हँड़िया
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संज्ञा
[सम्पादित करें]हँड़िया (स्त्रीलिंग) 1. मिट्टी का एक बड़ा बर्तन जिसमें चावल, दाल आदि पकाई जाती है। 2. ऐसा काँच या शीशे का पात्र जो सजावट के लिए टांगा जाता है और जिसमें दीपक या मोमबत्ती जलाई जाती है। 3. जौ, चावल आदि को सड़ाकर बनाई गई पारंपरिक शराब।
व्युत्पत्ति
[सम्पादित करें]संस्कृत शब्द **भाण्डिका** या **हण्डिका** से उत्पन्न।
उच्चारण
[सम्पादित करें]- IPA: /ɦəɳ.ɖi.jaː/
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]हँड़िया संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ भाण्डिका अथवा हण्डिका]
१. बड़े लोटे के आकार का मिट्टी का बरतन जिसमें चावल दाल पकाते या कोई वस्तु रखते हैं । हाँडी । मुहा॰—हाँड़िया चढ़ाना = कोई वस्तु पकाने के लिये पानी रखकर हाँड़ी आँच पर रखना । हँढ़िया दागना = भोजन पकाना । पकाने के लिये हँडिया को अग्नि पर रखना ।
२. इस आकार का शीशे का पात्र जो शोभा के लिये लटकाया जाता है और जिसमें मोमबत्ती जलाई जाती है ।
३. जौ, चावल आदि सड़ाकर बनाई हुई शराब ।
मुहावरे / प्रयोग
[सम्पादित करें]- **हँड़िया चढ़ाना** — किसी चीज़ को पकाने के लिए पानी डालकर हँड़िया आग पर रखना।
- **हँड़िया दागना** — भोजन पकाना; अग्नि पर हँड़िया रखना।
उदाहरण
[सम्पादित करें]- दादी मिट्टी की हँड़िया में दाल पका रही हैं।
- त्योहार पर घर में हँड़िया लटकाई गई थी।
- गाँव में लोग हँड़िया (शराब) पीने के लिए मशहूर हैं।