अपर

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हिन्दी

विशेषण

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  1. जो पर न हो। पहला।
  2. पिछला। जिससे कोई पर न हो।
  3. अन्यदूसराभिन्नकोई और
    उ॰ – अपर नाम उड़ुगण बिमल,बसे भक्त उर व्योम ।— भक्तमाल (श्री॰) पृ॰ ४९८।
  4. जिससे बढ़कर या बराबर का अन्य न हो (को॰)।
  5. जो दूसरा या पराया न हो। स्व- पक्षीय। अपना।
    उ॰—को गिनै अपर पर को गिनै । लोह छोह छक्के बरन ।—पृ॰ रा॰ ३३।२६।
  6. अश्रेष्ठ। जो पर अर्थात् श्रेष्ठ न हो। निकृष्ट। साधारण (को॰)।
  7. पश्चिमीपश्चिम दिशा का (को॰)।
  8. दूर का। दूरवर्ती। जो पास न हो (को॰)।

संज्ञा

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  1. हाथी का पिछला भाग, जंघा, पैर आदि।
  2. रिपु। शत्रु।
  3. न्यायशास्त्र में सामान्य के दो भेदे में से एक।
  4. भविष्यत् काल या उस काल में किया जानेवाला कार्य [को॰]।

हिन्दी

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अपर ^१ वि॰ [सं॰]

१. जो पर न हो । पहला । पूर्व का ।

२. पिछला । जिससे कोई पर न हो ।

३. अन्य । दूसरा । भिन्न । और । उ॰— अपर नाम उड़ुगण बिमल,बसे भक्त उर व्योम ।— भक्तमाल (श्री॰) पृ॰ ४९८ ।

४. जिससे बढ़कर या बराबर का अन्य न हो (को॰) ।

५. जो दूसरा या पराया न हो । स्व- पक्षीय । अपना । उ॰—को गिनै अपर पर को गिनै । लोह छोह छक्के बरन ।—पृ॰ रा॰ ३३ ।२६ ।

६. अश्रेष्ठ । जो पर अर्थात् श्रेष्ठ न हो । निकृष्ट । साधारण (को॰) ।

७. पश्चिमी । पश्चिम दिशा का (को॰) ।

८. दूर का । दूरवर्ती । जो पास न हो (को॰) ।

अपर ^२ संज्ञा पुं॰

१. हाथी का पिछला भाग, जंघा, पैर आदि ।

२. रिपु । शात्रु ।

३. न्यायशास्त्र में सामान्य के दो भेदे में से एक ।

४. भविष्यत् काल या उस काल में किया जानेवाला कार्य [को॰] ।