दो

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हिन्दी[सम्पादन]

विशेषण[सम्पादन]

संज्ञा[सम्पादन]

संख्या

अनुवाद[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

दो वि॰ [सं॰ द्वि] एक और एक । तीन से एक कम । मुहा॰—दो एक = कुछ । थोडे़ । जैसे,—उनसे दो एक बातें करके चले आवेंगे । दो गाल हँसने बोलने का मौका मिलना = दो चार बातें कर लेने का सुअवसर प्राप्त करना । उ॰— अब्बासी—(अपने दिल में) खुदा करें आएँ । दो गाल हँसने बोलने का मौका मिले ।—फिसाना॰, भा॰ ३, पृ॰ १४० । (आँखें) दो चार होना = सामना होना । उ॰—दो चार अ ब तुझसे क्यों कर होए हमचश्मी के दावे से ।—कविता कौ॰, भा॰ ४, पृ॰ ४३ । दो दिन का = बहुत ही थोडे़ समय का । दो दो दाने की फिरना = बहुत ही दरिद्र दशा में दूसरों से माँगते हुए फिरना । दो दो बातें करना = संक्षिप्त प्रश्नोत्तर करना । कुछ बातें पूछना और कहना । दो नार्वो पर पैर (पाँव) रखना = दो पक्षों का अवलंबन करना । दो प्दर्थों का आश्रय लेना । उ॰—दुइ तरंग दुइ नाव पावँ धरि ते कहि कवन न मूठे ।—सूर (शब्द॰) । किसके दो सिर हैं ? = किसे फालतू सिर है ? किसमें असंभव सामर्थ्य है । कौन इतना समर्थ है कि मरने से नहीं डरता । उ॰—अनहित तोर प्रया केइ कीन्हा । केहि दुइ सिर, केहि जम जह लीना ?—तुलसी (शब्द॰) ।

यह भी देखिए[सम्पादन]