साम्यवाद

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

साम्यवाद संज्ञा पुं॰ [सं॰] एक प्रकार का पाश्चात्य सामाजिक (समाजवादी) सिद्धांत । समष्टिवाद । उ॰—थे राष्ट्र, अर्थ, जन, साम्यवाद, छल सम्य जगत के शिष्ट मान ।—युगांत, पृ॰ ५८ । विशेष—इस सिद्धांत का प्रवर्तन ईसा की उन्नीसवीं शताब्दी में हुआ माना जाता है । इस सिद्धांत का प्रतिपादन कार्लमार्क्स ने किया है जो जर्मनी का निवासी था । इस सिद्धांत के प्रचारक समाज में साम्य स्थापित करना चाहते है और उसका वर्तमान े वैषम्य दूर करना चाहते हैं । वे लोग चाहते हैं कि समाज से व्यक्तिगत प्रतियोगिता उठ जाय और भूमि तथा उत्पादन के समस्त साधनों पर किसी एक व्यक्ति का अधिकार न रह जाय, बल्कि सारे समाज का अधिकार हो जाय । इस प्रकार सब लोगों में धन आदि का बराबर बराबर वितरण हो; न तो कोई बहुत गरीब रह जाय और न कोई बहुत अमीर रह जाय ।