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शेर

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शेर

प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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शेर संज्ञा पुं॰ [फ़ा॰] [स्त्री॰ शेरनी]

१. बिल्ली की जाति का सबसे भयंकर प्रसिद्ध हिंसक पशु । बाघ । व्याघ्र । नाहर । यौ॰—शेरबबर, शेरबच्चा, शेरमर्द । मुहा॰—शेर का कान = भाँग छानने का कपड़ा । (भंगड़) । (चिराग) शेर करना = बत्ती बढ़ाकर रोशनी तेज करना । शेर का बाल = सिंह की मूँछ के बाल । शेर की खाला या मौसी = बिल्ली । मार्जार । शेर के मुँह में जाना = प्राणसंकट की जगह जाना । शेर के मुँह से शिकार छीनना = अत्यंत बहादुरी करके अपने से प्रबल से कोई वस्तु जबरन् ले लेना । शेर बकरी का एक घाट पर या एक साथ पानी पीना = गरीब अमीर सबके साथ समान न्याय करना । ठीक ठीक इंसाफ करना । शेर होना = निभय और धृष्ट होना । डर या दाब में न रहना । स्वेच्छाचारी और उद्दंड होना ।

२. अत्यंत वीर और साहसी पुरुष । बड़ा बहादुर आदमी । (लाक्षणिक) ।

शेर ^२ संज्ञा पुं॰ [अ॰] फारसी, उर्दू आदि की कविता के दो चरण ।

शेर गुलाबी संज्ञा पुं॰ [फ़ा॰] गहरा गुलाबी रंग ।