सिर

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

सिर ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ शिरस्]

१. शरीर के सबसे अगले या ऊपरी भाग का गोल तल जिसके भीतर मस्तिष्क रहता है । कपाल । खोपड़ी ।

२. शरीर का सबसे अगला या ऊपर का गोल या लंबोतरा अंग जिसमें आँख, कान, नाक और मुँह ये प्रधान अवयव होते हैं और जो गरदन के द्रारा धड़ से जुड़ा रहता है । उ॰—उत्थि सिर नवइ सब्ब कइ ।—कीर्ति॰, पृ॰ ५० । मुहा॰—सिर अलग करना = सिर काटना । प्राण ले लेना । सिर आँखों पर होना = सहर्ष स्वीकार होना । माननीय होना । जैसे,—आपकी आज्ञा सिर आँखों पर है । सिर आँखों पर बिठाना, बैठाना या रखना = बहुत आदर सत्कार करना । (भूत प्रेत या देवी देवता का) सिर आना = आवेश होना । प्रभाव होना । खेलना । सिर उठाना = (१) ज्वर आदि से कुछ फुरसत पाना । जैसे,—जब से बच्चा पड़ा है, तब से सिर नहीं उठाया है । (२) विरोध में खड़ा होना । शत्रुता के लिये संनद्ध होना । मुकाबिल के लिये तैयार होना । जैसे,— बागियों ने फिर सिर उठाया । (३) ऊधम मचाना । दंगा फसाद करना । शरारत करना । उपद्रव करना । (४) इतराना । अकड़ दिखाना । घमंड करना । (५) सामने मुँह करना । बराबर ताकना । लज्जित न होना । जैसे,—ऊंची नीची सुनता रहा, पर सिर न उठाया । (६) प्रतिष्ठा के साथ खड़ा होना । इज्जत के साथ लोगों से मिलना । जैसे,—जब तक भारतवासियों की यह दश है, तब तक सभ्य जातियों के बीच वे कैसे सिर उठा सकते हैं ? उ॰—मान के ऊँचे महल मे या जिसे, सिर उठाये जाति के बच्चे घुसे ।—चुभते॰, पृ॰ ५ । सिर उठाने की फुरसत न होना = जरा सा काम छोड़ने को छुट्टी न मिलना । कार्य की अधिकता होना । सिर उठाकर चलना = इतराकर चलना । घमंड दिखाया । अकड़कर चलना । सिर उतरवाना = सिर कटाना । मरवा डालना । सिर उतारना = सिर काटना । भार डालना । (किसी का) सिर ऊँचा करना = संमान का पात्र बनाना । इज्जत देना । (अपना) सिर ऊँचा करना = प्रतिष्ठा के साथ लोगों के बीच खड़ा होना । दस आदमियों में इज्जत बनाए रखना । सिर औंधाकर पड़ना = चिंता और शोक के कारण सिर नीचा किए पड़ा या बेठ ा रहना । सिर काढ़ना = प्रसिद्ध होना । प्रसिद्धि प्राप्त करना । सिर करना = (स्त्रियों के) बाल बाल सँवारना । चोटी गूँथना । (कोई वस्तु) सिर करना = जबरदस्ती देना । इच्छा के विरुद्ध सपुर्द करना । गले मढ़ना । सिर कलम करना या काटना = सिर उतारना । मार डालना । सिर का बोझटलना = निश्चिंतता होना । झंझट टलना । सिर का बोझ टालना = बेगार टालना । अच्छी तरह न करना । जो लगाकर न करना । सिर के बल चलना = बहुत अधिक आदरपूर्वक किसी के पास जाना । उ॰—जो मिले जी खोलकर उनके यहाँ, चाह होती है कि सिर के बल चले ।—चोखे॰, पृ॰ १४ । सिर खपाना = (१) सोचने विचारने में बैरान होना । (२) कार्य मे व्यग्र होना । सिर खाली करना = (१) बकवाद करना । (२) माथा पच्ची करना । सोच विचार में हैरान होना । सिर खाना = बकवाद करके जी उबाना । व्यर्थ की बातें करके तंग करना । सिर खुजलाना = मार खाने को जी चाहना । शामत आना । नटखटी सूझना । सिर चकराना = दे॰ 'सिर घूमना' । सिर चढ़ जाना = (१) मुँह लग जाना (२) गुस्ताख होना । निहायत बे अदब होना । उ॰—नवाब साहब ने जो हँसी हँसी में उस दिन जरी मुँह लगाया तो सिर चढ़ गई ।—सैर॰, पृ॰ २९ । सिर चढ़ा = मुँह लगा । लाड़ला । धृष्ट । सिर चढ़ाना = (१) माथे लगाना । पूज्य भाव दिखाना । आदरपूर्वक स्वीकार करना । सिर माथे लेना । उ॰—नृप दूतहिं बीरा दीनौ । उनि सिर चढ़ाइ करि लीनौ ।