पिंगला

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पिंगला संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ पिङ्गला]

१. हठ योग और तंत्र में जो तीन प्रधान नाड़ियाँ मानी गई हैं उनमें से एक । विशेष—दस नाड़ियों में से इला, पिंगला और सुषुम्ना ये तीन प्रधान मानी गी हैं । शरीर के बाँएँ बाग में पिंगला नाड़ी होती है । ये तीनों क्रमशः ब्रह्मा, विष्णु और शिव स्वरुपिणी हैं । तंत्रसार में लिखा है, इला नाड़ी में चंद्र और पिंगला नाड़ी में सुर्य का निवास रहता है । जिस समय पिंगला नाड़ी कार्य करती है उस समय साँस दाहिने नथने से निकलती है । प्रणतोषिणी में बहुत से कार्य गिनाए गए हैं जो यदि पिंगला नाड़ी के कार्यकाल में किए जायँ तो शुभ फल देते हैं—जैसे, कठिन विषयों का पठनपाठन, स्त्रीप्रसंग, नाव पर चढ़ना, सुरापान, शत्रु के नगर ढाना, पशु, बेचना, जुई खेलना, इत्यादि ।

२. लक्ष्मी का नाम ।

३. गोरोचन ।

४. शीशम का पेड़ ।

५. एक चिड़िया ।

६. राजनीति ।

७. दक्षिण दिग्गज की स्त्री ।

८. एक धातु । पीतल (को॰) ।

९. एक वेश्या का नाम । विशेष—इसकी कथा भागवत में इस प्रकार है । विदेह नगर में पिंगला नाम की एक वेश्या रहती थी । उसने एक दिन एक सुंदर धनिक को जाते देखा । उसके लिये वह बेचैन हो उठी पर वह न आया । रात भर वह उसी की चिंता में पड़ी रही । अंत में उसने विचार किया कि मैं कैसी नासमझ हुँ कि पास में कांत रहते दुर के कांत के लिये मर रही हुँ । इस प्रकार उसे यह ज्ञान हो गया कि आशा ही सारे दुःखों का मुल है । जिन्होंने सब प्रकार की आशा छोड़ दी है वे ही सुखी हैं । उसने भगवान् के चरणों में चित्त लगाया और शांति प्राप्त की । महाभारत में भी जहाँ भीष्म ने युधिष्ठिर को मोक्ष धर्म का उपदेश किया है वहाँ इस पिंगला वेश्या का उदाहरण दिया है । सांख्यसुत्र में भी 'निराशः सुखी पिंगलावत्' आया है ।