सँड़सा

विक्षनरी से
Jump to navigation Jump to search


हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

सँड़सा संज्ञा पुं॰ [ सं॰ सन्देश ] [स्त्री॰ अल्पा॰ सँड़सी] लोहे का एक औजार जो दो छड़ों से बनता है । गहुआ । जबूरा । विशेष—इसके एक सिरे पर थोड़ा सा छोड़कर दोनों छड़ों को आपस में कील से जड़ देते हैं । प्रायः इसे लोहार गरम लोहा आदि पकड़ने के लिय रखते हैं ।