संखिया

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

संखिया संज्ञा पुं॰ [सं॰ श्रृङ्गिका या श्रृङ्गविष]

१. एक प्रकार की बहुत जहरीली प्रसिद्ध उपधातु या पत्थर । विशेष—यह उपधातु कुमाऊँ, चित्राल, स्वात, काश्गर (कासगर), उत्तरी बरमा और चीन आदि में पाई जाती है । प्राय: इसका रंग सफेद या मटमैला होता है और यह चिकना तथा चमकीला होता है । जिस समय यह खान से निकलता है, उस समय बहुत कड़ा होता है और कठिनता से गलता है । पाश्चात्य वैज्ञानिक हरताल और मैनसिल को भी इसी के अंतर्गत मानते हैं । भारतवासी प्राय: यही समझते हैं कि पत्थर पर बहुत जहरीले बिच्छू के डंक मारने से यह संखिया बनता है ।

२. उक्त धातु का तैयार किया हुआ भस्म जो देशी भी होता है और विलायती भी ।