शोक

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

शोक संज्ञा पुं॰ [सं॰] इष्ट के नाश और अनिष्ट की प्रप्ति से उत्पन्न मनोविकार । किसी प्रिय व्यक्ति के अभाव या पीड़ा आदि से अथवा दुःखदायी घटना से उत्पन्न क्षोभ । रंज । गम । विशेष—साहित्य में 'शोक' नौ स्थायी भावों में से एक है और करुण रस का मूल है । पुराणों में 'शोक' मृत्यु का पुत्र कहा गया है ।