साँस

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

साँस संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ श्वास]

१. नाक या मुँह के द्धारा बाहर से हवा खींचकर अंदर फेफड़ों तक पहुँचाने और उसे फिर बाहर निकालने की क्रिया । श्वास । दम । विशेष—यद्यपि यह शब्द संस्कृत 'श्वास' (पुंल्लिंग) से निकला है और इसलिये पुंल्लिग ही होना चाहिए, परंतु लोग इसे स्त्रीलिंग ही बोलते है । परंतु कुछ अवसरों पर कुछ विशिष्ट क्रियाओं आदि के साथ यह केवल पुल्लिंग भी बोला जाता है । जैसे,—इतनी दुर से दौड़े हुए आए हैं, साँस फूलने लगा । क्रि॰ प्र॰—आना ।—जाना ।—लेना । मुहा॰—साँस अड़ना = दे॰ 'साँस रुकना' । साँस उखड़ना = (१) मरने के समय रोगी का देर देर पर और बड़े कष्ट से साँस लेना । (२) साँस दूटना । दम टूटना । उ॰—पवन पी रहा था शब्दों को निर्जनता की उखड़ी साँस ।—कामायनी, पृ॰ १९ । (३) साँस या दमा के रोगी का जोर जोर की खाँसी आने से श्लथ होना । साँस ऊपर उड़ना = प्राणांत होना । जीवनलीला सपाप्त होना । साँस ऊपर नीचे होना = साँस का ठीक तरह से ऊपर नीचे न आना । साँस रुकना । साँस का अंदर की अंदर और बाहर की बाहर रह जाना = भौंचक्का रह जाना । चकित रह जाना । साँस का टूट टूट जाना = धीरज का जाते रहना । उ—आस कैसे न टूट जाती तब, साँस जब टूट टूट जाती है ।—चुभते॰, पृ॰ ५१ । साँस खीचना = (१) नाक के द्धारा वायु अंदर की ओर खींचना । साँस लेना । (२) वायु अंदर खींचकर उसे रोक रखना । दम साधना । जैसे,—हिरन साँस खींचकर पड़ गया । साँस चढ़ना = अधिक वेग से या परिश्रम का काम करने के कारण साँस का जल्दी जल्दी आना और जाना । साँस चढ़ाना = दे॰'साँस खींचना' । साँस चलना = (१) जीवित होना । जीवित रहना । (२) रोग या अवस्थता की स्थिति में जल्दी जल्दी और जोर से साँस लेना । साँस छोड़ना = नाक द्धारा अंदर खींची हुई वायु को बाहर निका- लना । साँस टूटना = दे॰ 'साँस उखड़ना' । साँस डकार न लेना = किसी चीज को पूर्णतः पचा जाना । किसी चीज को इस प्रकार छिपाकर दाब जाना कि पता तक न चले । साँस तक न लेना = बिलकुल चुपचाप रहना । कु छ न बोलना । जैसे,—उनके सामने तो यह लड़का साँस नहीं लेता । साँस फूलना = बार बार साँस आना और जाना । साँस चढ़ना । साँस भरना = दे॰ 'ठंढी साँस लेना' । साँस रहते = जीते जी । जीवन पर्यत । साँस रुकना = साँस के आने और जाने में बाधा । श्वास की क्रिया में बाधा होना । जैसे,—यहाँ हवा की इतनी कमी है साँस रुकती है । साँस लेना = (१) नाक के द्धारा वायु खींचकर अंदर लेना और फिर उसे बाहर निकालना । (२) सुस्ताना । थोड़ी देर आराम करना । अंतिम साँस लेना = प्राणांत होना । मर जाना । अंतिम साँसे गिनना = मरने के निकट होना । आसन्न मृत्यु होना । उलटी साँस लेना = (१) दे॰ 'गहरी साँस भरना या लेना' । (२) मरने के समय रोगी का बडे़ कष्ट से अंतिम साँस लेना । ऊपर को साँस चढ़ना = मरणासन्न होना । मृत्यु का निकट होना । साँसों में जी का होना = मरणा- सन्न होना । मृत्यु का निकट होना । गहरी साँस भरना या लेना = बहुत अधिक दुःख आदि के आवेग के कारण बहुत देर तक अंदर की ओर वायु खींचते रहना और उसे कुछ देर तक रोक कर बाहर निकालना । ठंढी या लंबी साँस लेना = दे॰ 'गहरी साँस भरना या लेना' ।

२. अवकाश । फुरसत । विश्राम । मुहा॰—साँस लेना = थक जाने पर विश्राम लेना । ठहर जाना । जैसे,—(क) घंटों से काम कर रहे हो, जरा साँस ले लो । (ख) वह जबतक काम पूरा न कर लेगा तबतक साँस न लेगा । साँस लेने या मारने तक की फूरसत न होना = बिल्कुल अवकाश न रहना । अत्यंत व्यस्त होना ।

३. गुंजाइश । दम । जैसे,—अभी इस मामले में बहुत कुछ साँस है ।

४. वह संधि या दरार जिसमें से होकर हवा जा या आ सकती है । मुहा॰—(किसी पदार्थ का) साँस लेना = किसी पदार्थ में संधि या दरार पड़ जाना । (किसी पदार्थ का) बीच में से फट जाना या नीचे की ओर धँस जाना । जैसे,—(क) इस भूकंप में कई मकानों और दीवारों ने साँस ली है । (ख) इस भाथी में कहीं न कहीं साँस जरुर है; इसी से पूरी हवा नही लगती ।

५. किसी अवकाश के अंदर भरी हुई हवा । मुहा॰—साँस निकलना = (१) किसी चीज के अंदर भरी हुई हवा का बाहर निकल जाना । जैसे,—टायर की साँस निकलना, फुटबाल की साँस निकलना । (२) प्राणांत होना । समाप्त हो जाना । साँस भरना = (१) किसी चीज के अंदर हवा भरना । (२) अत्यधिक थकान से जल्दी जल्दी और जोर की साँस आना ।

६. वह रोग जिसमें मनुष्य बहुत जोरों से, पर बहुत कठिनता से साँस लेता है । दम फूलने का रोग । श्वास । दमा । क्रि॰ प्र॰—फूलना ।