सुहाना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

सुहाना ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ शोभन]

१. शोभायमान होना । शोभा देना । उ॰—(क) शंकर शैल शिलातल मध्य किधौं शुक की अवली फिरि आई । नारद बुद्धि विशारद दीप किधौं तुलसीदल माल सुहाई । —केशव (शब्द॰) । (ख) यज्ञ नाम हरि तब चलि आए । कोटि अर्क सम तेज सुहाए । —गि॰ दास (शब्द॰) । (ग) कामदेव कहँ पूजती ऐसी रही सुहाय । नव पल्लव युत पेड़ जनु लता रही लपटाय । —बालमुकुंद गुप्त (शब्द॰) ।

२. अच्छा लगना । भला मालूम होना । उ॰— (क) भयो उदास सुहात न कछु ये छन सोवत छन जागे ।— सूर (शब्द॰) । (ख) फूली लता द्रुम कुंज सुहान लगे ।— सुंदरीसर्वस्व (शब्द॰) ।

सुहाना ^२ वि॰ [वि॰ स्त्री॰ सुहानी]दे॰ 'सुहावना' । उ॰—(क) सारी पृथ्वी इस वसंत की वायु से कैसी सुहानी हो रही है । —हरि- श्चंद्र (शब्द॰) । (ख) सौतिन दियो सुहाग ललन हू आजु सयानी । जामिनि कामिनि स्याम काम की समै सुहानी । — व्यास (शब्द॰) ।