नर

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

नर ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. विष्णु ।

२. शिव । महावेद ।

३. अर्जुन ।

४. धर्मराज और दक्षप्रजापति की एक कन्या से उत्पन्न एक पौराणिक ऋषि । विशेष—पौराणिक गाथानुसार यह ईश्वर के अंशावतार माने जाते थे । ये और नारायण दोनों भाई थे ।—विशेष—दे॰ 'नरनारायण' ।

५. एक देव योनि ।

६. पुरुष । मर्द । आदमी ।

७. एक प्रकार का क्षुप । विशेष—इसे रायकपुर, रोहिस, सेंधिया और गंधेल भी कहते है । विशेष—दे॰ 'गंधेल' ।

८. वह खुँटी जो छाया आदि जानने के लिये खड़े बल गाड़ी जाती है । शंकु ।

९. सेवक ।

१०. गय राक्षस के पुत्र का नाम ।

११. सुधृति के पुत्र का नाम ।

१२. भवन्मन्य के पुत्र का नाम ।

१३. दोहे का एक भेद जिसमें १५ गुरु और १८ लघु होते है । जैसे—विश्वंभर नामै नहीं, मही विश्व में नाहिं । दुइ मँह झुठी कौन है, यह संशय जिय माहिं ।—(शब्द॰) ।

१४. छप्पय का एक भेद जिसमें १० गुरु और १३ लघु होते हैं ।

१५. मनुष्य । आदमी (को॰) ।

१६. शतरंज का मोहरा (को॰) ।

१७. परम पुरुष । पुराण पुरुष (को॰) ।

१८. आदमी की लंबाई का परिमाण । पुरुष ।

१९. घोड़ा (को॰) ।

२०. जीवात्मा (को॰) ।

नर ^२ वि॰ जो (प्राणी) पुरुष जाति का हो । मादा का उलटा ।

नर ^३ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ नल] नल जिसमें से होकर पानी जाता है । उ॰—नर की अरु नर नीर की एकै गति कर जोइ । जेतो नीचे ह्वै चले तेतो ऊँचे होइ ।—बिहारी (शब्द॰) ।

नर ^४ संज्ञा पुं॰ [हिं॰] दे॰ 'नरकट' ।

नर ^५ संज्ञा पुं॰ [सं॰ नीर] जल । पानी । उ॰—पुत्री वनिक सराप दिय भर पुहकर नर लोइ । असुर होई बीसल नृपति नरपल- चारी सोई ।—पृ॰ रा॰, १ । ४९१ ।