हँकारना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

हँकारना पु ^१ क्रि॰ स॰ [हिं॰ हँकार + ना (प्रत्य॰)]

१. आवाज देकर किसी को संबोधन करना । जोर से पुकारना । ऊँचे स्वर से बुलाना । टेरना । नाम लेकर चिल्लाना । उ॰—ऊँचे तरु चढ़ि श्याम सखन को बारंबार हँकारत ।—सूर (शब्द॰) ।

२. अपने पास आने को कहना । बुलाना । पुकारना । उ॰—(क) धाय दामिनी बेग हँकारी । ओहि सौंपा हीये रिस भारी ।— जायसी (शब्द॰) । (ख) देखी जनक भीर भइ भारी । शुचि सेवक सब लिए हँकारी ।—तुलसी (शब्द॰) । संयो॰ क्रि॰—देना ।—लेना ।

३. दान कराना । बुलवाना । उ॰—जाचक लिये हँकारि, दीन्हि निछावर कोटि विधि । चिर जीवहु सुत चारि, चक्रवतिं दसरत्थ के । मानस, १ । २९५ ।

४. युद्ध के लिये आह्वान करना । ललकारना । हाँक देना । उ॰—देखत तहाँ जुरे भट भारी । एक एक सन भिरे हँकारी ।—रघुराज (शब्द॰) ।

हँकारना ^२ क्रि॰ अ॰ गरजना । हुंकार करना ।