हाट

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

हाट ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ हट्ट]

१. वह स्थान जहाँ कोई व्यवसायी बेचने के लिये चीजें रखकर बैठता है । दूकान ।

२. वह स्थान जहाँ बिक्री की सब प्रकार की वस्तुएँ रहती हों । बाजार । उ॰—प्रेम बिकंता मै सुना, माथा साटें हाट । बूझत बिलँब न कीजिए ततछित दीजै काट ।—संतवाणी॰, पृ॰ १९ । यौ॰—हाटाबाट = पण्यवीथिका । बाजार । उ॰—(क) शतसंख्य हाटबाट भमंते ।—कीर्ति॰, पृ॰ २८ । (ख) हाट बाट नहि जाइ निहारी ।—मानस, २ ।१५९ । हाट बाजार = दे॰ 'हाटबाट ।' मुहा॰—हाट करना = (१) दूकान रखकर बैठना । (२) सौदा लेने के लिये बाजार जाना । हाट खोलना = (१) दूकान रखना । रोजगार करना । (२) दूकान पर आकर बिक्री की चीजें निकालकर रखना । हाट बाजार करना = सौदा लेने बाजार जाना । जैसे,—वह स्त्री हाट बाजार करती है । हाट लगना = दूकान या बाजार में बिक्री की चीजें रखी जाना । हाट चढ़ना = बाजार में बिकने के लिये आना । उ॰—पंडित होइ सो हाट न चढ़ा- जायसी (शब्द॰) । हाट जाना = कुछ खरीदने या बेचने के उददेश्य से बाजार जाना । हाट भरना = बाजार में खरीद और बिक्री करनेवालों की भीड़ इकट्ठी होना ।

३. बाजार लगने का दिन ।

हाट ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. मैनफल वृक्ष और उसका फल । विशेष-दे॰ 'मैनफल' ।

२. कमल की जड़ । भसीड़ ।

३. कमल का छत्ता [को॰] ।