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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

र हिंदी व्रणमाला का सत्ताईसवाँ व्यंजन वर्ण जिसका उच्चारण जीभ के अगले भाग को मूर्धा के साथ कुछ स्पर्श कराने से होता है । यह स्पर्श वर्ण और ऊष्म वर्ण के मध्य का वर्ण है । इसका उच्चारण स्वर और व्यंजन का मध्यवर्ती है; इसलिये इसे अंतस्थ वर्ण कहते हैं । इसके उच्चारण में संवार, नाद और घोष नामक प्रयत्न होते हैं ।

र ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. पावक । अग्नि ।

२. कामाग्नि ।

३. सितार का एक बोल ।

४. जलना । झुलसना ।

५. आँच । ताप । गरमी ।

६. सोना । स्वर्ण (को॰) ।

७. वर्ण (को॰) ।

८. चालीस की संख्या (को॰) ।

९. छंदशास्त्र में एक गण । रगण जो मध्यलघु होता है (को॰) ।

र ^२ वि॰ तीक्ष्ण । प्रखर ।