झूठ

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हिन्दी[सम्पादन]

संज्ञा[सम्पादन]

पु॰

  1. बात जो सच नहीं है

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विशेषण[सम्पादन]

  1. सच नहीं होना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

झूठ ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ अयुक्त, प्रा॰ अजुत्त अथवा देशी झुठ्ठ] वह कथन जो वास्तविक स्थिति के विपरीत हो । वह बात जो यथार्थ न हो । सच का उलटा । क्रि॰ प्र॰— करना । — बोलना । मुहा॰— झूठ सच करना= निंदा करना । शिकायत करना । झूठ का पुल बाँधना= लगातार एक के बाद एक झूठ बोलते जाना । झूठ सच जोड़ना= दे॰ 'झूठ सच कहना' । यौ॰— झूठ का पुतला= भारी झूठा । एकदम असत्य बातें कहने— वाला । झूठमूठ । झूठसच ।

झूठ ^२ वि॰ [हिं॰] दे॰ 'झूठा' ।—(क्व॰) । उ॰— मुख संपति दारा सुत हय गय झूठ सबै समुदाइ । छन भंगुर यह सबै स्याम बिनु अंत नाहिं सँग जाइ ।— सूर॰, १ ।३१७ ।

झूठ ^३ † संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ जूठ] दे॰ 'जूठन' ।