शास्त्र
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]शास्त्र संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. हिन्दू परंपरा में ऋषि-मुनि आदि द्वारा रचित प्राचीन ग्रंथ, जिनमें धर्म, आचार, कर्तव्य, नीति तथा जीवन-व्यवहार संबंधी सिद्धांतों का वर्णन मिलता है। इन ग्रंथों में अनेक प्रकार के कर्तव्यों का विधान तथा अनुचित कर्मों का निषेध किया गया है। परंपरानुसार वेदाधारित ग्रंथों को शास्त्र कहा जाता है।
२. किसी विशिष्ट विषय का क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित ज्ञान; विज्ञान। जैसे—प्राणिशास्त्र, अर्थशास्त्र, वनस्पतिशास्त्र, व्याकरणशास्त्र।
४. धर्मशास्त्र की आज्ञा। [को॰]
६. सिद्धांत। [को॰]
७. ज्ञान। [को॰]
सरल अर्थ
[सम्पादित करें]- किसी विषय का व्यवस्थित और प्रमाणित ज्ञान।
- धर्म, नीति या किसी विद्या से संबंधित ग्रंथ।
- किसी विषय का नियम या सिद्धांत बताने वाली पुस्तक।
उदाहरण
[सम्पादित करें]- आयुर्वेद एक प्राचीन चिकित्सा-शास्त्र है।
- प्रत्येक शास्त्र का अपना विषय और अध्ययन-क्षेत्र होता है।
- विद्वान ने शास्त्रों का गहन अध्ययन किया।
व्युत्पत्ति
[सम्पादित करें]संस्कृत शास्त्र से तत्सम शब्द।
सम्बन्धित शब्द
[सम्पादित करें]विलोम
[सम्पादित करें]प्रयोग
[सम्पादित करें]यह शब्द धार्मिक, दार्शनिक, साहित्यिक तथा वैज्ञानिक सभी संदर्भों में किसी विषय के प्रामाणिक एवं व्यवस्थित ज्ञान के लिए प्रयुक्त होता है।