सिंहावलोकन

विक्षनरी से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

सिंहावलोकन संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. सिंह के समान पीछे देखते हुए आगे बढ़ना ।

२. आगे बढ़ने के पहले पिछली बातों का संक्षेप में कथन ।

३. पद्यरचना की एक युक्ति जिसमें पिछले चरण के अंत के कुछ शब्द या वाक्य लेकर अगला चरण चलता है । उ॰— गाय गोरी सोहनी सुराग बाँसुरी के बीच कानन सुहाय मार मंत्र को सुनायगो । नायगो री नेह डोरी मेरे गर में फँसाय हिरदै थल बीच चाय वेलि को बँधायगो ।—दीनदयाल (शब्द॰) ।