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माता

विक्षनरी से

संज्ञा

स्त्री.

अनुवाद

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

माता ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ मातृ]

१. जन्म देनेवाली स्त्री । जननी । उ॰— जौ वालक कह तोतरि बाता । सुनहिं मुदित मन पितु अरु माता ।— तुलसी (शब्द॰) ।

२. कोई पूज्य या आदरणीय बड़ी स्त्री । उ॰— दै द्रव्य कह्यो माता सिधाव ।— पृ॰ रा॰, १ । ३७९ ।

३. गौ ।

४. भूमि ।

५. विभूति ।

६. लक्ष्मी ।

७. खेती ।

८. इंद्रवारुणी ।

९. जटामासी ।

१०. शीतला । चेचक ।

११. आखुकर्णी (को॰) ।

१२. जीव (को॰) ।

१३. आकाश (को॰) ।

१४. दुर्गा (को॰) ।

१५. शिव वा स्कंद की मातृकाएँ जिनकी संख्या कुछ लोगों के मातानुसार सात है, कुछ के अनुसार आठ और कुछ लोगों के मत में १६ कही गई है ।

माता ^२ वि॰

१. नाप या माप करनेवाला ।

२. निर्माणकर्ता । बनानेवाला ।

३. ठीक ठीक जानकारी रखनेवाला [को॰] ।

माता ^३ वि॰ [सं॰ मत्त] [स्त्री॰ माती] मदमस्त । मतवाला । उ॰— (क) आठ गाँठ कोपीन के साधु न मानै शंक । नाम अमल माता रहै गिनै इंद्र को रंग ।—कबीर (शब्द॰) । (ख) जोर जगी जमुना जलधार में धाम धेसी जल केल को माती ।— पद्माकर (शब्द॰) । (ग) चला सोनारि साहाग सोहाती । औ कलवारि प्रेममद माती । -जायसी (शब्द॰) ।

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