र भी मेरा ही है । उसी समय उन्हें कणव मुनि के आश्रम के भी सब बातें स्मरण हो आईँ और उन्होंने शकुंतला को अपनी प्रधान रानी बनाकर अपने यहाँ रख लिया ।

२. महाकवि कालिदास का लिखा हुआ एक प्रसिद्ध नाटक जिसमें राजा दुष्यंत और शकुंतला के प्रेम, विवाह, प्रत्याख्यान और ग्रह्यण आदि का वर्णन है ।