हस्ती

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

हस्ती ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ हस्तिन्] [स्त्री॰ हास्तिनी]

१. हाथी । विशेष—हेमचंद्र ने कहा है कि हस्ती चार प्रकार के कहे गए हैं- भद्र, मंद्र, मृग और मिश्र । पृथ्वीराज रासो में भद्र, मंद, मृग, और साधारण ये चार भेद कहे हैं । भोजराजकृत युक्तिकल्परु में इनके संबंध में विशेष विवरण द्रष्टव्य है ।

२. अजमोदा ।

३. धृतराष्ट्र के एक पुत्र का नाम ।

४. चंद्रवंशी राजा सुहोत्र के एक पुत्र जिन्होंने हस्तिनापुर नगर बसाया था ।

हस्ती ^२ वि॰

१. जिसको हाथ हों । हस्तयुक्त । हाथवाला ।

२. सूँड़वाला । शुंडयुक्त ।

३. कार्यकुशल । चतुर । होशियार [को॰] ।

हस्ती ^३ संज्ञा स्त्री॰ [फ़ा॰]

१. अस्तित्व । होने का भाव । जैसे,—इसमें तो उनकी हस्ती ही मिट जायगी ।

२. बड़ा व्यक्तित्व । मुहा॰—(किसी की) क्या हस्ती है = क्या गिनती है । कोई महत्व नहीं । तुच्छ है । हस्ती मिटना = (१) अस्तित्व समाप्त होना । (२) रोबदाब खतम होना । हस्ती मिटाना = (१) नष्ट करना । (२) व्यक्तित्व समाप्त करना । हस्ती रखना = (१) अस्तित्व रखना (२) रोबदाब होना । दबदबा होना । हस्ती होना = दे॰ 'हस्ती रखना' ।