समझ

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

समझ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सज्ञान]

१. समझने की शकित । बुद्धि । अक्ल । जैसे,—तुम्हारी समझ की बलिहारी । मुहा॰—समझ पर पत्थर पड़ना = बुद्धि नष्ट होना । अक्ल का मारा जाना । जैसे,—उसकी समझ पर तो पत्थर पड़ गए हैं, वह हिताहितज्ञानशून्य हो गया है ।

२. खयाल । जैसे,—(क) मेरी समझ में उसने ऐसा कोई काम नहीं किया कि जिसके लिये उसकी निंदा की जाय । (ख) मेरी समझ में उन्होंने तुमको जो उत्तर दिया, वह बहुत ठीक था ।