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समझ

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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समझ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सज्ञान]

१. समझने की शक्ति; बुद्धि; अक्ल। जैसे— “तुम्हारी समझ की बलिहारी।”

मुहा॰—समझ पर पत्थर पड़ना = बुद्धि नष्ट होना; अक्ल का मारा जाना। जैसे— “उसकी समझ पर तो पत्थर पड़ गए हैं, वह हिताहितज्ञानशून्य हो गया है।”

२. खयाल; विचार; मत। जैसे—
(क) “मेरी समझ में उसने ऐसा कोई काम नहीं किया कि जिसके लिये उसकी निंदा की जाय।”
(ख) “मेरी समझ में उन्होंने तुमको जो उत्तर दिया, वह बहुत ठीक था।”

१. किसी बात को समझने, परखने और निर्णय लेने की मानसिक क्षमता।

२. किसी विषय के बारे में व्यक्ति का विचार या मत।

  • अच्छी समझ मनुष्य को सही निर्णय लेने में सहायता करती है।
  • मेरी समझ में यह उपाय सबसे उचित है।
  • बच्चों की समझ उम्र के साथ विकसित होती है।

व्युत्पत्ति

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संस्कृत ‘सज्ञान’ से विकसित हिन्दी रूप।

सम्बन्धित शब्द

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  • बुद्धि
  • अक्ल
  • ज्ञान
  • विचार
  • मत
  • समझ पर पत्थर पड़ना
  • समझ में आना
  • समझ से बाहर होना