शुक्र

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हिन्दी[सम्पादन]

संज्ञा[सम्पादन]

पु.

  1. दूसरा ग्रह (बुध के बाद और धरती से पहले)

अनुवाद[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

शुक्र ^१ वि॰ [सं॰]

१. देदीप्यमान । चमकीला ।

२. स्वच्छ । उज्वल ।

शुक्र ^२ संज्ञा पुं॰

१. अग्नि ।

२. एक बहुत चमकोला ग्रह या तारा जो पुराणनुसार दैत्यों का गुरु कहा गया है । विशेष—आधुनिक ज्योतिर्विज्ञान के अनुसार इसका व्यास ७०० मील है । यह पृथ्वी से सबसे अधिक निकट है; एक करोड़ कोस से कुछ ही अधिक दूर है । सूर्य से इसकी दूरी तीन करोड़ पैतीस लाख कोस है । इसका पक्ष-भ्रमण-काल २२५ दिनों का है अर्थात् इसका एक दिन रात हमारे २२५ दिनों के बराबर होता है । बुध के समान यह ग्रह भी प्रधान युति के पीछे पश्चिम में निकलता है और पूर्व की ओर बढ़ता हुआ लघु युति के समय लुप्त हो जाता है । इसमें वायु और जल दोनों का होना अनुमान किया गया है । इसका पृष्ठ बादलों से ढका रहता है । फलित ज्योतिष में इसका वर्ण जल के समान श्यामल कहा गया है और यह धान्य का स्वामी, जलभूमिचारी और स्निग्ध रुचिवाला माना गया है । पुराणों में शुक्र दैत्यों के गुरु और भृगु के पुत्र कहे गए हैं । ऐसी कथा है कि दैत्यराज बलि जब वामन को पृथ्वी दान करने लगे, तब वे उन्हें रोकने के विचार से उस जलपात्र की टोंटी में जा बैठे जिसमें संकल्प करने का जल था । उस समय सींक से गोदने पर इनकी एक आँख फूट गई । इसी कारण काने आदमी को लोग हँसी में शुक्राचार्च कह दिया करते हैं । विशेष दे॰ 'शुक्राचार्य' । पर्या॰—दैत्यगुरु । काव्य । उशना । भार्गव । कवि । सित । भृगु । षोड़शार्चि । श्वेतरथ ।

३. ज्येष्ठ मास । जेठ (यह कुवेर का भंडारी कहा गया है) ।

४. स्वच्छ और शुद्ध सोम ।

५. चित्रक वृक्ष । चीता ।

६. सार । रस । सत ।

७. नर जीवों के शरीर की वह धातु जिसमें माता के अंड को गर्भित करनेवाली घटक या अणु रहते हैं । वीर्य । मनी ।

८. बल । सामर्थ्य । पौरुष । शक्ति ।

९. सप्ताह का छठा दिन जो बृहस्पतिवार के बाद और शनिवार से पहले पड़ता है । १० आँख की पुतली का एक रोग । फूला । फूली ।

११. एरंड वृक्ष । अंडी का पेड़ । रेंड़ ।

१२. स्वर्ण । सोना ।

१३. धन । दौलत । संपत्ति ।

१४. जल (को॰) ।

१५. चमकीला- पन (को॰) ।

१६. गायत्री मंत्र में आनेवाली प्रथम तीन (भूः भुवः स्वः) व्याहृतियाँ (को॰) ।

१७. वशिष्ठ के एक पुत्र का नाम (को॰) ।

१८. तीसरे मनु के एक पुत्र का नाम (को॰) ।

१९. सत्कार्य । सत्कर्म (को॰) ।

शुक्र ^३ संज्ञा पुं॰ [अ॰] धन्यवाद । कृतज्ञता प्रकाश । जैसे,—खुदा का शुक्र है ।

यह भी देखिए[सम्पादन]