बिल्ली

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बिल्ली

हिन्दी[सम्पादन]

संज्ञा[सम्पादन]

स्त्री॰

अनुवाद[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

बिल्ली संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ बिडाल, हिं॰ बिलार] केवल पंजों के बल चलनेवाले पूरा तलवा जमीन पर न रखनेवाले मांसाहारी पशुओं में से एक जो सिंह, व्याघ्र आदि की जाति का है और अपनी जाति में सबसे छोटा है । बिल्ली नाम इस पशु की मादा का है पर यही अधिक प्रसिद्ध है । इसका प्रधान भक्ष्य चूहा है । विशेष—इसकी लबाई एक हाथ से कम होती है और पूँछ डेढ़ दो बालिश्त की होती है । बिल्ली की जाति के और पशुओं के जो लक्षण हैं, वे सब बिल्ली में भी होते हैं—जैसे टेढ़े पैने नख जो गद्दी के भीतर छिपे रहते हैं और आक्रमण के समय निकलते हैं; परदे के कारण आँख की पुतली का घटना बढ़ना; सिर की बनावट नीचे की ओर भुकती हुई; २८ या ३० दाँतों में केवल नाम मात्र के लिये एक चौभर होना; बिना आहठ दिए चलकर शिकार पर झपटना, इत्यादि, इत्यादि । कुत्तों आदि के समान बिल्ली की नाक में भी घ्राणग्राही चर्म कुछ ऊपर होता है । इससे वह पदार्थों को बहुत दूर से सूँघ लेती है । भारतवर्ष में बिल्ली के दो भेद किए जाते हैं, एक बनबिलाव और दूसरा पालतू बिल्ली । वास्तव में दोनों प्रकार की बिल्लियाँ बस्ती में या उसके आसपास ही पाई जाती हैं । बनबिलाव का रंग स्वाभाविक भूरा, कुछ चित्तीदार होता है और वह पालतू से क्रूर और बलिष्ठ होता है । पालतू बिल्लियाँ सफेद, काली, बादामी, चितकबरी कई रंग की होती हैं । उनके रोएँ भी मुलायम होते हैं । पालतू बिल्लियों में अगोरा या पारसा बिल्ली बहुत अच्छी समझी जाती है । वह डोल में भी बडी होती है और उसके रोएँ भी घने, बड़े बड़े और मुलायम होते हैं । ऐसी बिल्लियाँ प्रायः काबुली अपने साथ बेचने के लिये लाते हैं । बिल्ली बहुत दिनों से मनुष्यों के बीच रहती आई है । रामायण, मनुस्मृति , अष्टाध्यायी सबमें बिल्ली का उल्लेख मिलता है । मनुस्मृति में बिल्ली का जूठा खाने का निषेध है । बिल्ली पहले पहल कहाँ पाली गई, इसके संबंध में कुछ लोगों का अनुमान है कि पहले पहल प्राचीन मिस्रवालों ने बिल्ली पाली क्योंकि मिस्र में जिस प्रकार मनुष्यों की मोमियाई लाशें मिलती हैं, उसी प्रकार बिल्ली की भी । मिस्रवाले जिस प्रकार मनुष्यों के शव मसाले से सुरक्षित रखते थे उसी प्रकार पालतू जानवरें के भी । पश्चिम के तथा अन्य अनेक देशों में इनको पालतू जानवर के रूप में भी रखा जाता है ।

बिल्ली लोटन संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ बिल्ली + लोटना] एक प्रकार की बूटी जिसके विषय में प्रसिद्ध है कि उसकी गंध से बिल्ली मस्त होकर लोटने लगती है । यह दवा में काम आती है । यूनानी हकीम इसे 'बादरंजबोया' कहते हैं ।

यह भी देखिए[सम्पादन]