सोलह

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हिन्दी[सम्पादन]

विशेषण[सम्पादन]

संज्ञा[सम्पादन]

  1. संख्या १६

पंद्रह सत्रह

अनुवाद[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

सोलह ^१ वि॰ [सं॰ षोड़श, प्रा॰ नसोलस, सोलह] जो गिनती में दस से छह अधिक हो । षोडश ।

सोलह ^२ संज्ञा पुं॰ दस और छह की संख्या या अंक जो इस प्रकार लिखा जाता है—१६ । मुहा॰—सोलह आने, सोलहो आने = संपूर्ण । पूरा पूरा । जैसे,— तुम्हारी बात सोलहो आने सही है । उ॰—अरे न सोलह आने तो पाई हो ।—प्रेमधन, पृ॰४५८ । सोलह सोलह गंडे सुनाना = खूब गालियाँ देना ।

सोलह सिंगार संज्ञा पुं॰ [हिं॰ सोलह + सिंगार] सिंगार की एक विधि जिसमें१६उपकरण हैं । विशेष—इसके अंतर्गत अंग में उबटन लगाना, नहाना, स्वच्छ वस्त्र धारण करना, बाल सँवारना, काजल लगान ा सेंदुर से माँग भरना, महावर लगाना, भाल पर तिलक लगाना, चिबुक पर तिल बनाना, मेंहदी लगाना, सुगंध लगाना, आभूषण पहनन्, फूलों की माला पहनना, मिस्सी लगाना, पान खाना और होठों को लाल करना ये सोलह बातें हैं । (विशेष विवरण के लिये 'श्रृंगार' और 'षोडश श्रृंगार' शब्द भी देखिए) ।

यह भी देखिए[सम्पादन]