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हिन्दी वर्णमाला का पाँचवाँ अक्षर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर



१. हिंदी वर्णामाला का पाँचवाँ अक्षर । इसका उच्चारणस्थान ओष्ठ है । यह तीव मुख्य स्वरीं में है । हसके ह्नस्व, दीर्घ, प्लुत तथा सानुनासिक और निरनुनासिक भेद से १८ भेद होने हैं । 'उ' को गुणा करने से 'ओ' और वूद्धि करने से 'औ' होता है ।

उ ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. ब्रह्ना ।

२. नर । उ॰—नर, नारायण और विधि ये तीनों मम केस । उ, अ, आ अलक विभाम ते भाख्यो यह परमेस । (शब्द॰) ।

३. चंद्रमंडल (को॰) ।

उ ^२पु अव्य॰ भी । उ॰—औरउ एक कहौं निज चोरी । सुनु गिरिजा अति दृढ़ मति तोरी ।—तुलसी (शब्द॰) ।