—सुंदर॰ ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ १२० । (२) बहुत बढ़ा देना । मुँह लगाना । गुस्ताख बनाना । (३) किसी देवी देवता के सामने सिर काटकर बलि चढ़ाना । सिर घृमना = (१) सिर में दर्द होना । (२) घबराहट या मोह होना । बेहोशी होना । सिर चढ़कर बोलना = (१) भूत प्रेत का सिर पर आकार बोलना । (२) स्वयं प्रकट हो जाना । छिपाए न छिपना । सिर चढ़कर मरना = किसी को अपने खून का उत्तरदायी ठहराना । किसी के ऊपर जान देना । सिर चला जाना = मृत्यु हो जाना । सिर जोड़कर बैठना = मिलकर बैठना । सिर जोड़ना = (१) एकत्र होना । पंचायत करना । (२) एका करना । षड्यंत्र रचना । सिर झाड़ना = बालों में कंघी करना । सिर झुकाना = (१) सिर नवाना । नमस्कार करना । (२) लज्जा से गरदन नीची करना । (३) सादर स्वीकार करना । चुपचाप मान लेना । सिर टकराना = सिर फोड़ना । अत्यंत परिश्रम करना । (किसी के) सिर डालना = सिर मढ़ना । दूसरे के ऊपर कार्य का भार देना । सिर टूटना = (१) सिर फटना । (२) लड़ाई झगड़ा होना । सिर तोड़ना = (१) सिर फोड़ना । (२) खूब मारना पीटना । (३) वश में करना । सिर दर्द के लिये मूँड़ कटाना = छोटी बात के लिये बड़ा नुकसान करना । उ॰—रोजमर्रा की जलन से बचने के लिये अलबत्ता ऐसी स्त्री को अलग कर दिया जा सकता है, परंतु वह सिर दर्द के लिये मूँड़ कटाने का इलाज है ।—पिँजरे॰, पृ॰ ११४ । सिर देना = प्राण निछावर करना । जान देना । सिर धरना = सादर स्वीकार करना । मान लेना । अंगीकार करना । (किसी के) सिर धरना = आरोप करना । लगाना । मढ़ाना । उत्तरदायी बनाना । सिर धुनना = शोक या पछतावे से सिर पीटना । पछताना । हाथ मिलना । शोक करना । उ॰—कीन्हे प्राकृत जन गुनगाना । सिर धनि गिरा लगति पछिताना ।—मानस, पृ॰ १० । सिर नंगा करना = (१) सिर खोलना । (२) इज्जत उतारना । सिर नवाना = (१) सिर झुकाना । नमस्कार करना । (२) विनीत बनना । दीन बनना । आजिजी करना । सिर भिन्नाना = सिर चकराना । (अपना सिर) नीचे करना = अप्रतिष्ठा होना । इज्जत बिगड़ना । मान भंग होना । (२) पराजय होना । हार होना । (३) लज्जा होना । सिर पचाना = (१) परिश्रम करना । उद्योग करना । (२) सोचने विचारने में हैरान होना । सिर पटकना = (१) सिर फोड़ना । सिर धुनना । (२) बहुत परिश्रम करना । (३) अफसोस करना । हाथ मलना । सिर पर कफन बाँधकर चलना = प्रति पल मृत्यु के लिये तैयार रहना । सिर पर किसी का न होना = निरंकुश रहना । कोई रोकने टोकनेवाला न होना । उ॰— कोई उनके सिर पर तो है नहीं, अपनी आप मुख्तार हैं ।— फिसाना॰, भा॰ ३, पृ॰ ३७ । सिर पर आ पड़ना = अपने ऊपर घटित होना । ऊपर आ बनना । सिर पर आ जाना = (१) बहुत समीप आ जाना । (२) थोड़े ही दिन और रह जाना । सिर पर उठा लेना = ऊधम जोतना । धूम मचाना । सिर पर चढ़ जाना = गुस्ताखी करना । बेअदबी करना । मुँह लगाना । उ॰— एक दफा तरह दी तो अब सिर पर चढ़ गया ।—फिसाना॰, भा॰ ३, पृ॰ १२५ । (अपने) सिर पर पाँव रखना = बहुत जल्द भाग जाना । हवा होना । (किसी के) सिर पर पाँव रखना = किसी के साथ बहुत उद्दंडता का व्यवहार करना । सिर पर धरती या पृथ्वी उठाना = बहुत उत्पात करना । सिर पर पड़ना = (१) जिम्मे पड़ना । (२) अपने ऊपर घटित होना । गुजरना । सिर पर खेलना = जान को जोखों में डालना । सिर पर खून चढ़ना या सवार होना = (१) जान लेने पर उतारू होना । (२) इत्या के कारण आपे में न रहना । सिर पर रखना = प्रतिष्ठा करना । मान करना । सिर पर छप्पर रखना = बोझ से दबाना । दबाव डालना । सिर पर मिट्टी डालना = शोक करना । सिर पर लेना = ऊपर लेना । जिम्मे लेना । सिर पर शैतान चढ़ना = गुस्सा चढ़ना । सिर पर जूँ न रेंगना = ध्यान न होना । चेत न होना । होश न आना । सिर रहना = मान रहना । प्रतिष्ठा बनी रहना । (किसी के) सिर डालना = माथे मढ़ना । आरोपण करना । सिर पर बीतना = सिर पर पड़ना । सिर पर होना = थोड़े ही दिन रह जाना । बहुत निकट होना । (किसी का किसी के) सिर पर होना = संरक्षक होना । रक्षा करनेवाला होना । सिर परहाथ धरना या रखना = (१) संरक्षक होना । सहायक होना । (२) शपथ खाना । सिर पड़ना = (१) जिम्मे पड़ना । भार ऊपर दिया जाना । (२) हिस्से में जाना । सिर पड़ी सहना = अपने जिम्मे आई विपत्ति या झंझट को झेलना । उ॰—पक गया जी नाक में दम हो गया, तुम न सुधरे, सिर पड़ी हमने सही ।