हाथी

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हाथी[सम्पादन]

संज्ञा[सम्पादन]

एक अफ़्रीकी हाथी..

हाथी

  1. एक स्तनधारी प्राणी
  2. शतरंज का खेल का एक मोहरा

पर्यायवाची[सम्पादन]

अनुवाद[सम्पादन]

प्राणी[सम्पादन]

यह भी देखिए[सम्पादन]

Question:-Diffrence between mass and weight.Advances Section = उधार अनुभाग

हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

हाथी ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ हीस्तन्, हस्ती, प्रा॰ हत्थी] [स्त्री॰ हथिनी] एक बहुत बड़ा स्तनपायी जंतु जो सूँड़ के रूप में बढ़ी हुई नाक के कारण और सब जानवरों से विलक्षण दिखाई पड़ता है । विशेष—यह जमीन से ७-८ हाथ ऊँचा होता है और इसका धड़ बहुत चौड़ा और मोटा होता है । धड़ के हिसाब से इसकी टाँगें छोटी और खंभे की तरह मोटी होती हैं । पैर के पंजे गोल चक्राकार होते हैं । आँखें डीलडौल के हिसाब से छोटी और कुछ ऊदापन लिए होती हैं । जीभ लंबी होती है । पुँछ के छोर पर बालों का गुच्छा होता है । इसकी सबसे बड़ी विशेषता है नाक जो एक गावदुम नली के समान जमीन तक लटकती रहती है और सूँड़ कहलाती है । यह सूंड़ हाथ का भी काम देती है । इससे हाथी छोटी से छोटी वस्तु जमीन पर से उठा सकता है और पेड़ की बड़ी बड़ी डालों को तोड़कर मुँह में डाल लेता है । इससे वह अपने शत्रुओं को लपेटकर पटक देता या चीर डालता है । सूँड़ में पानी भरकर वह अपने ऊपर डालता भी है । नर हाथी के मुखविवर के दोनों छोरों पर हाथ डेढ़ हाथ लंबे और ५-६ अंगुल चौड़े गोल डडे की तरह के सफेद चमकीले दाँत निकले होते हैं जो केवल दिखावटी होते हैं । इन दाँतों का वजन बहुत अधिक—७५ से १७५ सेर तक होता है । इसके कान गोल सूप की तरह के होते हैं । मस्तक चोड़ा और बीच से कुछ विभक्त दिखाई पड़ता है । सिरकी हड़िडयाँ जालीदार होती हैं । पसलियों बीस जोड़ी होती हैं । हाथी पृथ्वी के गरम भागों में —विशेषतः हिंदुस्तान और अफ्रिका में —पाए जाते हैं । अफ्रिका और हिंदुस्तान के हाथियों में कुछ भेद होता है । अफ्रिका के हाथी के दो निकले हुए दाँतों के सिवा चार दाढ़ें होती हैं और हिंदुस्तानी के दो ही । अफ्रिका के हाथी का मस्तक गोल और कान इतने बड़े होते हैं कि सारे कंधे को ढँके रहते हैं । बरमा और स्याम की ओर सफेद हाथी भी पाए जाते हैं जिनका बहुत अधिक आदर और मोल होता है । हिंदुस्तान के हाथियों के भी अनेक भेद होते हैं; जैसे, — दँतैला, मकना (कद में छोटा और बिना दाँत का), पलँगदाँत, गनेसा, सूअरदंता, पथरदंता, सँकरिया, अंकुसदंता या गुंडा इत्यादि । कोई कोई हिंदुस्तानी हाथी के दो प्रधान भेद करते हैं —एक कमरिया, दूसरा मिरगी या शिकारी । कमरिया का शरीर भारी और सूँड़ लंबी होती है । मिरगी कुछ अधिक ऊँचा और फुरतीला होता है और उसकी सूँड़ भी कुछ छोटी होती है । सवारी के लिये कमरिया हाथी अधिक पसंद किया जाता है और शिकार के लिये मिरगी । हाथी गहरे जंगलों में झुंड बाँधकर रहते हैं और मनुष्य की तरह एक बार में एक बच्चा देते हैं । हाथी की बाढ़ १८ से २४ वें वर्ष तक जारी रहती है । पाले हुए हाथी सौ वर्ष से अधिक जीते हैं । जंगली और भी अधिक जीते होंगे । हिंदुस्तान में हाथी रखने की रीति अत्यंत प्राचीन काल से है । प्राचीन समय में राजाओं के पास हाथियों की भी बड़ी बड़ी सेनाएँ रहती थीं जो शत्रु के दल में घुसकर भयंकर संहार करती थीं । हाथी रखना अमीरी का बड़ा भारी चिह्न समझा जाता है । अफ्रिका के जंगली इसका मांस भी खाते हैं । हाथी पकड़ने के कई उपाय हैं । अधिकतर गड्ढा खोदकर हाथी फँसाए जाते हैं । यौ॰—हाथीखाना । हाथीनाल । हाथीदाँत । हाथीनशीन । हाथीपाँव । मुहा॰—हाथी सा=बहुत मोटा । अत्यंत स्थूलकाय । हाथी की राह=आकाशगंगा । डहर । (दरवाजे पर) हाथी झूमना= अत्यंत ऐश्वर्यशाली होना । बहुत अमीर होना । हाथी पर चढ़ना=बहुत अमीर होना । हाथी पर चढ़ाना=अत्यंत आदर संमान करना । हाथी बाँधना=बहुत अमीर होना । जैसे,—तुम्हीं बेईमानी करके हाथी बाँध लोगे ? निशान का हाथी=सेना या जुलूस में वह हाथी जिसपर झंडा और डंका रहता है । हाथी के संग गाँड़े खाना=बलवान की बराबरी करना ।

हाथी पु ^२ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ हाथ+ई] हाथ का सहारा । करावलंब । उ॰—दस्तगीर गाढ़े कर साथी । वह अवगाह दीन्ह तेहि हाथी । —जायसी (शब्द॰) ।