सरसों

विक्षनरी से
Jump to navigation Jump to search

हिन्दी

संज्ञा

अनुवाद

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

सरसों संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सर्षप; तुल॰ फ़ा॰ सर्शक] एक धान्य या पौधा जिसके गोल गोल छोटे बीजों से तेल निकलता है । एक तेलहन । विशेष—भारत के प्रायः सभी प्रांतों में इसकी खेती की जाती है । इसका डंठल दो तीन हाथ ऊँचा होता है । पत्ते हरे और कटे किनारेवाले होते हैं । ये चिकने होते और डंठी से सटे रहते हैं । फलियाँ दो तीन अंगुल लंबी और गोल होती हैं जिनमें महीन बीज के दाने भरे होते हैं । कार्तिक में गेहूँ के साथ तथा अलग भी इसे बोते हैं । माघ तक यह तैयार हो जाता है । सरसों दो प्रकार की होती है—लाल और पीली या सफेद । इसे लोग मसाले के काम में भी लाते हैं । इसका तेल, जो कडुवा तेल कहलाता है, नित्य के व्यवहार में आता है । इसके पत्तों का साग बनता है ।