—चोखे॰, पृ॰ ४७ । सिर पर हाथ फेरना = प्यार करना । आश्वासन देना । ढारस बँधाना । उ॰—बेत रह फेर में पड़े हम हैं, फेरते हाथ क्यों नहीं सिर पर ।—चुभते॰, पृ॰ ४ । सिर फिरना = (१) सिर घूमना । सिर चकराना । (२) पागल हो जाना । उन्माद होना । (३) बुद्धि नष्ट होना । सिर फोड़ना = (१) लड़ाई झगड़ा करना । (२) कपालक्रिया करना । सिर फेरना = कहा न मानना । अवज्ञा करना । अस्वीकार करना । सिर बाँधना = (१) सिर पर आक्रमण करना । (पटेबाजी) । (२) चोटी करना । सिर गुँथना । (३) घोड़े की लगाम इस प्रकार पकड़ना कि चलते समय घोड़े की गर्दन सीधी रहे । सिर बेचना = सिर देना । फौज की नौकरी करना । सिर भारी होना = सिर में पीड़ा होना । सिर घूमना । सिर मारना = (१) समझाते समझाते हैरान होना । (२) सोचने विचारने में हैरान होना । सिर खपाना । (३) चिल्लाना । पुकारना । (४) बहुत प्रयत्न करना । अत्यंत श्रम करना । सिर मुँड़ाना = (१) बाल बनवाना । (२) जोगी बनना । फकीरी लेना । संन्यासी होना । सिर मुँड़ाते ही ओले पड़ना = आरंभ में ही कार्य बिगड़ना । कार्यारंभ होते ही विघ्न पड़ना । सिर मढ़ना = जिम्मे करना । इच्छा के विरुद्ध सपुर्द करना । सिर रँगना = सिर फोड़ना । सिर लोहू लोहान करना । सिर रहना = (१) किसी के पीछे पड़ना । (२) रात दिन परिश्रम करना । सिर सफेद होना = वृद्धावस्था आ जाना । सिर पर सेहरा होना = किसी कार्य का श्रेय प्राप्त होना । वाहवाही मिलना । सिर सहलाना = खुशामद करना । प्यार करना । सिर से बला टालना = बेगार टालना । जी लगाकर काम न करना । सिर से बोझ उतरना = (१) झंझट दूर होना । (२) निश्चिंचतता होना । सिर से पानी गुजरना = सहने की पराकाष्ठा होना । असह्य हो जाना । सिर घुटाना या घोटाना = सिर मुड़ाना । सिर से पैर तक = आरंभ से अंत तक । चोटी से एड़ी तक । सर्वांग में । पूर्णतया । सिर से पैर तक आग लगना = अत्यंत क्रोध होना । आग बबूला होना । सिर से चलना = बहुत संमान करना । सिर के बल चलना । सिर से सिरवाहा है = सिर के साथ पगड़ी है । अर्थात् सरदार के साथ फौज अवश्य रहेगी । मालिक के साथ उसके आश्रित अवश्य रहेंगे । सिर से कफन बाँधना = मरने के लिये उद्यत होना । सिर से खेलना = सिर पर भूत आना । सिर से खेल जाना = प्राण दे देना । सिर पर सींग होना = कोई विशेषता होना । खसूसियत होना । सुरखाब का पर होना । सिर का पसीना पैर तक आना = बहुत परिश्रम होना । सिर हथेली पर लेना = मृत्यु के लिये हरदम तैयार रहना (किसी का किसी के) सिर होना । (१) पीछेपड़ना । पीछा न छोड़ना । साथ साथ लगा रहना । (२) बार बार किसी बात का आग्रह करके तंग करना । (३) उलझ पड़ना । झगड़ा करना । (किसी बात के) सिर होना = ताड़ लेना । समझ लेना । (दोष आदि किसी के) सिर होना = जिम्मे होना । ऊपर पड़ना । जैसे,—यह अपराध तुम्हारे सिर है ।

२. ऊपर की और । सिरा । चोटी ।

३. किनारा ।

४. किसी वस्तु का ऊपरी भाग ।

४. सरदार । प्रधान । जैसे, सिर से सिरवाहा ।

५. दिमाग । अक्ल ।

६. शुरूआत । प्रारंभ ।

सिर ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ शिर] पिपरामूल । पिप्पलीमूल ।

सिर ^३ संज्ञा पुं॰ [अ॰ सिर्र] रहस्य । मर्म । भेद । राज [को॰] ।