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संस्कृत

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

संस्कृत ^१ वि॰ [सं॰]

१. संस्कार किया हुआ । शुद्ध किया हुआ ।

२. परिमार्जित । परिष्कृत ।

३. धो माँजकर साफ किया हुआ । निखारा हुआ ।

४. पकाया हुआ । सिझाया हुआ ।

५. सुधारा हुआ । ठीक किया हुआ । दुरुस्त किया हुआ ।

६. अच्छे रूप में लाया हुआ । सँवारा हुआ । सजाया हुआ । आरास्ता ।

७. जिसका उपनयन आदि संस्कार हुआ हो ।

८. श्रेष्ठ । सवोंत्तम (को॰) ।

९. अभिमंत्रित । पुनीत किया हुआ ।

संस्कृत ^२ संज्ञा स्त्री॰ भारतीय आर्यों की प्राचीन साहित्यिक भाषा । पुरानी आर्यो की लिखने पढ़ने की उच्च भाषा । देववाणी । विशेष—विद्वानों की राय है कि वेदों (संहिताओं) की भाषा अत्यंत प्राचीन है । यह सुदूर अतीत में कभी बोलचाल की आर्यों की भाषा थी । जब उस भाषा में परिवर्तन होने लगा और धीरे धीरे उसके समझनेवाले कम होने लगे, तब संहिताओं का संकलन हुआ । बाद में यास्क ने निघंटु आदि बनाकर उस मंत्र- भाग की भाषा को विद्वानों में सुरक्षित रखा । पीछे जो आर्य- भाषा प्रचलित होती गई, उसपर क्रमशः द्रविड़ आदि आर्येतर भारतीय भाषाओं का प्रभाव पड़ता गया । अतः इस प्रचलित या लौकिक आर्यभाषा को शुदध, व्यवस्थित और सुरक्षित रखने का इंद्र, शाकल्य शाकटायन, पाणिनि आदि वैयाकरणों ने प्रयत्न किया । पाणिनि आदि वैयाकरणों ने दूर दूर तक फैले हुए यथासंभव सब प्रयोगों और रूपों को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक आर्यभाषा का व्याकरणनिर्माण किया । यही 'भाषा' या लौकिक संस्कृत कहलाई जो रूप स्थिर हो जाने के कारण साहित्य की सर्वमान्य भाषा हुई और अबतक चली आ रही है । लोगों की बोलचाल की भाषा में अंतर पड़ता रहा, पर यह संस्कृत ज्यों की त्यों रह ी और विद्वानों तथा शिष्यों की परंपरा द्वारा अपने शुद्ध रूप में व्यवहृत तथा प्रयुक्त होती चली आ रही है । आज भी उसमें साहित्य रचा जा रहा है और पत्र-पत्रिकाएँ आदि निकलती है बोलचाल की भाषाएँ पाली, प्राकृत, अपभ्रंश आदि प्राकृतिक कहलाईं और यह संस्कार की हुई प्राचीन भाषा संस्कृत या अमरभाषा कहलाई ।

संस्कृत ^३ संज्ञा पुं॰

१. व्याकरण के नियमों द्वारा व्युत्पन्न शब्द ।

२. द्विजाति का वह व्यक्ति जिसका संस्कार हो गया हो ।

३. विद्वान् पुरुष ।

४. धार्मिक परंपरा ।

५. बलि । आहुति [को॰] ।

नाम

स्त्री.

  1. भारत की एक प्राचीन भाषा हैं ।

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