स्वार्थ

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

स्वार्थ ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. अपना उद्देश्य । अपना मतलब । अपना प्रयोजन । जैसे,—वह ऊपर से उनका मित्र बनकर भीतर ही भीतर स्वार्थ साधन कर रहा है ।

२. अपना लाभ । अपनी भलाई । अपना हित । जैसे॰—(क) इसमें उसका स्वार्थ है, इसी से वह इतनी दौड़धूप कर रहा है । (ख) वह अपने स्वार्थ के लिये जो चाहे सो कर सकता है । (ग) वे जिस काम में अपने स्वार्थ की हानि देखते हैं, उसमें कभी नहीं पड़ते । मुहा॰—(किसी बात में) स्वार्थ लेना=दिलचस्पी लेना । अनुराग रखना । जैसे,—राजकीय बातों में स्वार्थ लेनेवाले जो लोग योरप में यह समझते हैं कि राजसत्ता की हद्द होनी चाहिए, वे बहुत थोड़े हैं । —द्बिवेदी (शब्द॰) । विशेष—यह मुहा॰ अँगरेजी मुहा॰ का अविकल अनुवाद है, अतः प्रशस्त नहीं है ।

३. अपना धन ।

४. शब्द का अपना अर्थ । अभिधार्थ । वाच्यार्थ (को॰) ।

स्वार्थ ^२ वि॰

१. अपने ही स्वार्थ में रुचि रखनेवाला । स्वार्थपरायण ।

२. अपना अर्थ रखनेवाला । वाच्यार्थ से युक्त ।

३. जिसका कोई निजी मतलब या प्रयोजन हो ।

४. बहु अर्थ या शब्दयुक्त [को॰] ।

स्वार्थ ^३ वि॰ [सं॰ सार्थक]

१. सार्थक । सफल । जैसे,—आपका दर्शन पाय जन्म स्वार्थ किया । —लल्लू (शब्द॰) ।