सेम

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

सेम संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ शिम्बी] एक प्रकरा की फली जिसकी तरकारी खाई जाती है । विशेष—इसकी लता लिपटती हुई बढ़ती है । पत्ते एक एक सींके पर तीन तीन रहते हैं और वे पान के आकार के होते हैं । सेम सफेद, हरी, मजंटा आदि कई रंगों की होती है । फलियाँ लंबी, चिपटी और कुछ टेढ़ी होती हैं । यह हिंदुस्तान में प्रायः सर्वत्र बोई जाती है । वैद्यक में सेम मधुर, शीतल, भारी, कसैली, बलकारी, वातकारक, दाहजनक, दीपन तथा पित्त और कफ का नाश करनेवाली मानी गई है । यौ॰—सेम का गोंद = एक प्रकार के कचनार का गोंद जो देहरादून की ओर से आता है और इंद्रिय जुलाब या रज खोलने के लिये दिया जाता है । विशेष दे॰ 'कचनार' ।