स्मृति

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हिन्दी[सम्पादन]

अर्थ[सम्पादन]

स्मृति एक प्रकार की याद होती है।

उदाहरण[सम्पादन]

  1. हमारे अतीत में हुए घटनाओं की स्मृति बहुत ही धूमिल होती है।
  2. केवल कुछ घटनाएँ ही हमारे स्मृति में संचित होती है।

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

स्मृति संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. स्मरण शक्ति के द्वारा संचित होनेवाला ज्ञान ।

२. स्मरण । याद ।

३. दक्ष की कन्या और अंगिरा की पत्नी के गर्भ से उत्पन्न एक कन्या ।

४. हिंदुओं के धर्मशास्त्र जिनकी रचना ऋषियों और मुनियों आदि ने, वेदों का स्मरण या चिंतन करके की थी और जिसमें धर्म, दर्शन, आचार, व्यवहार, प्रायश्चित्त, शासन, नीति आदि के विवेचन हैं । विशेष—हिंदुओं के धार्मिक ग्रंथ दो भागों में विभक्त है —श्रुति और स्मृति । इनमें से वेद, ब्राह्मण और उपनिषद् आदि श्रुति के अंतर्गत है (दे॰ 'श्रुति'); और शेष धर्मशास्त्रों को स्मृति कहते हैं । स्मृति के अंतर्गत नीचे लिखे ग्रंथ आते हैं — (क) छह वेदांग । (ख) गृह्म, आश्वलायन, सांख्यायन, गोभिल पारस्कर, बौधायन, भारद्वाज और आपस्तंबादि सूत्र । (ग) मनु, याज्ञवल्क्य, अत्रि, विष्ण, हारीत, उशनस, अंगिरा, यम, कात्यायन, बुहस्पति, पराशर, व्यास, दक्ष, गौतम, वशिष्ठ, नारद और भृगु आदि के रचे हुए अठारह धर्मशास्त्र । (घ) रामायण और महाभारत आदि इतिहास । (च) अठारह पुराण और (छ) सब प्रकार के नीतिशास्त्र के ग्रंथ ।

५. (अठारह धर्मशास्त्रो के कारण) अठारह की संख्या की संज्ञा-१८ ।

६. एक प्रकार का छंद ।

७. इच्छा । कामना ।

८. चिंतन । ध्यान (को॰) ।

९. सदृश वस्तु के अवलोकन, चिंतन आदि से पूर्वानुभूत वस्तु का स्मरण । एक संचारी भाव (को॰) ।