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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ध हिंदी या वर्णमाला का उन्नीसवाँ व्यंजन और तवर्ग का चौथा वर्ण जिसका उच्चारण स्थान दंतमूल है । इसके उच्चारण में आभ्यंतर प्रयत्न आवश्यक होता है और जीभ की नोक ऊपरी दाँतों की जड़ में लगानी पड़ती है । बाह्य प्रयत्न संवार, नाद, घोष महाप्राण हैं ।

ध ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. ब्रह्मा ।

२. कुबेर ।

३. गुण । नैतिक गुण ।

४. धैवत स्वरसंकेत (संगीत) ।

५. धर्म ।

६. धन । संपत्ति [को॰] ।

ध ^२ [प्रत्य॰] धारण करनेवाला [को॰] ।